दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में अंतरिम जमानत की अवधि बढ़ाने के लिए याचिका लगाई है। उन्होंने अपनी जमानत को 8 जून, 2024 तक बढ़ाने की माँग सुप्रीम कोर्ट से की है। उन्होंने इसके लिए अपने स्वास्थ्य का हवाला दिया है।
CM केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है कि 1 जून, 2024 को खत्म हो रही उनकी चुनाव प्रचार के लिए दी गई जमानत को एक सप्ताह के लिए बढ़ा दिया जाए। उन्होंने कहा है कि उन्हें इस एक सप्ताह में कुछ मेडिकल चेकअप करवाने हैं, जिसके लिए उन्हें यह बढ़ी हुई जमानत चाहिए।
मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी अंतरिम जमानत के लिए 7 दिन का Extension मांगा है।
जब वे ED की न्यायिक हिरासत में थे, तब उनका वजन 7 किलो कम हो गया था। वजन का अचानक कम होना डॉक्टरों के लिए चिंता का विषय है।
AAP नेता और दिल्ली सरकार में मंत्री आतिशी ने इस विषय में बताया है कि केजरीवाल के शरीर में कीटोन का स्तर अधिक पाया गया है और जेल में 7 किलो वजन घटा है। आतिशी ने बताया कि उनका वजन भी अचानक कम हुआ है, ऐसे में डॉक्टरों ने इससे किडनी को नुकसान और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बताया है।
आतिशी ने बताया है कि डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर मेडिकल चेकअप करवाने की सलाह दी है, उन्हने पूरे शरीर का PET स्कैन करवाने को कहा गया है। इसी कारण से अरविन्द केजरीवाल को एक सप्ताह की अतिरिक्त जमानत चाहिए।
गौरलतब है कि सुप्रीम कोर्ट ने 10 मई, 2024 को अरविन्द केजरीवाल को 1 जून तक लोकसभा चुनाव में प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत दी थी। उन्हें 2 जून को कोर्ट के सामने आत्मसमर्पण करना था। उन्हें मार्च, 2024 में दिल्ली शराब घोटाला मामले में गिरफ्तार किया गया था । अब उन्होंने स्वास्थ्य आधार पर फिर से जमानत बढ़ाने की माँग की है।
इससे पहले भी वह जेल में स्वास्थ्य को लेकर कई दावे कर चुके हैं। आम आदमी पार्टी ने दावा किया था कि तिहाड़ जेल में ले जाए जाने के बाद CM केजरीवाल का वजन 4.5 किलोग्राम कम हो हुआ था। हालाँकि, इस दावे को तिहाड़ प्रशासन ने नकारते हुए बताया था कि वह जेल में 65 किलोग्राम के आए थे और उतने ही बने रहे थे।
CM केजरीवाल को गिरफ्तार करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट को बताया था कि वह अपना स्वास्थ्य बिगाड़ने के लिए आम और मिठाई खा रहे थे। ऐसा वह जेल के भीतर पाना स्वास्थ्य बिगाड़ने के लिए कर रहे थे ताकि उन्हें स्वास्थ्य आधार पर जमानत मिल सके।
पुणे के ससून अस्पताल के दो डॉक्टरों ने दो लोगों को करोड़ों की पोर्शे से कुचलने वाले नाबालिग का ब्लड सैंपल बदल दिया था। उन्होंने नाबालिग का सैंपल कूड़े में फेंक उसकी जगह दूसरे आदमी के खून की जाँच पर नाबालिग रईसजादे का नाम डाल दिया था। इसकी वजह से शुरुआती रिपोर्ट में उसके नशे की बात नहीं खुली थी। अब पुलिस ने इन दोनों डॉक्टरों को गिरफ्तार कर लिया है।
इस मामले में पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने मीडिया को बताया, “यह पता चला है कि जो ससून अस्पताल में सैंपल लिया गया था, जिस पर वहाँ के डॉक्टरों ने आरोपित का नाम लिख कर और सील करके जाँच के लिए फॉरेंसिक को भेजा था। वह असल में नाबालिग आरोपित का नहीं था।”
#WATCH | Pune car accident case | Pune Police Commissioner Amitesh Kumar says "Sections 120 (B), 467 Forgery and 201, 213, 214 Destruction of evidence have been added in this matter. We received the forensic report yesterday and it has been revealed that the sample collected at… pic.twitter.com/UdurvDuVyu
कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया कि औंध अस्पताल में लिया गया ब्लड सैंपल नाबालिग का ही था और उसका DNA, उसके पिता से भी मिल गया है। ऐसे में औंध वाला ब्लड सैंपल सही निकला है जबकि ससून अस्पताल का सैंपल दूसरा था और नाबालिग का नहीं था। उन्होंने बताया कि दोनों सैंपल में अलग-अलग नतीजे आने के बाद इस मामले की जाँच की गई।
उन्होंने बताया कि जब नाबालिग का सैंपल भेजने वाले डॉक्टरों से पूछताछ की गई तो पता चला कि उन्होंने असली ब्लड सैंपल कूड़े कूड़ेदान में फेंक दिया था। इसकी जगह पर दूसरे व्यक्ति का ब्लड सैंपल लेकर उस पर नाबालिग का नाम लिख दिया गया था।
कमिश्नर अमितेश कुमार ने बताया नाबालिग का ब्लड सैंपल बदलने का काम ससून अस्पताल के फॉरेंसिक विभाग के मुखिया अजय तावरे के कहने पर किया गया था। उन्होंने बताया कि अजात तावरे और ब्लड सैंपल बदलने वाले डॉक्टर श्रीहरी हल्नोर को गिरफ्तार कर लिया गया।
