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दावा- लो BP से हुई आदिल की मौत… कर्नाटक में मुस्लिम भीड़ ने थाने पर हमला बोला: 11 पुलिसकर्मी घायल, 7 वाहनों में भी तोड़फोड़

कर्नाटक के दावणगेरे जिले में मुस्लिम भीड़ द्वारा थाने पर हमले की खबर है। यह हमला पुलिस कस्टडी में एक युवक की मौत का आरोप लगा कर किया गया है। मृतक का नाम आदिल है। आदिल को जुआ खेलने के आरोप में पकड़ कर लाया गया था। हमलावर भीड़ ने पुलिस पर पत्थरबाजी की। वाहनों में आगजनी की गई है। हालात संभालने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा। कुल 11 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। पुलिस ने मृतक को किसी भी प्रकार के टॉर्चर किए जाने से इंकार किया है। 2 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। मामले में कुल 3 FIR दर्ज हुई है जिस पर जाँच की जा रही है। घटना शुक्रवार (24 मई 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना दावणगेरे के चन्नागिरी थानाक्षेत्र की है। शुक्रवार को पुलिस ने जुआ खेलने की एक सूचना पर दबिश दी। दबिश के दौरान 30 वर्षीय आदिल को पकड़ कर थाने लाया गया। पुलिस का दावा है कि थाने लाए जाने के महज 5-6 मिनट के अंदर ही आदिल की तबियत खराब होने लगी। हालत और खराब होती देख कर उसे अस्पताल ले जाया गया। यहाँ डॉक्टरों ने आदिल को मृत घोषित कर दिया। खबरों में पुलिस के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पुलिस ने बताया है कि आदिल की मौत लो ब्लड प्रेशर की वजह से हुई है। पुलिस के अनुसार मृतक के शरीर पर चोट के कोई निशान नहीं मिले हैं।

आजतक पर प्रकाशित संबंधित खबर जिसमें लो बीपी की वजह से हुई मौत की बात ह

इस बीच आदिल के परिजन भी अस्पताल पहुँचे। उन्होंने पुलिस पर आदिल को टॉर्चर करने का आरोप लगा कर हंगामा शुरू कर दिया। कुछ ही देर में चन्नागिरी थाने के बाहर मुस्लिमों की भीड़ जमा होने लगी। भीड़ ने पुलिसकर्मियों पर हमला शुरू कर दिया। थाने के बहार खड़े वाहनों में तोड़फोड़ की जाने लगी। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर के उपद्रवियों को रोकना चाहा तो थाने पर पथराव किया जाने लगा। आख़िरकार अतिरिक्त पुलिस के आने पर लाठीचार्ज किया गया जिस से भीड़ तितर-बितर हुई।

मुस्लिम भीड़ के हमले में कुल 11 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। पुलिस के 7 वाहनों को तोड़ डाला गया है। इस पूरे मामले में कुल 3 FIR दर्ज की गईं है जिनकी जाँच की जा रही है। इनमे से एक FIR पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी है जो मृतक के अब्बा की तहरीर पर दर्ज हुई है। हमलावरों के खिलाफ भी FIR दर्ज कर के जाँच की जा रही है। वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों से आरोपितों की पहचान की जा रही है।

2 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है। इन पुलिसकर्मियों में डिप्टी एसपी और इंस्पेक्टर शामिल हैं। आदिल के शव का पोस्टमार्टम न्यायाधीश की मौजूदगी में करवाया जाएगा। थाने में लगे CCTV फुटेज खंगाले जा रहे हैं। हालात काबू में रखने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

राजकोट के गेम जोन में लगी भीषण आग, 20 से ज्यादा लोगों की मौत: कई बच्चे लापता, प्रशासन स्थिति संभालने में लगा

गुजरात के राजकोट में टीआरपी गेम जोन में भीषण आग लगने से 20 से ज्यादा लोगों की जलकर मौत हो गई। स्थिति संभालने के लिए वहाँ मौके पर फायर ब्रिगेड की 8 गाड़ियाँ पहुँची हुई हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। आग पर काबू पा लिया गया है, लेकिन हताहत लोगों की संख्या का साफ नहीं पता चल सका है।

