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7 नवजातों की मौत, 5 वेंटिलेटर पर: दिल्ली के चाइल्ड केयर सेंटर का मालिक और डॉक्टर दोनों गिरफ्तार, स्थानीयों ने बताया- हवा में उड़कर फट रहे थे ऑक्सीजन सिलेंडर

दिल्ली के विवेक विहार इलाके में स्थित चाइल्ड केयर सेंटर में आग लगने की वजह से 7 नवजात बच्चों की मौत मामले में रविवार (26 मई 2024) को न्यू बोर्न बेबी केयर अस्पताल के मालिक और एक डॉक्टर को गिरफ्तार कर लिया। पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार स्थित न्यू बोर्न बेबी केयर अस्पताल के मालिक डॉ. नवीन खिंची को दिल्ली पुलिस ने राष्ट्रीय राजधानी से गिरफ्तार कर लिया। इसके अलावा, घटना के समय अस्पताल की शिफ्ट संभालने वाले 25 वर्षीय डॉ. आकाश को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है।

शुरुआती जानकारी के मुताबिक ये आग शॉर्ट सर्किट के चलते लगी थी, जो चाइल्ड केयर सेंटर में रखे दर्जनों ऑक्सीजन सिलेंडर तक फैल गई और सिलेंडरों में धमाके होने लगे। इन धमाकों के चलते आग तेजी से फैली और पास की बिल्डिंग तक पहुँच गई। स्थानीय लोगों का कहना है कि सिलेंडर लगातार फट रहे थे और आसमान में रॉकेट्स की तरह उड़ रहे थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि इस चाइल्ड केयर सेंटर में जरूरत से कहीं ज्यादा ऑक्सीजन सिलेंडर रखे जाते थे। इनकों लेकर लोग शिकायत भी कर चुके थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि आग लगने की वजह से जब ब्लास्ट होने लगा, तो हालात काबू से बाहर हो गए।

हैरानी की बात यह है कि घटना के दौरान न तो हॉस्पिटल प्रशासन का कोई व्यक्ति वहाँ मौजूद था और न ही इस आगजनी की घटना की सूचना नवजातों के परिजनों को दी गई। हादसे के बाद से पूरा अस्पताल प्रशासन फरार बताया जा रहा है। आग लगने के स्पष्ट कारणों का तो अब तक पता नहीं चल पाया है, लेकिन बताया जा रहा है कि शॉर्ट-सर्किट की वजह से आग लगी थी, जिसकी चपेट में आवश्यकता से अधिक और अवैध रूप से वहाँ रखे गए ऑक्सीजन सिलेंडर के आने के बाद ब्लास्ट होने शुरू हो गए और आग काफी तेजी से फैल गई।

लोगों ने अस्पताल प्रशासन समेत स्थानीय पार्षद, विधायक से लेकर पूरे सिस्टम पर सवाल उठाते हुए कहा कि रिहाइशों के बीच स्थित इस अस्पताल में हर दिन 50 ऑक्सीजन सिलेंडर लाये जाते थे। इस छोटे से अस्पताल में इतने ऑक्सीजन सिलेंडरों की आवश्यकता नहीं है, फिर भी यहां हर दिन भारी मात्रा में ऑक्सीजन सिलेंडर आते थे।जिसकी पुलिस प्रशासन से लेकर पार्षद-विधायक सभी ने अनदेखी की।

बता दे कि पूर्वी दिल्ली के विवेक विहार में स्थित शिशु देखभाल केंद्र में भीषण आग लगने से 7 बच्चों की मौत हो गई है। यहाँ कई बच्चों को रेस्क्यू भी किया गया, लेकिन 12 घायल हो गए थे, जिसमें से 6 बच्चों की मौत हो गई थी, एक बच्चे ने दूसरे अस्पताल में दम तोड़ दिया। 5 घायल बच्चों में एक बच्चे को वेंटिलेटर पर रखा गया है, उसकी हालत काफी नाजुक बताई जा रही है।

दिल्ली दमकल विभाग के मुताबिक, बेबी केयर सेंटर 120 गज की बिल्डिंग में बना था। बेबी केयर सेंटर के बगल में एक बिल्डिंग थी उस पर भी आग की लपटें गई थी लेकिन गनीमत ये रही कि वहाँ कोई जनहानि नहीं हुई। बेबी केयर सेंटर के अंदर बड़ी संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर पड़े हुए हैं। कुछ ऑक्सीजन सिलेंडर आग में फटे भी थे जो मौके पर दिखाई दे रहे हैं। दमकल विभाग की 16 गाड़ियों ने करीब एक घंटे की मशक्कत से आग पर काबू पाया।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 25 मई की रात लगभग 11.30 बजे विवेक विहार थाना पुलिस को आग लगने के संबंध में एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई थी। कॉल मिलते ही विवेक विहार के एसीपी और एसएचओ तुरंत पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँचे, जहाँ न्यू बोर्न बेबी केयर अस्पताल और उसके बगल की बिल्डिंग में आग लगी हुई पाई गई। पुलिस के अनुसार, 11 नवजात शिशुओं को अन्य लोगों की मदद से इमारत की ऊपरी मंजिल से बचाया गया और एम्बुलेंस द्वारा इलाज के लिए पूर्वी दिल्ली एडवांस एनआईसीयू अस्पताल, डी-237, विवेक विहार में शिफ्ट कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि यह तीन मंजिला इमारत है और आग लगने से पूरी इमारत जलकर खाक हो गई।

बांग्लादेशी MP की हत्या के बाद साजिशकर्ता भागा अमेरिका… खुफिया विभाग के अधिकारी जाँच करने भारत पहुँचे, इंटरपोल से लगाएँगे पता

बांग्लादेशी सांसद अनवारुल अजीम अनार की हत्या के मामले में जाँच के लिए बांग्लादेश से अधिकारी भारत आ गए हैं। समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार हत्या ममाले की जानकारी जुटाने के लिए पड़ोसी मुल्क के खुफिया विभाग के प्रमुख रविवार को भारत आए हैं। उनके साथ बांग्लादेश के दो अन्य अधिकारी भी कोलकाता पहुँचे हैं। इनके नाम सईदुर रहमान और अब्दुल अहर भी शामिल हैं।

भारत में आने के बाद हारुनन राशिद मिंटो ने बताया, “हम अभी यहाँ पहुँचे हैं। आप सभी जानते हैं कि हमारे आपराधिक अधिनियम में अतिरिक्त प्रादेशिक अपराध नामक एक धारा है जिसका अर्थ है कि यदि कोई व्यक्ति बांग्लादेश से बाहर कोई अपराध करता है तो हम इस अतिरिक्त प्रादेशिक अपराध धारा के अंतर्गत उन अपराधों की जाँच कर सकते हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “आप सभी जानते हैं कि लोकप्रिय सांसदों में से एक अनवारुल अजीम अनार की बुरी तरह हत्या की गई है। उनके शरीर के टुकड़े-टुकड़े कर दिए गए थे। इस हत्या के मास्टरमाइंड सभी बांग्लादेशी हैं। हत्या की साजिश बांग्लादेश में रची गई थी। अब हमारा मुख्य काम जांच को आगे बढ़ाना है। हम भारत में घटनास्थल का दौरा करने आए हैं। हम सीसीटीवी फुटेज की जांच करेंगे। कोलकाता पुलिस और बांग्लादेश पुलिस ने उनके बीच विभिन्न जानकारी साझा की है।”