उन्होंने यह भी जानकारी दी कि इन दोनों पर आपराधिक षड्यंत्र रचने, सबूतों से छेड़छाड़ और धोखाधड़ी समेत कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। मामले की आगे जाँच के लिए ससून अस्पताल के CCTV खंगाले जा रहे हैं और दोनों डॉक्टरों को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
ससून अस्पताल में भेजे गए नाबालिग रईसजादे के ब्लड सैंपल में अल्कोहल नहीं मिला था, जिसके बाद पुलिस को इस मामले में शक हुआ था। उसने दूसरा सैंपल लेकर जाँच करवाई तब पूरा खुलासा हुआ। पुलिस का कहना है कि नाबालिग के खून में अल्कोहल का मिलना या नहीं मिलना उनके केस को प्रभावित नहीं करेगा।
गौरतलब है कि हादसे को अंजाम देने से पहले रईसजादे की एक बार में बैठ कर शराब पीते हुए CCTV वीडियो भी सामने आई थी। इसमें वह दोस्तों के बैठ कर पी रहा था। वह एक अन्य बार में भी गया था। इन दोनों बार को पुलिस ने सील कर दिया था।
गौरलतब है कि 19 मई, 2024 की रात को पुणे के कल्याणीनगर इलाके में एक बिल्डर बाप के रईसजादे ने अपनी करोड़ों की पोर्शे से दो लोगों को रौंद दिया था। वह दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे और उनकी इस हादसे में मौत हो गई थी। इसके बाद नाबालिग को 15 घंटे में ही जमानत मिल गई थी। उसे जमानत के लिए एक 300 शब्द का निबन्ध लिखने को कहा गया था। बाद में इस मामले के उठने के बाद उसकी जमानत खारिज हो गई थी।
लल्लनटॉप के संपादक सौरभ द्विवेदी ने हाल ही में एक शो में दावा किया है कि उन्होंने पूर्व भाजपा नेता नुपूर शर्मा को उनके बयान पर सफाई देने का मौका अपने चैनल पर दिया था। नुपूर शर्मा ने सौरभ द्विवेदी की इस बात को झूठ बताया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें ऐसा कोई मौका नहीं दिया गया।
यूट्यूब चैनल द लल्लनटॉप पर नेता नगरी नाम के शो में एक दर्शक ने नुपूर शर्मा को लेकर द्विवेदी से प्रश्न पूछा। पंकज शर्मा ने एक शख्स ने प्रश्न उठाया कि लल्लनटॉप पर नुपूर शर्मा को बुलाकर उनसे बातचीत क्यों नहीं की गई।
इसका द्विवेदी ने जवाब दिया कि उन्होंने नुपूर शर्मा की टिप्पणियों और उससे उपजे विवाद को लेकर उन्हें अपने चैनल पर आकर चीजें साफ करने के लिए आने का मौक़ा दिया था। सौरभ ने इस मामले में अपनी बात नीचे लगे वीडियो में 2 घंटे 11 मिनट से 2 घंटे 19 मिनट के रखी।
द्विवेदी ने दावा किया कि उन्होंने एक बार भाजपा के एक कार्यक्रम और एक बार एक IAS के घर आयोजित निजी कार्यक्रम में नुपूर शर्मा को अपने चैनल पर आकर इस पूरे मुद्दे को रखने का मौका दिया था। सौरभ द्विवेदी ने बताया कि नुपूर शर्मा ने इस पर इनकार कर दिया था। द्विवेदी ने यह भी दावा किया कि उनकी टीम ने फिर से नुपूर शर्मा तक पहुँचने की कोशिश की है ताकि वह अपना पक्ष रख सकें। यह पूरा प्रकरण आनंद रंगनाथन के इस मुद्दे को उठाने के बाद चालू हुआ था।
सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 1 और नुपूर शर्मा का पक्ष
टाइम्स नाउ पर डिबेट के दौरान नुपूर शर्मा ने ज्ञानवापी में मिले शिवलिंग का अपमान करने पर तस्लीम रहमानी को जवाब दिया था। सौरभ द्विवेदी का दावा है कि इसके बाद वे बीजेपी के एक कार्यक्रम में नुपूर से मिले और लल्लनटॉप पर आकर उनसे अपना पक्ष रखने को कहा।
इस दावे की पुष्टि के लिए ऑपइंडिया ने नुपूर शर्मा से बात की। द्विवेदी बीजेपी के जिस कार्यक्रम की बात कर रहे हैं वह मोदी सरकार के आठ साल पूरे होने पर पार्टी की ओर से आयोजित प्रेस वार्ता थी। यह प्रेस वार्ता 31 मई 2022 को हुई थी। मोहम्मद जुबैर द्वारा नुपूर को टारगेट करने के लिए कांटछांट कर वीडियो ट्वीट करने के करीब एक सप्ताह बाद। जुबैर के इसी ट्वीट के बाद नुपूर को दुनिया भर से हत्या और बलात्कार की धमकी मिली थी।
ऑपइंडिया से बातचीत में नुपूर शर्मा ने माना है कि 31 मई की प्रेस वार्ता में उनकी सौरभ द्विवेदी से से भेंट हुइ थी। कई अन्य पत्रकारों से भी वे मिली थीं जो उस कार्यक्रम में मौजूद थे। लेकिन सौरभ द्विवेदी ने उन्हें कोई प्रस्ताव दिया था ऐसा उन्हें स्मरण नहीं है।
सौरभ के दावे को लेकर इसलिए भी संदेह होता है क्योंकि 31 मई को मीडिया से नुपूर के बात करने पर कोई प्रतिबंध नहीं था। उन्होंने मीडिया को बाइट दिया था। 31 मई को ही करीब एक घंटे का साक्षात्कार ऑपइंडिया को दिया था। ऐसे में कोई तुक समझ नहीं आता कि सौरभ द्विवेदी प्रस्ताव दें और नुपूर इनकार कर दें।
