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120 संगठन, विपक्ष, आंदोलनजीवी और पालतू पत्रकार… चुनावी नतीजों से पहले देश को जलाने की प्लानिंग, मोदी जीते तो कोर्ट से चुनाव रद्द करवाने की हो रही साजिश

YouTuber अजीत अंजुम के चैनल पर खुद को पत्रकार बताने वाली नीलू थॉमस व्यास ने कुछ ऐसे दावे किए हैं, जो डराने वाले हैं। खुद को ‘मॉब लिंचिंग’ का विरोधी बता कर मॉब को गाली देने वाला गिरोह अब लोकतंत्र की बजाय भीड़तंत्र पर भरोसा दिखा रहा है, अराजकता के लिए समाज को सुलगा रहा है। ये कोई नई बात नहीं है, शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन को देखें या राहुल गाँधी द्वारा विदेश में दिए गए बयानों को भी देखें तो स्पष्ट पता चलता है कि इसके पीछे एक पैटर्न है।

जैसा कि हमें पता है, मंगलवार (4 जून, 2024) को लोकसभा चुनाव की मतगणना होनी है और इसकी पूरी संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार सत्ता में लौट कर आएँगे। विपक्ष ने INDI गठबंधन तो बनाया, लेकिन नीतीश कुमार की JDU, जयंत चौधरी की RLD और ओमप्रकाश राजभर की SBSP गठबंधन से बाहर निकल आई। विपक्षी नेताओं में तेजस्वी यादव को छोड़ कर शायद ही किसी को जमीन की ख़ाक छानते हुए देखा गया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 200 से अधिक रैली-रोडशो किए और 80 से अधिक मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू दिया।

नीलू व्यास थॉमस इस वीडियो में कह रही हैं कि विपक्ष के जितने भी मतगणना एजेंट्स होंगे उन सबको प्रशिक्षण दिया जा रहा है, एग्जिट पोल्स से कैसे निपटा जाए इसकी भी तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि इसके अलावा एक बड़े जन-आंदोलन की तैयारी की जा रही है, अगर वोटों की चोरी पकड़ी जाती है तो इसे लेकर कोर्ट भी जाया जा सकता है और चुनाव भी रद्द कराया जा सकता है। यानी, इसका सीधा मतलब है कि विपक्ष लोकतंत्र के इस महापर्व को ख़ारिज कर देगा।

पोलिंग एजेंट को क्या प्रशिक्षण दिया जा रहा है? हो सकता है कि जिस तरह बिहार के छपरा में मतदान के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की बेटी और वहाँ से RJD प्रत्याशी रोहिणी आचार्य ने पहुँच कर हिंसा भड़का दी और 2 लोग मारे गए, ठीक उसी तरह का माहौल काउंटिंग सेंटरों पर भी बना दिया जाए। अगर ऐसा है तो सुरक्षा बलों को बहुत सतर्क रहने की ज़रूरत है। पोलिंग एजेंट्स को हिंसा भड़काने की ट्रेनिंग दी जा रही हो सकती है, उन्हें ये सिखाया जा रहा होगा कि तनाव कैसे पैदा किया जाए।

इसके लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करना है, इसमें विपक्ष पारंगत है। सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो डाले जाएँगे, कहीं कुछ तकनीकी गड़बड़ी भी हुई तो उसे कुछ ऐसा बड़ा बना कर दिखाया जाएगा जैसे देश भर में EVM हैककर लिए गए हों और मतगणना करने वाले कर्मचारियों को परेशान किया जाएगा। मतगणना वाले दिन सोशल मीडिया पर ऐसे प्रपंच को रोकने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। पोलिंग एजेंट्स कौन हैं, इसकी पहले से ही जाँच हो जानी चाहिए।

दूसरी बड़ी बात नीलू व्यास थॉमस कहती हैं कि Exit Polls से कैसे निपटा जाए, इसकी भी तैयारी चल रही है। बता दें कि शनिवार (1 जून, 2024) की शाम को अंतिम व 7वें चरण का मतदान समाप्त होने के साथ ही सभी टीवी चैनल और सर्वे करने वाले संस्थान अपना-अपना एग्जिट पोल जारी करेंगे और बताएँगे कि किस पार्टी को संभावित कितनी सीटें आ सकती हैं। स्पष्ट है, विपक्ष को नज़र आ रहा है कि इसमें भाजपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त करते हुए दिखाया जाएगा क्योंकि जमीनी हालात भी यही है।

देखिए, विपक्ष को इसका पूरा अंदाज़ा है कि उसकी हार हो रही है। TV चैनलों पर उनके प्रवक्ता एग्जिट पोल्स के दौरान ‘थेथरई’ करेंगे, मुद्दों को घुमाएँगे और भड़काऊ बातें करेंगे। सवाल कुछ और होगा, बौखलाहट में जवाब कुछ और दिया जाएगा। मीडिया संस्थानों के आँकड़ों को देख कर उन्हें ‘गोदी मीडिया’ बताया जाएगा। जिस तरह से प्रतिष्ठित पत्रकारों के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ‘चमचा’ और ‘चमची’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, महिलाओं तक को नीचा दिखा रहे हैं, उससे साफ़ है कि उनके प्रवक्ता एग्जिट पोल्स वाले दिन क्या करेंगे।

तीसरी बड़ी बात जो नीलू व्यास थॉमस ने कही है, वो ये है कि इस चुनाव को न्यायपालिका के दरवाजे तक भी ले जाया जा सकता है। ये भी कोई नई बात नहीं है। आप देखिए, अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने से लेकर राफेल लड़ाकू विमान सौदा तक, हर मामले को विपक्ष सुप्रीम कोर्ट तक लेकर गया। सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदे पर मोदी सरकार को क्लीन-चिट दी, बल्कि अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने वाले फैसले को भी बरकरार रखा।

AAP के अरविंद केजरीवाल और JMM के हेमंत सोरेन जैसे नेताओं को जेल हुई, इन सबको अदालत के आदेश के बाद ही न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इसके बाद अब न्यायपालिका पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए गए हैं। ध्यान दीजिए, ये आज से नहीं हो रहा। राम मंदिर का फैसला जब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने नवंबर 2019 में सुनाया था, तभी से सुप्रीम कोर्ट का बॉयकॉट किया जा रहा है। ‘बाबरी ज़िंदा है’ वाले ट्रेंड इसी मुहिम का हिस्सा हैं।

चौथी और सबसे अधिक खतरनाक बात जो नीलू थॉमस ने कही है, वो है ‘जन-आंदोलन’ की। विपक्ष के लिए जन-आंदोलन क्या होता है? 3 महीने तक शाहीन बाग़ की खातूनों द्वारा दिल्ली को बंधक बना कर रखा। 1 साल तक ‘किसान आंदोलन’ के नाम पर दिल्ली की सीमाओं पर कब्ज़ा कर के रखना। शाहीन बाग़ से कारोबारियों को 200 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जबकि ‘किसान आंदोलन’ से उत्तर भारत के राज्यों को प्रतिदिन 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ

