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‘मा$₹चो$ हो तुम स्वाति मालीवाल’: यूट्यूबर ध्रुव राठी की वीडियो के बाद AAP की सांसद को मिल रही रेप-हत्या की धमकी – दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की माँग

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बताया है कि यूट्यूबर ध्रुव राठी के वीडियो के बाद उन्हें रेप-हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा है कि ध्रुव राठी ने बिना उनका पक्ष लिए एकतरफा वीडियो बना दिया है। उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी की तरफ से उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है।

स्वाति मालीवाल ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट लिख बताया है कि उनका पहले ही आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने चरित्र हनन किया और उनके पीड़ित होते हुए भी उन्हीं को दोषी ठहराया। इसके बाद जब यूट्यूबर ध्रुव राठी ने इस पर वीडियो बनाया तो उनको हत्या और रेप की धमकियाँ मिलने लगीं।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि उन्होंने ध्रुव राठी को अपना पक्ष बताने के लिए कॉल और मैसेज किए लेकिन राठी ने उनका पक्ष बिना जाने ही वीडियो बना दी। उन्होंने कहा है कि ध्रुव राठी को इस बात पर शर्मिन्दा होना चाहिए कि वह AAP के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं और पीड़ित पर ही प्रश्न उठा रहे हैं।

स्वाति मालीवाल ने ध्रुव राठी से उनके वीडियो में कई जानकारियाँ ना देने को लेकर कई प्रश्न भी पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर जब AAP ने एक दिन उनके साथ बदसलूकी की बात मान ली थी तो आखिर बाद में उस स्टैंड से यू टर्न क्यों ले लिया। मालीवाल ने ध्रुव राठी से पूछा कि आखिर उन्होंने अपनी वीडियो में उनकी मेडिकल रिपोर्ट का जिक्र क्यों नहीं किया। उन्होंने जानबूझ कर छोटा वीडियो रिलीज किए जाए और विभव कुमार के फोन फॉर्मेट होने को लेकर प्रश्न पूछे।

स्वाति मालीवाल ने कहा कि ध्रुव राठी ने अपनी वीडियो में यह नहीं बताया कि विभव कुमार को मुख्यमंत्री आवास से गिरफ्तार किया गया, उन्हें घटनास्थल पर सबूत मिटाने का मौक़ा क्यों दिया गया। मालीवाल ने भाजपा के लिए काम करने के आरोपों पर कहा कि वह महिलाओं के लिए काम करती रही हैं, आखिर वह भाजपा द्वारा कैसे खरीदी जा सकती हैं।

स्वाति मालीवाल ने उनको भेजी गईं रेप और हत्या की धमकियों के स्क्रीनशॉट भी डाले और कहा कि वह इस मामले को दिल्ली पुलिस के पास लेकर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो जिस व्यक्ति ने इसे चालू किया है, वह इसका जिम्मेदार होगा।

गौरतलब है कि 13 मई, 2024 को दिल्ली CM आवास में स्वाति मालीवाल के साथ अरविन्द केजरीवाल के पूर्व PS विभव कुमार ने मारपीट की थी और उनको अभद्र गालियाँ दी थी। इस मामले में स्वाति मालीवाल ने FIR दर्ज करवाई थी जिसके बाद विभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया था। वर्तमान में विभव कुमार न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की जाँच के लिए दिल्ली पुलिस ने एक SIT बनाई है, जो इसमें आगे कार्रवाई कर रही है।

5000 रुपए में एक इंसान के 80 टुकड़े, रात 8 बजे के बाद इन टुकड़ों को ठिकाने लगाने की प्लानिंग: बांग्लादेशी सांसद की हत्या करने वाले कसाई ने खोले राज

बांग्लादेश के सांसद की निर्मम हत्या के मामले में गिरफ्तार कसाई जिहाद हवलदार ने कई राज खोले हैं। कसाई ने बताया है कि उसने अनवारुल अजीम अनार को मारने के बाद 80 टुकड़ों में काटा था। ये काम उसने मात्र 5000 रुपए के लिए किया था। इसके बाद उसके शव को 14-15 मई की रात के 8 बजे के आसपास ठिकाने लगाया गया था। इन शव के टुकड़ों को इस तरह से कोलकाता में जगह-जगह फेंका गया था कि अब पुलिस को जाँच के दौरान इन्हें बरामद करना मुश्किल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कसाई ने जहाँ शव के टुकड़ों को फेंकने की बातें कही हुई हैं वहाँ पर पुलिस लगातार छानबीन कर रही है। गंदे पानी में मछुआरे अपना जाल डाल मांस के टुकड़े खोजने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं गोताखोरों को भी काम में लगाया गया है। सूत्रों के हवाले से दी जा रही जानकारी में कहा गया है कि जिहाद ने भांगर और उसके आसपास कई बार रेकी करने के बाद न्यू टाउन से दूर स्थित कम आबादी वाले जगह को शरीर के अंग फेंकने के लिए चुना था।

फिलहाल, जिहाद कोलकाता सीआईडी पुलिस की हिरासत में है। मार्च की शुरुआत में वह मुंबई से कोलकाता हत्या के लिए ही लाया गया था। बाद में उसे अजीम के शव को ठिकाने लगाने का भी काम सौंपा गया। इससे पहले वह चिनार पार्क के अटघारा में एक फ्लैट में रह रहा था। हत्या करने से पहले ढाई महीने करीब वो वहीं था।

इसके बाद न्यू टाउन स्थित फ्लैट में हत्या को अंजाम दिया गया। वह फ्लैट राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के सहायक आयुक्त का था जिसे हत्या के मास्टरमाइंड अख्तरुज्जमान ने 1 लाख रुपए प्रति माह किराए पर लिया था। अपार्टमेंट में रसोई में सीसीटीवी लगा था लेकिन हत्या से छह दिन पहले 7 मई को इसे काले कपड़े से ढक दिया गया। बाद में अजीम को फ्लैट में आने के लिए उकसाया गया और यहाँ पहुँचने पर उसकी हत्या कर दी गई।

कैमरे में महिला को खाना बनाते और कुछ अन्य पुरुषों को बर्तन धोते रिकॉर्ड किया गया था। इसके बाद कचरा फेंकने की भी कुछ तस्वीरें मीडिया में आई थी। छानबीन में पुलिस को इस फ्लैट से प्लास्टिक बैग, टिशू पेपर, दस्ताने और आरोपित महिला के नाम का बोर्डिंग पास भी बरामद हुआ था। पुलिस ने बताया कि हत्या के बाद आरोपितों ने सबूत मिटाने के लिए एडिस का प्रयोग किया था लेकिन कई जगह धब्बे रह गए।

