Home Blog Page 909

आधी रात को जब नींद में था भारत, 18 साल के भारतीय ने क्लासिक शतरंज में रच दिया इतिहास: 5 बार के विश्व चैंपियन को उनके ही घर में हराया, जानिए कौन हैं प्रग्गानंधा

भारतीय चेस ग्रैंडमास्टर प्रग्गानंधा रमेशबाबू ने विश्व के नम्बर एक चेस ग्रैंड मास्टर मैग्नस कार्लसन को क्लासिक शतरंज खेल में मात दी। 18 वर्षीय ग्रैंडमास्टर ने यह कारनामा कार्लसन के ही घर यानी नॉर्वे में किया। इसी के साथ भारतीय शतरंज खिलाड़ी प्रग्गानंधा नॉर्वे चेस के इस टूर्नामेंट में नम्बर एक पर पहुँच गए।

बुधवार (29 मई, 2024) को नॉर्वे में 18 वर्षीय प्रग्गानंधा का मुकाबला लम्बे समय से विश्व नम्बर एक शतरंज ग्रैंडमास्टर मैग्नस कार्लसन से हुआ। यह एक क्लासिक शतरंज मुकाबला था जिसमें खिलाड़ियों को अपनी चालें चलने और सोचने का अधिक समय मिलता है।

इस मुकाबले को कार्लसन ने शुरुआत से ही खतरनाक तरीके से खेलना चाहा। उन्होंने अपना खेल आक्रमण पर आधारित रखा ताकि दबाव में आकर प्रग्गानंधा गलत चालें चलें और कार्लसन को बढ़त मिल सके। हालाँकि, ऐसा करना कार्लसन के लिए भारी पड़ गया। प्रग्गानंधा ने इस का जवाब संयमित खेल से दिया।

कार्लसन के आक्रामक खेल को समझते हुए भारतीय ग्रैंडमास्टर ने उन पर दबाव बनाना चालू कर दिया। उन्होंने इसके लिए अधिक समय लिया। कार्लसन ने कम समय लगा कर चालें चली जबकि प्रग्गानंधा ने अपनी चालें सोच समझ कर चलीं। लगभग 18 चालों के बाद प्रग्गानंधा को अपनी जीत दिखने लगी।

इस खेल के दौरान कार्लसन ने स्वीकार किया कि वह काफी खतरनाक तरीके से खेले जिससे उनकी हार हुई। उधर प्रग्गानंधा ने जीत के बाद भी इस खेल में की गई कुछ गलतियों को इंगित किया और बताया कि वह आगे इन्हें सुधारेंगे। प्रग्गानंधा इसी खेल के साथ नॉर्वे शतरंज के तीसरे चरण के बाद रैंकिंग में सबसे ऊपर पहुँच गए।

इसी टूर्नामेंट में उनकी बहन वैशाली रमेशबाबू ने महिलाओं के खेल में ड्रा करवाने में सफल रहीं। वह भी महिलाओं की रैंकिंग में वर्तमान में शीर्ष पर हैं। दोनों भाई बहनों की यह सफलता शतरंज के भारतीय फैन्स के लिए काफी सुखद रही।

प्रग्गानंधा भारतीय शतरंज ग्रैंडमास्टर हैं और अभी मात्र 18 वर्ष के हैं। उन्होंने इस आयु में शतरंज की दुनिया में काफी नाम कमाया है। उन्होंने काफी छोटी आयु से शतरंज खेलना चालू कर दिया था। चेन्नई में पले बढे प्रग्गानंधा के पिता एक बैंक कर्मचारी हैं जबकि उनकी माता नागालक्ष्मी दोनों के करियर को आगे बढ़ाने में मदद कर रही थीं। उन्होंने इससे पहले अंडर-8 और अंडर 15 चैंपियनशिप भी जीते हैं। प्रग्गानंधा भारत की तरफ से शतरंज ओलंपियाड में भी हिस्सा ले चुके हैं। यहाँ उनकी टीम को कांस्य पदक हासिल हुआ था।

स्टेज पर चल रही थी कॉलेज फेस्ट की तैयारी… ‘जय श्रीराम’ बजते ही भड़क गए मुस्लिम लड़के, हिंदू छात्रों से की मारपीट: कर्नाटक के बीदर में FIR दर्ज

कर्नाटक के बीदर में ‘जय श्रीराम’ का गाना बजाने पर हिंदू छात्रों पर मुस्लिम छात्रों के गुट ने हमला कर दिया। घटना बुधवार (29 मई 2024) को गुरुनानक देव इंजीनियरिंग कॉलेज की है। मारपीट में नटराज और वीरेंद्र नाम के छात्रों को चोट आई है। बताया जा रहा है उनके नाक और सिर में मारा गया है।

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के अनुसार, कॉलेज में टेक्नो कल्चरल फेस्ट होने वाला था। इसी के चलते वहाँ डांस की प्रैक्टिस चल रही थी। डीजे चलने के दौरान किसी ने उसमें ‘जय श्रीराम’ गाना बजा दिया। इस पर मुस्लिम छात्रों ने आपत्ति जताई। इसी पर दोनों समुदायों के छात्रों में बहस हुई और आखिर में झड़प हो गई। पुलिस की सूचना में आते ही पुलिस ने स्थिति को संभाला और लड़ाई रुकवाई। इस घटना की एक वीडियो भी सामने आई है।

