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2 बार एबॉर्शन, धर्मांतरण का दबाव और मारपीट: गुजरात के हुसैन बलूच ने शादीशुदा सिख महिला का किया रेप, अब्बा ने भी किया यौन शोषण

गुजरात के जामनगर से ग्रूमिंग जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ एक मुस्लिम युवक पर सिख महिला को शादी का झाँसा देकर निकाह करने और उसे गर्भवती करके छोड़ देने का आरोप लगा है। मारपीट और धर्मांतरण का दबाव झेलने वाली महिला का कई बार गर्भपात भी करवाया गया। आरोपित का नाम हुसैन बलूच है। हुसैन के साथ उसके अन्य परिजन और रिश्तेदार भी इस घटना में शामिल बताए गए हैं। पीड़िता मूलतः पंजाब की रहने वाली है। मामले की शिकायत गुरुवार (9 मई 2024) को की गई है। कुल 6 आरोपितों को नामजद करके पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

यह घटना कच्छ के अंजार थानाक्षेत्र की है। यहाँ 9 मई को मूल रूप से पंजाब के होशियारपुर की रहने वाली सिख समुदाय की पीड़िता ने शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि वह शादीशुदा और 10 साल के एक बच्चे की माँ है। पति से अनबन की वजह से वह अकेली रहती है। महिला का भाई मकान बनाने और खरीदने-बेचने का काम करता है। पीड़िता इन मकानों से किराया आदि वसूलने का काम करती थी। जून 2021 में समीर नाम का मुस्लिम युवक अपनी बीवी के साथ महिला के भाई के घर में किराए पर रहने के लिए आया।

आरोप है कि परिचित होने के बाद समीर और उसकी बीवी अक्सर पीड़िता से किसी मुस्लिम युवक से निकाह करने के लिए कहने लगे। सितंबर 2021 में समीर का रिश्तेदार हुसैन बलूच उनके घर आया। हुसैन मूलतः गुजरात के ही जामनगर का रहने वाला बताया जा रहा है। समीर ने सिख महिला को हुसैन से मिलने के लिए बुलाया। आरोप है कि मुलाक़ात के बाद हुसैन ने पीड़िता से निकाह का प्रस्ताव रखा। अलग-अलग मजहब होने की वजह से इस प्रपोजल को महिला ने ठुकरा दिया।

कुछ दिनों बाद हुसैन बलूच पीड़िता को फोन करने लगा। इस बातचीत के दौरान उसने महिला को अपने प्यार के जाल में फँसाने के लिए बहुत कोशिश की। हुसैन ने कई बार अपनी तस्वीरें भी पीड़िता को भेजीं। इसके बावजूद महिला ने हुसैन को इस रिश्ते के लिए मना कर दिया। मना करने के बावजूद हुसैन ने पीड़िता को कॉल करना बंद नहीं किया। नवम्बर 2021 में हुसैन के कई बार बुलाने पर पीड़िता उसके घर गई। हुसैन ने पीड़िता को अपने परिवार से मिलाने का बहाना कर के बुलाया था। हालाँकि उसने महिला को 2 दिनों तक अपने घर में रोका और उसके साथ रेप किया।

बेटे को सिखाने लगा नमाज़ पढ़ना

दो दिनों के बाद महिला अपने घर पहुँची। उसने अपने परिवार में हुसैन से शादी की बात चलाई। पीड़िता के परिवार ने हुसैन के मुस्लिम होने की वजह से इंकार कर दिया। घर का विरोध देखते हुए पीड़िता अपने 10 वर्षीय बेटे को लेकर हुसैन के घर जामनगर पहुँच गई। यहाँ हुसैन ने खुद को मुस्लिम और पीड़िता को सिख बताते हुए शादी में अड़चन का बहाना बताया। उसने निकाह के लिए महिला के आगे इस्लाम कबूल करने की शर्त रखी। महिला का दावा है कि उसने धर्मांतरण से इंकार कर दिया तो हुसैन ने उसके साथ झगड़ा शुरू कर दिया।

वह महिला के बेटे को इस्लामी तौर-तरीके सिखाने लगा। उसे नमाज़ पढ़ने के लिए कहने लगा। जब पीड़िता के बेटे इससे इंकार किया तो उसकी पिटाई की गई। कुछ समय बाद हुसैन के अब्बा अकबर भी अपने बेटे के साथ रहने पहुँच गए। अकबर भी पीड़िता से छेड़खानी करने लगा। बाप-बेटे द्वारा मिल रही शारीरिक और मानसिक प्रताड़ना से परेशान हो कर पीड़िता जामनगर में ही अलग कमरा लेकर रहने लगी। यहाँ भी आकर हुसैन उसे इस्लाम कबूल करने का दबाव देता रहा।

गर्भवती हुई तो करवा दिया एबॉर्शन

शिकायत में महिला ने बताया है कि वो पहली बार गर्भवती हुई तो हुसैन ने उसे गर्भपात की दवा खिला दी। आरोपों के मुताबिक पीड़िता का 2 बार एबॉर्शन करवाया गया। अक्टूबर 2022 में पीड़िता एक बार और प्रेग्नेंट हुई। इस बार हुसैन अपने भाई फ़िरोज़ और भाभी के साथ पीड़िता को अस्पताल ले। गया यहाँ उसने महिला का एबॉर्शन कराना चाहा तो पीड़िता ने मना कर दिया और घर लौट आई। पीड़िता द्वारा गर्भपात न करवाने पर हुसैन ने उसे बेरहमी से पीटा। आखिरकार परेशान होकर महिला मार्च 2023 में अपने भाई के घर लौट गई। पुलिस में शिकायत होने के डर से हुसैन भी पीछे-पीछे आया और पीड़िता को मना कर चुप करवाया।

निकाह से मुकरा हुसैन

जुलाई 2023 में पीड़िता ने एक बच्चे को जन्म दिया। उसने हुसैन को निकाह के लिए कहा। हुसैन ने पीड़िता द्वारा गर्भपात न करवाने से खुद को नाराज बताया और निकाह से इंकार कर दिया। जब हुसैन के अन्य परिजनों से इस करतूत की शिकायत हुई तो उन्होंने भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया। आख़िरकार 9 मई 2024 को पीड़िता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। पीड़िता ने अपनी प्रताड़ना को बताते हुए एक वीडियो भी जारी किया है। वीडियो में उसने आरोपितों पर खुद को जान से मार डालने की धमकी देने के साथ 9 से 10 लाख रुपए हड़प लेने का भी आरोप लगाया है।