गौरतलब है कि 12 मई को बांग्लादेशी सांसद भारत आए थे। यहाँ वह शिलांती रहमान के हनीट्रैप में फँसकर कोलकाता में अपने दोस्त के फ्लैट तक गए। फ्लैट में चार लोगों ने मिलकर उनकी हत्या की और बाद में शव जगह-जगह फेंक दिए गए। 8 दिन बाद जब इस हत्या का खुलासा हुआ तो पता चला कि इसके पीछे अजीम के बचपन के दोस्त का हाथ था। दोनों मिलकर सोने तस्करी का काम करते थे। बाद में अजीम ने ज्यादा टका अपने पास रखने की बात कही तो अनबन हो गई।

एक डील में धोखाध़ड़ी के बाद शाहीन मियाँ उर्फ अख्तरुज्जमांन ने हत्या की साजिश रची और मई में घटना को अंजाम दिलाया गया। पहले खबर आई थी कि इस काम में शाहीन ने आरोपितों को 5 करोड़ दिए, लेकिन कसाई ने खुलासा किया है कि उसे सिर्फ 5 हजार रुपए मिले हैं।

मारे गए बांग्लादेशी सांसद अनवरुल का TMC नेताओं और तृणमूल से जुड़ी हिरोइनों के साथ कनेक्शन: जानें कैसे खड़ा किया उसने काला कारोबार

कोलकाता में जिस बांग्लादेशी सांसद अनवरुल अजीम अनार की हत्या हुई, वो गुनाह की दुनिया का बड़ा खिलाड़ी था। सोने और ड्रग्स की स्मगलिंग से उसने अकूत दौलत बनाई थी और धीरे-धीरे वो अपनी ताकत और पहुँच के दम पर सफेदपोश बन गया। कभी इंटरपोल के लिए वॉन्टेड रहे अनवरुल अजीम अनार का भारत अक्सर आना-जाना था। कभी इलाज के नाम पर, तो कभी दोस्त के नाम पर। लेकिन मई 2024 का उसका दौरा आखिरी साबित हुआ। उसे हनी ट्रैप में फाँसकर मौत के घाट उतार दिया गया। अब पता चला है कि वो बांग्लादेश और भारत के बीच होने वाले अवैध हथियारों, सोने की तस्करी और ड्रग्स के व्यापार का बादशाह था। यही नहीं, वो पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के बड़े नेताओं का भी खास था। उसके लिए बांग्ला फिल्म उद्योग की अभिनेत्रियों के साथ भी था, खासकर टीएमसी से जुड़ी अभिनेत्रियों के साथ।

अनवरुल अजीम अनार की टीएमसी नेताओं से नजदीकी

कभी जातीय पार्टी के साथ रहा अनवरुल अजीम अनार साल 1996 तक खालिदा जिया की कट्टरपंथी पार्टी, जिसके अलकायदा से भी संबंध बताए जाते हैं-बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के साथ रहा। इसके बाद वो मौजूदा पार्टी आवामी लीग में शामिल हो गया। चूँकि उसे राजनीतिक संरक्षण भी चाहिए था, साथ ही उसे स्थानीय स्तर पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भी पकड़ कर रखना था, ऐसे में पूरी तरह से वो राजनीति में आ गया। अब तक तीन बार सांसद रहा अनवरुल हक पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के बेहद करीब था। वो टीएमसी नेताओं की काली कमाई को ठिकाने भी लगाया था, खासकर घोटालों से जमा किए गए पैसों को।

ममला बनर्जी की अगुवाई में टीएमसी ने जब से पश्चिम बंगाल की सत्ता संभाली है, पश्चिनम बंगाल अपराधियों, आतंकवादियों, स्कैमर्स, हत्यारों, स्मगलर्स, मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों और भ्रष्ट लोगों की शरणस्थली बनकर उभरा है, खासकर राजधानी कोलकाता।

अनवरुल अजीम के पश्चिम बंगाल में राजनीतिक कनेक्शनों पर एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि अनवरुल अजीम अनार टीएमसी की महिलाओं नेताओं से काफी अच्छे संपर्क में रहा। उसमें से भी कुछ नेता कोलकाता फिल्म इंडस्ट्री की हीरोइनें हैं। कोलकाता फिल्म इंडस्ट्री की पूर्व एक्ट्रेस मुनमुन सेन तो दाऊद इब्राहीम तक से संपर्क में रही हैं, उसके खास गुर्गे अजीज मोहम्मद भाई के जरिए। अजीज मोहम्मद भाई काफी सालों से बांग्लादेश में भी भगोड़ा है और कुछ समय पहले ही ढाका की एक कोर्ट ने उसे बांग्लादेशी एक्टर सलमान शाह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है।

अधिकारी ने ये भी कहा कि बांल्गादेशी सांसद अनवरुल अजीज अनार टीएमसी के नेताओं के साथ व्यापारिक सहयोगी भी था। उसके पास एसएससी स्कैम से जुड़ी बड़ी धनराशि भेजी गई थी, जो उसने व्यापार में निवेश किया। अनार एसएससी स्कैम के मुख्य अभियुक्त पार्था चटर्जी से भी जुड़ा था, उसके भतीजे प्रसन्ना कुमार रॉय के दोस्त शिपन कुमार बसु के जरिए। शिपन बसु बांग्लादेश पुलिस की नजर में भगोड़ा और वो 2 दशकों से पश्चिम बंगाल में रह रहा है। शिपन बसु अपने शुरुआती दिनों में बांग्लादेश में सक्रिय रहे माओवासी-नक्सलवादी ग्रुप ‘पुर्बो बांग्ला कम्युनिष्ट पार्टी’ से जुड़ा रहा है।

अपने वामपंथी नक्सलवादी दिनों में शिपन कुमार बोस कई आपराधिक गतिविधियों जैसे डकैती, रेप, वसूली और हत्याओं के मामलों में शामिल रहा था। बाद में बसु अनवरुल अजीम के ट्रांसबॉर्डर स्मगलिंग रैकेट में शामिल हो गया। इसी रैकेट के दम पर वो भारत से बांग्लादेश के बीच सोने, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी का रैकेट चलाता था। चूँकि अनवरुल बांग्लादेश में सम्मानित व्यक्ति बन गया था और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के बड़े नेताओं से उसके अच्छे लिंक थे, ऐसे में इस स्मगलिंग गिरोह ने अकूत कमाई की।