इस मामले में पुलिस अधीक्षक चन्नाबसवन्ना एसएल ने बताया कि उन्होंने नटराज की शिकायत के आधार पर गांधीगंज थाने में मुस्लिम समुदाय के 17 छात्रों और एक अंजान के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। उन्होंने बताया कि मारपीट के मामले में मुस्लिम छात्रों की ओर से भी शिकायत दर्ज करवाई जा रही है। अभी एक आरोपित को केस में रिहा किया गया है।

इस घटना के बाद खबर है कि कॉलेज की गवर्निंग बॉडी ने 30 और 31 मई को होने वाले टेक्नो-कल्चरल फेस्ट को रद्द कर दिया है। कॉलेज के आस-पास सुरक्षा बढ़ा दी गई है। एसपी ने छात्रों और आम लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें।

न्यूयॉर्क में यहूदियों को कुचलने के लिए पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर ने दौड़ाई गाड़ी, कहा- सभी को मार दूँगा: असगर अली पर हत्या का प्रयास-घृणा अपराध जैसे मामले पहले से ही दर्ज

अमेरिका के न्यू यॉर्क में एक पाकिस्तानी ने गाड़ी चढ़ा कर यहूदियों की हत्या करने की कोशिश की। वह इस दौरान यहूदी विरोधी नारे भी चिल्लाता रहा। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। यहूदियों को मारने की कोशिश करने वाले पाकिस्तानी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

जानकारी के अनुसार, न्यूयॉर्क के ब्रुकलिन में स्थित एक यहूदी स्कूल के बाहर बुधवार (29 मई, 2024) को यह वारदात हुई। इस स्कूल के बाहर कुछ यहूदी छात्र और अन्य व्यक्ति खड़े थे। यहीं पर यह पाकिस्तानी टैक्सी ड्राइवर असगर अली एक सफेद रंग की गाड़ी लेकर आया। इसके बाद उसने यहूदियों की तरफ गाड़ी दौड़ा दी। उसने कई बार ऐसा ही किया। लगातार वह यहूदियों को निशाना बनाता रहा। वह इस दौरान ‘मैं सारे यहूदियों को मार दूँगा’ चिल्लाता भी रहा।

उसने लगातार यहूदियों को निशाना बनाया। वह गाड़ी को तेज रफ़्तार से उनकी तरफ भगाता रहा। हालाँकि, उसके इस हमले में कोई भी घायल नहीं हुआ। उसकी गाड़ी से बचने के लिए यहूदी छात्र स्कूल के अंदर चले गए। इसके बाद इस घटना की जानकारी पुलिस को दी गई।

पुलिस ने मौके पर पहुँच कर इस घटना का CCTV वीडियो निकाला और असगर अली को पहचान कर गिरफ्तार कर लिया। उसकी उम्र 58 साल है और वह 20 साल पहले पाकिस्तान से अमेरिका आया था। उसने खुद को टैक्सी चालक बताया है लेकिन उसके पास इसका वैध लाइसेंस भी नहीं है। उसके ऊपर पहले भी कई बार मुकदमे लग चुके हैं। उसके ऊपर हत्या का प्रयास, घृणा अपराध और हमले जैसे एक दर्जन से अधिक मामले पहले से दर्ज हैं।

घटना में पुलिस ने पाँच पीड़ितों की पहचान की है। इनमें से तीन 18 साल के युवक और एक 41 वर्षीय जबकि एक 44 वर्षीय व्यक्ति है। पुलिस इस मामले की आगे जाँच में जुटी हुई है। असगर अली को गिरफ्तार करके उससे पूछताछ की जा रही है। गौरतलब है कि बीते कुछ समय में अमेरिका समेत तमाम देशों में यहूदियों के विरुद्ध घृणा अपराध काफी बढ़े हैं। इनमें बड़ी तेजी 7 अक्टूबर, 2023 को इस्लामी आतंकी संगठन हमास के इजरायल पर हमले के बाद आई है।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर का PA गोल्ड स्मगलिंग में दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार, साथी को भी कस्टम ने धरा: केरल की राजनीति पर कई बार दाग लगा चुकी है सोने की तस्करी

कॉन्ग्रेस के दिग्गज नेता व तिरुवनंतपुरम सीट से सांसद शशि थरूर के पर्सनल असिस्टेंट शिव कुमार सोना तस्करी मामले में गिरफ्तार हुए हैं। कस्टम विभाग ने उनके खिलाफ कार्रवाई बुधवार (29 मई 2024) देर शाम दिल्ली के इंदिरा गाँधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-3 पर की है।

बताया जा रहा है कि जिस समय कस्टम विभाग ने शिव कुमार को धरा उस समय वह दुबई से लौटे थे और अपने ही किसी विदेश से लौटे परिचित से सोने का हैंडओवर ले रहे थे। इसी बीच कस्टम विभाग ने शिव कुमार को पकड़ने की अपनी कार्रवाई की।

समाचार एजेंसी एएनआई पर सूत्रों से दी गई जानकारी में कहा गया है कि इस मामले में 2 गिरफ्तारी हुई है। इनमें एक शशि थरूर का पीए का है। वहीं इनके पास से कुल 500 ग्राम सोना बरामद हुआ है।

