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दुर्घटना का शिकार होते शिक्षक, क्लास में बेहोश होती छात्राएँ, बेंच-बोरिंग-बैग घोटाला, न गर्मी छुट्टी-न होली की… क्या शिक्षा व्यवस्था का और दम घोंट रहे KK पाठक?

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक सरकारी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि उसने छात्रों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट न देने के लिए कहा था। इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया गया। जिला शिक्षा अधिकारी की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। मामला कुरहनी ब्लॉक के अमरख स्थित सरकारी माध्यमिक विद्यालय का है और उक्त शिक्षक का नाम हरेंद्र रजक है। उक्त शिक्षक ने मोदी को वोट न देने की अपील करते हुए कहा कि राशन योजना के तहत जो खाद्यान्न मिल रहा है वो उपयोग के लायक नहीं है।

वैसे ये सही बात है कि बिहार में लंबे समय तक स्कूल अव्यवस्था से बहाल रहे, न इंफ़्रास्ट्रक्चर की सुविधा थी, न बच्चे आते थे और न शिक्षक पढ़ाते थे। लेकिन, व्यवस्था में सुधार के नाम पर सिर्फ एक वर्ग पर नियम-कानून लादना और बाकी चीजों को ऐसे ही छोड़ देना कहाँ तक उचित है? बिहार के कुछ गाँवों में जान शिक्षक अच्छे थे, वहाँ 80-90 के दशक में भी अच्छी पढ़ाई होती थी। लेकिन, धीरे-धीरे हालात बिगड़ते गए और जैसे जैसे अपराध और जंगलराज का बोलबाला बढ़ा, पलायन बढ़ा, स्कूलों की स्थिति भी बदतर होती चली गई।

मुजफ्फरपुर में शिक्षक को किया गिरफ्तार, DM-DEO-थानेदार सब लगे

प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि सरकारी कर्मचारियों का चुनाव के दौरान किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में बोलना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है, इसीलिए ये गिरफ़्तारी हुई है। कक्षा के लड़के-लड़कियों ने भी इसकी पुष्टि की कि उक्त शिक्षक द्वारा मोदी को वोट न देने के लिए कहा गया। अभिभावकों को भी इससे नाराज़गी थी। मनियारी थानेदार उमाकांत सिंह ने गिरफ़्तारी की पुष्टि की। शिक्षक ने राशन को सड़ा-गला बताते हुए कहा था कि कमल छाप का बटन न दबाएँ।

ये मामला थोड़ा संदिग्ध भी लगता है। कक्षा में शिक्षक पढ़ाने के दौरान कई तरह की बातें करते हैं, वो सिर्फ अनुवादक नहीं होते। किसी विषय पर चर्चा होती है तो वो अपने व्यक्तिगत अनुभवों का जिक्र कर सकते हैं, किताबी ज्ञान के अलावा वास्तविक ज्ञान भी दे सकते हैं। हरेंद्र रजक उन शिक्षकों में हैं, जो सुबह 6 बजे स्कूल की टाइमिंग किए जाने का विरोध कर रहे हैं। क्या इसी कारण BEO ने तुरंत शिकायत दर्ज करा दी, थानेदार ने FIR लिख कर गिरफ्तार कर लिया और DM तक को बयान देना पड़ा?

क्या एक शिक्षक द्वारा क्लास में राजनीतिक टिप्पणी कर देना इतना बड़ा मामला है कि जिसमें DEO, DM और थाना प्रभारी को लगा दिया जाए? वो भी उस बिहार में, जहाँ अपराध अब भी थम नहीं रहे हैं। ये वही मुजफ्फरपुर है जहाँ पिछले साल प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष शाही की 2 बॉडीगार्ड्स समेत और इस साल उनके भाई की हत्या कर दी गई। फरवरी 2024 में दुकान की उद्घाटन के दौरान ही पिता-पुत्र दोनों को मार डाला गया। ये सब छोड़ कर पुलिस-प्रशासन एक शिक्षक पर कार्रवाई करने को लगा है।

बिहार में शिक्षकों को किया जा रहा प्रताड़ित, KK पाठक से नाराज़गी

बिहार में आजकल एक नाम बड़ा सुर्ख़ियों में है – KK पाठक। केक पाठक के फरमानों को ‘तुगलकी’ बताया जाता है। कभी वो होली जैसे त्योहार पर शिक्षकों को विद्यालय आने का आदेश दे देते हैं, तो कभी वो बिहार के महापर्व छठ पर दी गई छुट्टी रद्द कर देते हैं। कई बार बिहार के शिक्षा विभाग को विरोध के कारण अपने फैसले वापस लेने होते हैं, उसकी फजीहत होती है। KK पाठक बिहार के शिक्षा विभाग में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हैं, नामी IAS अधिकारी रहे हैं।

अब ताज़ा मामला देखिए। उन्होंने फरमान जारी किया है कि गर्मियों में शिक्षकों को सुबह 6 बजे विद्यालय पहुँचना होगा। स्कूल अब सुबह 6 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक खुल रहे हैं। यानी, शिक्षकों को सुबह 4-5 बजे के बीच जागना होता है। फिर उन्हें इस गर्मी में चिलचिलाती धूप में दोपहर को वापस लौटना होता है। शिक्षकों की जब नींद ही पूरी नहीं होगी तो वो क्या पढ़ाएगा? ऊपर से गर्मी के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ेगा तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

सबसे अधिक समस्या महिला शिक्षकों को हो रही है। कई शिक्षिकाएँ अपने घर में भोजन पका कर स्कूल के लिए निकलती हैं। अगर खाना बनाने में 1 घंटे का समय भी मान लें तो महिलाओं को 3-3:30 के करीब उठना होगा। वो उठ कर घर की साफ़-सफाई करेंगी, खाना बनाएँगी, नहा-धो कर तैयार होंगी और फिर स्कूल के लिए निकलेंगी। KK पाठक को समझना चाहिए कि शिक्षक भी एक आम मनुष्य ही हैं, नौकरी के अलावा भी उनका व्यक्तिगत जीवन है, परिवार है, नौकरी का मतलब ये नहीं है कि इनकी कीमत पर वो नौकरी करें।

एक शिक्षक की तस्वीर वायरल हुई है। इस सामूहिक तस्वीर में दिख रहा है कि उन्होंने अपने दोनों पाँव में अलग-अलग चप्पल पहने हुए हैं। स्पष्ट है, सुबह उठ कर स्कूल पहुँचने की हड़बड़ी में ये गलती हुई होगी। नियम बना दिया गया है कि सुबह उठ कर सवा 6 में सभी शिक्षक अपनी ग्रुप फोटो और रजिस्टर में उपस्थिति के रिकॉर्ड भेजें। तस्वीर में देखा जा सकता है कि उक्त शिक्षक के एक पाँव में जहाँ खाकी रंग की चप्पल है, वहीं दूसरे पाँव में शायद उन्होंने नीले रंग की कोई लेडीज चप्पल पहन ली है।

ऐसा नहीं है कि जो भाजपा समर्थक हैं उन्हें KK पाठक से नाराज़गी नहीं है क्योंकि बिहार सरकार में BJP भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए स्कूलों की नई टाइमिंग को लेकर भाजपा के MLC जीवन कुमार को ही सुन लीजिए, जो कहते हैं कि शिक्षक बुद्धिजीवी वर्ग है ऐसे में इसके साथ मजदूरों वाला व्यवहार मानसिक प्रताड़ना है। उन्होंने पूछा कि तड़के अँधेरे में महिलाएँ निकलेंगी और कोई अनहोनी हुई तो KK पाठक जिम्मेदारी लेंगे? लोकसभा चुनाव 2024 के बीच उन्होंने KK पाठक को चेताया कि वो सरकार को बदनाम करने का प्रयास न करें।