बांग्लादेश के खुफिया विभाग के प्रमुख राशिद ने कहा, “शायद मुख्य साजिशकर्ता अख्तरुज्जमां काठमांडू से दुबई के रास्ते अमेरिका भाग गया होगा। हम इंटरपोल के जरिए उसका पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। हम सीआईडी कार्यालय जाएँगे। हम सीआईडी के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। हम गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ करने की कोशिश करेंगे ताकि हमें और जानकारी मिल सके।”

गौरतलब है कि इस केस में मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर अजीम के दोस्त शाहीन मियाँ का नाम आया है। शाहीन मियाँ बांग्लादेश का निवासी था जिसे बाद में अमेरिका की नागरिकता मिल गई। कुछ दिन पहले उसने इस मामले में कहा था कि उसे इस संबंध में कुछ नहीं पता है। उसे दोस्त की हत्या के बारे में अखबारों से पता चला। वहीं बांग्लादेश की खुफिया पुलिस की जाँच में हर तरह से सिर्फ उसका नाम ही मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर आया है।

20,000 गुलाम, हिंदुओं को यातना और ईसाई धर्मांतरण: जेवियर के अनुयायियों की हकीकत सुन भड़के AAP नेता, पुलिस कार्रवाई की उठाई माँग

गोवा में हिन्दुओं को यातनाओं से ईसाई बनाने वाले और मंदिरों को नष्ट करने वाले सेंट फ्रांसिस जेवियर के बारे में लिखने पर आम आदमी पार्टी (AAP) के गोवा प्रदेश अध्यक्ष भड़क गए। उन्होंने जेवियर की सच्चाई बताने वाले पर पुलिस कार्रवाई की माँग कर दी।

एक्स यूजर अभिषेक बनर्जी ने एक पोस्ट में बताया कि जिस सेंट फ्रांसिस जेवियर के नाम से देश भर में कई स्कूल कॉलेज चलते हैं और जिसके बनाए जेसुइट आर्डर को भारतवासी शिक्षा का प्रतिमान मानते हैं, वह लोगों को गुलाम बनाते थे। बनर्जी ने बताया कि एक समय पर सेंट फ्रांसिस जेवियर के अनुयायी, जिन्हें जेसुइट कहा जाता है, उनके पास 20,000 से अधिक गुलाम थे।

अभिषेक बनर्जी ने कहा कि लोगों को इनके बारे में और जानना चाहिए। इसी बात गोवा के आम आदमी पार्टी के गोवा अध्यक्ष अमित पालेकर भड़क गए। उन्होंने बनर्जी पर कार्रवाई की माँग गोवा पुलिस से कर दी। पालेकार ने दावा किया कि इससे गोवा के कैथोलिक ईसाइयों समेत पूरे गोवा वासियों की भावनाएँ आहत हुई हैं।

इस पर बनर्जी ने उन्हें साक्ष्य दिखाए कि इस बात के लिखित प्रमाण हैं कि जेवियर के अनुयायी गुलाम रखते थे। ऐसे में अमित पालेकर को भड़काना नहीं चाहिए। दरअसल, अभिषेक बनर्जी उस स्तर की तरफ इशारा कर रहे थे जिस पर ज्यादा बात नहीं की जाती।

कौन था फ्रांसिस जेवियर?

इसाई मिशनरी धर्म प्रचारक सेंट फ्रांसिस ज़ेवियर (Francis Xavier) पुर्तगाली काफिले के साथ वर्ष 1542 में भारत आया था। उसने भारत पहुँचकर ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार किया था। वह ‘सोसायटी ऑफ जीसस’ से जुड़ा था। इन्हीं सोसायटी ऑफ़ जीसस वालों को जेसुइट्स कहा जाता है।

सेंट फ्रांसिस जेवियर के आने के बाद 1559 तक गोवा में 350 से अधिक हिन्दू मंदिरों को बंद कर दिया गया था। इस दौरान हिन्दुओं के मूर्ति पूजा पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया था। सारे प्रयास किए गए कि वह हिन्दू धर्म छोड़ कर ईसाईयत अपना लें। इसके बाद भी सेंट जेवियर ने देखा कि उसके हिन्दुओं के बलात धर्म परिवर्तन के प्रयास पूरी तरह से कामयाब नहीं हो रहे थे। 

उसे समय रहते यकीन होता गया कि सनातन धर्म की आस्था अक्षुण्ण है। यदि वह मंदिरों को नष्ट करता है तो लोग घरों में ही मंदिर बना लेते हैं। उसने देखा कि लोगों को धारदार हथियारों से काटने, उनके हाथ और गर्दन रेतने और असीम यातनाको देने के बाद भी फेनी (सस्ती शराब) और सनातन धर्म में से लोग सनातन धर्म को ही चुनते और मौत को गले लगा लेते।

निराश होकर जेवियर ने रोम के राजा को पत्र लिखा जिसमें उसने हिन्दुओं को एक अपवित्र जाति बताते हुए उन्हें झूठा और धोखेबाज लिखा उसने कहा कि उनकी मूर्तियाँ काली, बदसूरत और डरावनी होने के साथ ही तेल की गंध से सनी हुई होती हैं।

इसके बाद हिन्दुओं पर यातनाओं का सबसे बुरा दौर आया। फ्रांसिस जेवियर ने गोवा का पूर्ण अधिग्रहण किया। हिन्दुओं के दमन के लिए एक धार्मिक नीतियाँ बनाई और यीशु की कथित सत्ता में यकीन ना करने वाले ‘नॉन-बिलीवर्स’ को दंडित किया जाने लगा।

इस घटना के बारे में लिखने वाले इतिहासकारों को भी सख्त यातनाएँ दी गईं। उन्हें या तो गर्म तेल में डालकर जलाया जाता या फिर जेल भेज दिया जाता। ऐसे ही कुछ लेखकों में फिलिपो ससेस्ती, चार्ल्स देलोन, क्लाउडियस बुकानन आदि के नाम शामिल थे। इतिहास में पहली बार हिन्दू भागकर बड़े स्तर पर प्रवास करने को मजबूर हो गए।

सेंट फ्रांसिस जेवियर ने मात्र भारत ही नहीं बल्कि मलय प्रायद्वीप, श्रीलंका, जापान और चीन तक में ईसाइयत का प्रचार करने गया था। उसकी चीन के द्वीप पर बुखार से मौत हो गई थी। बताते हैं कि उसने अपने जीवन में कम से कम 30,000 लोगों को ईसाई बनाया था।