बताया जा रहा है कि गेमजोन में एसी कंप्रेसर फटने के बाद आग लगी। लेकिन अभी तक इस वजह की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। आग शाम करीब 4 से 4.30 बजे के बीच लगी थी जिसपर तीन घंटे मशक्कत के बाद काबू पाया गया। अभी मलबे को हटाने और यह पता लगाने के लिए बचाव अभियान जारी रहा कि गेम जोन में कोई फँसा तो नहीं है।

राजकोट के पुलिस आयुक्त राजू भार्गव ने कहा कि जो बच्चे फिलहाल लापता हैं, उन्हें ढूँढने और मृतकों की पहचान करने के प्रयास जारी हैं और घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस घटना पर एक्स (ट्विटर) पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “राजकोट में आग लगने की घटना से बेहद व्यथित हूँ। मेरी संवेदनाएँ उन सभी के साथ हैं जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है। घायलों के लिए प्रार्थना करता हूँ। स्थानीय प्रशासन प्रभावित लोगों को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए काम कर रहा है।” इसके अलावा उन्होंने गुजरात के सीएम से भी इस संबंध में बात की है। साथ ही हर प्रभावित व्यक्ति को हर संभव सहायता प्रदान करने के लिए चल रहे प्रयासों के बारे में भी जानकारी ली है।

35 साल बाद कश्मीर के अनंतनाग में टूटा वोटिंग का रिकॉर्ड: जानें कितने मतदाताओं ने आकर डाले वोट, 58 सीटों का भी ब्यौरा

लोकसभा चुनाव 2024 के छठे चरण के लिए हुआ मतदान शनिवार (25 मई 2024) की शाम 6 बजे सम्पन्न हुआ। इस चरण में 7 राज्यों व 1 केंद्र शासित प्रदेश की कुल 58 सीटों के लिए वोट डाले गए। शाम 7 बजे जारी आँकड़ों के मुताबिक इस चरण में कुल 58.82% वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 78.19% मतदाताओं ने वोट डाले। सबसे कम आँकड़ा जम्मू कश्मीर का रहा जहाँ 51.41 फीसदी वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। पश्चिम बंगाल में हुई कुछ घटनाओं को छोड़ कर इस चरण का मतदान शांतिपूर्ण रहा।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लोकसभा चुनाव के छठें चरण के लिए 58 लोकसभा सीटों पर वोटिंग सुबह 7 बजे से शुरू हुई। यह वोटिंग 1 केंद्र शासित प्रदेश मिला कर कुल 8 राज्यों में हुई। इन राज्यों में सबसे अधिक उत्तर प्रदेश की 14 सीटें थीं। UP के अलावा हरियाणा की 10, बिहार और पश्चिम बंगाल की 8-8, दिल्ली की 7, ओडिशा की 6, झारखंड की 4 व जम्मू कश्मीर की 1 सीट के लिए वोट डाले गए। सभी राज्यों के मतदान का औसत 58.82 प्रतिशत रहा।

छठें चरण के मतदान प्रतिशत के लिहाज से पश्चिम बंगाल सबसे ऊपर रहा। यहाँ 78.19% वोटरों ने वोट डाले। दूसरे नंबर पर झारखंड रहा जहाँ 62.13% लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। तीसरे स्थान पर ओडिशा है जहाँ 59.72 प्रतिशत वोटरों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इसके अलावा हरियाणा में 58.06, दिल्ली में 54.31, उत्तर प्रदेश में 54.02, बिहार में 52.80 और जम्मू कश्मीर में 51.41 प्रतिशत लोगों ने अपना वोट डाला। हालाँकि कश्मीर के अनंतनाग इलाके में इस बार मतदान का प्रतिशत एक रिकॉर्ड रहा। यहाँ 35 साल बाद 51.35% मतदाताओं ने वोट डाले।

खासतौर पर पश्चिम बंगाल को छोड़ कर अधिकतर स्थानों पर मतदान शांतिपूर्ण रहा। पश्चिम बंगाल के झारग्राम में भाजपा प्रत्याशी पर भीड़ ने हमला किया। हमले में उनके सुरक्षाकर्मियों सहित मीडिया स्टाफ को भी निशाना बनाया गया। पश्चिम बंगाल के ही तमलुक में मतदान शुरू होने से पहले ही भाजपा और TMC के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए थे। इस दौरान तृणमूल कॉन्ग्रेस के एक समर्थक के घायल होने की खबर है। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में एक पोलिंग बूथ पर उपद्रव मचाने की फ़िराक में जमा भीड़ को हटाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करना पड़ा। जम्मू कश्मीर में महबूबा मुफ़्ती ने EVM में छेड़खानी का आरोप लगा कर धरना दिया।