भाजपा के विधान पार्षद जीवन कुमार ने कहा कि KK पाठक ऐसे-ऐसे फरमान जारी कर रहे हैं क्योंकि उनका परिवार नहीं है, उनके बाल-बच्चे नहीं हैं और ऐसे में वो परिवार चलाने वालों की समस्या को नहीं समझ पा रहे हैं। जीवन कुमार का कहना है कि KK पाठक जनप्रतिनिधियों का इम्तिहान ले रहे हैं। उनकी बातों से लगता है कि भाजपा भी फ़िलहाल चुनाव के कारण चुप है, चुनाव बाद कुछ कदम उठाए जाएँगे। KK पाठक को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पसंदीदा अधिकारी माना जाता है।

KK पाठक भले IAS अधिकारी हैं, लेकिन शायद उन्हें बिहार के ग्रामीण भूगोल का नहीं पता। उन्होंने फरमान जारी कर दिया कि बच्चे अपने पंचायत के हाईस्कूल में ही पढ़ेंगे। जबकि बिहार में ये संभव है कि घर के पास जो स्कूल है वो दूसरे पंचायत में आता हो। यानी, बच्चे कई किलोमीटर दूर जाएँ पढ़ने लेकिन पास के स्कूल में नहीं पढ़ सकते। इस कारण 9वीं में छात्राएँ एडमिशन लेने से बच रही हैं। इस कदम से शिक्षक नहीं, बल्कि अभिभावक भी नाराज़ हुए।

बिहार: ये कैसा ‘सुधार’ जहाँ घोटाले ही घोटाले

सुधार का तो स्वागत होना चाहिए। लेकिन, बिहार की शिक्षा व्यवस्था में ये कैसा सुधार हो रहा है जहाँ घोटाले ही घोटाले हो रहे हैं? उदाहरण के लिए, बिहार में बेंच-डेस्क खरीद के लिए 900 करोड़ रुपए का बजट लाया गया, प्राइवेट कंपनियों को इसका टेंडर दिया गया। लेकिन, हो क्या रहा है? बेंच-डेस्क ऐसे हैं कि कुछ ही दिन छात्र उस पर बैठ रहे हैं और वो टूट जा रहा है। बैग वितरण, किताब वितरण और किट वितरण तक में घोटालों की खबर है।

शिक्षकों ने हमें बताया कि 2500 रुपए में एक अच्छा बेंच-डेस्क खरीदा जा सकता है, लेकिन कई जगह इसके लिए दोगुनी राशि तक चुकाई जा रही है। ये हवा-हवाई बातें नहीं हैं, जमुई के एक स्कूल में 2100 रुपए के बेंच-डेस्क के लिए 2900 रुपए खर्च किए गए। ये पैसा किन लोगों के पॉकेट में जा रहा है? कई स्कूलों के भवन तक नहीं हैं, वहाँ बेंच-डेस्क भेजे जा रहे हैं लेकिन बाहर रखे-रखे खराब हो रहे हैं। बच्चों के बैठते ही बेंच टूट रहे हैं। KK पाठक को हर एक सप्लाई की जाँच करा लेनी चाहिए, इसका पता चल जाएगा।

यहाँ तक कि राजधानी पटना में भी स्थिति ठीक नहीं है। चिरैयाटाँड राजकीय कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय में घटिया बेंच-डेस्क की सप्लाई की शिकायत सामने आई तो इसकी जाँच की गई, BEO की जाँच में ये आरोप सही निकला। तत्पश्चात सप्लाई करने वाली उस एजेंसी को ब्लैक लिस्ट में डाला गया। लेकिन, इससे क्या हो गया? जो घोटाला होना था वो कर लिया गया। अब क्या इसके लिए भी शिक्षकों का ही वेतन काटा जाएगा? वहाँ 50 में सब के सब बेंच-डेस्क टूट गए। अब एक बेंच-डेस्क पर 3 की जगह 2 बच्चों को ही बैठने के लिए कहा जा रहा है।

घटिया लकड़ी से बचे बेंच-डेस्क सप्लाई किए जा रहे हैं। एजेंसी ने ढाई लाख रुपए के बिल पर उक्त स्कूल के प्रधानाध्यापक से हस्ताक्षर भी करा लिया था। अकेले पटना में 68,000 बेंच-डेस्क की सप्लाई हुई, सोचिए घोटाला कितने बड़े स्तर का है। स्कूलों में इसी तरह समरसेबल बोरिंग और हैंडवॉश स्टेशन लगाने का भी आदेश है, इसमें भी लाखों का घोटाला हो रहा है। यहाँ हम सुपौल का उदाहरण देकर बात शुरू करते हैं। वहाँ यहाँ न निविदा निकाली गई, न कोटेशन जारी किया गया, सीधा ठेकेदारों को काम दे दिया गया।

इसके लिए भी विभिन्न विभाग आपस में लड़ते हुए एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। HM विभाग और शिक्षा विभाग एक-दूसरे को दोष दे रहा है। कई जगह काम अधूरा पड़ा हुआ है। प्रति स्कूल समरसेबल और पानी टंकी लगाने के लिए 1.91 लाख रुपए का खर्च तय किया गया था, लेकिन शिक्षकों में दबी जुबान से चर्चा है कि इसमें 5 लाख रुपए तक खर्च किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि अधिकारी अपने चाहते ठेकेदारों में सब बाँट दे रहे हैं। हेडमास्टरों को नियमों की जानकारी ही नहीं है, उन्हें फुसरत कहाँ हाजिरी बनाने से।

इसी तरह का कुछ पूर्वी चम्पारण में भी हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शुद्ध पेयजल योजना को लूट योजना बना दिया गया है। घटिया सामग्रियाँ और पाइप लगाई जा रही हैं। मोतिहारी के शिक्षकों ने बताया कि या तो छुट्टी के दिन या फिर रात में जानबूझकर काम किया जाता है, ताकि उनका घोटाला पकड़ा न जाए। अरेराज में तो रातोंरात घटिया बोरिंग डाल दी गई। 1500 रुपए की जगह 500 रुपए की पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक BEO ने बताया कि उन्हें इन कार्यों की जानकारी तक नहीं है।

यहाँ तक कि घटिया माल लगाने की अगर कोई शिकायत की जाती है तो परेशान किया जाता है। पूर्वी चम्पारण के भी कई प्रखंडों में बिना चयन के ही संवेदक द्वारा काम किया जा रहा है। आइए, लगे हाथ मुजफ्फरपुर का हाथ भी बता देते हैं। वहाँ भी प्रशासनिक स्तर पर अनियमितताओं की जाँच चल रही है। वहाँ भी यही आरोप – घटिया समाग्रियों का इस्तेमाल। पश्चिम चम्पारण के शनिचरी में तो ग्रामीणों ने ही आक्रोशित होकर काम रोक दिया।

किट घोटाले के बारे में अब क्या ही बात करें, इसे तो लालू यादव के चारा घोटाला से भी बड़ा बताया जा रहा है। सोचिए, बच्चों को दी जाने वाली साधारण बैग, पेंसिल, औजार बॉक्स समेत अन्य छोटी-मोटी चीजों में भी स्कैम हो रहा है। शिक्षकों ने हमें बताया कि 200-250 रुपए की किट के लिए 1000-1500 रुपए तक भुगतान किए जा रहे हैं। किट की गुणवत्ता ठीक नहीं है, वो घटिया हैं। कई स्कूलों में कम बैग मिले, सवाल पूछने पर मुँह बंद रखने की धमकी दी गई।

ये सब तो छोड़िए, KK पाठक के बारे में इसीलिए भी कहा जा सकता है कि अपने विभाग के अधिकारियों को दुरुस्त करने की बजाए वो शिक्षकों की प्रताड़ना वाले फरमान जारी कर रहे हैं, क्योंकि छुट्टियों से लेकर एरियर और प्रमोशन तक के लिए हर विभाग में रेट तय है। बक्सर के स्कूलों में 60% बच्चे किट से वंचित रह गए, ये पैसे कहाँ गए? इसी तरह पटना में भी 100 बच्चों के बीच मात्र 5 बैग मिले। क्या इसके लिए भी शिक्षकों की छुट्टी काटी जाएगी या उनका वेतन?

