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कम दाम पर कमजोर-बीमार गायों को खरीदता था रोहिंग्या फेकू महमद मियाँ, फिर काट डालता था: नेपाल में भैंसे का मांस बता कर बेचता था, हिन्दू पत्रकार की हत्या की कोशिश

नेपाल के कोशी प्रदेश में गौहत्या का मामला सामने आया है। यहाँ के सुनसरी जिले में एक मुस्लिम व्यक्ति पर भैंस की आड़ में गाय का मांस बेचने का आरोप लगा है। आरोपित का नाम फेकू महमद मियाँ है। गोकशी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। मामले का खुलासा करने वाले हिन्दू पत्रकार पर भी खुकरी से हमला किया गया है। पुलिस ने केस दर्ज कर के महमद मियाँ को गिरफ्तार कर लिया है। घटना रविवार (26 मई, 2024) की है।

यह मामला सुनसरी के इनरुआ नगरपालिका का है। यहाँ फेकू महमद मियाँ की माँस बेचने की दुकान है। यहाँ के स्थानीय लोग इस दुकान से भैंस का मांस खरीद कर ले जाया करते थे। कुछ स्थानीय पत्रकारों को खबर मिली कि फेकू महमद भैंस के गोश्त की आड़ में गाय का माँस बेच रहा था। इस सूचना की पुष्टि के लिए गणेश यादव नाम के पत्रकार के फेकू महमद की दुकान पर स्टिंग ऑपरेशन किया। यहाँ उन्होंने पाया कि आरोपित की दुकान में कई गायें बँधी हुई थीं। एक गाय कटी हालत में भी मिली।

जब फेकू महमद को पत्रकार गणेश पर शक हुआ तो उसने खुकरी से उन पर हमला कर दिया। इस हमले में गणेश को घाव लगा। फेकू महमद गणेश को मार ही डालना चाहता था। तभी अचानक वहाँ पुलिस पहुँच गई। पुलिस ने न सिर्फ गणेश को बचाया बल्कि फेकू महमद को गिरफ्तार भी कर लिया। गणेश यादव का अस्पताल में इलाज करवाया गया। तलाशी के दौरान दुकान में रखे फ्रिज से गोमांस बरामद हुआ। यहाँ ढेर सारी हड्डियाँ भी पड़ी मिलीं जो गोवंश की बताई जा रहीं हैं। एक मृत गाय भी मिली जिसकी गर्दन को काट दिया गया था। ऑपइंडिया के पास संबंधित वीडियो मौजूद हैं।

घटना की जानकारी मिलते ही आसपास के लोगों सहित हिन्दू संगठन के सदस्यों का जमावड़ा शुरू हो गया। नेपाल में हिन्दू सम्राट सेना के अध्यक्ष राजेश यादव ने ऑपइंडिया से हुई बातचीत में बताया कि फेकू महमद मियाँ मूल रूप से रोहिंग्या मुस्लिम है। फिलहाल उसकी दुकान को सील कर दिया गया है। पता चला कि आरोपित गाँव-गाँव घूम कर बीमार और कमजोर गोवंश कम दामों पर खरीदता था। उसकी नजर निराश्रित गोवंशों पर भी होती थी। वह इन गोवंशों को काट कर भैंस का मांस बता कर लोगों को बेचा करता था।

राजेश यादव ने हमें आगे बताया कि वामपंथी सरकार आने के बाद इस प्रकार के संदिग्धों की करतूतों में इजाफा हुआ है। उन्होंने बताया कि जिस इलाके की यह घटना है वहाँ बहुत तेज़ी से डेमोग्राफी में बदलाव हो रहा है। इस बदलाव की वजह उन्होंने बाहर से आ कर बस रहे रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को बताया है। राजेश का दावा है कि इलाके में न सिर्फ लव और लैंड जिहाद बल्कि गोहत्या की घटनाओं में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। पुलिस प्रशासन पर भी उन्होंने इन घटनाओं को अनदेखा करने का आरोप लगाया है।

‘परिवार और कार्यकर्ताओं से माफ़ी माँगता हूँ’: सेक्स स्कैंडल में फँसे JDS सांसद प्रज्वल ने बताया कब SIT के सामने होंगे पेश, बोले – मेरे खिलाफ रची गई साजिश

कर्नाटक में सेक्स स्कैंडल के मामले में फँसे JDS सांसद प्रज्वल रेवन्ना ने जर्मनी से ही एक वीडियो जारी किया है और जाँच में सहयोग की बात कही है। उन्होंने इस महीने इस प्रकरण पर दूसरा वीडियो जारी किया है। 26 अप्रैल, 2024 को पहले चरण के लोकसभा चुनाव में हासन सीट पर मतदान होने के साथ ही वो विदेश निकल गए थे। उन्होंने वीडियो में कहा है कि वो इस मामले की जाँच के लिए बनी SIT के समक्ष 31 मई को पेश होंगे। साथ ही उन्होंने अपने परिवार से माफ़ी भी माँगी है।

उन्होंने कहा कि सबसे पहले वो अपने दादा पूर्व प्रधानमंत्री HD देवगौड़ा और अपने चाचा पूर्व मुख्यमंत्री HD कुमारस्वामी से माफ़ी माँगना चाहते हैं। उन्होंने कर्नाटक की जनता और पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं से भी क्षमा माँगते हुए कहा है कि उन्हें इसका अफ़सोस है कि विदेश जाने की जानकारी वो नहीं दे पाए। उन्होंने कहा कि 26 अप्रैल को जब मतदान हुआ तब SIT का गठन नहीं हुआ था और उनके खिलाफ कोई केस नहीं था। उन्होंने कहा कि विदेश जाने की उनकी योजना पूर्व से बनी हुई थी और 3-4 दिन बाद YouTube और न्यूज़ चैनलों को देखते वक्त उन्हें मामले का पता चला।

उन्होंने कहा कि इसके बाद राहुल गाँधी सहित विपक्ष के अन्य नेता उनके खिलाफ बयान देते हुए दुष्प्रचार करने लगे। प्रज्वल रेवन्ना का कहना है कि इस दौरान वो अवसाद में चले गए थे, अकेलेपन से जूझ रहे थे। उन्होंने कहा कि हासन में कुछ राजनीतिक ताकतों ने उनके खिलाफ साजिश रची है, इसीलिए उन्होंने खुद को ये सब से दूर कर लिया है। उन्होंने बताया कि वो 31 मई को सुबह 10 बजे SIT के समक्ष पेश होंगे। उन्होंने कहा कि वो जाँच में सहयोग करेंगे और हर सवाल का जवाब देंगे।

उन्होंने विश्वास जताया कि वो इस मामले से निर्दोष साबित होकर निकलेंगे क्योंकि ये मामला झूठा है। बता दें कि प्रज्वल रेवन्ना के खिलाफ कई सेक्स वीडियो वायरल हुए थे और उनके दादा ने बयान जारी कर के उन्हें वापस आने के लिए चेताया भी था। प्रज्वल के पिता रेवन्ना भी इस सेक्स स्कैंडल में फँसे हुए हैं। उन्होंने कहा था कि अगर प्रज्वल आत्मसमर्पण नहीं करते हैं तो उन्हें परिवार से अलग कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा था कि बात न मानने पर प्रज्वल को उनके गुस्से का सामना करना पड़ेगा।