खबरों के अनुसार, अपने परिचित से शिव कुमार जो सोना ले रहे थे उसकी कीमत 55 लाख रुपए थी। जब एयरपोर्ट पर ग्रीन चैनल पर कस्टम विभाग ने उन्हें पकड़कर इस सोने के बारे में पूछा तो वो कोई पुख्ता जानकारी भी नहीं दे पाए। इसी के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।

मालूम हो कि इससे पहले दिल्ली एयरपोर्ट पर गोल्ड स्मगलिंग के अक्सर ऐसे मामले सामने आते रहे हैं। पिछले हफ्ते भी सोने की तस्करी के केस में कस्टम ने 5 उज्बेक नागरिकों को पकड़ा था। सभी आरोपित दुबई से आ रहे थे और डोमेस्टिक टर्मिनल से बाहर निकलने की कोशिश में थे। हालाँकि कस्टम विभाग ने इन्हें पकड़ लिया और अधिक चौकन्ना हो गए। शिव कुमार की जाँच भी इसी सतर्कता के चलते हुई और पता चला कि उन्होंने तय सीमा से ज्यादा सोना लिया हुआ है।

इसके अलावा ये भी मालूम हो कि केरल के तिरुवनंतपुरम से सांसद शशि थरूर के पीए से जुड़ा सोना तस्करी से जुड़ा मामला आने से पहले केरल में पहले ही एक गोल्ड स्मगलिंग मामले के कारण काफी उथल-पुथल है। वहाँ 5 जुलाई 2020 को तिरुवनंतपुरम के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 30 किलो सोना की हेराफेरी का मामला सामने आया था। बाद में जाँच शुरू हुई तो केस की मुख्य आरोपित स्वप्ना सुरेश ने सीएम पिनराई विजयन का नाम लेकर इस केस को और सनसनीखेज बना दिया था। उन्होंने पिछले साल दावा किया था कि इस मामले में उन्हें कॉल करके कहा गया था कि 30 करोड़ रुपए ले लो, लेकिन सीएम विजयन का नाम मामले से दूर रखो।

गाजियाबाद: यासीन कुरैशी के स्लॉटर हाउस से 57 नाबालिग लड़के-लड़कियों को छुड़ाया, NCPCR-पुलिस ने की छापेमारी, जबरन कराई जा रही थी माँस की पैकेजिंग

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में स्थित एक स्लॉटर हाउस में काम करने वाले 57 नाबालिग बच्चों को मुक्त कराया गया है। पुलिस, एनजीओ और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण के अधिकारियों की मदद से सभी बच्चों का रेस्क्यू कराया गया। रेस्क्यू किए गए इन बच्चों को बिहार और पश्चिम बंगाल से लाया गया था और इनसे जबरन काम करवाया जा रहा था। इनमें 31 नाबालिग लड़कियाँ और 26 नाबालिग लड़के शामिल हैं, जिन्हें मुक्त करवाया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन बच्चों के परिवारों की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। इन्हें गाजियाबाद में नौकरी दिलवाने की बात कही गई थी। बाद में इन बच्चों को इंटरनेशनल एग्रो फूड्स में लाकर काम पर लगवा दिया गया था। नाबालिग बच्चों को पहले इस काम की जानकारी नहीं दी गई थी। पुलिस इन्हें इनके राज्यों से लाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उनकी तलाश में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग, नई दिल्ली को यह शिकायत मिली थी कि गाजियाबाद में एक स्लॉटर हाउस में बिहार और पश्चिम बंगाल राज्य से बच्चों को अमानवीय स्थिति में कार्य करने के लिए मजबूर किया जाता है। इसकी शिकायत पुलिस कमिश्नरेट गाजियाबाद से की गई थी। राष्ट्रीय बाल संरक्षण के अधिकारियों से मिली जानकारी के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लिया और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। इस ऑपरेशन में 31 नाबालिग लड़कियाँ, 26 नाबालिग लड़के समेत कुल 57 नाबालिगों को सकुशल मुक्त कराया गया है।

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो ने एक्स पर इसकी सूचना दी है। उन्होंने लिखा, ‘आज (29 मई 2024) उत्तरप्रदेश के ग़ाज़ियाबाद ज़िले के मसूरी इलाक़े में याशीन कुरेशी के इंटरनेशनल एग्रो फ़ूड के पशु क़त्लखाने पर @NCPCR_ के निर्देश पर @Uppolice के साथ की गयी संयुक्त छापामार कार्रवाई में 57 नाबालिगों (31 लड़कियाँ व 26 लड़कों इनमें दिव्यांग भी शामिल हैं।) को रेस्क्यू किया गया है, कार्रवाई अभी जारी है। इन सभी से वहाँ पशुओं को काटने का काम करवाया जा रहा था। बच्चों की उम्र के सत्यापन सहित अन्य प्रक्रिया पूर्ण होने पर संख्या बदल सकती है। मिशन मुक्ति की शिकायत पर कार्रवाई की गई है।’

बता दें कि इंटरनेशनल एग्रो फूड्स का मुख्य कारोबार मीट प्रोसेसिंग, फ्रीजिंग और एक्सपोर्ट का है। इस कंपनी से माल विदेशों में भी काफी ज्यादा सप्लाई किया जाता है। पुलिस इनके खिलाफ बाल संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई कर रही है।

पाकिस्तान में रोज 3 हिन्दू लड़कियों का इस्लामी धर्मांतरण या हत्या… राहुल तेवतिया ने एक स्टोरी से हमास के हमदर्द इकोसिस्टम को किया तहस-नहस