शाहीन बाग़ उपद्रव के जरिए मुस्लिमों को भड़काया गया देश भर में CAA के खिलाफ झूठ फैला-फैला कर, ‘किसान आंदोलन’ का इस्तेमाल जाटों और सिखों को भड़काने के लिए किया गया। तभी ‘किसान आंदोलन’ को खालिस्तानियों ने हाईजैक कर लिया। गणतंत्र दिवस के दिन लाल किला पर चढ़ कर खालिस्तानी झंडा फहरा दिया गया, राष्ट्रध्वज तिरंगे का अपमान हुआ। वहीं शाहीन बाग़ के बाद दिल्ली में दंगे हुए, जिसने 50 से अधिक लोगों की जान ले ली। मंदिरों-स्कूलों को निशाना बनाया गया।

किसी भी देश के महाशक्ति बनने की पहली शर्त है – वहाँ के समाज का संपन्न होना। लोगों के पास पैसा ही नहीं होगा, तो देश महाशक्ति कैसे बनेगा। यही कारण है कि आन्दोलनों के नाम पर बार-बार राष्ट्रीय राजधानी को बंधक बनाया जाता है क्योंकि इससे एक तीर से 2 निशान साधते हैं – पहला, मीडिया की फुटेज खूब मिलती है, और दूसरा, कारोबारियों को अधिक घाटा होता है। कारोबार जितना घटेगा, सरकार को उतनी परेशानी होगी और विपक्ष को उतनी ही ख़ुशी मिलेगी।

और ‘जन-आंदोलन’ का अर्थ क्या है राहुल गाँधी के लिए? याद कीजिए, मई 2022 में लंदन में एक कन्क्लेव को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा था कि भाजपा ने पूरे भारत में केरोसिन तेल छिड़क रखा है और एक चिंगारी से पूरे देश में आग लग जाएगी। उन्होंने भारत में ध्रुवीकरण और मीडिया पर भाजपा के प्रभाव का दावा करते हुए कहा था कि भारत फ़िलहाल सही स्थान पर नहीं है। सोचिए, विदेश जाकर अपने देश के संबंध में इस तरह की बातें करने के पीछे और क्या मकसद रहा होगा?

अब आगे क्या साजिश है? 120 संगठनों, जो खुद को नागरिक संगठन बताते हैं, उन्होंने चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए भविष्यवाणी कर दी है कि मतगणना वाले दिन गड़बड़ी होगी। चुनाव आयोग को बदनाम करने के लिए इनलोगों ने 6 घंटे बैठक की, आगे और भी बैठकों की योजना है। ‘सिविल सोसाइटी’ के नाम पर अब दंगों की साजिश है। मतदान के सारे आँकड़े जारी किए जा रहे हैं, फिर भी झूठ बोला जा रहा है कि चुनाव आयोग डेटा नहीं दे रहा।

इन संगठनों में विपक्ष के नेता शामिल हैं, पूर्व अधिकारियों को इसमें रखा गया है। ये वही वर्ग है जो खुद को ‘बुद्धिजीवी’ बता कर कुछ भी बक देता था और लोग इनका यकीन कर लेते थे। अब इन्हें कोई नहीं सुन रहा। ध्रुव राठी जैसे यूट्यूबरों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बार-बार ‘तानाशाह’ बताया जाना इसी क्रम का हिस्सा है। जन-कल्याणकारी योजनाओं, इंफ़्रास्ट्रक्चर के कार्यों और विदेश में भारत की चमकती छवि को दबाने के लिए कुछ तो नकारात्मकता फैलानी होगी, विपक्ष यही करने में लगा हुआ है।

केजरीवाल ने अब माँगी नियमित जमानत, 1 जून को सुनवाई: कोर्ट ने ED से माँगा जवाब, एजेंसी ने बताया- दिल्ली के CM फिट, पंजाब में कर रहे हैं प्रचार

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली की राउज अवेन्यु कोर्ट में शराब घोटाला मामले में नियमित जमानत के लिए याचिका लगाई है। उन्होंने इसी के साथ स्वास्थ्य आधार पर सात दिनों के लिए अंतरिम जमानत की माँग करने वाली याचिका भी लगाई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनकी यह याचिका लेने से मना कर दिया था।

CM केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए राउज अवेन्यु कोर्ट ने प्रर्वतन निदेशालय (ED) को इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस दिया है। ED को अंतरिम और नियमित, दोनों जमानत के मामलों में जवाब दाखिल करना होगा।

CM केजरीवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ED ने अपनी आपत्तियाँ पेश की हैं। ED की तरफ से पेश हुए ASG SV राजू ने कहा, “वह हिरासत में नहीं है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। वह आज पंजाब में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उनकी सेहत ने उन्हें चुनाव प्रचार करने से नहीं रोका। उन्होंने आखिरी तारीख पर जमानत याचिका दायर की है ताकि हमें बहुत कम समय मिले। उनके आचरण के कारण उन्हें कोई भी राहत नहीं मिलनी चाहिए।”

अब केजरीवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 1 जून, 2024 को दोपहर 2 बजे होगी। इससे पहले बुधवार (29 मई, 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने CM केजरीवाल की अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में CM केजरीवाल ने 7 दिन अपनी जमानत बढ़ाने के लिए याचिका लगाई थी। उन्होंने माँग की थी कि 1 जून 2024 को खत्म हो रही उनकी अंतरिम जमानत को 8 जून, 2024 तक बढ़ा दिया जाए। उन्होंने कहा था कि यह 7 दिन की जमानत उन्हें स्वास्थ्य चेकअप करवाने के लिए चाहिए।

CM केजरीवाल वर्तमान में लोकसभा चुनावों के प्रचार के लिए दी गई अंतरिम जमानत पर हैं। उन्हें 10 मई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी, उन्हें 2 जून को आत्मसमर्पण करना है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत को बढ़ाने पर स्पष्ट किया था कि उनके पास नियमित जमानत के लिए अभी ट्रायल कोर्ट जाने का रास्ता बरकरार है। इसी के बाद केजरीवाल निचली अदालत में नियमित जमानत के लिए पहुँचे। उन्हें मार्च, 2024 में ED ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था।

3 साल में 4 गुना हुआ बैंक फ्रॉड, लेकिन नुकसान की रकम एक तिहाई हुई: RBI रिपोर्ट से खुलासा, प्राइवेट बैंक के कस्टमर झाँसे में ज्यादा आते हैं

वित्त वर्ष 2023-24 में पिछले तीन साल के मुकाबले लोगों के साथ होने वाले बैंक फ्रॉड के मामलों में लगभग चार गुने की वृद्धि हुई है लेकिन इनसे होने वाला नुकसान एक तिहाई हो गया है। सबसे अधिक धोखाधड़ी निजी बैंक में खाता रखने वालों के साथ हो रही है जबकि सबसे ज्यादा पैसा सरकारी बैंकों में खाता रखने वालों का लुट रहा है। यह जानकारी वित्त वर्ष 2023-24 के लिए जारी की गई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट में दी गई है।

