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जो पुराना फोन आप यूज नहीं करते उसके बारे में मुझे बताइए… कहीं अपनी ‘दुकानदारी’ में आपकी गर्दन न नपवा दे न्यूजलॉन्ड्री वाला ‘झबरा’

दिनभर फर्जी खबरें फैला कर पैसों की माँग करना अब पुराना शगल हो गया है। अब इसमें थोड़ा सा बदलाव आया है। प्रोपेगेंडा प्लेटफॉर्म Newslaundry के को फाउंडर अभिनंदन सेखरी ने अब लोगों से पुराने फोन माँगे है। सेखरी ने यह जानकारी एक्स (पहले ट्विटर) पर दी है।

‘झबरा’ की संज्ञा धारण करने वाले अभिनंदन सेखरी ने एक्स पर लिखा, “अगर आप दिल्ली में रहते हैं और आपके पास पुराने फोन हैं जो अभी भी काम करते हैं लेकिन आप उनका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं और उन्हें IIT फ्लाईओवर और वसंत विहार फ्लाईओवर के आस-पास रहने वाले बेघर लोगों को देना चाहते हैं (उन्हें फोन की बड़ी ज़रूरत है) तो कृपया मुझे मेल करें। मैं उन्हें एकत्र करवा लूँगा। धन्यवाद।”

इस ट्वीट में सेखरी ने बताया कि वह वसंत विहार और फ्लाईओवर और IIT फ्लाईओवर के पास रहने वाले बेघर यानि झुग्गी झोपड़ियों में रहने वालों को देना चाहता है। लेकिन असल में सेखरी की यह कोशिश किसी को जेल पहुँचा सकती है। सेखरी ने जिस वसंत विहार इलाके में फोन बाँटने की बात की है, यहाँ रहने वाली बड़ी बेघर आबादी रोहिंग्या घुसपैठियों की है। सेखरी ने लोगों को फोन बाँटने की बात तो कर दी लेकिन यह नहीं बताया कि इससे फोन देने वाले को क्या नुकसान हो सकता है।

पुराना फोन देने से क्या नुकसान?

पुराना फोन किसी अनजान व्यक्ति को देने के कई नुकसान है। सेखरी ने बताया है कि वह फोन यहाँ बेघर व्यक्तियों को देने जा रहा है। ऐसे में फोन देने वाले को नहीं पता होगा कि उसका फोन किसके हाथ में जा रहा है। वह व्यक्ति क्या काम करता है, उसका पेशा क्या है, उसका पक्का पता क्या है और उसके फोन का आगे किस काम के लिए उपयोग होने वाला है।

ऐसे में यदि कोई व्यक्ति सेखरी को फोन देता है और वह आगे किसी बेघर व्यक्ति को देता है जो कि इस फोन का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों समेत किसी अवैध काम में करता है तो ऐसी स्थिति में पुलिस फोन के पहले मालिक के पास पहुँच सकती है।

ऐसा इसलिए होगा क्योंकि अपराध के मामले में पुलिस को यदि कोई मोबाइल नम्बर मिलता है, तो इसी से उस फोन की जानकारी भी मिलती है, जिसमें यह SIM डाला गया है। इससे पुलिस समेत एजेंसियों को फोन के IMEI नम्बर का पता लगता है। यह IMEI नम्बर किसी फोन का पहचान पत्र होता है।

जैसे किसी कार या बाइक का चेसिस और इंजन नम्बर होता है, जिससे उसकी पहचान की जा सके ऐसे ही फोन में IMEI नम्बर होता है। IMEI नम्बर से फोन के उपयोग की जानकारी भी निकाली जा सकती है। ऐसे में जाँच एजेंसियाँ किसी ‘बेघर’ के अपराध के लिए फोन दान देने वाले के घर पहुँच सकती हैं। यदि वसंत विहार में रहने वाला कोई रोहिंग्या घुसपैठिया ऐसा फोन पाता है और उससे कोई अपराध करता है, तो इस मामले में फोन दान देने वाले को फँसना पड़ सकता है।

इसके अलावा सेखरी जहाँ एक ओर लोगों से फोन लेने की बात कर रहा है, वहीं उसने यह नहीं बताया कि वह फोन लेने के बदले कोई रसीद भी उपलब्ध करवाएगा क्या। सामान्यतः, जो वेबसाइट पुराने मोबाइल खरीदती हैं, वह फोन बेचने वाले को इस बात की रसीद भी देती हैं कि उसने फोन बेचा है।

इसके अलावा वह बिना पहचान पत्र देखे फोन नहीं खरीदती-बेचतीं। यदि कोई ऐसा साक्ष्य नहीं होता तो फोन देने वाला किसी अपराध की स्थिति में कैसे साबित करेगा कि फोन का मालिकाना हक़ उसके पास नहीं था। क्या ऐसी परिस्थिति में अभिनंदन सेखरी उस कथित ‘बेघर’ के कृत्यों की जिम्मेदारी लेगा।

पहचान तक हो सकती है चोरी

साइबर एक्सपर्ट बताते हैं कि सामान्यतः आपको अपना फोन किसी को नहीं बेचना चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि कि भले ही कोई व्यक्ति अपना फोन पूरी तरह से फॉर्मेट करके बेचता है तब भी इस बात की संभावना रहती है कि वह डाटा वापस पाया जा सकता है। ऐसी स्थिति में जिस व्यक्ति को पुराना फोन मिला है, वह उसके निजी फोटो, पहचान सम्बन्धी कागज, परिवार की जानकारी, उससे जुड़े फोन नम्बर तक निकाल सकता है।

एक साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट ने ऐसा ही प्रयोग करके 30 डिवाइस खरीदे और उनमें से लगभग आधे में से पुराना डाटा निकालने में सफल रहे। ऐसे में इस बात की क्या गारंटी है कि सेखरी जिन लोगों को फोन दिया जाएगा, वह पुराने मालिक की जानकारियाँ नहीं चुराएगा।

क्या फोन माँगना सेखरी का निजी हित

वहीं अभिनंदन सेखरी के फोन माँगने में उसका निजी हित भी शामिल हो सकता है। दरअसल, बहुत सारे फोन एक जगह इकट्ठा करके उनका उपयोग कोई ट्रेंड सोशल मीडिया पर चलाने, किसी वीडियो को वायरल करने या किसी सूचना को प्रसारित करने में होता है। ऐसे में हो सकता है कि दिन भर सब्स्क्रिप्शन के बहाने पैसे की माँग करना वाला अभिनंदन सेखरी अपने ही व्यूज बढ़ाना चाहता हो या फिर कोई ट्रेंड चलाना चाहता हो।

अभिनंदन सेखरी जैसे लोगों को नित नित नए ‘फ्रॉड’ करने का आईडिया कहाँ से आता है, इसे आप उसके पोस्ट पर आए कमेंट्स को पढ़ कर भी समझ सकते हैं। कई ‘भोले-भाले’ यूजर्स उसे अपनी ओर से फोन देने की पहल भी कर रहे हैं, बिना यह सोचे समझे कि उनके लिए एक ‘बेकार फोन’ उनके जीवन में मुसीबतों का बवंडर ला सकता है।

‘मुझे मंदिर जाने दो’: फैजान, जीशान और फिरोज ने बुजुर्ग RSS कार्यकर्ता को मार डाला, CCTV फुटेज में दिखा कैसे सीने पर लात मार कर जमीन पर गिराया

