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‘दिखाता खुद को सेकुलर है, पर है कट्टर इस्लामी’ : हिंदू पीड़िता ने बताया आकिब मीर ने कैसे फँसाया निकाह के जाल में, ठगे ₹42 लाख भी

सोशल मीडिया पर 20 मई 2024 को एक वीडियो सामने आई थी जिसमें एक शख्स अपनी पत्नी को ताबड़तोड़ मारे जा रहा था। छानबीन करने पर पता चला कि हिंसा करने वाले व्यक्ति का नाम आकिब मीर है जो जम्मू के बठांडी में रहता है और कुछ समय पहले इसने हिंदू बनने का दिखावा करके एक हिंदू महिला को फँसाया था। मीर के विरुद्ध केस दर्ज हो गया है। पीड़िता के आरोप सुन मीर पर आईपीसी की धारा 376, 420,400, 504, 506 और 34 लगाई गई है।

एफआईआर में पीड़िता ने बताया कि आकिब के साथ कॉन्टैक्ट में आने से पहले वो शादीशुदा थी और उसका एक बेटा भी था, लेकिन उसका पति शराबी था और लगातार बीमार रहता था… इस वजह से वह काफी तनाव में रहती थी और भावनात्मक तौर पर काफी कमजोर हो गई थी। कुछ समय बाद वह उससे अलग हो गई। इस बीच आकिब के साथ उसकी बातचीत इंस्टाग्राम पर शुरू हुई। आकिब ने अपने आपको रवि राजपूत बताया। दोनों धीरे-धीरे एक दूसरे के करीब आ गए।

आकिब जानता था कि महिला शादीशुदा है। बावजूद इसके उसने रवि बनकर करीबी बनाई। कुछ समय बाद जब महिला ने अपने फोन में स्नैपचैट डाउनलोड किया तो पता चला कि वो रवि राजपूत नहीं आकिब मीर है। महिला ने इस संबंध में उससे सवाल किए तो उसने कहा कि वो हिंदू इसलिए बना ताकि वो उसके विश्वास को जीत सके। उसने महिला को ये कहकर बरगलाया कि वो नहीं चाहता था कि महिला किसी और प्रकार के तनाव में आए, क्योंकि उसकी जिंदगी में पहले ही इतना तनाव था।

इसी बीच आकिब ने महिला को प्रपोज किया और साथ ही वादा किया कि वो महिला के बेटे का भी ख्याल रखेगा। जब महिला ने निकाह को इनकार किया तो आकिब ने अपना असली रंग दिखाना शुरू किया। आकिब ने कहा कि अगर महिला ऐसा नहीं करेगी तो वो उसके बेटे को मार देगा। महिला पूरी तरह खुद को फँसा समझ रही थी।

इसी बीच आकिब एक दिन महिला को और उसके बेटे को अपने साथ ले गया। वहाँ उसने उनसे एक कागज पर दस्तखत कराए। महिला को समझ नहीं आया कि कागज कौन से हैं। बाद में पता चला वो निकाहनामा था। महिला अपने बेटे के भविष्य को लेकर और चिंतित हो गई। उसने कुछ समय बाद अपने 42 लाख के जेवर बेचकर 32 लाख रुपए की प्रॉपर्टी ली और पैसे आकिब के जरिए डीलर को दिलाए।

23 अप्रैल को जब उसने प्रॉपर्टी के कागज माँगे तो पता चला जो प्रॉपर्टी महिला ने अपने बेटे के लिए ली थी, लेकिन उसके पैसे आकिब मीर और प्रॉपर्टी डीलर ने ठग लिए हैं। वहीं 32 लाख की प्रॉपर्टी के अलावा 10 लाख रुपए भी आकिब ने पर्सनल यूज के नाम पर उससे ले लिए। महिला बताती है कि आकिब उसके साथ जबरन संबंध बनाता था और खुलेआम कहता था कि उसके कई महिलाओं के साथ चक्कर हैं।

ऑपइंडिया से बात करते हुए महिला ने बताया कि वह अब तो आकिब का घर छोड़ चुकी है लेकिन बीच में उसे लगातार एक महिला कॉल करती थी। एक दिन उसने महिला का फोन उठाया तो पता चला कि आकिब उसके साथ था। सवाल पूछे जाने पर आकिब ने मारपीट की। महिला के अनुसार, आज केवल सीसीटीवी फुटेज के कारण आकिब की सच्चाई खुली है।

महिला कहती है कि आकिब सोशल मीडिया पर अपने आप को सेकुलर दिखाता है लेकिन असल में वो इस्लामी है। उसने महिला को साफ कहा हुआ था कि वो हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करे। इसके अलावा अन्य महिलाओं के साथ रहने की उसकी आदत भी लगातार बढ़ती जा रही थी। सवाल-जवाब करने पर वो मारपीट करता था। जब हर चीज की अति हो गई तब महिला ने उस घर को छोड़ दिया।

महिला के अनुसार, उसकी पहली शादी 2009 में हुई थी। 2019 में वह अपने पति से अलग हो गई और आकिब का घर छोड़ दिया।

आकिब का कहना है कि ये मामला लव जिहाद का नहीं है बल्कि प्रॉपर्टी विवाद का है।

बता दें कि आकिब मीर के पहले कनेक्शन भारतीय जनता पार्टी से जुड़ा था लेकिन तमाम महिलाओं की शिकायतें आने के बाद पार्टी ने उसे 2019 में ही निकाल दिया था।