स्कूल के लिए निकली नाबालिग हिन्दू लड़की का मोनिश ने किया अपहरण, लाखों के कैश और जेवरात भी गायब: भाई जाहिद और माज़िद के साथ अब्बा अहमद भी नामजद

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक नाबालिग हिन्दू लड़की के अपहरण का मामला सामने आया है। पीड़िता कक्षा 11 की छात्रा है जो स्कूल गई पर घर लौट कर नहीं आई। लड़की अपने घर से 1 लाख रुपए और जेवरात भी ले गई है। इस मामले में 4 नामजद मुस्लिमों सहित 1 अन्य अज्ञात के खिलाफ शिकायत दी गई है। आरोपितों में 3 सगे भाई और उनके अब्बा शामिल हैं। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना शुक्रवार (24 मई, 2024) की है।

यह घटना बरेली के थाना क्षेत्र अलीगंज की है। शनिवार (25 मई, 2024) को यहाँ पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी नाबालिग बेटी कक्षा 11 की छात्रा है। शुक्रवार को वह गाँव के ही पास अपने स्कूल में मार्कशीट लेने गई थी लेकिन शाम तक घर लौट कर नहीं गई। लड़की के परिजनों ने खोजबीन शुरू की। परिचितों और रिश्तेदारी में पीड़िता नहीं मिली। लड़की के पिता कहीं बाहर रहते हैं। वो अपनी बेटी के गायब होने की खबर पर घर आ गए।

इस बीच पीड़िता के परिजनों ने अपनी तरफ से सुराग लगाना शुरू किया। उन्हें पता चला कि उनके ही थानाक्षेत्र में रहने वाला मोनिश नाम का युवक लड़की को कहीं ले कर गया है। उसके साथ इस काम में किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा मदद किए जाने का आरोप है। शिकायत के मुताबिक मोनिश काफी समय से पीड़िता को परेशान कर रहा था। इसकी शिकायत पहले भी उसके घर वालों से की गई थी। हालाँकि इन मिन्नतों का मोनिश के घर वालों पर कोई असर नहीं पड़ा था। उलटे उन लोगों ने लड़की के परिजनों को ही डाँट कर भगा दिया था।

शिकायतकर्ता ने यह भी दावा किया है कि उनकी बेटी घर से जाते हुए 1 लाख रुपए कैश और कुछ जेवर भी ले गई है। शिकायत में मोनिश के 2 भाईयों सहित उसके अब्बा अहमद रजा को भी नामजद किया गया है। नामजद भाइयों के नाम जाहिद और माजिद हैं। एक अन्य व्यक्ति अज्ञात में दर्ज है। इन सभी पर IPC की धारा 363 व 366 के साथ 120- बी के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

विभव कुमार की जमानत याचिका ख़ारिज, सुनवाई में YouTuber ध्रुव राठी का भी जिक्र, NCW का आदेश – निकाले जाएँ CM केजरीवाल के कॉल रिकॉर्ड्स

AAP की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट के मामले में दिल्ली की तीस हजारी कोर्ट ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के PA रहे विभव कुमार की जमानत अर्जी ख़ारिज कर दी है। जस्टिस सुशिल अनुज त्यागी ने ये फैसला सुनाया। 18 मई, 2024 को विभव कुमार को गिरफ्तार किया गया था और उसे 5 दिन की पुलिस कस्टडी में भेज दिया गया था। 24 मई को उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। आरोप है कि उसने स्वाति मालीवाल के पेट, छाती, पाँव और प्राइवेट पार्ट पर प्रहार किया।

वहीं दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि इस घटना का वीडियो फुटेज CCTV से गायब है। पुलिस ने आशंका जताई है कि इसके पीछे कुछ तकनीकी कारण भी हो सकता है, वहीं ये जानबूझकर किया गया भी हो सकता है। दिल्ली पुलिस की तरफ से बताया गया कि विभव कुमार को अरविंद केजरीवाल के PA के पद से हटाए जाने के बावजूद CM आवास में सब उससे आदेश ले रहे थे, ये दिखाता है कि वो प्रभावशाली है। वहीं स्वाति मालीवाल ने कोर्ट को बताया कि उन्हें जान से मार डालने और बलात्कार की धमकियाँ मिल रही हैं।

उन्होंने बताया कि ध्रुव राठी द्वारा इस घटना पर वीडियो बनाने के बाद ये सब हो रहा है। स्वाति मालीवाल का कहना है कि अगर विभव कुमार बाहर आता है तो उन्हें और उनके परिवार को खतरा है। इस फैसले के बाद विभव कुमार अब दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख करेगा। AAP ने अपने एक बयान में ये जानकारी दी है। उधर NCW (राष्ट्रीय महिला आयोग) ने दिल्ली पुलिस को इस मामले में जुड़े लोगों के कॉल रिकार्ड्स निकालने को कहा है।

दिल्ली के CM और AAP के संयोजक अरविंद केजरीवाल के कॉल रिकॉर्ड्स भी खँगाले जाएँगे। संस्था ने कहा कि ये सूचना मिली है कि स्वाति मालीवाल के CM आवास पहुँचते ही विभव कुमार को फोन कॉल कर के बुलाया गया, ऐसे में ये पता लगाया जाना ज़रूरी है कि किसके आदेश पर ऐसा हुआ। पुलिस कमिश्नर को NCW अध्यक्ष रेखा शर्मा ने पत्र भेजा है। साथ ही स्वाति मालीवाल को धमकी देने वालों के खिलाफ 3 दिन के भीतर कार्रवाई कर रिपोर्ट सौंपने के लिए भी कहा गया है।

‘आदिल है इसलिए जाँच से पहले ही पुलिस पर कर दी कार्रवाई’: कर्नाटक में थाने पर हमला करने वाली भीड़ के 25 हमलावर गिरफ्तार, विश्व हिन्दू परिषद का प्रदर्शन

कर्नाटक के दावणगेरे जिले में शुक्रवार (24 मई, 2024) को मुस्लिम भीड़ ने चन्नागिरी थाने पर हमला किया था। भीड़ पुलिस पर आदिल नाम के युवक को हिरासत में मार डालने का आरोप लगा रही थी। इस हमले में 11 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। पुलिस 3 अलग-अलग FIR दर्ज कर के जाँच कर रही थी। ‘विश्व हिन्दू परिषद’ (VHP) ने इस घटना के विरोध में प्रदर्शन किया है। अब इस घटना में शामिल 25 आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। केस CID को ट्रांसफर कर दिया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सोमवार (27 मई, 2024) को पुलिस ने थाने पर हुए हमले की जानकारी साझा की है। पुलिस ने बताया कि अब तक 25 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य संदिग्धों को चिह्नित करने के प्रयास जारी है। इन सभी हमलावरों पर IPC की धारा 353 और 307 के तहत कार्रवाई की गई है। इस पूरे मामले पर कर्नाटक के गृहमंत्री G परमेश्वर का बयान भी आया है। उन्होंने घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए एक DSP व एक इंस्पेक्टर के निलंबन की पुष्टि की है।