RBI द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में लोगों से बैंक धोखाधड़ी के 36,075 मामले हुए। इस धोखाधड़ी के कारण लोगों का ₹13,930 करोड़ का नुकसान हुआ है। अगर इसकी तुलना 2021-22 से की जाए तो धोखाधड़ी के मामले चौगुने हो गए हैं। 2021-22 में 9,046 जबकि 2022-23 में धोखाधड़ी के कुल 13,564 मामले सामने आए थे।

2021-22 में लोगों का ₹45,358 करोड़ का नुकसान हुआ था, 2022-23 में यह नुकसान घट कर ₹26,127 करोड़ हो गया था। यानि बीते तीन वर्षों में धोखाधड़ी के मामले चार गुना बढ़ गए हैं जबकि उनमें लुटने वाली रकम तीन गुने घट गई है।

RBI ने यह भी बताया है कि बैंक धोखाधड़ी का सबसे अधिक शिकार निजी बैंकों में खाता रखने वाले लोग हो रहे हैं। 2023-24 में बैंक धोखाधड़ी का शिकार होने वाले 67.1% लोगों का खाता निजी बैंक में था। निजी बैंक में खाता रखने वाले 24,210 लोग 2023-24 में बैंक धोखाधड़ी का शिकार हुआ हैं। वहीं बैंक धोखाधड़ी का शिकार होने वाले 22.8% लोग सरकारी बैंकों में खाता रखते हैं। 2023-24 में ऐसे 10,507 लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके अलावा विदेशी बैकों में खाता रखने वाले 2,899 (8.1%) लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है।

जहाँ धोखाधड़ी के मामलों में फँसने वालों की संख्या निजी बैंक खाताधारकों की अधिक है, वहीं ज्यादा पैसा सरकारी बैंकों में खाता रखने वाले गँवा रहे हैं। निजी बैंक खाताधारकों ने 2023-24 के दौरान इन धोखाधड़ी में ₹3,170 करोड़ गँवाए हैं। सरकारी बैंक खाताधारकों ने 2023 के दौरान धोखाधड़ी के चलते ₹10,507 करोड़ रूपए गँवाए हैं। 2022-23 में भी सरकारी बैंक में खाता रखने वालों ने ₹18, 750 करोड़ गँवाए थे, जबकि निजी बैंकों में खाता रखने वालों का ₹6,159 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था।

यह भी रिपोर्ट में बताया गया है कि 80% धोखाधड़ी के मामले इन्टरनेट या कार्ड से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, सबसे ज्यादा पैसे का घपला लोन के मामलों में हुआ है। लोन के मामलों में 2023-24 में ₹11,772 करोड़ की धोखाधड़ी हुई है। यह धोखाधड़ी 2022-23 में ₹24,685 करोड़ की थी जबकि 2021-22 में लोन के ही मामलों में ₹43,272 करोड़ की धोखाधड़ी हुई थी।

गौरतलब है कि भारत में इन्टरनेट के प्रसार के साथ ही बैंक फ्रॉड के मामले लगातार बढ़े हैं। लोगों को आसान लोन, बड़े पुरष्कार या फिर उन्हें डरा धमका कर उनसे धोखाधड़ी हो रही है। RBI समेत सरकार ने लगातार इस पर कदम उठाए हैं। इसी कारण यह सामने आया है कि लोग अब अधिक मामलों को प्रशासन के पास ले जा रहे हैं। बीते कुछ समय में पैसों की वापसी भी हो रही है।

हिंदू लड़की+मुस्लिम लड़का… शादी वैध नहीं, इस्लामी कानून भी नहीं देता मान्यता: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का जोड़े को सुरक्षा देने से इनकार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम लड़के और हिंदू लड़की के बीच विवाह मुस्लिम कानून के अनुसार वैध विवाह नहीं है। कोर्ट ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत अंतर-धार्मिक विवाह के लिए पुलिस सुरक्षा की माँग को भी खारिज कर दिया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सोमवार (27 मई 2024) को ये फैसला सुनाया।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य बेंच में जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने ये फैसला सुनाया। जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने कहा कि मुस्लिम लड़के और हिंदू लड़की के बीच विवाह को मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत अनियमित (या फासिद) विवाह माना जाएगा, भले ही उन्होंने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह किया हो। हाई कोर्ट ने सोमवार (27 मई 2024) को अपने आदेश में कहा, “मुस्लिम कानून के अनुसार, किसी मुस्लिम लड़के का किसी ऐसी लड़की से विवाह वैध विवाह नहीं है जो मूर्तिपूजक या अग्निपूजक हो। भले ही विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हो, लेकिन वो विवाह वैध नहीं माना जाएगा, इसे अनियमित (फासीद) विवाह ही माना जाएगा।”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जबलपुर हाई कोर्ट ने एक हिंदू महिला और मुस्लिम पुरुष द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जिसमें हिंदू महिला और मुस्लिम पुरुष ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह की इच्छा जताई थी। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि वो दोनों अपना-अपना ही धर्म मानना जारी रखेंगे, जो एक-दूसरे का धर्म नहीं अपनाना चाहते। विवाह के बाद भी हिंदू महिला हिंदू धर्म को मानेगी और मुस्लिम पुरुष मुस्लिम धर्म को। ऐसे में इस जोड़े को पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए, ताकि वो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह का रजिस्ट्रेशन करा सकें।

वकील ने कोर्ट को ये भी बताया कि दो धर्मों के लोग पर्सनल लॉ के तहत विवाह नहीं कर सकतें, लेकिन स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत ये वैध होगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट को धार्मिक कृयाकलापों के तहत चुनौती तो नहीं दी जा सकती, लेकिन पर्सनल लॉ के तहत ऐसा विवाह मान्य नहीं होगा। ऐसे में ये विवाह एक अनियमित (फसीद) विवाह होगा। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले (मोहम्मद सलीम और अन्य बनाम शम्सुद्दीन) का रेफरेंस दिया।

हाई कोर्ट ने कहा, “जो विवाह पर्सनल लॉ के तहत मान्य नहीं, वो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत भी मान्य नहीं हो सकती। स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा-4 के हिसाब से विवाह तभी हो सकता है, जब दोनों में से कोई एक दूसरे का धर्म स्वीकार कर ले।” हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि वो बिना विवाह के साथ नहीं रहना (लिव-इन-रिलेशनशिप में) चाहते और न ही हिंदू लड़की इस्लाम अपना रही।

हाई कोर्ट में हिंदू महिला के परिजनों ने इस विवाह का विरोध करते हुए कहा था कि अगर ये विवाह हुआ, तो समाज में उनका बहिष्कार कर दिया जाएगा। साथ ही परिवार ने कहा कि लड़की घर से जाते समय ज्वैलरी भी साथ लेकर गई थी।

