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मेला देखने गई नाबालिग हिंदू, स्कूल की छत पर ले जाकर किया गैंगरेप: जफर, जिबरील, अहमद और अख्तर अंतिम साँस तक रहेंगे सलाखों के पीछे

बिहार के मधुबनी की जिला अदालत ने मंगलवार (21 मई 2024) को एक नाबालिग हिन्दू लड़की से गैंगरेप करने के 4 आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा पाए दोषियों के नाम मोहम्मद जफर अंसारी, मोहम्मद जिबरील, मोहम्मद अहमद और अख्तर अंसारी हैं। इन सभी पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना मधुबनी के थाना क्षेत्र हरलाखी की है। 5 सितंबर 2022 को 16 वर्षीया पीड़िता अपने भाई के साथ कसेरा गाँव में मेला देखने गई थी। कुछ देर बाद पीड़िता शौच के लिए मेला स्थल के पास बने एक स्कूल में गई। आरोप है कि इसी दौरान वहाँ मोहम्मद जफर अंसारी, मोहम्मद जिबरील, मोहम्मद अहमद और अख्तर अंसारी पहुँच गए।

ये सभी आरोपित लड़की को पकड़कर स्कूल की छत पर ले गए। यहाँ इन सभी ने बारी-बारी पीड़िता से गैंगरेप किया। गैंगरेप के दौरान पीड़िता ने शोर मचाया तो आसपास के लोग जमा हुए। खुद को घिरता देखकर चारों आरोपित भागने लगे। लोगों ने दौड़ा कर जफर अंसारी को दबोच लिया था। जफर को पुलिस के हवाले कर दिया गया।

पूछताछ में उसने बताया कि इस करतूत में मोहम्मद जिबरील, मोहम्मद अहमद और अख्तर अंसारी भी शामिल हैं। पुलिस ने दबिश देकर तीनों आरोपितों को बारी-बारी से पकड़ लिया था। अगले दिन 6 सितंबर 2022 को पीड़िता की माँ ने थाने में तहरीर दी तो पुलिस ने FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी। यह FIR IPC की धारा 376 (D) के साथ पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुआ था।

मामले की सुनवाई मधुबनी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंबर 7 देवेश कुमार की अदालत में हुई। बचाव पक्ष व अभियोजन पक्ष ने अपने-अपने तर्क दिए। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों को पर्याप्त माना और मोहम्मद जफर अंसारी, मोहम्मद जिबरील, मोहम्मद अहमद और अख्तर अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

पीड़िता की बड़ी बहन से भी हुआ था गैंगरेप

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता के वकील ने बताया कि अदालत ने अपनी टिप्पणी में इन सभी मुल्जिमों को अंतिम साँस तक जेल में रखने का हुक्म सुनाया है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल चले केस के ट्रायल में मुल्जिमों के कई वकील बदले। हालाँकि इसका उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ।

कोर्ट ने इस मामले में बिहार सरकार को पाँच लाख रुपए मुआवजा देने को कहा है। अधिवक्ता अजय झा यश ने आगे बताया कि पीड़िता की बड़ी बहन के साथ भी गैंगरेप की घटना हुई थी। इस केस में भी ADJ 7 की कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। बड़ी बहन के मामले में सजा पर 1 जून 2024 को बहस होनी है।

‘उसके बारे में गंदी बातें करो, उसकी पर्सनल फोटो लीक करो’: स्वाति मालीवाल ने खोला AAP का गेम, विभव कुमार को मुंबई से लेकर आई दिल्ली पुलिस

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से बदसलूकी मामले में जहाँ दिल्ली पुलिस विभव कुमार को मुंबई से वापस दिल्ली ले आई है, तो वहीं उनकी एक हरकत की वजह से आम आदमी पार्टी को रोज शर्मंसार होना पड़ रहा है। स्वाति मालीवाल ने हालिया पोस्ट में दावा किया है कि पार्टी के अन्य बड़े नेताओं पर प्रेशर बनाया जा रहा है कि वो लोग स्वाति के खिलाफ बोलें, उनकी निजी तस्वीरें लीक करें और उनके फर्जी स्टिंग ऑपरेशन करके लाएँ।

स्वाति ट्वीट में लिखती हैं– “कल पार्टी के एक बड़े नेता का फोन आया। उसने बताया कैसे सब पर बहुत ज़्यादा दबाव है, स्वाति के ख़िलाफ़ गंदी बातें बोलनी हैं, उसकी पर्सनल फ़ोटोज़ लीक करके उसे तोड़ना है। ये बोला जा रहा है कि जो उसको सपोर्ट करेगा उसको पार्टी से निकाल देंगे। किसी को PC करने की और किसी को ट्वीट्स करने की ड्यूटी मिली है। किसी की ड्यूटी है अमेरीका में बैठे वॉलंटियर्स को फ़ोन करके मेरे ख़िलाफ़ कुछ निकलवाने को कहा गया है। आरोपित के कुछ करीबी बीट रिपोर्टर्स की ड्यूटी है कुछ फ़र्ज़ी स्टिंग ऑपरेशन बनाकर लाओ।”

अपने ट्वीट में स्वाति ने यह बात पार्टी के बड़े नेता के हवाले से बताई है। उन्होंने अपने ट्वीट में आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, “तुम हजारों की फौज को खड़ी कर दो। अकेले सामना करूँगी क्यों सच मेरे साथ है।”

दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति ने पोस्ट में यह भी कहा है कि उन्हें ऐसे नेताओं से कोई नाराजगी नहीं लेकिन आरोपित बहुत शक्तिशाली आदमी है। बड़े से बड़ा नेता भी उससे डरता है। किसी की हिम्मत नहीं उसके ख़िलाफ़ स्टैंड ले पाए। ऐसे में स्वाति के मुताबिक वो किसी से उम्मीद भी नहीं करती कि कोई उनके लिए खड़ा होगा। लेकिन उन्हें दुख इस बात का लगा कि दिल्ली की महिला मंत्री कैसे हंसते मुस्कुराते पार्टी की एक पुरानी महिला साथी का चरित्र हरण किया। स्वाति कहती हैं, “मैंने अपनी स्वाभिमान की लड़ाई शुरू की है, इंसाफ़ मिलने तक लड़ाई लड़ती रहूँगी। इस लड़ाई में मैं पूरी तरह अकेली हूँ पर हार नहीं मानूँगी!”

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री निवास पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से कथित मारपीट के आरोप में 23 मई तक पुलिस हिरासत में लिए गए अरविंद केजरीवाल के पूर्व पीए को मुंबई से वापस दिल्ली ले आया गया। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि दिल्ली पुलिस बुधवार (22 मई 2024) को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए रहे विभव कुमार को मुंबई से वापस ले आई है। उन्हें वहाँ एक दिन पहले उनके आईफोन के डेटा की खोज के लिए ले जाया गया था।

बताया जा रहा है कि विभव ने गिरफ्तारी से पहले अपने फोन को फॉर्मेट कर दिया था और डेटा किसी और को ट्रांसफर कर दिया था। पुलिस फिलहाल सारे एंगल पर पड़ताल कर रही है। विभव के फोन, लैपटॉप और केजरीवाल के घर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है। कल यानी 23 मई को उसकी हिरासत खत्म हो रही है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने 18 मई को विभव की 7 दिन की कस्टडी माँगी थी, लेकिन उन्हें 5 दिन की ही रिमांड मिली। उनके ऊपर दिल्ली की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ बदसलूकी करने का आरोप है।

भारत की ज्ञानकीर्ति का मुकुटमणि है कश्मीर का शंकराचार्य मंदिर: ईसाई-इस्लाम के आगामी प्रभाव से परिचित थे आचार्य शंकर, जानिए कैसे एक सूत्र में भारत को बाँधा

ऋषियों एवं मनीषियों द्वारा अनुभूत आध्यात्मिक ज्ञान ही विविधता पूर्ण विश्व में एकात्म्य स्थापित करने में प्रासंगिक हो सकता है। यद्यपि प्रौद्योगिकी के वर्तमान समय में विश्व तीव्रता से निरन्तर आगे बढ़ रहा है, तथापि इस मार्ग में अनेक विकट चुनौतियाँ भी जन्म ले रही है। जो मानवीय जीवन को व्यवहारिक रूप से साक्षात् प्रभावित कर रही है। पृथिवी के निवासियों में मानव के प्रति ही स्वार्थ प्रवृत्ति के कारण, परस्पर मैत्रीभाव की कमी तथा करणीय कर्तव्यों का अभाव से युद्ध एवं अघोषित युद्ध जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।