जेसुइट रखते थे गुलाम

सेंट फ्रांसिस जेवियर जिस सोसायटी ऑफ़ जीसस या ‘जेसुइट्स’ का हिस्सा था वह बड़े स्तर पर लोगों को गुलाम बनाते थे। जेसुइट्स ने अमेरिका में स्थानीय आदिवासियों को गुलाम बनाया था। उनके पास एक समय में 20,000 से अधिक गुलाम थे और उन्हें खेतों तथा अन्य कामों में लगाया जाता था। गुलामों को रखने, उन पर अत्याचार करने को कई बार सही भी बताया गया था। इसे ईसाईयत के विरुद्ध नहीं माना गया था।

IPL 2024: चेन्नई में कौन बनेगा चैंपियन? विस्फोटक बल्लेबाजी में SRH आगे, लेकिन KKR के पास स्पीड ब्रेकर, जानें-पिच से लेकर फाइनल के X फैक्टर्स

इंडियन प्रीमियर लीग 2024 का खिताबी मुकाबला रविवार (26 मई 2024) को चेन्नई में खेला जाना है। इस साल केकेआर टॉप पर रहते हुए फाइनल में पहुँची है, तो SRH दूसरे स्थान पर रहते हुए। खास बात ये है कि केकेआर ने अब तक इस साल सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ 3 मुकाबले खेले हैं और तीनों में ही उसे जीत मिली है। लीग मैचों के दौरान दोनों टीमों के बीच मुकाबले काफी नजदीकी रहे थे, लेकिन पहले क्वॉलिफायर में जब ये दोनों टीमें अहमदाबाद में भिड़ी थी, तो केकेआर ने आसानी से बड़े अंतर के साथ सनराइजर्स को हरा दिया था। ऐसे में रविवार के मुकाबले पर पूरी दुनिया की नजर रहने वाली है। एक तरफ हैदराबाद की कमान विश्व विजेता कप्तान पैट कमिंस संभाल रहे हैं, तो केकेआर की कप्तानी श्रेयस अय्यर।

KKR vs SRH IPL Final: विस्फोटक बल्लेबाजों का मुकाबला

आईपीएल 2024 का फाइनल मुकाबला दो ऐसी टीमों के बीच है, जिनके पास विस्फोटक बल्लेबाजों से भरा बल्लेबाजी क्रम है। दोनों ही टीमों के पास 8 नंबर तक बेहतरीन बल्लेबाजी क्रम मौजूद है। सनराइजर्स हैदराबाद के पास अभिषेक शर्मा और ट्रेविस हेड के रूप में ऐसे ओपनर हैं, जो पहली गेंद से प्रहार करने में यकीन रखते हैं। दोनों का ही बल्लेबाजी स्ट्राइक रेट इस आईपीएल में 200 के ऊपर रहा है।

हालाँकि पिछले मुकाबले में केकेआर के खिलाफ दोनों ही ओपनर चल नहीं पाए थे। हेड तो खाता भी नहीं खोल पाए थे। इसके बावजूद SRH के पास राहुल त्रिपाठी से लेकर नीतीश कुमार रेड्डी और नीचे अब्दुल समद तक मौजूद हैं। वहीं, ऐडेन मार्करम कोई भी दिन अपना होने पर किसी भी गेंदबाज की धज्जियाँ उड़ा सकते हैं। फिर क्लासेन की क्लास के क्या ही कहनें। उन्होंने पिछले मैच में भी अपना जलवा दिखाया था।

बात केकेआर की करें, तो सुनील नरेन टीम के लिए ट्रंप कार्ड साबित हुए हैं। अफगानिस्तान के गुरबाज ने पिछले मैच में अच्छी शुरुआत की थी, तो दोनों अय्यर केकेआर के मध्यक्रम को मजबूती देते हैं। नीचे नीतीश राणा, आँद्रे रसेल और रिंकू सिंह हैं। ऐसे में बल्लेबाजी क्रम में दोनों ही टीमों में शानदार बल्लेबाज मौजूद हैं। अच्छी बात ये है कि दोनों ही टीमों के पास मिश्रित बल्लेबाजी क्रम है। हालाँकि SRH के पास बाएँ हाथ के बल्लेबाज ओपनिंग के बाद नीचे ही आते हैं, ऐसे में शाहबाज अहमद आज प्रोमोशन के लिए अच्छा विकल्प हो सकते हैं। आज के फाइनल मुकाबले में केकेआर के निचले क्रम की भी परीक्षा होगी, क्योंकि उन्हें आईपीएल 2024 में ज्यादा मौके मिल नहीं पाए हैं।

फास्ट बॉलिंग में SRH भारी, लेकिन KKR भी कम नहीं

आईपीएल 2024 के फाइनल में दोनों ही टीमों में एक से बढ़कर एक तेज गेंदबाज हैं। केकेआर के पास जहाँ लोकल भारतीय तेज गेंदबाजों में वैभव अरोड़ा और हर्षित राणा है, तो आंद्रे रसेल की गेंदबाजी भी टीम के काम आती है। वहीं, अब तक फॉर्म से बाहर दिख रहे मिचेल स्टार्क ने जिस तरह से पिछले मैच में कहर बरपाया, वो बताता है कि स्टार्क को क्यों बड़े मैचों का खिलाड़ी माना जाता है। हालाँकि ओवरआल तेज गेंदबाजी की बात की जाए, तो SRH भारी नजर आती है। कप्तान पैट कमिंस अगर स्टार्क से मुकाबले में बराबर हैं, तो भुवनेश्वर कुमार, टी नजराजन और जयदेव उनादकट की तिकड़ी किसी भी आईपीएल टीम की सबसे शानदार भारतीय तेज गेंदबाजी तिकड़ी है। ऐसे में केकेआर के पास भले ही स्टार्क हों, लेकिन अगर उन्हें SRH के बल्लेबाज आराम से खेल ले गए, तो बाकी के दो तेज गेदबाजों पर भारी दबाव रहने वाला है।

स्पिन गेंदबाजी जीत की कुंजी

केकेआर के गेंदबाज़ शानदार फॉर्म में हैं। उन्होंने अपने पिछले पाँच मैचों में 47 विकेट लिए हैं – जो आईपीएल के इतिहास में पाँच मैचों में किसी भी टीम द्वारा लिए गए सबसे ज़्यादा विकेट हैं। इस अवधि में उनके गेंदबाज़ों का सामूहिक औसत 16 और इकॉनमी 7.95 है, जो उनके पहले आठ मैचों में 31.38 और इकॉनमी 10 के औसत से काफ़ी बेहतर है। केकेआर और एसआरएच दोनों के पास विस्फोटक बल्लेबाज़ों से भरी लाइन-अप है, इसलिए गेंदबाज़ी फ़र्क पैदा कर सकती है। इसमें भी महत्वपूर्ण है स्पिनरों का प्रदर्शन।