डियर लड़की! यह जोश यह जवानी ‘भाड़े की गर्लफ्रेंड’ बनने के लिए नहीं है, क्योंकि रील के आगे जहाँ और भी हैं

इंंस्टाग्राम रील के जमाने में वायरल होने का क्रेज लोगों में गजब है। कुछ लोग अच्छा कंटेंट देकर फेमस होने की ख्वाहिश रखते हैं तो कुछ सामान्य… लेकिन इन दोनों लोगों की श्रेणी के बीच एक वर्ग वो भी है जो ये मान चुका हैं कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर बिन अश्लीलता किए, आगे बढ़ा ही नहीं जा सकता। ऐसे लोगों की मानसिकता ही है कि आज रील का प्रयोग घातक होता जा रहा है।

हाल में एक बहुत ही अजीबो-गरीब मामला खबरों में आया है। एक भारतीय लड़की ने सोशल मीडिया पर अपना रेट चार्ट साझा कर दिया है। इस रेट चार्ट में उसने अपने साथ कॉफी पीने से लेकर, डिनर करने, शॉपिंग करने, खाना बनाने और वीकेंड पर साथ रहने तक का रेट तय किया हुआ है। सबसे कम 1500 रुपए है और सबसे अधिक 10000 का प्राइज तय किया हुआ है। ये बिलकुल ऐसा ऑफर है जैसे ‘किराए पर गर्लफ्रेंड’ दी जा रही हो। जहाँ आप चाहें तो लड़की का किराया देकर उसे अपनी दोस्त बनाकर घुमा सकते हैं।

वायरल पोस्ट

इस पोस्ट को देखने के बाद सबसे बड़ा डर ये उठता है कि लड़कियाँ कैसे इंस्टा की दुनिया में खुद को आधुनिक दिखाने के लिए कंटेंट और अपनी अस्मिता के बीच का फर्क नहीं समझ पा रहीं… दूसरा ये कि अगर चुनिंदा लड़कियाँ ऐसा रील की दुनिया में फेम पाने के लिए करने भी लगी हैं और उनकी वीडियो इंस्टा पर वायरल हो गई है तो इसके ट्रेंड बनते ही इसका असर क्या होगा।

अमूमन इंस्टा पर रील्स की दुनिया में यही पैटर्न फॉलो होता है कि जब किसी का ओरिजनल कंटेंट वायरल होता है तो उसके बाद लोग उसी टॉपिक को कॉपी-पेस्ट करके अपनी वीडियो बना लेते हैं और इस तरह एक ट्रेंड सेट हो जाता है। इसके बाद देखा जाता है कि उसी जैसी तमाम वीडियो इंस्टा फीड में दिखने लगती है।

अब चूँकि जिस लड़की की हम बात कर रहे हैं, उसके अकॉउंट से इस वीडियो को 14 मिलियन व्यूज मिले हैं तो जाहिर हैं ये कम लोगों ने नहीं देखा और न ही कम ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। इस वीडियो के बढ़ते व्यू लड़की के लिए खुशी का कारण हो सकते हैं क्योंकि उसने इसे बनाया इसीलिए लेकिन हमारे-आपके लिए ये चिंता का कारण होना चाहिए क्योंकि सोचिए, वायरल होने की इच्छा में बैठी लड़कियों की जमात अगर इस ट्रेंड को फॉलो करने लगी तो क्या होगा।

जरूरी नहीं, ऐसा सब करें… पर अगर कोई एक दो सामान्य लड़कियाँ भी वायरल होने के कारण ऐसा करती हैं तो हम समझ सकते हैं एक रील का दुष्प्रभाव कैसा होता है। आप कल्पना कर पाते हैं क्या कि घर में बैठी सामान्य लड़की सोशल मीडिया पर ऐसे ट्रेंड फॉलो करने के चक्कर में अपने रेट चार्ट बनाकर डाल रही है या बता रही है कि लोग उसे गर्लफ्रेंड बनाने का कितना रुपए दे सकते हैं या फिर उसके साथ समय बिताने का कितने का…।

कहना गलत नहीं है कि धीरे-धीरे लोग सोशल मीडिया के प्रति सतर्क भी हो रहे है, लेकिन इन सतर्क लोगों की तादाद से ज्यादा जमात उनकी बड़ी है जो इससे बुरी तरह ग्रसित हैं… अलग से किसी एक अकॉउंट का नाम न भी लिया जाए तो आपने अपने आसपास या फिर रील्स फीड में जरूर छोटी-छोटी लड़कियों को ऐसी वीडियोज बनाते देखा होगा जिसमें टैलेंट कम और अश्लीलता ज्यादा नजर आती है और व्यूज लाखों में पहुँचा हुआ होता है। लोग इसका विरोध करने की बजाय इसे ट्रेंड मानते हैं और खुद भी उसमें छलांग लगा लेते हैं।

आज हाल यहाँ तक पहुँच गया है कि रील्स की दुनिया में पहचान बनाने के लिए लड़कियाँ खुद अपना रेट चार्ट बना रही हैं और उसको पब्लिकली पोस्ट भी कर रही हैं। उनके लिए शायद ये मजाक हो या वो जानती हों कि पोस्ट के बाद मिलने वाले रिएक्शन से कैसे डील करना है, लेकिन जरूरी नहीं कि उनकी वीडियो देख जो लड़कियाँ प्रभावित हों, उन्हें भी ये सब आता ही हो। उनके लिए तो ये ट्रेंड घातक साबित हो सकता है न। वहीं समाज उन्हें किस नजर से देखेगा क्या इस पर विचार होना जरूरी नहीं है।

कुछ लोग शायद इस रील को मुद्दा बनाने पर ये सोचें कि लड़कियों के मॉडर्न होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उनकी आजादी छीनी जा रही है या फिर कुछ और भी… मगर, आप खुद एक बार विचार करके देखिए कि क्या इंस्टाग्राम पर कपड़े उतारकर रील बनाना या फिर अपना रेट लोगों के साथ शेयर करना आज के समय में लड़कियों की जरूरत है या फिर शिक्षा पाकर या स्किल सीखकर अपनी मजबूत पहचान बनाने की जरूरत है।

सोशल मीडिया आभासी दुनिया है, जो आज नहीं कल जीवन से शायद गायब हो जाएगी और हम शून्य रह जाएँगे। उस समय के लिए हमने सोचा है क्या कि इस दुनिया के गायब होने के बाद हम समाज में कैसे रहेंगे? क्या हम तैयार होंगे कमाई के लिए खुले में अश्लीलता फैलाने के लिए? क्या हमारे लिए कपड़े उतारकर उसे सबके आगे बदलना इतना ही आसान होगा जितना आज कैमरे पर लगता है? या फिर घरवाले इतने आधुनिक हो जाएँगे कि घर के बाहर वो रेट चार्ट चिपकानें देंगे कि कोई आए आपको किराए पर लेकर चला जाए?