6 आरोपितों पर नामजद FIR

पीड़िता ने वीडियो में यह भी कहा है कि हुसैन बलूच ने उनकी तरह कई अन्य हिन्दू लड़कियों को भी अपने झाँसे में लेकर बहका रखा है। रुपए लिए गए हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी आरोप लगाया है कि हुसैन ने अन्य हिंदू लड़कियों को भी बहका रखा है। पुलिस ने इस शिकायत पर हुसैन के साथ समीर, समीर की बीवी, हुसैन के भाई फ़िरोज़ और भाभी, हुसैन के अब्बा अकबर को नामजद किया है। इन सभी पर IPC की धारा 376(2)(एन), 328, 354, 323 और 114 और किशोर न्याय अधिनियम की धारा 83 के तहत कार्रवाई की गई है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक मामले का संज्ञान गुजरात के गृहराज्य मंत्री हर्ष सांघवी ने भी मामले का संज्ञान लिया है। उन्होंने इस केस को क्राइम ब्रांच (LCB) को ट्रांसफर कर दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई कर रही है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

‘मुझसे कहा इल्जाम अपने सिर ले वरना…’ : पुणे पोर्श कार एक्सीडेंट केस में ड्राइवर ने कराई FIR, नाबालिग का दादा गिरफ्तार

पुणे के पोर्श कार एक्सीडेंट मामले में पुलिस ने नाबालिग आरोपित लड़के के दादा को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि लड़के के दादा एक्सीडेंट के बाद अपने पोते को बचाने के लिए ड्राइवर को फँसाना चाहते थे। उन्होंने ड्राइवर को बुलाकर उसे धमकाया भी था। अब इसी संबंध में ड्राइवर ने एफआईआर करवाई है।

पुणे पुलिस के मुताबिक, ड्राइवर गंगाधर की शिकायत पर नाबालिग आरोपित के पिता विशाल अग्रवाल और दादा सुरेंद्र अग्रवाल के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 365, 368, 506 और 34 के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ड्राइवर द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में कहा गया है कि एक्सीडेंट के बाद लड़के के दादा सुरेंद्र अग्रवाल ने उन्हें फोन किया था। इसके बाद वो ड्राइवर पर चिल्लाए और जबरन अपनी बीएमडब्लू में बिठाकर बंगले तक ले गए। उन्होंने वहाँ मोबाइल छीनकर सारा इल्जाम ड्राइवर से अपने ऊपर लेने को कहा। वह बोले- “अगर इस बारे में किसी को बताया तो याद रखना…।”

पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने मीडिया को बताया कि ड्राइवर से लड़के के दादा ने कहा था कि अगर वह सारा इल्जाम अपने सिर पर लेगा तो उसे बहुत सारे पैसे दिए जाएँगे। पुलिस ने बताया कि ड्राइवर से पूछताछ के बाद ड्राइवर अपने घर जाना चाहता था लेकिन जब पूछताछ खत्म हुई तो वो उसे अपने घर ले गए और उसे बंधक बना लिया।

उल्लेखनीय है कि किशोर के दादा इससे पहले शिवसेना पार्षद (एकनाथ शिंदे गुट के) पर हमले के सिलसिले में हत्या के प्रयास के मामले में आरोपित रहे हैं। इसके अलावा परिवार के भी संबंध अंडरवर्ल्ड से सामने आए हैं। पुलिस ने आरोपित के दादा की गिरफ्तारी से पहले इस मामले में लड़के के पिता को गिरफ्तार किया था। वहीं आरोपित को सुधार गृह भेजा गया है।

इसके अलावा इस मामले में एक्शन करते हुए येरवडा पुलिस स्टेशन के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया क्योंकि मामले में उनका समग्र आचरण अनुचित था। इसी तरह साइबर सेल ने एक रील क्रिएटर के खिलाफ भी केस दर्ज करके एक्शन लिया है। उसमें एक वीडियो बनाई थी जिसमें आरोपित को छोड़ने की बात कही गई थी। बाद में वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई और फिर केस दर्ज हुआ।

पश्चिम बंगाल में हिंसा, 1 की मौत: लोकसभा चुनाव के छठे चरण में 40% तक वोटिंग, यूपी-झारखंड में भी आई तेजी

लोकसभा चुनाव 2024 में छठें चरण का मतदान जारी है। छठें चरण के मतदान में सबसे आगे पश्चिम बंगाल है, लेकिन पश्चिम बंगाल से ही हिंसा की खबर भी आ रही है। पश्चिम बंगाल में एक राजनीतिक कार्यकर्ता की हत्या के बाद हंगामा हुआ है। वहीं, मतदान के क्रम में पश्चिम बंगाल के बाद यूपी और झारखंड है। जबकि देश की राजधानी दिल्ली में अपेक्षाकृत कम मतदान हुआ है। दोपहर 1 बजे तक के आँकड़े सामने आ चुके हैं।

राजनीतिक हिंसा के बीच पश्चिम बंगाल में सर्वाधिक मतदान

ईटी की रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर 1 बजे तक कुल 39.13% मतदान दर्ज किया गया है। पश्चिम बंगाल में 1 बजे तक सर्वाधिक 54.80 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है, तो झारखंड में 42.54 प्रतिशत। उत्तर प्रदेश 37.23 प्रतिशत मतदान के साथ तीसरे नंबर पर है, तो बिहार में 36.48 प्रतिशत, हरियाणा में 36.48 प्रतिशत, जम्मू एवं कश्मीर में 35.22 प्रतिशत मतदान हो चुका है। वहीं, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली 34.37 प्रतिशत और ओडिशा 35.69 प्रतिशत मतदान के साथ सबसे फिसड्डी साबित हो रहे हैं।

बता दें कि लोकसभा चुनाव के छठे चरण में कुल 889 कैंडिडेट्स मैदान में हैं, जिनमें 797 पुरुष और 92 महिला उम्मीदवार हैं। इस चरण में तीन केंद्रीय मंत्री, तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के साथ ही कई हैवीवेट कैंडिडेट हुंकार भर रहे हैं।

मोदी सरकार के 3 केंद्रीय मंत्रियों धर्मेंद्र प्रधान, कृष्ण पाल सिंह गुर्जर और राव इंद्रजीत सिंह की किस्मत का फैसला शाम तक ईवीएम में कैद हो जाएगा, तो 3 पूर्व मुख्यमंत्रियों महबूबा मुफ्ती, मनोहर लाल ख‌ट्‌टर और जगदंबिका पाल की किस्मत का फैसला भी जनता कर ही रही है। इसके अलावा हैवीवेट कैंडिडेट्स में मेनका गाँधी, नवीन जिंदल, मनोज तिवारी, बाँसुरी स्वराज, संबित पात्रा, राज बब्बर, निरहुआ जैसे नाम हैं।