अनवरुल अजीम अनार की क्राइम कुंडली

ढाका ट्रिबून की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, अनवरुल अजीम पुराना पापी रहा है। वो आतंकी गुटों की सहायता करता था, खासकर बांग्लादेश के दक्षिणी-पश्चिमी इलाके में, ये इलाके भारत के पश्चिम बंगाल से सटे हैं। उस पर बांग्लादेश पुलिस और अन्य एजेंसियों ने आतंकियों और अतिवादियों के ‘गॉडफादर’ का ठप्पा लगाया था। कभी 9 केस उसके ऊपर दर्ज थे, जिसमें हथियारों की तस्करी, विस्फोटों में हाथ, ड्रग्स की तस्करी, वसूली और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं।

साल 2008 में उसके खिलाफ इंटरपोल ने भी नोटिस जारी किया था। बताया जा रहा है कि वो साल 1986 से ड्रग्स की तस्करी वाले रैकेट में घुसा था, जब बांग्लादेश में सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद की इस्लामिक ‘जातीय पार्टी’ का शासन था। वो तब भारत के बगडा बोर्डर से होकर बांग्लादेश के बघडंगा बॉर्डर तक का स्मगलिंग रूट संभालता था। उसके लोग पुलिस थानों को महीने का चढ़ावा चढ़ाते थे। उस समय वो ‘ड्रग किंग’ के तौर पर जाना जाता था।

साल 1991 से वो झेनैदाह के पारितोष टैगोर नाम के स्मगलर के साथ मिलकर सोने की तस्करी करने लगा। और फिर आगे चलकर वो कालीगंज निगम के कमिश्नर के साथ मिलकर हथियारों की तस्करी भी करने लगा। उसके द्वारा तस्करी किए गए हथियार बांग्लादेश के जिहादी गुटों तक पहुँचते थे। उन आतंकियों को वो भारत तक पहुँचने का सुरक्षित रास्ता भी देता था। खास बात ये है कि वो बांग्लादेश में टॉप आतंकवादी ठहराए जा चुके प्रकाश कुमार बिश्वास के साथ भी काम कर रहा है, जो साल 2013 से पश्चिम बंगाल में छिपा बताया जा रहा है।

काली कमाई ही बनी मौत की वजह

बता दें कि बांग्लादेशी सांसद की निर्मम हत्या के इस पूरे केस में अब तक कई खुलासे हो चुके हैं। पुलिस ने भले आधिकारिक बयान नहीं दिया लेकिन मीडिया में खबरें आ रही हैं कि सांसद अनवारुल अजीम अनार और संदिग्ध अख्तरुज्जमान मिलकर सोने की तस्करी का काम करते थे, मगर पैसों को लेकर दोनों के बीच मतभेद हुआ और अख्तारुज्जमान ने पूरी हत्या की साजिश रची।

इस हत्या को अंजाम देने का काम मुंबई के कसाई को मिला था। कसाई का नाम जिहाद हवलदार है। उसे भी कोलकाता पुलिस ने पकड़ लिया है। आरोप है कि उसने अन्य साथियों के साथ मिलकर सांसद की हत्या फ्लैट में की। इसके बाद उनकी पहचान मिटाने के लिए शव से खाल उतारी और शव से मांस छोटे-छोटे टुकड़ों में काट उसे कीमा जैसा बनाया, फिर उसमें हल्दी मिलाई ताकि वो बदबू न करे। इसके बाद उसे अलग-अलग पैकेट में भरा गया। बाद में सारे पैकेट कोलकाता की अलग-अलग जगहों पर फेंक दिए गए। कुछ अंगों को फ्रिंज में भी रखा गया।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। विस्तृत मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

लिव इन में रहने वालों को करना होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, नहीं करने पर होगी जेल, उत्तराखंड में 2024 के अंत तक लागू हो जाएगा UCC: रिपोर्ट

समान नागरिक संहिता (UCC) कानून को उत्तराखंड में 2024 के अंत तक लागू किया जा सकता है। अभी इसको अंतिम रूप दिया जा रहा है। UCC लागू होने के बाद राज्य में कई ऑनलाइन सुविधाएँ भी चालू की जाएँगी। राज्य में UCC लागू होने के बाद लिव इन रिलेशशिप के नियमों को कड़ाई से लागू किया जाएगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में UCC के विधानसभा से पास होने और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब इसको अंतिम रूप से लागू करने पर काम चल रहा है। इसके लिए राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक पैनल काम कर रहा है। यह इसके नियमों को अंतिम रूप दे रहा है।

यह भी सामने आया है कि उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को ऑनलाइन इसका रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इससे उन्हें बार बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य में शादियों का भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।

उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद लिव इन में रहने वाले जोड़े अगर एक महीने के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते हैं तो उन्हें ₹10,000 का जुर्माना या तीन महीने की जेल हो सकती है। इसके अलावा अगर वह तीन महीने तक ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें ₹25,000 का जुर्माना या 6 महीने की जेल हो सकती है।

इसके अलावा ऐसे 18-21 के बीच की आयु के जोड़ों के माता-पिता को भी उनके लिव इन में रहने की जानकारी भेजी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे उनके माता-पिता को इस विषय में सही जानकारी मिल सकेगी।

राज्य के मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह ने बताया, “हम लोगों के लिए ऑनलाइन मोड के माध्यम से औपचारिकताओं को पूरा करना आसान बनाना चाहते हैं। हालाँकि, यह प्रक्रिया कठिन है क्योंकि सरकारी कर्मचारियों को इस मामले में सिखाने की जरूरत है। हम समय से पहले नियम बनाने और एक साथ प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।”

गौरतलब है कि उत्तराखंड की धामी सरकार ने फरवरी, 2024 में समान नागरिक संहिता (UCC) क़ानून को विधानसभा में लाई थी। यहाँ से यह बहुमत से पास हो गया था। इस कानून में शादी, तलाक, विरासत और लिव इन जैसे मुद्दों को लेकर सभी धर्मावलम्बियों के लिए लिए एक समान कानून बनाए गए हैं। उत्तराखंड UCC लागू करने वाला आजाद भारत का पहला राज्य बनेगा।

‘द वायर’ ने लोकसभा चुनाव में कम वोट पड़ने को लेकर चलाई झूठी स्टोरी, डाटा का किया हेरफेर, बताए गलत आँकड़े: जानें क्या है सच्चाई

कई बार झूठी खबरें चलाने वाले प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ ने एक बार फिर लोकसभा चुनावों को लेकर एक फर्जी स्टोरी छापी है। द वायर ने दावा किया है कि 2024 लोकसभा चुनावों के पहले पाँच चरणों में 2019 की तुलना में वोटों की संख्या में भारी गिरावट हुई है। द वायर के इस लेख में चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में कुल वोटों की संख्या को लकर जारी किए गए आँकड़े के आधार पर चुनावों को लेकर फर्जी बातें कही गई हैं।

क्या है द वायर का दावा?