राजस्थान में मंदिर में दर्शन करने जा रहे एक 65 वर्षीय बुजुर्ग की हत्या कर दी गई। पहले माना जा रहा था कि बीमारी की वजह से मौत हुई है, लेकिन अब CCTV फुटेज आमने आने के बाद खुलासा हुआ है कि बुजुर्ग के साथ मारपीट की गई थी। बदमाशों ने मामूली बात को लेकर उनके साथ मारपीट की, जिससे उनकी मृत्यु हो गई। गंभीर हालत में सत्यनारायण गुर्जर को अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहाँ इलाज के दौरान ही उन्होंने दम तोड़ दिया।

मृतक के बेटे ने घटना के 4 दिन बाद हत्या का मामला दर्ज कराया है। ये वारदात किशोरपुरा के भेरू चौक पर 22 मई को होती है। परिवार ने इस मामले में फैजान, जीशान और फिरोज नामक आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। किशोरपुरा थाने की पुलिस इस मामले की जाँच में लगी है। घटना देवनारायण मंदिर के पास की है, जहाँ सत्यनारायण खटाणा दर्शन के लिए गए थे। 22 मई को उनकी अचानक से तबीयत ख़राब हो गई थी।

इसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहाँ उनकी मौत की वजह ब्रेन हेमरेज बताई गई। 23 मई को उनकी मृत्यु हुई थी। अब एक सप्ताह बाद इस मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। आरोप है कि ब्रेन हेमरेज की वजह उनके सीने पर मुक्का मारा जाना है। उनके बेटे युधिष्ठिर खटाणा भाजपा युवा मोर्चा देहात के जिलाध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया है कि उनके पिता 22 मई को देवनारायण मंदिर दर्शन के लिए गए थे। मंदिर से पहले कुछ कंस्ट्रक्शन का काम चल रहा है।

कंस्ट्रक्शन का काम करवा रहे कुछ लोगों ने रास्ते में गिट्टी, बालू और सीमेंट डाल रखा था। इस कारण सत्यनारायण खटाणा मंदिर में नहीं जा पा रहे थे। उन्होंने वहाँ मौजूद आरोपितों से निवेदन किया कि वो उन्हें मंदिर जाने के लिए रास्ता दें। लेकिन, उनलोगों ने गाली-गलौज शुरू कर दी। कुछ देर बाद वहाँ फैजान के 2 बेटे फिरोज और जीशान के अलावा बुंदू नामक शख्स भी पहुँचा। इन्होंने बुजुर्ग के सीने पर जोर से मुक्का मारा, जिसे वो साहब नहीं कर पाए और दूर जा गिरे।

इन सबने बुजुर्ग को जान से मार डालने की भी धमकी दी। पुलिस ने तीनों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कर लिया है। SI रेवतीरमण का काना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए DSP खुद इस मामले की जाँच कर रहे हैं। ये भी बताया जा रहा है कि मृतक RSS (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के कार्यकर्ता थे। दिनदहाड़े ये घटना हुई है, जिसने आपराधिक घटनाओं में अव्वल राजस्थान की साख पर फिर से बट्टा लगाया है। सरकार बदलने के बावजूद अपराधी बेख़ौफ़ घूम रहे हैं।

‘वह बुजुर्ग और बीमारी आदमी है, मैंने दया कर पार्ट टाइम नौकरी दी’: गोल्ड स्मलिंग में गिरफ्तार हुआ PA तो शशि थरूर ने झाड़ा पल्ला, कहा- मेरा लेना-देना नहीं, एजेंसी करें जाँच

कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के पीए कहे जाने वाले शिव कुमार की सोना तस्करी मामले में गिरफ्तारी की न्यूज फैलने के बाद शशि थरूर ने इस मामले पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक्स पर भी इस मुद्दे पर अपनी ओर से सफाई रखी है। साथ ही मीडिया को भी अपना पक्ष बताया है।

शशि थरूर ने X पर हैरानी जताते हुए लिखा- “अपने पूर्व स्टाफ से जुड़ी घटना के बारे में सुनकर मैं हैरान हूँ। वह (शिव कुमार प्रसाद) 72 साल के रिटायर्ड व्यक्ति हैं। उनका डायलिसिस होता है। हमने उन्हें सहानुभूति दिखाते हुए पार्ट टाइम आधार पर नौकरी पर रखा था। मैं किसी भी गलत काम की समर्थन नहीं करता हूँ। मैं मामले की जाँच में अधिकारियों का पूरा समर्थन करता हूँ। कानून को अपना काम करना चाहिए।”

इसके अलावा उन्होंने समाचार एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा, “वो एक बुजुर्ग आदमी है जो रिटायर हो गया है। वो मुझे थोड़ी सी मदद दे रहा था वो भी पार्ट टाइम जब उनकी तबीयत ठीक होती थी। इस खबर से मैं शॉक्ड हूँ। इसलिए मैंने कहा जो प्रशासन को करना है करने दीजिए, मुझे इसमें कोई दिक्कत नहीं है। होने दीजिए, जो हो। अधिकारी जाँच करें। वो मेरे लिए नहीं गए थे एयरपोर्ट। मैं वहाँ हूँ ही नहीं। मैं यही हूँ। अगर वो दूसरे काम के लिए जा रहे हैं तो उसका जवाब उन्हें देना चाहिए।”

बता दें कि 29 मई 2024 को दिल्ली के इंदिरा गाँधी एयरपोर्ट के टर्मिनल 3 पर शशि थरूर के पर्सनल असिस्टेंट शिव कुमार को गिरफ्तार किया गया था। बताया जा रहा है कि जिस समय कस्टम विभाग ने शिव कुमार को धरा उस समय वह दुबई से लौटे थे और अपने ही किसी विदेश से लौटे परिचित से सोने का हैंडओवर ले रहे थे। इसी बीच कस्टम विभाग ने शिव कुमार को पकड़ने की अपनी कार्रवाई की।

फिलाडेल्फी कॉरिडोर से लेकर रफाह क्रॉसिंग तक अब इजरायल का पूर्ण नियंत्रण, UNRWA को आतंकी संगठन घोषित करने की कवायद भी शुरू

इजरायल ने गाजा और मिस्र की सीमा पर स्थित फिलाडेल्फी कॉरिडोर पर पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। ये साल 2006 के बाद पहली बार है, जब इजरायल ने इस कॉरिडोर पर कब्जा किया है। इजरायल ने गाजा और मिस्र के बीच की सारी आवाजाही को अपने कब्जे में ले लिया है और रफाह क्रॉसिंग पर भी अपने जवान तैनात कर दिए हैं। अब तक इस कॉरिडोर और क्रॉसिंग पर मिस्र के सैनिक तैनात होते थे। इजरायल ने एक समझौते के बाद साल 2006 में इस कॉरिडोर और क्रॉसिंग की जिम्मेदारी मिस्र को सौंप दी थी।

इसके साथ ही इजरायल ने गाजा में फिलिस्तीनियों के लिए तैनात यूएन की राहत एजेंसी UNRWA को आतंकी संगठन घोषित करने की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं, इस बारे में इजरायली संसद में एक बिल पेश किया गया था, जो भारी बहुमत से पास भी हो गया। अगर इजरायल की सरकार UNRWA को आतंकी संगठन घोषित करती है, तो गाजा में उसके कामों को रोकने के साथ ही वो UNRWA से जुड़ी चीजों को भी निशाना बना सकता है। फरवरी महीने में ही इजरायल की सरकार ने UNRWA के एक बैंक अकाउंट को जब्त कर लिया था, जिसके जरिए गाजा में वो राहत कार्यों को अंजाम दे रही थी। इजरायल ने आरोप लगाया है कि UNRWA के लोग हमास से मिले हुए हैं और 7 अक्टूबर 2023 के हमले में भी UNRWA के लोगों की मिली भगत थी।