मिदनापुर में राजनीतिक हिंसा

पश्चिम बंगाल के मिदनापुर में राजनीतिक हिंसा के दो मामले सामने आए। पहला मामला पूर्वी मिदनापुर के महिषादल का है, जहाँ शुक्रवार की रात एक टीएमसी कार्यकर्ता की जान चली गई, वो पार्टी का पदाधिकारी भी था। तो दूसरा मामला बक्चा इलाके का है, जहाँ टीएमसी और बीजेपी कार्यकर्ताओं में जबरदस्त झड़प हो गई है। इसमें अनंत बिजली नामक एक टीएमसी कार्यकर्ता गंभीर रूप से घायल हो गया है। उसे मैना स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, वहाँ से उसे तामलुक जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2024 के छठें चरण में राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की 7 सीटों के साथ ही उत्तर प्रदेश की 14, हरियाणा की सभी 10, बिहार और पश्चिम बंगाल की आठ-आठ, ओडिशा की छह, झारखंड की चार और जम्मू-कश्मीर की एक सीट पर मतदान हो रहा है। इसके अलावा ओडिशा की 42 विधानसभा सीट पर भी मतदान हो रहा है।

छत्तीसगढ़ में सबसे बड़ी बारूद की फैक्ट्री में धमाका, कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई आवाज: 10-12 लोग हताहत, 800 से ज्यादा मजदूर कर रहे थे काम

छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में एक बारूद फैक्ट्री में ब्लास्ट की सूचना मिल रही है। इस ब्लास्ट में 10-12 लोगों के हताहत होने की जानकारी मिल रही है। जिस फैक्ट्री में ब्लास्ट हुआ, वो छत्तीसगढ़ में बारूद कब सबसे बड़ी फैक्ट्री है। बारूद फैक्ट्री में ब्लास्ट में कई लोग घायल भी हुए हैं जो मालवे में दबे हो सकते हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये ब्लास्ट जिस फैक्ट्री में हुआ, वो बेमेतरा जिले के बेरला ब्लॉक के बोरसी में है। जिस समय ये धमाका हुआ, फैक्ट्री में काफी संख्या में लोग मौजूद थे। इस ब्लास्ट में घायल हुए लोगों को रायपुर के मेकाहारा अस्पताल रेफर किया गया है। इसके अलावा आसपास के अस्पताल में भी कई लोगों को भर्ती कराया गया है।

ब्लास्ट की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन की टीम भी घटनास्थल पर पहुँच गई और फायर ब्रिगेड के साथ एंबुलेंस की टीमें भी पहुँची। इसके बाद बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू कराया गया। ब्लास्ट कैसे हुआ अभी इसके कारणें का पता नहीं चल पाया है।

बेमेतरा कलेक्टर रणबीर शर्मा ने बताया कि जैसे ही एसडीआरएफ की टीम आएगी मलवा हटाने का कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा। घटना की मुख्य वजह क्या थी इसे लेकर कलेक्टर ने कहा कि यह बताना बिल्कुल भी मुश्किल होगा की किन कारणों से यह घटना घटी है। क्योंकि यह बारूद फैक्ट्री थी, केमिकल्स भी यहाँ थे। उन्होंने कहा कि मैं फैक्ट्री के संचालकों से बात कर रहा हूँ, कितनी मजदूरों की वर्तमान में संख्या थी, इन सब की जानकारी लेकर अपडेट किया जाएगा।

बता दें कि बेमेतरा में बारूद की कई फैक्ट्रियाँ हैं। फैक्ट्री में तमाम रसायनिक पदार्थ रखे रहते हैं। ऐसे में किस रसायन की वजह से ब्लास्ट हुआ, वो पता लगाना मुश्किल हो सकता है। वहीं, धमाके के समय फैक्ट्री में 800 से अधिक मजदूरों की मौजूदगी बताई जा रही है, ऐसे में हताहतों की संख्या बढ़ भी सकती है।

OBC आरक्षण में मुस्लिम घुसपैठ पर कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला देश की आँख खोलने वाला: PM मोदी ने कहा – मेहनती विपक्षी संसद में पहुँचें, सरकार की आलोचना करें

लोकसभा चुनाव 2024 धीरे-धीरे ढलान पर है। छठें चरण के मतदान के बाद अब आखिरी चरण का मतदान 1 जून को होगा। इस आखिरी चरण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की लोकसभा सीट वाराणसी में भी वोटिंग होगी। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डीडी न्यूज से विशेष बातचीत की। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि मैं उम्मीद करता हूँ कि विपक्ष से कुछ मेहनती लोग चुनकर संसद में पहुँचें, ताकि वो सरकार की सही तरीके से डाटा के साथ, मेहनत के साथ आलोचना करें। इससे देश का विकास होगा। पीएम मोदी ने कहा कि मेरे लिए मेरे देश की 140 करोड़ जनता साकार ईश्वर का रूप है। इस दौरान पीएम मोदी ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा ओबीसी आरक्षण से जुड़े फैसले को देख की आँखों को खोलने वाला बताया।

लोकसभा चुनाव 2024 में 350 से ज्यादा रैलियों, जनसभाओं, रोड-शो में हिस्सा ले चुके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे चुनाव में सबसे ज्यादा व्यस्त रहे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में चुनाव सबसे बड़ा उत्सव होता है। सरकार और राजनीति दलों को जनता प्रति उत्तरदायी होना चाहिए। चुनाव के समय सरकार और राजनीतिक दलों को अपने विजन, अपनी योजनाओं को देश के सामने रखना चाहिए। एक ही महीनें में 4-4 बातें बोलकर जनता को गुमराह करना सही नहीं है। पीएम मोदी ने कहा, “मैं चुनावों को जनता जनार्दन के दर्शन का अभियान मानता हूँ। मेरे लिए ईश्वर के 2 रूप हैं, साकार और निराकार। साकार रूप मेरे देश के 140 करोड़ देशवासी हैं। मेरे लिए चुनाव ईश्वर आराधना जैसा होता है। जनता जनार्दन के दर्शन, उनके मनोभावओं को समझने का प्रयास करना। ये प्रक्रिया मेरी निरंतर चलती है, चुनाव के समय ज्यादा हो जाता है।”

अब विकास की बात होने लगी, ये सबसे बड़ा संतोष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मैंने खूब चुनाव लड़े हैं और लड़वाए हैं। पहले जाति-बिरादरी जैसी चीजें चुनाव के समय होती थी, लेकिन गुजरात से मेरा अनुभव है कि मैंने सभी दलों को मजबूर कर दिया था कि यहाँ विकास की बात होगी। मेरे लिए खुशी की बात है कि जनता विकास की बात करने लगी है। लोगों की अपेक्षाएँ बढ़ी हैं।” पीएम मोदी ने कहा कि पहले जनता चाहती थी कि बाढ़ के समय सड़क पर मिट्टी पड़ जाए, इतनी ही चाहत होती थी, लेकिन अब 4 लेन सड़क माँगते हैं। ये बदलाव है।”