द वायर पर श्रावस्ती दासगुप्ता की ‘2019 के पाँच चरणों की तुलना में 2024 में करीब 19.4 करोड़ कम वोट पड़े’ (Compared to Five Phases in 2019, Nearly 19.4 Crore Less Votes Have Been Cast in 2024) शीर्षक वाली रिपोर्ट को 25 मई, 2024 को छापा गया है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2019 लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2024 के चुनाव में पाँच चरणों तक 19 करोड़ वोट कम डाले गए हैं। द वायर ने दावा किया है कि 2019 के लोकसभा चुनावो के पहले पाँच चरणों में 70.16 करोड़ वोट डाले गए थे जबकि 2024 के चुनाव में पाँच चरणों तक 50.7 करोड़ वोट ही डाले गए।

द वायर ने यह दावा चुनाव आयोग द्वारा शनिवार (25 मई, 2024) को जारी किए गए एक आँकड़े के आधार पर किए। इसमें चुनाव आयोग ने बताया है कि देश में लोकसभा चुनाव के पाँच चरणों में कितने वोट पड़े हैं।

चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए डाटा के अनुसार, देश में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 11.00 करोड़ वोट पड़े, दूसरे चरण में 10.58 करोड़ वोट पड़े। इसी तरह तीसरे चरण में 11.32 करोड़ जबकि चौथे चरण में 12.24 करोड़ वोट पड़े और पाँचवे चरण में 5.57 करोड़ वोट पड़े। इस प्रकार पाँचों चरण में कुल 50.72 करोड़ वोट पड़े।

द वायर ने दावा किया कि 19 करोड़ वोटों की यह गिरावट तब आई है जब 2019 के मुकाबले वोटरों की संख्या बढ़ी है। द वायर ने बताया है कि 2019 में कुल वोटरों की संख्या 89.6 करोड़ थी जबकि इन चुनावों में कुल वोटरों की संख्या 96.8 करोड़ है।

द वायर के सारे दावे झूठ, मनगढ़ंत डाटा के आधार पर बना दी रिपोर्ट

द वायर ने भारतीय लोकतंत्र की साख पर बट्टा लगाने के लिए झूठे डाटा और दावों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार कर दी है। द वायर ने बिना आधिकारिक आँकड़ों का परीक्षण किए यह पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, जिसमें रंच मात्र भी सच्चाई नहीं है।

द वायर का दावा है कि 2019 के लोकसभा चुनावों के पहले पाँच चरणों में कुल 70.16 करोड़ वोट पड़े थे। असल में यह कोरा झूठ है। चुनाव आयोग का 2019 चुनाव को लेकर आधिकारिक आँकड़ा बताता है कि इस चुनाव में पूरे सातों चरणों में पड़े कुल वोटों की 61.46 करोड़ थी।

यानी द वायर ने जितने वोटों की सँख्या 2019 के पाँच चरणों के लिए बता दी है, वह तो पूरे 2019 के चुनाव में नहीं पड़े थे। द वायर ने अपने 70 करोड़ वोटों के आँकड़े के स्रोत का भी कोई जिक्र नहीं किया है।

वायर ने एक और झूठ अपनी इस रिपोर्ट में बोला है, उसने बताया है कि 2019 लोकसभा चुनाव में कुल वोटरों की संख्या 89.6 करोड़ थी, यह भी गलत है। चुनाव आयोग का आधिकारिक आँकड़ा बताता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में 91.19 करोड़ वोटर, वोट करने के लिए योग्य थे। ऐसे में द वायर की पूरी रिपोर्ट ही फर्जी मालूम होती है।

द वायर के पत्रकारों की गणित कमजोर

द वायर पहले भी झूठी और मनगढ़ंत कहानियाँ छापता रहा है। वर्तमान रिपोर्ट से उसके पत्रकारों की कमजोर गणित का भी खुलासा हो गया है। द वायर की इस रिपोर्ट में 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में हर चरण में डाले गए वोटों की तुलना करने का दावा किया गया है।

लेकिन असल में द वायर ने 2019 के लोकसभा चुनाव के हर चरण के कुल मतदाताओं की संख्या की तुलना, 2024 में प्रत्येक चरण में डाले गए वोटों से कर दी है। उदाहरण के लिए, वायर का कहना है कि 2019 के पहले चरण में 14.2 करोड़ वोट पड़े जबकि 2024 में यह संख्या 11 करोड़ रही।

असल में 2019 के पहले चरण में कुल मतदाताओं की संख्या 14.2 करोड़ थी, ना कि डाले गए वोटों की। इन 14.2 करोड़ में से 9.12 करोड़ लोगों ने ही वोट डाले थे। यदि वायर को सही तुलना करनी थी तो वह 9.12 करोड़ (2019 चुनाव) और 11 करोड़ (2024) की तुलना करता। लेकिन उसने एजेंडा चलाने के लिए गलत आँकड़ों का सहारा लिया। पहले चरण में दो सीटों पर चुनाव भी स्थगित हो गया था, जिसके कारण वोटरों की संख्या 14.2 करोड़ से घट कर 13.16 करोड़ पर आ गई थी।

क्या 2024 में सही में घट गए वोट?