रेप कर इतना किया टॉर्चर कि सदमे में चली गई महिला, 2 साल बाद हुई ठीक तो पकड़े गए मोहम्मद शफी, मोहम्मद शबील और मोहम्मद फैसल

केरल के कोझिकोड में एक महिला के रेप और उसके बच्चे को यातनाएँ देने के मामले के तीन आरोपित घटना के दो साल बाद पकड़े गए। उनकी पहचान पुलिस घटना के दो साल बाद कर पाई क्योंकि रेप पीड़िता की मानसिक स्थिति उसके साथ हुई घटना के बाद खराब हो गई थी।

ऑनमनोरमा की एक रिपोर्ट के अनुसार, मोहम्मद शफी, मोहम्मद शबील और मोहम्मद फैसल ने घरों में काम करने वाली एक महिला से सोशल मीडिया से पहचान बढ़ाई। इसके बाद वह उसके घर पर आकर उसका लगातार रेप और उसके साथ हिंसा करने लगे। उन्होंने उसके बच्चे पर गरम पानी तक डालने की कोशिश की और महिला को यातनाएँ दी।

महिला ने इस संबंध में जून 2022 में पुलिस के पास रेप की शिकायत दर्ज करवाई, उसने इन तीनों के नाम भी केरल पुलिस को दिए और बताया कि उसके साथ क्या घटना हुई। पुलिस इस मामले में कार्रवाई चालू करती कि उससे पहले ही महिला का मानसिक संतुलन बिगड़ गया और वह अवसादग्रस्त हो गई।

महिला की मानसिक हालत इतनी अस्थिर हुई कि उसे एक देखभाल गृह में ले जाना पड़ा और उसके बच्चे को साथ ही एक बाल संरक्षा गृह में भेज दिया गया। पुलिस इस कारण से घटना के विषय में महिला से और कोई जानकारी नहीं जुटा पाई। महिला से जानकारी ना जुटा पाने के कारण मामले की जाँच जहाँ की तहाँ रुक गई।

पुलिस को महिला का बयान ना लेने की हिदायत दी गई थी इसलिए वह आरोपितों की पहचान के विषय में कोई जानकारी नहीं इकट्ठा कर पा रही थी। हालाँकि, यह स्थित धीमे धीमे बदलने लगी। महिला को जून 2023 में फिट घोषित कर दिया गया था। इसके बाद वह काम भी करने लगी थी और साथ ही अपने बच्चे की भी देखभाल करने में सक्षम हो गई थी।

महिला के स्वस्थ होने पर पुलिस ने दिसम्बर 2023 में उससे सम्पर्क किया। इसके बाद महिला ने तीनों आरोपितों के नाम स्पष्ट रूप से बताए। इसके साथ ही उसने एक डायरी भी दी जिसमें कई सारे नम्बर लिखे हुए थे। पुलिस को जाँच में एक नम्बर मिला जो कि एक आरोपित का था।

पुलिस ने इस नम्बर की लोकेशन तलाश कर एक आरोपित को पकड़ लिया। इसके बाद उससे पूछताछ के आधार पर बाकी के दो आरोपित भी पकड़े गए। पुलिस ने बताया कि घटना के बाद इन लोगों ने अपने नम्बर बदल लिए थे। पुलिस ने इनके फोटो लेकर पीड़िता को दिखाए, पीडिता ने तुरंत उनकी पहचान कर ली। पुलिस अब इस मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।

जानें क्या होता है एयर टर्बुलेन्स, जिसमें फँसा सिंगापुर का एयरलाइन्स का विमान: 229 यात्री थे सवार

सिंगापुर एयरलाइन्स का विमान हवाई तूफान की चपेट में आ गया, जिसमें एक यात्रा की मौत की सूचना है। इस हादसे में 30 से अधिक लोग घायल हो गए। सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ान SQ321 हीथ्रो हवाई अड्डे से सिंगापुर के रास्ते में थी, जब उसे गंभीर एयर टर्बुलेंस का सामना करना पड़ा। एयर टर्बुलेंस की वजह से फ्लाइट को स्थानीय समयानुसार दोपहर 3:45 बजे बैंकॉक के सुवर्णभूमि हवाई अड्डे पर आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी। फ्लाइट में कुल 211 यात्रियों के अलावा 18 क्रू सदस्य सवार थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिंगापुर एयरलाइंस की ये फ्लाइट शाम 6 बजकर 10 मिनट पर सिंगापुर के चाँगी एयरपोर्ट उतरने वाली थी, लेकिन उसे आपात स्थिति की वजह से बैंकॉक में उतरना पड़ा। इस हादसे की वजह से यात्री की मौत के बाद सिंगापुर एयरलाइंस ने मृतक यात्री के परजनों के प्रति शोक जताया है। प्लेन की लैंडिंग के तुरंत बाद एम्बुलेंस की कई गाड़ियाँ एयरपोर्ट पहुँची। घायलों को इलाज के लिए पास के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया कि FlightRadar24 के उड़ान ट्रैकिंग डेटा के अनुसार सिंगापुर एयरलाइंस की उड़ान 37,000 फीट (11,300 मीटर) पर उड़ान भर रही थी। 0800 GMT के तुरंत बाद, बोइंग 777 लगभग तीन मिनट में तेजी से 31,000 फीट (9,400 मीटर) तक नीचे आ गया। विमान तेजी से उतरने और आधे घंटे के भीतर बैंकॉक में उतरने से पहले केवल 10 मिनट से कम समय के लिए 31,000 फीट (9,400 मीटर) की ऊंचाई पर रहा। यह तब हुआ जब फ्लाइट अंडमान सागर के ऊपर, म्यांमार की ओर बढ़ रही थी।