पुलिस के मुताबिक, मृतक आदिल को क्षेत्र में हो रहे जुआ के एक मामले में पूछताछ के लिए लाया गया था। यहाँ कुछ ही देर में उसकी तबीयत खराब हुई। आदिल को अस्पताल ले जाया गया जहाँ उसकी मौत हो गई। मौत की वजह भी ब्लड प्रेशर का लो होना बताया गया। आदिल पर पहले से केस दर्ज होने का भी दावा किया जा रहा है। हालाँकि, आदिल के परिजनों ने पुलिस पर टॉर्चेर का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पुलिस ने रिश्वत की माँग की थी जिसे न मिलने पर आदिल की पिटाई की गई जो बाद में मौत की वजह बनी। राज्य के गृहमंत्री ने कहा कि पूरे घटनाक्रम की जाँच चल रही है। जो भी तथ्य सामने आएँगे उन पर एक्शन लिया जाएगा।

थाने पर हुए इस हमले एक विरोध में विश्व हिन्दू परिषद ने दावणगेरे में प्रदर्शन किया है। VHP ने पुलिस पर हमला करने वालों पर कठोर की माँग उठाई है। JDS और भाजपा ने भी बिना पूरी कार्रवाई के पुलिस वालों को सस्पेंड करने पर सवाल उठाए हैं। भाजपा ने पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की वजह आदिल का मुस्लिम होना बताया है। JDS ने भी पुलिस की जाँच के निष्पक्ष होने पर संदेह जताया है।

‘बड़े मगरमच्छ पकड़े जाने लगे हैं’: IANS से बोले PM मोदी – भारत में पर्यटन का मतलब अब सिर्फ ताजमहल नहीं, अब गेहूँ के एक्सपोर्ट और ब्रेड के इम्पोर्ट वाला धंधा नहीं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समाचार एजेंसी IANS को इंटरव्यू दिया है। इस दौरान उन्होंने मीडिया एजेंसी की तारीफ भी की। जब उनसे पूछा गया कि आजकल राहुल गाँधी और अरविंद केजरीवाल को पाकिस्तान से इतना समर्थन क्यों मिल रहा है, तो उन्होंने कहा कि चुनाव भारत का है और भारत का लोकतंत्र बहुत ही परिपक्व है, तंदरुस्त परंपराएँ हैं और भारत के मतदाता भी बाहर की किसी भी हरकतों से प्रभावित होने वाले मतदाता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें पता नहीं है कि कुछ ही लोग हैं जिनको हमारे साथ दुश्मनी रखने वाले लोग क्यों पसंद करते हैं, कुछ ही लोग हैं जिनके समर्थन में आवाज वहाँ से क्यों उठती है।

पीएम मोदी ने कहा कि अब ये बहुत बड़ी जाँच-पड़ताल का यह गंभीर विषय है, उन्हें नहीं लगता है कि वो जिस पर पर बैठे हैं वहाँ से ऐसे विषयों पर कोई टिप्पणी करनी चाहिए, लेकिन वो इस चिंता को समझते हैं। भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम और जनता का लूटा हुआ पैसा वापस पहुँचने के मुद्दे पर IANS से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत के लोग भ्रष्टाचार से तंग आ चुके हैं, दीमक की तरह भ्रष्टाचार देश की सारी व्यवस्थाओं को खोखला कर रहा है।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार के लिए आवाज भी बहुत उठती है। उन्होंने याद किया कि जब वो 2013-14 में चुनाव के समय भाषण देते थे और भ्रष्टाचार की बातें बताते थे तो लोग अपना रोष व्यक्त करते थे। लोग चाहते थे कि हाँ, कुछ होना चाहिए। उन्होंने जानकारी दी कि 2014 के बाद व्यवस्थागत तरीके से उन चीजों को करने पर बल दिया कि सिस्टम में ऐसे कौन से दोष हैं अगर देश पॉलिसी ड्रिवन है और ब्लैक एंड व्हाइट में चीजें उपलब्ध हैं कि भई ये कर सकते हो ये नहीं कर सकते हो।

उन्होंने कहा कि ग्रे एरिया मिनिमल हो जाता है जब ब्लैक एंड व्हाइट में पॉलिसी होती है और उसके कारण डिसक्रिमिनेशन के लिए कोई संभावना नहीं होती है, तो हमने एक तो पॉलिसी ड्रिवन गवर्नेंस पर बल दिया। उन्होंने बताया कि दूसरा हमने स्कीम्स के सैचुरेशन पर बल दिया कि भई 100% जो स्कीम जिसके लिए है उन लाभार्थियों को 100%, जब 100% है तो लोगों को पता है मुझे मिलने ही वाला है तो वो करप्शन के लिए कोई जगह ढूँढेगा नहीं।

पीएम मोदी ने कहा कि करप्शन करने वाले भी कर नहीं सकते क्योंकि वो कैसे-कैसे कहेंगे, हाँ हो सकता है कि किसी को जनवरी में मिलने वाला मार्च में मिले या अप्रैल में मिले ये हो सकता है लेकिन उसको पता है कि मिलेगा और मेरे हिसाब से सैचुरेशन करप्शन फ्री गवर्नेंस की गारंटी देता है। बकौल प्रधानमंत्री, सैचुरेशन सोशल जस्टिस की गारंटी देता है और सैचुरेशन सेकुलरिज्म की गारंटी देता है। उन्होंने कहा कि ऐसे त्रिविध फायदे वाली हमारी दूसरी स्कीम, तीसरा मेरा प्रयास रहा कि मैक्सिमम टेक्नोलॉजी का उपयोग करना।

पीएम मोदी ने कहा कि टेक्नोलॉजी में भी हुआ, क्योंकि रिकॉर्ड मेंटेन होते हैं, ट्रांसपेरेंसी रहती है। उन्होंने जानकारी दी कि अब डायरेक्ट बेनेफिट ट्रांसफर में 38 लाख करोड़ रुपए ट्रांसफर किए गए। साथ ही उन्होंने याद किया कि अगर राजीव गांधी के जमाने की बात करें कि एक रुपया जाता था तो 15 पैसा पहुँचता था तो 38 लाख करोड़ तो हो सकता है 25-30 लाख करोड़ रुपया ऐसे ही गबन हो जाते तो हमने टेक्नोलॉजी का भरपूर उपयोग किया है।

पीएम मोदी ने कहा कि जहाँ तक करप्शन का सवाल है देश में पहले क्या आवाज उठती थी कि भई करप्शन तो हुआ लेकिन उन्होंने किसी छोटे आदमी को सूली पर चढ़ा दिया। उन्होंने कहा कि सामान्य रूप से मीडिया में भी चर्चा होती थी कि बड़े-बड़े मगरमच्छ तो छूट जाते हैं, छोटे-छोटे लोगों को पकड़कर आप चीजें निपटा देते हो। पीएम ने कहा कि फिर एक कालखंड ऐसा आया कि हमें पूछा जाता था 19 के पहले कि आप तो बड़ी-बड़ी बातें करते थे क्यों कदम नहीं उठाते हो, क्यों अरेस्ट नहीं करते हो, क्यों लोगों को ये नहीं करते हो।

उन्होंने याद किया कि हम कहते थे भई ये हमारा काम नहीं है, ये स्वतंत्र एजेंसी कर रही है और हम बदइरादे से कुछ नहीं करेंगे। जो भी होगा हमारी सूचना यही है जीरो टोलरेंस दूसरा तथ्यों के आधार पर ये एक्शन होना चाहिए, परसेप्शन के आधार पर नहीं होना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया कि तथ्य जुटाने में मेहनत करनी पड़ती है, अब अफसरों ने मेहनत भी की अब मगरमच्छ पकड़े जाने लगे हैं तो हमें सवाल पूछा जा रहा है कि मगरमच्छों को क्यों पकड़ते हो।