द वायर ने अपनी रिपोर्ट बनाने में मूलभूत गलतियाँ करके बताया है कि 2024 लोकसभा चुनाव में 2019 के मुकाबले कम वोट पड़े हैं। लेकिन यह बात बिलकुल झूठ है। असल में 2024 में डाले गए वोट 2019 से अधिक हैं। 2019 के पाँच चरणों तक लगातर वोटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

उपरोक्त ग्राफ से साफ़ दिखता है कि 2019 के चुनाव में पाँच चरणों तक 48.47 करोड़ वोट पड़े थे। इसकी तुलना में 2024 के लोकसभा चुनाव में पाँच चरणों तक 50.7 करोड़ वोट पड़े। यानी 2019 की तुलना में 2024 के पाँच चरणों में 2.25 करोड़ वोट अधिक पड़े। ऐसे में द वायर का वोटों के कम होने का दावा पूरी तरह फर्जी सिद्ध हो जाता है। देश के कुछ हिस्सों में गर्मी और अन्य कारणों से मतदान प्रतिशत जरूर घटा है लेकिन मत देने वालों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में वायर का प्रोपेगेंडा कहीं नहीं ठहरता।

वायर की तरफ से अपनी इस स्टोरी में कोई भी सुधार ना ही वेबसाइट और ना ही सोशल मीडिया पर किया गया है।

इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक ‘द वायर’ की ओर से कोई सुधार अपनी फर्जी रिपोर्ट में नहीं की गई है। 25 मई 2024 को प्रकाशित इस फर्जी खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया यूजर अभिषेक बनर्जी ने ‘द वायर’ के संपादकों को भी टैग किया। इसके बावजूद कई घंटों तक (अभी तक) सुधार फिर भी नहीं किया गया।

इस तरह की डेटा संबंधी रिपोर्ट को सुधारने के लिए मात्र एक कैलकुलेटर की जरूरत होती है। और हाँ, मंशा की भी। प्रोपेगेंडा से भरी खबरें छापने में माहिर ‘द वायर’ के पास मंशा तो खैर क्या ही होगी, कैलकुलेटर भी निश्चित तौर पर नहीं है।

Cannes Film Festival: भारतीयों का जलवा, बेस्ट एक्ट्रेस समेत जीती कई ट्रॉफियाँ, All We Imagine As Light’ को ग्रैंड प्रिक्स अवॉर्ड

दुनिया के सर्वाधिक प्रतिष्ठित कान्स फिल्म फेस्टिवल (Cannes Film Festival) में इस बार भारत और भारतवंशियों का जलवा दिखा। कान्स फिल्म फेस्टिवल में भारतीय कलाकारों, फिल्म निर्माताओं ने कई अवॉर्ड जीते हैं। इसमें पायल कपाड़िया की फिल्म ‘All We Imagine As Light’ को ग्रैंड प्रिक्स अवॉर्ड मिला है। इसके साथ ही सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के लिए अनसूया सेनगुप्ता को भी अवॉर्ड दिया गया। वो कान्स में अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय बनी हैं।

अभिनय में अनसूया सेनगुप्ता का जलवा

द शेमलेस में अभिनय के लिए कोलकाता की अनसूया सेनगुप्ता को अन-सर्टेन रिगार्ड्स प्राइज दिया गया है। उन्हें ये अवॉर्ड सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री के तौर पर दिया गया। कान्स फिल्म फेस्टिवल में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता या अभिनेत्री के तौर पर अवॉर्ड जीतने वाली अनसूया पहली भारतीय बन गई हैं। फिल्म का निर्देशन और लेखन बुल्गेरियन फिल्मकार कोंसतान्तिन बोजानोव ने किया है। फिल्म की कहानी रेणुका नाम की लड़की के इर्द-गिर्द बुनी गई है, जो एक पुलिस ऑफिसर को मारने के बाद दिल्ली के वेश्यालय से भाग जाती है।

पायल कपाड़िया की फिल्म ने रचा इतिहास

कान्स फिल्म फेस्टिवल 2024 में फिल्ममेकर पायल कपाड़िया ने इतिहास ही रच दिया है। उन्होंने ‘ऑल वी इमेजिन एज लाइट’ के लिए ग्रैंड प्रिक्स का खिताब अपने नाम किया है। पायल कपाड़िया के निर्देशन की पहली फिल्म ने तीन दशकों में पहली भारतीय फिल्म के रूप में कान्स में अपनी जगह बनाई थी और फिर अवॉर्ड जीतकर इतिहास ही रच दिया। जो लोग नहीं जानते हैं उन्हें बता दें कि ‘ग्रांड प्रिक्स पाल्मे डी’ अवॉर्ड फिल्म फेस्टिवल का दूसरा सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है।

पायल कपाड़िया की ‘ऑल वी इमेजिन एज लाइट’ एक मलयालम-हिंदी भाषा की फिल्म है। यह दो युवा महिलाओं, प्रभा और अनु के जीवन की कहानी है और उनके जीवन की जटिलताओं को दिखाती है। प्रभा मुंबई की एक मेहनती नर्स है, जो अपने अलग हो चुके पति से अचानक मिले गिफ्ट से अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में कठिनाईयां महसूस करती है। वहीं, उसकी रूममेट अनु अपने प्रेमी के साथ रहने के लिए हलचल भरे शहर में निजता ढूंढने के लिए संघर्ष से गुजरती है।

भारत के लिए खास रहा है इस साल का फेस्टिवल

कान्स फिल्म फेस्टिवल 2024 भारत के लिए खास रहा है। इसमें श्याम बेनेगल की फिल्म ‘मंथन’ की रिलीज के 48 साल बाद स्पेशल स्क्रीनिंग हुई। वहीं, कान्स में इस साल ‘सनफ्लॉवर्स वर द फर्स्ट वन्स टू नो’ और ‘बनीहुड’ को ला सिनेफ सेलेक्शन में पहला और तीसरा स्थान मिला। ‘सनफ्लॉवर्स वर द फर्स्ट वन्स टू नो’ एक कन्नड़ शॉर्ट फिल्म है, जिसे चिदानंद नायक ने डायरेक्ट की है, जबकि ‘बनीहुड’ को मानसी महेश्वरी ने डायरेक्ट किया है।

Cyclone Remal: 130-140km/h की रफ्तार से आएगा चक्रवात, तटीय जिलों में रेड अलर्ट, रेल-प्लेन सब ठप – तूफान के नाम में 13 देशों का कनेक्शन

बंगाल की खाड़ी में बना चक्रवाती तूफान ‘रेमल’ रविवार (26 मई 2024) को ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश से टकराएगा। इस चक्रवाती तूफान की वजह से भारी तबाही की आशंका जताई जा रही है। हजारों को लोगों को तटीय इलाकों से निकाल कर ऊँचे स्थानों पर पहुँचाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि रेमल चक्रवाती तूफान की वजह से हवाएँ 130-140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी। ऐसे में ऐहतिहात के तौर पर रेल और हवाई यात्रा को रोका जा रहा है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना चक्रवाती तूफान ‘रेमल’ तटीय इलाकों की तरफ बढ़ रहा है। ये रविवार की रात को पश्चिम बंगाल के सागर द्वीप तथा बांग्लादेश के खेपुपारा के बीच समुद्र तट से टकराने वाला है। इस दौरान 130 से 140 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाओं के आगे बढ़ने का अनुमान है। मौसम विभाग ने भी पश्चिम बंगाल व उत्तरी ओडिशा के तटीय जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