यह घटना सिंगापुर एयरलाइंस के लिए एक दुर्लभ घटना है। एयरलाइन का सुरक्षा रिकॉर्ड अच्छा है। 1972 में एक विमान दुर्घटना के बाद से इसकी कोई घातक दुर्घटना नहीं हुई है। एयर टर्बुलेंस उड़ान का एक सामान्य हिस्सा है। हालाँकि, यह आमतौर पर हानिकारक नहीं होता है। आधुनिक विमान टर्बुलेंस को सहन करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और पायलटों को इसे संभालने का प्रशिक्षण दिया जाता है।

एयर टर्बुलेंस की वजह

थर्मल अपड्राफ्ट और डाउनड्राफ्ट: जब गर्म हवा ऊपर उठती है और ठंडी हवा नीचे उतरती है, तो इससे एयर टर्बुलेंस पैदा हो सकती है।

जेट स्ट्रीम: ये संकरी हवा की धाराएँ होती हैं जो हजारों फीट ऊपर तेज़ी से बहती हैं। प्लेन में प्रवेश करने या बाहर निकलने पर यह कंपन पैदा कर सकती हैं।

पहाड़ और बादल: जब हवा पहाड़ों या बादलों से होकर गुजरती है, तो इसका प्रवाह बाधित हो सकता है, जिससे टर्बुलेंस पैदा हो सकती है।

विमान का वेक: बड़े विमानों के पीछे बनने वाला हवा का घूर्णन छोटे विमानों को प्रभावित कर सकता है, जिससे टर्बुलेंस पैदा हो सकती है।

बहरहाल, ऐसी स्थिति में यात्रियों को चालक दल द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करना चाहिए। ध्यान रखें कि एयर टर्बुलेंस बहुत सामान्य स्थिति है, और हजारों-लाखों मामलों में एक खतरनाक होता है। ऐसे में अपनी सीट बेल्ट बांधकर, शांत रहकर और चालक दल के निर्देशों का पालन करके, आप टर्बुलेंस वाली उड़ान को सुरक्षित और आरामदायक बना सकते हैं।

‘मुस्लिम बन वरना तेरी गंदी-गंदी फोटो बना कर वायरल कर दूँगा, कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं रहेगी’: ‘लव जिहाद’ में अब AI की एंट्री, बोला फैज़ाल – घर से उठा ले जाऊँगा

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में कॉलेज की एक हिन्दू छात्रा को इस्लाम कबूल कर के निकाह करने की धमकी दी जा रही है। धमकी देने वाले आरोपितों के नाम फ़ैज़ाल और आमीन बताए जा रहे हैं। पीड़िता को उसके व्हाट्सएप नंबर पर ब्लू फ़िल्में भेजी गईं। इसी के साथ AI टूल की मदद से छात्रा का अश्लील वीडियो बनाने की बात भी कही गई है। पुलिस ने सोमवार (20 मई, 2024) को FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है।

यह मामला बरेली के थाना क्षेत्र भोजीपुरा का है। यहाँ सोमवार को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी पास के ही एक कॉलेज में पढ़ने जाती है। मंगलवार (7 मई, 2024) को पीड़िता के व्हाट्सएप पर एक अनजान नंबर से Hi लिख कर आया। छात्र ने इसका कोई जवाब नहीं दिया तो सामने वाले ने कॉल किया और जबदस्ती बात करने की कोशिश की। कॉल के दौरान कॉलर ने कहा, “तू मुझे अच्छी लगती है। धर्म परिवर्तन कर के इस्लाम अपना ले। मैं तुझे हमेशा खुश रखूँगा।”

इतना सुन कर पीड़िता ने फोन काट दिया। 19 मई को एक बार फिर से उसी नंबर से पीड़िता को मैसेज आया। जब लड़की ने परिचय पूछा तो कॉलर वीडियो कॉल करने लगा। फोन न उठाने पर उसने पीड़िता को ब्लू फ़िल्में और अश्लील मैसेज भेजने शुरू कर दिए। लड़की ने ऐसे मैसेज न भेजने की गुजारिश की तो उसे गंदी-गंदी गालियों के साथ घर से उठा ले जाने की धमकी दी गई। कॉलर ने यह भी कहा कि अगर उसने किसी को बताया तो पीड़िता को जान से मार दिया जाएगा।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि कॉलर ने उनकी बेटी को डराते हुए कहा, “तेरी DP पर लगा फोटो मेरे पास है। अब मैं AI टूल प्रयोग कर के तेरी गंदी फोटो वीडियो बना कर तुझे कहीं मुँह दिखाने लायक नहीं छोड़ूँगा।” यह पढ़ कर पीड़िता ने कॉलर के नंबर को ब्लॉक कर दिया। लड़की ने सारी बात अपने घर पर बताई। शिकायतकर्ता ने अपनी तरफ से पता किया तो वह नंबर बरेली के ही भोजीपुरा थानाक्षेत्र में रहने वाले फ़ैज़ाल का निकला। लड़की के पिता शिकायत के कर फ़ैज़ाल के घर गए। फ़ैज़ाल के घर पर उसके अब्बा आमीन मिले।

आमीन ने अपने बेटे की गलती कबूल करने के बजाय लड़की के पिता को ही गंदी-गंदी गालियाँ देनी शुरू कर दीं। इन गालियों के साथ शिकायतकर्ता को जान से मार डालने की धमकी भी दी गई। अपनी शिकायत में पीड़ित ने फ़ैज़ाल और उसके अब्बा आमीन पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने फ़ैज़ाल और उसके अब्बा को FIR में नामजद किया है। इन दोनों पर IPC की धारा 504, 506, और 354 (ग) के अलावा आईटी एक्ट के सेक्शन 67 के तहत कार्रवाई की गई है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है। पुलिस मामले की जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई कर रही है।