मुजाहिद कॉलोनी में सिर्फ 2 ईसाई घर… दोनों पर टूटी इस्लामी कट्टरपंथियों की भीड़: ईशनिंदा का आरोप लगा तोड़फोड़ और आगजनी, चर्च पर भी हमला

पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में 2 ईसाई परिवारों पर मुस्लिम भीड़ ने हमला किया है। यह हमला ईशनिंदा के आरोप में हुआ है। पुलिस ने दोनों परिवारों को हिंसक भीड़ से बचाया। इलाके में सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं। 1 पीड़ित घायल बताया जा रहा है जिसका इलाज अस्पताल में जारी है। हमले में एक चर्च को भी निशाना बनाया गया है। मानवाधिकार आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए इन हालातों पर चिंता प्रकट की है। अब तक 25 हमलावरों की गिरफ्तारी हो चुकी है। घटना शनिवार (25 मई 2024) की है।

पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना पंजाब प्रांत के सरगोधा जिले की है। यहाँ की मुजाहिद कॉलोनी में 2 ईसाई परिवार रहते हैं। शनिवार को इन दोनों परिवारों के आगे मुस्लिम समुदाय के सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा होने लगी। भीड़ उन्मादी नारे लगा कर दोनों ईसाइयों के घरों में घुसने पर आमादा थी। हमलावरों ने पीड़ित परिवारों पर पत्थरबाजी भी की। एक चर्च को भी निशाना बनाया गया। हमलावर भीड़ का आरोप था कि ईसाई परिवार के सदस्यों ने इस्लाम के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की है।

पीड़ित परिवार के मुखिया का नाम नाज़िर मसीह है। उनका जूतों का कारोबार है। बताया जा रहा है कि नाजिर के जूतों की फैक्ट्री में आग लगा दी गई है। दुकान में लूटपाट भी की गई। उनके पूरे परिवार को खत्म करने की धमकी दी गई। नाज़िर के घर में भी आग लगाने का प्रयास किया गया लेकिन पुलिस के पहुँच जाने से हमलावरों के ये मंसूबे सफल नहीं हुए। हमलावर भीड़ के अधिकतर सदस्य तहरीक-ए-लब्बैक संगठन से जुड़े बताए जा रहे हैं। मामले की जानकारी होते ही पुलिस मौके पर पहुँची। बल प्रयोग करके भीड़ को तितर-बितर किया गया। इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।

हमलावरों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस ने दबिश दे रही है। अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी की सूचना है। पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने इस घटना पर चिंता जताई है। आयोग ने पाकिस्तानी सरकार से अल्पंसख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है। इस घटना का दावा करते हुए कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं। पाकिस्तान सरकार ने उन वीडियो को फर्जी बताया है और लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। फ़िलहाल भीड़ के हमले से एक व्यक्ति घायल है जिसका इलाज अस्पताल में चल रहा है।

‘मुजरा करने दो विपक्ष को… मैं खड़ा हूँ एसी-एसटी और ओबीसी के आरक्षण के साथ’ : PM मोदी की बिहार-यूपी में हुंकार, बोले- नहीं छिनने दूँगा वंचितों का अधिकार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज बिहार के पाटलिपुत्र और उत्तर प्रदेश के गाजीपुर में विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए विपक्ष पर तीखा हमला बोला। साथ ही आरक्षण पर अपना पक्ष साफ किया। उन्होंने अपने संदेश में साफ किया कि वो हर हाल में SC, ST OBC के आरक्षण के साथ खड़े हैं। अगर विपक्ष को मुजरा करना है तो करे।