रोहित शर्मा हों या तमाम बॉलीवुड स्टार्स, लगभग सभी ने हमास द्वारा इजरायल पर किए गए हमलों को अनदेखा किया, लेकिन रफाह पर इजरायल के जवाबी हमले को फिलिस्तीनियों पर इजरायली अत्याचार बताने वाला रोना जरूर रोया। ये अलग बात है कि ‘उम्माह’ वालों को छोड़ दें, तो बाकियों का रफाह या गाजा से उतना ही लेना देना है, जितना कि चीन के शिनजियाँग में मारे जा रहे उइगुर मुस्लिमों से। खैर, इन सबके बीच आईपीएल में गुजरात टाइटन्स के लिए खेलने वाले राहुल तेवतिया ने ‘असलियत’ के लिए आवाज उठाई है। राहुल तेवतिया ने पाकिस्तान में अत्याचार और दमन के शिकार ‘हिंदुओं’ की आवाज उठाई है।

राहुल तेवतिया ने ‘ऑल आईज ऑन रफाह’ के मुकाबले ”ऑल आईज ऑन हिंदूज इन पाकिस्तान” का विकल्प चुना और पाकिस्तान में उत्पीड़न और दमन के शिकार हिंदुओं की दुर्दशा की तरफ पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। उन्होंने तर्क_भारत के इंस्टाग्राम पोस्ट को अपना इंस्टाग्राम स्टेटस बनाया। इस पोस्ट में पाकिस्तान में हिदुओं पर हो रहे अत्याचार से जुड़े तथ्य रखे गए हैं।

तथ्य_भारत के जिस इंस्टाग्राम पोस्ट को राहुल तेवतिया ने अपना स्टेटस बनाया है, उसमें बताया गया है ”पाकिस्तान में हर तीसरी हिंदू नाबालिग लड़की रेप पीड़िता है। उन्हें अपहृत कर मार दिया जाता है, अगर वो पाकिस्तान में इस्लाम नहीं अपनाती हैं। क्यों वैश्विक मीडिया, भारतीय सेलिब्रिटी और मानवाधिकार संगठन इस अहम मुद्दे पर खामोश हैं?”

इसकी अगली स्लाइड में लिखा है, ‘रफाह में 46 लोग मारे गए, पूरी दुनिया की मीडिया आँसू बहाने लगी, लेकिन लाखों हिंदू कश्मीर, पाकिस्तान, बांग्लादेश में क्रूरता से नरसंहार का शिकार बना दिए गए, किसी ने इसे स्वीकार तक नहीं किया, इसे कवर करना तो दूर की बात।’ इस पोस्ट की अगली स्लाइड्स में पाकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बारे में बताया गया है।

इस पोस्ट को राहुल तेवतिया ने अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर स्टेटस के तौर पर लगाया है। बता दें कि राहुल तेवतिया अपनी काबिलियत के दम पर 2021 में भारतीय टीम में भी चुने गए थे, लेकिन उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। राहुल तेवतिया विस्फोटक बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं। वो एक ही ओवर में पूरे मैच को बदलने का दमखम रखते हैं और कई बार ये कारनामा करके वो दिखा भी चुके हैं। हालाँकि इस बार उन्होंने बल्ले से नहीं, बल्कि इंस्टाग्राम पर एक ही पोस्ट से पूरे इकोसिस्टम को तहस नहस कर दिया है।

सड़क पर नमाज से रोक दी ट्रैफिक, गाड़ियों को बदलना पड़ा रास्ता… हिन्दू संगठनों की चेतावनी के बाद पुलिस ने दर्ज की FIR, कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार पर उठे सवाल

कर्नाटक का मंगलुरु मुस्लिम जनसंख्या के कारण संवेदनशील इलाका है। अब यहाँ का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें सड़क पर ट्रैफिक रोक कर मुस्लिम भीड़ नमाज पढ़ रही है। वीडियो वायरल होने के बाद जब हिन्दू संगठनों और भाजपा ने विरोध किया, तब कॉन्ग्रेस के शासन वाली राज्य की पुलिस ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए FIR दर्ज की है। घटना कंकनाडी इलाके की है। शुक्रवार (24 मई, 2024) को जुमे के दिन मुस्लिम भीड़ ने सड़क पर जुट कर नमाज पढ़ी थी।

इस कारण दोनों ओर से आने-जाने वाली गाड़ियाँ रुकी हुई थीं और ट्रैफिक में व्यवधान पैदा हो गया था। जहाँ नमाज पढ़ी गई, वहाँ सामने ही एक मस्जिद है। वहाँ से आने-जाने वाली गाड़ियों को इसके बाद दूसरे रास्ते का इस्तेमाल करना पड़ा। पुलिस ने अब इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ IPC की धारा-341 (गलत तरीके से किसी को रोकना), 283 (सार्वजनिक रास्ते में बाधा डालना), 143 (गलत तरीके से भीड़ जुटाना) और 149 (विधि विरुद्ध जनसमूह) के तहत मामला दर्ज किया है।

वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस हाथ पर धात धरे बैठी रही, जिसके बाद हिन्दू संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर कार्रवाई नहीं की गई तो वो भी सड़कों पर और सार्वजनिक स्थानों पर भीड़ जुटा कर हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। VHP (विश्व हिन्दू परिषद) नेता शरण पुम्पवेल ने भी सरकार को चेताया। पुलिस को कार्रवाई के लिए एक ज्ञापन भी सौंपा गया। भाजपा नेता व पूर्व मंत्री KS ईश्वरप्पा ने कहा कि हिन्दू समाज ऐसी हरकतों को बर्दाश्त नहीं करेगा और पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो दंगे भड़क सकते हैं।

शरण पुम्पवेल VHP के दक्षिण पंथ के जॉइंट सेक्रेटरी भी हैं। उन्होंने कहा कि समाज में वैमनस्य फैलाने के लिए ऐसी हरकतों को अंजाम दिया जा रहा है। दक्षिण कन्नड़ के सांसद नलिन कुमार कटील ने कहा कि ये घटना कॉन्ग्रेस राज में कानून की धज्जियाँ उड़ाने वाली है। उधर इस्लामी संगठन SDPI के जिलाध्यक्ष अनवर सादत ने कहा कि VHP इस मामले का इस्तेमाल कर के सनसनी फैला रही है। वहीं एक अन्य मुस्लिम नेता K अशरफ ने दावा किया कि कभी-कभार होने वाली चीजों का इस्तेमाल सांप्रदायिक तनाव फैलाने के लिए किया जा रहा है।

मनुस्मृति का विरोध करते-करते शरद पवार की पार्टी के नेता ने फाड़ डाली आंबेडकर की तस्वीर: पूर्व मंत्री जितेंद्र अव्हाड के खिलाफ प्रदर्शन

शरद पवार की अगुवाई वाली एनसीपी के नेता जितेंद्र आव्हाड ने मनुस्मृति के श्लोक को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के विरोध में प्रदर्शन किया। इस दौरान उन्होंने मनुस्मृति की प्रतिया फाड़ी, लेकिन इस दौरान उन्होंने ऐसी गलती कर दी, जिसका उन्हें बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। उन्होंने मनुस्मृति को फाड़ने के दौरान ही भारत रत्न डॉ भीमराव आँबेडकर की तस्वीर भी फाड़ दी।

शरद पवार की अगुवाई वाली राष्ट्रीय कॉन्ग्रेस पार्टी (एनसीपी-एसपी) के नेता जितेंद्र आव्हाड महाराष्ट्र के म्हाड में ये प्रदर्शन कर रहे थे, जब उन्होंने बाबा साहेब आँबेडकर की तस्वीर फाड़ी। बाबासाहेब आँबेडकर का पोस्टर फाड़ने पर बीजेपी ने काफी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी नेता ने कहा, “उन्होंने बाबा साहब के पोस्टर फाड़ दिए। यह सिर्फ आँबेडकर का ही नहीं बल्कि पूरे दलित समुदाय का अपमान है।”

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी ने आँबेडकर की तस्वीर फाड़ने के लिए जितेंद्र आव्हाड के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने की माँग की। एनसीपी के मुख्य प्रवक्ता उमेश पाटिल ने माँग की कि आव्हाड को जल्द से जल्द गिरफ्तार किया जाना चाहिए और राज्य सरकार को डॉ. बीआर आँबेडकर की तस्वीर फाड़ने और उसे रौंदने के लिए उनके खिलाफ तुरंत मामला दर्ज करना चाहिए। पाटिल ने कहा, “मनुस्मृति को जलाने के नाम पर भागेंद्र (जितेंद्र) आव्हाड ने बाबा साहब अंबेडकर की मूर्ति को फाड़ दिया और उसे रौंद दिया।” पाटिल ने यह भी कहा कि आव्हाड को पार्टी से निकाल दिया जाना चाहिए।

इस बीच, जितेंद्र आव्हाड ने महाराष्ट्र के लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए उनसे “बिना शर्त माफी” माँग ली। घटना के बारे में बताते हुए आह्वाड ने कहा, “भावनात्मक रूप से मनुस्मृति का विरोध करते हुए मैंने पोस्टर फाड़ दिया क्योंकि उस पर मनुस्मृति शब्द लिखा था। मुझे नहीं पता था कि उस पर बाबासाहेब की तस्वीर है। विपक्ष इस पर राजनीति करेगा। मैंने गलती की। मैं बहुत ज्यादा ध्यान नहीं देने के लिए माफी माँगता हूँ!”

कॉन्ग्रेसी CM और नेहरू के मंत्री हुमायूँ कबीर ने लगाया अड़ंगा, लेकिन एक संघी ने कर दिखाया… वो शख्स, जो न होता तो विवेकानंद शिला स्मारक होता मिशनरी जेवियर का मेमोरियल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (30 मई, 2024) की शाम को लोकसभा चुनाव 2024 के अंतिम व 7वें चरण के लिए चुनाव प्रचार का शोर थमने के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु के कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद रॉक मेमोरियल पहुँच रहे हैं, जहाँ 2 दिनों तक वो साधना में मगन रहेंगे। वो उसी जगह पर ध्यान धरेंगे, जहाँ कभी माँ पार्वती ने तपस्या की थी और जहाँ तैर कर पहुँचे स्वामी विवेकानंद ने अपने ‘स्व’ को जागृत किया था। वहीं उनके मन में ‘भारत माता’ का भी विचार आया, जिसने देश को एक किया।