हॉन्गकॉन्ग-सिंगापुर ने लगाया बैन, लेकिन भारत की जाँच में Everest-MDH को क्लीन चिट: बोला FSSAI – भारतीय मसालों में कैंसर वाले तत्व नहीं

भारत के जिन मसालों में कैंसर बढ़ाने वाले रसायनों के मिलने का हल्ला मचाया गया, वो उनमें मौजूद ही नहीं था। भारतीय बाजार में मौजूद तमाम ब्रांड्स की जाँच भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने की, लेकिन किसी भी सैंपल में कैंसर बढ़ाने वाला पदार्थ (ETO) मौजूद नहीं पाया गया। इस बात की जानकारी खुद भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण ने दी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय बाजार में उपलब्ध मसालों में एथिलीन ऑक्साइड (ईटीओ) नहीं मिला है। एफएसएसएआई ने मंगलवार (21 मई 2024) को बताया कि उसने 300 से अधिक सैंपल पूरे देश से कलेक्ट किए, लेकिन उनमें से किसी में भी एथिलीन ऑक्साइड नहीं मिला है। बता दें कि लोकप्रिय मसाला ब्रांड एमडीएच और एवरेस्ट पर सिंगापुर और हाँगकाँग में सवाल उठने और उनमें कैंसर के लिए जिम्मेदार ईटीओ की मौजूदगी के बाद एफएसएसएआई ने मसालों के सैंपल लिए थे, जिनके परिणाम अब सामने आए हैं।

एफएसएसएआई ने विवाद उठने के बाद जाँच के लिए एवरेस्ट मसाले के दो मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से 9 सैंपल, जबकि एमडीएच के 11 मैन्युफैक्चरिंग यूनिट से 25 सैंपल लिए गए थे। दोनों कंपनियों की यूनिट से लिए गए कुल 34 सैंपलों में से 28 की रिपोर्ट आ गई है, और सभी पूरी तरह से साफ निकले हैं। यही नहीं, दूसरे ब्रांड के मसालों के 300 सैंपल में से भी किसी में ईटीओ नहीं पाया गया है।

इस मामले में विवाद के बाद 22 अप्रैल को देश के अलग-अलग हिस्सों में ये सैंपल लिए गए थे। फूड कमिश्नरों को सैंपल लेने के निर्देश दिए गए थे, जिनकी गहन जाँच की गई। जाँच में सभी भारतीय मसाले ईटीओ फ्री पाए गए हैं।

गौरतलब है कि हाँगकाँग और सिंगापुर ने लोकप्रिय मसाला ब्राँड एमडीएच और एवरेस्ट के उत्पादों में कैंसरजनक रसायन ईटीओ की मौजूदगी पाए जाने के बाद अप्रैल में उनपर बैन लगा दिया था। ऐसा ही बैन नेपाल ने भी लगाया था और भारतीय मसालों को ही खरीदने से मना कर दिया था। लेकिन अब सभी मसाले बेदाग निकले हैं। बता दें कि भारत ने साल 2023-24 में पूरी दुनिया के कुल मसालों का 12 प्रतिशत अकेले ही एक्सपोर्ट किया था, जिसकी कुल कीमत 4.25 अरब डॉलर थी। हालाँकि इस विवाद के बाद मसालों की बिक्री में मामूली कमी आ सकती है। ऐसे में अब जब जाँच के नतीजे आ गए हैं, तो एक बार फिर से भारतीय मसालों की वैश्विक बाजार में धूम होने वाली है।

अंबेडकर के खिलाफ नेहरू और कॉन्ग्रेस ने रची थी गहरी साजिश: पहले संविधान सभा में जाने से रोकने की कोशिश की, फिर संसद में पहुँचने नहीं दिया

भारतीय संविधान, यानी की दुनिया का सबसे बड़ा संविधान। जब-जब संविधान की बात की जाती है, तब-तब चर्चा होती है बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की। उन्हें संविधान निर्माता भी कहा जाता है, लेकिन महान दलित नेता भी रहे हैं। आज जन-जन के हृदय में बसने वाले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को भी उस दौरान राजनीति का शिकार होना पड़ा था।

डॉक्टर अंबेडकर के खिलाफ कुछ इस तरह की राजनीतिक साजिश की गई कि वह संविधान सभा के सदस्य ही ना बन पाएँ। जिस व्यक्ति को आज समाज भारत के संविधान निर्माता के तौर पर देखता है, उस व्यक्ति को पहले संविधान सभा उसके बाद लोकसभा में पहुँचने नहीं देने की साजिश रची गई। इसका आरोप तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार और उसके मुखिया पंडित जवाहरलाल नेहरू के ऊपर लगाता रहा है।

इसकी शुरुआत होती है देश के बन रहे संविधान सभा में डॉक्टर अंबेडकर को नहीं पहुँचने देने से। कॉन्ग्रेस ने उस समय कुछ ऐसा किया कि डॉक्टर अंबेडकर अपने गृह प्रदेश महाराष्ट्र से संविधान सभा में ना पहुँच सके। हालाँकि, डॉक्टर अंबेडकर कहाँ हार मानने वाले थे। वो अपने सहयोगी और बंगाल के दलित नेता योगेन्द्र नाथ मंडल के सहयोग से संविधान सभा के सदस्य बन गए।