क्या है फिलाडेल्फी कॉरिडोर? जिस पर इजरायल ने किया कब्जा

साल 2006 में गाजा और मिस्र की सीमा के बीच 14 किमी लंबे फिलाडेल्फी कॉरिडोर को बनाया गया था। इसे बफर जोन बनाया गया था कि यहाँ कोई सैन्य गतिविधि नहीं होगी और न ही दोनों तरफ से कोई निर्माम कार्य होगा। ये समझौता इजरायल, फिलिस्तीन अथॉरिटी और मिस्र के बीच हुआ था। लेकिन साल 2007 में हमास ने गाजा पट्टी पर कब्जा कर लिया और इस कॉरिडोर में भी अपनी गतिविधियाँ चलाई। कई सारी सुरंगे बनाई और सामानों की तस्करी शुरू कर दी।

इजरायली सेना ने बताया है कि फिलाडेल्फी कॉरिडोर के इलाके में उसे 20 सुरंगें मिली हैं, तो दर्जनों रॉकेट लॉन्चर भी बरामद किए हैं। यहाँ से इजरायल पर हमले किए जा रहे थे। जबकि फिलाडेल्फी कॉरिडोर को डि-मिलिटराइज जोन बनाया गया था। साल 1978 के कैंप डेविड समझौते के तहत यहाँ कोई भी सैनिक तैनात नहीं हो सकता था, लेकिन हमास ने लगातार इसका अतिक्रमण किया। ऐसे में साल 2006 के बाद इजरायल ने पूरे कॉरिडोर को पहली बार कब्जे में ले लिया है। इसके साथ ही उसने रफाह क्रॉसिंग पर भी अपने सैनिक तैनात कर दिए हैं। अब तक यहाँ मिस्र के सैनिक तैनात होते थे और यहीं से होकर गाजा के लिए लोगों और सामान की आवाजाही हो रही थी।

संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी UNRWA को आतंकी संगठन घोषित करने की तरफ बढ़ाए कदम

इस बीच, इजरायल की संसद ने एक बिल पास किया है, जिसमें गाजा और फिलिस्तीन में राहत कार्यों को अंजाम देने वाली एजेंसी UNRWA को आतंकी संगठन घोषित किया गया है। ये एक बिल है, जिसपर आगे चर्चा होनी है। इस बिल के पूरी तरह से पास होने पर इजरायल यूएन की इस एजेंसी से सारे संबंध तोड़ सकेगा और गाजा में भी उसका कामकाज ठप कर देगा। ये बिल 42-6 के बहुमत से पास हुआ।

इजरायल की संसद में विपक्षी पार्टी बेईतुन के नेता एमके एविगडोर लिबरमैन ने कहा कि UNRWA ने 7 अक्टूबर के हमले में हमाज की मदद की थी। ये एजेंसी गाजा के अंदर आतंकवादियों की मददगार है। बता दें कि एजेंसी के कर्मचारियों पर 7 अक्टूबर 2023 के हमलों में शामिल होने के आरोप हैं। उसके 45 कर्मचारियों का नाम इसमें आया था। इजरायल की शिकायत के बावजूद उनपर कोई कार्रवाई नहीं की गई, जिसके बाद से इजरायली अधिकारी माँग कर रहे हैं कि इस संगठन पर बैन लगाया जाए। बता दें कि इसी संगठन के लिए भेजे गए सामान को हमास ने अपने कब्जे में कर लिया था और अपने हथियारों के साथ ही तेल डिपो को बढ़ा लिया था, जिससे इजरायल के हमले का जवाब देने में उसे मदद मिली।

बता दें कि इजरायल के सबसे बड़े बैंक ने UNRWA के खाते को फ्रीज कर दिया था, क्योंकि उसके खाते के माध्यम से संदिग्ध लेन-देन हो रहा था। UNRWA इजरायली सवालों के जवाब नहीं दे पाई थी। इजरायली सेना ने आरोप लगाया था कि UNRWA का गाजा में हो हेडक्वॉर्टर है, उसके नीचे हमास का भी सेंटर था। यही नहीं, हमास के कंप्यूटर सर्वर सीधे UNRWA को मिल रही बिजली से जुड़े थे। कई बार UNRWA के सेंटर्स पर इजरायली सेना को हथियार मिल चुके हैं।

इस बीच इजरायल ने येरुशलम में स्थित UNRWA के ऑफिस को खाली करने का नोटिस दिया है। UNRWA को एक माह के अंदर ये जगह खाली करनी होगी। 7 साल में इस जगह के किराए और अन्य सुविधाओं के लिए इजरायली सरकार ने $7.3 मिलियन भी माँगे हैं। इसके लिए इज़राइल भूमि प्राधिकरण ने इज़राइली आवास मंत्री यित्ज़ाक गोल्डकनॉफ़ की अनुमति से UNRWA को पत्र जारी किया है।

गौरतलब है कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास ने इजरायली इलाकों में घुसकर तबाही मचाई थी। इस हमले में 1200 से ज्यादा इजरायली लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 252 लगों को हमास ने बंधक बना लिया था। अब भी हमास के कब्जे में 125 लोग हैं, जिसमें से 39 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। इसके बाद ही इजरायल ने गाजा को आतंकवाद और हमास से मुक्त करने के लिए सफाई अभियान चलाया है, जिसमें तमाम आम नागरिक भी मारे गए हैं। गाजा में मरने वालों की संख्या हजारों में है।

कौन हैं पुणे के रईसजादे को बेल देने वाले एलएन दावड़े, अब मीडिया से रहे भाग: जिसने 2 को कुचल कर मार डाला उसे ‘300 शब्दों का निंबध’ पर दी थी राहत

पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट केस में आरोपित रईसजादे को बेल देने वाले डॉक्टर एल.एन धनावड़े के खिलाफ जाँच के आदेश दिए गए हैं। इस बीच उनकी मीडिया से भागते वीडियो सामने आई है। वीडियो में वो बिन हेलमेट पहले रोड पर स्कूटी से जा रहे हैं। वहीं मीडियाकर्मी उनसे पूछ रहे हैं कि उन्होंने दो इंजीनियरों को मौत के घाट उतारने वाले आरोपित लड़के को क्यों बेल दी थी।

बता दें कि एलएन धनावड़े ने जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड का गैर न्यायिक सदस्य होने के बावजूद आरोपित रईसजादे को बेल देने का फैसला सुनाया था वो भी दो शर्तों पर। एक शर्त तो ये कि आरोपित रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिस जाए और ट्रैफिक रूल्स के बारे में बढ़े और प्रेजेंटेशन उनके आगे जमा करे और दूसरा कि वो रोड एक्सीडेंट और उनके निवारण पर 300 शब्द का निबंध लिखे।

उनके इस निर्णय की बात जब मीडिया में फैली तो महाराष्ट्र के उप सीएम देवेंद्र फडणवीस समेत कई लोगों ने इस फैसले पर सवाल उठाए। पूछा गया कि क्या दो लोगों की जान लेने की की सजा ऐसी होती है। इसके बाद उनके खिलाफ जाँच के आदेश दिए गए।