उन्होंने एक पाटलिपुत्र में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “मोदी के लिए संविधान सर्वोपरि है। मोदी के लिए बाबा साहब अंबेडकर की भावना सर्वोपरि है। INDI गठबंधन को अपने वोटबैंक की गुलामी करनी है तो करें। उनको वहाँ जाकर मुजरा करना है तो भी करें। मैं SC, ST OBC के आरक्षण के साथ डटकर खड़ा हूँ, खड़ा रहूँगा।”

वहीं गाजीपुर में कहा, “इंडी गठबंधन वाले एससी-एसटी-ओबीसी का आरक्षण की लूट में एक साथ खड़े हैं…लेकिन ये मोदी इनके सामने सीना तानकर खड़ा है और मैं गारंटी देता हूं कि जब तक मोदी जिंदा है, एससी-एसटी-ओबीसी का आरक्षण मैं किसी हालत में उनको छीनने नहीं दूँगा। मैं धर्म के आधार पर खेल खेलने नहीं दूँगा। वंचितों का जो अधिकार है… मोदी उसका चौकीदार है।”

ईवीएम पर नहीं लगा था BJP का टैग, तृणमूल कॉन्ग्रेस ने झूठ फैलाया: चुनाव आयोग ने खोली पोल, बताया- क्यों लिए जाते हैं मशीन पर हस्ताक्षर

लोकसभा चुनाव के छठे चरण के मतदान के बीच विपक्ष लगातार झूठे आरोप लगाकर अपनी फजीहत करवा रहा है। इस बार ये काम तृणमूल कॉन्ग्रेस पार्टी ने किया है, जिन्हें जवाब भारतीय निर्वाचन आयोग ने खुद दिया। ईसी ने टीएमसी के ट्वीट पर जवाब देकर बताया है कि कैसे उनके द्वारा दी गई जानकारी अधूरी और गलत है।

छठे चरण के मतदान के बीच ऑल इंडिया तृणमूल कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि बांकुरा के रघुनाथपुर में 5 ईवीएम मिली है जिनके ऊपर भाजपा का टैग लगा है। ट्वीट में चुनाव आयोग से तुरंत एक्शन लेने को कहा गया था। इसके साथ फोटो में दिखाई दे रहे कागज को भी लाल गोला किया गया था ताकि पता चल सके किस चीज को भाजपा का टैग कहा जा रहा है।

अब चुनाव आयोग ने इसी ट्वीट का जवाब देते हुए टीएमसी के दावे की सच्चाई बताई। ईसी ने कहा, “कमीशनिंग के दौरान, उम्मीदवारों और उनके एजेंटों द्वारा मौजूद कॉमन एड्रेस टैग पर हस्ताक्षर करवाए गए थे। चूँकि उस समय केवल भाजपा उम्मीदवार का प्रतिनिधि ही मौजूद था, इसलिए ईवीएम और वीवीपैट को चालू करने के लिए उनके हस्ताक्षर लिए गए।”

ईसी ने यह भी कहा, “मतदान केंद्र 56, 58, 60, 61 और 62 पर मौजूद सभी एजेंटों के हस्ताक्षर मतदान के दौरान प्राप्त किए गए थे। सभी ईसीआई मानदंडों का पालन किया गया, मतदान पूरी तरह से सीसीटीवी कवरेज के तहत किया गया था, और इसकी विधिवत वीडियोग्राफी की गई थी।”

कुल मिलाकर टीएमसी के आरोपों को झुठलाते हुए ईसी ने ये साफ किया है कि कैसे टीएमसी इस मामले में आधी-अधूरी जानकारी के साथ झूठ फैला रही है जबकि हकीकत तो यह है कि वो हस्ताक्षर कमीशनिंग के दौरान कराए गए थे। अगर उस जगह पर अन्य प्रत्याशियों का एजेंट होता तो उस पार्टी के साइन भी उस पर दिखाई पड़ते।

CM केजरीवाल के घर कहाँ हुआ क्या-क्या… दिल्ली पुलिस ने सब सीन री-क्रिएट करवाए, विभव कुमार ने बचने को डाली जमानत याचिका

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की पिटाई मामले में गिरफ्तार विभव कुमार ने जमानत माँगी है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निजी सहायक विभव कुमार ने निचली अदालत में जमानत याचिका दाखिल की है। इस बीच, दिल्ली पुलिस विभव कुमार को लेकर अरविंद केजरीवाल के घर पहुँची और स्वाति मालीवाल की पिटाई का सीन रिक्रिएट किया। इससे पहले दिल्ली पुलिस स्वाति मालीवाल को ले जाकर भी सीन रिक्रिएट कर चुकी है।