थोड़ी देर के लिए यह मान भी लें कि सौरभ ने प्रस्ताव दिया था तो भी वह एक ऐसा कार्यक्रम था जिसमें ढेर सारे पत्रकार मौजूद थे। ऐसी मेल मुलाकात के दौरान अनौपचारिक बातचीतों को औपचारिक न्योता नहीं माना जाता है। यदि सौरभ द्विवेदी वास्तव में नुपूर को अपना पक्ष रखने के लिए लल्लनटॉप का प्लेटफॉर्म मुहैया कराना चाहते थे तो उन्हें औपचारिक तरीके से उनसे संपर्क करना चाहिए था। उनसे बातचीत करनी चाहिए। लेकिन उन्होंने ऐसा कभी किया ही नहीं।
सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 2 और नुपूर शर्मा का पक्ष
सौरभ द्विवेदी ने एक आईएएस अधिकारी की पार्टी में नुपूर शर्मा से मुलाकात और दोबारा प्रस्ताव देने की बात कही है। यह पार्टी अप्रैल 2023 की है। यह एक निजी पार्टी थी और इसके आयोजक IAS दंपती नुपूर शर्मा के पारिवारिक दोस्त हैं।
नुपूर शर्मा ने ऑपइंडिया को बताया कि इस पार्टी में सौरभ द्विवेदी और उनकी पत्नी को देख वे हैरान रह गईं थी। उन्होंने ही सौरभ और उनकी पत्नी से मिलने की पहल की थी। इस दौरान नुपूर ने जुबैर के कारण उनकी जिंदगी पर आए खतरों को लेकर बात की थी लेकिन सौरभ द्विवेदी ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
उन्हें यह भी याद नहीं कि उन्हें लल्लनटॉप पर आकर अपना पक्ष रखने का कोई प्रस्ताव मिला था, जैसा कि सौरभ द्विवेदी दावा कर रहे हैं। फिर से थोड़ी देर के लिए मान लेते हैं कि सौरभ द्विवेदी ने नुपूर को लल्लनटॉप पर आने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन वह एक निजी पार्टी थी और संवाद की पहल भी नुपूर की ओर से हुई थी।
ऐसे में द्विवेदी का यह दावा सफेद झूठ है कि उन्होंने पहल कर नुपूर को प्रस्ताव दिया था। जाहिर है कि सौरभ द्विवेदी की नुपूर का पक्ष जानने में कोई दिलचस्पी ही नहीं थी। यदि ऐसा होता तो वे सीधे नुपूर से संपर्क करते जैसा अमूमन पत्रकार करते हैं।
सौरभ द्विवेदी का दावा नंबर 3 और नुपूर शर्मा का पक्ष
यह दावा सरासर झूठ है। नुपुर शर्मा ने ऑपइंडिया को बातचीत में बताया है कि पिछले महीने आनद रंगनाथन की वीडियो वायरल होने के बाद, सौरभ द्विवेदी या उनकी लल्लनटॉप टीम में से किसी ने भी उनसे संपर्क नहीं साधा है।
गौरतलब है कि एक माह पहले डॉ आनंद रंगनाथन आरजे रौनक के पॉडकास्ट में गए थे। यहाँ उन्होंने नुपूर शर्मा के मामले में द लल्लनटॉप के रवैये पर प्रश्न उठाए थे। डॉ रंगनाथन ने प्रश्न उठाया था कि सौरभ द्विवेदी और लल्लनटॉप ने दृष्टि कोचिंग के मुखिया डॉ विकास दिव्यकीर्ति को हाथों हाथ अपने प्लेटफार्म पर बुलाकर अपना पक्ष रखने का मौका दिया था जब डॉ दिव्यकीर्ति की रामायण का अपमान करने के कारण आलोचना हो रही थी। लेकिन लल्लनटॉप ने यही नुपूर शर्मा के मामले में नहीं किया।
डॉ रंगनाथन ने कहा कि लल्लनटॉप को विकास दिव्यकीर्ति के दावों का फैक्ट चेक करने में कोई खतरा नहीं नजर आया था क्योंकि उन्हें हिन्दू समुदाय से कोई धमकियाँ नहीं मिलती। हालाँकि, वह नुपूर शर्मा की बातों का फैक्ट चेक करने में डरे हुए थे क्योंकि अगर वह कह देते कि नुपूर शर्मा की बातें इस्लामिक सिद्धांतों के अनुसार सही हैं तो उन्हें कट्टरपंथियों से धमकियाँ मिलती।
डॉ रंगनाथन ने सौरभ द्विवेदी के झूठों पर भी जवाब दिया है। उन्होंने कहा, “वाह, नुपूर शर्मा से माफ़ी माँगने के बजाय द लल्लनटॉप के कायर यह दावा कर रहे हैं कि उन्होंने फैक्ट चेक इसलिए नहीं किया क्योंकि वह उनके प्लेटफॉर्म पर नहीं आईं। उनके प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मोदी भी नहीं आते, तो क्या वह लोग उनका फैक्ट चेक नहीं करते?”
झूठ से परे – लल्लनटॉप के सौरभ द्विवेदी की धूर्तता
स्पष्ट है कि सौरभ द्विवेदी ने अपनी कायरता को सही ठहराने के लिए उसके ऊपर झूठ की चादर डाल दी है। उन्होंने नुपूर शर्मा से उनका पक्ष जानने के लिए पिछले 2 साल में एक बार भी व्यक्तिगत रूप से संपर्क नहीं किया। उन्होंने गाहे-बगाहे होने वाली बातचीत को साक्षात्कार के लिए अनुरोध का ढोंग रचा। यही कारण है कि नुपूर शर्मा को यह वाकया याद भी नहीं है।
सौरभ द्विवेदी की पत्रकारिता को देखेंगे तो पाएँगे कि यह झूठ से भी दो कदम आगे जाती है, धूर्तता की सीमा तक। सौरभ द्विवेदी और लल्लनटॉप को किसी खबर के फैक्ट चेक के लिए उससे संबंधित लोगों को अपने शो में बुलाने की जरूरत नहीं। उदाहरण देखिए। क्या लल्लनटॉप ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को अपने शो में बुलाया था? अगर नहीं तो, “भारत के संसाधनों पर मुसलमानों का पहला अधिकार” वाली खबर का फैक्ट चेक कैसे किया?
लल्लनटॉप ने कई ऐसे ‘फैक्ट-चेक’ भी किए हैं, जहाँ वे पीएम मोदी या बीजेपी द्वारा कई बयानों और भाषणों में कही गई बातों के बारे में सच्चाई पेश करने का दावा करते हैं। क्या इन सब फैक्ट चेक के लिए सौरभ द्विवेदी के शो में पीएम मोदी आए?