केकेआर के पास स्पिनर्स के तौर पर सुनील नरेन, वरुण चक्रवर्ती जैसे धुरंधर हैं, तो पार्ट टाइमर नीतीश राणा भी अहम योगदान दे सकते हैं, वहीं, सनराइजर्स हैदराबाद के पास तेज गेंदबाजी क्रम शानदार है, लेकिन स्पिनरों के मामले में हैदराबाद की टीम कमजोर जान पड़ती है। पिछले मैच में अभिषेक शर्मा की पार्ट टाइम स्पिन गेंदबाजी और इंपैक्ट प्लेयर के रूप में मैदान में आए शाहबाज अहमद की लेफ्ट आर्म स्पिन गेंदबाजी ने फर्क पैदा किया था। ऐसे में हो सकता है कि हैदराबाद इस मैच में मयंक मार्कंडे को मैदान में उतारे।

वैसे, स्पिनरों की गुणा भाग के बीच अगर ये मैच लाल बजरी वाली पिच पर खेली जाएगी, तो हो सकता है कि ये मैदान स्पिनरों की कब्रगाह भी साबित हो जाए। हालाँकि सुनील नरेन और वरुण चक्रवर्ती का अनुभव किसी भी पिच पर गेंदबाजी के लिए पर्याप्त है। ऐसे में स्पिनरों का खेल इस फाइनल मुकाबले का निचोड़ हो सकता है।

संभावित प्लेइंग 11: इस मैच में दोनों ही टीमें स्पिनरों पर जोर देने वाली हैं। केकेआर के पास आईपीएल टीमों में सबसे मजबूर स्पिन गेंदबाजी है, तो एसआरएच ने पिछले मैच से सबक लिया ही होगा। हालाँकि एसआरएच के पास कुछ चौंकाने वाले खिलाड़ी हैं। ऐसे में देखना ये है कि सनराइजर्स हैदराबाद शहबाज नदीम के साथ और किन आल-राउंडर्स को मैदान में उतारती है।

केकेआर: 1-सुनील नरेन, 2-रहमानुल्लाह गुरबाज़ (विकेट कीपर), 3-वेंकटेश अय्यर, 4-श्रेयस अय्यर (कप्तान), 5-नीतीश राणा , 6-रिंकू सिंह, 7-आंद्रे रसेल, 8-रमनदीप सिंह, 9-मिशेल स्टार्क, 10-हर्षित राणा, 11-वरुण चक्रवर्ती
इंपैक्ट प्लेयर: नीतीश राणा/वैभव अरोड़ा

एसआरएच: 1-ट्रैविस हेड 2-अभिषेक शर्मा 3-राहुल त्रिपाठी 4-एडेन मार्करम 5-हेनरिक क्लासेन, 6-नितीश कुमार रेड्डी, 7-अब्दुल समद, 8-शाहबाज अहम 9-पैट कमिंस, 10-भुवनेश्वर कुमार, 11-टी नटराजन

इंपैक्ट प्लेयर : मयंक मारकंडे/जयदेव उनादकट

दोस्त से मिलने गई नाबालिग का रिजवान खान ने बनाया अश्लील वीडियो, फिर 6 महीने खुद किया रेप: अम्मी ने धमकाकर घर के काम भी करवाए, केस दर्ज

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में आपत्तिजनक वीडियो बनाकर एक नाबालिग लड़की से 6 महीने तक रेप करने का मामला सामने आया है। मुख्य आरोपित का नाम रिज़वान है। रिज़वान ने नाबालिग को अपने दोस्तों से भी संबंध बनाने पर मजबूर किया। पीड़िता से अपने घर के घेरलू काम भी करवाए गए। पुलिस ने 2 आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। शनिवार (25 मई 2024) को दी गई इस शिकायत में आरोपित की अम्मी मुमताज और एक अन्य युवक भी नामजद हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना आगरा के थानाक्षेत्र सदर बाजार की है। यहाँ शनिवार को एक 17 वर्षीया नाबालिग पीड़िता की मौसी ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में पीड़िता ने बताया कि लगभग 6 महीने पहले उसके नितिन नाम के दोस्त ने उसे मिलने के लिए बुलाया था। दोनों की मुलाकात रेलवे के एक बंद पड़े क्वार्टर में हुई। इस दौरान नितिन ने पीड़िता के कपड़े उतार कर उससे छेड़खानी की। इस घटना का अपने मोबाइल से वीडियो पास ही रहने वाले रिज़वान खान ने चुपके से बना डाला। बाद में रिज़वान इसी वीडियो को दिखाकर पीड़िता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया।

आरोप है कि रिज़वान ने पीड़िता से वीडियो का डर दिखा कर उससे 6 माह में कई बार रेप किया। वह लड़की से जबरन अपने घेरलू काम भी करवाने लगा। 22 मई को पीड़िता ने अपने साथ हो रही ज्यादती अपनी मौसी से बता दी। साथ ही पीड़िता ने रिज़वान के घर का काम करने से मना कर दिया। इससे रिज़वान और उसकी अम्मी मुमताज को गुस्सा आ गया। इन दोनों ने पीड़िता से तुरंत काम पर वापस न लौटने पर वीडियो वायरल कर देने की धमकी दे डाली।

पीड़िता की मौसी आरोपितों से बात करने उसके घर गई। यहाँ उन्हें भी रिज़वान और उसकी अम्मी से जान से मारने की धमकी मिली। मुमताज ने पीड़िता की मौसी को वो अश्लील वीडियो भी दिखाए जिससे रिज़वान लड़की को ब्लैकमेल कर रहा था। यह वीडियो रिज़वान की अम्मी ने पीड़िता की मौसेरी बहन के मोबाइल में भी फॉरवर्ड कर दिया। शिकायतकर्ता ने आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने इस घटना में रिज़वान और मुमताज के साथ नितिन को भी नामजद किया है।

इन सभी पर IPC की धारा 376(2)(n), 354, 354-बी, 504, के साथ पॉक्सो और आईटी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2 आरोपितों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस मामले की जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई में जुटी है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

‘मा$₹चो$ हो तुम स्वाति मालीवाल’: यूट्यूबर ध्रुव राठी की वीडियो के बाद AAP की सांसद को मिल रही रेप-हत्या की धमकी – दिल्ली पुलिस से कार्रवाई की माँग

आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने बताया है कि यूट्यूबर ध्रुव राठी के वीडियो के बाद उन्हें रेप-हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं। उन्होंने कहा है कि ध्रुव राठी ने बिना उनका पक्ष लिए एकतरफा वीडियो बना दिया है। उन्होंने बताया कि आम आदमी पार्टी की तरफ से उन्हें शिकायत वापस लेने के लिए धमकाया जा रहा है।

स्वाति मालीवाल ने एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट लिख बताया है कि उनका पहले ही आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेताओं ने चरित्र हनन किया और उनके पीड़ित होते हुए भी उन्हीं को दोषी ठहराया। इसके बाद जब यूट्यूबर ध्रुव राठी ने इस पर वीडियो बनाया तो उनको हत्या और रेप की धमकियाँ मिलने लगीं।