क्या कहते हैं आक्रोशित शिक्षक, बात-बात पर हो रही कार्रवाई

बिहार में शिक्षकों के इस आक्रोश का खामियाजा भाजपा को भी भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि ऐसा माहौल बनेगा कि भाजपा सत्ता में रहने के बावजूद कोई कदम नहीं उठा रही है। इन फरमानों की जगह अगर क्लासरूम के इंफ़्रास्ट्रक्चर को सुधारने और बच्चों की उपस्थिति-दर को बढ़ाने पर जोर दिया गया होता तो कोई बात होती। सैकड़ों स्कूलों में बेंच-डेस्क तक गड़बड़ हैं। गर्मी से छात्राएँ बेहोश हुई हैं। शिक्षिकाओं को बासी रोटी और फ़ास्ट फूड खाकर पढ़ाना पड़ रहा है। हड़बड़ी में शिक्षकों की दुर्घटना भी हो सकती है।

हमने इस संबंध में बिहार के कुछ शिक्षकों से भी बातचीत की, जिन्होंने अपनी समस्याओं के बारे में बताया। इन शिक्षकों का कहना है कि सुबह 6 बजे आने की हड़बड़ी में दुर्घटनाएँ हो रही हैं। असल में उनका कहना है कि 5:45 तक उन्हें स्कूल में उपस्थित रहना पड़ता है, क्योंकि हाजिरी बनाने में जरा भी देर हुई तो उसके लिए भी उस दिन अनुपस्थित मान कर वेतन काट लिया जाता है। शिक्षकों का कहना है कि पदाधिकारियों को निर्देश है कि हर दिन शिक्षकों का वेतन काटा जाए।

उक्त शिक्षकों ने बताया कि उन्हें आदेश दिया गया है कि अगर कोई छात्र 3 दिन विद्यालय नहीं आते हैं तो उनका नाम काट कर हटा दिया जाए। शिक्षकों का कहना है कि ये 2009 के RTE (शिक्षा का अधिकार) कानून का उल्लंघन है, क्योंकि आप किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं कर सकते, उसका नाम काट कर स्कूल से नहीं हटा सकते। परीक्षा में हिस्सा में न लेने पर उसे फेल किया जा सकता है, नाम नहीं काटा जा सकता। शिक्षकों का कहना है कि नए फरमानों से बच्चों को भी परेशानी है।

शिक्षकों ने हमसे बात करते हुए बताया कि शिक्षकों का वेतन न काटने पर जिला के पदाधिकारियों का वेतन कटता है, इसीलिए वो भी मज़बूरी में शिक्षकों का वेतन काटते हैं। शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में वाहन जल्दी नहीं मिलते, ऐसे में हल्का-फुल्का लेट हो जाता है। उनका कहना है कि इसी कारण शिक्षक दुर्घटना का भी शिकार हो रहे हैं। मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड में तो शिक्षकों को 5:45 तक पहुँचने का आदेश दिया गया और 6:15 तक उन्हें तस्वीरें भेजने को कहा गया।

शिक्षकों का कहना है कि एक-एक मिनट इस तरह से गिना जाना ठीक नहीं हैं। एक और बड़ा मुद्दा है गर्मियों की छुट्टी। स्कूलों में गर्मी की छुट्टियाँ सामान्यतः जून-जुलाई में दी जाती रही है, लेकिन इस बार KK पाठक के आदेशानुसार अप्रैल महीने में ही गर्मी की छुट्टियाँ दे दी गईं और उनमें भी शिक्षकों को उपस्थित करने को कहा गया, साथ ही पढ़ाई में कमजोर बच्चों को भी उपस्थित रहने के लिए कहा गया। शिक्षकों का पूछना है कि अगर मई में ठंडी की छुट्टी दे दी जाए तो कैसा लगेगा?

इसी तरह अगर स्कूल में 90% बच्चे उपस्थित नहीं रहते हैं तो इसके लिए भी शिक्षकों का वेतन काटे जाने का आरोप लगा है। शिक्षकों ने बताया कि छात्राओं में एनीमिया की कमी हो जाती है, दूर पैदल या साइकिल से कड़ी धूप में स्कूल से लौटने के चक्कर में उनकी स्थिति खराब हो जाती है। बच्चों को लू लग रहा है, वो बेहोश होते हैं। दोपहर के 1 बजे सबसे अधिक तापमान रहता है। जब अन्य कर्मचारियों को गर्मी छुट्टियाँ नहीं मिलतीं तो शिक्षकों को क्यों मिलनी चाहिए? इसके जवाब में शिक्षक अन्य सरकारी कर्मियों को मिलने वाले साल में 33 EL (अर्जित अवकाश) उन्हें एक भी नहीं मिलते।

शिक्षकों का कहना है कि वो मजदूर नहीं हैं, बच्चों को रोचक तरीके से पढ़ाने के लिए उन्हें घर पर पहले खुद पढ़ना पड़ता है और जो विषय पढ़ाया जाना है उसकी तैयारियाँ करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि घर पर भी उन्हें नौकरी के लिए समय देना होता है, ऐसे में स्कूल जाकर सीधे पढ़ा देने में दिक्कत आती है और इससे पढ़ाई में व्यवधान आता है। शिक्षक NEP 2020 (नई शिक्षा नीति) का भी हवाला देते हैं, जिसके तहत उन्हें सप्ताह में 29 घंटे पढ़ाने और माह में 2 शनिवार की छुट्टी का आदेश है, जबकि उनसे हफ्ते में 45 घंटे काम कराया जा रहा है।

देश में हर प्रकार के कर्मियों के अपने-अपने संघ हैं, लेकिन शिक्षकों पर बिहार में मामूली बातों पर कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि संघ बनाने, सोशल मीडिया पर कुछ शेयर करने या फिर अपनी आवाज़ उठाने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों तक से उन्हें वंचित रखा गया है। व्हाट्सएप्प पर कुछ शेयर करने पर भी कार्रवाई कर दी जाती है। अपने मुद्दों से संबंधित किसी फेसबुक पोस्ट को लाइक करने पर भी कार्रवाई हो जाती है। शिक्षक इसे मानसिक प्रताड़ना बताते हैं।

कई शिक्षकों का कहना है कि वो फ़ास्ट फ़ूड खा-खा कर पढ़ा रहे हैं, शहरों के स्कूलों में सुबह-सुबह 6 बजे बच्चे नहीं आ पाते और यहाँ तक कि गाँवों में भी बच्चे भोजन कर के स्कूल नहीं आ रहे हैं। इससे उनकी तबीयत बिगड़ रही है। गर्मी में भूखे पेट रहने के कारण चमकी बुखार जैसी बीमारियों का खतरा रहता है जिससे बिहार पहले भी जूझता रहा है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को लंच में कुछ मिल भी गया तो शिक्षक दिन भर भूखे ही रह जाते हैं, जो बैचलर हैं उनके लिए और समस्या है क्योंकि उन्हें भोजन खुद पकाना पड़ता है।