जी हाँ, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर बंगाल के जिस क्षेत्र से संविधान सभा के सदस्य बने थे, उस क्षेत्र को हिंदू बहुल होने के बावजूद पंडित जवाहरलाल नेहरू के नेतृत्व वाली सरकार के द्वारा एक समझौते में पाकिस्तान में शामिल करा दिया गया था। अब अंबेडकर की सदस्यता पर खतरा मंडराने लगा। किसी तरह से डॉक्टर अंबेडकर ने अपनी संविधान की सदस्यता बचाई और महाराष्ट्र से सदन में पहुँचे।

बाबा साहेब संविधान सभा में प्रारूप समिति के अध्यक्ष बने। जगजीवन राम की पत्नी इंद्राणी जगजीवन राम ने अपने संस्मरण में लिखा है कि भीमराव अंबेडकर ने उनके पति यानी जगजीवन राम को स्वतंत्र भारत में पंडित नेहरू के मंत्रिमंडल में शामिल करने के लिए महात्मा गाँधी से पूछने के लिए राजी किया था। आगे चलकर बाबू जगजीवन राम देश में उप प्रधानमंत्री बने।

साल 1951 के अंत में पंडित जवाहरलाल नेहरू की सरकार में कानून मंत्री रहने के दौरान डॉक्टर अंबेडकर ने मुस्लिमों की अपेक्षा हिंदुओं को नजरअंदाज करने, हिंदू कोड बिल लाने और उनकी कश्मीर नीति पर प्रश्नवाचक चिन्ह लगाते हुए इस्तीफा दे दिया। बाबा साहेब आर्टिकल 370 के प्रबल विरोधी और समान नागरिक संहिता (UCC) के समर्थक थे ।

इसके बाद कॉन्ग्रेस पार्टी ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को अपने निशाने पर ले लिया। साल 1952 में देश में पहला आम चुनाव हुआ। उस समय डॉक्टर अंबेडकर ने शेड्यूल्‍ड कास्‍ट फेडरेशन पार्टी से उत्तरी मुंबई से चुनाव लड़ना चाहा। तब कॉन्ग्रेस ने उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश रचते हुए उनके पीए रह चुके एनएस कजरोलकर को उम्मीदवार बनाया।

काजरोलकर दूध का कारोबार करने वाले एक नौसिखिए नेता थे। उस समय के मशहूर मराठी पत्रकार पीके अत्रे ने एक नारा गढ़ा था जो उस वक्त काफी मशहूर हुआ था…”कुथे तो घटनाकर अंबेडकर, आनी कुथे हा लोनिविक्या काजरोलकर”। इसका मतलब था: कहाँ संविधान के महान निर्माता अंबेडकर और कहाँ नौसिखिया दूध बेचने वाला काजरोलकर।

दो बैलों के जोड़ी चुनाव चिह्न वाली कॉन्ग्रेस के मुखिया पंडित जवाहरलाल नेहरू चुनाव के दौरान दो बार अंबेडकर के खिलाफ प्रचार करने गए। इसका परिणाम ये हुआ कि जिस व्यक्ति को इस देश में संविधान निर्माता की उपमा दी जाती है, वह संविधान के तहत होने वाले देश के पहले आम चुनाव में वह व्यक्ति न सिर्फ चुनाव हार गया, बल्कि चौथे नंबर पर रहा।

यह भी देश के लोकतंत्र का एक दुखद सत्य है। ऐसा लगता है कि बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर की विद्वता और अस्मिता को उस समय के कॉन्ग्रेसी नेता नीचा दिखाना चाहते थे। कॉन्ग्रेस नहीं चाहती थी कि बाबा साहेब दलितों के नेता के रूप में स्थापित हों। इसीलिए उन्होंने सरकारी मशीनरी का दुरुपयोग करके बाबा साहेब अंबेडकर को हरा दिया।

इसके बावजूद डॉक्टर अंबेडकर ने हार नहीं मानी। वहीं, कॉन्ग्रेस उनके पीछे लगातार पड़ी रही। 2 साल के बाद साल 1954 में महाराष्ट्र के ही भंडारा में जब उपचुनाव हुए तो डॉक्टर अंबेडकर ने एक बार फिर से चुनाव में नामांकन किया, ताकि वे लोकसभा पहुँच सकें। दूसरी तरफ़ पंडित नेहरू और उनकी कॉन्ग्रेस ने डॉक्टर अंबेडकर को हराने में अपनी पूरी ऊर्जा लगा दी।

इसका ये परिणाम हुआ कि डॉक्टर भीमराव आंबेडकर तीसरे नंबर पर रहे। इस तरह उनके राजनीतिक जीवन को बर्बाद करने के लिए कॉन्ग्रेस ने कोई कसर नहीं छोड़ी। दुखद ये है कि डॉक्टर अंबेडकर के यह जीवन का अंतिम चुनाव था। साल 1957 में होने वाले देश के दूसरे लोकसभा चुनाव से पहले यानी साल 1956 में डॉक्टर अंबेडकर इस दुनिया को अलविदा कह दिए।

आज देश के लगभग समस्त राजनीतिक दल डॉक्टर अंबेडकर की महिमा का गान कर रहे हैं। ऐसे समय में यह भी जानना अति आवश्यक है कि पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गाँधी ने अपने कार्यकाल के दौरान ही खुद को भारत रत्न से नवाज दिया। वहीं, डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न तब मिला, जब इस देश में भाजपा के समर्थन से जनता दल की सरकार बनी।