स्वाति मालीवाल ने बताया कि उन्होंने ध्रुव राठी को अपना पक्ष बताने के लिए कॉल और मैसेज किए लेकिन राठी ने उनका पक्ष बिना जाने ही वीडियो बना दी। उन्होंने कहा है कि ध्रुव राठी को इस बात पर शर्मिन्दा होना चाहिए कि वह AAP के प्रवक्ता की तरह व्यवहार कर रहे हैं और पीड़ित पर ही प्रश्न उठा रहे हैं।

स्वाति मालीवाल ने ध्रुव राठी से उनके वीडियो में कई जानकारियाँ ना देने को लेकर कई प्रश्न भी पूछे हैं। उन्होंने पूछा है कि आखिर जब AAP ने एक दिन उनके साथ बदसलूकी की बात मान ली थी तो आखिर बाद में उस स्टैंड से यू टर्न क्यों ले लिया। मालीवाल ने ध्रुव राठी से पूछा कि आखिर उन्होंने अपनी वीडियो में उनकी मेडिकल रिपोर्ट का जिक्र क्यों नहीं किया। उन्होंने जानबूझ कर छोटा वीडियो रिलीज किए जाए और विभव कुमार के फोन फॉर्मेट होने को लेकर प्रश्न पूछे।

स्वाति मालीवाल ने कहा कि ध्रुव राठी ने अपनी वीडियो में यह नहीं बताया कि विभव कुमार को मुख्यमंत्री आवास से गिरफ्तार किया गया, उन्हें घटनास्थल पर सबूत मिटाने का मौक़ा क्यों दिया गया। मालीवाल ने भाजपा के लिए काम करने के आरोपों पर कहा कि वह महिलाओं के लिए काम करती रही हैं, आखिर वह भाजपा द्वारा कैसे खरीदी जा सकती हैं।

स्वाति मालीवाल ने उनको भेजी गईं रेप और हत्या की धमकियों के स्क्रीनशॉट भी डाले और कहा कि वह इस मामले को दिल्ली पुलिस के पास लेकर जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर उन्हें कुछ होता है तो जिस व्यक्ति ने इसे चालू किया है, वह इसका जिम्मेदार होगा।

गौरतलब है कि 13 मई, 2024 को दिल्ली CM आवास में स्वाति मालीवाल के साथ अरविन्द केजरीवाल के पूर्व PS विभव कुमार ने मारपीट की थी और उनको अभद्र गालियाँ दी थी। इस मामले में स्वाति मालीवाल ने FIR दर्ज करवाई थी जिसके बाद विभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया गया था। वर्तमान में विभव कुमार न्यायिक हिरासत में हैं। मामले की जाँच के लिए दिल्ली पुलिस ने एक SIT बनाई है, जो इसमें आगे कार्रवाई कर रही है।

5000 रुपए में एक इंसान के 80 टुकड़े, रात 8 बजे के बाद इन टुकड़ों को ठिकाने लगाने की प्लानिंग: बांग्लादेशी सांसद की हत्या करने वाले कसाई ने खोले राज

बांग्लादेश के सांसद की निर्मम हत्या के मामले में गिरफ्तार कसाई जिहाद हवलदार ने कई राज खोले हैं। कसाई ने बताया है कि उसने अनवारुल अजीम अनार को मारने के बाद 80 टुकड़ों में काटा था। ये काम उसने मात्र 5000 रुपए के लिए किया था। इसके बाद उसके शव को 14-15 मई की रात के 8 बजे के आसपास ठिकाने लगाया गया था। इन शव के टुकड़ों को इस तरह से कोलकाता में जगह-जगह फेंका गया था कि अब पुलिस को जाँच के दौरान इन्हें बरामद करना मुश्किल हो रहा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कसाई ने जहाँ शव के टुकड़ों को फेंकने की बातें कही हुई हैं वहाँ पर पुलिस लगातार छानबीन कर रही है। गंदे पानी में मछुआरे अपना जाल डाल मांस के टुकड़े खोजने का प्रयास कर रहे हैं, वहीं गोताखोरों को भी काम में लगाया गया है। सूत्रों के हवाले से दी जा रही जानकारी में कहा गया है कि जिहाद ने भांगर और उसके आसपास कई बार रेकी करने के बाद न्यू टाउन से दूर स्थित कम आबादी वाले जगह को शरीर के अंग फेंकने के लिए चुना था।

फिलहाल, जिहाद कोलकाता सीआईडी पुलिस की हिरासत में है। मार्च की शुरुआत में वह मुंबई से कोलकाता हत्या के लिए ही लाया गया था। बाद में उसे अजीम के शव को ठिकाने लगाने का भी काम सौंपा गया। इससे पहले वह चिनार पार्क के अटघारा में एक फ्लैट में रह रहा था। हत्या करने से पहले ढाई महीने करीब वो वहीं था।

इसके बाद न्यू टाउन स्थित फ्लैट में हत्या को अंजाम दिया गया। वह फ्लैट राज्य उत्पाद शुल्क विभाग के सहायक आयुक्त का था जिसे हत्या के मास्टरमाइंड अख्तरुज्जमान ने 1 लाख रुपए प्रति माह किराए पर लिया था। अपार्टमेंट में रसोई में सीसीटीवी लगा था लेकिन हत्या से छह दिन पहले 7 मई को इसे काले कपड़े से ढक दिया गया। बाद में अजीम को फ्लैट में आने के लिए उकसाया गया और यहाँ पहुँचने पर उसकी हत्या कर दी गई।

कैमरे में महिला को खाना बनाते और कुछ अन्य पुरुषों को बर्तन धोते रिकॉर्ड किया गया था। इसके बाद कचरा फेंकने की भी कुछ तस्वीरें मीडिया में आई थी। छानबीन में पुलिस को इस फ्लैट से प्लास्टिक बैग, टिशू पेपर, दस्ताने और आरोपित महिला के नाम का बोर्डिंग पास भी बरामद हुआ था। पुलिस ने बताया कि हत्या के बाद आरोपितों ने सबूत मिटाने के लिए एडिस का प्रयोग किया था लेकिन कई जगह धब्बे रह गए।

गौरतलब है कि 12 मई को बांग्लादेशी सांसद भारत आए थे। यहाँ वह शिलांती रहमान के हनीट्रैप में फँसकर कोलकाता में अपने दोस्त के फ्लैट तक गए। फ्लैट में चार लोगों ने मिलकर उनकी हत्या की और बाद में शव जगह-जगह फेंक दिए गए। 8 दिन बाद जब इस हत्या का खुलासा हुआ तो पता चला कि इसके पीछे अजीम के बचपन के दोस्त का हाथ था। दोनों मिलकर सोने तस्करी का काम करते थे। बाद में अजीम ने ज्यादा टका अपने पास रखने की बात कही तो अनबन हो गई।