ये वो सारे सवाल हैं जिनका जवाब हमें ढूँढना है और अपनी जिंदगी के बारे में सोचना है। पहले लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल खाली समय में मनोरंजन के लिए करते थे लेकिन अब धीरे-धीरे वो समय आ गया है कि सोशल मीडिया से खाली होकर लोग अपने जीवन के बाकी कामों को करते हैं। हमारा ये रवैया हमारे लिए, हमारी पीढ़ियों के लिए खतरनाक है।

लड़कियों को आज ये समझने की जरूरत है कि ये सोशल मीडिया सिर्फ एक मनोरंजन का माध्यम है। इसके लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर देना कहीं से उचित नहीं है। जैसे टिकटॉक बैन हुआ है अगर आने वाले समय में किसी भी कारण ये ये प्लेटफॉर्म बंद हो जाएँगे तो सोचिए आसपास के लोगों में आपकी क्या इज्जत होगी या आपके आसपास के लोग आपका उतना ही सम्मान करेंगे। क्या आपकी निजता सच में निजी रह जाएगी या आप उतना ही ओपन होकर लोगों से मिल पाएँगे जितना आपने अपने आपको सोशल मीडिया पर रिवील किया हुआ है।

रील से लगाव का दुष्प्रभाव है कि लोग अपने परिजनों से दूर होने लगे हैं। उनके जिंदगी में दोस्त या तो बचे ही नहीं है या जो बचे हैं वो सिर्फ इसलिए हैं ताकि सोशल मीडिया के कंटेंट के काम आ सकें। डिप्रेशन और अकेलापन लोगों को सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से पहले के मुताबिक अधिक घेरने लगा है। वहीं घरवाले अपने बच्चों को ये सोचकर कुछ नहीं कहते क्योंकि उन्हें लगता है बच्चों को उनकी आजादी देना जरूरी है और उनकी यही सोच बच्चों को छोटी उम्र में वो सब करने को दे देती है जो उनके करियर और भविष्य के लिए खतरनाक होती है, लेकिन जब उनकी इसी हरकत से पैसे आने लगते हैं तो माता-पिता को वो उचित लगने लगता है।

उदाहरण इसी लड़की के इस पोस्ट से समझिए जिसने अपना रेट चार्ट साझा किया है। लड़की जब तक सामान्य कंटेंट बना रही थी उसकी रील पर 5-7 व्यूज आते थे। फिर धीरे-धीरे उसकी रील के 28-30 हजार व्यूज पहुँचे और जब उसने ऐसा कंटेंट पोस्ट किया जिससे उसकी छवि भी धूमिल हो और भारतीय समाज पर भी गलत असर जाए तब उसकी रील पर 14 मिलियन व्यूज आ गए। इस रील के बाद से लड़की के अकॉउंट की रीच ने जोर पकड़ा हुआ है। 1 से 2 लाख व्यूज तो आ ही रहे हैं।

जाहिर है ऐसा रिस्पांस देख वो लड़की ऐसे कंटेंट को ही आगे भी प्रमोट करेगी… हो सकता है इस दौरान लोग उसकी आलोचना करें या उसे समझाएँ… लेकिन इन दोनों स्थितियों में उस पर चर्चा होगी और इंटरनेट की दुनिया में यही वायरल होने की परिभाषा होती है। फॉलोवर्स को 10 हजार हैं वो 1 लाख होंगे। फिर उसे प्रमोटर्स मिलेंगे, कोलैब मिलेगा, पैसे आएँगे और जस्टिफाई कर दिया जाएगा कि जो उसने किया वो सही है। माता-पिता को भी लगेगा कि लड़की ने अपनी पहचान बना ली है। वहीं उसे फॉलो करने वालों के लिए वो एक उदाहरण बन जाएगी।

इस पूरी प्रक्रिया में जो छाप बचेगी वो सिर्फ ये वायरल होने के लिए ऐसे ही कंटेंट काम आते हैं जबकि हकीकत तो ये है कि सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए अश्लीलता फैलाना मानक नहीं है। लोगों ने इसे ऐसा बना दिया है। कुछ लड़कियाँ वाकई अपने टैलेंट के दम पर लोगों को इन्फ्लुएंस कर रही हैं। हाल में कान्स फिल्म महोत्सव में पहुँचीं नैंसी त्यागी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। उन्होंने भी इंस्टाग्राम चलाया, उनके आगे भी ऐसे कंटेंट आए होंगे, मगर उन्होंने वायरल होने के लिए उस कंटेंट को फॉलो न करके अपनी प्रतिभा को इंस्टा के माध्यम से उभारा और दुनिया की नजर में तब आईं जब वो कान्स फिल्म महोत्सव में पहुँच गई। आज उनके टैलेंट पर हर मीडिया में जगह है।

देखा जाए तो नैंसी ने समय के साथ अपने टैलेंट का प्रचार किया था। इसी तरह अंकित बयानपुरिया को देखिए। फिटनेस रील्स बनाकर उन्हें पीएम मोदी से मिलने का मौका मिला। बड़े मंच से लोगों को वो ये संदेश दे पाए कि व्यायाम जीवन में कितना जरूरी है। उसके अलावा छोटा बच्चा ‘भक्त भागवत’ को शायद आपने देखा हो। वो बच्चा कम उम्र का है पर उसके ज्ञान का प्रसार सोशल मीडिया से होता है तो बड़े-बड़े धार्मिक जगहों पर उसका स्वागत होता है। वर्षा सोलंकी इंस्टा का बड़ा चेहरा हैं। एक हाउसवाइफ होते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने डांस की कला दिखाई और आज वो रिएलिटी शो का जाना-माना चेहरा बनी हुआ

ऐसे तमाम इन्फ्लुएंसर हैं जिनके कंटेंट का सकारात्मक प्रभाव समाज पर धीरे-धीरे पड़ रहा है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर बहुत लोग कुछ सीख रहे हैं। लड़कियों को उन वाले उदाहरणों से सीखने की जरूरत है, लड़कियों को अपनी शिक्षा लेकर समाज को साक्षर बनाने की जरूरत है, स्किल में महारत हासिल करके अपनी पहचान बनाने की जरूरत है न कि ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स के इन्फ्लुएंस में आने की जो अश्लीलता का प्रसार करके वायरल हुए हों।। अपने आपको बेचना या फिर किराए पर देने का धंधा समाज में लोग करते आए हैं लेकिन इस काम को करने वालों के लिए एक अलग शब्द होता है, जिसे अभी भारतीय संस्कृति में सम्मान की दृष्टि से देखा जाना नहीं शुरू हुआ है।

गिरकर बेहोश हुआ हर्ष तो ईंट-पत्थर से कुचली छाती, जैक्सन हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहा था चंदन यादव: पुलिस जिसे बता रही ‘डांडिया विवाद’ क्या वह एक पॉलिटिकल मर्डर?