मौजूदा जानकारी के अनुसार, एलएन धनावड़े ने जुवेनाइल बोर्ड के सदस्य होने के नाते अपना यह फैसला तो दिया था लेकिन इस दौरान उन्होंने नियमों का पालन नहीं किया था। पुणेकर न्यूज के मुताबिक, ऐसे फैसले लेते समय जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के दो सदस्यों का होना जरूरी होता है। मगर फिर भी धनावड़े ने मामला अकेले सुना और बिन किसी बोर्ड के अधिकारी से संपर्क किए निर्णय़ ले लिया। बाद में 22 मई को दोबारा सुनवाई हुई और आरोपित की बेल कैंसिल हो गई।

कौन है रईसजादे को बेल देने वाले डॉ एलएन धनावड़े

जानकारी के मुताबिक, डॉ एलएन धनावड़े जुवेनाइल बोर्ड के सदस्य से पहले बालग्राम ‘SOS’ के बोर्ड में थे, जो कि रायगढ़ में है। वहाँ उन्हें एक नाबालिग लड़की की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत के मामले में सस्पेंड किया गया था। इसके बाद इन्हें पुणे भेजा गया और यहाँ ये पुणे बाल कल्याण समिति से जुड़े। इसके बाद इन्हें जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड में पद मिल गया। अब उन्होंने इसी पद का फायदा उठाते हुए अपना फैसला सुनाया है।

120 संगठन, विपक्ष, आंदोलनजीवी और पालतू पत्रकार… चुनावी नतीजों से पहले देश को जलाने की प्लानिंग, मोदी जीते तो कोर्ट से चुनाव रद्द करवाने की हो रही साजिश

YouTuber अजीत अंजुम के चैनल पर खुद को पत्रकार बताने वाली नीलू थॉमस व्यास ने कुछ ऐसे दावे किए हैं, जो डराने वाले हैं। खुद को ‘मॉब लिंचिंग’ का विरोधी बता कर मॉब को गाली देने वाला गिरोह अब लोकतंत्र की बजाय भीड़तंत्र पर भरोसा दिखा रहा है, अराजकता के लिए समाज को सुलगा रहा है। ये कोई नई बात नहीं है, शाहीन बाग़ और किसान आंदोलन को देखें या राहुल गाँधी द्वारा विदेश में दिए गए बयानों को भी देखें तो स्पष्ट पता चलता है कि इसके पीछे एक पैटर्न है।

जैसा कि हमें पता है, मंगलवार (4 जून, 2024) को लोकसभा चुनाव की मतगणना होनी है और इसकी पूरी संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार सत्ता में लौट कर आएँगे। विपक्ष ने INDI गठबंधन तो बनाया, लेकिन नीतीश कुमार की JDU, जयंत चौधरी की RLD और ओमप्रकाश राजभर की SBSP गठबंधन से बाहर निकल आई। विपक्षी नेताओं में तेजस्वी यादव को छोड़ कर शायद ही किसी को जमीन की ख़ाक छानते हुए देखा गया, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 200 से अधिक रैली-रोडशो किए और 80 से अधिक मीडिया संस्थानों को इंटरव्यू दिया।

नीलू व्यास थॉमस इस वीडियो में कह रही हैं कि विपक्ष के जितने भी मतगणना एजेंट्स होंगे उन सबको प्रशिक्षण दिया जा रहा है, एग्जिट पोल्स से कैसे निपटा जाए इसकी भी तैयारी की जा रही है। उनका कहना है कि इसके अलावा एक बड़े जन-आंदोलन की तैयारी की जा रही है, अगर वोटों की चोरी पकड़ी जाती है तो इसे लेकर कोर्ट भी जाया जा सकता है और चुनाव भी रद्द कराया जा सकता है। यानी, इसका सीधा मतलब है कि विपक्ष लोकतंत्र के इस महापर्व को ख़ारिज कर देगा।

पोलिंग एजेंट को क्या प्रशिक्षण दिया जा रहा है? हो सकता है कि जिस तरह बिहार के छपरा में मतदान के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव की बेटी और वहाँ से RJD प्रत्याशी रोहिणी आचार्य ने पहुँच कर हिंसा भड़का दी और 2 लोग मारे गए, ठीक उसी तरह का माहौल काउंटिंग सेंटरों पर भी बना दिया जाए। अगर ऐसा है तो सुरक्षा बलों को बहुत सतर्क रहने की ज़रूरत है। पोलिंग एजेंट्स को हिंसा भड़काने की ट्रेनिंग दी जा रही हो सकती है, उन्हें ये सिखाया जा रहा होगा कि तनाव कैसे पैदा किया जाए।

इसके लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल कैसे करना है, इसमें विपक्ष पारंगत है। सोशल मीडिया पर फर्जी वीडियो डाले जाएँगे, कहीं कुछ तकनीकी गड़बड़ी भी हुई तो उसे कुछ ऐसा बड़ा बना कर दिखाया जाएगा जैसे देश भर में EVM हैककर लिए गए हों और मतगणना करने वाले कर्मचारियों को परेशान किया जाएगा। मतगणना वाले दिन सोशल मीडिया पर ऐसे प्रपंच को रोकने के लिए हमें तैयार रहना चाहिए। पोलिंग एजेंट्स कौन हैं, इसकी पहले से ही जाँच हो जानी चाहिए।

दूसरी बड़ी बात नीलू व्यास थॉमस कहती हैं कि Exit Polls से कैसे निपटा जाए, इसकी भी तैयारी चल रही है। बता दें कि शनिवार (1 जून, 2024) की शाम को अंतिम व 7वें चरण का मतदान समाप्त होने के साथ ही सभी टीवी चैनल और सर्वे करने वाले संस्थान अपना-अपना एग्जिट पोल जारी करेंगे और बताएँगे कि किस पार्टी को संभावित कितनी सीटें आ सकती हैं। स्पष्ट है, विपक्ष को नज़र आ रहा है कि इसमें भाजपा को पूर्ण बहुमत प्राप्त करते हुए दिखाया जाएगा क्योंकि जमीनी हालात भी यही है।

देखिए, विपक्ष को इसका पूरा अंदाज़ा है कि उसकी हार हो रही है। TV चैनलों पर उनके प्रवक्ता एग्जिट पोल्स के दौरान ‘थेथरई’ करेंगे, मुद्दों को घुमाएँगे और भड़काऊ बातें करेंगे। सवाल कुछ और होगा, बौखलाहट में जवाब कुछ और दिया जाएगा। मीडिया संस्थानों के आँकड़ों को देख कर उन्हें ‘गोदी मीडिया’ बताया जाएगा। जिस तरह से प्रतिष्ठित पत्रकारों के लिए कॉन्ग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ‘चमचा’ और ‘चमची’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं, महिलाओं तक को नीचा दिखा रहे हैं, उससे साफ़ है कि उनके प्रवक्ता एग्जिट पोल्स वाले दिन क्या करेंगे।

तीसरी बड़ी बात जो नीलू व्यास थॉमस ने कही है, वो ये है कि इस चुनाव को न्यायपालिका के दरवाजे तक भी ले जाया जा सकता है। ये भी कोई नई बात नहीं है। आप देखिए, अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने से लेकर राफेल लड़ाकू विमान सौदा तक, हर मामले को विपक्ष सुप्रीम कोर्ट तक लेकर गया। सुप्रीम कोर्ट ने न सिर्फ फ्रांस के साथ हुए राफेल सौदे पर मोदी सरकार को क्लीन-चिट दी, बल्कि अनुच्छेद-370 को निरस्त किए जाने वाले फैसले को भी बरकरार रखा।