विवेकानंद रॉक मेमोरियल के बारे में बता दें कि भारत की मुख्य भूमि से आधे किलोमीटर की दूरी पर समुद्र में स्थित है। जहाँ विवेकानंद को ज्ञान प्राप्त हुआ, उसी जगह पर 1970 में ये मेमोरियल बनाया गया। उसी शिला पर जहाँ माँ कन्याकुमारी (पार्वती) ने तपस्या की थी, मान्यता है कि आज भी वहाँ उनके चरणों के निशान हैं। कन्याकुमारी ही वो जगह है जहाँ बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिन्द महासागर का मिलन होता है। इस जगह का अपना एक आध्यात्मिक महत्व है।

क्या आपको पता है आज जो विवेकानंद रॉक मेमोरियल कन्याकुमारी का मुख्य आकर्षण है, उसका निर्माण RSS के सर-कार्यवाह (General Secratary) रहे एकनाथ रानडे ने करवाया था। एकनाथ रानडे ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख भी रहे। उन्होंने ‘विवेकानंद केंद्र’ नामक संस्था की भी स्थापना की। 19 नवंबर, 1914 को जन्मे एकनाथ रानडे का निधन 22 अगस्त, 1982 को हुआ था – अंतिम संस्कार भी कन्याकुमारी के विवेकानंदपुरम में ही किया गया।

एकनाथ रानडे: मानव-निर्माण और राष्ट्र-पुनरुत्थान के नेता

आइए, आपको एकनाथ रानडे और विवेकानंद रॉक मेमोरियल के बारे में और जानकारी देते हैं। एकनाथ रानडे त्याग और सेवा पर बल देते हुए मनुष्य-निर्माण एवं राष्ट्र-पुनरुत्थान के लिए प्रयासरत थे। जब उनका हार्ट अटैक के कारण निधन हुआ, तब वो तब वो मद्रास स्थित अपने दफ्तर में थे और कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद केंद्र जाने वाले थे। वो उस दौरान कश्मीर, दिल्ली, अजमेर, मुंबई, अहमदाबाद, नागपुर, पुणे और शोलापुर का दौरा कर के लौटे थे।

इस दौरान वो विवेकानंद केंद्र के शाखाओं का दौरा करते और वहाँ के लोगों से मिलजुल कर उन्हें प्रशिक्षित करते थे। आज पोर्ट ब्लेयर में विवेकानंद केंद्र विद्यालय संचालित हो रहा है, जो उन्हीं की देन है। उत्तर-पूर्व में उन्होंने जनजातीय समाज के उत्थान के लिए काम किया। अरुणाचल प्रदेश के लोहित जिले में स्थित सुदूर तफरागाम तक में उन्होंने विद्यालय खोला। स्वामी विवेकानंद रॉक मेमोरियल के निर्माण में 6 साल लगे। इसका काम 1964 में शुरू हुआ था, जो 1970 तक चला।

11 सितंबर, 1970 को इसका उद्घाटन हुआ। अप्रैल 1980 में एकनाथ रानडे को हार्ट अटैक आया था, लेकिन वो किसी तरह मौत से जूझते हुए इससे बाहर निकले, जिसे डॉक्टरों तक ने चमत्कार बताया। वो इसे अपने दूसरा जीवन मानते थे। उनका जन्म महाराष्ट्र के अमरावती के तिम्ताला में हुआ था। उनके पिता रामकृष्ण स्टेशन मास्टर हुआ करते थे। नागपुर में उनके बड़े भाई काशीनाथ छोटे-मोटे कारोबार करते थे, वहीं उनकी शिक्षा-दीक्षा हुई।

एकनाथ रानडे का जीवन, विवेकानंद रॉक मेमोरियल के लिए दान संग्रह

मध्य प्रदेश के सागर यूनिवर्सिटी से उन्होंने कानून की परीक्षा पास की थी। 1938 में नागपुर में रहने के दौरान ही वो RSS के संस्थापक केशव बलिराम हेडगेवार के संपर्क में आए और उन्हें संघ में बतौर प्रचारक चुना गया। जब पूर्वी बंगाल (अब बांग्लादेश) से पश्चिमी बंगाल में पलायन का दौर था, उस दौरान एकनाथ रानडे रामकृष्ण मिशन के संपर्क में आए। उन्होंने बंगाली भी सीखी। उस दौरान उन्होंने पूर्वी बंगाल से आए शरणार्थियों की सेवा की।

एकनाथ रानाडे के जीवन की संक्षिप्त में बात करें तो उन्होंने 1920 में नागपुर के फड़णवीसपुरा विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा हासिल की। 1926 में RSS से जुड़े। 1932 में न्यू इंग्लिश हाईस्कूल से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की। 1938 में दर्शनशास्त्र से BA किया। पहले वो जबलपुर में प्रचारक बने, फिर महाकौशल और मध्य प्रदेश में प्रान्त प्रचारक। 1953 में RSS के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख और 1955 में सरकार्यवाह। 1962 में उन्हें संघ का अखिल भारतीय बौद्धिक प्रमुख नियुक्त किया गया।