एक डील में धोखाध़ड़ी के बाद शाहीन मियाँ उर्फ अख्तरुज्जमांन ने हत्या की साजिश रची और मई में घटना को अंजाम दिलाया गया। पहले खबर आई थी कि इस काम में शाहीन ने आरोपितों को 5 करोड़ दिए, लेकिन कसाई ने खुलासा किया है कि उसे सिर्फ 5 हजार रुपए मिले हैं।

मारे गए बांग्लादेशी सांसद अनवरुल का TMC नेताओं और तृणमूल से जुड़ी हिरोइनों के साथ कनेक्शन: जानें कैसे खड़ा किया उसने काला कारोबार

कोलकाता में जिस बांग्लादेशी सांसद अनवरुल अजीम अनार की हत्या हुई, वो गुनाह की दुनिया का बड़ा खिलाड़ी था। सोने और ड्रग्स की स्मगलिंग से उसने अकूत दौलत बनाई थी और धीरे-धीरे वो अपनी ताकत और पहुँच के दम पर सफेदपोश बन गया। कभी इंटरपोल के लिए वॉन्टेड रहे अनवरुल अजीम अनार का भारत अक्सर आना-जाना था। कभी इलाज के नाम पर, तो कभी दोस्त के नाम पर। लेकिन मई 2024 का उसका दौरा आखिरी साबित हुआ। उसे हनी ट्रैप में फाँसकर मौत के घाट उतार दिया गया। अब पता चला है कि वो बांग्लादेश और भारत के बीच होने वाले अवैध हथियारों, सोने की तस्करी और ड्रग्स के व्यापार का बादशाह था। यही नहीं, वो पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के बड़े नेताओं का भी खास था। उसके लिए बांग्ला फिल्म उद्योग की अभिनेत्रियों के साथ भी था, खासकर टीएमसी से जुड़ी अभिनेत्रियों के साथ।

अनवरुल अजीम अनार की टीएमसी नेताओं से नजदीकी

कभी जातीय पार्टी के साथ रहा अनवरुल अजीम अनार साल 1996 तक खालिदा जिया की कट्टरपंथी पार्टी, जिसके अलकायदा से भी संबंध बताए जाते हैं-बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के साथ रहा। इसके बाद वो मौजूदा पार्टी आवामी लीग में शामिल हो गया। चूँकि उसे राजनीतिक संरक्षण भी चाहिए था, साथ ही उसे स्थानीय स्तर पर पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भी पकड़ कर रखना था, ऐसे में पूरी तरह से वो राजनीति में आ गया। अब तक तीन बार सांसद रहा अनवरुल हक पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी के बेहद करीब था। वो टीएमसी नेताओं की काली कमाई को ठिकाने भी लगाया था, खासकर घोटालों से जमा किए गए पैसों को।

ममला बनर्जी की अगुवाई में टीएमसी ने जब से पश्चिम बंगाल की सत्ता संभाली है, पश्चिनम बंगाल अपराधियों, आतंकवादियों, स्कैमर्स, हत्यारों, स्मगलर्स, मनी लॉन्ड्रिंग करने वालों और भ्रष्ट लोगों की शरणस्थली बनकर उभरा है, खासकर राजधानी कोलकाता।

अनवरुल अजीम के पश्चिम बंगाल में राजनीतिक कनेक्शनों पर एक बड़े अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया है कि अनवरुल अजीम अनार टीएमसी की महिलाओं नेताओं से काफी अच्छे संपर्क में रहा। उसमें से भी कुछ नेता कोलकाता फिल्म इंडस्ट्री की हीरोइनें हैं। कोलकाता फिल्म इंडस्ट्री की पूर्व एक्ट्रेस मुनमुन सेन तो दाऊद इब्राहीम तक से संपर्क में रही हैं, उसके खास गुर्गे अजीज मोहम्मद भाई के जरिए। अजीज मोहम्मद भाई काफी सालों से बांग्लादेश में भी भगोड़ा है और कुछ समय पहले ही ढाका की एक कोर्ट ने उसे बांग्लादेशी एक्टर सलमान शाह की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई है।

अधिकारी ने ये भी कहा कि बांल्गादेशी सांसद अनवरुल अजीज अनार टीएमसी के नेताओं के साथ व्यापारिक सहयोगी भी था। उसके पास एसएससी स्कैम से जुड़ी बड़ी धनराशि भेजी गई थी, जो उसने व्यापार में निवेश किया। अनार एसएससी स्कैम के मुख्य अभियुक्त पार्था चटर्जी से भी जुड़ा था, उसके भतीजे प्रसन्ना कुमार रॉय के दोस्त शिपन कुमार बसु के जरिए। शिपन बसु बांग्लादेश पुलिस की नजर में भगोड़ा और वो 2 दशकों से पश्चिम बंगाल में रह रहा है। शिपन बसु अपने शुरुआती दिनों में बांग्लादेश में सक्रिय रहे माओवासी-नक्सलवादी ग्रुप ‘पुर्बो बांग्ला कम्युनिष्ट पार्टी’ से जुड़ा रहा है।

अपने वामपंथी नक्सलवादी दिनों में शिपन कुमार बोस कई आपराधिक गतिविधियों जैसे डकैती, रेप, वसूली और हत्याओं के मामलों में शामिल रहा था। बाद में बसु अनवरुल अजीम के ट्रांसबॉर्डर स्मगलिंग रैकेट में शामिल हो गया। इसी रैकेट के दम पर वो भारत से बांग्लादेश के बीच सोने, ड्रग्स और हथियारों की तस्करी का रैकेट चलाता था। चूँकि अनवरुल बांग्लादेश में सम्मानित व्यक्ति बन गया था और पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी के बड़े नेताओं से उसके अच्छे लिंक थे, ऐसे में इस स्मगलिंग गिरोह ने अकूत कमाई की।

अनवरुल अजीम अनार की क्राइम कुंडली

ढाका ट्रिबून की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के मुताबिक, अनवरुल अजीम पुराना पापी रहा है। वो आतंकी गुटों की सहायता करता था, खासकर बांग्लादेश के दक्षिणी-पश्चिमी इलाके में, ये इलाके भारत के पश्चिम बंगाल से सटे हैं। उस पर बांग्लादेश पुलिस और अन्य एजेंसियों ने आतंकियों और अतिवादियों के ‘गॉडफादर’ का ठप्पा लगाया था। कभी 9 केस उसके ऊपर दर्ज थे, जिसमें हथियारों की तस्करी, विस्फोटों में हाथ, ड्रग्स की तस्करी, वसूली और अन्य गंभीर अपराध शामिल हैं।

साल 2008 में उसके खिलाफ इंटरपोल ने भी नोटिस जारी किया था। बताया जा रहा है कि वो साल 1986 से ड्रग्स की तस्करी वाले रैकेट में घुसा था, जब बांग्लादेश में सैन्य शासक हुसैन मुहम्मद इरशाद की इस्लामिक ‘जातीय पार्टी’ का शासन था। वो तब भारत के बगडा बोर्डर से होकर बांग्लादेश के बघडंगा बॉर्डर तक का स्मगलिंग रूट संभालता था। उसके लोग पुलिस थानों को महीने का चढ़ावा चढ़ाते थे। उस समय वो ‘ड्रग किंग’ के तौर पर जाना जाता था।