आखिर सौरभ द्विवेदी इस बात पर क्यों जोर दे रहे हैं कि नुपूर शर्मा को उनके बयान के दावों की फैक्ट चेक के लिए उनके शो में आना चाहिए? नुपूर शर्मा ने जो कहा, वह इस्लामी किताबों के अनुसार तथ्यात्मक रूप से सही है या नहीं, इस पर चर्चा करते हुए इसका फैक्ट चेक किया जा सकता है। क्यों नहीं किया? लल्लनटॉप के शो में हदीस को क्यों नहीं खोल कर पढ़ा गया? क्यों नहीं मोहम्मद जुबैर जैसे इस्लामी ट्रोल्स का फैक्ट चेक किया, जिसने दावा किया था कि नुपूर शर्मा ने ‘इस्लाम का अपमान’ किया? सौरभ द्विवेदी बिना नुपूर शर्मा के एक शो क्यों नहीं कर सके, यह दिखाते हुए कि नुपूर शर्मा का बयान झूठ नहीं था, बल्कि जाकिर नाइक ने भी वही बात कही थी?
यह वीडियो कुछ और नहीं बल्कि सौरभ द्विवेदी की कायरता का प्रतीक है। कट्टर ढंग से फैल चुके वैश्विक इस्लामी तंत्र के डर से सौरभ द्विवेदी एक पीड़ित महिला के पक्ष में खड़ा होने से डर गया।
गौरलतब है कि भाजपा प्रवक्ता की हैसियत से नुपूर शर्मा ने एक टीवी चैनल पर बहस में हिस्सा लिया था। यह बहस ज्ञानवापी परिसर में शिवलिंग मिलने को लेकर रखी गई थी। इसमें एक मुस्लिम वक्ता के शिवलिंग के विषय में अभद्र भाषा बोलने पर नुपूर शर्मा ने पैगम्बर मुहम्मद को लेकर एक टिप्पणी की थी। इसके बाद उनके खिलाफ देश भर में इस्लामी कट्टरपंथियों ने प्रदर्शन किए थे। उनको ‘सर तन से जुदा’ की धमकियाँ दी गई थीं। भाजपा ने उन्हें निलम्बित कर दिया था।
नुपूर शर्मा ने इस विवाद के बाद उनको मिली धमकियों और उनके जीवन में आई कठिनाइयों पर ऑपइंडिया की एडिटर इन चीफ नुपुर जे शर्मा से बात की थी। उन्होंने इस दौरान बताया था कि ऑल्टन्यूज के फाउंडर और प्रोपेगेंडा फैलाने वाले मुहम्मद जुबैर उनके जीवन पर आए खतरे के लिए जिम्मेदार है।
उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले के कोसीकलां में एक बाजार का नाम एक मुस्लिम दुकानदार ने बदल दिया। उसने अपने यहाँ से दिए जाने वाले समान के झोले और प्रचार सामग्री पर पंजाबी बाजार का नाम बदल कर इस्लामिक बाजार कर दिया। दुकानदार को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया गया है।
जानकारी के अनुसार, मथुरा के कोसीकलां में पंजाबी बाजार में वाहिद कुरैशी नाम के एक शख्स की कपड़ों की दुकान है। उसकी यह दुकान ‘ट्रेंड नेवर एंड्स’ नाम से है। वाहिद कुरैशी ने अपनी दुकान पर दिए जाने वाले सामान के झोले पर ‘इस्लामिक बाजार’ नाम से पता छपवाया।
उसकी दुकान से सामान खरीदने वाले एक शख्स ने जब झोले पर यह बदला हुआ पता देखा तो उसने सोशल मीडिया पर इस संबंध में पोस्ट डाली। इसके बाद पंजाबी बाजार के लोग आक्रोशित हो गए। उन्होंने विरोध प्रदर्शन चालू किया। इसके बाद मौके पर पुलिस पहुँची।
दुकानदार वाहिद कुरैशी को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। उसकी दुकान पर छापा मारा और उसकी दुकान से 25 किलो सामान के झोले बरामद किए। वाहिद कुरैशी को इसके बाद पुलिस गिरफ्तार करके कोर्ट में पेश करने ले गई। यहाँ उसे SDM ने जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया।
उसे 14 दिन के लिए जेल भेजा गया है। कोसीकलां नगर पालिका परिषद ने भी दुकानदार को नोटिस जारी किया है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि वाहिद की दुकान के बगल में ही मस्जिद है। यहाँ पहले पंजाबी समुदाय ने दुकानें किराए पर ली हुई थीं। लेकिन बीते कुछ वर्षों में मुस्लिमों की दुकानें यहाँ पर बढ़ी हैं। इसके बाद ही यह घटना सामने आई है।
यह भी बताया गया कि दुकानदार ने इस्लामिक बाजार लिखे झोले का फोटो अपने व्हाट्सएप पर लगा रखा है, उसने इस पूरे मामले पर हंगामा होने के बाद यह फोटो नहीं हटाई। स्थानीय दुकानदारों ने इस मामले की केन्द्रीय एजेंसी से जाँच करवाने की माँग की है।
आईपीएल 2024 का फाइनल मुकाबला कोलकाता नाइट राइडर्स ने जीत लिया। कोलकाता ने आईपीएल 2024 के फाइनल मैच में सनराइजर्स हैदराबाद को आठ विकेट से हराया। इस मैच में हैदराबाद ने 114 रनों का लक्ष्य दिया था, जिसे कोलकाता ने आसानी से 10.3 ओवर में 2 विकेट गँवाकर हासिल कर लिया।
बता दें कि तीसरी बार KKR ने इस ट्रॉफी को जीता है। इससे पहले उन्होंने 2014 सीजन में पंजाब किग्स को हराकर ये खिताब जीता था। उससे पहले उन्होंने ये खिताब 2012 में जीता था।
आईपीएल का खिताब केकेआर को मिलने के बाद टीम के फैंस की खुशी का ठिकाना नहीं है। सोशल मीडिया पर जश्न का माहौल देखा जा सकता है। लोग गौतम गंभीर की मेंटरशिप की तारीफ कर रहे हैं। वहीं श्रेयर अय्यर की कैपटेंसी को भी सराह रहे हैं।
फाइनल मैच में जीत के लिए वेंकटेश अय्यर और गुरबाज अहमद की अर्धशतकीय साझेदारी ने खासी भूमिका निभाई। दोनों खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। दूसरी तरफ पैट कमिंस की टीम को पार्टी की जीत पर एक पल को भी हावी नहीं होने दिया। लोग इस जीत को वर्ल्ड कप का बदला भी बता रहे हैं।
बता दें कि फाइनल मैच में टॉस सनराइजर्स हैदराबाद के कप्तान पैट कमिंस ने जीता था। लेकिन कोलकाता ने गेंदबाजी में अच्छा प्रदर्शन करते हुए सनराइजर्स को सिर्फ 20 ओवर में 113 रन ही बनाने दिए और पूरी टीम को ऑल आउट कर दिया। सनराइजर्स हैदराबाद में सबसे ज्यादा रन पैट कमिंस ने ही बनाए-24। वही केकेआर की ओर से रसन ने तीन विकेट लिए और हर्षित राणा-मिचेल स्टार्क को 2-2 विकेट मिले।
हमास ने इजरायल की राजधानी तेल अवीव को निशाना बना कर कई रॉकेट दागे हैं। रविवार (26 मई 2024) को ये रॉकेट गाजा पट्टी से दागे गए हैं। हमले की जिम्मेदारी अल कासिम ब्रिगेड ने ली है। एक बयान जारी करते हुए अल कासिम ब्रिगेड ने इसे इजरायल द्वारा किए जा रहे नरसंहार का जवाब बताया है। पिछले 4 महीने में हमास की तरफ से इजरायल पर किया गया ये सबसे बड़ा हमला है। इजरायल पर हुए इस हमले के बाद कट्टरपंथियों ने जश्न मनाया है। साथ ही ‘मानवाधिकार और इंसानियत’ की दुहाई की जगह हमास को सराहा है।
इन हमलों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। वायरल वीडियो में शहर के एक हिस्से में धुँआ उठते देखा जा सकता है। रॉकेट से 12 से अधिक इजरायली शहरों के अलग-अलग हिस्सों को टारगेट किया गया है।
???? It seems that Hamas got new toys against which the "iron dome" is powerless
They launched about 10-12 long-range rockets, from Rafah, traveling 100-110km to hit Tel Aviv, after a hiatus of 4 months.