1963 में उन्होंने स्वामी विवेकानंद की जन्म शताब्दी पर ‘हे हिन्दू राष्ट्र उतिष्ठत! जाग्रत!!’ नामक पुस्तक की रचना की, जिसमें स्वामीजी के विचारों का संकलन था। विवेकानंद रॉक मेमोरियल की स्थापना के लिए किया गया उनका मैराथन प्रयास भी जानने लायक है। उन्होंने देश भर में घूम कर सबसे एक-एक रुपए इकट्ठे करने का अभियान चलाया। जब उनसे किसी ने कहा कि कई लोग हजारों रुपए भी देना चाहते हैं तो उन्होंने कहा कि ये मेमोरियल तो एक अकेला धनी-दानी व्यक्ति भी बनवा सकता है, लेकिन इसका उद्देश्य है अधिकाधिक लोगों तक स्वामी विवेकानंद का सन्देश पहुँचाना।

उनका कहना था कि काम तभी बनेगा जब लोग सिर्फ दान के लिए दान न करें, बल्कि सउद्देश्य की सिद्धि के लिए दान करें। उनका स्पष्ट कहना था कि एक व्यक्ति से सिर्फ एक रुपया ही लिया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज से ही एकनाथ रानडे से परिचित नहीं हैं, बल्कि उन्हें 70 के दशक में उनके साथ काम करने का अनुभव प्राप्त है। उन्होंने 9 नवंबर, 1914 को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में एकनाथ रानडे के जन्मशती समारोह में संबोधन देते हुए बताया था कि कैसे विवेकानंद की प्रतिमा की एक-एक डिटेल का उन्होंने ध्यान रखा था।

मसलन, कौन से पत्थर का इस्तेमाल किया जाए जिससे समुद्री हवाओं के बावजूद प्रतिमा लंबे समय तक टिकी रहे, विवेकानंद की आँखें कैसी होनी चाहिए और उनमें क्या दिखना चाहिए, प्रतिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए कौन से केमिकल का इस्तेमाल किया जाए। पीएम मोदी ने बताया था कि उन्होंने हिंदुस्तान के हर कोने के लोगों में ये भावना जगाई कि उन्होंने विवेकानंद रॉक मेमोरियल के लिए योगदान किया है। एकनाथ रानडे विवेकानंद जैसे कई ऊर्जावान युवक तैयार करना चाहते थे।

विवेकानंद रॉक मेमोरियल के पहले चरण का काम 1.20 करोड़ रुपए में पूरा किया गया था। ‘विवेकानंद मंडपम’ के भीतर सभा मंडपम और ध्यान मंडपम हैं। वहीं दक्षिण भारतीय संरचना श्रीपद मंडपम अलग से बनाया गया। एकनाथ रानडे के बारे में एक और बात जानने लायक है कि जब RSS पर महात्मा गाँधी की हत्या के बाद प्रतिबंध लगा था, तो प्रतिबंध हटाने के लिए तत्कालीन केंद्रीय गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल के साथ गुप्त बातचीत का भी वो हिस्सा थे।

कॉन्ग्रेस नेताओं और मिशनरियों ने डाला व्यवधान

RSS नेता HV शेषाद्रि ने अपनी पुस्तक ‘कृतिरूप संघ-दर्शन‘ में स्वामी विवेकानंद शिला स्मारक के निर्माण के दौरान आए व्यवधानों का जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है कि 1963 में जब तमिलनाडु सरकार ने विवेकानंद शिला स्मारक समिति को ये जमीन सौंप दी, उसके बाद वहाँ एक पट्टिका लगाई गई। लेकिन, मिशनरियों ने उसे तोड़ कर उसकी जगह कंक्रीट का बड़ा सा क्रॉस खड़ा कर दिया और गोवा में हिन्दुओं पर अत्याचार करने वाले पुर्तगाल के पादरी जेवियर का स्मारक बनाने की चेष्टा की।

कुछ निडर स्वयंसेवकों ने समुद्र तैर कर पार करने के बाद उस क्रॉस को हटाया। सरकार को वहाँ आसपास धारा-144 लागू करनी पड़ी। मन्नत पद्मनाभन को राष्ट्रीय स्मारक समिति का अध्यक्ष बनाया गया। एक तरह से 1962 ये युद्ध में चीन से हारे भारत के लिए ये विवेकानंद रॉक मेमोरियल संजीवनी बन कर आया। लाखों युवाओं तक स्वामी विवेकानंद की पुस्तकों को पहुँचाया गया। 2 सितंबर, 1970 को तत्कालीन राष्ट्रपति VV गिरी उद्घाटन के दौरान मुख्य अतिथि थे।

ये एकनाथ रानडे का ही कमाल था कि हर विचारधारा के लोग इससे जुड़े और उस कार्यक्रम की अध्यक्षता M करुणानिधि ने की। उस समय हिन्दू विरोधी पेरियार जीवित ही था। अगर एकनाथ रानडे और RSS नहीं होता तो शायद आज उसे कम ‘सेंट जेवियर रॉक’ कह रहे होते और वहाँ जेवियर का स्मारक होता। उस समय भारत के संस्कृति मंत्री रहे हुमायूँ कबीर का कहना था कि इस मेमोरियल के निर्माण से उस जगह की सुंदरता खत्म हो जाएगी।

उस दौरान ईसाई मिशनरियों ने 22 फ़ीट का पत्थर, जिसे स्वामी विवेकानंद से जुड़े कार्यों के लिए लाया गया था, उसे भी तोड़ कर फेंक डाला था। तत्कालीन मुख्यमंत्री भक्तवत्सलम ने भी स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा वहाँ लगाने की अनुमति देने से शुरू में इनकार कर दिया था। एकनाथ रानाडे ने हुमायूँ कबीर से मुलाकात कर के उन्हें मनाया और उनसे CM को पत्र लिखवाया, तब जाकर ये कार्य संपन्न हुआ। इसके लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को 323 सांसदों के हस्ताक्षर भी सौंपने पड़े थे।