कोर्ट में दाखिल की जमानत याचिका

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, विभव कुमार ने कोर्ट में जमानत याचिका दाखिल की है। फिलहाल उन्हें 4 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। विभव कुमार को कोर्ट ने पहले 5 दिन की हिरासत में भेजा था, इस दौरान दिल्ली पुलिस उन्हें मुंबई भी लेकर गई थी, जहाँ कथित तौर पर विभव कुमार ने अपना फोन फॉर्मेट किया था। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने 24 मई 2024 को विभव को कोर्ट में पेश किया और कोर्ट से उनकी हिरासत अवधि बढ़ाने की अपील की, जिसके बाद कोर्ट ने उनकी हिरासत को 4 दिनों के लिए बढ़ा दिया था।

इसके बाद विभव कुमार ने आज यानी 25 मई 2024 को निचली अदालत में जमानत याचिका दायर की है। उन्होंने कोर्ट से जमानत की गुहार लगाई है। इस मामले में कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर दिल्ली पुलिस से जवाब माँगा है।

वहीं, इस बीच दिल्ली पुलिस की टीम विभव कुमार लेकर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पहुँची और सीन को री-क्रिएट किया। विभव कुमार को दिल्ली पुलिस तीन जगहों पर लेकर गई थी। पुलिस के मुताबिक, विभव कुमार ने 17 मई को अपना फोन फॉर्मेट किया था और कहा था कि उनका फोन खराब हो गया है। हालाँकि दिल्ली पुलिस उन्हें मुंबई लेकर भी गई, जिसके बाद माना जा रहा है कि दिल्ली पुलिस उनके फोन के डेटा को रिकवर करने में जुटी है।

बता दें कि विभव कुमार को 18 मई को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। वो 17 मई को मुंबई से लौटे थे, जबकि स्वाति मालीवाल की पिटाई 13 मई 2024 को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर में हुई थी। इसके तीन दिनों बाद स्वाति मालीवाल ने विभव कुमार के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी, जब दिल्ली पुलिस की टीम ने स्वाति मालीवाल के घर पर उनके साथ 4 घंटे तक बातचीत की थी। स्वाति मालीवाल ने अपने बयान में बताया है कि विभव कुमार ने काफी बेरहमी से उन्हें पीटा था।

इसके बाद सिविल लाइंस पुलिस स्टेशन में स्वाति मालीवाल के बयान पर एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें एफआईआर में भारतीय दंड की धारा 308 (गैर इरादतन हत्या का प्रयास), धारा 341 (गलत तरीके से रोकना), धारा 354 (बी) (महिला पर हमला या आपराधिक बल का उपयोग) के तहत आरोप शामिल हैं। कोड. इसके अतिरिक्त, भारतीय दंड संहिता की धारा 506 (आपराधिक धमकी) और धारा 509 (शब्द, इशारा, या किसी महिला की गरिमा का अपमान करने का इरादा) के तहत आरोप शामिल किए गए हैं।

बंगाल के झाड़ग्राम में BJP प्रत्याशी के काफिले पर भीड़ ने की पत्थरबाजी: कार्यकर्ता और सुरक्षाकर्मी घायल, वाहन में भी तोड़फोड़

लोकसभा चुनाव के छठे चरण के लिए हो रहे मतदान के दौरान पश्चिम बंगाल से हिंसा की खबर है। यहाँ के झाड़ग्राम जिले में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं पर हमला किया गया है। शनिवार (25 मई 2024) को हुए इस हमले में भाजपा प्रत्याशी प्रणत टुडू और उनके कुछ समर्थकों को चोटें आईं हैं। हमलावर भीड़ ने पत्थरबाजी की है। भाजपा प्रत्याशी के सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। बीजेपी ने इस हमले का आरोप सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस पर लगाया है। शिकायत में यह भी बताया गया है कि TMC के सदस्यों ने वोटरों को भी धमकाने की कोशिश की है।