अखबार पढ़कर राय नहीं बनाया

इस बातचीत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मेरे पास सूचना के पास बहुत साधन हैं। मैं अखबार पढ़कर राय नहीं बनाता। मेरे यहाँ सिर्फ मुझे जो अच्छा लगे, ये परंपरा नहीं है। फिल्टर नहीं किया जाता। ऐसे में मेरे पास सभी प्रतिक्रियाएँ सही तरीके से आती हैं। गुजरात के समय को याद करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि जब सीएजी की रिपोर्ट आती है। पॉजिटिव रिपोर्ट आती है, तो रिपोर्ट अलमारी में चली जाती है, कोई चर्चा नहीं करता। लेकिन मैं गुजरात में मुख्यमंत्री रहते हुए सीएजी रिपोर्ट में मिली कमियों को दूर करने का निर्देश देता था। आलोचनाओं को सुनने वाला व्यक्ति हूँ। पीएम मोदी ने कहा कि पाँच साल के कार्यकाल में 3 साल के बाद शिकायत ही नहीं रह जाती थी। विपक्ष के पास बोलने को कुछ बचता नहीं था, क्योंकि उनकी समस्याओं को भी मैं एडजस्ट करता था। उनकी समस्याओं को सुनकर दूर करता था।

सरकार की सही आलोचना जरूरी

प्रदानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी आलोचनाओं पर कहा, “आलोचना के लिए मेहनत करनी होती है। मैंने दावा किया कि 4 करोड़ घर बने, इसकी आलोचना करने के लिए मेहनत करनी पड़ती है, जो विपक्ष नहीं करता है। अच्छी सरकार चलाने के लिए आलोचन जरूरी है, लेकिन अब लोग मेहनत ही नहीं करते। अगर मेरे दावे 4 करोड़ घर की आलोचना करनी है, तो विपक्ष को इसकी अच्छे से जाँच करनी चाहिए। सबको घर मिला कि नहीं मिला। किसी को पैसे तो नहीं देने पड़े। क्या प्रोसेस हुआ, क्या समस्याएँ आई। अगर विपक्ष ऐसी आलोचना करता है, तो ये अच्छा रहेगा। जो कमियाँ दिखेंगी, उन्हें दूर किया जाए, लेकिन विपक्ष ऐसी मेहनत ही नहीं करता। मैं चाहता हूँ कि विपक्ष की तरफ से सदन में ऐसे लोग चुनकर आएँ, जो मेहनती हों। आलोचना में भी देश का भला हो।”

गठबंधन की सरकारों पर बोले पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि गठबंधन की सरकारों के रंग रूप अलग-अलग रहे हैं। अटल जी की भी सरकार गठबंधन की थी, लेकिन सबकी जिम्मेदारियाँ तय थी। मनमोहन सिंह जी की भी सरकार थी, लेकिन उसमें एक सुपर पीएम भी था। हर मिनिस्ट्री खुद को अलग सरकार मानती थी। ये सुपर पीएम वाला कॉन्सेप्ट आने से स्थितियाँ बिगड़ गई। इस बार भी इंडी गठबंधन पाँच साल पाँच पीएम को लेकर तैयारी कर रही है। पहले भी ऐसा कर चुके हैं ये लोग, बिखरी व्यवस्था वाली। अब भी ऐसा ही कॉन्सेप्ट ला रहे हैं। ये सोच होगी, तो देश कैसे चलेगा।

अब मजबूत सरकार चाहती है देश की जनता

पीएम मोदी ने कहा कि भारत की जनता ने 30 साल बाद जब 2014 में जब नई सरकार चुनी, तो पुरानी सरकार के प्रति गुस्सा भी था, मेरे पास गुजरात का ट्रैक रिकॉर्ड भी था। बीजेपी ने स्पष्ट रूप से कहा था कि हम मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनाएँगे। जनता के पास साफ नजरिया था, इसलिए उसने हमें चुना। साल 2019 में उन्होंने पिछले 5 साल का ट्रैक रिकॉर्ड देखा। ऐसे में जनता ने देखा कि स्थिर सरकार देश के लिए अच्छी रहती है। ऐसे में देश की जनता स्थिर और मजबूत सरकार दे रही है।

कलकत्ता हाई कोर्ट का फैसला देश की आँख खोलने वाला

मुस्लिम आरक्षण पर सवाल पूछने पर पीएम मोदी ने कहा, “लोग कहते हैं कि नरेंद्र मोदी मुस्लिमों के आरक्षण के विरोधी हैं। जबकि हकीकत ये है कि हमारा संविधान यही कहता है। बाबा साहेब आंबेडकर से लेकर तमाम बुद्धिजीवियों ने यही बात कही। मैं भी यही कहता हूँ। मैं धर्म को आधार बनाकर आरक्षण देने का विरोध इसलिए करता हूँ, क्योंकि संविधान ने सबको बराबर माना है। ऐसे में मैं किसी खास धर्म का हूँ और मुझे आरक्षण मिलना चाहिए, ऐसा कोई कहे तो ये नहीं होगा।”

कलकत्ता हाई कोर्ट के फैसले पर पीएम मोदी ने कहा कि ये फैसला देश की आँख खोलने वाला है कि आप कैसे ओबीसी के अधिकारों को छीन रहे हैं। वैसे, दिल्ली के शाही परिवार ने जवाहरलाल नेहरू के समय से ओबीसी को स्वीकार ही नहीं किया। वीपी सिंह की सरकार तक यही किया। ये लोग ओबीसी से नफरत करते रहे। ये लोग ओबीसी के दुश्मन रहे ही हैं। लेकिन ओबीसी आ गया। ऐसे में इन्होंने कर्नाटक मॉडल बनाया। ओबीसी के हक पर लूट किया। उसमें मुस्लिमों को घुसाया। यही काम ममता बनर्जी ने किया, लेकिन कोर्ट ने पकड़ लिया और रोक लगा दी।

SFI के गुंडों के बीच अवैध संबंध, ड्रग्स बिजनेस… जिस महिला प्रिंसिपल ने उठाई आवाज, केरल सरकार ने उनका पैसा-पोस्ट सब छीना, हाई कोर्ट से राहत

केरल की वामपंथी सरकार ने एसएफआई के गुंडों के खिलाफ बयान देने पर एक कॉलेज की महिला प्रिंसिपल के खिलाफ तमाम कदम उठाए। उन्हें पद से हटा दिया और फिर सरकार के खिलाफ बोलने जैसे चार्ज लगाकर उनके रिटायरमेंट के समय उन पर जाँच बैठा दी। यही नहीं, उनका ट्रांसफर भी कर दिया। महिला प्रिंसिपल ने कॉलेज कैंपस में एसएफआई के गुंडों द्रावा ऑर्गनाइज क्राइम, नशा जैसे कामों में लिप्त रहने का आरोप लगाया था, जिसके बाद एसएफआई के गुंडों ने उन्हें घंटों तक कॉलेज परिसर में ही बंधक बना लिया था, लेकिन गुंडों पर कार्रवाई करने की जगह केरल की वामपंथी सरकार ने महिला प्रिंसिपल पर ही कर दी। हालाँकि अब केरल हाई कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई है।