रेमल की वजह से समुद्र में 1.5 मीटर ऊंची लहरें उठने की आशंका है, जिससे तटीय पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के निचले इलाके डूब सकते हैं। मौसम विभाग ने मछुआरों को 27 मई की सुबह तक बंगाल की खाड़ी के उत्तरी भाग में समुद्र में न जाने की चेतावनी दी है। विभाग ने पश्चिम बंगाल के तटीय जिलों (दक्षिण और उत्तर 24 परगना) के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। यहां कुछ स्थानों पर भारी बारिश होने का अनुमान है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग ने कोलकाता, हावड़ा और पूर्वी मिदनापुर सहित पश्चिम बंगाल के कई जिलों के लिए रेड अलर्ट जारी किया है। एक अधिकारी ने जानकारी देते हुए बताया,’ चक्रवात रेमल के दौरान भूस्खलन के खतरे को देखते हुए कोलकाता हवाईअड्डा से रविवार दोपहर से 21 घंटे के लिए सभी उड़ानों को निलंबित कर दिया है। इस अवधि के दौरान 394 घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानें रद्द कर दी जाएँगी। वहीं, सियालदह और हावड़ा दोनों डिवीजनों में कई लोकल ट्रेनें, जो आमतौर पर कोलकाता और हावड़ा को आसपास के जिलों से जोड़ती हैं, उन्हें भी रद्द कर दिया गया है। कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह में भी निर्देश जारी किये गए हैं ।

रेमल कैसे पड़ा इस चक्रवाती तूफान का नाम?

चक्रवाती तूफान के आने पर एक सवाल हमेशा उसके नामकरण के साथ जुड़ा रहा है। आखिर इन तूफानों के नाम कौन रखा है, कई बार ये नाम अजीब क्यों होते हैं? इस सवाल का जवाब छिपा है साल 2004 के एक अंतर्राष्ट्रीय समझौते में। दरअसल, विभिन्न क्षेत्रों में स्थित देशों के द्वारा विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की देखरेख में इन तूफ़ानों को नाम प्रदान किया जाता है। हिन्द महासागर क्षेत्र में आने वाले तूफ़ानों के नाम रखने के लिए सितंबर 2004 में एक समझौता हुआ। इस समझौते के तहत हिन्द महासागर क्षेत्र के आठ देश, बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्याँमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड तूफ़ानों के लिए नामों का एक समूह देंगे, जिसमें से बारी-बारी से तूफान का नामकरण होगा। हालाँकि, अब इस समझौते में देशों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।

इसी क्रम में इस बार चक्रवाती तूफान का नाम रेमल है, जो ओमान द्वारा दिया गया है। ये अलग बात है कि रेमल का ओमान पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है, चूँकि ये सारे नाम सालों पहले तय हो जाते हैं, ऐसे में अपने क्रम के अनुसार नाम को पाते हैं।

चक्रवाती तूफानों के नाम, देशों की तरफ से मिले सुझाव

चक्रवातों के नाम रखे जाने क्यों जरूरी?

चक्रवातों को कोई एक नाम देना कई कारणों से महत्वपूर्ण होता है। यदि किसी क्षेत्र में एक साथ एक से अधिक चक्रवात बनते है तो इनका नामकरण तूफानों के भ्रम से बचने में मदद करता है। साथ ही नामकरण के कारण लोगों को इससे जागरूक करने और आपदा तैयारियों में भी मदद मिलती है। अंतरराष्ट्रीय संस्था विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) की एक अंतरराष्ट्रीय समिति द्वारा चक्रवातों की लिस्ट और नामों का रखरखाव करता है। पहले चक्रवातों की लिस्ट में महिलाओं के नाम शामिल किया जाते थे बाद में इसमें पुरुषों के नाम को भी स्थान दिया गया।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नाम

चक्रवातों को दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे भारत या दक्षिण एशियाई देशों में इसे साइक्लोन कहा जाता है। तो अफ्रीकी देशों में टॉरनेडो। इसी तरह से दक्षिण पूर्वी एशिया और चीन में साइक्लोन को टाइफून नाम से जानते हैं, तो उत्तरी अटलांटिक पूर्वी प्रशांत क्षेत्र में इसे हरिकेन कहते हैं। उत्तर पश्चिम ऑस्ट्रेलिया में इसे विली-विली कहते हैं, तो दक्षिण पश्चिम प्रशांत और हिन्द महासागर में साइक्लोन और पश्चिम अफ्रीका और दक्षिणी संयुक्त राज्य अमेरिका में इसे टॉरनैडो कहते हैं।

गौरतलब है कि चक्रवात यानी साइक्लोन शब्द ग्रीक भाषा से प्रेरित है और साइक्लोस शब्द से बना जिसका अर्थ ‘सांप की कुंडली’ होता है। चक्रवात न केवल पृथ्वी पर दिखता हैं बल्कि मंगल, बृहस्पति और नेपच्यून ग्रहों पर भी देखे जाते है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात गर्म महासागरों के ऊपर बनता है जो कम वायुमंडलीय दाब के कारण बनता है और तेज हवा का रूप ले लेता है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात बंगाल की खाड़ी, अरब सागर और हिंद महासागर के ऊपर बनते हैं। साइक्लोन के बनने में साइक्लोजेनेसिस महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

भोजशाला में ASI सर्वे में मिला पाषाण अवशेष, भगवान सूर्य के आठों पहर के बने हैं चिन्ह: मजार बना मुस्लिम पढ़ने लगे नमाज, माँ सरस्वती का है मंदिर

मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित भोजशाला में चल रहे भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) सर्वे में पाषाण अवशेष मिले हैं। ASI सर्वे के 65वें दिन यह अवशेष टीम को मिले हैं। भोजशाला में चल रहे इस सर्वे के बीच मुस्लिमों ने एक बार फिर हाई कोर्ट के निर्णय के बाद भी विरोध किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि भोजशाला में चल रहे सर्वे में एक पाषाण अवशेष मिला है, जिसमें सूर्य के आठों पहर के चिन्ह बने होने की बात कही गई है। यह 1×3.5 वर्ग फीट आकार का है। हिन्दू पक्ष का कहना है कि इस अवशेष पर मिले चिन्ह भोजशाला के खम्भों पर मिले चिन्हों से मिलते हैं। इससे पहले यहाँ सर्वे में स्तम्भ भी मिला था।