दुर्घटना का शिकार हो रहे शिक्षक, स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

सुबह-सुबह 5 बजे निकलना और दोपहर के 2 बजे घर पहुँचना, इस चक्कर में शिक्षकों की दिनचर्या और उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। आइए, हाल के दिनों में हुई घटनाओं को उदाहरण के साथ समझते हैं ताकि ये बातें हवा-हवाई न लगे। मधुबनी के लौकहा थाना क्षेत्र के डूबरबोना गाँव में 52 वर्षीय शिक्षक मोहम्मद मुजक्कर हुसैन सड़क हादसे में घायल हो गए। अररिया के त्रिवेणीगंज-पिपरा मार्ग में स्थित गंभीरपुर गाँव लहरनियाँ निवासी शिक्षिका बाइक से गिर कर घायल हो गई।

कुछ ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें स्कूलों में बच्चे सुस्त दिख रहे हैं, उन्हें नींद आती है। अकेले भागलपुर प्रमंडल की बात करें तो 10 महीने में 1303 शिक्षकों का वेतन कटा है। गया के मोहनपुर ब्लॉक में एक शिक्षक सड़क दुर्घटना में घायल हुआ। सीवान के पूरबपट्टी बलेथा गाँव में दलित समाज की एक छात्रा बिना भोजन किए स्कूल आने की वजह से बेहोश हो गई। वहीं रघुनाथपुर के दयाछपरा में एक शिक्षिका बेहोश हो गई। इसकी भी जाँच होती है कि शिक्षक कक्षा की पूर्व तैयारी कर के आए हैं या नहीं। उन्हें चुनावी ड्यूटी में भी लगाया जाता है।

20 बच्चों पर एक साथ टूटा दुख का पहाड़, मदद को MLA ‘दीदी’ ने बढ़ाया हाथ: जानिए कवर्धा के एक गाँव में एक साथ क्यों जले 17 शव, 19 की हुई थी मृत्यु

छत्तीसगढ़ के कवर्धा के सड़क हादसे में मारे गए 19 लोगों के 20 बच्चों को भारतीय जनता पार्टी की पंडरिया से विधायक भावना बोहरा ने गोद लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वो बच्चों की शिक्षा से लेकर, रोजगार और विवाह तक उनकी जिम्मेदारी निभाएँगी।

पंडरिया विधायक ने सेमरहा गाँव पहुँच मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और 20 बच्चों को गोद लेने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह बच्चों के परिजनों की कमी तो पूरी नहीं कर सकती हैं लेकिन उनके सुरक्षित भविष्य की कामना जरूर करती हैं।

भाजपा विधायक भावना बोहरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “इस क्षेत्र के लोग मुझे प्यार से ‘दीदी’ कहते हैं, मैं उनकी हर संभव मदद करूँगी…मैंने यह भी कहा है कि गाँव के 18 साल से कम उम्र के उन बच्चों की पढ़ाई और शादी का खर्च उठाऊँगी जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है, उनकी संख्या 20 है। हम उन्हें नौकरी दिलाने का प्रयास भी करेंगे।”

इस मामले पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी समेत कई दिग्गज नेताओं ने दुख जताया है। वहीं प्रदेश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना पर शोक जताते हुए कहा है कि हादसे रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएँगे ताकि दोबारा ऐसा कुछ न हो।

बता दें कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा में पिकअप वैन खाई में गिरने के कारण हुए भीषण हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी। दुर्घटना के वक्त पिकअप में 36 लोग सवार थे। ये लोग तेंदूपत्ता तोड़कर वापस लौट रहे थे, तभी कुकदूर थाना क्षेत्र के बाहपानी में ये हादसा हुआ। पिकअप वैन 30 फीट नीचे खाई में गिरी।

बताया जा रहा है कि इस घटना में 19 लोगों की मौत हो गई जिसमें 18 महिलाएँ और 1 आदमी शामिल है। इनमें से 17 का अंतिम संस्कार एक साथ आज हुआ। इन 17 में 11 लाशें एक ही परिवार की थी। वहीं अन्य 2 महिलाओं का अंतिम संस्कार उनके ससुराल में होगा।

प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पिकअप वैन के चालक दिनेश यादव और मालिक रामकृ्ष्ण साहू को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर बिना ओवरलोड वाहन चलाने का आरोप लगाया गया है।

अब इनके विरुद्ध 304 के तहत कार्रवाई होगी। मृतकों के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि है कि लोग तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए रोज जाते थे, कभी बाइक तो कभी फोर व्हीलर से। लेकिन जो गाड़ी चलाता था उसे बिलकुल अनुभव नहीं था।

‘सपा-कॉन्ग्रेस के शहजादे फ्लॉप फिल्म की तरह बार-बार रिलीज हो रहे हैं’: बस्ती में बोले पीएम मोदी- 4 जून को नींद खुलेगी तो EVM पर ठीकरा फोड़ेंगे

लोकसभा चुनाव 2024 का चुनाव सात चरणों में जारी है। पाँच चरण के मतदान हो चुके हैं। अगला मतदान 25 मई और आखिरी 1 जून 2024 को होना है। इन दो चरणों में बढ़त बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रचार की कमान खुद संभाली है। उन्होंने बुधवार (22 मई 2024) को उत्तर प्रदेश के बस्ती में कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी वाले INDI गठबंधन को जमकर ललकारा।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं सपा-कॉन्ग्रेस के दोनों शहजादों की फ्लॉप फिल्म की तरह बार-बार रिलीज से हैरान हूँ। अब ये दोनों शहजादे मिलकर ये अफवाह उड़ा रहे हैं। ये कहते हैं- यूपी की 79 सीट जीत जाएँगे। मैं पहले सुना करता था कि लोग दिन में सपने देखा करते हैं। मुझे अब पता चला कि दिन में सपना देखने का मतलब क्या होता है। 4 जून को यूपी की जनता इनको नींद से जगाने वाली है और तब ये ठीकरा EVM पर फोड़ेंगे।”

प्रधानमंत्री ने कहा था, “सपा ने यूपी को केवल बदनामी दी थी। हमारी बहन-बेटियों का घर से निकलना मुश्किल था। लोग जमीन खरीदने से डरते थे, जमीन खरीदी तो कोई न कोई कब्जा कर लेता था। गुंडे-माफिया सपा के मेहमान होते थे, दंगाइयों को स्पेशल प्रोटोकॉल मिलता था, आतंकवादियों को जेल से छोड़ने का फरमान जारी होता था।”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस के शहजादे तो राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटना चाहते हैं। ये राम मंदिर पर बाबरी ताला लगाने का सपना देख रहे हैं। ये रामलला को फिर से टेंट में भेजना चाहते हैं। सपा के बड़े नेता कहते हैं, राम मंदिर तो बेकार है। सपा खुलेआम कहती है, राम मंदिर जाने वाले पाखंडी हैं। इंडी गठबंधन के एक और नेता ने कहा, राम मंदिर अपवित्र है।”

समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस पर करारा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “ये लोग सनातन धर्म के विनाश की बात करते हैं और इन सबकी आका कॉन्ग्रेस पार्टी है। इंडी गठबंधन की परिवारवादी पार्टियों ने तुष्टिकरण की सारी हदें पार कर दी हैं। हमारा देश 500 वर्षों से राम मंदिर की प्रतीक्षा कर रहा था, लेकिन ये इंडी वालों को राम मंदिर और राम से परेशानी है।”