ऐसे परिवेश में वैश्विक परिदृश्य में भारतीय जीवन दर्शन की सार्वभौमिकता सर्वत्र प्रासंगिक है। समस्त अभ्युदयों का प्रयोजक है समाज एवं राष्ट्र में परस्पर संगठन, संवर्द्धन, सद्भाव तथा अपने ही न्यायोचित भाग में एक मात्र संतोष रखना, दूसरों के वस्तु  को लेने की इच्छा तक भी नही करना इत्यादि। यही मानवता का आदर्श भी है, जो मानव का धर्म भी है। अत एव धर्म जिसको धारण किया जा सके; जिसको धारण करने से ही पंच तत्त्वों से मिलकर बना यह भौतिक शरीर मनुष्य कहलाता है।

सम्पूर्ण उपनिषद् एवं भारतीय ज्ञान परम्परा का यही प्रतिपाद्य है। जहाँ भेद से अभेद, व्यष्टि से समष्टि, अनेकत्व में एकत्व, विषमता में समता एवं विविधता का एक एकत्व एवं एकत्व की ही वैविध्य में अभिव्यक्ति इत्यादि विविध विषय हैं। औपनिषदिक ऋषि कहते हैं –

ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा, मा गृधः कस्य स्विद्धनम्॥

(ईशावास्योपनिषद्)

औपनिषदिक् ऋषियों द्वारा प्रदत्त त्यागभाव का यह उपदेश आज समस्त राष्ट्रों के लिए अनुकरणीय है। परस्पर मैत्रीभाव से युक्त होकर एक साथ रहने, बोलने, खाने-पीने तथा एक दूसरे की भावनाओं का आदर करने का उपदेश वेद में मिलते हैं। जो समस्त राष्ट्रों, समुदायों, एवं मनुष्यों से समदृष्टि एवं समभाव से परस्पर आगे बढ़ने का आह्वाहन करते हैं। वैदिक ऋषि कहते हैं कि – 

संगच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते।

(ऋग्वेद १०/१९१/२)

वैदिक ऋषियों की वेदोक्त समदृष्टि केवल उपदेश मात्र नही; अपितु यह उनका अनुभव जन्य साक्षात्कृत् ज्ञान है। जो सभी काल, स्थान, परिस्थिति में अनुकरणीय एवं अकाट्य हैं। वैदिक ऋषियों के इसी ज्ञान को मानव कल्याण के लिए आद्य शंकराचार्य ने सर्वत्र प्रचारित किया जो आज तक हो रहा है। यह समस्त वैदिक ज्ञान वैश्विक जड़-चेतन, स्त्री-पुरुष तथा सभी वर्गों में अभेद दृष्टि को प्रस्तुत करता है। इसी को वेदान्त दर्शन ने अद्वैत की संज्ञा दी। यह अद्वैत ही समस्त विश्व के लिए आज भी पथ प्रदर्शक है। 

इसी एकत्व एवं विश्वबन्धुत्व के अप्रतिम उदाहरण आद्य शंकराचार्य का व्यक्तित्व एवं कश्मीर भूमि हैं। जिस कालखण्ड में वैदिक ज्ञान की विविध व्याख्याओं द्वारा वैदिक आध्यात्मिक उपासना पद्धति में कर्मकाण्ड अधिक महत्त्वपूर्ण होने लगा तथा वैदिक ज्ञान के दुरूह होने की स्थिति में शंकराचार्य ने ब्रह्मसूत्र एवं उपनिषदों पर भाष्य शैली में लिखित व्याख्यान द्वारा पुनः वैदिक ज्ञान को प्रतिष्ठापित करने का अद्भुत प्रयास किया; जिसमें वे सफल भी हुए।

उस कालखण्ड में विश्व में अनेक नवीन विचारों का प्रचार-प्रसार हो रहा था; जिसमें इस्लाममत एवं ईसाईमत प्रमुख हैं। शायद उसके आगामी प्रभाव से शंकराचार्य परिचित थे। अतएव शंकराचार्य ने केवल वैदिक ज्ञान का दार्शनिक दृष्टि व्याख्यान प्रारम्भ किया अपितु इस एकात्म्यपूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बाधने हेतु भारतभ्रमण करते हुए सम्पूर्ण भारत में चार मठों की स्थापना की। 

अद्वैतवाद के प्रवल प्रवर्तक आचार्य द्वारा न केवल ज्ञान के स्तर पर एकत्व में बांधना एक मात्र उद्देश्य नही था, अपितु सम्पूर्ण भारतवर्ष को संस्कृति, सभ्यता एवं संस्कारों के माध्यम से एक सूत्र में बांधना भी परम उद्देश्य था। अतएव भारतवर्ष के चार दिशाओं में वैदिक संस्कृति को सम्पूर्ण स्थलों पर फैलाने के लिए एवं मठों के रक्षण हेतु दशनामी संन्यासियों की प्रकल्पना की। दशनामी संन्यासियों का उद्देश्य धर्मप्रचार के अतिरिक्त धर्मरक्षा करना भी था।

इस द्वितीय उद्देश्य की सिद्धि के लिए उन्होंने अपना संगठन विभिन्न अखाड़ों के रूप में भी किया है। इन विविध अखाड़ों के साधुओं ने भारत एवं भारतीय संस्कृति को विदेशी आक्रमणकारियों से बचाने हेतु अनेक बार बलिदान दिए हैं; जो इतिहास प्रसिद्ध ही है।

शंकराचार्य के समय से वैदिक ज्ञान की नवीन दृष्टि से व्याख्याएँ होने लगी। विविध सम्प्रदायों में बाह्य कर्मकाण्ड के प्रबल होने से बढ़ते मतभेद से भी आचार्य शंकराचार्य पूर्ण परिचित ही थे; अत एव उन विभेदों को भी समाप्त करने का कार्य आचार्य शंकराचार्य ने किया। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु आचार्य शंकराचार्य भारत के मुकुटमणि, ज्ञान के सर्वोत्तम तीर्थ एवं शैव परम्परा के प्रमुख क्षेत्र कश्मीर भी गए। उस काल में न केवल कश्मीर की ज्ञान कीर्ति प्रचलित थी; अपितु विविध परम्पराओं एवं सम्प्रदायों में अद्भुत समन्वय के लिए उसकी कीर्ति थी।

वैष्णव, शाक्त, शैव, सौरपरम्परा, बौद्ध, जैन एवं तन्त्र की विविध परम्पराएँ कश्मीर क्षेत्र से सम्पूर्ण भारत में प्रचारित हुई। इन सभी सम्प्रदायों में कोई भी वैमनस्य नही था। अत एव कश्मीर के शारदा पीठ में शास्त्रार्थ हेतु आचार्य शंकर स्वयं गए। कश्मीर की धरा पर पल्लवित पुष्पित शंकराचार्य मन्दिर भारत की ज्ञानकीर्ति को आज भी शिरोधार्य किए हुए है।

अपनी सम्पूर्ण भारत की यात्रा से शंकराचार्य ने आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व को भी स्पष्ट किया; जिसके द्वारा विविध मत-मतान्तरों में समन्वय स्थापित हो सकता है। वे शंकराचार्य ही थे; जिन्होंने न केवल अपने कालखण्ड में वैदिक ज्ञान को संरक्षित किया अपितु उनके द्वारा प्रतिष्ठापित सिद्धान्त आज भी उसी रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अपने इसी आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा भारत आज भी अपनी कीर्ति सम्पूर्ण विश्व में फैला रहा है।

जिसमें अहं ब्रह्मास्मि (बृहदारण्यकोपनिषद १/४/१०), तत्त्वमसि (छान्दोग्योपनिषद ६/८/७), अयमात्मा ब्रह्म (माण्डूक्योपनिषद् १/२) एवं प्रज्ञानं ब्रह्म (ऐतरेयोपनिषद् १/२) की ही भावना निहित है। अत एव आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में आचार्य शंकर अत्यन्त प्रासंगिक हैं।