साल 1991 से वो झेनैदाह के पारितोष टैगोर नाम के स्मगलर के साथ मिलकर सोने की तस्करी करने लगा। और फिर आगे चलकर वो कालीगंज निगम के कमिश्नर के साथ मिलकर हथियारों की तस्करी भी करने लगा। उसके द्वारा तस्करी किए गए हथियार बांग्लादेश के जिहादी गुटों तक पहुँचते थे। उन आतंकियों को वो भारत तक पहुँचने का सुरक्षित रास्ता भी देता था। खास बात ये है कि वो बांग्लादेश में टॉप आतंकवादी ठहराए जा चुके प्रकाश कुमार बिश्वास के साथ भी काम कर रहा है, जो साल 2013 से पश्चिम बंगाल में छिपा बताया जा रहा है।

काली कमाई ही बनी मौत की वजह

बता दें कि बांग्लादेशी सांसद की निर्मम हत्या के इस पूरे केस में अब तक कई खुलासे हो चुके हैं। पुलिस ने भले आधिकारिक बयान नहीं दिया लेकिन मीडिया में खबरें आ रही हैं कि सांसद अनवारुल अजीम अनार और संदिग्ध अख्तरुज्जमान मिलकर सोने की तस्करी का काम करते थे, मगर पैसों को लेकर दोनों के बीच मतभेद हुआ और अख्तारुज्जमान ने पूरी हत्या की साजिश रची।

इस हत्या को अंजाम देने का काम मुंबई के कसाई को मिला था। कसाई का नाम जिहाद हवलदार है। उसे भी कोलकाता पुलिस ने पकड़ लिया है। आरोप है कि उसने अन्य साथियों के साथ मिलकर सांसद की हत्या फ्लैट में की। इसके बाद उनकी पहचान मिटाने के लिए शव से खाल उतारी और शव से मांस छोटे-छोटे टुकड़ों में काट उसे कीमा जैसा बनाया, फिर उसमें हल्दी मिलाई ताकि वो बदबू न करे। इसके बाद उसे अलग-अलग पैकेट में भरा गया। बाद में सारे पैकेट कोलकाता की अलग-अलग जगहों पर फेंक दिए गए। कुछ अंगों को फ्रिंज में भी रखा गया।

यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में लिखा गया है। विस्तृत मूल लेख पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें।

लिव इन में रहने वालों को करना होगा ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, नहीं करने पर होगी जेल, उत्तराखंड में 2024 के अंत तक लागू हो जाएगा UCC: रिपोर्ट

समान नागरिक संहिता (UCC) कानून को उत्तराखंड में 2024 के अंत तक लागू किया जा सकता है। अभी इसको अंतिम रूप दिया जा रहा है। UCC लागू होने के बाद राज्य में कई ऑनलाइन सुविधाएँ भी चालू की जाएँगी। राज्य में UCC लागू होने के बाद लिव इन रिलेशशिप के नियमों को कड़ाई से लागू किया जाएगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में UCC के विधानसभा से पास होने और इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद अब इसको अंतिम रूप से लागू करने पर काम चल रहा है। इसके लिए राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक पैनल काम कर रहा है। यह इसके नियमों को अंतिम रूप दे रहा है।

यह भी सामने आया है कि उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद लिव इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों को ऑनलाइन इसका रजिस्ट्रेशन करवाना होगा। इससे उन्हें बार बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। राज्य में शादियों का भी ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन हो सकेगा।

उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद लिव इन में रहने वाले जोड़े अगर एक महीने के भीतर अपना रजिस्ट्रेशन नहीं करवाते हैं तो उन्हें ₹10,000 का जुर्माना या तीन महीने की जेल हो सकती है। इसके अलावा अगर वह तीन महीने तक ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें ₹25,000 का जुर्माना या 6 महीने की जेल हो सकती है।

इसके अलावा ऐसे 18-21 के बीच की आयु के जोड़ों के माता-पिता को भी उनके लिव इन में रहने की जानकारी भेजी जाएगी। सरकार का कहना है कि इससे उनके माता-पिता को इस विषय में सही जानकारी मिल सकेगी।

राज्य के मुख्य सचिव शत्रुघन सिंह ने बताया, “हम लोगों के लिए ऑनलाइन मोड के माध्यम से औपचारिकताओं को पूरा करना आसान बनाना चाहते हैं। हालाँकि, यह प्रक्रिया कठिन है क्योंकि सरकारी कर्मचारियों को इस मामले में सिखाने की जरूरत है। हम समय से पहले नियम बनाने और एक साथ प्रशिक्षण सत्र आयोजित करने की योजना बना रहे हैं।”

गौरतलब है कि उत्तराखंड की धामी सरकार ने फरवरी, 2024 में समान नागरिक संहिता (UCC) क़ानून को विधानसभा में लाई थी। यहाँ से यह बहुमत से पास हो गया था। इस कानून में शादी, तलाक, विरासत और लिव इन जैसे मुद्दों को लेकर सभी धर्मावलम्बियों के लिए लिए एक समान कानून बनाए गए हैं। उत्तराखंड UCC लागू करने वाला आजाद भारत का पहला राज्य बनेगा।

‘द वायर’ ने लोकसभा चुनाव में कम वोट पड़ने को लेकर चलाई झूठी स्टोरी, डाटा का किया हेरफेर, बताए गलत आँकड़े: जानें क्या है सच्चाई

कई बार झूठी खबरें चलाने वाले प्रोपेगेंडा पोर्टल ‘द वायर’ ने एक बार फिर लोकसभा चुनावों को लेकर एक फर्जी स्टोरी छापी है। द वायर ने दावा किया है कि 2024 लोकसभा चुनावों के पहले पाँच चरणों में 2019 की तुलना में वोटों की संख्या में भारी गिरावट हुई है। द वायर के इस लेख में चुनाव आयोग द्वारा हाल ही में कुल वोटों की संख्या को लकर जारी किए गए आँकड़े के आधार पर चुनावों को लेकर फर्जी बातें कही गई हैं।

क्या है द वायर का दावा?