हमास के अल अक्सा टीवी द्वारा इन हमलों की पुष्टि की गई है। बताया जा रहा है कि हमले के बाद तेल अवीव में अलर्ट जारी किया गया है। शहर में सायरन की आवाजें आ रहीं है। तेल अवीव के अलावा इजरायल के अन्य शहरों में भी सुरक्षा बलों को चौकन्ना कर दिया गया है। हालाँकि इजरायल ने आधिकारिक रूप से बताया कि इन हमलों से कोई हताहत नहीं हुआ। यह हमला ऐसे मौके पर हुआ है जब दक्षिणी इस्राइल से गाजा में उन ट्रकों को घुसने की अनुमति मिल गई है जो राहत सामग्री लेकर जा रहे हैं।
This is not a GAME, this is our reality in Israel.
The war won’t stop until Hamas is completely wiped out, and we won’t have to live in fear for our lives every single day.
इजरायल पर हुए इस हमले के बाद कट्टरपंथियों ने जश्न मनाया है। वायरल हो रहे वीडियो में आसमान से गुजर रहे रॉकेटों को देख कर उन्हें ख़ुशी से चिल्लाते देखा जा सकता है। मोसाब हसन ने एक चित्र अपने X हैंडल पर डालते हुए इन हमलों को ‘माइंड ब्लोइंग’ करार दिया है। हालाँकि ये चित्र असली हैं या एडिटेड इसकी जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है।
Today was my first experience under Hamas rocket attack on Tel Aviv. Most rockets were intercepted successfully. The accuracy of the Iron dome is mind blowing. pic.twitter.com/3WujqrOtMz
— Mosab Hassan Yousef (@MosabHasanYOSEF) May 26, 2024
हालाँकि इजरायल के आयरन ड्रोम ने अधिकतर रॉकेट को हवा में ही मार गिराया है लेकिन कई कट्टरपंथियों ने इसका भी मजाक उड़ाया है। फिलिस्तीन समर्थक @NalCordob नाम के X हैंडल ने इसी आशय से एक एडिटेड तस्वीर शेयर की है।
Apparemment le pseudo porte parole de "l'armée la plus morale au monde" ne comprend pas que les palestiniens ?? puissent se défendre. Bizarre pour un "militaire". pic.twitter.com/0CxfBYSfZY
@HilzFuld नाम के एक X हैंडल ने जश्न मनाते कुछ लोगों की तस्वीर शेयर की है। उन्होंने दावा किया है कि ये तस्वीरें गाजा की है जहाँ लोग इजरायल पर हमास के रॉकेट हमले पर ख़ुशी जाहिर कर रहे हैं। इन लोगों को आतिशबाजी करते भी देखा जा सकता है। हालाँकि इस हैंडल ने यह भी दावा किया है कि जश्न मनाने वाले सोच रहे हैं कि हमास के हमले के इजरायल का काफी नुकसान हुआ है जो कि सही नहीं है।
The streets of Gaza are full of celebrations this morning and there’s so much to learn from that.
Hamas released a fake video of them abducting soldiers. It’s confirmed fake.