फर्जी वोटिंग करते पकड़े गए मोहम्मद सनाउल्लाह और 3 खातूनें, भीड़ ने थाने पर हमला कर सबको छुड़ाया: बिहार के जाले की घटना, 20 मई को हुआ था मतदान

बिहार की मधुबनी लोकसभा सीट पर 20 मई 2024 को वोट डाले डाले गए थे। जाले में 4 लोगों को फर्जी वोट डालते पकड़ा गया। उसी रात करीब 150 लोगों की भीड़ ने थाने पर हमला कर चारों को छुड़ा लिया। मामले की जाँच के लिए पुलिस ने एसआईटी का गठन किया है।

जाले बिहार के दरभंगा जिले का हिस्सा है, लेकिन ये मधुबनी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मिली जानकारी के अनुसार, जाले थाना क्षेत्र में आने वाले मतदान केंद्र- हक्कानिया मदरसा देवरा बंधौली पर फर्जी वोटिंग करते 4 लोगों को पकड़ा गया था। इन चारों को लोगों को जाले थाना परिसर में रखा गया था, कि शाम के समय 130-140 लोगों की भीड़ ने थाने पर हमला बोल दिया और फर्जी वोटिंग करते पकड़े गए चारों लोगों को छुड़ा लिया।

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, 20 मई 2024 को मतदान के दौरान गस्ती के क्रम में सेक्टर पदाधिकारी निर्भय कुमार ने 4 लोगों को पकड़ा था और पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया था। इस बारे में जाले थाना कांड संख्या 103/24 दर्ज किया। इस मामले में 1-सनाउल्ला. पिता का नाम-परवेज आलम, 2-सादिया शेख पिता-मो हसन, 3-सालेहा फातिमा पिता मो हसनैन और 4-जीनत परवीन पिता मो इजराह, सभी निवासी देवरा बंधौली, थाना-जाले, जिला दरभंगा को फर्जी वोटिंग करते पकड़ा गया। सेक्टर पदाधिकारी निर्भय कुमार ने चारों को पुलिस को सौंप दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्जी वोटिंग में पकड़े गए लोगों को छुड़ाने के लिए 130-140 लोगों ने थाने पर हमला कर दिया और पुलिस पदाधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए चारों को पुलिस की अभिरक्षा से छुड़ा लिया। अब पुलिस ने एफआईआर संख्या 104/24 दर्ज की है, जिसमें 24 लोगों के खिलाफ नामजद और सौ से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि इसी भीड़ ने थाने पर हमला बोला।

सूत्रों के मुताबिक, चारों की गिरफ्तारी के तुरंत बाद ही स्थानीय लोगों ने थाने पर बवाल काटा था, लेकिन तब पुलिस ने किसी तरह से मामले को संभाल लिया था। इसके बाद दूसरी बार रात के समय 130-140 लोगों ने दोबारा हमला बोला। पुलिस कुछ समझ पाती, इससे पहले ही भीड़ चारों आरोपितों को थाने से निकाल कर भगा ले गई। इस घटना के वायरल फुटेज में भी घटना साफ दिखाई दे रही है, जिसमें भारी संख्या में भीड़ नजर आ रही है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील और एक्स यूजर शशांक शेखर झा ने इस घटना का वीडियो शेयर किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘शॉकिंग, दरभंगा बिहार में मोहम्मद सनाउल्लाह और 3 मुस्लिम महिलाओं को हक्कानिया मदरसा पोलिंग स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। क्यों? क्योंकि वो बुर्का पहनकर फर्जी वोटिंग कर रहे थे। इसके बाद 100-150 मुस्लिमों की भीड़ ने जाले पुलिस स्टेशन पर रात में हमला किया और सभी आरोपितों को थाने से छुड़ा ले गए।’

इस बारे में दरभंगा पुलिस ने भी जानकारी साझा की है और थाने पर हमले की बात को स्वीकारी है। दरभंगा पुलिस के मुताबिक, दरभंगा पुलिस ने जाले थाना अध्यक्ष के बयान के आधार पर 130-140 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। दरभंगा पुलिस ने धारा 147/148/149/323/324/225/353/354 (बी)/504 भादवि में मामला दर्ज किया है। इस केस की जाँच के लिए दरभंगा के एसपी के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया है, जिनके द्वारा छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है।

दरभंगा के एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि इस केस में 24 लोगों को नामजद किया गया है और अज्ञात 130 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस घटना से जुड़े वीडियो व अन्य सबूतों की छानबीन की जा रही है। इस केस की जाँच अब एसआईटी कर रही है, जिसका नेतृत्व दरभंगा के एसपी कर रहे हैं।

क्यों चीन की कंपनियाँ भी कर रहीं ‘मेक इन इंडिया’ का जाप, क्यों भारतीय बाजार के लिए ‘गद्दार’ कहलाना भी है कबूल?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में चीन की बड़ी कम्पनियाँ भी सहयोग कर रही हैं। ऐसा चीन की कम्पनियों को मजबूरी में करना पड़ रहा है। चीन कम्पनियों को ऐसा करने के कारण अपने देश के भीतर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें गद्दार कहा जा रहा है।

चीन की कम्पनियाँ पहले भारतीय बाजार से केवल लाभ कमाने के चक्कर में रहती थीं लेकिन अब उन्हें भारत के बाजार में रहने के लिए देश के भीतर ही निर्माण करना पड़ रहा है। उन्हें देश के भीतर ही अपनी सप्लाई चेन स्थापित करना पड़ रहा है, भारत में इससे लाखों नौकरियाँ पैदा हो रही हैं। चीन की कम्पनियों पर मोदी सरकार ने शिंकजा कसा है, इसके कारण जो भी कम्पनियाँ भारत में व्यापार करना चाहती हैं, उन्हें भारत के नियम कानून मानने पर मजबूर होना पड़ रहा है और साथ ही वह भारत के मिशन में भी सहयोग कर रही हैं।

मेक इन इंडिया में चीनी कम्पनियों की हिस्सेदारी

चीन की कम्पनियाँ भारत के मेक इन इंडिया में सहयोग कर रही हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मोबाइल फोन निर्माण क्षेत्र है। 2014 से पहले चीन की कम्पनियाँ भारत में सीधे बने बनाए फोन लाकर बेच रही थी और पैसा कमा कर चीन भेज रहीं थी। मोदी सरकार ने यह स्थिति बदल दी है। मोदी सरकार में भारत में कारोबार करने वाली सभी चीनी मोबाइल कम्पनियों को भारत में ही मोबाइल का निर्माण चालू करना पड़ा है। भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फ़ोन उत्पादक बन गया है।

इन चीनी कम्पनियों ने भारत में ही अपनी सप्लाई लाइन स्थापित की है। इन चीनी कम्पनियों के उत्पाद देश में भी बिक रहे हैं और साथ ही वह विदेशों को भी जा रहे हैं। ऐसे में चीन को जाने वाला पैसा कम हो गया है। भारत में इससे बड़ी संख्या में रोजगार पैदा हुए हैं। चीनी कम्पनियाँ मात्र भारत में फ़ोन ही नहीं बना रही हैं, बल्कि वह मोबाइल फोन के लिए कल पुर्जे बनाने वाली कम्पनियों को भारत आने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही हैं।

भारत में मोबाइल फोन निर्माण का क्षेत्र 2014-15 में ₹18,900 करोड़ का था, यह 2023-24 में बढ़ कर ₹4.1 लाख करोड़ का हो गया। भारतीय बाजार में चीनी मोबाइल कम्पनियों की हिस्सेदारी लगभग 50% है। चीनी कम्पनियों के अलावा सैमसंग और एप्पल का भी भारत के बाजार में हिस्सा बढ़ रहा है।

क्यों अपने देश में विरोध के बावजूद ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ा रहीं चीनी कम्पनियाँ

चीनी कम्पनियाँ अपने देश में विरोध के बावजूद भारत में मेक इन इंडिया को बढ़ा रही हैं। दरअसल इसके पीछे कई कारण हैं। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण भारत का चीन के बराबर का अकेला बड़ा बाजार होना है। चीनी कम्पनियों को चीन में प्रतिस्पर्धा के कारण वहाँ जगह नहीं मिल पा रही जबकि भारत एक उभरता हुआ बाजार है जहाँ खपत काफी ज्यादा है, ऐसे में उन्हें भारत जैसा और कोई विकल्प नहीं मिलता। भारत में लगातार इन्टरनेट का प्रसार हो रहा है, ऐसे में चीन की कम्पनियाँ यहाँ लगातार अपने लिए सम्भावनाएं तलाश रही हैं।