इस सरकार के दौरान ही उनकी मृत्यु के लगभग 44 वर्षों के बाद संविधान के निर्माता और दलितों के मसीहा कहे जाने वाले डॉक्टर भीमराव अंबेडकर को संसद के सेंट्रल हॉल में स्थान मिला। वहाँ उनकी एक फोटो स्थापित हो पाई। इसके बाद जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनी तो उनके जीवन काल के पाँच महत्वपूर्ण स्थलों को पंचमहा तीर्थ के रूप में विकसित किया गया।

ये पाँच जगह हैं- जन्म भूमि, शिक्षा भूमि, दीक्षा भूमि, महापरिनिर्वाण भूमि (जहाँ उनका निधन हुआ) और चैत्य भूमि (श्मशान स्थल)। अब देश में होने वाले चुनाव के दौरान यह भी देखना दिलचस्प होगा कि देश के संविधान के निर्माता और दलितों के मसीहा डॉक्टर भीमराव अंबेडकर के नाम पर कौन कितने वोट पाता है और कौन उनके आदर्शों पर चल पाता है।

सॉफ्टवेयर इंजीनियर सोहैल धराया, खाते में मिली मोटी रकम, NIA ने 2 डॉक्टरों के ठिकानों पर भी मारी रेड: रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट मामले में कार्रवाई

रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट में एनआईए (National Investigation Agency-NIA) लगातार छापेमारी कर रही है। एनआईए ने दक्षिण भारत में 11 ठिकानों पर मंगलवार (21 मई 2024) को छापेमारी की। बता दें कि बेंगलुरु के रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट में 1 मार्च 2024 को ब्लास्ट हुआ था, जिसमें 10 लोग घायल हो गए थे। इस धमाके से जुड़े मुख्य आतंकियों को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया गया था। एनआईए इस केस में सभी तारों को जोड़ रही है और आतंकियों के सहायकों को पकड़ने के लिए छापेमारी कर रही है।

एनआईए के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि ये छापेमारी कई राज्यों में की गई। एनआईए ने बेंगलुरु के कुमारस्वारी लेआउट और बन्शांकरी में भी छापेमारी की। अधिकारी के मुताबिक, रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट के मुख्य आतंकियों मुसाविर हुसैन शाजिब और अब्दुल मतीन ताहा से पूछताछ के बाद मिली जानकारी के आधार पर छापेमारी की गई, जिन्होंने इस धमाके की प्लानिंग कर धमाके को अंजाम दिया था।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनआईए के अधिकारियों ने आँध्र प्रदेश अनंतपुर जिले में स्थिति रायदुर्गम कस्बे में एक रिटायर्ड हेडमास्टर अब्दुल के घर पर भी छापेमारी की है। इस छापेमारी में हेडमास्टर अब्दुल और उसके बेटे सोहैल से उनके बैंक खातों को लेकर पूछताछ की गई। दोनों के खातों में काफी पैसे मिले हैं। सोहैल बेंगलुरु में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता है। इस पूछताछ के बाद एनआईए ने सोहैल को हिरासत में ले लिया है और उससे रायदुर्गा पुलिस थाने में पूछताछ की जा रही है।

साउथ फर्स्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, सोहैल काफी समय से एनआईए की रडार में था और वो अब्दुल मतीन से जुड़ा हुआ था। अब्दुल मतीन ही रामेश्वरम कैफे ब्लास्ट केस में मास्टरमाइंड है। बता दें कि एनआईए ने 1 मार्च 2024 को हुए धमाके की जाँच 3 मार्च 2024 को अपने हाथ में ली ली थी। इसके बाद एनआईए ने 12 अप्रैल 2024 को दोनों मुख्य आतंकियों अतीन अहमद ताहा और बम रखने वाले मुसाविर हुसैन शाजिब को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया था, जहाँ दोनों फर्जी नाम-पहचान के साथ छिपकर रह रहे थे। शारिब बेंगलुरु में 19 नवंबर 2022 को हुए ब्लास्ट में भी शामिल रहा था।

कोयंबटूर में 2 डॉक्टरों के ठिकानों पर दबिश

एनआईए ने जिन 11 ठिकानों पर छापेमारी की, उसमें तमिलनाडु के कोयंबटूर के 2 डॉक्टर भी हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनआईए ने कोयंबटूर के पेरिया सुब्बन्ना गॉउंडर स्ट्रीट और साईबाबा कॉलोनी के नारायण गुरु रोड पर छापेमारी की। सूत्रों के मुताबिक, दोनों डॉक्टर कर्नाटक के रहने वाले हैं और कोयंबटूर के साइबाबा कॉलोनी में स्थित एक प्राइवेट हॉस्पिटल में 2 साल से ट्रेनिंग कर रहे हैं। एनआईए ने मंगलवार की सुबह 8 बजे से ही छापेमारी शुरू कर दी थी।

फल व्यापारी भी रडार में

इस मामले में हैदराबाद बेस्ड पत्रकार सुधाकर उडुमुला ने बताया है कि बेंगलुरु की एनआईए टीम ने विकाराबाद जिले में एक व्यापारी को पकड़ा है। उसकी उम्र 50 साल के आसपास है। व्यापारी मूलत: पुणे से है, लेकिन वो महाराष्ट्र के नांदेड़ में रहता है। वो वहाँ फलों का व्यापार करता है। सूत्रों का कहना है कि वो व्यापारी कई मामलों में शामिल रहा है और कर्नाटक के एक केस में सजा भी काट चुका है।