‘मजबूत विकास दर, कम होगा कर्ज और ब्याज’: S&P ने भारत की अर्थव्यवस्था की रेटिंग बढ़ाई, ‘मोदी 3.0’ से पहले ही आने लगी खुशखबरी

ग्लोबल रेटिंग एजेंसी एस&पी ( S&P ) ने भारत का आउटलुक ‘स्टेबल’ से ‘पॉजिटिव’ कर दिया है। एस&पी ग्लोबल ने बुधवार को अपने आउटलुक में बदलाव किया है। एस&पी ग्लोबल ने ओवरऑल रेटिंग को ‘BBB-‘ रखा है। रेटिंग एजेंसी का कहना है कि भारत की आर्थिक ग्रोथ मजबूत है, जिसका क्रेडिट मेट्रिक्स पर पॉजिटिव असर है। ये मोदी सरकार की मजबूति कार्यशैली को दर्शाने वाला फैसला दिखता है।

एस&पी ग्लोबल ने अपने नोट में कहा है कि पॉजिटिव आउटलुक हमारे नजरिए को दर्शाता है कि लगातार पॉलिसी में स्थिरता, बेहतर होते आर्थिक रिफॉर्म्स और इंफ्रास्ट्रक्चर पर ऊँचा निवेश लंबी अवधि की विकास संभावनाओं को बनाए रखेंगे। रेटिंग एजेंसी को उम्मीद है कि मौजूदा फिस्कल और मॉनिटरी पॉलिसी से सरकार का कर्ज और ब्याज दोनों कम होगा, जिससे आर्थिक लचीलापन बढ़ेगा, नतीजतन अगले 24 महीनों के भीतर ऊँची रेटिंग देखने को मिल सकती है। पिछले साल मई में, एस&पी ग्लोबल रेटिंग्स ने भारत की ग्रोथ पर स्टेबल आउटलुक के साथ भारत की ओवरऑल रेटिंग को ‘BBB-‘ की थी, तब रेटिंग एजेंसी ने भारत के कमजोर वित्तीय प्रदर्शन और प्रति व्यक्ति कम जीडीपी को जोखिम के रूप में बताया था।

फिस्कल डेफिसिट कम हुआ तो रेटिंग अपग्रेड

मतलब ये कि अगर फिस्कल डेफिसिट आगे जाकर काफी हद तक कम होता है तो रेटिंग एजेंसी भारत की रेटिंग को अपग्रेड कर सकती है, जो कि अभी ‘BBB-‘ पर बरकरार है। इससे सामान्य सरकारी कर्ज में कमी आएगी और ये जीडीपी के 7% से भी नीचे चली जाएगी। इंफ्रास्ट्रक्चर और फिस्कल एडजस्टमेंट में लगातार पब्लिक इन्वेस्टमेंट आर्थिक विकास को बढ़ावा दे सकता है और भारत के कमजोर पब्लिक फाइनेंस में सुधार ला सकता है। साथ ही अगर सेंट्रल बैंक की मॉनिटरी पॉलिसी की प्रभावशीलता और विश्वसनीयता में लगातार और पर्याप्त सुधार देखने को मिलता है, जैसे कि महँगाई को वक्त के साथ कम ब्याज दरों पर मैनेज कर लिया जाता है तो हम रेटिंग भी बढ़ा सकते हैं।

एस&पी ग्लोबल का कहना है कि सरकार का इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च भारत के विकास की राह को आसान करेगा, हम उम्मीद करते हैं कि चुनाव के नतीजों की परवाह किए बिना भारत में सुधार जारी रहेंगे। हालाँकि, एस&पी ग्लोबल ने ये चेतावनी भी दी है कि अगर पब्लिक फाइनेंस के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता में कमी देखने को मिलती है तो वो आउटलुक को फिर से स्टेबल भी कर सकते हैं।

बाकी रेटिंग एजेंसियों का क्या है नजरिया ‘बीबीबी-’

सबसे निचली निवेश श्रेणी रेटिंग है। एजेंसी ने पिछली बार 2010 में रेटिंग आउटलुक को ‘नकारात्मक’ से बढ़ाकर ‘स्थिर’ किया था।अमेरिका की एजेंसी ने कहा कि यदि भारत का राजकोषीय घाटा सार्थक रूप से कम होता है और परिणामस्वरूप सामान्य सरकारी ऋण संरचनात्मक आधार पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के सात प्रतिशत से नीचे आ जाता है, तो वह रेटिंग बढ़ा सकती है। सभी तीन प्रमुख वैश्विक रेटिंग एजेंसियों एसएंडपी, फिच और मूडीज ने भारत को सबसे निम्न निवेश ग्रेड रेटिंग दे रही है।

हालाँकि, फिच और मूडीज ने अपनी रेटिंग पर अब भी ‘स्थिर’ परिदृश्य कायम रखा है। निवेशक इन रेटिंग को देश की साख के मापदंड के तौर पर देखते हैं और इसका उधार लेने की लागत पर प्रभाव पड़ता है।