इसके अलावा भारत का बाजार चीनी कम्पनियों के अनुरूप है। उनके बनाए उत्पाद भारतीय ग्राहकों के अनुरूप हैं। उनकी दाल यूरोप या फिर लैटिन अमेरिका में नहीं गलती। इन देशों में फैक्ट्री लगाना काफी मुश्किल है। यहाँ लागत भी अधिक है। भारत का ग्राहक भी लगभग चीन के ग्राहक के ही समान आर्थिक पृष्ठभूमि वाला है। ऐसे में भारत चीनी कम्पनियों के लिए मज़बूरी हो जाता है। भारत ने बीते कुछ समय में चीनी कम्पनियों पर यह भी दबाव डाला है कि वह अपनी प्रक्रिया में अधिक से अधिक भारतीयों को लगाएँ।

मोदी सरकार ने कसा शिंकजा तो रोने लगा चीन

भारत ने इन चीनी कम्पनियों पर शिकंजा भी कसा है। एक रिपोर्ट बताती है कि चीनी मोबाइल कम्पनियों को भारत में नियामकों की सख्ती के कारण लगभग 1 बिलियन डॉलर (लगभग ₹8,000 करोड़) का नुकसान हुआ है। इसके अलावा भारत के चीनी एप्स पर प्रतिबन्ध लगाने से चीन को 10 बिलियन डॉलर (₹83,000 करोड़) का नुकसान हुआ है। चीन की कम्पनियों को लगातार कहा जा रहा है कि वह भारत ऊँचे पदों पर भारतीयों को बिठाएँ। अधिकाधिक ठेके भारतीय कम्पनियों को देने का दबाव भी चीनी कम्पनियों पर डाला जा रहा है।

चीन में गद्दार का मिल रहा तमगा

जहाँ एक और भारत में चीनी कम्पनियाँ लगातार अपनी निर्माण गतिविधि बढ़ा रही हैं, वहीं चीन में उन्हें इस काम के कारण विरोध का सामना करना पड़ रहा है। चीनी कम्पनियों को कहा जा रहा है कि वह गद्दारी कर रही हैं। वह अपने फायदे के लिए चीन के हितों को दरकिनार कर रही हैं। इन पर लगाम लगाने के लिए भी चीन में आवाज उठ रही है। इस मामले में कार्रवाई ना करने को लेकर चीन की सरकार की आलोचना भी हो रही है। यह भी माँग हो रही है कि चीन में होने वाले निर्माण को भारत में शिफ्ट किया जाए।

कानपुर में 100 की स्पीड से दौड़ रही कार ने 5 महिलाओं को रौंदा, 4 की मौत: मोहम्मद अहमद के नाम पर है गाड़ी, डेढ़ साल में कट चुका है 16 चालान

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में मंगलवार (21 मई 2024) को मोहम्मद अहमद की बेकाबू कार ने 5 महिलाओं को रौंद दिया। इसमें अब तक 4 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि 1 महिला गंभीर रूप से घायल है। मृतकाओं के नाम पूनम पांडेय, दिव्या पांडेय, सरिता द्विवेदी और ज्योति हैं। अपर्णा का इलाज चल रहा है। घटना के समय मारुति ईको कार की स्पीड 100 बताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना कानपुर जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र की है। मंगलवार की शाम यहाँ 50 वर्षीया पूनम पांडेय अपनी बेटी दिव्या और सरिता द्विवेदी, ज्योति और अपर्णा के साथ हाथीपुर का फ्लाईओवर पार कर रही थीं। सभी महिलाएँ एक ही परिवार की हैं। इसी दौरान फतेहपुर से एक मारुति ईको कार तेजी से हाइवे पर कानपुर की तरफ निकली।

गाड़ी मोहम्मद अहमद की बताई जा रही है। घटना के वक्त कार की स्पीड लगभग 100 के आसपास बताई जा रही है। इस कार ने सड़क पार कर रही पाँचों महिलाओं को रौंद दिया। इसके बाद वाहन डिवाइडर से जा टकराया। इसके बाद कार चला रहा ड्राइवर गाड़ी छोड़ कर भाग गया। हादसे के बाद अफरातफरी मच गई। मौके पर पुलिस और एम्बुलेंस पहुँची। मोहम्मद अहमद कानपुर का ही रहने वाला है।

पूनम, सरिता और ज्योति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दिव्या ने अस्पताल ले जाते हुए दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल अपर्णा का अस्पताल में इलाज चल रहा है। अपर्णा को बेहतर इलाज के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के मुताबिक सभी महिलाएँ एक दूसरे से मिलने आईं थीं। पुलिस ने केस दर्ज करके फरार आरोपित की धर-पकड़ शुरू कर दी है।

2 साल में 16 चालान, एक भी नहीं भरा

जिस ईको कार से पाँचों महिलाओं को कुचला गया है, उसके बारे में ऑपइंडिया ने पड़ताल की। गाड़ी का मालिक मोहम्मद अहमद है। मोहम्मद अहमद कानपुर के राजीव नगर का रहने वाला है। यह गाड़ी साल 2022 में कमर्शियल कामों के लिए खरीदी गई थी। लगभग डेढ़ साल के अंदर ही इस वाहन के 16 अलग-अलग मौकों पर चालान हुए हैं। इसमें अधिकतर चालान अवैध तौर पर पार्किंग के हैं।

सरिता द्विवेदी की शव यात्रा

चालान की कुल रकम 20 हजार से भी अधिक है, जिसे अब तक नहीं भरा गया है। घटना में मृतकाओं का पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया है। अंतिम संस्कार के दौरान स्थानीय लोगों मौजूद रहे। ऑपइंडिया ने गाड़ी मालिक मोहम्मद अहमद का पक्ष जानने के लिए उनके नंबर पर सम्पर्क किया तो फोन बंद आया।

इलाज कराने भारत आए बांग्लादेशी MP अनवारुल अजीम की टुकड़ों में मिली लाश, 8 दिन से थे लापता: कोलकाता में हुई हत्या, 3 गिरफ्तार

भारत में 8 दिन पहले लापता हुए बांग्लादेश के सांसद अनवारुल अजीम अनार का पश्चिम बंगाल में शव मिला है। 12 मई को वो भारत अपना इलाज कराने आए थे। उसके कुछ दिन बाद उनकी बेटी ने शिकायत की कि उनके पिता भारत में लापता हो गए हैं। उनसे कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा है। अब रिपोर्ट बताती है कि बांग्लादेसी सांद उनका शव बंगाल में कई टुकड़ों में कटा मिला है।

कोलकाता पुलिस के हवाले से रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि बांग्लादेशी सांसद की हत्या सुनियोजित थी। हत्या के बाद उनके शव को टुकड़ों में काट दिया गया था। इनमें से कुछ टुकड़े कोलकाता के न्यू टाउन स्थित संजीवा गार्डन के एक अपार्टमेंट में बरामद हुए। यह फ्लैट आबकारी अधिकारी है।

अनवारुल अजीम की हत्या के बारे में बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज्जमान खान ने भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “भारत के एक डीआइजी के हवाले से, हमारी पुलिस को पता चला है कि अजीम का शव कोलकाता में बरामद किया गया है और इस मामले में तीन गिरफ्तार हुए हैं। हमारे महानिरीक्षक मामले को देख रहे हैं। सब पुष्टि हो जाने को बाद मीडिया को जानकारी दी जाएगी।”

वहीं सांसद के निजी सचिव अब्दुर रऊफ ने इस संबंध में बयान दिया है कि उन्हें सांसद की मौत के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन सांसद का परिवार ढाका में भारत जाने के लिए वीजा मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

बता दें कि अनावरुल अजीम की लाश उनके लापता होने के 8 दिन बाद मिली है। इससे पहले आवामी लीग के दिग्गज नेता के लापता होने की खबर मीडिया में आई थी। बहुत खोजने पर भी उनकी लोकेशन का पता नहीं चल पा रहा था। रिपोर्ट्स में बताया गया था है कि उनकी आखिरी लोकेशन बिहार के मुजफ्फरपुर में मिली थी। उनकी बेटी ने इस संबंध में ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच से सहायता करने की अपील की थी।

बेटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंल कर बताया था कि उनके अब्बा, जो कि तीन बार के सांसद और कालीगंज उपजिला में आवामी लीग के अध्यक्ष रहे, उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा। वह एक कान से नहीं सुन पाते और उसी के इलाज के लिए भारत गए थे। उसके बाद उन्होंने किसी का भी फोन उठाना बंद कर दिया।

दुर्घटना का शिकार होते शिक्षक, क्लास में बेहोश होती छात्राएँ, बेंच-बोरिंग-बैग घोटाला, न गर्मी छुट्टी-न होली की… क्या शिक्षा व्यवस्था का और दम घोंट रहे KK पाठक?