बिहार की राजधानी पटना में लॉ कॉलेज के सामने सोमवार (27 मई, 2024) को हर्ष राज नामक छात्र की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। वो परीक्षा देकर बाइक से निकल रहे थे, तभी वहाँ आए एक दर्जन से भी अधिक अज्ञात बदमाशों ने उन्हें गिरा दिया और लाठी-डंडे से पीट-पीट कर मार डाला। इस मामले में बिहार पुलिस ने बिहटा के अम्हारा गाँव के रहने वाले चंदन यादव को मुख्य साजिशकर्ता बताते हुए गिरफ्तार किया। हर्ष राज BN कॉलेज में पढ़ते थे। वो BA तृतीया वर्ष के छात्र थे।

चंदन यादव पटना यूनिवर्सिटी में वामपंथी छात्र संगठन AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) का उपाध्यक्ष था। वो कम्युनिस्ट विचारधारा में यकीन रखता था और शांति से अधिक तथाकथित क्रांति में विश्वास रखता था। उसकी छवि छात्र नेता की थी। हालाँकि, फजीहत होने के बाद अब AISA ने उसे बरख़ास्त कर दिया। संगठन की राज्य अध्यक्ष प्रीति झा और राज्य सचिव सबीर कुमार ने इसकी पुष्टि की है। साथ ही डैमेज कंट्रोल के लिए दावा किया कि चंदन यादव लंबे समय से संगठन में सक्रिय नहीं था।

चंदन यादव दानापुर के कोथवा में रहता था। हालाँकि, वो 2 वर्षों से जैक्शन हॉस्टल में अवैध रूप से रह रहा था। वो यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहा था। जितेंद्र यादव के बेटे चंदन यादव के लिए मारपीट, फब्तियाँ कसना और छात्रों को ट्रॉल करना आम बात था। पटना के सिटी एसपी (ईस्ट) भरत सोनी का कहना है कि 5 बदमाशों के नाम-पता का सत्यापन कर लिया गया है और उनकी गिरफ़्तारी के लिए धर-पकड़ की जा रही है। वॉरंट जारी कराने के अलावा कुर्की-जब्ती की कार्रवाई भी की जाएगी।

लगभग एक दर्जन लड़कों को हिरासत में लेकर आरोपितों के संबंध में पूछताछ की जा रही है। ABVP (अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद) ने इस घटना के सामने आने के बाद AISA के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए संगठन को प्रतिबंधित करने और कैम्पस से दूर करने की माँग की है। संगठन के राष्ट्रीय महामंत्री याज्ञवलक्य शुक्ल ने कहा कि केरल से लेकर बिहार तक आए कई प्रकरणों से इन वामपंथी संगठनों की असलियत सामने आ रही है, छात्रों को सुरक्षित रखने के लिए इन्हें शैक्षणिक परिसरों से दूर करना होगा।

चंदन यादव का कहना है कि दशहरा 2023 के दौरान मिलर ग्राउंड में हर्ष राज द्वारा आयोजित डांडिया नाइट में हुई लड़ाई का बदला लेने के लिए उसने इस घटना को अंजाम दिया है। वहाँ एंट्री को लेकर हुए विवाद के बाद हर्ष राज के बाउंसरों ने चंदन यादव और उसके दोस्तों की पिटाई कर दी थी। हर्ष राज द्वारा पुलिस को सूचित किए जाने के बाद ये सब भाग गए थे। घटना वाले दिन चंदन यादव और उसके साथी बदमाशों ने लॉ कॉलेज की रेकी की थी। भीषण गर्मी के बहाने इन्होंने अपना चेहरा ढँक रखा था।

परीक्षा के कारण वहाँ छात्रों की काफी आवाजाही थी, इसीलिए किसी ने हमलावरों पर ध्यान नहीं दिया। अचानक हुए हमले से हर्ष राज गिर कर बेहोश हो गए, फिर ईंट-पत्थर से उनकी छाती पर वार किया गया। कुछ हमलावर पैदल, कुछ बाइक से तो कुछ ऑटो से वहाँ से निकल लिए। उधर हर्ष राज के परिजनों ने इसके पीछे बड़ी साजिश की आशंका जताई है। ऑपइंडिया से बात करते हुए खुद को हर्ष का चाचा बताने वाले नवनीत सिंह ने कहा कि मामला उतना सीधा नहीं है जितना दिख रहा।

हर्ष राज के परिजनों ने इसे राजनीतिक हत्या बताते हुए कहा कि हर्ष राज पटना विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष पद का चुनाव लड़ने वाले थे। छात्र समूहों में वो खासा लोकप्रिय हो गया था, ऐसे में इससे किसको डर था ये सोचने वाली बात है। बदमाशों को संरक्षण देने के पीछे कुछ नेता हैं, ऐसी भी आशंका जताई जा रही है। हर्ष राज के परिजन CBI जाँच की माँग करते हुए कह रहे हैं कि बिहार के कुछ बड़े नेताओं की मिलीभगत इसमें सामने आ सकती है।

पुणे के रईसजादे की माँ हुई फरार, उसके ही खून से बदला गया था बेटे का ब्लड सैंपल: पोर्शे कांड में दो डॉक्टर सस्पेंड, नियुक्ति पर सवाल उठाने वाले डीन छुट्टी पर भेजे गए

पुणे में दो लोगों को करोड़ों की पोर्शे से कुचलने वाले रईसजादे का ब्लड सैंपल उसकी माँ के खून से ही बदल दिया गया था। उसकी माँ ने अपना खून पुणे के ससून अस्पताल में दिया था ताकि बेटे के खून की जाँच ना हो। अब रईसजादे की माँ फरार है। दूसरी तरफ ससून अस्पताल के डीन ने दावा किया है कि ब्लड सैम्पल बदलने की साजिश रचने वाले डॉक्टर अजय तावड़े की नियुक्ति एक स्थानीय MLA के कहने पर की गई थी।

जानकारी के अनुसार, 19 मई को सुबह जब रईसजादे का ब्लड सैंपल लिया गया था तो उसकी माँ वहीं मौजूद थी। उसने अपना खून सैंपल बदलने के लिया दिया था। अस्पताल की फॉरेंसिक लैब में डॉक्टर श्रीहरी हल्नोर ने यह सैंपल बदला था। यह सैंपल डॉक्टर अजय तावड़े के कहने पर बदला गया था। अब पुलिस रईसजादे की माँ की तलाश कर रही है लेकिन उसका कोई पता नहीं लग रहा है। वह मामले के खुलासे के बाद फरार हो गई है।

गौरतलब है कि रईसजादे का ब्लड सैंपल बदलने वाले दो डॉक्टरों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इसमें सामने आया था कि 17 साल के नाबालिग रईसजादे का असली ब्लड सैंपल कूड़ेदान में फेंक दिया गया था जबकि इसकी जगह पर दूसरा ब्लड सैंपल टेस्ट किया गया था, इसमें अल्कोहल होने की बात सामने नहीं आई थी।

पुलिस ने इसके बाद सैंपल की DNA जाँच करवाई थी, जिसमें इस फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया था। इसके बाद पुलिस ने सैंपल बदलने वाले डॉ हल्नोर और फॉरेंसिक विभाग के मुखिया अजय तावड़े को गिरफ्तार कर लिया था। इन दोनों डॉक्टरों पर अब अस्पताल ने भी कार्रवाई की है। उन्हें सेवा से निलंबित कर दिया गया है।