भोजशाला में सर्वे के लिए अब जमीन के नीचे क्या है, इसका पता लगाने के लिए ग्राउंड पेनेट्रेटिंग राडार का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसे हैदराबाद से लाया गया है। इसके जरिए मंदिर को अलग अलग ब्लॉक्स में बाँट कर सर्वे किया जा रहा है।

जहाँ एक ओर सर्वे आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम समाज हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद इसका विरोध कर रहा है। मुस्लिमों ने ASI सर्वे का विरोध काली पट्टी बाँध कर किया। उन्होंने नमाज पढ़ने के दौरान काली पट्टी बाँधी। उन्होंने आरोप लगाया कि ASI यहाँ खुदाई कर रही है, जिसकी अनुमति नहीं है।

वहीं हिन्दू पक्ष का कहना है कि कोर्ट के आदेश में केवल यह कहा गया है कि संरचना में कोई बदलाव ना हो, ऐसे सर्वे किया जाए। ASI सर्वे के लिए कोई भी तरीका अपना सकती है। हिन्दू पक्ष ने मुस्लिमों पर कोर्ट के निर्णय की गलत व्याख्या करने का आरोप लगाया है।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित विवादित भोजशाला में ASI सर्वे को लेकर 11 मार्च, 2024 को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने आदेश दिया था। हाई कोर्ट ने इस संबंध में रिपोर्ट 6 हफ़्तों में दाखिल करने की बात कही थी। कोर्ट ने आधुनिक तकनीक से यहाँ सच्चाई पता लगाने को कहा था।

भोजशाला विवाद बहुत पुराना विवाद है। हिंदू पक्ष का मत है कि ये माता सरस्वती का मंदिर है जहाँ देवी-देवताओं के चित्र और संस्कृत में श्लोक आज भी लिखे हुए हैं। सदियों पहले मुसलमानों ने इसकी पवित्रता भंग करते हुए यहाँ मौलाना कमालुद्दीन की मजार बना दी थी जिसके बाद यहाँ मुस्लिमों का आना जाना शुरू हो गया और अब इसे नमाज के लिए प्रयोग में लाया जाता है।

भोजशाला के बाहर लगे बोर्ड में सूचना के तौर पर साफ लिखा है कि मंगलवार सूर्योदय से सूर्यास्त तक हिंदुओं को वहाँ प्रवेश मिलेगा। वहीं शुक्रवार दोपहर 2 बजे से लेकर तक 3 बजे तक नमाजियों के लिए प्रवेश होगा। बाकी बचे दिन कोई भी जगह को देखने के लिहाज से जा सकता है।

7 नवजात बच्चों की मौत, 5 अन्य झुलसे, एक की हालत गंभीर: दिल्ली में विवेक विहार के बेबी केयर सेंटर में लगी आग

दिल्ली के विवेक विहार इलाके में स्थित एक बेबी केयर सेंटर में शनिवार (25 मई 2024) देर रात आग लग गई, जिसमें 7 नवजात शिशुओं की मौत हो गई। इसके अलावा 5 नवजात शिशुओं की हालत गंभीर है, जिसमें से एक को वेंटिलेटर पर रखा गया है। बता दें कि बेबी केयर सेंटर में उन नवजात शिशुओं को रखा जाता है, जो कमजोर होते हैं और जिन्हें विशेष सावधानी और डॉक्टरी देखरेख की जरूरत होती है, लेकिन विवेक विहार में शिशु केयर सेंटर ही हादसे का शिकार बन गया।

आजतक के मुताबिक, ये हादसा पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में हुआ है, जहाँ एक शिशु देखभाल केंद्र में भीषण आग लगने से 7 बच्चों की मौत हो गई है। यहाँ कई बच्चों को रेस्क्यू भी किया गया, लेकिन 12 घायल हो गए थे, जिसमें से 6 बच्चों की मौत हो गई थी, एक बच्चे ने दूसरे अस्पताल में दम तोड़ दिया। 5 घायल बच्चों में एक बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है, उसकी हालत काफी नाजुक बताई जा रही है।

दिल्ली दमकल विभाग के मुताबिक, बेबी केयर सेंटर 120 गज की बिल्डिंग में बना था। बेबी केयर सेंटर के बगल में एक बिल्डिंग थी उस पर भी आग की लपटें गई थी लेकिन गनीमत ये रही कि वहाँ कोई जनहानि नहीं हुई। बेबी केयर सेंटर के अंदर बड़ी संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर पड़े हुए हैं। कुछ ऑक्सीजन सिलेंडर आग में फटे भी थे जो मौके पर दिखाई दे रहे हैं। दमकल विभाग की 16 गाड़ियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत से आग पर काबू पाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 मई की रात लगभग 11.30 बजे विवेक विहार थाना पुलिस को आग लगने के संबंध में एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई थी। कॉल मिलते ही विवेक विहार के एसीपी और एसएचओ तुरंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे, जहाँ न्यू बोर्न बेबी केयर अस्पताल और उसके बगल की बिल्डिंग में आग लगी हुई पाई गई। पुलिस के अनुसार, 11 नवजात शिशुओं को अन्य लोगों की मदद से इमारत की ऊपरी मंजिल से बचाया गया और एम्बुलेंस द्वारा इलाज के लिए पूर्वी दिल्ली एडवांस एनआईसीयू अस्पताल, डी-237, विवेक विहार में शिफ्ट कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह तीन मंजिला इमारत है और आग लगने से पूरी इमारत जलकर खाक हो गई।

सेलिब्रिटियों का ‘तलाक’ बिगाड़े न समाज के हालात… इन्फ्लुएंस होने से पहले भारतीयों को सोचने की क्यों है जरूरत

भारतीय संस्कृति में विवाह का एक खास महत्व होता है जबकि तलाक का फैसला बहुत बड़ी बात मानी जाती है, लेकिन आजकल के समय में ऐसा लग रहा है जैसे ‘तलाक’ के कॉन्सेप्ट को ट्रेंड बनाने का प्रयास हो रहा है। एक दम ताजा बात है, मशहूर भारतीय क्रिकेटर हार्दिक पांड्या अपनी पत्नी नताशा से अलग हुए हैं। वहीं कुछ दिन पहले ही दूसरी शादी के बंधन में बँधी टीवी एक्ट्रेस और बिग बॉस फेम दलजीत कौर भी अपने पति से धोखा पाने के बाद अलग हुई हैं।

