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‘स्टार प्रचारक बरतें सावधानी, चुनाव प्रचार का न गिराएँ स्तर’: चुनाव आयोग ने नड्डा और खरगे को भेजा निर्देश, कॉन्ग्रेस से कहा- सेना और संविधान को मत घसीटो

चुनाव आयोग ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को लोकसभा चुनाव सम्बंधित निर्देश जारी किए हैं। चुनाव आयोग ने दोनों अध्यक्षों से कहा है कि वह अपने चुनाव प्रचारकों को भाषण में सावधानी बरतने के लिए कहें। चुनाव आयोग ने ऐसा चुनाव प्रचार के गिरते स्तर को रोकने के लिए किया है।

चुनाव आयोग ने कॉन्ग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को भेजे गए पत्र में कहा है कि वह अपने स्टार चुनाव प्रचारकों को इस बात के संबंध में नोट दें कि वह संविधान को लेकर भ्रामक बयान ना दें। चुनाव आयोग ने कहा कि कॉन्ग्रेस अध्यक्ष अपने प्रचारकों से ऐसे बयानों से बचने को कहें जिनमें संविधान के खत्म या निष्प्रभावी होने का दावा किया गया हो।

कॉन्ग्रेस प्रवक्ताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान अग्निवीर योजना को लेकर भी काफी दावे किए हैं। चुनाव आयोग ने इसको लेकर कहा है कि कॉन्ग्रेस के स्टार प्रचारक सेना को जाति-धर्म के नाम पर बाँटने वाले बयान ना दें और ना ही उनके काम को लेकर पर प्रोपेगेंडा करें। चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचारकों को जनता में जाति-धर्म के नाम पर फूट डालने वाले बयान देने से भी दूर रहने को कहा है। चुनाव आयोग ने भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को भी एक पत्र भेजा है, जिसमें ऐसे ही निर्देश दिए गए हैं।

भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा को भेजे गए पत्र में कहा है कि भाजपा के स्टार प्रचारक उन बयानों से दूर रहें जिनसे समाज में सामुदायिक तनाव बढ़े। इसके अलावा आयोग ने भाजपा प्रचारकों को समाज को बाँटने वाले बयान देने से भी बचने को कहा है। आयोग ने भाजपा अध्यक्ष से कहा है कि वह अपने प्रचारकों को इस बात का नोट दें कि वह धार्मिक आधार पर वोट ना माँगें।

चुनाव आयोग को दोनों पार्टियों ने एक दूसरे के खिलाफ शिकायत की थी। दोनों पार्टियों ने चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप एक दूसरे पर लगाया था। इसके बाद चुनाव आयोग ने यह एक्शन लिया है।

बेटे के साथ सेक्स करती थी महिला, बेटे ने रिश्ते तोड़ने की बात कही तो सिर में मार दी गोली: 14 साल की उम्र में लिया था गोद, ब्राजील की घटना

ब्राजील के मराब में एक शादीशुदा महिला ने अपने एक गोद लिए बेटे की गोली मारकर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि महिला और बेटे के बीच शारीरिक संबंध थे। जब बेटे ने इस रिश्ते को खत्म करने को कहा तो महिला ने उसे गोली मार दी।

महिला की पहचान 29 साल की जेसिका बरबोसा के रूप हुई है वहीं मरने वाले बेटे का नाम सैमुअल अल्वेस (21) था। सैमुअल 14 साल की उम्र से अपने घर से दूर अच्छे जीवन की तलाश में आया था, उस समय जेसिका और उसके पति ने सैमुअल को गोद ले लिया और साथ रहने लगे।

शुरुआत में जेसिका ने पुलिस को बताया कि ये मामला एक दुर्घटना है। सैमुअल को गोली अपने हाथ से लगी है। हालाँकि जाँच के दौरान पुलिस ने पाया कि इन दोनों के आपसी संबंध थे। एक दिन सैमुअल ने कहा कि वो रिश्ता खत्म करके आगे बढ़ना चाहता है। यही बात जेसिका को नहीं पसंद आई और उसने सैमुअल के सिर में सीधा गोली मार दी।

इस मामले में सच्चाई पता लगाने वाले जासूस लिंड्रो पोंटेस ने कहा, “उन दोनों के बीच रोमांटिक रिलेशनशिप थी। जिस दिन सैमुअल जाने लगा उस दिन जेसिका ने उसे गोली मारी”