AAP के अरविंद केजरीवाल और JMM के हेमंत सोरेन जैसे नेताओं को जेल हुई, इन सबको अदालत के आदेश के बाद ही न्यायिक हिरासत में भेजा गया। इसके बाद अब न्यायपालिका पर भी सवाल उठाने शुरू कर दिए गए हैं। ध्यान दीजिए, ये आज से नहीं हो रहा। राम मंदिर का फैसला जब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने नवंबर 2019 में सुनाया था, तभी से सुप्रीम कोर्ट का बॉयकॉट किया जा रहा है। ‘बाबरी ज़िंदा है’ वाले ट्रेंड इसी मुहिम का हिस्सा हैं।

चौथी और सबसे अधिक खतरनाक बात जो नीलू थॉमस ने कही है, वो है ‘जन-आंदोलन’ की। विपक्ष के लिए जन-आंदोलन क्या होता है? 3 महीने तक शाहीन बाग़ की खातूनों द्वारा दिल्ली को बंधक बना कर रखा। 1 साल तक ‘किसान आंदोलन’ के नाम पर दिल्ली की सीमाओं पर कब्ज़ा कर के रखना। शाहीन बाग़ से कारोबारियों को 200 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ, जबकि ‘किसान आंदोलन’ से उत्तर भारत के राज्यों को प्रतिदिन 500 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।

शाहीन बाग़ उपद्रव के जरिए मुस्लिमों को भड़काया गया देश भर में CAA के खिलाफ झूठ फैला-फैला कर, ‘किसान आंदोलन’ का इस्तेमाल जाटों और सिखों को भड़काने के लिए किया गया। तभी ‘किसान आंदोलन’ को खालिस्तानियों ने हाईजैक कर लिया। गणतंत्र दिवस के दिन लाल किला पर चढ़ कर खालिस्तानी झंडा फहरा दिया गया, राष्ट्रध्वज तिरंगे का अपमान हुआ। वहीं शाहीन बाग़ के बाद दिल्ली में दंगे हुए, जिसने 50 से अधिक लोगों की जान ले ली। मंदिरों-स्कूलों को निशाना बनाया गया।

किसी भी देश के महाशक्ति बनने की पहली शर्त है – वहाँ के समाज का संपन्न होना। लोगों के पास पैसा ही नहीं होगा, तो देश महाशक्ति कैसे बनेगा। यही कारण है कि आन्दोलनों के नाम पर बार-बार राष्ट्रीय राजधानी को बंधक बनाया जाता है क्योंकि इससे एक तीर से 2 निशान साधते हैं – पहला, मीडिया की फुटेज खूब मिलती है, और दूसरा, कारोबारियों को अधिक घाटा होता है। कारोबार जितना घटेगा, सरकार को उतनी परेशानी होगी और विपक्ष को उतनी ही ख़ुशी मिलेगी।

और ‘जन-आंदोलन’ का अर्थ क्या है राहुल गाँधी के लिए? याद कीजिए, मई 2022 में लंदन में एक कन्क्लेव को संबोधित करते हुए राहुल गाँधी ने कहा था कि भाजपा ने पूरे भारत में केरोसिन तेल छिड़क रखा है और एक चिंगारी से पूरे देश में आग लग जाएगी। उन्होंने भारत में ध्रुवीकरण और मीडिया पर भाजपा के प्रभाव का दावा करते हुए कहा था कि भारत फ़िलहाल सही स्थान पर नहीं है। सोचिए, विदेश जाकर अपने देश के संबंध में इस तरह की बातें करने के पीछे और क्या मकसद रहा होगा?

अब आगे क्या साजिश है? 120 संगठनों, जो खुद को नागरिक संगठन बताते हैं, उन्होंने चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करते हुए भविष्यवाणी कर दी है कि मतगणना वाले दिन गड़बड़ी होगी। चुनाव आयोग को बदनाम करने के लिए इनलोगों ने 6 घंटे बैठक की, आगे और भी बैठकों की योजना है। ‘सिविल सोसाइटी’ के नाम पर अब दंगों की साजिश है। मतदान के सारे आँकड़े जारी किए जा रहे हैं, फिर भी झूठ बोला जा रहा है कि चुनाव आयोग डेटा नहीं दे रहा।

इन संगठनों में विपक्ष के नेता शामिल हैं, पूर्व अधिकारियों को इसमें रखा गया है। ये वही वर्ग है जो खुद को ‘बुद्धिजीवी’ बता कर कुछ भी बक देता था और लोग इनका यकीन कर लेते थे। अब इन्हें कोई नहीं सुन रहा। ध्रुव राठी जैसे यूट्यूबरों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बार-बार ‘तानाशाह’ बताया जाना इसी क्रम का हिस्सा है। जन-कल्याणकारी योजनाओं, इंफ़्रास्ट्रक्चर के कार्यों और विदेश में भारत की चमकती छवि को दबाने के लिए कुछ तो नकारात्मकता फैलानी होगी, विपक्ष यही करने में लगा हुआ है।

केजरीवाल ने अब माँगी नियमित जमानत, 1 जून को सुनवाई: कोर्ट ने ED से माँगा जवाब, एजेंसी ने बताया- दिल्ली के CM फिट, पंजाब में कर रहे हैं प्रचार

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने दिल्ली की राउज अवेन्यु कोर्ट में शराब घोटाला मामले में नियमित जमानत के लिए याचिका लगाई है। उन्होंने इसी के साथ स्वास्थ्य आधार पर सात दिनों के लिए अंतरिम जमानत की माँग करने वाली याचिका भी लगाई है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने उनकी यह याचिका लेने से मना कर दिया था।

CM केजरीवाल की याचिका पर सुनवाई करते हुए राउज अवेन्यु कोर्ट ने प्रर्वतन निदेशालय (ED) को इस मामले में जवाब दाखिल करने के लिए नोटिस दिया है। ED को अंतरिम और नियमित, दोनों जमानत के मामलों में जवाब दाखिल करना होगा।

CM केजरीवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान ED ने अपनी आपत्तियाँ पेश की हैं। ED की तरफ से पेश हुए ASG SV राजू ने कहा, “वह हिरासत में नहीं है। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है। वह आज पंजाब में चुनाव प्रचार कर रहे हैं। उनकी सेहत ने उन्हें चुनाव प्रचार करने से नहीं रोका। उन्होंने आखिरी तारीख पर जमानत याचिका दायर की है ताकि हमें बहुत कम समय मिले। उनके आचरण के कारण उन्हें कोई भी राहत नहीं मिलनी चाहिए।”

अब केजरीवाल की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई 1 जून, 2024 को दोपहर 2 बजे होगी। इससे पहले बुधवार (29 मई, 2024) को सुप्रीम कोर्ट ने CM केजरीवाल की अंतरिम जमानत बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट में CM केजरीवाल ने 7 दिन अपनी जमानत बढ़ाने के लिए याचिका लगाई थी। उन्होंने माँग की थी कि 1 जून 2024 को खत्म हो रही उनकी अंतरिम जमानत को 8 जून, 2024 तक बढ़ा दिया जाए। उन्होंने कहा था कि यह 7 दिन की जमानत उन्हें स्वास्थ्य चेकअप करवाने के लिए चाहिए।

CM केजरीवाल वर्तमान में लोकसभा चुनावों के प्रचार के लिए दी गई अंतरिम जमानत पर हैं। उन्हें 10 मई, 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी, उन्हें 2 जून को आत्मसमर्पण करना है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी अंतरिम जमानत को बढ़ाने पर स्पष्ट किया था कि उनके पास नियमित जमानत के लिए अभी ट्रायल कोर्ट जाने का रास्ता बरकरार है। इसी के बाद केजरीवाल निचली अदालत में नियमित जमानत के लिए पहुँचे। उन्हें मार्च, 2024 में ED ने दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया था।