पीएम मोदी ने कहा, “ये समझ में नहीं आता है कि ये कौन सा गैंग है, खान मार्केट गैंग जो कुछ लोगों को बचाने के लिए इस प्रकार के नैरेटिव गढ़ती है। पहले आप ही कहते थे छोटों को पकड़ते हो बड़े छूट जाते हैं। जब सिस्टम ईमानदारी से काम करने लगा, बड़े लोग पकड़े जाने लगे तब आप चिल्लाने लगे हो। दूसरा पकड़ने का काम एक इंडिपेंडेंट एजेंसी करती है। उसको जेल में रखना कि बाहर रखना, उसके ऊपर केस ठीक है या नहीं है ये न्यायालय तय करता है उसमें मोदी का कोई रोल नहीं है, इलेक्टेड बॉडी का कोई रोल नहीं है लेकिन आजकल मैं हैरान हूँ। दूसरा जो देश के लिए चिंता का विषय है वो भ्रष्ट लोगों का महिमामंडन है। हमारे देश में कभी भी भ्रष्टाचार में पकड़े गए लोग या किसी को आरोप भी लगा तो लोग 100 कदम दूर रहते थे। आजकल तो भ्रष्ट लोगों को कंधे पर बिठाकर नाचने की फैशन हो गई है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि तीसरा प्रॉब्लम है जो लोग कल तक जिन बातों की वकालत करते थे आज अगर वही चीजें हो रही हैं तो वो उसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने उदाहरण दिया कि पहले तो वही लोग कहते थे सोनिया जी को जेल में बंद कर दो, फलाने को जेल में बंद कर दो और अब वही लोग चिल्लाते हैं। पीएम मोदी का मानना है कि जैसे मीडिया का काम है कि लोगों से पूछे कि बताइए छोटे लोग जेल जाने चाहिए या मगरमच्छ जेल जाने चाहिए। पूछो जरा पब्लिक को क्या ओपिनियन है, ओपिनियन बनाइए आप लोग।

गरीबी हटाने की योजनाओं पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारे देश में जो नैरेटिव गढ़ने वाले लोग हैं उन्होंने देश का इतना नुकसान किया। उन्होंने कहा कि पहले चीजें बाहर से आती थी तो कहते थे देखिए देश को बेच रहे हैं सब बाहर से लाते हैं। आज जब देश में बन रहा है तो कहते हैं देखिए ग्लोबलाइजेशन का जमाना है और आप लोग अपने ही देश की बातें करते हैं। बकौल पीएम मोदी, वो ये समझ नहीं पा रहे हैं कि देश को इस प्रकार से गुमराह करने वाले इन ऐलिमेंट्स से देश को कैसे बचाया जाए।

उन्होंने कहा कि दूसरी बात है अगर अमेरिका में कोई कहता है ‘Be American By American’ उसपर तो हम सीना तानकर गर्व करते हैं लेकिन मोदी कहता है वोकल फॉर लोकल तो लोगों को लगता है कि ये ग्लोबलाइजेशन के खिलाफ है, तो इस प्रकार से लोगों को गुमराह करने वाली ये प्रवृत्ति चलती है। पीएम ने कहा कि जहाँ तक भारत जैसा देश जिसके पास मैनपावर है, स्किल्ड मैनपावर है। उन्होंने कहा कि अब वो ऐसी गलती नहीं कर सकते कि गेहूँ एक्सपोर्ट करें और ब्रेड इम्पोर्ट करें, बल्कि वो तो चाहेंगे कि देश में ही गेहूँ का आटा निकले, देश में ही गेहूँ का ब्रेड बने।

प्रधानमंत्री ने समझाया कई देश के लोगों को रोजगार मिले तो उनका ‘आत्मनिर्भर भारत’ का जो मिशन है उसके पीछे उनकी पहली जो प्राथमिकता है कि मेरे देश के टैलेंट को अवसर मिले। उन्होंने कहा कि देश के युवाओं को रोजगार मिले, देश का धन बाहर न जाए, देश में जो प्राकृतिक संसाधन हैं उनका वैल्यू एडिशन हो, देश के अंदर किसान जो काम करता है उसकी जो प्रोडक्ट है उसका वैल्यू एडिशन हो वो ग्लोबल मार्केट को कैप्चर करे और इसलिए उन्होंने विदेश विभाग को भी कहा है कि आपकी सफलता को वो तीन आधारों से देखेंगे – एक, भारत से कितना सामान आप जिस देश में हैं वहाँ पर खरीदा जाता है, दूसरा, उस देश में आधारित टेक्नोलॉजी कौन सी है जो अभी तक भारत में नहीं है, वो टेक्नोलॉजी भारत में कैसे आ सकती है, और तीसरा, उस देश में से कितने टूरिस्ट भारत भेजते हो आप, ये उनका क्राइटेरिया रहेगा।

छोटे-मोटे काम करने वाले गरीबों के संबंध में पीएम मोदी ने कहा कि भारत विविधताओं से भरा हुआ है और कोई देश एक पिलर पर बड़ा नहीं हो सकता है। उन्होंने बताया कि एक मिशन के तहत हर डिस्ट्रिक्ट का वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट पर बल दिया, क्योंकि भारत इतना विविधता भरा देश है, हर डिस्ट्रिक्ट के पास अपनी अलग ताकत है। वो चाहते हैं कि इसको हम लोगों के सामने लाएँ और वो कभी विदेश जाते हैं तो चीजें कौन सी ले जाएँगे, वो उलझन नहीं होती है।

पीएम मोदी ने कहा कि वो सिर्फ वन डिस्ट्रिक, वन प्रोडक्ट का कैटलॉग देखते हैं, तो उन्हें लगता है यूरोप जाएँगे तो यह लेकर जाएँगे, अफ्रीका जाएँगे तो यह लेकर जाएँगे। बकौल पीएम मोदी, यह एक पहलू है दूसरा हमने जी 20 समिट हिंदुस्तान के अलग-अलग हिस्से में की है। क्योंकि, दुनिया को पता चले कि दिल्ली, यही हिंदुस्तान नहीं है। उन्होंने कहा कि अब आप ताजमहल देखें तो टूरिज्म पूरा नहीं होता जी मेरे देश का, मेरे देश में इतना पोटेंशियल है, मेरे देश को जानिए और समझिए और इस बार हमने जी-20 का उपयोग भारत को विश्व के अंदर भारत की पहचान बनाने के लिए किया।

पीएम मोदी ने IANS से कहा कि दुनिया की भारत के प्रति क्यूरियोसिटी बढ़े, इसमें हमने बड़ी सफलता पाई है, क्योंकि दुनिया के करीब एक लाख नीति निर्धारक ऐसे लोग जी-20 समूह की 200 से ज्यादा मीटिंग में आए। वह अलग-अलग जगह पर गए। उन्होंने इन जगहों को देखा, सुना भी नहीं था, देखा वो अपने देश के साथ कोरिलिरेट करने लगे, वो वहाँ जाकर बातें करने लगे। पीएम मोदी ने समझाया कि जी20 के कारण लोग आजकल काफी टूरिस्टों को यहाँ भेज रहे हैं, जिसके कारण हमारे देश का टूरिज्म को बढ़ावा मिला। 