पीएम मोदी ने कहा, “पाकिस्तान तो पस्त पड़ गया है, लेकिन उसके हमदर्द सपा-कॉन्ग्रेस वाले अब भारत को डराने में जुटे हैं। ये लोग कहते हैं, पाकिस्तान से डरो, उसके पास एटम बम है। क्यों डरे भारत? आज भारत में कॉन्ग्रेस की कमजोर सरकार नहीं है, मोदी की मजबूत सरकार है। भारत आज घर में घुसकर मारता है।”

अब्बा हेडमास्टर, खुद सॉफ्टवेयर इंजीनियर, मिशन जिहादी… यदि पढ़ा-लिखा मुसलमान नहीं होता है ‘आतंकी’ तो रामेश्वरम ब्लास्ट में पकड़ा गया सोहैल कौन है लिबरलों

आपने अक्सर इस्लामी आतंकियों के बचाव में लिबरलों को ये तर्क देते हुए सुना होगा कि वो ये सब शिक्षा की कमी के कारण करते हैं। लिबरलों के मुताबिक मुस्लिम युवकों को देश में सही तालीम नहीं मिल पाती है इसलिए वो कट्टरपंथी संगठनों के बरगलाने पर कट्टरपंथ का रास्ता चुनकर आतंकी बन जाते हैं… लेकिन हकीकत क्या सच में ऐसी है जैसी हमें इतने सालों से लिबरल गिरोह के लोग दिखाना और समझाना चाहते हैं या फिर जमीनी सच्चाई कुछ और है।

अभी हाल में रामेश्वर कैफे ब्लास्ट का मामला लेते हैं। NIA ने बम धमाके में गिरफ्तार आतंकियों से पूछताछ के बाद जिन लोगों के यहाँ छापेमारी की है उनमें एक आंध्रप्रदेश जिले का रिटायर्ड हेडमास्टर अब्दुल और उसका सॉफ्टवेयर इंजीनियर बेटा सोहैल भी है। सोहेल को लेकर कहा जा रहा है कि वो इस हमले के मास्टरमाइंड अब्दुल मतीन से सपर्क में था। इसके अलावा 2 डॉक्टरों के ठिकाने पर भी रेड पड़ी है। ये दोनों ही प्रोफेशन ऐसे हैं जिसमें बिना पढ़ाई लिखाई किए कोई नहीं घुस सकता। फिर जवाब क्या है कि इन्होंने ऐसा क्यों किया। शिक्षा की कमी के कारण या नौकरी न मिलने की वजह से…?

लिबरलों ने सालों से इस्लामी आतंकियों के छवि निर्माण के लिए जो भूमिका बनाई थी वो अब आए दिन इसीलिए ध्वस्त हो रही है क्योंकि सोशल मीडिया के कारण लोगों को पता चलने लगा है कि जिन आतंकियों का प्रोफेशन बताकर, परिवार की दुर्दशा बताकर संवेदना बटोरी जा रही है, वो असल में किस खतरनाक मानसिकता के साथ पोषित होते हैं।

बात सिर्फ रामेश्वर ब्लास्ट की नहीं है। आप याद करिए कुछ दिन पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पूरा टेरर मॉड्यूल का भंडाफोड़ हुआ था। आतंकियों को पकड़कर उनकी लिस्ट बनना शुरू हुई तो प्रोफेशन वाले कॉलम में किसी के आगे प्रोफेसर लिखा जा रहा था था, किसी के पीएचडी स्कॉलर तो किसी के में इंजीनियर।

इसी तरह जब मध्यप्रदेश पुलिस की आतंक निरोधी दस्ते ने हिज्ब उत् तहरीर आतंकी संगठन पर कार्रवाई की थी तो अलग-अलग जगह से ताबड़तोड़ आतंकियों की गिरफ्तारी हुई थी। छानबीन में पता चला था कि गिरफ्तार किए गए आरोपितों में कंप्यूटर इंजीनियर, टेक्नीशियन, टीचर, व्यवासायी, जिम ट्रेनर, कोचिंग सेंटर संचालक, ऑटो ड्राइवर, दर्जी आदि शामिल थे।

इसी तरह 2021 में सिमी (स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया) के 12 आतंकियों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। इनमें से कई आतंकी इंजीनियरिंग के छात्र थे। छानबीन में सबका कनेक्शन आतंकी संगठन मुजाहिद्दीन से पाया गया था। वहीं इनके पास से आधुनिक गैजेट्स जैसे लैपटॉप, फोन, पेन ड्राइव आदि सब बरामद हुए थे। पूछताछ में ये भी बताया गया था कि ये लोग अपने संगठन से लोगों को जोड़ उन्हें बम बनाने की ट्रेनिंग भी देते थे।

2022 में हुए गोरखनाथ मंदिर पर हमला करने वाला मुर्तजा अब्बासी याद है क्या। पीएसी जवानों को धारदार हथियार से घायल करके मंदिर में घुसने जा रहा था और रोके जाने पर अल्लाह-हू-अकबर चिल्ला रहा था। छानबीन में सामने आया था कि उस मुर्तजा अब्बासी ने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की हुई थी।

ये मुर्तजा अब्बासी या सोहैल कोई 1, 2, 3 या 10 उदाहरण नहीं है। ऐसे तमाम कट्टरपंथियों की लिस्ट है जिनका उद्देश्य पढ़ लिखकर भी सिर्फ जिहाद करना और काफिरों को मारना तक रहा। इसी का उदाहरण है कि आज आतंकियों के आतंक करने का तरीका सिर्फ कहीं घुसकर गोलीबारी या बमबारी करना नहीं रह गया है। ये लोग अपनी पढ़ाई का इस्तेमाल करके अपने आतंक के तरीकों को अपग्रेड करते हैं।

जैसे कुछ समय पहले खबर आई थी कि भारत में इस्लामिक स्टेट रोबोट से आतंकी हमले की साजिश रच रहा था और इसके लिए आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) ने मुस्लिम युवाओं को रोबोटिक्स की पढ़ाई करने के हुक्म दिए थे…अब जो कट्टरपंथी इस्लामी ISIS की विचारधारा से प्रभावित होगा तो क्या वो इस हुक्म का पालन नहीं करता… करता और किया भी।

जानकारी के अनुसार, ISIS के मकसद को पूरा करने के लिए माज मुनीर अहमद, सैयद यासीन, रीशान थाजुद्दीन शेख, माजिन अब्दुल रहमान और नदीम अहमद नाम ने रोबोटिक्स कोर्स स्टार्ट कर दिया था। इसके अलावा इन्होंने आतंकी हमलों को अंजाम देने के लिए बी मैकेनिकल और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थी। ये पूरा खुलासा राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के सप्लीमेंट्री चार्जशीट ने किया था।