मतदान के दौरान झाड़ग्राम के भाजपा प्रत्याशी शनिवार की दोपहर को वोटिंग के दौरान विभिन्न पोलिंग बूथों का भ्रमण कर रहे थे। तभी गरबेता इलाके में उनके काफिले पर पत्थरबाजी की गई। इस पत्थरबाजी का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में भाजपा प्रत्याशी को पत्थरबाजी से निकलने की कोशिश करते देखा जा सकता है। उनके साथ चल रहे पैरामिलिट्री के जवान हमलावर भीड़ को दूर रखने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा बल जैसे-तैसे प्रणत टुडू को हमलावर भीड़ से बचा कर निकाल पाए। हमलावर भीड़ में महिलाएँ भी शामिल थीं। उनके हाथों में लाठी-डंडे दिख रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में भाजपा प्रत्याशी प्रणत टुडू के साथ उनके कुछ समर्थक और सुरक्षाकर्मी भी घायल हुए हैं। एक वाहन में भी तोड़फोड़ की गई है जो भारतीय जनता पार्टी के समर्थक की बताई जा रही है। हमलावरों ने मीडियाकर्मियों को भी निशाना। बनाया भाजपा ने इस हमले का आरोप तृणमूल कॉन्ग्रेस के सदस्यों पर लगाया है। बीजेपी ने चुनाव आयोग से इसकी शिकायत करते हुए मामले में कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने TMC सदस्यों पर वोटरों को धमकाने के भी आरोप लगाए हैं।

वहीं तृणमूल कॉन्ग्रेस ने भाजपा द्वारा लगाए गए आरोपों का खंडन किया है। TMC ने अपने बयान में आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी प्रणत टुडू के साथ चल रहे एक सुरक्षाकर्मी ने मतदान केंद्र की लाइन में खड़ी एक महिला के साथ अभद्रता की जिसकी वजह से भीड़ भड़क गई। फिलहाल हालात काबू करने के लिए इलाके में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। बताते चलें कि झाड़ग्राम लोकसभा सीट पर भाजपा प्रत्याशी प्रणव टुडू की त्रिकोणीय लड़ाई तृणमूल कॉन्ग्रेस के कालीपदा सोरेन व कम्युनिस्ट पार्टी के सोनमणि टुडू से है।

बंगाल में HC ने लगाया OBC कोटे में मुस्लिम आरक्षण पर बैन, राजस्थान सरकार भी करेगी समीक्षा : क्या मजहबी आधार पर रिजर्वेशन के दिन गए?

पश्चिम बंगाल में ओबीसी कोटे में ममता बनर्जी की सरकार मुस्लिमों के 77 समूहों को आरक्षण का लाभ दे रही थी। साल 2011 में सरकार बनने के 6 माह के भीतर ही ममता सरकार ने ये आरक्षण देना शुरू कर दिया था। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस रिजर्वेशन को खत्म कर दिया है, साथ ही 2011 से अब तक जारी 5 लाख से अधिक ओबीसी प्रमाण पत्रों को भी रद्द कर दिया है। वहीं, राजस्थान में 14 मुस्लिम जातियों को ओबीसी कोटे के तहत आरक्षण मिलता है, जो इन्हें 1997 से 2013 के बीच दिया गया था, लेकिन पश्चिम बंगाल हाई कोर्ट के फैसले से सबक लेकर राजस्थान सरकार अब ओबीसी कोटे में मुस्लिम आरक्षण की समीक्षा करेगी।

राजस्थान सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री अविनाथ गहलोत ने कहा है कि तुष्टिकरण की राजनीति के चलते कॉन्ग्रेस की सरकारों ने राजस्थान में मुस्लिमों को भी आरक्षण दिया था। कॉन्ग्रेस की सरकारों ने धार्मिक आधार पर आरक्षण 1997 से 2013 के बीच दिए, जिसमें से 14 मुस्लिम जातियों को ओबीसी कोटे में आरक्षण दे दिया गया। अब लोकसभा चुनाव 2024 के खत्म होने के बाद राजस्थान सरकार राज्य में ओबीसी आरक्षण के तहत आने वाली सभी जातियों की समीक्षा करेगी। अविनाथ गहलोत ने कहा कि हम धार्मिक आधार पर आरक्षण के खिलाफ हैं, क्योंकि ये संवैधानिक रूप से गलत है।

खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी ये बात कह चुके हैं कि वो धार्मिक आधार पर आरक्षण को लागू नहीं होने देंगे। राजस्थान सरकार के इस ऐलान के बाद ये बहस तेज हो गई है कि क्या धार्मिक आधार पर आरक्षण के दिन अब खत्म हुए?