दोनों ने अपने इस फैसले के पीछे मीडिया को अपने-अपने कारण दिए हैं और दोनों डायवोर्सों की चर्चा भी मीडिया में जोरों-शोरों से है। कुछ लोग इनके इस फैसले के बारे में जानने के बाद कह रहे हैं कि एक खराब रिश्ते में रहने से अच्छा तलाक लेकर अलग होना है तो कुछ लोग समझा रहे हैं कि शादी करने के बाद एक दूसरे से अलग होने का कड़ा फैसला लेने से पहले सोचना चाहिए।

अब ये सारी बातें सोशल मीडिया की हैं। सेलिब्रिटियों की दुनिया में शादी करना, फिर तलाक लेना, फिर शादी करना और फिर से तलाक लेना बहुत सामान्य बात होती जा रही है, उनके लिए ये सब नया नहीं है… वहीं ये प्रक्रिया भारत के सामान्य लोगों के लिए सामान्य नहीं है। ऐसे में इन सेलिब्रिटियों के तलाक का जितना प्रचार सोशल मीडिया पर होता है वो समाज के लिए बेहद घातक हो सकता है।

आप अगर पूछें कैसे तो इसका जवाब है सोशल मीडिया, उसपर बढ़ते भारतीय यूजर्स और सेलिब्रिटियों से इन्फ्लुएंस होती जनता…। आज के समय में जब सोशल मीडिया के आने के बाद लोग अपने रिश्ते बचाने के लिए संघर्षों में लगे हैं और हर इन्फ्लुएंसर से इन्फ्लुएंस होकर अपने कदम उठाना शुरू कर रहे हैं… उस समय में सेलिब्रिटियों द्वारा तलाक सामान्य बनाते जाना बेहद खतरनाक है।

सेलिब्रिटियों के लिए ऐसे फैसले नॉर्मल हो सकते हैं, क्योंकि उनके आसपास के परिवेश में ऐसा कई लोग पहले ही कर चुके होते हैं। मीडिया में ऐसी खबरें आने व्यक्ति विशेष पर क्या फर्क पड़े वो अलग है, लेकिन उस दुनिया के लिए वो सामान्य न्यूज होती है। वहाँ रिश्तों में धोखेबाजी को भी ‘ओपन रिलेशनशिप’ का नाम देकर समझाने का प्रयास होता है, अगर ऐसा नहीं होता तो म्यूचल अंडरस्टैंडिंग के नाम पर लोग अलग होकर जीवन जीने लगते हैं… लेकिन क्या ये सब आम भारतीय परिवेश में होता है? जवाब है- नहीं, बिलकुल नहीं। यही वजह है कि आम लोगों को सेलिब्रिटियों के फैसलों से प्रभावित होकर अपने जीवन में एक्शन लेने से पहले सोचना चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि उनके (आम भारतीय लोगों के) जीवन में और एक्टर-क्रिकेटर के जीवन में क्या फर्क होता है।

आगे बढ़ने से पहले ये बात स्पष्ट हो कि ये लेख केवल इस मुद्दे पर गौर करवाने के लिए है कि सेलिब्रिटियों के तलाकों के फैसलों से प्रभावित होकर आम लोगों को शादीशुदा जिंदगी के फैसले लेना… क्यों भारतीय संस्कृति के लिए खतरनाक हो सकता है… ये लेख इस मुद्दे पर बिलकुल नहीं है कि कोई व्यक्ति (महिला या पुरुष) संस्कृति के नाम पर घरेलू हिंसा, अत्याचार, मानसिक/सामाजिक/ आर्थिक आघात सहता रहे, सिर्फ इसलिए क्योंकि वो उसका पार्टनर कर रहा है।

बॉलीवुड के एक्टर-एक्ट्रेस हों या फिर कोई क्रिकेटर या अन्य नामी हस्ती… हर वो व्यक्ति जिसे मीडिया कवरेज देना जरूरी समझता है उसे आमतौर पर सेलिब्रिटी कह दिया जाता है। एक बार इस श्रेणी में आने के बाद इनके जीवन में घटित हर घटना खबर का रूप ले लेती है। कारण यही होता है कि इनकी दुनिया के बारे लोग जानना चाहते हैं। इनकी लाइफस्टाइल को फॉलो करना चाहते हैं। यही वजह है कि जब इन सेलिब्रिटियों के तलाक की खबरें आती हैं तो वो समाज पर अपना असर छोड़ती है। लोग जाने-अंजाने इनकी स्थिति से खुद को जोड़ने लगते हैं। इनके उठाए मुद्दों से अपनी जिंदगी जोड़ते हैं, इनकी दुनिया से अपनी तुलना करते हैं और इन्हीं सबसे होती है आपसी रिश्ते बिगड़ने की शुरुआत।

लोग पहले बिना सोचे समझें सेलिब्रिटियों के ऐसे फैसलों पर कमेंट करते हैं, उसमें दिलचस्पी दिखाते हैं, क्या हुआ-कैसे हुआ जानना चाहते हैं और फिर उसी फैसले से प्रभावित होते हुए भी दिखते हैं… गलती उनकी भी नहीं है। पेज थ्री की दुनिया ने आमजन के लिए मॉडर्न होने की परिभाषा यही बना दी है कि जो सेलिब्रिटी करें वो उसे फॉलो करें, जबकि, देखा जाए तो हकीकत यह है कि जो सेलिब्रिटी अपनी दुनिया में रिश्तों के साथ कर रहे हैं वहाँ वह भले उन्हें निजी तौर पर प्रभावित करे लेकिन सार्वजनिक तौर पर वह कदम आम है, उनके लिए नए लोगों से मिलना, नए संबंधों में जुड़ना, परिवार से कटना, चकाचौंध में जीना नॉर्मल है… मगर सोचिए क्या आपकी अपनी दुनिया में ऐसा होता है।

सेलिब्रिटी को देख उनके फैंस हद से ज्यादा मॉर्डन होने के प्रयासों में रिश्तों को तवज्जों देना छोड़ देते हैं, उनकी जीवनशैली बदलने लगती है, उनके आसपास लोगों का सर्कल बदलता है… मगर याद रहे इन सबके बीच आपके आसपास का समाज वही रहता है जिसके लिए विवाह पवित्र बंधन है जो नोंक-झोंक पर तलाक नहीं सुलाह करने की सलाह देता है। एक रिश्ते के होते दूसरे रिश्ते को नाजायज समझता है। उनके लिए आए दिन पार्टनर बदलना अभी सामान्य नहीं हुआ है इसलिए जब कोई बॉलीवुड के कल्चर को आम जिंदगी में अपनाता है तो वह असहज हो जाते हैं, उन्हें संस्कृति मिटने का खतरा साफ दिखता है।