Lesson # 1: Hamas lies whenever it opens its mouth. Their lies don’t even have to be based on… pic.twitter.com/rZtQ3DHcj2
माना जा रहा है कि हमास द्वारा किए गए इन हमलों के बाद राहत सामग्री वाले ट्रकों वाला समझौता अधर में पड़ सकता है। इस बीच इजरायल ने रफा इलाके में हमास के आतंकियों के छिपे होने की आशंका जताई है। तमाम वैश्विक दबाव के बावजूद इसी वजह से इजरायल रफा पर लगातार हमले कर रहा है। 1 दिन पहले ही इजरायल के हवाई हमले में 5 फिलिस्तीनियों की मौत हो गई थी। माना यह भी जा रहा है कि रॉकेटों से हुए हमले के बाद इजरायल गाजा में अपने हमलों में तेजी भी ला सकता है।
उत्तर प्रदेश के फतेहपुर के उजाड़े गाँव में 20 साल पहले एक हिंदू जोड़े को धोखे से इस्लाम कबूल करवा दिया गया था, अब उस जोड़े ने हिंदू धर्म में वापसी कर ली है। पीड़ितों की पहचान शिव प्रसाद लोधी और कविता के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि इस दंपत्ति को ग्राम के प्रधान मोहम्मद अमिल शेख ने सरकारी पहचान वाले दस्तावेज उपलब्ध कराने के बदले इस्लाम स्वीकारने का दबाव बनाया था।
शेख ने हिंदू दंपत्ति को कहा था मुस्लिम आबादी में जिंदा रहने के लिए यही एक मात्र तरीका है। दोनों ही वाराणसी जिले के रहने वाले हैं, लेकिन रोजगार की तलाश में वह फतेहपुर के उजाड़े गाँव आ गए थे। उस समय उनके पास कोई पहचान पत्र नहीं था। ऐसे में ग्राम प्रधान ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाया। उन्हें इस्लाम में परिवर्तित करके उन्हें पहचान पत्र दिलाए।
शिव का नाम बदलकर अब्दुल्ला रखा गया जबकि कविता का नाम बदलकर फातिमा कर दिया गया। इस पहचान पत्र में इन दोनों के माता-पिता के नाम भी फर्जी लिखवाए गए।
इस घटना के संबंध में स्वराज्य पर प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि यूपी के वारणसी में शिव और कविता का घर था, लेकिन बुरा समय आने पर उन्हें अपनी पैतृक संपत्ति बेचनी पड़ी। इसके बाद वो उजाड़े गाँव गए। उस समय वह गर्भवती थी, लेकिन वहाँ उसका गर्भपात हो गया।
आसपास की महिलाओं ने समझाना शुरू किया कि हिंदू देवी-देवताओं को पूजने की वजह से ऐसा हुआ है। उसे दरगाह में दुआ करनी चाहिए। धीरे-धीरे वो ग्राम प्रधान के संपर्क में आए। वहाँ उसे सूट-सलवार पहनने को कहा गया और बिंदी लगाने से मना कर दिया गा। उसे भी गाँव की अन्य महिलाओं की तरह घर में रहने को कहा गया ।
दो साल बाद, उनके पति शिव प्रसाद लोधी ने मोहम्मद अमिल शेख से उजाड़े गाँव के बाहर एक प्लॉट खरीदा। सौदे के तहत ₹40000 का भुगतान करने के बाद, शिव को एहसास हुआ कि ज़मीन को अपने नाम पर पंजीकृत करने के लिए उन्हें सरकारी दस्तावेज़ों की ज़रूरत है।
जब उन्होंने गाँव के प्रधान से मदद मांगी तो मोहम्मद अमिल शेख ने उन्हें इस्लाम धर्म अपनाने के लिए कहा। स्थानीय मस्जिद में एक समारोह आयोजित किया गया जिसमें शिव और कविता को ‘कलमा ‘ पढ़ने को कहा गया।
दोनों पति-पत्नी मुस्लिम बने लेकिन पड़ोसियों ने उन्हें तंग करना नहीं छोड़ा। उन्हें नमाज पढ़ने को कहा गया । रमजान के दौरान रोजा रखने को कहा जाने लगा। नवरात्रि के व्रत छोड़ने का दबाव बनने लगा। हिंदू त्योहार मनाने से रोक दिया गया। इतना ही नहीं अमिल शेख ने शिव को खतना तक कराने को कहा।
हालाँकि शिव, इससे डर गए और उन्होंने घर का पंजीकरण तक अपने नाम पर नहीं कराया। आज भी वो घर अमिल शेख के नाम पर दर्ज है। खतना न होने की वजह से ग्रामीणों ने शिव का बहिष्कार कर दिया। उन्हें मुंबई जाकर काम करना पड़ा। वहीं कविता उजाड़े गाँव में रहने को मजबूर थी
2023 में शिव प्रसाद को राम बल नाम के हिंदू संगठन के बारे में पता चला। उन्होंने अपने साथ हुई घटना के बारे में संगठन वालों को बताया और उसके बाद संगठन ने बिन देरी किए पुलिस को सूचना दी और गाँव में शिव-कविता की हिंदू धर्म में घर वापसी कराने के इंतजाम कराए। रिपोर्ट के अनुसार, शिव-कविता ने इसी साल इस्लाम त्यागकर हिंदू धर्म अपनाया है। कड़ी सुरक्षा के बीच इस रस्म को पूरा किया गया। हिंदू धर्म में आने के बाद कविता ने कहा कि उन्हें धोखे से इस्लाम में लाया गया था। वो चाहती थी किं हिंदू बनते वो अमिल शेख उन्हें देखे, लेकिन उसका कुछ समय पहले इंतकाल हो गया है।
बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवातीय तूफ़ान रेमल के आज रात में पश्चिम बंगाल के तट से टकराने की आशंका है। तूफ़ान के दौरान 135 किलोमीटर प्रतिघंटे की स्पीड से तेज हवाएँ चलने का अनुमान लगाया जा रहा है। तूफन से कम से कम नुकसान हो इसके लिए प्रशासन लगातार तैयारियों में जुटा हुआ है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 मई 2024) को संबंधित अधिकारीयों के साथ मीटिंग की। मीटिंग में उन्होंने राहत और बचाव कार्यों की तैयारियों की समीक्षा की।
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपदा प्रबंधन के शीर्ष अधिकारियों के साथ मीटिंग की। मीटिंग में उन्होंने तूफ़ान की वर्तमान स्थिति और उसके भारत में होने वाले अनुमानित प्रभाव का जायजा लिया। PM मोदी ने अधिकारियों को उचित दिशा निर्देश भी दिए। उन्होंने तूफ़ान से निबटने के लिए प्रशासनिक स्तर पर की गई तैयारियों की भी समीक्षा की। वायरल हो रहे एक वीडियो में वो अधिकारियों से रूबरू होते नजर आए।