बिहार के मुजफ्फरपुर में एक सरकारी शिक्षक को गिरफ्तार कर लिया गया, क्योंकि उसने छात्रों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट न देने के लिए कहा था। इसे चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन बताया गया। जिला शिक्षा अधिकारी की शिकायत पर FIR दर्ज की गई। मामला कुरहनी ब्लॉक के अमरख स्थित सरकारी माध्यमिक विद्यालय का है और उक्त शिक्षक का नाम हरेंद्र रजक है। उक्त शिक्षक ने मोदी को वोट न देने की अपील करते हुए कहा कि राशन योजना के तहत जो खाद्यान्न मिल रहा है वो उपयोग के लायक नहीं है।

वैसे ये सही बात है कि बिहार में लंबे समय तक स्कूल अव्यवस्था से बहाल रहे, न इंफ़्रास्ट्रक्चर की सुविधा थी, न बच्चे आते थे और न शिक्षक पढ़ाते थे। लेकिन, व्यवस्था में सुधार के नाम पर सिर्फ एक वर्ग पर नियम-कानून लादना और बाकी चीजों को ऐसे ही छोड़ देना कहाँ तक उचित है? बिहार के कुछ गाँवों में जान शिक्षक अच्छे थे, वहाँ 80-90 के दशक में भी अच्छी पढ़ाई होती थी। लेकिन, धीरे-धीरे हालात बिगड़ते गए और जैसे जैसे अपराध और जंगलराज का बोलबाला बढ़ा, पलायन बढ़ा, स्कूलों की स्थिति भी बदतर होती चली गई।

मुजफ्फरपुर में शिक्षक को किया गिरफ्तार, DM-DEO-थानेदार सब लगे

प्रशासन की तरफ से बताया गया है कि सरकारी कर्मचारियों का चुनाव के दौरान किसी पार्टी के पक्ष या विपक्ष में बोलना आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन है, इसीलिए ये गिरफ़्तारी हुई है। कक्षा के लड़के-लड़कियों ने भी इसकी पुष्टि की कि उक्त शिक्षक द्वारा मोदी को वोट न देने के लिए कहा गया। अभिभावकों को भी इससे नाराज़गी थी। मनियारी थानेदार उमाकांत सिंह ने गिरफ़्तारी की पुष्टि की। शिक्षक ने राशन को सड़ा-गला बताते हुए कहा था कि कमल छाप का बटन न दबाएँ।

ये मामला थोड़ा संदिग्ध भी लगता है। कक्षा में शिक्षक पढ़ाने के दौरान कई तरह की बातें करते हैं, वो सिर्फ अनुवादक नहीं होते। किसी विषय पर चर्चा होती है तो वो अपने व्यक्तिगत अनुभवों का जिक्र कर सकते हैं, किताबी ज्ञान के अलावा वास्तविक ज्ञान भी दे सकते हैं। हरेंद्र रजक उन शिक्षकों में हैं, जो सुबह 6 बजे स्कूल की टाइमिंग किए जाने का विरोध कर रहे हैं। क्या इसी कारण BEO ने तुरंत शिकायत दर्ज करा दी, थानेदार ने FIR लिख कर गिरफ्तार कर लिया और DM तक को बयान देना पड़ा?

क्या एक शिक्षक द्वारा क्लास में राजनीतिक टिप्पणी कर देना इतना बड़ा मामला है कि जिसमें DEO, DM और थाना प्रभारी को लगा दिया जाए? वो भी उस बिहार में, जहाँ अपराध अब भी थम नहीं रहे हैं। ये वही मुजफ्फरपुर है जहाँ पिछले साल प्रॉपर्टी डीलर आशुतोष शाही की 2 बॉडीगार्ड्स समेत और इस साल उनके भाई की हत्या कर दी गई। फरवरी 2024 में दुकान की उद्घाटन के दौरान ही पिता-पुत्र दोनों को मार डाला गया। ये सब छोड़ कर पुलिस-प्रशासन एक शिक्षक पर कार्रवाई करने को लगा है।

बिहार में शिक्षकों को किया जा रहा प्रताड़ित, KK पाठक से नाराज़गी

बिहार में आजकल एक नाम बड़ा सुर्ख़ियों में है – KK पाठक। केक पाठक के फरमानों को ‘तुगलकी’ बताया जाता है। कभी वो होली जैसे त्योहार पर शिक्षकों को विद्यालय आने का आदेश दे देते हैं, तो कभी वो बिहार के महापर्व छठ पर दी गई छुट्टी रद्द कर देते हैं। कई बार बिहार के शिक्षा विभाग को विरोध के कारण अपने फैसले वापस लेने होते हैं, उसकी फजीहत होती है। KK पाठक बिहार के शिक्षा विभाग में एडिशनल चीफ सेक्रेटरी हैं, नामी IAS अधिकारी रहे हैं।

अब ताज़ा मामला देखिए। उन्होंने फरमान जारी किया है कि गर्मियों में शिक्षकों को सुबह 6 बजे विद्यालय पहुँचना होगा। स्कूल अब सुबह 6 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक खुल रहे हैं। यानी, शिक्षकों को सुबह 4-5 बजे के बीच जागना होता है। फिर उन्हें इस गर्मी में चिलचिलाती धूप में दोपहर को वापस लौटना होता है। शिक्षकों की जब नींद ही पूरी नहीं होगी तो वो क्या पढ़ाएगा? ऊपर से गर्मी के कारण उनका स्वास्थ्य बिगड़ेगा तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

सबसे अधिक समस्या महिला शिक्षकों को हो रही है। कई शिक्षिकाएँ अपने घर में भोजन पका कर स्कूल के लिए निकलती हैं। अगर खाना बनाने में 1 घंटे का समय भी मान लें तो महिलाओं को 3-3:30 के करीब उठना होगा। वो उठ कर घर की साफ़-सफाई करेंगी, खाना बनाएँगी, नहा-धो कर तैयार होंगी और फिर स्कूल के लिए निकलेंगी। KK पाठक को समझना चाहिए कि शिक्षक भी एक आम मनुष्य ही हैं, नौकरी के अलावा भी उनका व्यक्तिगत जीवन है, परिवार है, नौकरी का मतलब ये नहीं है कि इनकी कीमत पर वो नौकरी करें।

एक शिक्षक की तस्वीर वायरल हुई है। इस सामूहिक तस्वीर में दिख रहा है कि उन्होंने अपने दोनों पाँव में अलग-अलग चप्पल पहने हुए हैं। स्पष्ट है, सुबह उठ कर स्कूल पहुँचने की हड़बड़ी में ये गलती हुई होगी। नियम बना दिया गया है कि सुबह उठ कर सवा 6 में सभी शिक्षक अपनी ग्रुप फोटो और रजिस्टर में उपस्थिति के रिकॉर्ड भेजें। तस्वीर में देखा जा सकता है कि उक्त शिक्षक के एक पाँव में जहाँ खाकी रंग की चप्पल है, वहीं दूसरे पाँव में शायद उन्होंने नीले रंग की कोई लेडीज चप्पल पहन ली है।