द वायर पर श्रावस्ती दासगुप्ता की ‘2019 के पाँच चरणों की तुलना में 2024 में करीब 19.4 करोड़ कम वोट पड़े’ (Compared to Five Phases in 2019, Nearly 19.4 Crore Less Votes Have Been Cast in 2024) शीर्षक वाली रिपोर्ट को 25 मई, 2024 को छापा गया है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 2019 लोकसभा चुनाव के मुकाबले 2024 के चुनाव में पाँच चरणों तक 19 करोड़ वोट कम डाले गए हैं। द वायर ने दावा किया है कि 2019 के लोकसभा चुनावो के पहले पाँच चरणों में 70.16 करोड़ वोट डाले गए थे जबकि 2024 के चुनाव में पाँच चरणों तक 50.7 करोड़ वोट ही डाले गए।

द वायर ने यह दावा चुनाव आयोग द्वारा शनिवार (25 मई, 2024) को जारी किए गए एक आँकड़े के आधार पर किए। इसमें चुनाव आयोग ने बताया है कि देश में लोकसभा चुनाव के पाँच चरणों में कितने वोट पड़े हैं।

चुनाव आयोग द्वारा जारी किए गए डाटा के अनुसार, देश में लोकसभा चुनाव के पहले चरण में 11.00 करोड़ वोट पड़े, दूसरे चरण में 10.58 करोड़ वोट पड़े। इसी तरह तीसरे चरण में 11.32 करोड़ जबकि चौथे चरण में 12.24 करोड़ वोट पड़े और पाँचवे चरण में 5.57 करोड़ वोट पड़े। इस प्रकार पाँचों चरण में कुल 50.72 करोड़ वोट पड़े।

द वायर ने दावा किया कि 19 करोड़ वोटों की यह गिरावट तब आई है जब 2019 के मुकाबले वोटरों की संख्या बढ़ी है। द वायर ने बताया है कि 2019 में कुल वोटरों की संख्या 89.6 करोड़ थी जबकि इन चुनावों में कुल वोटरों की संख्या 96.8 करोड़ है।

द वायर के सारे दावे झूठ, मनगढ़ंत डाटा के आधार पर बना दी रिपोर्ट

द वायर ने भारतीय लोकतंत्र की साख पर बट्टा लगाने के लिए झूठे डाटा और दावों के आधार पर यह रिपोर्ट तैयार कर दी है। द वायर ने बिना आधिकारिक आँकड़ों का परीक्षण किए यह पूरी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, जिसमें रंच मात्र भी सच्चाई नहीं है।

द वायर का दावा है कि 2019 के लोकसभा चुनावों के पहले पाँच चरणों में कुल 70.16 करोड़ वोट पड़े थे। असल में यह कोरा झूठ है। चुनाव आयोग का 2019 चुनाव को लेकर आधिकारिक आँकड़ा बताता है कि इस चुनाव में पूरे सातों चरणों में पड़े कुल वोटों की 61.46 करोड़ थी।

यानी द वायर ने जितने वोटों की सँख्या 2019 के पाँच चरणों के लिए बता दी है, वह तो पूरे 2019 के चुनाव में नहीं पड़े थे। द वायर ने अपने 70 करोड़ वोटों के आँकड़े के स्रोत का भी कोई जिक्र नहीं किया है।

वायर ने एक और झूठ अपनी इस रिपोर्ट में बोला है, उसने बताया है कि 2019 लोकसभा चुनाव में कुल वोटरों की संख्या 89.6 करोड़ थी, यह भी गलत है। चुनाव आयोग का आधिकारिक आँकड़ा बताता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में 91.19 करोड़ वोटर, वोट करने के लिए योग्य थे। ऐसे में द वायर की पूरी रिपोर्ट ही फर्जी मालूम होती है।

द वायर के पत्रकारों की गणित कमजोर

द वायर पहले भी झूठी और मनगढ़ंत कहानियाँ छापता रहा है। वर्तमान रिपोर्ट से उसके पत्रकारों की कमजोर गणित का भी खुलासा हो गया है। द वायर की इस रिपोर्ट में 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव में हर चरण में डाले गए वोटों की तुलना करने का दावा किया गया है।

लेकिन असल में द वायर ने 2019 के लोकसभा चुनाव के हर चरण के कुल मतदाताओं की संख्या की तुलना, 2024 में प्रत्येक चरण में डाले गए वोटों से कर दी है। उदाहरण के लिए, वायर का कहना है कि 2019 के पहले चरण में 14.2 करोड़ वोट पड़े जबकि 2024 में यह संख्या 11 करोड़ रही।

असल में 2019 के पहले चरण में कुल मतदाताओं की संख्या 14.2 करोड़ थी, ना कि डाले गए वोटों की। इन 14.2 करोड़ में से 9.12 करोड़ लोगों ने ही वोट डाले थे। यदि वायर को सही तुलना करनी थी तो वह 9.12 करोड़ (2019 चुनाव) और 11 करोड़ (2024) की तुलना करता। लेकिन उसने एजेंडा चलाने के लिए गलत आँकड़ों का सहारा लिया। पहले चरण में दो सीटों पर चुनाव भी स्थगित हो गया था, जिसके कारण वोटरों की संख्या 14.2 करोड़ से घट कर 13.16 करोड़ पर आ गई थी।

क्या 2024 में सही में घट गए वोट?

द वायर ने अपनी रिपोर्ट बनाने में मूलभूत गलतियाँ करके बताया है कि 2024 लोकसभा चुनाव में 2019 के मुकाबले कम वोट पड़े हैं। लेकिन यह बात बिलकुल झूठ है। असल में 2024 में डाले गए वोट 2019 से अधिक हैं। 2019 के पाँच चरणों तक लगातर वोटों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है।

उपरोक्त ग्राफ से साफ़ दिखता है कि 2019 के चुनाव में पाँच चरणों तक 48.47 करोड़ वोट पड़े थे। इसकी तुलना में 2024 के लोकसभा चुनाव में पाँच चरणों तक 50.7 करोड़ वोट पड़े। यानी 2019 की तुलना में 2024 के पाँच चरणों में 2.25 करोड़ वोट अधिक पड़े। ऐसे में द वायर का वोटों के कम होने का दावा पूरी तरह फर्जी सिद्ध हो जाता है। देश के कुछ हिस्सों में गर्मी और अन्य कारणों से मतदान प्रतिशत जरूर घटा है लेकिन मत देने वालों की संख्या बढ़ी है। ऐसे में वायर का प्रोपेगेंडा कहीं नहीं ठहरता।

वायर की तरफ से अपनी इस स्टोरी में कोई भी सुधार ना ही वेबसाइट और ना ही सोशल मीडिया पर किया गया है।

इस रिपोर्ट के लिखे जाने तक ‘द वायर’ की ओर से कोई सुधार अपनी फर्जी रिपोर्ट में नहीं की गई है। 25 मई 2024 को प्रकाशित इस फर्जी खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया यूजर अभिषेक बनर्जी ने ‘द वायर’ के संपादकों को भी टैग किया। इसके बावजूद कई घंटों तक (अभी तक) सुधार फिर भी नहीं किया गया।

इस तरह की डेटा संबंधी रिपोर्ट को सुधारने के लिए मात्र एक कैलकुलेटर की जरूरत होती है। और हाँ, मंशा की भी। प्रोपेगेंडा से भरी खबरें छापने में माहिर ‘द वायर’ के पास मंशा तो खैर क्या ही होगी, कैलकुलेटर भी निश्चित तौर पर नहीं है।