#WATCH | PM Narendra Modi chairs a meeting to review response and preparedness for Cyclone Remal
Cyclone Remal is to make landfall today, at midnight between Bangladesh and adjoining West Bengal coasts, as per IMD. pic.twitter.com/47KsrXOxc9
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रेमल की आहट को देखते हुए पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट घोषित किया गया है। फ़िलहाल तूफ़ान अभी 200 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है। आधी रात के समय यह पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के तट से टकरा सकता है। इसका असर पूरे पश्चिम बंगाल में देखा जाएगा। राजधानी कोलकता में हवाई अड्डे को बंद कर दिया गया है। किसी भी आपात स्थिति से निबटने के लिए NDRF की 14 टीमों को तैनात किया गया है। तटीय इलाकों के लोगों की सुरक्षा पर विशेष ध्याना दिया जा रहा है।
लोगों को घरों के अंदर ही रहने की सलाह दी गई है। समुद्र में किसी भी प्रकार की नाव ले जाने पर सख्त पाबन्दी लगाई गई है। माना जा रहा है कि तूफ़ान से न सिर्फ पश्चिम बंगाल बल्कि पूर्वोत्तर के कई राज्य प्रभावित होंगे। कोलकाता के श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर काम रोक दिया गया है। कई इलाकों में अभी से आसमान में घने बादल छा गए हैं और तेज हवाएँ चल रहीं हैं। कुछ समय पहले ही अम्फान नाम का तूफ़ान में पश्चिम बंगाल में आया था। हालाँकि जानकारों का मानना है कि रेमल की तीव्रता अम्फान से कम है।
लोकसभा चुनाव के सातवें चरण के प्रचार के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 मई 2024) को उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक जनसभा को सम्बोधित किया। इस दौरान उन्होंने INDI गठबंधन को सीमा पार पाकिस्तान और जिहादियों से समर्थन मिलने का आरोप लगाया है। मोदी ने कहा कि समाजवादी पार्टी की जीत के लिए पाकिस्तान में दुआएँ की जा रहीं हैं। विपक्ष के दिए गए शब्द ‘वोट जिहाद’ पर भी नरेंद्र मोदी ने प्रहार किया।
प्रधानमंत्री मोदी की यह जनसभा गोरखपुर जिले के बाँसगाँव इलाके में हुई। यहाँ उन्होंने समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के गठबंधन को माफियाओं और जिहादियों का समर्थक बताया। नरेंद्र मोदी ने कहा कि समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस के लोग वोट जिहाद की अपील कर रहे हैं। उन्होंने भारत विरोधी ताकतों और इंडी गठबंधन वालों के एजेंडा एक समान बताया। कॉन्ग्रेस पर देश की सुरक्षा से खिलवाड़ करने का आरोप लगाते हुए PM मोदी ने कहा कि सपा को पाकिस्तान और जिहादियों का खुला समर्थन प्राप्त है।
नरेंद्र मोदी यहीं नहीं रुके। 4 जून को देश का भविष्य तय करने वाला दिन बताते हुए उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस की मंशा देश को कई साल पीछे ले जाने की है। उन्होंने दावा किया कि अगर इंडी गठबंधन की सरकार सत्ता में आई तो कश्मीर में एक बार फिर से धारा 370 लागू कर दी जाएगी साथ ही शरणार्थियों के लिए बना CAA कानून भी रद्द कर दिया जाएगा। बकौल नरेंद्र मोदी कॉन्ग्रेस ने तब ब्रह्मोस मिसाइल की बिक्री में बाधा डाली जब कई देश इसे खरीदने की इच्छुक थे। इसके पीछे की वजह उन्होंने विपक्ष की भारत को आत्मनिर्भर बनने से रोकने की सोच को बताया।
सपा-कांग्रेस वाले अपने वोट बैंक को खुश करने के लिए बाबासाहेब के संविधान को बदलना चाहते हैं। पूर्वांचल की जनता इस साजिश को कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। बांसगांव में अपनों के बीच हूं। https://t.co/Xo3BxtODlM
अपने सम्बोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस की इच्छा है कि रक्षा क्षेत्र में भारत हमेशा विदेशों पर आश्रित रहे। इस दौरान उन्होंने उदहारण के तौर पर बोफोर्स घोटाले का जिक्र किया। 4 जून को बड़ा मंगलवार बताते हुए नरेंद्र मोदी ने इस दिन तीसरी बार अपनी सरकार बनने की आशा जताई। उन्होंने कहा कि बड़े मंगलवार से देश विकास की मंगल यात्रा पर निकलेगा। सपा और कॉन्ग्रेस द्वारा किए जा रहे जीत के दावों को PM मोदी ने सपने देखना बताया। उन्होंने यह भी कहा कि धर्म के नाम पर आरक्षण का विरोध करने पर इंडी गठबंधन वाले उन्हें लगातार गालियाँ दे रहे हैं।
भारत के पड़ोसी देश नेपाल से लैंड जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ मोहतरी जिले में हिन्दू संगठनों ने एक प्राचीन मंदिर पर मुस्लिम घुसपैठियों द्वारा कब्ज़े की साजिश रचने का आरोप लगाया है। मंदिर का नाम लक्ष्मीनारायण मठ है जिसे आसपास के लोग मठियानी मठ के नाम से जानते हैं। नेपाल का सबसे बड़ा मठ कहा जाने वाला यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है।
बताया जा रहा है कि मंदिर की जमीन पर लम्बे समय से रोहिंग्या, बांग्लादेशी और भारत से अवैध तौर पर आए घुसपैठिए मुस्लिमों ने साजिशन पहले अस्थाई झुग्गियाँ बसाईं और बाद में उनमें आग लगा दीं। आग से इलाके में रहने वाले कुछ हिन्दू परिवारों के घर भी प्रभावित हुए हैं। अब वहाँ पक्के निर्माण की तैयारी चल रही है। इस निर्माण के लिए नेपाल और विदेश की तमाम इस्लामी तंजीमें पैसे दे रहीं हैं। विरोध के बाद नेपाली प्रशासन ने फिलहाल इस प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।