ऐसा नहीं है कि जो भाजपा समर्थक हैं उन्हें KK पाठक से नाराज़गी नहीं है क्योंकि बिहार सरकार में BJP भी शामिल हैं। उदाहरण के लिए स्कूलों की नई टाइमिंग को लेकर भाजपा के MLC जीवन कुमार को ही सुन लीजिए, जो कहते हैं कि शिक्षक बुद्धिजीवी वर्ग है ऐसे में इसके साथ मजदूरों वाला व्यवहार मानसिक प्रताड़ना है। उन्होंने पूछा कि तड़के अँधेरे में महिलाएँ निकलेंगी और कोई अनहोनी हुई तो KK पाठक जिम्मेदारी लेंगे? लोकसभा चुनाव 2024 के बीच उन्होंने KK पाठक को चेताया कि वो सरकार को बदनाम करने का प्रयास न करें।

भाजपा के विधान पार्षद जीवन कुमार ने कहा कि KK पाठक ऐसे-ऐसे फरमान जारी कर रहे हैं क्योंकि उनका परिवार नहीं है, उनके बाल-बच्चे नहीं हैं और ऐसे में वो परिवार चलाने वालों की समस्या को नहीं समझ पा रहे हैं। जीवन कुमार का कहना है कि KK पाठक जनप्रतिनिधियों का इम्तिहान ले रहे हैं। उनकी बातों से लगता है कि भाजपा भी फ़िलहाल चुनाव के कारण चुप है, चुनाव बाद कुछ कदम उठाए जाएँगे। KK पाठक को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का पसंदीदा अधिकारी माना जाता है।

KK पाठक भले IAS अधिकारी हैं, लेकिन शायद उन्हें बिहार के ग्रामीण भूगोल का नहीं पता। उन्होंने फरमान जारी कर दिया कि बच्चे अपने पंचायत के हाईस्कूल में ही पढ़ेंगे। जबकि बिहार में ये संभव है कि घर के पास जो स्कूल है वो दूसरे पंचायत में आता हो। यानी, बच्चे कई किलोमीटर दूर जाएँ पढ़ने लेकिन पास के स्कूल में नहीं पढ़ सकते। इस कारण 9वीं में छात्राएँ एडमिशन लेने से बच रही हैं। इस कदम से शिक्षक नहीं, बल्कि अभिभावक भी नाराज़ हुए।

बिहार: ये कैसा ‘सुधार’ जहाँ घोटाले ही घोटाले

सुधार का तो स्वागत होना चाहिए। लेकिन, बिहार की शिक्षा व्यवस्था में ये कैसा सुधार हो रहा है जहाँ घोटाले ही घोटाले हो रहे हैं? उदाहरण के लिए, बिहार में बेंच-डेस्क खरीद के लिए 900 करोड़ रुपए का बजट लाया गया, प्राइवेट कंपनियों को इसका टेंडर दिया गया। लेकिन, हो क्या रहा है? बेंच-डेस्क ऐसे हैं कि कुछ ही दिन छात्र उस पर बैठ रहे हैं और वो टूट जा रहा है। बैग वितरण, किताब वितरण और किट वितरण तक में घोटालों की खबर है।

शिक्षकों ने हमें बताया कि 2500 रुपए में एक अच्छा बेंच-डेस्क खरीदा जा सकता है, लेकिन कई जगह इसके लिए दोगुनी राशि तक चुकाई जा रही है। ये हवा-हवाई बातें नहीं हैं, जमुई के एक स्कूल में 2100 रुपए के बेंच-डेस्क के लिए 2900 रुपए खर्च किए गए। ये पैसा किन लोगों के पॉकेट में जा रहा है? कई स्कूलों के भवन तक नहीं हैं, वहाँ बेंच-डेस्क भेजे जा रहे हैं लेकिन बाहर रखे-रखे खराब हो रहे हैं। बच्चों के बैठते ही बेंच टूट रहे हैं। KK पाठक को हर एक सप्लाई की जाँच करा लेनी चाहिए, इसका पता चल जाएगा।

यहाँ तक कि राजधानी पटना में भी स्थिति ठीक नहीं है। चिरैयाटाँड राजकीय कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय में घटिया बेंच-डेस्क की सप्लाई की शिकायत सामने आई तो इसकी जाँच की गई, BEO की जाँच में ये आरोप सही निकला। तत्पश्चात सप्लाई करने वाली उस एजेंसी को ब्लैक लिस्ट में डाला गया। लेकिन, इससे क्या हो गया? जो घोटाला होना था वो कर लिया गया। अब क्या इसके लिए भी शिक्षकों का ही वेतन काटा जाएगा? वहाँ 50 में सब के सब बेंच-डेस्क टूट गए। अब एक बेंच-डेस्क पर 3 की जगह 2 बच्चों को ही बैठने के लिए कहा जा रहा है।

घटिया लकड़ी से बचे बेंच-डेस्क सप्लाई किए जा रहे हैं। एजेंसी ने ढाई लाख रुपए के बिल पर उक्त स्कूल के प्रधानाध्यापक से हस्ताक्षर भी करा लिया था। अकेले पटना में 68,000 बेंच-डेस्क की सप्लाई हुई, सोचिए घोटाला कितने बड़े स्तर का है। स्कूलों में इसी तरह समरसेबल बोरिंग और हैंडवॉश स्टेशन लगाने का भी आदेश है, इसमें भी लाखों का घोटाला हो रहा है। यहाँ हम सुपौल का उदाहरण देकर बात शुरू करते हैं। वहाँ यहाँ न निविदा निकाली गई, न कोटेशन जारी किया गया, सीधा ठेकेदारों को काम दे दिया गया।

इसके लिए भी विभिन्न विभाग आपस में लड़ते हुए एक-दूसरे पर दोषारोपण कर रहे हैं। HM विभाग और शिक्षा विभाग एक-दूसरे को दोष दे रहा है। कई जगह काम अधूरा पड़ा हुआ है। प्रति स्कूल समरसेबल और पानी टंकी लगाने के लिए 1.91 लाख रुपए का खर्च तय किया गया था, लेकिन शिक्षकों में दबी जुबान से चर्चा है कि इसमें 5 लाख रुपए तक खर्च किए जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि अधिकारी अपने चाहते ठेकेदारों में सब बाँट दे रहे हैं। हेडमास्टरों को नियमों की जानकारी ही नहीं है, उन्हें फुसरत कहाँ हाजिरी बनाने से।

इसी तरह का कुछ पूर्वी चम्पारण में भी हुआ है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो शुद्ध पेयजल योजना को लूट योजना बना दिया गया है। घटिया सामग्रियाँ और पाइप लगाई जा रही हैं। मोतिहारी के शिक्षकों ने बताया कि या तो छुट्टी के दिन या फिर रात में जानबूझकर काम किया जाता है, ताकि उनका घोटाला पकड़ा न जाए। अरेराज में तो रातोंरात घटिया बोरिंग डाल दी गई। 1500 रुपए की जगह 500 रुपए की पाइप का इस्तेमाल किया जा रहा है। एक BEO ने बताया कि उन्हें इन कार्यों की जानकारी तक नहीं है।

यहाँ तक कि घटिया माल लगाने की अगर कोई शिकायत की जाती है तो परेशान किया जाता है। पूर्वी चम्पारण के भी कई प्रखंडों में बिना चयन के ही संवेदक द्वारा काम किया जा रहा है। आइए, लगे हाथ मुजफ्फरपुर का हाथ भी बता देते हैं। वहाँ भी प्रशासनिक स्तर पर अनियमितताओं की जाँच चल रही है। वहाँ भी यही आरोप – घटिया समाग्रियों का इस्तेमाल। पश्चिम चम्पारण के शनिचरी में तो ग्रामीणों ने ही आक्रोशित होकर काम रोक दिया।

किट घोटाले के बारे में अब क्या ही बात करें, इसे तो लालू यादव के चारा घोटाला से भी बड़ा बताया जा रहा है। सोचिए, बच्चों को दी जाने वाली साधारण बैग, पेंसिल, औजार बॉक्स समेत अन्य छोटी-मोटी चीजों में भी स्कैम हो रहा है। शिक्षकों ने हमें बताया कि 200-250 रुपए की किट के लिए 1000-1500 रुपए तक भुगतान किए जा रहे हैं। किट की गुणवत्ता ठीक नहीं है, वो घटिया हैं। कई स्कूलों में कम बैग मिले, सवाल पूछने पर मुँह बंद रखने की धमकी दी गई।

ये सब तो छोड़िए, KK पाठक के बारे में इसीलिए भी कहा जा सकता है कि अपने विभाग के अधिकारियों को दुरुस्त करने की बजाए वो शिक्षकों की प्रताड़ना वाले फरमान जारी कर रहे हैं, क्योंकि छुट्टियों से लेकर एरियर और प्रमोशन तक के लिए हर विभाग में रेट तय है। बक्सर के स्कूलों में 60% बच्चे किट से वंचित रह गए, ये पैसे कहाँ गए? इसी तरह पटना में भी 100 बच्चों के बीच मात्र 5 बैग मिले। क्या इसके लिए भी शिक्षकों की छुट्टी काटी जाएगी या उनका वेतन?