बात सिर्फ पश्चिम बंगाल और राजस्थान की नहीं है, बल्कि देश के उन तमाम राज्यों की है, जहाँ ओबीसी आरक्षण में मुस्लिम समूहों को घुसाकर जरूरत मंद समूहों का हक मारा गया। कॉन्ग्रेस के राज में कर्नाटक में भी यही हो रहा है। पीएम मोदी भी कह चुके हैं कि कॉन्ग्रेस अपने कर्नाटक फॉर्मूले को पूरे देश में लागू करना चाहती है, लेकिन वो ऐसा होने नहीं देंगे। कर्नाटक के साथ ही केरल में भी ओबीसी समूहों में मुस्लिमों की भारी भागीदारी है और वो आरक्षण का लाभ ले रहे हैं।

बता दें कि संवैधानिक रूप से अधिकतर राज्यों में 27 प्रतिशत आरक्षण ओबीसी जातियों को मिलता रहा है। इंदिरा साहनी कमीशन के आधार पर ये इसे निश्चित किया गया है। कई राज्यों में आरक्षण की इस सीमा को तोड़ने का प्रयास किया गया, तो सुप्रीम कोर्ट ने उन राज्यों की सरकारों को झटका देते हुए उनकी मनमानी पर रोक लगा दी थी। मध्य प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक ये हो चुका है, लेकिन तमिलनाडु जैसे राज्य, जिसकी कुल आबादी में बड़ा हिस्सा ओबीसी वर्ग का है, उसने इस लिमिट को पार किया है।

हालाँकि उन राज्यों में कोई विरोध न होने और सुप्रीम कोर्ट तक कोई याचिका न पहुँचने की वजह से ये अभी भी जारी है। लेकिन जिन राज्यों में सरकारों का विरोध हुआ और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुँचा, वहाँ ओबीसी आरक्षण की सीमा साल 1992 के इंदिरा साहनी कमीशन के आधार पर 27 प्रतिशत ही कर दिया गया। कुछ राज्यों में अपवाद जरूर है, खासकर पंजाब जैसे राज्य में, क्योंकि पंजाब में एसटी आरक्षण नहीं है। पंजाब में एसटी कैटिगिरी के लोग भी नहीं हैं। ऐसे में यहाँ एससी आरक्षण का ज्यादा है। हालाँकि धार्मिक आधार पर सीधे आरक्षण का मामला कहीं नहीं है, ऐसे में मुस्लिम तुष्टिकरण की आड़ में कई राज्यों में मुस्लिमों को आरक्षण का लाभ ओबीसी कोटे के तहत दिया जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा का विरोध इसी आधार पर है।

चूँकि देश की आजादी के समय ही ये साफ हो गया था कि धार्मिक आधार पर देश में आरक्षण नहीं होगा। इसके लिए संवैधानिक व्यवस्था भी की गई थी, लेकिन वोट बैंक की चाहत में राजनीतिक पार्टियों ने संवैधानिक मर्यादाओं को परे रखते हुए मुस्लिमों को आरक्षण देना शुरू कर दिया, वो भी ओबीसी कोटे के तहत। ऐसे में पश्चिम बंगाल की सरकार को कलकत्ता हाई कोर्ट से जो झटका लगा है, वो ऐतिहासिक हो सकता है। कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले को आधार बनाकर कई अन्य राज्य भी खासकर बीजेपी शाषित राज्य ओबीसी कोटे में शामिल जातियों की समीक्षा कर सकते हैं।