मालूम हो कि जिहाद के नाम पर आतंक फैलाने के काम में सिर्फ भारत के पढ़े-लिखे कट्टरपंथी नहीं शामिल हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी यही हाल है। अमेरिका में 9/11 हमने का मास्टरमाइंड ओसामा बिन लादेन के बारे में मीडिया बताता है कि वो अच्छे बिजनेसमैन परिवार से था और इंजीनियर था। जाहिर है उसके पास न पैसे की कमी थी, न शिक्षा की… फिर भी वो कुख्यात आतंकी संगठन का सरगना बना क्योंकि उसके जहन में कट्टरपंथ घुस गया था। उसे तालीम लेकर अपने लिए या अपने परिवार के लिए कुछ नहीं करना था बल्कि उसे मजहब के नाम पर जिहाद करना था और उसकी इसी सोच ने अमेरिकी के ट्विन टॉवर्स और पेंटागन पर हमला कराया, जिसमें 3000 से ज्यादा लोगों की जान गई थी। ये हमला सबसे बड़े आतंकी हमलों में गिना जाता है, मगर बावजूद ऐसी तमाम घटनाओं के ISIS में शामिल होने के लिए युवक अमेरिका और ब्रिटेन से पढ़कर जाते हैं। वहाँ उनके लिए आत्मघाती ड्रोन बनाते हैं। ऐसी तकनीक सिखाते हैं जिससे दहशत बड़े पैमाने पर फैल सके और खुद आतंकी बन जाते हैं।

इतनी लंबी लिस्ट होने के बावजूद ये मीडिया गिरोह के लोगों द्वारा आतंकियों के प्रोफेशन का महिमामंडन चलता रहता है। कभी बुरहान वानी के अब्बा के हेडमास्टर होने की बात जनता को बताकर ये संवेदनाएँ बटोरते हैं तो आतंकी जाकिर मूसा के बाइक, सिहरेट, हेयर स्टाइल, डियोडरेंट, जूते पर फिदा हो जाते हैं। उसके बाद प्रोपगेंडा फैलाया जाता है कि इस्लामी कट्टरपंथ को खत्म करने का एक मात्र तरीका शिक्षा है, जबकि हकीकत तो ये है कि कट्टरपंथ से लड़ने के लिए हम जिस शिक्षा को अंतिम उपाय मान रहे हैं, कट्टरपंथी उसी शिक्षा का प्रयोग करके आतंकी बन रहे हैं और आतंकी संगठनों को मजबूत बना रहे हैं।

ऊपर इतने उदाहरणों का जिक्र ही इसलिए है ताकि समझ आ सके कि आज के समय में सिर्फ भारत नहीं, बल्कि दुनिया का सारा फोकस कट्टरपंथ मिटाने पर होना चाहिए। इसी कट्टरपंथ के चलते छोटे-छोटे बच्चों को बरगला कर पहले पत्थरबाज बनाया जाता है, फिर बंदूक थमाकर आतंकी और इसी कट्टरपंथ के चलते कॉलेज में पढ़ रहे छात्रों का ब्रेनवॉश होता है और वो आतंकी संगठनों के कमांडर बनने लगते हैं। उनके लिए शिक्षा का अर्थ समाज में पहचान बनाना नहीं होता, बल्कि देश और दुनिया से काफिरों का खात्मा होता है।

‘आरोप आतंकवाद का फिर भी डेढ़ साल में बेल’: मद्रास HC के फैसले से सुप्रीम कोर्ट हैरान, नेताओं की तस्वीरों के साथ पकड़े गए थे PFI के 8 मेंबर

सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के आठ सदस्यों की जमानत रद्द कर दी है। कोर्ट ने कहा, राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि है। सुप्रीम कोर्ट ने मद्रास हाई कोर्ट द्वारा जमानत दिए जाने के फैसले में भी बदलाव किया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इनके गंभीर आरोपों में सिर्फ डेढ़ साल ही जेल में काटे हैं, ऐसे में उन्हें छोड़ना सही नहीं होगा।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की वेकेशन बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट द्वारा दिए गए जमानत के आदेश को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अपराध की गंभीरता और अधिकतम सजा के तहत जेल में बिताए गए सिर्फ 1.5 साल को ध्यान में रखते हुए हम जमानत देने के हाई कोर्ट के आदेश में दखल दे रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट ने एनआईए की अपील स्वीकार करते हुए कहा कि एनआईए ने जो कोर्ट के सामने सामग्री रखी है, उसके आधार पर प्रथम दृष्टया मामला बनता है।

एनआईए ने अदालत को बताया कि अपीलकर्ताओं के पास आरएसएस नेताओं की ‘मार्क’ की गई तस्वीरें मिली थी, जो इनके निशाने पर थे। इसके साथ ही एनआईए ने पीएफआई के विजन 2047 को भी कोर्ट में रखा गया था। विजन 2047 के मुताबिक, भारत में इस्लामी राज्य की स्थापना का लक्ष्य रखा गया था। इन सभी को एनआईए ने गिरफ्तार किया था, जो तमिलनाडु, केरल, यूपी समेत देश के कई हिस्सों से हैं।

पीएफआई के जिन 8 सदस्यों को मद्रास हाई कोर्ट से जमानत मिली थी, उन पर देश भर में आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप हैं। इन आठ सदस्यों के नाम हैं- बाराकतुल्लाह, अहमद इदरीस, खालीद मोहम्मद, सईद इश्हाक, ख्वाजा मौहेउद्दीन, यासिर आराफात, फयाज अहमद और मोहम्मद अब्बुताहिर। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

एनआईए की याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट कोर्ट ने जमानत इस आधार पर रद्द करने का आदेश दिया कि उनके खिलाफ आरोप प्रथम दृष्टया सही हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि राष्ट्रीय सुरक्षा हमेशा सर्वोपरि है। सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा कि आतंकवादी घटना हिंसक या अहिंसक प्रतिबंधित किया जा सकता है।

जिसने पुणे में कार से इंजीनियरों को कुचला, उसके दादा के छोटा राजन से कनेक्शन: रिपोर्ट में दावा- भाई के खिलाफ डॉन की ली थी मदद, अब 25 की उम्र तक अब गाड़ी नहीं चला पाएगा रईसजादा

पुणे में दो लोगों को पोर्शे से कुचल कर मार देने वाले रईसजादे के दादा का अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन से संबंध था। रईसजादे के दादा ने छोटा राजन से एक सम्पत्ति विवाद के मामले में मदद ली थी। इस मामले में हत्या की कोशिश तक हुई थी और इसकी जाँच सीबीआई ने की थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नाबालिग लड़के के दादा ने 2007-08 के दौरान अपने भाई के साथ चल रहे एक सम्पत्ति विवाद को सुलझाने के लिए अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन के एक गुर्गे से सम्पर्क किया था। सम्पत्ति विवाद के निपटारे के लिए वह छोटा राजन के गुर्गे से मिलने थाईलैंड की राजधानी बैंकाक गया था। राजन भारत से भागने के बाद यहीं रहता था।

राजन के गुर्गे से मुलाक़ात के बाद अजय भोंसले नाम के एक शख्स पर गोली चलाई गई थी। बताया गया कि यह हमला राजन के गुर्गों ने किया था क्योंकि भोंसले रईसजादे के दादा के भाई के मित्र थे। गोली चलने के बाद रईसजादे के दादा के खिलाफ पुणे में एक मामला भी दर्ज किया गया था।

इसमें रईसजादे के दादा पर कई धाराएँ लगाई गईं थी। बाद में राजन से जुड़े सारे केस सीबीआई को दे दिए गए थे, यह मामला भी इसी के साथ सीबीआई को सौंप दिया गया था। सीबीआई ने इस मामले में जाँच की थी। अभी यह मामला कोर्ट में लंबित है। यह मामला मुंबई के कोर्ट में चल रहा था।