क्या कहते हैं आक्रोशित शिक्षक, बात-बात पर हो रही कार्रवाई

बिहार में शिक्षकों के इस आक्रोश का खामियाजा भाजपा को भी भुगतना पड़ सकता है, क्योंकि ऐसा माहौल बनेगा कि भाजपा सत्ता में रहने के बावजूद कोई कदम नहीं उठा रही है। इन फरमानों की जगह अगर क्लासरूम के इंफ़्रास्ट्रक्चर को सुधारने और बच्चों की उपस्थिति-दर को बढ़ाने पर जोर दिया गया होता तो कोई बात होती। सैकड़ों स्कूलों में बेंच-डेस्क तक गड़बड़ हैं। गर्मी से छात्राएँ बेहोश हुई हैं। शिक्षिकाओं को बासी रोटी और फ़ास्ट फूड खाकर पढ़ाना पड़ रहा है। हड़बड़ी में शिक्षकों की दुर्घटना भी हो सकती है।

हमने इस संबंध में बिहार के कुछ शिक्षकों से भी बातचीत की, जिन्होंने अपनी समस्याओं के बारे में बताया। इन शिक्षकों का कहना है कि सुबह 6 बजे आने की हड़बड़ी में दुर्घटनाएँ हो रही हैं। असल में उनका कहना है कि 5:45 तक उन्हें स्कूल में उपस्थित रहना पड़ता है, क्योंकि हाजिरी बनाने में जरा भी देर हुई तो उसके लिए भी उस दिन अनुपस्थित मान कर वेतन काट लिया जाता है। शिक्षकों का कहना है कि पदाधिकारियों को निर्देश है कि हर दिन शिक्षकों का वेतन काटा जाए।

उक्त शिक्षकों ने बताया कि उन्हें आदेश दिया गया है कि अगर कोई छात्र 3 दिन विद्यालय नहीं आते हैं तो उनका नाम काट कर हटा दिया जाए। शिक्षकों का कहना है कि ये 2009 के RTE (शिक्षा का अधिकार) कानून का उल्लंघन है, क्योंकि आप किसी भी बच्चे को शिक्षा से वंचित नहीं कर सकते, उसका नाम काट कर स्कूल से नहीं हटा सकते। परीक्षा में हिस्सा में न लेने पर उसे फेल किया जा सकता है, नाम नहीं काटा जा सकता। शिक्षकों का कहना है कि नए फरमानों से बच्चों को भी परेशानी है।

शिक्षकों ने हमसे बात करते हुए बताया कि शिक्षकों का वेतन न काटने पर जिला के पदाधिकारियों का वेतन कटता है, इसीलिए वो भी मज़बूरी में शिक्षकों का वेतन काटते हैं। शिक्षकों का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में वाहन जल्दी नहीं मिलते, ऐसे में हल्का-फुल्का लेट हो जाता है। उनका कहना है कि इसी कारण शिक्षक दुर्घटना का भी शिकार हो रहे हैं। मुंगेर के बरियारपुर प्रखंड में तो शिक्षकों को 5:45 तक पहुँचने का आदेश दिया गया और 6:15 तक उन्हें तस्वीरें भेजने को कहा गया।

शिक्षकों का कहना है कि एक-एक मिनट इस तरह से गिना जाना ठीक नहीं हैं। एक और बड़ा मुद्दा है गर्मियों की छुट्टी। स्कूलों में गर्मी की छुट्टियाँ सामान्यतः जून-जुलाई में दी जाती रही है, लेकिन इस बार KK पाठक के आदेशानुसार अप्रैल महीने में ही गर्मी की छुट्टियाँ दे दी गईं और उनमें भी शिक्षकों को उपस्थित करने को कहा गया, साथ ही पढ़ाई में कमजोर बच्चों को भी उपस्थित रहने के लिए कहा गया। शिक्षकों का पूछना है कि अगर मई में ठंडी की छुट्टी दे दी जाए तो कैसा लगेगा?

इसी तरह अगर स्कूल में 90% बच्चे उपस्थित नहीं रहते हैं तो इसके लिए भी शिक्षकों का वेतन काटे जाने का आरोप लगा है। शिक्षकों ने बताया कि छात्राओं में एनीमिया की कमी हो जाती है, दूर पैदल या साइकिल से कड़ी धूप में स्कूल से लौटने के चक्कर में उनकी स्थिति खराब हो जाती है। बच्चों को लू लग रहा है, वो बेहोश होते हैं। दोपहर के 1 बजे सबसे अधिक तापमान रहता है। जब अन्य कर्मचारियों को गर्मी छुट्टियाँ नहीं मिलतीं तो शिक्षकों को क्यों मिलनी चाहिए? इसके जवाब में शिक्षक अन्य सरकारी कर्मियों को मिलने वाले साल में 33 EL (अर्जित अवकाश) उन्हें एक भी नहीं मिलते।

शिक्षकों का कहना है कि वो मजदूर नहीं हैं, बच्चों को रोचक तरीके से पढ़ाने के लिए उन्हें घर पर पहले खुद पढ़ना पड़ता है और जो विषय पढ़ाया जाना है उसकी तैयारियाँ करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि घर पर भी उन्हें नौकरी के लिए समय देना होता है, ऐसे में स्कूल जाकर सीधे पढ़ा देने में दिक्कत आती है और इससे पढ़ाई में व्यवधान आता है। शिक्षक NEP 2020 (नई शिक्षा नीति) का भी हवाला देते हैं, जिसके तहत उन्हें सप्ताह में 29 घंटे पढ़ाने और माह में 2 शनिवार की छुट्टी का आदेश है, जबकि उनसे हफ्ते में 45 घंटे काम कराया जा रहा है।

देश में हर प्रकार के कर्मियों के अपने-अपने संघ हैं, लेकिन शिक्षकों पर बिहार में मामूली बातों पर कार्रवाई की जा रही है। उनका कहना है कि संघ बनाने, सोशल मीडिया पर कुछ शेयर करने या फिर अपनी आवाज़ उठाने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों तक से उन्हें वंचित रखा गया है। व्हाट्सएप्प पर कुछ शेयर करने पर भी कार्रवाई कर दी जाती है। अपने मुद्दों से संबंधित किसी फेसबुक पोस्ट को लाइक करने पर भी कार्रवाई हो जाती है। शिक्षक इसे मानसिक प्रताड़ना बताते हैं।

कई शिक्षकों का कहना है कि वो फ़ास्ट फ़ूड खा-खा कर पढ़ा रहे हैं, शहरों के स्कूलों में सुबह-सुबह 6 बजे बच्चे नहीं आ पाते और यहाँ तक कि गाँवों में भी बच्चे भोजन कर के स्कूल नहीं आ रहे हैं। इससे उनकी तबीयत बिगड़ रही है। गर्मी में भूखे पेट रहने के कारण चमकी बुखार जैसी बीमारियों का खतरा रहता है जिससे बिहार पहले भी जूझता रहा है। शिक्षकों का कहना है कि बच्चों को लंच में कुछ मिल भी गया तो शिक्षक दिन भर भूखे ही रह जाते हैं, जो बैचलर हैं उनके लिए और समस्या है क्योंकि उन्हें भोजन खुद पकाना पड़ता है।

दुर्घटना का शिकार हो रहे शिक्षक, स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