प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कैसे उन्होंने स्टार्टअप वालों के साथ मीटिंग की थी, वो वार्कशॉप करता था। आज से मैं 7-8 साल पहले, 10 साल पहले शुरू- शुरू में यानी 2015-16 के भीतर-भीतर जो नए स्टार्टअप की दुनिया शुरू हुई, उनकी उन्होंने ऐसे वर्कशॉप की है तो मैं अलग-अलग कभी उन्होंने स्पोर्ट्स पर्सन्स के की, कभी मैंने कोचों के साथ की कि इतना ही नहीं उन्होंने फिल्म दुनिया वालों के साथ भी ऐसी मीटिंग की।

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं जानता हूँ कि वह बिरादरी हमारे विचारों से काफी दूर है। मेरी सरकार से भी दूर है, लेकिन मेरा काम था उनकी समस्याओं को समझो क्योंकि बॉलीवुड अगर ग्लोबल मार्केट में मुझे उपयोगी होता है, अगर मेरी तेलुगू फिल्में दुनिया में पॉपुलर हो सकती है, मेरी तमिल फिल्म दुनिया पॉपुलर हो सकती है। मुझे तो ग्लोबल मार्केट लेना था मेरे देश की हर चीज का। आज यूट्यूब की दुनिया पैदा हुई तो मैंने उनको बुलाया। आप देश की क्या मदद कर सकते हैं। इंफ्लुएंसर को बुलाया, क्रिएटिव वर्ल्ड, गेमिंम अब देखिए दुनिया का इतना बड़ा गेमिंग मार्केट। भारत के लोग इन्वेस्ट कर रहे हैं, पैसा लगा रहे हैं और गेमिंग की दुनिया में कमाई कोई और करता है तो मैंने सारे गेमिंग के एक्सपर्ट को बुलाया। पहले उनकी समस्याएँ समझी। मैंने देश को कहा, मेरी सरकार को मुझे गेमिंग में भारतीय लीडरशिप पक्की करनी है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि इतना बड़ा फ्यूचर मार्केट है, अब तो ओलंपिक में गेमिंग आया है तो वो उसमें जोड़ना चाहते हैं। पीएम मोदी ऐसे सभी विषयों में एक साथ काम करने के पक्ष में मैं हैं। उसी प्रकार से देश की जो मूलभूत व्यवस्थाएँ हैं, आप उसको नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। उन्होंने समझाया कि गाँव का एक मोची होगा, सोनार होगा, कपड़े सिलने वाला होगा, वो भी देश की बहुत बड़ी शक्ति है। उसको भी उतना ही तवज्जो देना होगा। उन्होंने समझाया कि इसलिए उनकी सरकार का इंटीग्रेटेड अप्रोच होता है, कॉम्प्रिहेंसिव अप्रोच होता है, होलिस्टिक अप्रोच होता है।

‘डिजिटल इंडिया’ और मे’क इन इंडिया’ का विपक्ष द्वारा कभी मजाक बनाए जाने के सवाल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि डिजिटल इंडिया मूवमेंट उन्होंने शुरू किया तो शुरू में आरोप लगाए गए कि जो सर्विस प्रोवाइडर हैं, उनकी भलाई के लिए हो रहा है। बकौल पीएम मोदी, इनको समझ नहीं आया कि यह क्षेत्र कितना बड़ा है और 21वीं सदी एक टेक्नॉलॉजी ड्रिवन सेंचुरी है, टेक्नोलॉजी आईटी ड्रिवन है, आईटी इन्फोर्स बाय एआई। बहुत बड़े प्रभावी क्षेत्र बदलते जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने दूरदर्शिता का परिचत देते हुए कहा कि हमें फ्यूचरस्टीक चीजों को देखना चाहिए, आज अगर UPI न होता तो कोविड की लड़ाई हम कैसे लड़ते? दुनिया के समृद्ध देश भी अपने लोगों को पैसे होने के बावजूद भी नहीं दे पाए, हम आराम से दे सकते हैं। पीएम मोदी ने ध्यान दिलाया कि आज हम 11 करोड़ किसानों को 30 सेकंड के अंदर पैसा भेज सकते हैं, अब यूपीआई अब इतनी यूजर फ्रेंडली है तो क्योंकि यह टैलेंट हमारे देश के नौजवानों में है। वो ऐसे प्रोडक्ट बना करके देते हैं कि कोई भी कॉमन मैन इसका उपयोग कर सकता है।

बकौल पीएम मोदी, उन्होंने ऐसे कितने लोग देखे हैं जो अपना सोशल मीडिया अनुभव कर रहे हैं, उदाहरण के लिए – “छह मित्रों ने तय किया कि छह महीने तक जेब में 1 पैसा नहीं रखेंगे। अब देखते हैं क्या होता है। छह महीने पहले बिना पैसे पूरी दुनिया में हम अपना काम, कारोबार करके आ गए। हमें कोई तकलीफ नहीं हुई तो हर कसौटी पर खरा उतर रहा है।” पीएम मोदी ने इस उदाहरण के बाद बताया कि यूपीआई ने एक प्रकार से फिनटेक की दुनिया में बहुत बड़ा रोल प्ले किया है और इसके कारण इन दिनों भारत के साथ जुड़े हुए कई देश यूपीआई से जुड़ने को तैयार हैं क्योंकि अब फिनटेक का युग है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऐलान किया कि फिनटेक में भारत अब लीड कर रहा है और इसलिए दुर्भाग्य तो इस बात का है कि जब वो इस विषय को चर्चा कर रहे थे तब देश के बड़े-बड़े विद्वान जो पार्लियामेंट में बैठे हैं वह इसका मखौल उड़ाते थे, मजाक उड़ाते थे, उनको भारत के पोटेंशियल का अंदाजा नहीं था और टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य का भी अंदाज नहीं था। पहली बार वोट दे रहे युवाओं से अपने कनेक्ट के संबंध में पीएम मोदी ने कहा कि वो उनके एस्पिरेशन को समझ पाते हैं।

उन्होंने कहा कि जो पुरानी सोच है कि वह घर में अपने पहले 5 थे तो अब 7 में जाएगा, 7 से 9, ऐसा नहीं है। वह 5 से भी सीधा 100 पर जाना चाहता है। पीएम मोदी ने कहा कि आज का यूथ हर, क्षेत्र में वह बड़ा जंप लगाना चाहता है, हमें वह लॉन्चिंग पैड क्रिएट करना चाहिए, ताकि हमारे यूथ के एस्पिरेशन को हम फुलफिल कर सकें और इसलिए यूथ को समझना चाहिए। उन्होंने बताया कि वो परीक्षा पर चर्चा करते हैं और उन्होंने देखा है कि मुझे लाखों युवकों से ऐसी बात करने का मौका मिलता है जो परीक्षा पर चर्चा की चर्चा चल रही है, लेकिन वह उनके साथ 10 साल के बाद की बात करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वह एक नई जनरेशन है, अगर सरकार और सरकार की लीडरशिप इस नई जनरेशन के एस्पिरेशन को समझने में विफल हो गई तो बहुत बड़ी गैप हो जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि कोविड में वो बार-बार चिंतित थे कि यह फर्स्ट टाइम वोटर जो अभी हैं, वह कोविड के समय में 14-15 साल के थे अगर यह चार दीवारों में फँसे रहेंगे तो इनका बचपन मर जाएगा, उनकी जवानी आएगी नहीं, वह बचपन से सीधे बुढ़ापे में चला जाएगा। यह गैप कौन भरेगा?