मामले में हकीकत का खुलासा होने के बाद पुलिस ने जेसिका को उसके घर से गिरफ्तार किया और अगले दिन उसे हिरासत में भेज दिया।

बता दें कि कुछ दिन पहले एक ऐसा ही मामला थाईलैंड से भी आया था। वहाँ 45 वर्षीय नेता प्रापापोर्न चोइवाडकोह के पति ने उसे बौद्ध भिक्षु के साथ बेड में रंगरलियाँ मनाते हुए पकड़ लिया। यह बौद्ध भिक्षु महिला का गोद लिया हुआ बेटा था। नेता का पति सब देख इतना आहत हुआ कि उसने सच्चाई दिखाने के लिए इसकी वीडियो भी बना ली थी। बाद में पति ने बताया था कि महिला ने उस भिक्षु को ये कहकर गोद लिया था कि उसकी हालत ठीक नहीं है और ये सब देख उसे दया आती है।

पति के मुताबिक, महिला घंटों कमरा बंद करके भिक्षु के साथ बिताने लगी थी, पति के पूछने पर वह इसे प्रार्थना का नाम दे देती थी। इसके बाद उसके पति ने इस पूरे मामले का खुलासा करने की सोची। वह लगभग साढ़े पाँच घंटे गाड़ी चला कर घर पहुँचा और वीडियो बनाते हुए बेडरूम में घुसा।

यहाँ नेता प्रापापोर्न बौद्ध भिक्षु के साथ एकदम नग्न सोई हुई थी। पति के पहुँचने पर यहाँ बवाल हो गया। उसने महिला पर चिल्लाना चालू कर दिया। महिला भी उठ कर भागने लगी। इस पूरी घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।

राहत पाने सुप्रीम कोर्ट गए थे झारखंड के पूर्व CM हेमंत सोरेन, वकील कपिल सिब्बल के ‘आचरण’ से बिफरा बेंच: जानिए सुनवाई के दौरान क्या हुआ

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी का विरोध का करने वाली याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने सुनने से इनकार कर दिया। सुप्रीम कोर्ट में हेमंत सोरेन ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा गिरफ्तारी का विरोध कर रहे थे।

बुधवार (22 मई, 2024) को इस मामले में जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चन्द्र शर्मा की अवकाश बेंच ने सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते समय स्पष्ट किया कि वह इस याचिका को नहीं स्वीकार करेगा। कोर्ट ने सोरेन के वकील हेमंत सोरेन को इस बात को लेकर फटकार लगाई कि इस मामले में पूरी जानकारी कोर्ट के समक्ष नहीं रखी गई। कोर्ट ने कपिल सिब्बल से कहा कि उनका आचरण इस मामले में दोषरहित नहीं कहा जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि सोरेन ने इस मामले में दो अलग-अलग याचिकाएँ लगाई हुई थीं। एक याचिका में जमानत की माँग की गई थी, जिसके अंतर्गत हेमंत सोरेन ने लोकसभा चुनाव में प्रचार केआधार पर जमानत की माँग की थी। दूसरे में अपनी गिरफ्तारी को ही उन्होंने अवैध बताया था।

सुप्रीम कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि हेमंत सोरेन पर लगे आरोपों का ट्रायल कोर्ट ने संज्ञान ले लिया है और जमानत याचिका वहाँ भी लंबित है, यह बात याचिका में नहीं बताई गई। इसके बाद कपिल सिब्बल ने याचिका वापस लेने को कहा, जिसकी अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने दे दी। इसके बाद कपिल सिब्बल ने याचिका वापस ले ली।

इससे पहले झारखंड हाई कोर्ट ने भी हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका को 3 मई, 2024 को खारिज कर दिया था। इसी के खिलाफ हेमंत सोरेन ने सुप्रीम कोर्ट का रास्ता अपनाया था। हेमंत सोरेन ने इससे पहले लोकसभा चुनाव प्रचार करने के लिए अंतरिम जमानत की याचिका लगा चुके हैं, इसमें उन्होंने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को दी गई जमानत का हवाला दिया था लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को 31 जनवरी, 2024 को उनके घर से ED ने जमीन घोटाला मामले में पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया था। उनको इससे पहले ED ने कई समन भेजे थे, जिस पर वह हाजिर नहीं हुए थे।