ऑनमनोरमा की रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला केरल के कासरगोड स्थित सरकारी कॉलेज का है, जहाँ सीपीआई-एम की अगुवाई वाली वापमंथी सरकार ने एसएफआई के खिलाफ स्टैंड लेने वाली प्रिंसिपल डॉ रेमा एम. को प्रताड़ित किया। केरल सरकार ने कोशिश की, कि प्रिंसिपल को रिटायरमेंट के बाद मिलने वाली स्कीम्स का फायदा भी न मिल पाए और वो कोर्ट कचहरी के ही चक्कर काटती रहें। लेकिन केरल हाई कोर्ट के जस्टिस ए मुहम्मद मुस्ताक और जस्टिस शोबा अन्नम्मा इआपेन की बेंच ने केरल सरकार के मंसूबों को नाकामयाब बनाते हुए प्रिंसिपल के खिलाफ बैठाई गई 2 इन्कवॉयरी को खत्म कर दिया। डॉ रेमा एम. 31 मार्च 2024 को रिटायर हो गईं, लेकिन उनके खिलाफ जारी विभागीय जाँच की वजह से उन्हें अब तक रिटायरमेंट का कोई भी लाभ नहीं मिल पाया था। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई के बाद 9 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था, जिसे 21 मई 2024 को वेबसाइट पर अपलोड किया गया। इस मामले में केरल हाई कोर्ट ने ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच’ के मुद्दे पर भी अहम बात कही है।

क्या था मामला, जिसकी वजह से प्रिंसिपल की आई शामत?

केरल सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री आर बिंदू ने पहले तो कासरगोड गवर्नमेंट कॉलेज की प्रिंसिपल को पद से हटा दिया था, तो उसके बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने उनका ट्रांस 200 किमी दूर कोझीकोडे जिले में कर दिया था। ये सब तब हुआ, जब प्रिंसिपल ने एक ऑनलाइन पोर्टल को दिए इंटरव्यू में एसएफआई के गुंडों और छात्रों के एक गुट पर बाकी छात्रों पर अत्याचार करने, आपस में अवैध संबंध रखने और ड्रग्स के इस्तेमाल का आरोप लगाया था। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, ‘अगर प्रिंसिपल ने एसएफआई के खास सदस्यों पर आरोप लगाए हैं, तो ये मामला एसएफआई के खिलाफ बोलने का है, सरकार के खिलाफ बोलने का नहीं। लेकिन सरकार ने बिना किसी स्वतंत्र जाँच के उनके खिलाफ विभागीत जाँच बैठा दी और कार्रवाई भी कर दी।’

इस मामले में केरल सरकार ने कॉलेजिएट एजुकेशन डिपार्टमेंट के डिप्टी डायरेक्टर सुनील जॉन, प्रो गीता ई और सीनियर क्लर्क श्यामलाल आईएस की सदस्यता वाली एक जाँच समिति बनाई थी, जिसने एसएफआई के कासरगोड यूनिट सेक्रेटरी अक्षय एमके द्वारा की गई शिकायत की जाँच की। इस कमेटी ने डॉ रेमा को किसी अन्य कॉलेज में ट्रांसफर किए जाने का सुझाव दिया, लेकिन एसएफआई के खिलाफ लगाए गए किसी भी आरोप की जाँच नहीं की। इस मामले में कोर्ट ने कहा, “ये जाँच कमेटी तो सिर्फ याचिकाकर्ता के खिलाफ एकतरफा जाँच के लिए बनाई गई लगी, न कि कॉलेज में चल रही समस्याओं को लेकर।” इस मामले में कोर्ट ने एक माह पहले ही उनके खिलाफ विभागीय जाँच हटा दी थी, लेकिन विस्तृत फैसला अब आया है।

प्रिंसिपल और एसएफआई का विवाद

इस मामले में 10 फरवरी 2023 को एसएफआई के सदस्यों ने डॉ रेमा से पीने के पानी को लेकर शिकायत की थी। उन्होंने उसी दिन कॉलेज के सुप्रीटेंडेंट को फिल्टर ठीक कराने एवं पानी की समस्या दूर करने का आदेश दे दिया था, लेकिन उसी दिन एसएफआई के नेता डॉ रेमा के चैंबर में पहुँचे और उन्होंने फिल्टर को लेकर सफाई देने की माँग की। इस मामले में 22 फरवरी को एसएफआई के गुंडों ने मीडिया में बयानबाजी की कि प्रिंसिपल ने छात्रों को गालियाँ दी है। उसी दिन एसएफआई से जुड़े करीब 60 गुंडों ने प्रिंसिपल को ही सुब 10.30 से लेकर दोपहर 2 बजे तक बंधक बनाए रखा। यहाँ तक कि उन्हें शौचालय तक इस्तेमाल नहीं करने दिया गया। यही नहीं, एसएफआई से जुड़ी छात्राओं ने उनके साथ हाथापाई भी की। उन्हें पुलिस ने आकर बचाया।

इस मामले के 2 दिन बाद 23 फरवरी 2023 को केरल की मंत्री आर बिंदू ने उन्हें प्रिंसिपल के पद से हटा दिया। इस दौरान एसएफआई के गुंडों ने ऐलान किया कि वो प्रिंसिपल को कॉलेज कैंपस में कदम तक नहीं रखने देंगे। इसके अगले दिन प्रिंसिपल का बयान न्यूज पोर्टल में छपा था, जिसमें उन्होंने एसएफआई के गुंडों की करतूतों को दुनिया के सामने रखा था।

कागरगोड कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ रेमा एम ने कहा था कि उन्होंने छात्र-छात्राओं को शारीरिक संबंध बनाते देखा है और वो कैंपस में ड्रग्स भी इस्तेमाल करते हैं। उन्होंने एसएफआई के गुंडों पर अवैध गतिविधियों और अन्य छात्रों पर अत्याचार करने के भी आरोप लगाए। इस मामले में केरल सरकार ने उन्हें शो-कॉज नोटिस भेजा था कि उन्होंने कॉलेज का नाम बदनाम किया है। उन्होंने नोटिस के जवाब में कहा था कि ‘मैंने पूरे कॉलेज के खिलाफ कोई बात नहीं की, मैंने कुछ छात्रों के खिलाफ ही बात की, क्योंकि उसी कॉलेज में मेरी बेटी भी पढ़ती है।’ लेकिन उनके जवाब से असंतुष्ट केरल सरकार ने 3 सदस्यीय कमेटी बनाकर उनके खिलाफ जाँच बैठा दी।