ऑपइंडिया ने इस बाबत हिन्दू सम्राट सेना नेपाल के अध्यक्ष राजेश यादव से बात की। राजेश यादव ने हमें बताया कि मठियानी मठ न सिर्फ महोत्तरी बल्कि पूरे नेपाल और भारत के सीमावर्ती जिलों में रहने वाले हिन्दुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। यह मंदिर हजारों वर्गमीटर में फैला है। मंदिर के अंदर गुरुकुल भी है जिसमें दुनिया भरके सैकड़ों छात्र संस्कृत और सनातन पद्धति की शिक्षा लेते हैं। माना जाता है कि नेपाल का पहला गुरुकुल इसी मठ में स्थापित हुआ था। मठ में गौशाला भी है। हर साल यहाँ परिक्रमा और मेले में लाखों हिन्दू शामिल होते हैं।
राजेश ने हमें बताया कि महोत्तरी के मठियानी नगर पालिका में बने इस मठ के आसपास लगभग 20% आबादी मुस्लिमों की है। यह आबादी धीरे-धीरे बांग्लादेश, रोहिंग्या और भारत से घुसपैठ करके आ रहे मुस्लिमों की वजह से बढ़ी है। यहाँ मुस्लिमों की आबादी लगातार बढ़ती ही जा रही है। लगभग 2 साल पहले मंदिर की खाली पड़ी जमीनों पर मुस्लिम घुसपैठियों ने अस्थाई झुग्गियाँ बना डालीं। शुरू में एकाध मुस्लिम परिवार यहाँ टेंट डाल कर रहना शुरू किए जिसके बाद महज 2 वर्षों में इस जगह पर लगभग 80 मुस्लिम परिवार आ बसे। मुस्लिम बस्ती कहे जाने वाले इस इलाके में 7-8 हिन्दू परिवार भी रहते हैं। हालाँकि स्थानीय हिन्दू संगठन इन मुट्ठी भर हिन्दुओं को सैकड़ों घुसपैठियों द्वारा साजिशन बनाई गई ढाल मानते हैं।
थोड़े समय बाद बस्ती के मुस्लिमों ने टेंट के बजाय झुग्गियाँ डाल ली और उसी जगह को अपना ठिकाना घोषित कर दिया। यहाँ पर कबाड़ी आदि का काम शुरू कर दिया गया जो बाद में सब्ज़ी और फलों के कारोबार तक फैला दिया गया। मंदिर प्रशासन ने लगभग 1 साल पहले इन घुसपैठियों को जमीन खाली करने का नोटिस दिया था लेकिन उन पर कोई असर नहीं पड़ा। आरोप है कि घुसपैठियों को कुछ राजनैतिक दलों ने संरक्षण भी दिया। इस इलाके में चोरी और तस्करी जैसी घटनाएँ भी बढ़ गईं।
राजेश यादव ने आगे बताया कि अप्रैल 2024 में घुसपैठियों की इस झुग्गी में संदिग्ध तौर पर आग लग गई। अग्निकांड में सभी 80 झुग्गियाँ जल कर राख हो गईं। किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। बताया गया कि अंडा उबालते हुए एक मुस्लिम परिवार के घर से उठी आग ने पूरी बस्ती को चपेट में ले लिया। हालाँकि हिन्दू सम्राट सेना सहित तमाम अन्य नेपाली हिन्दू संगठन इस अग्निकांड को एक साजिश बता रहे हैं। हमें बताया गया कि इस आगजनी के बाद बस्ती के सभी मुस्लिमों ने अचानक ही एक स्वर में अपने सभी पहचान पत्र और सरकारी कागजात जल जाने की दुहाई देनी शुरू कर दी।
अग्निकांड पीड़ित कुछ मुस्लिमों के नाम
आरोप है कि यह साजिश रोहिंग्या, बांग्लादेशी और अन्य देशों के घुसपैठी मुस्लिमों को नेपाली नागरिक साबित करने का है। कुछ ही समय में इस बस्ती के पास नेपाल और अन्य देशों की मुस्लिम्म तंजीमों का जमावड़ा शुरू हो गया। सोशल मीडिया पर बस्ती के मुस्लिमों को निरीह और लाचार बता कर उनकी मदद की अपील की जाने लगी। इस मदद में सबसे पहली माँग 80 से अधिक परिवारों को पक्के घर देने की थी। इस माँग को कुछ नेपाली पार्टियों ने सरकार तक पहुँचाना शुरू कर दिया जिसमें वामपंथी दल प्रमुख हैं।
हमें आगे बताया गया कि कुछ ही दिनों में करोड़ों रुपए जमा भी कर लिए गए। मंदिर की जमीन पर अनुदान के लिए भीड़ जमा होने लगी। इस अनुदान में कपड़े, राशन आदि प्रमुख थे। नेपाल के कई मुस्लिम समूहों ने तो गाँव-गाँव रैली निकालनी शुरू कर दी। इस रैली में मंदिर की जमीन पर आगजनी के शिकार सभी मुस्लिमों को पक्के घर देने की माँगों वाला बैनर सबसे आगे हुआ करता था। पक्के निर्माण की आहट को देख कर मंदिर मैनेजमेंट ने नेपाली प्रशासन से अपनी जमीन बचाने की गुहार लगाई। हालाँकि इस गुहार का नेपाली प्रशासन पर कोई असर नहीं पड़ा।
आखिरकार हिन्दू संगठनों ने इस मामले में हस्तक्षेप किया। मई 2024 से हिन्दू सम्राट सेना सहित कई अन्य समूहों ने गाँव-गाँव और शहर-शहर इस अतिक्रमण की साजिश के खिलाफ जमीनी अभियान चलाया। सोशल मीडिया पर भी लोगों को संभावित साजिश से जागरूक किया गया। नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन को भी ज्ञापन दे कर चेताया गया कि अगर मंदिर की जमीन पर कब्ज़ा हुआ तो आंदोलन होगा। दोनों पक्षों में बढ़ रहे तनाव को देख कर प्रशसन को देखते हुए नेपाली प्रशासन सतर्क हो गया।
बताया जा रहा है मई महीने के पहले सप्ताह में नेपाली प्रशासन ने इस विवाद की जाँच बिठा दी। जाँच रिपोर्ट आने तक किसी भी प्रकार के कच्चे या पक्के निर्माण पर रोक लगा दी गई है। मंदिर की जमीन पर पुलिस की गश्त बढ़ा दी गई है। प्रशासनिक सख्ती के बावजूद मुस्लिम पक्ष मठ की जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। अभी भी उस जमीन पर चोरी-छिपे मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों द्वारा अस्थाई निर्माण करवाया जा रहा है।
मुस्लिम तबके का नेतृत्व कलीम अंसारी कर रहा है। कलीम मठियारी नगर पालिका का वार्ड नंबर 6 का अध्यक्ष है। आग से पीड़ित सैकड़ों लोगों की लिस्ट में 7-8 घर हिन्दुओं के भी हैं। राजेश यादव ने हमें बताया कि वो मुट्ठी भर हिन्दू परिवार खुद ही मुस्लिमों से पीड़ित हैं। साथ ही वो नेपाल प्रशासन का हर प्रकार से सहयोग करने को तैयार हैं।