प्रधानमंत्री ने कहा कि वो उनसे वीडियो कॉन्फ्रेंस से बात करता था। मैं उनको समझाते था का आप यह करिए, और इसलिए हमने डेटा एकदम सस्ता कर दिया। उस समय मेरा डेटा सस्ता करने के पीछे लॉजिक था। वह ईजिली इंटरनेट का उपयोग करते हुए नई दुनिया की तरफ मुड़े और वह हुआ, उसका हमें बेनिफिट हुआ है। पीएम ने कहा कि भारत ने कोविड की मुसीबतों को अवसर में पलटने में बहुत बड़ा रोल किया है और आज जो डिजिटल रिवॉल्यूशन आया है, फिनटेक का जो रिवॉल्यूशन आया है, वह हमने आपत्ति को अवसर में पलटा उसके कारण आया है तो मैं टेक्नोलॉजी के सामर्थ्य को समझते हैं, वो टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देना चाहते हैं।

भारत में घुसे, बनवाए फर्जी दस्तावेज… मुंबई की कोर्ट ने 20 बांग्लादेशियों को सुनाई 8 महीने की सजा, जुर्माना भी लगाया

मुंबई की एक अदालत ने भारत में घुसपैठ करने वाले 20 बांग्लादेशियों को 8 माह की सजा सुनाई है। इन पर 4-4 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। जुर्माना न भरने पर इन्हें 16 महीने की अतिरिक्त सजा काटनी पड़ेगी। अदालत ने इन्हें गैर कानूनी तरीके से भारत में प्रवेश करने और फर्जी पहचान पत्र तथा अन्य कागजात बनवाने का दोषी पाया। सजा का ऐलान शुक्रवार (24 मई 2024) को हुआ।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 19 अक्टूबर 2023 को मुंबई की बोरीवली पुलिस को अवैध तौर पर मौजूद बांग्लादेशियों की सूचना मिली थी। पुलिस ने दबिश देकर 3 बांग्लादेशी गिरफ्तार किए। इनसे हुई पूछताछ के आधार पर नालासोपारा, विरार और पुणे से 17 और घुसपैठियों को दबोचा गया। पुलिस ने इन सभी के खिलाफ जाँच कर आरोप-पत्र अदालत में पेश कर दिए थे। जाँच के दौरान पुलिस की टीमें महाराष्ट्र के कई हिस्सों के अलावा पश्चिम बंगाल तक गईं।

गिरफ्तार घुसपैठियों के पास से अवैध तौर पर बने भारतीय पहचान पत्र व अन्य कागजात बरामद हुए थे। पुणे से इन बांग्लादेशियों को भारत में बसाने और सुविधाएँ देने वाले कुछ एजेंट भी गिरफ्तार किए गए थे। उनसे हुई पूछताछ में कुछ पुलिस अधिकारियों के नाम सामने आए जो घुसपैठ में मददगार थे। उन्होंने घुसपैठियों के अवैध कागजातों को तैयार करने में एजेंटों का साथ दिया था। पुणे के पुलिस कमिश्नर ने पूरे मामले की जाँच करवाई और 3 अलग-अलग थानों में तैनात कुछ पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर उनके विरुद्ध विभागीय जाँच बिठा दी थी।

इन सभी के खिलाफ मुंबई के किला कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत में बचाव और अभियोजन दोनों पक्षों ने अपनी बात रखी। शुक्रवार को कोर्ट ने पुलिस द्वारा पेश किए गए सबूतों को सजा के लिए पर्याप्त माना। सभी 20 बांग्लादेशी घुसपैठियों को 8-8 माह की कैद और 4-4 हजार के जुर्माने की सजा हुई। सभी घुसपैठियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। सजा पूरी होने के बाद इन्हें बांग्लादेश को सौंप दिया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार इनमें से कई ने भारतीय पहचान का इस्तेमाल कर पासपोर्ट भी बनवा लिए थे। इस पासपोर्ट के आधार पर ये विदेश जाने की फिराक में थे।

दिल्ली में सबसे ज्यादा गुम/चोरी होते हैं मोबाइल फोन, खोया हुआ मोबाइल पाना भी देश में सबसे मुश्किल दिल्ली में ही: जानिए क्या कहता है डाटा

राजधानी दिल्ली में आपका मोबाइल फोन खो जाए तो उसके मिलने की उम्मीद सबसे कम है। दिल्ली में 1% से भी कम फोन वापस उनके यूजर्स को मिलते हैं। दिल्ली के अलावा मिजोरम, ओडिशा पंजाब और त्रिपुरा जैसे राज्यों में भी फोन खोने पर वापस मिलने की काफी कम संभावना काफी होती है।

यह आँकड़ा भारत सरकार के संचार सारथी पोर्टल से आया है। संचार सारथी पोर्टल के अनुसार, दिल्ली में खोए हुए 5.45 लाख फोन में से मात्र 4,893 फोन ही बरामद हुए। यानी दिल्ली में खोए हुए फोन में से केवल 0.90% फोन ही बरामद हुए। दिल्ली वह, राज्य भी है जहाँ देश में सबसे अधिक मोबाइल गायब होते हैं। दिल्ली के अलावा मिज़ोरम में फोन वापस मिलने की दर 1.75, ओडिशा में 4.91 और पंजाब में फोन वापस मिलने की दर मात्र 5.02% है।

दिल्ली के बाद कर्नाटक में सबसे अधिक मोबाइल गायब होते हैं। हालाँकि, कर्नाटक में मोबाइल के वापस मिलने की दर थोड़ी अच्छी है। कर्नाटक में 2.35 लाख खोए हुए मोबाइल में से 38,067 मोबाइल वापस मिल सके। मोबाइल खोने के मामले में देश का सबसे अधिक जनसंख्या वाला राज्य उत्तर प्रदेश पाँचवे नम्बर पर है, जहाँ 62,178 मोबाइल चोरी होने की घटनाएँ हुईं।

पंजाब में 41,176 खोए हुए मोबाइल फोन में से मात्र 2066 फोन बरामद हुए जबकि उत्तर प्रदेश में यह आँकड़ा 62,178 में से 5871 का रहा। इसी तरह तमिलनाडु में 35,539 में से मात्र 3490 मोबाइल फोन ही बरामद हो सके।

कैसे बरामद करें खोया फोन

यदि आपका मोबाइल फोन खो गया है, तो इसे IMEI नंबर और केंद्रीय दूरसंचार मंत्रालय की CEIR योजना के तहत पता लगाया जा सकता है और बाद में वापस किया जा सकता है। गौरतलब है कि हर मोबाइल फोन फिंगरप्रिंट की तरह एक IMEI नंबर होता है। फोन में भले ही सिम कार्ड बदल दिया गया हो, फिर भी IMEI के जरिए उसका पता लगाया जा सकता है। आप पुलिस स्टेशन में FIR कराने के बाद पोर्टल sancharsathi.gov.in के माध्यम से IMEI नंबर को ब्लॉक करने का अनुरोध कर सकते हैं।

एक बार यह पूरा हो जाने के बाद, सिम कार्ड के बावजूद फोन का उपयोग किसी भी नेटवर्क पर नहीं किया जा सकता है। पुलिस नेटवर्क को शामिल करके और लोकेशन ट्रैक करके आपके फोन को ट्रैक कर सकती है। CEIR इसी में काम आता है।