पोर्शे से 2 लोगों को कुचलने वाले रईसजादे को अब गाड़ी चलाने का लाइसेंस 25 वर्ष की आयु तक नहीं मिलेगा। इस पर ट्रांसपोर्ट विभाग ने रोक लगा दी है। इसके अलावा जिस गाड़ी से दुर्घटना हुई है, उसे अगले एक वर्ष तक रजिस्टर नहीं किया जाएगा। गाड़ी को सड़क पर चलने भी नहीं दिया जाएगा, उसका अस्थायी रजिस्ट्रेशन भी रद्द हो गया है।

गौरतलब है कि 18 मई की रात पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक अनियंत्रित पोर्शे कार ने बाइक पर जा रहे एक महिला और एक पुरुष को कुचल कर मार दिया था। यह दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। इनकी पहचान अनीस दूधिया और अश्विनी कोस्टा के रूप में की हुई थी। पोर्शे गाड़ी इस दुर्घटना के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी और 17 वर्षीय लड़के को पकड़ लिया गया था। उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 15 घंटे के भीतर इस शर्त पर जमानत दे दी थी कि वह एक 300 शब्द का निबन्ध ट्रैफिक समस्या पर लिखेगा।

जिसने दिल्ली मेट्रो में अरविंद केजरीवाल के लिए लिखी थी धमकी, उसे दिल्ली पुलिस ने पकड़ा: बरेली से आया था, बैंक में करता है काम

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के लिए मेट्रो-स्टेन और स्टेशनों पर धमकी भरे मैसेज लिखने वाले अंकित गोयल को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपित उत्तर प्रदेश के बरेली जिले का रहने वाला है। अंकित गोयल बेहद पढ़ा लिखा है और एक नामी बैंक में काम करता है। उसने अपने ही इंस्टाग्राम अकाउंट पर केजरीवाल को धमकाने वाले संदेशों को पोस्ट भी किया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 33 वर्षीय अंकित गोयल ने मेट्रो स्टेशन पर सीएम केजरीवाल को जान से मारने की धमकी लिखी थी। दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट ने एफआईआर दर्ज की थी और मामले की जाँच कर रही थी। अब उसे दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि आरोपित की मानसिक हालत ठीक नहीं है, हालाँकि इसका पता जाँच के बाद ही चल पाएगा। इस बीच, सूत्रों का कहना है कि अंकित गोयल के राजनीतिक दलों से जुड़ाव को लेकर भी जाँच की जा रही है।

बताया जा रहा है कि आरोपित अंकित गोयल ग्रेटर नोएडा किसी काम से आया था। वो दिल्ली में 5 स्टार होटल में रुका था और मेट्रो के सफर के दौरान उसने अरविंद केजरीवाल के लिए धमकियाँ लिखी। उसने खुद ही उन धमकियों की फोटो भी अपने इंस्टाग्राम हैंडल पर शेयर की थी। अंकित गोयल ने इन धमकियों की तस्वीरें इंस्टाग्राम हैंडल @ankit.goel_91 पर साझा की गई थी, जिसमें मेट्रो कोच के अंदर एक धमकी भरे संदेश में लिखा था, ‘केजरीवाल कृप्या दिल्ली छोड़ दीजिए वरना आपको वे तीन थप्पड़ याद आएँगे, जो आपने चुनाव से पहले खुद को मरवाए थे। अबकी बार असली थप्पड़ जल्द पड़ेगा। आज की बैठक झंडेवालान में।’

एक अन्य मैसेज में लिखा है, ‘दिल्ली के सीएम हमें छोड़ दें। हमें मुफ्त की चीजें और नहीं चाहिए। 45 करोड़ रुपए सीएम आवास पर।’ एक अन्य ट्रेन में लिखा हुआ था, ‘नीचे दी गई बातों का आप पालन करें। जल बोर्ड का पारदर्शी ऑडिट और जिम्मेदार लोगों/नेताओं की जिम्मेदारी तय करें, शराब नीति और आपके नेताओं को मिले रिश्वत पर क्या कहना है और राघव चड्ढा की आंख का इलाज एम्स, या सफदरजंग या आपके किसी पसंद के भारतीय अस्पताल में। AAP से आखिरी उम्मीदें हैं।’ एक अन्य अधिकारी ने कहा कि इस तरह के मैसेज कम से कम तीन मेट्रो स्टेशन पटेल नगर, रमेश नगर और राजीव चौक पर भी मिले हैं। उन्होंने कहा कि पुलिस ने संज्ञान लिया है और जाँच शुरू कर दी है। और अब पुलिस ने अंकित गोयल को गिरफ्तार कर लिया है।

इस बीच आम आदमी पार्टी ने इसे भारतीय जनता पार्टी से की ओर से दी गई धमकी बताया है। ‘आप’ का दावा है कि धमकी की भाषा भाजपा जैसी है। पार्टी ने अपने राष्ट्रीय संयोजक पर जानलेवा हमले की साजिश का आरोप भी लगाया है।

दारू पर ₹48 हजार उड़ाकर बार से निकला, फिर कुचल डाले 2 इंजीनियर: पुणे के रईसजादे के बाप ने भी पुलिस को किया गुमराह, ₹45 हजार में आया था फैंसी नंबर

महाराष्ट्र के पुणे में एक नाबालिग रईसजादे के दो लोगों को करोड़ों की पोर्शे कार से कुचल देने के मामले में नए खुलासे हुए हैं। बताया गया है कि लड़के ने गाड़ी चलाने से पहले एक पब में जाकर खाने और शराब पर ₹48000 का खर्चा किया था। उसकी पोर्शे गाड़ी के लिए भी विशेष नम्बर लिया जा रहा था। नाबालिग को जहाँ जमानत मिल गई थी, वहीं उसके पिता ने पुलिस से बचने के लिए कई तरीके अपनाए लेकिन आखिर में पकड़ा गया।

टाइम्स ऑफ़ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, पोर्शे से दो लोगों को कुचलने वाले लड़के ने पुणे के कोजी बार में जाकर ₹48,000 शराब और खाने पर खर्च किए थे। यहाँ उसे और उसके दोस्तों को शराब परोसी गई थी। ₹48000 का यह खर्चा मात्र डेढ़ घंटे में कर दिया गया था। इस खर्चे का बिल पुणे पुलिस को मिला है, इसमें स्पष्ट रूप से शराब पर खर्चे का जिक्र है। गाड़ी से दो लोगों को कुचलने वाला नाबालिग इसके बाद एक और बार में भी गया था।

पुलिस ने इन बिल और रेस्टोरेंट से सामने आए CCTV के आधार पर लड़के के खिलाफ शराब पीकर गाड़ी चलाने की धारा भी मामले में जोड़ दी है। इस मामले में उसके खून की भी जाँच करवाई गई थी, जिसकी रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। पुलिस ने कहा है कि स्पष्ट रूप से यह पता चल रहा है कि लड़के ने शराब पी रखी थी। पुलिस ने साथ ही में उस बार पर भी ताला जड़ दिया है, जिसने नाबालिग को शराब परोसी थी। उसको सीज कर दिया गया है।

वहीं नाबालिग की पोर्शे के बारे में भी एक जानकारी निकल कर आई है। नाबालिग की पोर्शे का रजिस्ट्रेशन RTO में रुका हुआ था। इस गाड़ी के रजिस्ट्रेशन के लिए ₹45,000 का फैंसी नम्बर खरीदा गया था। इसका भुगतान हो गया था लेकिन मात्र ₹1758 की फीस नहीं जमा की गई थी जिसके कारण यह रजिस्ट्रेशन रुका हुआ था। नाबालिग पोर्शे कम्पनी की टायकान गाड़ी चला रहा था जो कि इलेक्ट्रिक है। इसका रजिस्ट्रेशन का कोई पैसा महाराष्ट्र में नहीं देना होता है, इन पर रोड टैक्स भी नहीं लगता। पोर्शे गाड़ी के लिए MH12WQ2000 नम्बर लिया गया था।