दूसरी तरफ यह भी बात सामने आई है कि जिस दिन यह सैंपल टेस्ट हुआ था, उसी दिन डॉ अजय तावड़े से नाबालिग के पिता ने बात की थी। दोनों के बीच 14 बार फोन पर बात हुई थी। उनके बीच वीडियो कॉल भी हुई थी। इसी के बाद सैंपल में धोखाधड़ी हुई। रईसजादे का पिता अभी पुलिस की गिरफ्त में है। रईसजादे को बाल सुधार गृह में भेजा गया है। इस मामले में रोज नए खुलासे हो रहे हैं।

जिस ससून अस्पताल में यह गड़बड़ी हुई है, उसी के डीन डॉ विनायक काले ने दावा किया है कि अजय तावड़े की नियुक्ति स्थानीय MLA सुनील तिंगरे के कहने पर हुई थी। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री हसन मुश्रीफ़ को कह कर डॉ अजय तावड़े की नियुक्ति करवाई थी। तावड़े पर इससे पहले किडनी ट्रांसप्लांट और ड्रग मामले में आरोप थे। डीन विनायक काले को भी छुट्टी पर भेज दिया गया है।

गौरलतब है कि 19 मई, 2024 की रात को पुणे के कल्याणीनगर इलाके में एक बिल्डर बाप के रईसजादे ने अपनी करोड़ों की पोर्शे से दो लोगों को रौंद दिया था। वह दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और उनकी इस हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद नाबालिग को 15 घंटे में ही जमानत मिल गई थी। उसे जमानत के लिए एक 300 शब्द का निबन्ध लिखने को कहा गया था। बाद में इस मामले के उठने के बाद उसकी जमानत खारिज हो गई थी।

T20 वर्ल्ड कप में भारत-पाकिस्तान मैच पर हो सकता है ‘लोन वुल्फ अटैक’, जानिए आतंकी इसे कैसे देते हैं अंजाम: ISIS खुरासान ने दी धमकी, न्यूयॉर्क में होगा मैच

अमेरिका के न्यू यॉर्क में आगामी 9 जून, 2024 को होने वाले भारत-पाकिस्तान के T20 विश्वकप मुकाबले पर आतंकी खतरा मंडरा रहा है। इस्लामी आतंकी संगठन ISIS खुरासान ने इस पर हमले की धमकी दी है। इस मैच के दौरान ‘लोन वुल्फ’ हमले की धमकी दी गई है।

न्यू यॉर्क के नसाऊ काउंटी के नवनिर्मित क्रिकेट स्टेडियम में होने वाले इस मैच से पहले आई इस धमकी ने सुरक्षा चिंताएँ बढ़ा दी हैं। नसाऊ काउंटी के पुलिस कमिश्नर पैट्रिक राइडर ने कह़ा कि इस मैच में हमले की धमकी मिली है सुरक्षा के लिए 100 अतिरिक्त पुलिसकर्मी भी लगाए जाएँगे।

नसाऊ काउंटी के मुख्य अधिकारी ब्रूस ब्लैकमेन ने इस हमले की धमकी को लेकर कहा, “हमने इस धमकी के बाद काफी सावधानियां बरतना चालू किया है। हमने स्टेडियम, इसके पास में स्थित आइजनहॉवर पार्क और पार्किंग स्थलों को सुरक्षित करने के लिए कदम उठाए हैं।”

कमिश्नर राइडर ने धमकी की विश्वसनीयता को लेकर बताया, “जब आपके पास इतना बड़ी भीड़ आने वाली हो तो किसी धमकी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हम इस मामले में एक एक बिंदु की जाँच करेंगे और यहाँ के रहने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। हम आपको यह विश्वास दिलाते हैं कि 9 जून को स्टेडियम सबसे सुरक्षित जगह होगी।”

उन्होंने यह भी बताया कि लोन वुल्फ हमले की यह धमकियाँ लम्बे समय से मिल रही हैं लेकिन बाद में यह साफ़ हुआ कि इनमें से अधिकांश धमकियाँ 9 जून के भारत-पाकिस्तान मैच की तरफ केन्द्रित हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में ISIS द्वारा जारी एक वीडियो भी वायरल हुई जिसमें लोन वुल्फ धमकी की बात कही गई।

विश्व कप आयोजक ICC ने भी इस मैच के संबंध में फैंस को कहा है कि वह सुरक्षा के लिए लगातार प्रशासन के साथ मिल कर काम कर रहा है, ऐसे में कोई भी खतरा नहीं होने दिया जाएगा। न्यू यॉर्क के गवर्नर ने भी सुरक्षा के अधिक इंतजाम के आदेश दिए हैं।

भारत पाकिस्तान मैच को लेकर यह धमकी ISIS खुरासान के एक ग्रुप में दी गई थी। ISIS K ने इसे पोस्ट किया था। इसमें स्टेडियम के हमले पर एक वीडियो बनाई गई थी। इसमें हमले को लेकर और भी बातचीत की गई थी। यह सारी बातचीत ब्रिटेन के एक चैट ग्रुप में की गई थी।

इससे पहले भी T20 विश्व कप को लेकर खतरे की बात सामने आ चुकी है। दरअसल, T 20 विश्व कप के कुछ मैच अमेरिका जबकि कुछ मैच कैरिबियाई देशों में होंगे। कैरिबियाई देशों में हमले की बात कही गई थी। भारतीय टीम अपने मैचों के लिए अमेरिका पहुँच चुकी है लेकिन अब यह लोन वुल्फ खतरा आ गया है।

क्या होता है लोन वुल्फ हमला?

लोन वुल्फ का अर्थ अकेला भेड़िया होता है। आतंक के संबंध में इस शब्द का अर्थ किसी आतंकी द्वारा अकेले किए गए हमले का होता है। ऐसे हमले में आतंकी और किसी की मदद नहीं लेता और खुद से ही बड़ी संख्या में लोगों को मारता है। यह हमला गाड़ी से लोगों को कुचल कर या ऐसे कोई भी काम करके किया जा सकता है, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो।

बीते कुछ सालों में इस तरह के हमले बढ़े हैं। इसी तरह के एक हमले में फ़्रांस में मोहम्मद लहूज ने एक वैन को लोगों के बीच घुसा कर 86 लोगों को मार दिया था। ऐसे ही काफी हमले यूरोप और अमेरिका में हुए थे।

साथ कॉफी पीने का ₹1500, वीकएंड पर साथ रहने का ₹10000… इंस्टाग्राम पर लड़की ने शेयर किया ‘गर्लफ्रेंड’ बनने का रेट चार्ट, नेटिज्नस ने पूछा- झाड़ू-पोछे का कितना लोगी