दिलचस्प बात ये है कि भारत के बाजार में मिलने वाले सस्ते और बिना ब्रांड वाले चीनी फोन में 16 अंकों वाले IMEI नंबर नहीं होते, जिससे ऐसे मोबाइल फोन को ट्रैक करना और वापस पाना असंभव हो जाता है। यह बात साफ़ नहीं है कि है कि क्या दिल्ली में खोए और चोरी हुए फोन की खराब रिकवरी दर दिल्ली के निवासियों द्वारा ऐसे चीनी फोन के बड़े पैमाने पर उपयोग के कारण है।

बीवी गई थी मायके घर बुलाकर मदरसे के छात्र का किया रेप, फिर Video वायरल करने की धमकी दे बार-बार किया कुकर्म: नजाकत अली को नाबालिग ने मार डाला

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पीरी-मुरीदी करने वाले नजाकत अली उर्फ नाजू की हत्या में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। उसकी हत्या के आरोप में एक नाबालिग को गिरफ्तार किया गया है। मदरसे में पढ़ने वाले इस नाबालिग का नजाकत ने कई बार रेप किया था। इससे आजिज आकर नाबालिग ने सोमवार (20 मई 2024) को उसकी हत्या कर दी।

यह मामला मुजफ्फरनगर के शाहपुर थाना क्षेत्र का है। झाड़-फूँक का काम करने वाला 45 वर्षीय नजाकत अली लूट, हत्या और गोकशी जैसे 6 मामलों में नामजद था। वह कई बार जेल भी जा चुका है। 20 मई को उसके भाई सदाकत ने पुलिस में सूचना दी कि नजाकत की किसी अज्ञात व्यक्ति ने हत्या कर दी है। मृतक के घर के बाहर ताला लगा हुआ था। अंदर नजाकत की लाश पड़ी हुई थी। हत्या धारदार हथियार से की गई थी। पुलिस ने केस दर्ज कर जाँच शुरू की।

पहले पुलिस ने नजाकत के पुराने आपराधिक इतिहास से उसकी पड़ताल शुरू की तो सफलता नहीं मिली। मुखबिरों से पुलिस को पता चला कि हत्या के दिन नजाकत के घर में एक नाबालिग लड़का गया था। पुलिस ने 15 साल के उस किशोर को खोज निकाला। किशोर नजाकत के घर के पास ही एक मदरसे में पढ़ता था। शुक्रवार (24 मई 2024) को उसे थाने बुलाया। पूछताछ में किशोर ने नजाकत की हत्या करना स्वीकार कर लिया।

किशोर ने बताया कि 4 माह पहले जब वो मदरसे में पढ़ने गया था, तब नजाकत ने उसे अपने घर बुलाया था। घर में कोई और नहीं था। उसकी बीवी अपने 2 बेटों के साथ मायके गई थी। नजाकत अली ने किशोर को डरा-धमकाकर कुकर्म किया। इस दौरान उसने अश्लील वीडियो भी बना डाली थी। यही वीडियो वायरल करने की धमकी दे कर नजाकत ने मदरसे के छात्र से कई बार कुकर्म किया। इस वजह से छात्र काफी परेशान रहने लगा था।

सोमवार (20 मई) को दोपहर 2:30 पर नजाकत ने एक बार फिर से किशोर को अपने घर बुलाया। यहाँ वो किशोर से कुकर्म का प्रयास करने लगा। छात्र ने विरोध किया तो उसकी पिटाई की गई। इसी दौरान छात्र की नजर नजाकत के घर में रखे बाँके (हँसियानुमा धारदार हथियार) पर पड़ी। उसने बाँके को उठा कर नजाकत वार शुरू कर दिए। हमला नजाकत की गर्दन पर किया गया जिस से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। आरोपित बाल अपचारी ने अपने अश्लील वीडियो को डिलीट करने के लिए बाँके से ही नजाकत के मोबाइल के टुकड़े-टुकड़े कर डाले।

हत्या करने और सबूत मिटाने के बाद नाबालिग ने अपने हाथ-पैर धोए। बाद में वह सीढ़ियों के रास्ते नजाकत के छत पर गया जहाँ से वो दूसरों के छतों से होता भाग निकला। नजाकत का मोबाइल भी टुकड़ों में तोड़ कर फेंक दिया गया। पुलिस ने बाल अपचारी को गिरफ्तार कर लिया है हत्या में प्रयोग किया गया बाँका बरामद कर लिया गया है। मामले में जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी है। आरोपित पर IPC 302 के तहत कार्रवाई की गई है।

हिटलर का लिंग नापा और कोरोना वायरस को ‘सेक्स पॉवर’ से जोड़ा, अब नूपुर शर्मा पर ‘दल्लनटॉप’ का झूठ: ब्रा और योनि वाली पत्रकारिता से बना है ‘संपादक’ सौरभ द्विवेदी का करियर

मीडिया संस्थान ‘The Lallantop’ और इसके संस्थापक सौरभ द्विवेदी को अक्सर भाजपा के विरोध में भ्रम फैलाने के लिए जाना जाता रहा है। अपनी ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान भी ‘दी लल्लनटॉप’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पक्ष में कुछ भी सुनना पसंद नहीं करता। अब भाजपा की निलंबित प्रवक्ता नूपुर शर्मा को लेकर मीडिया संस्थान ने झूठ फैलाया है। लल्लनटॉप अक्सर सेक्स से जुड़ी बातें कर के भी ट्रैफिक जुटाता रहा है। YouTube पर इसके 2.96 करोड़ सब्सक्राइबर्स हैं।

नूपुर शर्मा को लेकर सौरभ द्विवेदी का झूठ

यूट्यूब चैनल द लल्लनटॉप पर नेता नगरी नाम के शो में एक दर्शक ने नुपूर शर्मा को लेकर द्विवेदी से प्रश्न पूछा। पंकज शर्मा ने एक शख्स ने प्रश्न उठाया कि लल्लनटॉप पर नुपूर शर्मा को बुलाकर उनसे बातचीत क्यों नहीं की गई। इसका द्विवेदी ने जवाब दिया कि उन्होंने नुपूर शर्मा की टिप्पणियों और उससे उपजे विवाद को लेकर उन्हें अपने चैनल पर आकर चीजें साफ करने के लिए आने का मौक़ा दिया था। सौरभ द्विवेदी ने बताया कि नुपूर शर्मा ने इस पर इनकार कर दिया था। द्विवेदी ने यह भी दावा किया कि उनकी टीम ने फिर से नुपूर शर्मा तक पहुँचने की कोशिश की है ताकि वह अपना पक्ष रख सकें।

ऑपइंडिया से बातचीत में नुपूर शर्मा ने माना है कि 31 मई, 2022 की प्रेस वार्ता में उनकी सौरभ द्विवेदी से से भेंट हुइ थी। कई अन्य पत्रकारों से भी वे मिली थीं जो उस कार्यक्रम में मौजूद थे। लेकिन सौरभ द्विवेदी ने उन्हें कोई प्रस्ताव दिया था ऐसा उन्हें स्मरण नहीं है। सौरभ के दावे को लेकर इसलिए भी संदेह होता है क्योंकि 31 मई को मीडिया से नुपूर के बात करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। उन्होंने मीडिया को बाइट दिया था। 31 मई को ही करीब एक घंटे का साक्षात्कार ऑपइंडिया को दिया था। 