इससे पहले, इस मामले में एनआईए ‘कर्नल’ कोडनेम वाले आतंकी की तलाश में लगी हुई है, जो ताहा और शाजिब के संपर्क में था। दोनों आईएसआईएस के अल-हिंद मॉड्यूल के संपर्क में 2019-20 में आए थे, तभी से कर्नल उनके संपर्क में था। एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक, ताहा और शाजिब आईएसआईएस की 20 सदस्यीय अल-हिंद शाखा से जुड़े हैं।

जिस सहेली के निकाह में गई हिन्दू लड़की, उसका अब्बा ही लेकर भागा: 2 बीवियों को तलाक दे चुका है मोहम्मद समीर, 25 साल पहले किया था तीसरा निकाह

उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले से ग्रूमिंग जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ बीए तृतीय वर्ष में पढ़ने वाली 22 वर्षीया दलित लड़की अपनी मुस्लिम सहेली की निकाह में गई थी। वहाँ पर सहेली के 45 वर्षीय अब्बा मोहम्मद समीर ने ही प्यार के जाल में फाँस लिया। इतना ही नहीं, आरोपित मोहम्मद समीर दलित छात्रा को 11 मई 2024 को बहला-फुसला कर अपने साथ लेकर फरार हो गया।

पुलिस ने मंगलवार (21 मई 2024) को मोहम्मद समीर को गिरफ्तार कर दलित छात्रा को बरामद कर लिया। मोहम्मद समीर पर आरोप है कि वो पहले भी दो मुस्लिम लड़कियों से निकाह करके उन्हें तलाक दे चुका है। इसके बाद उसने तीसरा निकाह नीरा यादव (बदला नाम) नाम की हिन्दू महिला से की है। मोहम्मद समीर ने नीरा यादव से यह निकाह 25 साल पहले की है। इस निकाह से उसे चार बच्चे हैं।

यह मामला गाजीपुर के थाना क्षेत्र दुल्लहपुर का है। यहाँ 17 मई को पीड़िता के पिता ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने बताया कि उनकी बेटी बीए तृतीय वर्ष की छात्रा है। इसी साल फरवरी माह में उनकी बेटी अपनी सहेली साहिबा के निकाह में गाजीपुर के जलालाबाद इलाके में गई थी। इस निकाह में पीड़िता की जान-पहचान सहेली के अब्बा मोहम्मद समीर से हुई।

दोनों ने अपने-अपने मोबाइल नंबर आपस में शेयर किए। इसके बाद से मोहम्मद समीर दलित छात्रा को अपने झाँसे में लेने के लिए तरह-तरह का चाल चलने लगा। वह पीड़िता को अलग-अलग प्रकार के लालच देने लगा। शिकायत में कहा गया है कि 11 मई को समीर पीड़िता को बहला-फुसला कर अपने साथ भगा ले गया। लड़की के परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन कुछ अता-पता नहीं चला।

इस घटना के लगभग एक हफ्ते बाद 17 मई 2024 को पीड़िता गाजीपुर में मिली। पीड़िता को लेकर उसका पिता थाने पहुँचा और मोहम्मद समीर के खिलाफ शिकायत दी। शिकायत में कहा गया है कि समीर 4 बच्चों का अब्बा है। वह पहले भी 2 मुस्लिम लड़कियों से निकाह करके उन्हें तलाक दे चुका है। साल 1999 में समीर ने नीरा यादव नाम की एक हिन्दू महिला से निकाह किया था।

ऑपइंडिया को मिली जानकारी के मुताबिक, फरवरी 2024 में बेटी के निकाह में मिलने के बाद मोहम्मद समीर पीड़िता को अक्सर कॉल करता था। लगभग एक माह बाद जब पीड़िता घर में अकेली तो वह आ धमका। यहाँ उसने पीड़िता से रेप किया। बाद में समीर पीड़िता से निकाह का वादा किया और 11 मई को उसे लेकर गुजरात के वापी चला गया। लड़की वापी से जैसे-तैसे 17 मई को गाजीपुर आई।

जब लड़की ने परिजनों से आपबीती बताई तो मोहम्मद समीर के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज की गई। पुलिस ने समीर के खिलाफ FIR दर्ज करके उसकी तलाश शुरू कर दी। मोहम्मद समीर पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 366 और SC/ST एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। पीड़िता के बयानों के को आधार बनाकर केस में रेप की धारा 376 बढ़ाई गई है।

मंगलवार (21 मई 2024) को पुलिस को मोहम्मद समीर के उसके गाजीपुर स्थित घर में मौजूद होने की सूचना मिली। इसके बाद पुलिस ने वहाँ दबिश देकर मोहम्मद समीर को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने समीर को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। मामले में अन्य जरूरी कानूनी कार्रवाई की जा रही है। इस मामले में ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

दुनिया का 5वाँ सबसे बड़ा बाजार बना BSE: 5 ट्रिलियन डॉलर के पार हुआ वैल्यू, ‘बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज’ ने अकेले यूरोप के सभी देशों को पछाड़ा

भारत के शेयर मार्केट के सबसे बड़े खिलाड़ी बीएसई ने इतिहास रचते हुए 5 ट्रिलियन डॉलर का मार्केट कैप हासिल कर लिया है। महज 6 माह के भीतर बीएसई ने मार्केट कैप के मामले में 4 ट्रिलियन डॉलर से 5 ट्रिलियन डॉलर का आँकड़ा छुआ, जोकि एक रिकॉर्ड है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज यानी बीएसई ने मंगलवार (21 मई 2024) को इतिहास रच दिया है। बीएसई की मार्केट कैप पहली बार 5 ट्रिलियन डॉलर यानी 5 लाख करोड़ डॉलर को पार कर गई है। भारत के शेयर बाजार के इतिहास में यह पहला मौका है, जब बीएसई पर लिस्टेड सभी कंपनियों का कुल बाजार मूल्यांकन इस आँकड़े को पार कर गया है। भारत की इकॉनमी भी कुछ ही समय में 5 ट्रिलियन डॉलर को पार करने की स्थिति में पहुँच रही है, उससे पहले ये बड़ी खबर है।