15 2023 को कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बताया गया कि डॉ रेमा एम ने सरकारी कर्मचारी नियमन 1960 से जुड़े रूल 62 और 63 को तोड़ा है। ऐसे में दंड स्वरूप उन्हें दूसरे कॉलेज ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके बाद 9 जुलाई 2024 को उनका ट्रांसफर 200 किमी दूर कर दिया गया था। और फिर ये कानूनी लड़ाई शुरू हुई।

लगातार प्रताड़ना, सरकार और हाई कोर्ट

केरल सरकार के फैसले के खिलाफ प्रिंसिपल डॉ रेमा एम ने केरल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल में अपील की। ट्रिब्यूनल ने सरकार से कहा कि वो रेखा एम को किसी नजदीकी कॉलेज में ट्रांसफर करे, न कि 200 किमी दूर। उनका रिटायरमेंट 31 मार्च 2024 को होना है, ऐसे में उन्हें राहत दी जाए। इसके बाद सरकार ने उन्हेंने दूसरे कॉलेज ट्रांसफर कर दिया, लेकिन ट्रिब्यूनल ने उन्हें प्रिंसिपल पद से हटाने के मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं दिया था, ऐसे में उन्होंने हाई कोर्ट का रूख किया। हाई कोर्ट ने सर्विस कंडक्ट रूल 62 और 63 में की गई कार्रवाई को निरस्त कर दिया।

हाई कोर्ट ने कहा, “डॉ रेमा एम ने एसएफआई यूनिट और उसके सदस्यों के खिलाफ बोला था। न कि सरकार के खिलाफ या सरकार और छात्रों के बीच संबंधों पर।” रूल 62 कहना है कि कोई सरकारी कर्मचारी ऐसे बयान नहीं दे सकता, जिससे सरकार और आम जनता के बीच अविश्वास बढ़े। लेकिन अगर कोई कन्फ्यूजन है, तो रूल 63 के मुताबिक, किसी बयान को जारी करने से पहले सरकार की परमिशन लेनी पड़ती है। जजों ने देखा कि डॉ रेमा ने एसएफआई के गुंडों के खिलाफ अपनी बात रखी थी, साथ ही उन्होंने ऐसे पूर्व छात्रों के बारे में भी बात की थी, जो अब भी कॉलेज में आते हैं और अवैध गतिविधियों को अंजाम देते हैं। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा, “याचिकाकर्ता इस देश की नागरिक है और वो अपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के तहत अपने विचार रखने को स्वतंत्र हैं।” इस मामले में 22 मार्च 2024 को फैसला सुरक्षित रख लिया गया था।

खास बात ये है कि एक तरफ केरल हाई कोर्ट ने इस मामले में 22 मार्च 2024 को फैसला सुरक्षित रख लिया था, तो दूसरी तरफ उसके 2 दिन बाद ही 24 मार्च 2024 को केरल सरकार ने उनके खिलाफ नया मेमो जारी कर दिया, जिसमें उन पर आरोप लगाया गया कि उन्होंने अगस्त 2022 में एक छात्रा को एडमिशन लेने से रोक दिया थ, क्योंकि वो अपने पिता के साथ नहीं आई थी। उस छात्रा ने कन्नूर यूनिवर्सिटी के रजिस्ट्रा के सामने 23 अगस्त 2022 को ही शिकायत दर्ज करा दी थी। डॉ रेमा ने इसके जवाब में कहा कि ऐसा नियमों के चलते किया गया, क्योंकि एंटी-रैगिंग फोरस और एंटी डावरी फोरम के फॉर्म्स पर पिता के हस्ताक्षर अनिवार्य थे।

इस मामले में 19 अक्टूबर 2024 को यूनिवर्सिटी सिंडिकेट ने डॉ रेमा के खिलाफ पैनल एक्शन का सुझाव दिया था, जिसमें सिंडिकेट ने पाया था कि डॉ रेमा ने ‘अपनी सीमाओं का उल्लंघन किया’। लेकिन हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि उनके खिलाफ पहली इन्क्वॉयरी ही इसलिए बैठाई गई थी, ताकि उन्हें रिटायरमेंट का लाभ न मिल सके और पेंशन से जुड़ी सुविधाओं से वंचित किया जा सके। दूसरे मेमो पर भी हाई कोर्ट ने साफ कहा है कि दूसरा मेमो कुछ और नहीं, बल्कि पहले मेमो को ही आगे बढ़ाने का प्रयास है, ताकि प्रिंसिपल रेखा एम को पेंशन और अन्य सुविधाओं से वंचित किया जा सके।

हल्द्वानी बनभूलपुरा दंगा केस: मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक के खिलाफ जारी 2.44 करोड़ के रिकवरी नोटिस पर HC की रोक, वसूली को बताया था अवैध

उत्तराखंड के हल्द्वानी जिले के बनभूलपुरा इलाके में हुई सांप्रदायिक हिंसा के मामले में मुख्य आरोपित अब्दुल मलिक के खिलाफ नगर निगम द्वारा जारी 2.44 करोड़ रुपए की रिकवरी नोटिस पर नैनीताल हाई कोर्ट ने रोक लगा दी है। बनभूलपुरा में इसी साल 8 फरवरी 2024 से हुई हिंसा में 5 लोगों की मौत हो गई थी, तो दर्जनों लोग घायल हो गए थे। इस हिंसा में करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुँचा था। अब्दुल मलिक कई दिनों की फरारी के बाद गिरफ्तार हुआ था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तराखंड हाई कोर्ट के जस्टिस मनोज कुमार तिवारी की सिंगल बेंच ने अब्दुल मलिक को राहत दी। शुक्रवार (24 मई 2024) को अब्दुल मलिक द्वारा जारी याचिका पर सुनवाई करते हुए नैनीताल हाई कोर्ट ने वसूली नोटिस पर रोक लगा दी। अब्दुल मलिक के खिलाफ हल्द्वानी नगर निगम ने 2.44 करोड़ की रिकवरी के लिए नोटिस जारी किया था। अब्दुल मतीन इसके खिलाफ हाई कोर्ट पहुँचा था, जहाँ से उसे राहत मिल गई।

बता दें कि हल्द्वानी नगर निगम की ओर से बनभूलपुरा में हुए दंगे में नुकसान के बदले में आरोपित अब्दुल मलिक को नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 470 के तहत 2.424 करोड़ रुपए का नोटिस 12 फरवरी 2024 को भेजा गया था। नोटिस में तीन दिन के अंदर यह धनराशि नगर निगम कार्यालय में जमा करने को कहा गया था। नोटिस में कहा गया कि दंगे में कई लोगों की जान व करोड़ों रुपए के सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचा था और इस केस में अब्दुल मलिक मुख्य आरोपित है। ऐसे में नुकसान के भरपाई के लिए यह रिकवरी नोटिस जारी किया गया है।