नुपूर शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि अप्रैल 2023 में एक IAS के यहाँ आयोजित पार्टी में सौरभ द्विवेदी और उनकी पत्नी को देख वे हैरान रह गईं थी। उन्होंने ही सौरभ और उनकी पत्नी से मिलने की पहल की थी। इस दौरान नुपूर ने जुबैर के कारण उनकी जिंदगी पर आए खतरों को लेकर बात की थी लेकिन सौरभ द्विवेदी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्हें यह भी याद नहीं कि उन्हें लल्लनटॉप पर आकर अपना पक्ष रखने का कोई प्रस्ताव मिला था, जैसा कि सौरभ द्विवेदी दावा कर रहे हैं।

कोरोना वायरस को लेकर भी लल्लनटॉप ने बेचा ‘सेक्स’

सबसे पहले बात करते हैं हाशमी दवाखाना की। हिटलर के लिंग की सटीक नाप बताकर चर्चा में आए दी लल्लनटॉप आजकल किलोमीटर के हिसाब से (लोकोक्ति) यूट्यूब पर वीडियो बनाते हुए देखा गया था, इनमें से एक सबसे ज्यादा जोशीला वीडियो, जिसने घर पर बंद बैठे युवाओं का ध्यान आकर्षित किया, वो था – “सेक्स पावर बढ़ाने जैसी चाहत से आया कोरोना वायरस”। इस वीडियो की गहराई में जाने की जरूरत तो नहीं है लेकिन इस वीडियो को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस वायरस के खिलाफ वैक्सीन तैयार करने में जुटे हुए वैज्ञानिकों को तो दे ही देना चाहिए था।

अगर यह सम्भव ना हो तो इस विडियो की यूट्यूब लिंक कम से कम से कम नॉर्थ कोरिया को तो दे ही देनी चाहिए थी, क्योंकि जो लोग हिटलर की मौत के इतने वर्षों बाद भी उसके गुप्तांग पर Ph.D कर सकते हैं, वो कोरोना के लिए कोई एंटीडॉट भी जरूर तैयार कर ही देते। यही नहीं, दी लल्लनटॉप अपनी ऑडियंस का ख़ास ध्यान रखते हुए उनके मतलब का फैक्ट चेक करते हुए यह भी साबित करते हुए देखा गया था कि सरसों के तेल से कोरोना वायरस से बचाव नहीं हो पाता है। यह वो ऑडियंस है जो दैनिक सस्ते इन्टरनेट की पूरी डेढ़ जीबी या तो टिकटॉक, या फिर दी लल्लनटॉप के चरणों में ही समर्पित करती रही है।    

ब्रा, पैंटी, योनि, सेक्स, लिंग, वीर्य… लल्लनटॉप में और क्या?

गोपालगंज में एक बच्चे की मौत के बाद उसके पिता ने दावा किया कि मस्जिद में उसकी बलि दी गई है। हालाँकि, बाद में वो अपने बयान से पलट गया। इसके बाद किए गए कथित फैक्ट-चेक में ऑपइंडिया को प्रोपेगंडा और फर्जी खबरों का पोर्टल बिना सबूत के बता दिया।  लल्लनटॉप ने इसी तरह हास्य-व्यंग्य पोर्टल द्वारा बनाई गई एक रिपोर्ट का फैक्ट चेक किया था। इसके बाद पत्रकारिता के इस आखिरी मसीहा ने एक बार सारी जनता के सामने केंद्र सरकार की NPR-NRC नीतियों पर अपने पत्रकारिता के गुरु राजदीप सरदेसाई के साथ बैठकर खुलेआम झूठे आँकड़े पेश किए थे।

साथ ही पकड़े जाने पर बेहद बेशर्मी से यूट्यूब से वीडियो को ना हटाकर चुपके से इसके विवरण में इस ‘भूल’ के बारे में लिख दिया। MEME और फेकिंग न्यूज़ का फैक्ट चेक करना तो दी लल्लनटॉप के मूल्यों का पहला सबक है ही। शूटिंग कर रहे कुछ कलाकारों को मुस्लिम पर हो रहा अत्याचार बताकर दी लल्लनटॉप और उनकी टीम ने जमकर सेक्युलर साहित्य लिखा था।एक साल पुरानी खबर, जिसे पुलिस की जाँच में महीनों पहले फर्जी बता दिया गया था, को ठीक होली के ही दिन दोबारा इसलिए प्रकाशित किया गया ताकि होली को वीर्य का त्योहार साबित कर कुछ सस्ती लोकप्रियता का जुगाड़ किया जा सके।

बजट के दौरान भी लल्लनटॉप ने छपी कामोत्तेजना वाली खबरें

महिलाओं के विषयों पर अन्य से अधिक चिंतित दी लल्लनटॉप जहाँ होली पर इस वजह से चिंतित होता है कि कहीं यह वीर्य का त्योहार तो नहीं, वही दी लल्लनटॉप बजट के दौरान इस बात को लेकर परेशान था कि आखिर प्रियंका चोपड़ा की ड्रेस खिसकती क्यों नहीं? प्रियंका चोपड़ा अपने पति निक जोनास के साथ 62वें ग्रैमी अवार्ड्स में एक ऐसी ड्रेस पहनकर गईं, जिसने दी लल्लनटॉप को परेशान कर दिया। इसके बाद उसने इस पर एक पूरी की पूरी रिपोर्ट छाप दी।

सौरभ द्विवेदी, उनके पिता और कंडोम

ऐसे ही इंडिया टुडे मीडिया समूह की छत्र-छाया में डिजीटल प्लेटफॉर्म पर नाम कमाने वाले ‘दी लल्लनटॉप’ के संपादक सौरभ द्विवेदी की एक छोटी सी चूक से उनकी निष्पक्ष पत्रकारिता वाले मुखौटे की कल बखिया उधड़ गई थी। दरअसल, सोशल मीडिया पर कल सौरभ द्विवेदी को भाजपा समर्थकों को नीचा दिखाने के लिए ड्यूरेक्स कंडोम के विज्ञापन के साथ आपत्तिजनक टिप्पणी शेयर करते पकड़ा गया। स्क्रीनशॉट में देख सकते हैं कि सौरभ द्विवेदी के ट्वीट में ड्यूरेक्स कंडोम के विज्ञापन के साथ एडिटिंग करके लिखा है- ” ये उन लोगों के लिए है जो अब भी भाजपा को समर्थन दे रहे हैं। कृपया इसका इस्तेमाल करें। हम आप जैसे और लोग इस दुनिया में नहीं चाहते।”

इसे शेयर करते हुए वह अपने फॉलोवर्स से पूछते हैं ” HASHTAG चलाना चाहिए कि नहीं मित्रों।” सौरभ ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। लेकिन, उनके ट्वीट का स्क्रीनशॉट ट्विटर पर इस बीच तेजी से वायरल होने लगा और लोग जोर-शोर से दी लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी को उसकी पत्रकारिता और विचारधारा के लिए सवालों के घेरे में घेरने लगे। गौरतलब है कि आज भाजपा के प्रति लोगों में सरेआम जहर फैलाने का करने वाले सौरभ द्विवेदी के पिता (रविकांत द्विवेदी) खुद भाजपा के टिकट पर विधायकी का चुनाव लड़कर दो बार हार चुके हैं।