बीएसई की वेबसाइट के मुताबिक, एक्सचेंज में लिस्टेड सभी कंपनियों का मार्केट कैप 21 मई को 5.01 लाख करोड़ डॉलर यानी 412 लाख करोड़ रुपये को पार कर गया। बीते करीब पाँच महीने में बीएसई के मार्केट वैल्यूएशन में करीब 633 अरब डॉलर की वृद्धि हुई है। इस साल की शुरुआत में यह 4.14 ट्रिलियन डॉलर था। हालाँकि, बीएसई सेंसेक्स अब भी अपने ऑल टाइम हाई से 1.66 फीसदी नीचे है, उम्मीद है जल्द ही ये रिकॉर्ड भी टूट जाएगा। वैसे, बीएसई ने नवंबर 2023 में पहली बार 4 ट्रिलियन के आँकड़े को छुआ था और अब महज 6 महीनों में यह 5 लाख करोड़ डॉलर को पार कर गया है।

सिर्फ 4 बाजार ही आगे, जल्द ही तीसरे नंबर पर पहुँचेंगे

भारत का बीएसई अब दुनिया में पाँचवें नंबर पर है। उससे आगे सिर्फ अमेरिका का शेयर मार्केट (55 ट्रिलियन डॉलर), चीन का शेयर मार्केट (9.4 ट्रिलियन डॉलर), जापान का शेयर मार्केट (6.4 ट्रिलियन डॉलर) और हांगकाँग का शेयर मार्केट (5.4 ट्रिलियन डॉलर) हैं। भारत जल्द ही हाँगकाँग और जापान को पीछे छोड़ते हुए तीसने नंबर पर पहुँच जाएगा। जल्द ही भारत की अर्थव्यवस्था भी 5 ट्रिलियन डॉलर को पार करने वाली है और भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

‘ध्वस्त कर दिया जाएगा आश्रम, सुरक्षा दीजिए’: ममता बनर्जी के बयान के बाद महंत ने हाईकोर्ट से लगाई गुहार, TMC के खिलाफ सड़क पर उतरेंगे साधु-संत

पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद के बेलडांगा स्थित ‘भारत सेवाश्रम संघ’ के प्रमुख कार्तिक महाराज उर्फ़ स्वामी प्रदीप्तानंद ने आश्रम पर हमले की आशंका जताई है। उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए सुरक्षा की माँग की है। उन्होंने बताया कि सोमवार (20 मई, 2024) को सूचना मिली कि ‘भारत सेवाश्रम संघ’ के बेलडांगा स्थित आश्रम को ध्वस्त कर दिया जाएगा। कार्तिक महाराज ने इसे लेकर राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों से भी बात की है और उन्हें मामले से अवगत कराया है।

अब तक ये साफ़ नहीं हुआ है कि कार्तिक महाराज की याचिका कलकत्ता उच्च न्यायालय में स्वीकार की गई है या नहीं। याद दिलाते चलें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ‘रामकृष्ण मिशन’ और ‘भारत सेवाश्रम संघ’ पर आरोप लगाते हुए कहा था कि इन दोनों संस्थाओं के कुछ साधु भाजपा के इशारे पर काम करते हुए राजनीति कर रहे हैं। इस टिप्पणी को लेकर कार्तिक महाराज CM को कानूनी नोटिस भी भेज चुके हैं। उन्होंने संन्यासियों को बदनाम करने का आरोप लगाते हुए माफ़ी की माँग की।

4 दिनों के भीतर लीगल नोटिस का जवाब न दिए जाने पर क़ानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई है। उधर भाजपा IT सेल के मुखिया और पश्चिम बंगाल के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने आरोप लगाया कि TMC सुप्रीमो के इस बयान के बाद ही जलपाईगुड़ी स्थित ‘रामकृष्ण मिशन’ के आश्रम पर हमला हुआ। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस हमले की निंदा कर चुके हैं। 24 मई को दोनों ही संस्थाओं के साधु-संन्यासी सड़क पर उतर कर विरोध प्रदर्शन करेंगे। 25 मई को छठे चरण का चुनाव है।

‘संत स्वाभिमान यात्रा’ के अंतर्गत कोलकाता के गिरीश एवेन्यू से विवेकानंद के जन्म स्थल तक जुलूस भी निकाला जाएगा। आचार्य प्रणवानंद महाराज द्वारा सन् 1917 में स्थापित BSS पिछले 107 वर्षों से जनसेवा में संलग्न है। अनुयायी उन्हें शिव का अवतार मानते हैं। वो बाबा गंभीरनाथ के शिष्य थे, स्वतंत्रता के आंदोलन में भी सक्रिय रहे। जन्म के बाद उनका नाम विनोद रखा गया था। वो बंगाल के बाजितपुर में जन्मे थे, जो अब बांग्लादेश का हिस्सा है। कोलकाता के रास बिहारी एवेन्यू में इसका मुख्यालय है और दुनिया भर में 46 केंद्र हैं। संस्था आपदा के दिनों में लोगों की मदद करती है।