इस मामले में धनराशि जमा नहीं करने पर हल्द्वानी के तहसीलदार की ओर से आरोपित को 25 अप्रैल 2024 को वसूली नोटिस जारी किया था। आरोपित ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसके बाद हाई कोर्ट ने ये फैसला सुनाया है।

हाई कोर्ट में अब्दुल मलिक की ओर से इस नोटिस को गलत बताया गया। अब्दुल मलिक के वकील ने कहा कि अभी अब्दुल मलिक इस केस में आरोपित है, उसके खिलाफ दोष सिद्धि नहीं हुई है, ऐसे में उससे अभी वसूली नहीं की जा सकती। इसलिए ये रिकवरी नोटिस गलत है, इस पर रोक लगाई जाए। अब्दुल मलिक की ओर से अहरार बेग ने बतौर वकील हाई कोर्ट में ये याचिका दायर की थी, जिसके बाद कोर्ट ने इस रिकवरी नोटिस पर रोक लगा दी।

गौरतलब है कि पुलिस ने अब्दुल मलिक को 8 फरवरी को हुए उपद्रव में आरोपित बनाया है। आरोप है कि अब्दुल मलिक ने ही सरकारी जमीन पर फर्जी दस्तावेज बनाकर वहाँ मस्जिद और मदरसे का निर्माण करवाया था। मलिक इस जमीन को अपना बता रहा था। उस सरकारी भूमि पर अवैध मदरसे और मस्जिद को तोड़ने के दौरान स्थानीय लोगों ने पुलिस, नगर निगम और पत्रकारों पर हमला बोला था। आगजनी और पथराव में पाँच लोगों की जान गई है, जबकि 8 करोड़ से अधिक की सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुँचा था।

18 साल से ईसाई मजहब का प्रचार कर रहा था पादरी, अब हिन्दू धर्म में की घर-वापसी: सतानंद महाराज ने नक्सल बेल्ट रहे इलाके में जलाई सनातन की अलख, गूँजा ‘जय श्री राम’

छत्तीसगढ़ के बलरामपुर में सतानंद महाराज की ‘वनवासी राम कथा’ में एक ईसाई पादरी ने घर-वापसी की है। पत्रसपोटा नाम का ये पादरी 18 वर्षों से ईसाई मजहब के प्रचार-प्रसार में लगा था, लेकिन अब उसने अपनी भूल स्वीकार करते हुए स्वेच्छा से हिन्दू धर्म अपना लिया है। इस दौरान उसने खुलासा किया गोमांस खिला कर हिन्दुओं का धर्म भ्रष्ट किया जा रहा है। इस ‘वनवासी राम कथा’ में अब तक 80 परिवारों के 200 लोगों ने हिन्दू धर्म में घर-वापसी की है।

हिन्दू धर्म में वापस आने वाले पादरी ने बताया कि विभिन्न इलाकों में जाकर उसने ईसाई मजहब को फैलाने का काम किया था, लेकिन 1 वर्ष पहले उसे भाजपा के साथ काम करने का मौका मिला। उक्त पादरी ने बताया कि उसने श्रीमद्भागवत कथा के दौरान सतानंद महाराज का प्रवचन सुन कर उसे हृदय में ऐसा लगा कि पहले उसे किसी ने ये क्यों नहीं बताया। उक्त पादरी ने कहा कि अगर पहले ही उसने ये सब सुन लिया होता तो शायद इतना विलंब नहीं होता।

उक्त पादरी ने इस दौरान ये कामना की कि सतानंद महाराज यूँ ही सतत प्रवचन करते रहें। इस दौरान लोगों ने और उक्त पादरी ने भी ‘जय श्री राम’ का नारा भी लगाया। वहीं घर-वापसी करने वाले एक अन्य शख्स ने कहा कि पूरे छत्तीसगढ़ में, पूरे भारत देश में जितने भी सनातनी ईसाई मजहब में गए हैं, उन्हें वापस लाने के लिए RSS और सतानंद महाराज द्वारा प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सतानंद महाराज का प्रवचन उन्हें अंदर से सुसज्जित करता है।

सतानंद महाराज ने इस दौरान कहा कि गोमांस खिला कर धर्म-परिवर्तन कराया जाना एक बड़ा षड्यंत्र है। गौमाता के पंचगव्य से इन सभी का शुद्धिकरण किया गया। इस दौरान एक व्यक्ति ने तुलसी की कंठी धारण कर के मांस-मदिरा का भी त्याग कर दिया। उन्होंने कहा कि विधर्मी हमारे भाइयों को तोड़ने के लिए षड्यंत्र रचते हैं, जब हम किसी को बहकाने की जगह प्रेम से स्वीकार करते हैं। उन्होंने कहा कि धन देकर बहकाया जाता है, ‘तुम्हारे भीतर भूत है’ कह कर उन्हें ठीक करने का लालच देकर ईसाई मजहब में लाया जाता है।

उन्होंने कहा, “तुम बाइबिल को शास्त्र कहते हो, शास्त्र सिर्फ सनातन धर्म में था। अगर तुम्हें हमसे इतनी घृणा है तो हमारे मन्त्र ॐ का इस्तेमाल क्यों करते हो, हमारे देवी-देवताओं की प्रतिमाओं में येशु को क्यों दिखाते हो? हनुमान जी की मोम की मूर्ति बनाई जाती है, उन्हें धूप में रख कर पिघला दिया जाता है और बच्चों को कहा जाता है कि जब ये खुद को नहीं बचा सके तो तुम्हें क्या बचाएँगे।” इस दौरान जनजातीय समाज का 50 लाख राम नाम जप भी चल रहा है। 400 लोगों ने मांस-मदिरा छोड़ने की भी शपथ ली है।

रामेश्वर कैफे ब्लास्ट केस में निकला लश्कर-ए-तैयबा का भी कनेक्शन, सजायाफ्ता आतंकी शोएब अहमद मिर्जा गिरफ्तार : बेंगलुरु NIA ने किया अरेस्ट

रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट केस का लश्कर-ए-तोएबा से भी कनेक्शन निकला है। इस केस की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (एनआईए) ने शुक्रवार (24 मई 2024) को पाँचवें आतंकी शोएब अहमद मिर्जा उर्फ छोटू को गिरफ्तार किया है। एनआईए ने चार राज्यों में छापेमारी के बाद शोएब अहमद मिर्जा को पकड़ा है। शोएब कर्नाटक के हुबली का रहने वाला है। वो आतंकवाद के मामले में दोषी ठहराया जा चुका है और सजा काटने के बाद जब रिहा हुआ, तो फिर से आतंकवाद फैलाने में जुट गया था। शोएब अहमद मिर्जा उर्फ छोटू की उम्र 35 वर्ष है। वो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़ा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शोएब अहमद मिर्जा उर्फ छोटू दक्षिण भारत में सक्रिय कट्टर इस्लामिक आतंकियों में से एक है। एनआईए की जाँच में पाया गया कि शोएब मिर्जा, जो पहले लश्कर-ए-तैयबा बेंगलुरु मामले में दोषी ठहराया गया था, जेल से रिहा होने के बाद एक नई साजिश में शामिल हो गया। जाँच में यह सामने आया कि अहमद मिर्जा ने साल 2018 में अब्दुल मतीन ताहा को एक ऑनलाइन हैंडलर से मिलवाया, जिसके विदेश में होने का संदेह था। अहमद ने उनके बीच एन्क्रिप्टेड संचार के लिए एक ईमेल आईडी भी दी थी। बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट में अब्दुल मतीन ताहा मुख्य आरोपित है। उसने धमाके को अंजाम दिया था और वो पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार हुआ था।

बता दें कि अब्दुल मतीन ताहा को 12 अप्रैल 2024 को कोलकाता में एक और आरोपी मुसाविर हुसैन शाजिब के साथ गिरफ्तार किया गया था। एनआईए ने मंगलवार (21 मई 2024) को इस विस्फोट के पीछे की पूरी साजिश का पर्दाफाश करने और अन्य आरोपितों की पहचान करने के लिए कई राज्यों में छापेमारी की थी। एनआईए की टीम ने इस सिलसिले में कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश में 11 स्थानों पर छापेमारी की थी।

इंजीनियर सोहैल को किया था गिरफ्तार

इससे पहले, 21 मई 2024 को एनआईए ने बेंगलुरु के कुमारस्वारी लेआउट और बन्शांकरी में भी छापेमारी की थी। ये छापेमारी रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट के मुख्य आतंकियों मुसाविर हुसैन शाजिब और अब्दुल मतीन ताहा से पूछताछ के बाद मिली जानकारी के आधार पर की गई थी, जिन्होंने इस धमाके की प्लानिंग कर धमाके को अंजाम दिया था। एनआईए के अधिकारियों ने आँध्र प्रदेश अनंतपुर जिले में स्थिति रायदुर्गम कस्बे में एक रिटायर्ड हेडमास्टर अब्दुल के घर पर भी छापेमारी की थी। इस छापेमारी में हेडमास्टर अब्दुल और उसके बेटे सोहैल से उनके बैंक खातों को लेकर पूछताछ की गई। दोनों के खातों में काफी पैसे मिले। सोहैल बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता है। इस पूछताछ के बाद एनआईए ने सोहैल को गिरफ्तार कर लिया था। इस केस में शोएब अहमद मिर्जा के साथ अब तक कुल 5 आतंकी गिरफ्तार किए जा चुके हैं।

गौरतलब है कि बेंगलुरु के ब्रुकफील्ड में आईटीपीएल रोड स्थित कैफे में एक इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (आईईडी) के जरिए विस्फोट हुआ था, जिसमें कई ग्राहक और स्टाफ सदस्य घायल हो गए थे। 1 मार्च 2024 को बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे में हुए ब्लास्ट की जाँच के दौरान एनआईए ने पूरे भारत में 29 जगहों पर छापेमारी की थी। एनआईए इस केस में हैंडलर की भूमिका और इस ब्लास्ट के पीछे की बड़ी साजिश को लेकर लगातार जाँच कर रही है।

‘घेरलू खान मार्केट की बिक्री कम हो गई है, इसीलिए अंतरराष्ट्रीय खान मार्केट मदद करने आया है’: विदेश मंत्री S जयशंकर का भारत विरोधी गिरोह पर प्रहार

भारत में मीडिया का एक गिरोह है, जो मोदी सरकार के आने से पहले ये तक की दलाली करता था कि कौन केंद्रीय मंत्री बनेगा। उसे सरकार के हर फैसले पहले से पता होते थे। मीडिया के इस गिरोह को ‘खान मार्केट गैंग’ भी कहा गया। आज इनमें से अधिकतर YouTube के प्रोपेगंडाबाज बन चुके हैं। अब केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर ने कहा है कि ये ‘खान मार्केट’ बहुत बड़ा है, इसका एक वैश्विक वर्जन भी है जिसे अब ‘इंटरनेशनल खान मार्केट’ कह सकते हैं।

ANI के साथ इंटरव्यू में केंद्रीय विदेश मंत्री S जयशंकर ने कहा कि आज देश में एक खास सोच प्रक्रिया है, या यूँ कहें कि एक खास अधिकार प्रक्रिया है, जिसका बहुत अच्छा वर्णन हम ‘खान मार्केट गिरोह’ के रूप में करते हैं। उन्होंने कहा कि वो बताना चाहते हैं कि एक ‘अंतरराष्ट्रीय खान मार्केट’ भी है। उन्होंने कहा कि ये लोग यहाँ के ‘खुद को अधिकार संपन्न मानने वाले’ लोगों से जुड़े हुए हैं, उनके साथ सहज महसूस करते हैं, उन्हें जानते हैं, खुद को उनकी तरह ही मानते हैं।

भारत विरोधी इकोसिस्टम पर वार करते हुए सुब्रह्मण्यम जयशंकर ने कहा कि घेरलू खान मार्केट में बिक्री की कमी हो गई है, इसीलिए ‘अंतरराष्ट्रीय खान मार्केट’ को लगता है कि उसे आगे आकर इनलोगों की मदद की ज़रूरत है। S जयशंकर ने इस दौरान सेक्स स्कैंडल में फँसे प्रज्वल रेवन्ना की बात भी की। उनका पासपोर्ट क्यों नहीं जब्त किया गया या उन्हें विदेश क्यों जाने दिया गया, इन सवालों पर उन्होंने कहा कि MEA (केंद्रीय विदेश मंत्रालय) को इस संबंध में 21 मई, 2024 को ही कर्नाटक सरकार से अनुरोध प्राप्त हुआ और हम प्रक्रिया के हिसाब से ही काम करते हैं।

केंद्रीय विदेश मंत्री ने कहा कि प्रेस और थिंक टैंक से लेकर प्रोफेसर तक शामिल हैं, जो भारतीय राजनीति की दिशा को अपने हिसाब से बदलना चाहते हैं। विभिन्न रैंकिंग में भारत को नीचे दिखाने की कोशिश को उन्होंने भारत को हतोत्साहित करने की मंशा करार दी। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे विदेशी मीडिया ने खुल कर कहा कि फलाँ नेता और पार्टी भारत के लिए ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार और बड़े बहुमत से सत्ता में आएगी, दक्षिण भारत में सीटें दोगुनी होंगी।