3 साल में 4 गुना हुआ बैंक फ्रॉड, लेकिन नुकसान की रकम एक तिहाई हुई: RBI रिपोर्ट से खुलासा, प्राइवेट बैंक के कस्टमर झाँसे में ज्यादा आते हैं

वित्त वर्ष 2023-24 में पिछले तीन साल के मुकाबले लोगों के साथ होने वाले बैंक फ्रॉड के मामलों में लगभग चार गुने की वृद्धि हुई है लेकिन इनसे होने वाला नुकसान एक तिहाई हो गया है। सबसे अधिक धोखाधड़ी निजी बैंक में खाता रखने वालों के साथ हो रही है जबकि सबसे ज्यादा पैसा सरकारी बैंकों में खाता रखने वालों का लुट रहा है। यह जानकारी वित्त वर्ष 2023-24 के लिए जारी की गई भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की वार्षिक रिपोर्ट में दी गई है।

RBI द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में लोगों से बैंक धोखाधड़ी के 36,075 मामले हुए। इस धोखाधड़ी के कारण लोगों का ₹13,930 करोड़ का नुकसान हुआ है। अगर इसकी तुलना 2021-22 से की जाए तो धोखाधड़ी के मामले चौगुने हो गए हैं। 2021-22 में 9,046 जबकि 2022-23 में धोखाधड़ी के कुल 13,564 मामले सामने आए थे।

2021-22 में लोगों का ₹45,358 करोड़ का नुकसान हुआ था, 2022-23 में यह नुकसान घट कर ₹26,127 करोड़ हो गया था। यानि बीते तीन वर्षों में धोखाधड़ी के मामले चार गुना बढ़ गए हैं जबकि उनमें लुटने वाली रकम तीन गुने घट गई है।

RBI ने यह भी बताया है कि बैंक धोखाधड़ी का सबसे अधिक शिकार निजी बैंकों में खाता रखने वाले लोग हो रहे हैं। 2023-24 में बैंक धोखाधड़ी का शिकार होने वाले 67.1% लोगों का खाता निजी बैंक में था। निजी बैंक में खाता रखने वाले 24,210 लोग 2023-24 में बैंक धोखाधड़ी का शिकार हुआ हैं। वहीं बैंक धोखाधड़ी का शिकार होने वाले 22.8% लोग सरकारी बैंकों में खाता रखते हैं। 2023-24 में ऐसे 10,507 लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है। इसके अलावा विदेशी बैकों में खाता रखने वाले 2,899 (8.1%) लोगों के साथ धोखाधड़ी हुई है।

जहाँ धोखाधड़ी के मामलों में फँसने वालों की संख्या निजी बैंक खाताधारकों की अधिक है, वहीं ज्यादा पैसा सरकारी बैंकों में खाता रखने वाले गँवा रहे हैं। निजी बैंक खाताधारकों ने 2023-24 के दौरान इन धोखाधड़ी में ₹3,170 करोड़ गँवाए हैं। सरकारी बैंक खाताधारकों ने 2023 के दौरान धोखाधड़ी के चलते ₹10,507 करोड़ रूपए गँवाए हैं। 2022-23 में भी सरकारी बैंक में खाता रखने वालों ने ₹18, 750 करोड़ गँवाए थे, जबकि निजी बैंकों में खाता रखने वालों का ₹6,159 करोड़ रूपए का नुकसान हुआ था।

यह भी रिपोर्ट में बताया गया है कि 80% धोखाधड़ी के मामले इन्टरनेट या कार्ड से जुड़े हुए हैं। हालाँकि, सबसे ज्यादा पैसे का घपला लोन के मामलों में हुआ है। लोन के मामलों में 2023-24 में ₹11,772 करोड़ की धोखाधड़ी हुई है। यह धोखाधड़ी 2022-23 में ₹24,685 करोड़ की थी जबकि 2021-22 में लोन के ही मामलों में ₹43,272 करोड़ की धोखाधड़ी हुई थी।

गौरतलब है कि भारत में इन्टरनेट के प्रसार के साथ ही बैंक फ्रॉड के मामले लगातार बढ़े हैं। लोगों को आसान लोन, बड़े पुरष्कार या फिर उन्हें डरा धमका कर उनसे धोखाधड़ी हो रही है। RBI समेत सरकार ने लगातार इस पर कदम उठाए हैं। इसी कारण यह सामने आया है कि लोग अब अधिक मामलों को प्रशासन के पास ले जा रहे हैं। बीते कुछ समय में पैसों की वापसी भी हो रही है।

हिंदू लड़की+मुस्लिम लड़का… शादी वैध नहीं, इस्लामी कानून भी नहीं देता मान्यता: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट का जोड़े को सुरक्षा देने से इनकार

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कहा है कि मुस्लिम लड़के और हिंदू लड़की के बीच विवाह मुस्लिम कानून के अनुसार वैध विवाह नहीं है। कोर्ट ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत अंतर-धार्मिक विवाह के लिए पुलिस सुरक्षा की माँग को भी खारिज कर दिया। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सोमवार (27 मई 2024) को ये फैसला सुनाया।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर मुख्य बेंच में जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने ये फैसला सुनाया। जस्टिस गुरपाल सिंह अहलूवालिया ने कहा कि मुस्लिम लड़के और हिंदू लड़की के बीच विवाह को मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत अनियमित (या फासिद) विवाह माना जाएगा, भले ही उन्होंने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह किया हो। हाई कोर्ट ने सोमवार (27 मई 2024) को अपने आदेश में कहा, “मुस्लिम कानून के अनुसार, किसी मुस्लिम लड़के का किसी ऐसी लड़की से विवाह वैध विवाह नहीं है जो मूर्तिपूजक या अग्निपूजक हो। भले ही विवाह स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत रजिस्टर्ड हो, लेकिन वो विवाह वैध नहीं माना जाएगा, इसे अनियमित (फासीद) विवाह ही माना जाएगा।”

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, जबलपुर हाई कोर्ट ने एक हिंदू महिला और मुस्लिम पुरुष द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रहा था। जिसमें हिंदू महिला और मुस्लिम पुरुष ने स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह की इच्छा जताई थी। उनके वकील ने कोर्ट को बताया कि वो दोनों अपना-अपना ही धर्म मानना जारी रखेंगे, जो एक-दूसरे का धर्म नहीं अपनाना चाहते। विवाह के बाद भी हिंदू महिला हिंदू धर्म को मानेगी और मुस्लिम पुरुष मुस्लिम धर्म को। ऐसे में इस जोड़े को पुलिस सुरक्षा दी जानी चाहिए, ताकि वो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत विवाह का रजिस्ट्रेशन करा सकें।

वकील ने कोर्ट को ये भी बताया कि दो धर्मों के लोग पर्सनल लॉ के तहत विवाह नहीं कर सकतें, लेकिन स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत ये वैध होगा। इस पर कोर्ट ने कहा कि स्पेशल मैरिज एक्ट को धार्मिक कृयाकलापों के तहत चुनौती तो नहीं दी जा सकती, लेकिन पर्सनल लॉ के तहत ऐसा विवाह मान्य नहीं होगा। ऐसे में ये विवाह एक अनियमित (फसीद) विवाह होगा। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले (मोहम्मद सलीम और अन्य बनाम शम्सुद्दीन) का रेफरेंस दिया।