यह भी सामने आया है कि लड़के को जहाँ दो लोगों को कुचलने के कुछ ही घंटों के बाद जमानत मिल गई थी, वहीं उसका पिता फरार हो गया था। नाबालिग का पिता नामी बिल्डर है और इसके पास पुणे में ही काफी सरे घर हैं जहाँ वह घटना के बाद गया था। इसके बाद वह अपने ड्राइवर के साथ कोल्हापुर गया था। कोल्हापुर में वह अपने एक दोस्त के घर गया और वहाँ से अपनी गाड़ी को वापस मुंबई भेज दिया ताकि पुलिस गुमराह हो जाए।

वह इसके बाद अपने दोस्त के साथ कोल्हापुर से छत्रपति संभाजी नगर (औरंगाबाद) चला गया। उसने इस बीच बचने की काफी कोशिश की लेकिन पुलिस ने उसे जीपीएस और मोबाइल लोकेशन के सहारे ढूंढ निकाला और गिरफ्तार कर लिया।

गौरतलब है कि 18 मई की रात पुणे के कल्याणी नगर इलाके में एक अनियंत्रित पोर्शे कार ने बाइक पर जा रहे एक महिला और एक पुरुष को कुचल कर मार दिया था। यह दोनों सॉफ्टवेयर इंजीनियर थे। इनकी पहचान अनीस दूधिया और अश्विनी कोस्टा के रूप में की हुई थी। पोर्शे गाड़ी इस दुर्घटना के बाद क्षतिग्रस्त हो गई थी और 17 वर्षीय लड़के को पकड़ लिया गया था। उसे जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड ने 15 घंटे के भीतर इस शर्त पर जमानत दे दी थी कि वह एक 300 शब्द का निबन्ध ट्रैफिक समस्या पर लिखेगा।

जम्मू-कश्मीर में फिर से 370 बहाल करने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, कहा- फैसला सही था: CJI की बेंच ने पुनर्विचार याचिकाओं को किया खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (21 मई, 2024) को उसके अनुच्छेद 370 पर दिए गए निर्णय को लेकर दाखिल पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिका में दी गई दलील को मानने से इनकार करते हुए इन्हें खारिज किया।

चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पाँच सदस्यीय बेंच ने इस मामले की सुनवाई की। बेंच ने कहा कि याचिकाओं का परीक्षण करने के बाद उसे अपने पुराने निर्णय में कोई भी गलती नहीं दिखती है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट के नियमों के आधार पर याचिका को खारिज किया जाता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान जम्मू कश्मीर से लद्दाख को अलग किए जाने वाले एक्ट की संवैधानिकता पर भी सुनवाई करने से इनकार किया। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में भारत सरकार के पुराने स्टैंड का हवाला दिया कि वह जल्द ही जम्मू कश्मीर को केन्द्रशासित प्रदेश से पूर्ण राज्य का दर्जा देगी।

सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका अवामी नेशनल कॉन्फ्रेंस ने लगाई थी। कॉन्फ्रेंस का कहना था कि दिसम्बर 2023 में सुप्रीम कोर्ट के अनुच्छेद 370 को हटाने को सही ठहराने वाले निर्णय में कुछ गलतियाँ थीं, ऐसे में कोर्ट इस फैसले पर दोबारा से विचार करे। हालाँकि, कोर्ट ने यह दलील नहीं मानी और दोबारा सुनवाई से इनकार किया।

गौरतलब है कि 5 अगस्त, 2019 को मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A को हटा दिया था। इसके साथ जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बाँट कर दो केन्द्रशासित प्रदेश बनाए गए थे। लद्दाख को अलग केन्द्रशासित प्रदेश का दर्जा दिया गया था।

सरकार के इस निर्णय के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएँ डाली गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में पर सुनवाई करते हुए दिसम्बर 2023 में सरकार के फैसले को सही ठहराया था। सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिए थे कि केंद्र सरकार सितम्बर 2024 तक जम्मू कश्मीर में विधानसभा चुनाव करवाए।

निकाह में घूमर देख भड़के मौलाना, रशीद के परिवार को 11 महीने के लिए समाज से किया बेदखल: ठोंका ₹1 लाख जुर्माना, प्रशासन के सामने पलटे

मध्य प्रदेश के हरदा जिले में एक मुस्लिम परिवार सामाजिक बहिष्कार का दंश झेल रहा है। बॉयकॉट का ये फरमान स्थानीय मौलानाओं ने सुनाया है। पीड़ित परिवार की गलती बस इतनी है कि उनके एक निकाह समारोह में डांसर ने नाच दिया था। बहिष्कार का ऐलान करने वालों ने इसे मज़हबी तौर-तरीकों के खिलाफ बताया है। परिवार के समाज से निष्कासन की अवधि फिलहाल 11 महीने रखी गई है। इसी के साथ परिवार पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मामला हरदा के छीपानेर रोड का है। यहाँ रशीद अपने परिवार के साथ रहते हैं। रशीद के घर 28 जनवरी को एक सदस्य का निकाह हुआ था। निकाह में दूल्हा मोहीन और दुल्हन चाँदनी थीं। 2 दिनों के बाद 30 जनवरी को इसी निकाह की ख़ुशी में रशीद ने दावत रखी थी। इस दावत में रशीद के रिश्तेदारों और दोस्तों के अलावा आसपास के तमाम लोगों ने शिरकत की थी। इसी निकाह में रशीद ने राजस्थानी कलाकारों को बुलाया था। इन कलाकारों में एक महिला डांसर ने घूमर डांस किया था। डांस का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वायरल वीडियो में एक महिला डांसर राजस्थानी परिधान में कई लोगों के आगे स्टेज पर नाच रही थी। मंच पर एक पुरुष में राजस्थान के पारम्परिक वेश में दिख रहा है। कार्यक्रम खत्म हो जाने के बाद रशीद के इलाके के कुछ मौलानाओं और मुस्लिम समाज के अन्य लोगों ने मीटिंग की। मीटिंग में सर्वसम्मति से यह घोषणा की गई कि निकाह में महिलाओं का डांस कायदों के खिलाफ है। इसी दौरान सभा के पंचों ने रसीद और उनके परिवार को नियम तोड़ने वाला घोषित कर दिया।

रशीद ने हरदा के जिलाधिकारी (DM) को शिकायती पत्र दे कर न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके परिवार को 11 महीने के लिए किसी भी शादी-ब्याह में न बुलाने का फरमान सुनाया गया है। बताया यह भी जा रहा है कि पीड़ित परिवार पर 1 लाख रुपए का जुर्माना भी ठोंका गया है। रशीद की बुजुर्ग अम्मी ने इस फरमान को गलत बताया है। पीड़ित परिवार इस फैसले के खिलाफ पुलिस में गया। आरोप है कि पुलिस ने बॉयकॉट करने वालों पर कोई कार्रवाई नहीं की।

आखिरकार रशीद ने हरदा के जिलाधिकारी से शिकायत की है। जिलाधिकारी ने फ़ौरन ही जाँच के लिए एक टीम रशीद के घर और पास-पड़ोस में पहुँची। रशीद के पड़ोसियों ने बहिष्कार जैसे आरोपों को झूठ बताया है। पड़ोसियों ने बताया कि रशीद का बहिष्कार नहीं किया गया है बल्कि उनको जाजम के खाने से बाहर कर दिया गया है। प्रशासन मामले की जाँच करवा रहा है।