राजस्थान में ऐसा ही काम होने वाला है, जो भूल सुधार का जरिया बन सकता है। देर-सबेर अन्य राज्य भी ये कदम उठाएँगे। हालाँकि कॉन्ग्रेस या इंडी गठबंधन द्वारा शासित राज्य ऐसा कदम उठाए, इस पर तो संदेह है ही, लेकिन कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले के आधार पर यदि अदालतों में ओबीसी आरक्षण को चुनौती देना शुरू कर दिया जाए, तो वो दिन दूर नहीं, जब पूरा देश तुष्टिकरण की राजनीति को पीछे छोड़ते हुए धार्मिक आधार पर आरक्षण के दायरे से बाहर निकल आए। ये भूल सुधार की तरह भी होगा, साथ ही असली जरूरत मंदों को उनकी हिस्सेदारी देने की तरह भी।

सलवार खोल दबाए गुप्तांग, नाबालिग दलित लड़की से किया रेप का प्रयास: बरेली में राशिद अब्बा संग गिरफ्तार, पीड़ितों को बोला था- ‘च$ट्टों तुम्हारी औकात ही क्या है’

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यहाँ मुस्लिम समुदाय के 4 आरोपितों पर अनुसूचित जाति की एक नाबालिग लड़की से अपहरण और रेप के प्रयास का आरोप लगा है। अपहरण तमंचे की नोक पर किया गया। पीड़िता को छुड़ाने गए उसके परिजनों को जातिसूचक गालियाँ दी गईं और जान से मार डालने की धमकी दी गई। घटना सोमवार (20 मई 2024) की है। पुलिस ने 2 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। फरार आरोपितों की तलाश की जा रही है। मामले की जाँच चल रही है।

यह घटना बरेली के थानाक्षेत्र देवरनियां की है। बुधवार (22 मई 2024) को यहाँ पीड़िता के पिता ने थाने में तहरीर दर्ज करवाई है। तहरीर में उन्होंने बताया कि 20 मई को उनके घर पर कार्यक्रम था। इसी रात उनकी 16 वर्षीया बेटी लगभग 11:30 पर अपने चाचा के घर जा रही थी, तभी रास्ते में पीड़िता को राशिद मिला। उसने नाबालिग को तमंचा दिखाया और मुँह दबा कर अपने साथ बाग में ले गया। यहाँ उसने पीड़िता के गुप्तांगों को दबाया और सलवार खोल कर बलात्कार करने का प्रयास किया। आरोप है कि राशिद ने कॉल करके अशफाक और इशहाक के बेटे नन्ने को भी बुला लिया था।

ये सभी अपहृता पीड़िता को कहीं दूसरी जगह ले जाने का प्रयास कर रहे थे। शिकायत में आगे बताया गया है कि घटनास्थल पर राशिद का अब्बा नन्हे भी पहुँच गया। वह पीड़िता को जल्द से जल्द कहीं दूर ले जाने के लिए कहने लगा। इस बीच पीड़िता को काफी देर तक अपने घर पर न पाकर परिजनों और कार्यक्रम में आए रिश्तेदारों ने उसकी खोजबीन शुरू कर दी। कुछ लोग तलाश करते हुए जंगल की तरफ गए। आरोपित पीड़िता को कहीं और ले जाने में सफल हो पाते इस से पहले लड़की के परिजन वहाँ पहुँच गए।

पीड़िता के परिजनों को देख कर आरोपित आग बबूला हो गया। उन्होंने गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए कहा, “च$टों, तुम्हारी औकात ही क्या है। अगर कार्रवाई की तो तुम्हें जान से मार देंगे।” पीड़ितों ने डायल 112 की मदद ली और नाबालिग को जैसे-तैसे छुड़ाया। पुलिस को बुलाता देख कर आरोपित घटनास्थल से फरार हो गए। जाते-जाते उन्होंने पीड़िता के पिता को तमंचा दिखाया और कहा, “अगर तूने कहीं मुँह खोला तो तुझे जान से मार देंगे।” शिकायतकर्ता ने खुद को डरा बताते हुए आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

पुलिस ने इस तहरीर पर IPC की धारा 363, 354 (ख), 504 और 506 के साथ पॉक्सो व SC/ST एक्ट के तहत FIR दर्ज कर ली है। इस केस में राशिद, अशफाक, नन्हे व नन्ने को नामजद किया गया है। शुक्रवार (24 मई 2024) को गश्त करते पुलिस बल को आरोपितों के एक जगह होने की सूचना मिली। दबिश दे कर राशिद और उसके अब्बा नन्हे को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। फरार चल रहे अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।