हाई कोर्ट ने कहा, “जो विवाह पर्सनल लॉ के तहत मान्य नहीं, वो स्पेशल मैरिज एक्ट के तहत भी मान्य नहीं हो सकती। स्पेशल मैरिज एक्ट की धारा-4 के हिसाब से विवाह तभी हो सकता है, जब दोनों में से कोई एक दूसरे का धर्म स्वीकार कर ले।” हाई कोर्ट ने इस याचिका को खारिज कर दिया और कहा कि वो बिना विवाह के साथ नहीं रहना (लिव-इन-रिलेशनशिप में) चाहते और न ही हिंदू लड़की इस्लाम अपना रही।

हाई कोर्ट में हिंदू महिला के परिजनों ने इस विवाह का विरोध करते हुए कहा था कि अगर ये विवाह हुआ, तो समाज में उनका बहिष्कार कर दिया जाएगा। साथ ही परिवार ने कहा कि लड़की घर से जाते समय ज्वैलरी भी साथ लेकर गई थी।

डियर लड़की! यह जोश यह जवानी ‘भाड़े की गर्लफ्रेंड’ बनने के लिए नहीं है, क्योंकि रील के आगे जहाँ और भी हैं

इंंस्टाग्राम रील के जमाने में वायरल होने का क्रेज लोगों में गजब है। कुछ लोग अच्छा कंटेंट देकर फेमस होने की ख्वाहिश रखते हैं तो कुछ सामान्य… लेकिन इन दोनों लोगों की श्रेणी के बीच एक वर्ग वो भी है जो ये मान चुका हैं कि ऐसे प्लेटफॉर्म पर बिन अश्लीलता किए, आगे बढ़ा ही नहीं जा सकता। ऐसे लोगों की मानसिकता ही है कि आज रील का प्रयोग घातक होता जा रहा है।

हाल में एक बहुत ही अजीबो-गरीब मामला खबरों में आया है। एक भारतीय लड़की ने सोशल मीडिया पर अपना रेट चार्ट साझा कर दिया है। इस रेट चार्ट में उसने अपने साथ कॉफी पीने से लेकर, डिनर करने, शॉपिंग करने, खाना बनाने और वीकेंड पर साथ रहने तक का रेट तय किया हुआ है। सबसे कम 1500 रुपए है और सबसे अधिक 10000 का प्राइज तय किया हुआ है। ये बिलकुल ऐसा ऑफर है जैसे ‘किराए पर गर्लफ्रेंड’ दी जा रही हो। जहाँ आप चाहें तो लड़की का किराया देकर उसे अपनी दोस्त बनाकर घुमा सकते हैं।

वायरल पोस्ट

इस पोस्ट को देखने के बाद सबसे बड़ा डर ये उठता है कि लड़कियाँ कैसे इंस्टा की दुनिया में खुद को आधुनिक दिखाने के लिए कंटेंट और अपनी अस्मिता के बीच का फर्क नहीं समझ पा रहीं… दूसरा ये कि अगर चुनिंदा लड़कियाँ ऐसा रील की दुनिया में फेम पाने के लिए करने भी लगी हैं और उनकी वीडियो इंस्टा पर वायरल हो गई है तो इसके ट्रेंड बनते ही इसका असर क्या होगा।

अमूमन इंस्टा पर रील्स की दुनिया में यही पैटर्न फॉलो होता है कि जब किसी का ओरिजनल कंटेंट वायरल होता है तो उसके बाद लोग उसी टॉपिक को कॉपी-पेस्ट करके अपनी वीडियो बना लेते हैं और इस तरह एक ट्रेंड सेट हो जाता है। इसके बाद देखा जाता है कि उसी जैसी तमाम वीडियो इंस्टा फीड में दिखने लगती है।

अब चूँकि जिस लड़की की हम बात कर रहे हैं, उसके अकॉउंट से इस वीडियो को 14 मिलियन व्यूज मिले हैं तो जाहिर हैं ये कम लोगों ने नहीं देखा और न ही कम ने इस पर प्रतिक्रिया दी है। इस वीडियो के बढ़ते व्यू लड़की के लिए खुशी का कारण हो सकते हैं क्योंकि उसने इसे बनाया इसीलिए लेकिन हमारे-आपके लिए ये चिंता का कारण होना चाहिए क्योंकि सोचिए, वायरल होने की इच्छा में बैठी लड़कियों की जमात अगर इस ट्रेंड को फॉलो करने लगी तो क्या होगा।

जरूरी नहीं, ऐसा सब करें… पर अगर कोई एक दो सामान्य लड़कियाँ भी वायरल होने के कारण ऐसा करती हैं तो हम समझ सकते हैं एक रील का दुष्प्रभाव कैसा होता है। आप कल्पना कर पाते हैं क्या कि घर में बैठी सामान्य लड़की सोशल मीडिया पर ऐसे ट्रेंड फॉलो करने के चक्कर में अपने रेट चार्ट बनाकर डाल रही है या बता रही है कि लोग उसे गर्लफ्रेंड बनाने का कितना रुपए दे सकते हैं या फिर उसके साथ समय बिताने का कितने का…।

कहना गलत नहीं है कि धीरे-धीरे लोग सोशल मीडिया के प्रति सतर्क भी हो रहे है, लेकिन इन सतर्क लोगों की तादाद से ज्यादा जमात उनकी बड़ी है जो इससे बुरी तरह ग्रसित हैं… अलग से किसी एक अकॉउंट का नाम न भी लिया जाए तो आपने अपने आसपास या फिर रील्स फीड में जरूर छोटी-छोटी लड़कियों को ऐसी वीडियोज बनाते देखा होगा जिसमें टैलेंट कम और अश्लीलता ज्यादा नजर आती है और व्यूज लाखों में पहुँचा हुआ होता है। लोग इसका विरोध करने की बजाय इसे ट्रेंड मानते हैं और खुद भी उसमें छलांग लगा लेते हैं।

आज हाल यहाँ तक पहुँच गया है कि रील्स की दुनिया में पहचान बनाने के लिए लड़कियाँ खुद अपना रेट चार्ट बना रही हैं और उसको पब्लिकली पोस्ट भी कर रही हैं। उनके लिए शायद ये मजाक हो या वो जानती हों कि पोस्ट के बाद मिलने वाले रिएक्शन से कैसे डील करना है, लेकिन जरूरी नहीं कि उनकी वीडियो देख जो लड़कियाँ प्रभावित हों, उन्हें भी ये सब आता ही हो। उनके लिए तो ये ट्रेंड घातक साबित हो सकता है न। वहीं समाज उन्हें किस नजर से देखेगा क्या इस पर विचार होना जरूरी नहीं है।

कुछ लोग शायद इस रील को मुद्दा बनाने पर ये सोचें कि लड़कियों के मॉडर्न होने पर सवाल खड़े हो रहे हैं, उनकी आजादी छीनी जा रही है या फिर कुछ और भी… मगर, आप खुद एक बार विचार करके देखिए कि क्या इंस्टाग्राम पर कपड़े उतारकर रील बनाना या फिर अपना रेट लोगों के साथ शेयर करना आज के समय में लड़कियों की जरूरत है या फिर शिक्षा पाकर या स्किल सीखकर अपनी मजबूत पहचान बनाने की जरूरत है।

सोशल मीडिया आभासी दुनिया है, जो आज नहीं कल जीवन से शायद गायब हो जाएगी और हम शून्य रह जाएँगे। उस समय के लिए हमने सोचा है क्या कि इस दुनिया के गायब होने के बाद हम समाज में कैसे रहेंगे? क्या हम तैयार होंगे कमाई के लिए खुले में अश्लीलता फैलाने के लिए? क्या हमारे लिए कपड़े उतारकर उसे सबके आगे बदलना इतना ही आसान होगा जितना आज कैमरे पर लगता है? या फिर घरवाले इतने आधुनिक हो जाएँगे कि घर के बाहर वो रेट चार्ट चिपकानें देंगे कि कोई आए आपको किराए पर लेकर चला जाए?