इंस्टाग्राम पर फेमस होने के लिए आजकल लोग कुछ भी करने को तैयार है। इसी क्रम में एक लड़की का पोस्ट वायरल हुआ है। पोस्ट में लड़की ने अपने आप को किराए पर देने का ऐलान किया है। इस पोस्ट में लड़की ने पहले अपनी फोटो लगाकर पूछा है कि अगर कोई सिंगल है और डेट पर जाना चाहता है तो उसे किराए पर ले सकता है। आगे पोस्ट में उसने अलग-अलग कार्यों के लिए रेट भी बताए हैं।

पोस्ट पर शेयर रेट कार्ड के अनुसार, चिल कॉफी डेट के लिए 1500 रुपए देने होंगे। सामान्य डेट (डिनर और मूवी) के लिए 2000 रुपए देने होंगे। परिवार से मिलाने के लिए 3000 रुपए, किसी इवेंट में साथ जाने के लिए 3500 रुपए, बाइक पर डेट पर लेकर चलने को 4000 रुपए, डेट के बारे में पब्लिक में पोस्ट डालने के लिए 6000 रुपए। इसके अलावा अगर किसी को कुछ एक्सक्लूसिव करना है जैसे एडवेंचर डे पर हाइकिंग, कायकिंग आदि तो उसके लिए अलग से 5000 रुपए लगेंगे, घर पर साथ में मिलकर खाना बनाना है तो 3500 रुपए, शॉपिंग पर जाना है तो 4500 रुपए, वीकेंड पर (2 दिन) मिलने के लिए 10, 000 रुपए। पोस्ट में ये भी लिखा है कि अगर लड़की से कुछ छूट गया है तो लोग उसे बता सकते हैं ताकि पर्फेक्ट डे की प्लानिंग हो सके।

इस पोस्ट को देखने के बाद लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ आ रही हैं। लोगों ने इस पोस्ट पर लड़की का मजाक बना दिया है। उससे पूछा जा रहा है कि वो आखिर समझ क्या रही है खुद को। कोई उसकी खिल्ली उड़ाकर बोल रहा है कि वो बाथरूम साफ करने का कितना लोगी, कोई उससे झाड़ू-पोछा लगाने का रेट पूछ रहा है, कोई कह रहा है कि वो इंस्टाग्राम छोड़ने का कितना रुपया लेगी। एक यूजर ने उससे पूछा है कि वो अगर वो पढ़ाई-लिखाई करती है तो बताए असाइनमेंट बनाने का कितना पैसा लेगी।

लड़की के पोस्ट को देख लोग ये भी सवाल कर रहे हैं कि ये लड़कियों को क्या होता जा रहा है। कुछ इसकी चिंता भी कर रहे हैं कि आखिर जब लड़की के पिता इस पोस्ट को देखेंगे तो उनके ऊपर क्या गुजरेगी। लोगों ने ये कहना भी शुरू कर दिया है कि इंस्टाग्राम पर ये कैसा नया बिजनेस शुरू कर दिया है जहाँ लड़कियाँ अपने रेट तय करके खुद बता रही हैं। कुछ कठोर भाषा में कह रहे हैं कि पहले तो लोग इंस्टा को सामान बेचने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे, अब खुद को बेचना शुरू कर दिया है।

बता दें कि लड़की के इंस्टाग्राम अकॉउंट पर अमूमल रील्स पर पहले 6-7 हजार व्यूज ही आते थे, फिर धीरे धीरे ये व्यूज 28-30 हजार जाने लगे, लेकिन जब उसने इस पोस्ट को डाला तो एकदम से अकॉउंट की रीच बढ़ गई। इस रील पर अब तक 14 मिलियन से ज्यादा व्यूज पहुँच गए हैं। 14 हजार लोगों ने लाइक किया हुआ है। वहीं कमेंट 5000 से ज्यादा आ गए हैं।

पीड़ितों को पहचान दे रहा CAA: उत्तराखंड, बंगाल और हरियाणा में भी पाकिस्तान से आए हिंदुओं को मिली भारतीय नागरिकता, दिल्ली में भी बँट चुके हैं प्रमाण-पत्र

नागरिकता संशोधन कानून (सीएए/CAA) के तहत मोदी सरकार ने पाकिस्तानी हिंदुओं को भारत की नागरिकता देना शुरू कर दिया है। इसकी जानकारी हाल में गृह मंत्रालय ने दी। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड, हरियाणा और पश्चिम बंगाल में पड़ोसी मुल्कों से भारत आए हिंदुओं को नागरिकता दी जा रही है। इसके लिए राज्य से प्राप्त आवेदनों के पहले ग्रुप को, पश्चिम बंगाल, हरियाणा और उत्तराखंड की अधिकार प्राप्त समितियों ने अपने-अपने राज्यों में नागरिकता प्रदान की है।

द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार, मंत्रालय ने फिलहाल यह तो नहीं बताया है कि कितने लोगों को भारतीय नागरिकता दी गई लेकिन इतना बताया है कि तीन राज्यों में प्रमाण पत्र दिए जाने का काम हुआ है। वहीं उनसे सोर्स बता रहे हैं कि बंगाल में कम से कम आठ हिंदू प्रवासियों को नागरिकता मिली है।

बता दें कि इससे पहले नई दिल्ली में भी अधिकार प्राप्त समिति ने नागरिकता प्रमाण पत्र का पहला सेट आवेदकों को सौंपा था। इस संबंध में 15 मई 2024 को गृह सचिव ने नई दिल्ली में नागरिकता (संशोधन) नियम के तहत अधिसूचना जारी की थी। उससे पूरा भारत सरकार ने 11 मार्च 20-24 को नागरिकता (संशोधन) नियम, 2024 अधिसूचित किया था। इसमें बताया गया था कि कैसे आवेदन किया जाएगा। उसे जिला स्तरीय समिति द्वारा कैसे जाँचा जाएगा और उसके बाद राज्य स्तरीय अधिकार प्राप्त समितियाँ कैसे उसकी जाँच करेंगी।

उल्लेखनीय हैं कि नागरिकता संशोधन नियम के तहत जो भी आवेदन आते हैं उनकी जाँच ऑनलाइन माध्यम से की जाती है। इस नियम में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध पारसी और ईसाई समुदाय के अल्पसंख्यक समाज के लोगों को भारत में नागरिकता दिए जाने का प्रावधान है। इसके सिर्फ एक शर्त यह है कि ये लोग अपने मुल्क में अगर धर्म के आधार पर उत्पीड़न सहने से भारत आए हैं और 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश कर चुके हैं तो भारत सरकार इन्हें नागरिकता देगी।

साल 2019 में भारत सरकार द्वारा जब इस कानून को लागू करने की बात की गई थी तो देश के लिबरल गिरोह ने इस पर खूब हल्ला मचाया था। इसी के बाद जामिया से लेकर जेएनयू में हल्ला हुआ था। सीएए-एनआरसी के विरोध में शाहीन बाग की सड़क जाम करके प्रदर्शन किया गया था और बाद में अंजाम दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों तक पहुँच गया था।