सुबह-सुबह 5 बजे निकलना और दोपहर के 2 बजे घर पहुँचना, इस चक्कर में शिक्षकों की दिनचर्या और उनका स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा है। आइए, हाल के दिनों में हुई घटनाओं को उदाहरण के साथ समझते हैं ताकि ये बातें हवा-हवाई न लगे। मधुबनी के लौकहा थाना क्षेत्र के डूबरबोना गाँव में 52 वर्षीय शिक्षक मोहम्मद मुजक्कर हुसैन सड़क हादसे में घायल हो गए। अररिया के त्रिवेणीगंज-पिपरा मार्ग में स्थित गंभीरपुर गाँव लहरनियाँ निवासी शिक्षिका बाइक से गिर कर घायल हो गई।

कुछ ऐसे वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें स्कूलों में बच्चे सुस्त दिख रहे हैं, उन्हें नींद आती है। अकेले भागलपुर प्रमंडल की बात करें तो 10 महीने में 1303 शिक्षकों का वेतन कटा है। गया के मोहनपुर ब्लॉक में एक शिक्षक सड़क दुर्घटना में घायल हुआ। सीवान के पूरबपट्टी बलेथा गाँव में दलित समाज की एक छात्रा बिना भोजन किए स्कूल आने की वजह से बेहोश हो गई। वहीं रघुनाथपुर के दयाछपरा में एक शिक्षिका बेहोश हो गई। इसकी भी जाँच होती है कि शिक्षक कक्षा की पूर्व तैयारी कर के आए हैं या नहीं। उन्हें चुनावी ड्यूटी में भी लगाया जाता है।

20 बच्चों पर एक साथ टूटा दुख का पहाड़, मदद को MLA ‘दीदी’ ने बढ़ाया हाथ: जानिए कवर्धा के एक गाँव में एक साथ क्यों जले 17 शव, 19 की हुई थी मृत्यु

छत्तीसगढ़ के कवर्धा के सड़क हादसे में मारे गए 19 लोगों के 20 बच्चों को भारतीय जनता पार्टी की पंडरिया से विधायक भावना बोहरा ने गोद लेने का ऐलान किया है। उन्होंने कहा है कि वो बच्चों की शिक्षा से लेकर, रोजगार और विवाह तक उनकी जिम्मेदारी निभाएँगी।

पंडरिया विधायक ने सेमरहा गाँव पहुँच मृतकों के परिजनों से मुलाकात की और 20 बच्चों को गोद लेने का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि वह बच्चों के परिजनों की कमी तो पूरी नहीं कर सकती हैं लेकिन उनके सुरक्षित भविष्य की कामना जरूर करती हैं।

भाजपा विधायक भावना बोहरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “इस क्षेत्र के लोग मुझे प्यार से ‘दीदी’ कहते हैं, मैं उनकी हर संभव मदद करूँगी…मैंने यह भी कहा है कि गाँव के 18 साल से कम उम्र के उन बच्चों की पढ़ाई और शादी का खर्च उठाऊँगी जिन्होंने अपने माता-पिता को खो दिया है, उनकी संख्या 20 है। हम उन्हें नौकरी दिलाने का प्रयास भी करेंगे।”

इस मामले पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री मोदी समेत कई दिग्गज नेताओं ने दुख जताया है। वहीं प्रदेश मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने घटना पर शोक जताते हुए कहा है कि हादसे रोकने के लिए आवश्यक उपाय किए जाएँगे ताकि दोबारा ऐसा कुछ न हो।

बता दें कि छत्तीसगढ़ के कवर्धा में पिकअप वैन खाई में गिरने के कारण हुए भीषण हादसे में 19 लोगों की मौत हो गई थी। दुर्घटना के वक्त पिकअप में 36 लोग सवार थे। ये लोग तेंदूपत्ता तोड़कर वापस लौट रहे थे, तभी कुकदूर थाना क्षेत्र के बाहपानी में ये हादसा हुआ। पिकअप वैन 30 फीट नीचे खाई में गिरी।

बताया जा रहा है कि इस घटना में 19 लोगों की मौत हो गई जिसमें 18 महिलाएँ और 1 आदमी शामिल है। इनमें से 17 का अंतिम संस्कार एक साथ आज हुआ। इन 17 में 11 लाशें एक ही परिवार की थी। वहीं अन्य 2 महिलाओं का अंतिम संस्कार उनके ससुराल में होगा।

प्रशासन ने मृतकों के परिवारों को 5-5 लाख रुपए और घायलों को 50 हजार रुपए मुआवजा देने की घोषणा की है। वहीं इस मामले में कार्रवाई करते हुए पुलिस ने पिकअप वैन के चालक दिनेश यादव और मालिक रामकृ्ष्ण साहू को गिरफ्तार कर लिया है। इन पर बिना ओवरलोड वाहन चलाने का आरोप लगाया गया है।

अब इनके विरुद्ध 304 के तहत कार्रवाई होगी। मृतकों के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि है कि लोग तेंदूपत्ता तोड़ने के लिए रोज जाते थे, कभी बाइक तो कभी फोर व्हीलर से। लेकिन जो गाड़ी चलाता था उसे बिलकुल अनुभव नहीं था।

‘सपा-कॉन्ग्रेस के शहजादे फ्लॉप फिल्म की तरह बार-बार रिलीज हो रहे हैं’: बस्ती में बोले पीएम मोदी- 4 जून को नींद खुलेगी तो EVM पर ठीकरा फोड़ेंगे

लोकसभा चुनाव 2024 का चुनाव सात चरणों में जारी है। पाँच चरण के मतदान हो चुके हैं। अगला मतदान 25 मई और आखिरी 1 जून 2024 को होना है। इन दो चरणों में बढ़त बनाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी ने प्रचार की कमान खुद संभाली है। उन्होंने बुधवार (22 मई 2024) को उत्तर प्रदेश के बस्ती में कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी वाले INDI गठबंधन को जमकर ललकारा।

पीएम मोदी ने कहा, “मैं सपा-कॉन्ग्रेस के दोनों शहजादों की फ्लॉप फिल्म की तरह बार-बार रिलीज से हैरान हूँ। अब ये दोनों शहजादे मिलकर ये अफवाह उड़ा रहे हैं। ये कहते हैं- यूपी की 79 सीट जीत जाएँगे। मैं पहले सुना करता था कि लोग दिन में सपने देखा करते हैं। मुझे अब पता चला कि दिन में सपना देखने का मतलब क्या होता है। 4 जून को यूपी की जनता इनको नींद से जगाने वाली है और तब ये ठीकरा EVM पर फोड़ेंगे।”

प्रधानमंत्री ने कहा था, “सपा ने यूपी को केवल बदनामी दी थी। हमारी बहन-बेटियों का घर से निकलना मुश्किल था। लोग जमीन खरीदने से डरते थे, जमीन खरीदी तो कोई न कोई कब्जा कर लेता था। गुंडे-माफिया सपा के मेहमान होते थे, दंगाइयों को स्पेशल प्रोटोकॉल मिलता था, आतंकवादियों को जेल से छोड़ने का फरमान जारी होता था।”

उन्होंने आगे कहा, “कॉन्ग्रेस के शहजादे तो राम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटना चाहते हैं। ये राम मंदिर पर बाबरी ताला लगाने का सपना देख रहे हैं। ये रामलला को फिर से टेंट में भेजना चाहते हैं। सपा के बड़े नेता कहते हैं, राम मंदिर तो बेकार है। सपा खुलेआम कहती है, राम मंदिर जाने वाले पाखंडी हैं। इंडी गठबंधन के एक और नेता ने कहा, राम मंदिर अपवित्र है।”

समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस पर करारा हमला बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “ये लोग सनातन धर्म के विनाश की बात करते हैं और इन सबकी आका कॉन्ग्रेस पार्टी है। इंडी गठबंधन की परिवारवादी पार्टियों ने तुष्टिकरण की सारी हदें पार कर दी हैं। हमारा देश 500 वर्षों से राम मंदिर की प्रतीक्षा कर रहा था, लेकिन ये इंडी वालों को राम मंदिर और राम से परेशानी है।”

पीएम मोदी ने कहा, “पाकिस्तान तो पस्त पड़ गया है, लेकिन उसके हमदर्द सपा-कॉन्ग्रेस वाले अब भारत को डराने में जुटे हैं। ये लोग कहते हैं, पाकिस्तान से डरो, उसके पास एटम बम है। क्यों डरे भारत? आज भारत में कॉन्ग्रेस की कमजोर सरकार नहीं है, मोदी की मजबूत सरकार है। भारत आज घर में घुसकर मारता है।”