ये वो सारे सवाल हैं जिनका जवाब हमें ढूँढना है और अपनी जिंदगी के बारे में सोचना है। पहले लोग सोशल मीडिया का इस्तेमाल खाली समय में मनोरंजन के लिए करते थे लेकिन अब धीरे-धीरे वो समय आ गया है कि सोशल मीडिया से खाली होकर लोग अपने जीवन के बाकी कामों को करते हैं। हमारा ये रवैया हमारे लिए, हमारी पीढ़ियों के लिए खतरनाक है।

लड़कियों को आज ये समझने की जरूरत है कि ये सोशल मीडिया सिर्फ एक मनोरंजन का माध्यम है। इसके लिए अपनी जिंदगी समर्पित कर देना कहीं से उचित नहीं है। जैसे टिकटॉक बैन हुआ है अगर आने वाले समय में किसी भी कारण ये ये प्लेटफॉर्म बंद हो जाएँगे तो सोचिए आसपास के लोगों में आपकी क्या इज्जत होगी या आपके आसपास के लोग आपका उतना ही सम्मान करेंगे। क्या आपकी निजता सच में निजी रह जाएगी या आप उतना ही ओपन होकर लोगों से मिल पाएँगे जितना आपने अपने आपको सोशल मीडिया पर रिवील किया हुआ है।

रील से लगाव का दुष्प्रभाव है कि लोग अपने परिजनों से दूर होने लगे हैं। उनके जिंदगी में दोस्त या तो बचे ही नहीं है या जो बचे हैं वो सिर्फ इसलिए हैं ताकि सोशल मीडिया के कंटेंट के काम आ सकें। डिप्रेशन और अकेलापन लोगों को सोशल मीडिया के ज्यादा इस्तेमाल से पहले के मुताबिक अधिक घेरने लगा है। वहीं घरवाले अपने बच्चों को ये सोचकर कुछ नहीं कहते क्योंकि उन्हें लगता है बच्चों को उनकी आजादी देना जरूरी है और उनकी यही सोच बच्चों को छोटी उम्र में वो सब करने को दे देती है जो उनके करियर और भविष्य के लिए खतरनाक होती है, लेकिन जब उनकी इसी हरकत से पैसे आने लगते हैं तो माता-पिता को वो उचित लगने लगता है।

उदाहरण इसी लड़की के इस पोस्ट से समझिए जिसने अपना रेट चार्ट साझा किया है। लड़की जब तक सामान्य कंटेंट बना रही थी उसकी रील पर 5-7 व्यूज आते थे। फिर धीरे-धीरे उसकी रील के 28-30 हजार व्यूज पहुँचे और जब उसने ऐसा कंटेंट पोस्ट किया जिससे उसकी छवि भी धूमिल हो और भारतीय समाज पर भी गलत असर जाए तब उसकी रील पर 14 मिलियन व्यूज आ गए। इस रील के बाद से लड़की के अकॉउंट की रीच ने जोर पकड़ा हुआ है। 1 से 2 लाख व्यूज तो आ ही रहे हैं।

जाहिर है ऐसा रिस्पांस देख वो लड़की ऐसे कंटेंट को ही आगे भी प्रमोट करेगी… हो सकता है इस दौरान लोग उसकी आलोचना करें या उसे समझाएँ… लेकिन इन दोनों स्थितियों में उस पर चर्चा होगी और इंटरनेट की दुनिया में यही वायरल होने की परिभाषा होती है। फॉलोवर्स को 10 हजार हैं वो 1 लाख होंगे। फिर उसे प्रमोटर्स मिलेंगे, कोलैब मिलेगा, पैसे आएँगे और जस्टिफाई कर दिया जाएगा कि जो उसने किया वो सही है। माता-पिता को भी लगेगा कि लड़की ने अपनी पहचान बना ली है। वहीं उसे फॉलो करने वालों के लिए वो एक उदाहरण बन जाएगी।

इस पूरी प्रक्रिया में जो छाप बचेगी वो सिर्फ ये वायरल होने के लिए ऐसे ही कंटेंट काम आते हैं जबकि हकीकत तो ये है कि सोशल मीडिया पर फेमस होने के लिए अश्लीलता फैलाना मानक नहीं है। लोगों ने इसे ऐसा बना दिया है। कुछ लड़कियाँ वाकई अपने टैलेंट के दम पर लोगों को इन्फ्लुएंस कर रही हैं। हाल में कान्स फिल्म महोत्सव में पहुँचीं नैंसी त्यागी इसका प्रत्यक्ष उदाहरण हैं। उन्होंने भी इंस्टाग्राम चलाया, उनके आगे भी ऐसे कंटेंट आए होंगे, मगर उन्होंने वायरल होने के लिए उस कंटेंट को फॉलो न करके अपनी प्रतिभा को इंस्टा के माध्यम से उभारा और दुनिया की नजर में तब आईं जब वो कान्स फिल्म महोत्सव में पहुँच गई। आज उनके टैलेंट पर हर मीडिया में जगह है।

देखा जाए तो नैंसी ने समय के साथ अपने टैलेंट का प्रचार किया था। इसी तरह अंकित बयानपुरिया को देखिए। फिटनेस रील्स बनाकर उन्हें पीएम मोदी से मिलने का मौका मिला। बड़े मंच से लोगों को वो ये संदेश दे पाए कि व्यायाम जीवन में कितना जरूरी है। उसके अलावा छोटा बच्चा ‘भक्त भागवत’ को शायद आपने देखा हो। वो बच्चा कम उम्र का है पर उसके ज्ञान का प्रसार सोशल मीडिया से होता है तो बड़े-बड़े धार्मिक जगहों पर उसका स्वागत होता है। वर्षा सोलंकी इंस्टा का बड़ा चेहरा हैं। एक हाउसवाइफ होते हुए उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने डांस की कला दिखाई और आज वो रिएलिटी शो का जाना-माना चेहरा बनी हुआ

ऐसे तमाम इन्फ्लुएंसर हैं जिनके कंटेंट का सकारात्मक प्रभाव समाज पर धीरे-धीरे पड़ रहा है। उनके जीवन से प्रेरणा लेकर बहुत लोग कुछ सीख रहे हैं। लड़कियों को उन वाले उदाहरणों से सीखने की जरूरत है, लड़कियों को अपनी शिक्षा लेकर समाज को साक्षर बनाने की जरूरत है, स्किल में महारत हासिल करके अपनी पहचान बनाने की जरूरत है न कि ऐसे कंटेंट क्रिएटर्स के इन्फ्लुएंस में आने की जो अश्लीलता का प्रसार करके वायरल हुए हों।। अपने आपको बेचना या फिर किराए पर देने का धंधा समाज में लोग करते आए हैं लेकिन इस काम को करने वालों के लिए एक अलग शब्द होता है, जिसे अभी भारतीय संस्कृति में सम्मान की दृष्टि से देखा जाना नहीं शुरू हुआ है।