मेला देखने गई नाबालिग हिंदू, स्कूल की छत पर ले जाकर किया गैंगरेप: जफर, जिबरील, अहमद और अख्तर अंतिम साँस तक रहेंगे सलाखों के पीछे

बिहार के मधुबनी की जिला अदालत ने मंगलवार (21 मई 2024) को एक नाबालिग हिन्दू लड़की से गैंगरेप करने के 4 आरोपितों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। सजा पाए दोषियों के नाम मोहम्मद जफर अंसारी, मोहम्मद जिबरील, मोहम्मद अहमद और अख्तर अंसारी हैं। इन सभी पर 25-25 हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना मधुबनी के थाना क्षेत्र हरलाखी की है। 5 सितंबर 2022 को 16 वर्षीया पीड़िता अपने भाई के साथ कसेरा गाँव में मेला देखने गई थी। कुछ देर बाद पीड़िता शौच के लिए मेला स्थल के पास बने एक स्कूल में गई। आरोप है कि इसी दौरान वहाँ मोहम्मद जफर अंसारी, मोहम्मद जिबरील, मोहम्मद अहमद और अख्तर अंसारी पहुँच गए।

ये सभी आरोपित लड़की को पकड़कर स्कूल की छत पर ले गए। यहाँ इन सभी ने बारी-बारी पीड़िता से गैंगरेप किया। गैंगरेप के दौरान पीड़िता ने शोर मचाया तो आसपास के लोग जमा हुए। खुद को घिरता देखकर चारों आरोपित भागने लगे। लोगों ने दौड़ा कर जफर अंसारी को दबोच लिया था। जफर को पुलिस के हवाले कर दिया गया।

पूछताछ में उसने बताया कि इस करतूत में मोहम्मद जिबरील, मोहम्मद अहमद और अख्तर अंसारी भी शामिल हैं। पुलिस ने दबिश देकर तीनों आरोपितों को बारी-बारी से पकड़ लिया था। अगले दिन 6 सितंबर 2022 को पीड़िता की माँ ने थाने में तहरीर दी तो पुलिस ने FIR दर्ज करके जाँच शुरू कर दी। यह FIR IPC की धारा 376 (D) के साथ पॉक्सो एक्ट में दर्ज हुआ था।

मामले की सुनवाई मधुबनी के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंबर 7 देवेश कुमार की अदालत में हुई। बचाव पक्ष व अभियोजन पक्ष ने अपने-अपने तर्क दिए। अदालत ने अभियोजन पक्ष द्वारा पेश किए गए सबूतों को पर्याप्त माना और मोहम्मद जफर अंसारी, मोहम्मद जिबरील, मोहम्मद अहमद और अख्तर अंसारी को उम्रकैद की सजा सुनाई।

पीड़िता की बड़ी बहन से भी हुआ था गैंगरेप

ऑपइंडिया से बात करते हुए पीड़िता के वकील ने बताया कि अदालत ने अपनी टिप्पणी में इन सभी मुल्जिमों को अंतिम साँस तक जेल में रखने का हुक्म सुनाया है। उन्होंने कहा कि डेढ़ साल चले केस के ट्रायल में मुल्जिमों के कई वकील बदले। हालाँकि इसका उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ।

कोर्ट ने इस मामले में बिहार सरकार को पाँच लाख रुपए मुआवजा देने को कहा है। अधिवक्ता अजय झा यश ने आगे बताया कि पीड़िता की बड़ी बहन के साथ भी गैंगरेप की घटना हुई थी। इस केस में भी ADJ 7 की कोर्ट में ट्रायल चल रहा है। बड़ी बहन के मामले में सजा पर 1 जून 2024 को बहस होनी है।

‘उसके बारे में गंदी बातें करो, उसकी पर्सनल फोटो लीक करो’: स्वाति मालीवाल ने खोला AAP का गेम, विभव कुमार को मुंबई से लेकर आई दिल्ली पुलिस

राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से बदसलूकी मामले में जहाँ दिल्ली पुलिस विभव कुमार को मुंबई से वापस दिल्ली ले आई है, तो वहीं उनकी एक हरकत की वजह से आम आदमी पार्टी को रोज शर्मंसार होना पड़ रहा है। स्वाति मालीवाल ने हालिया पोस्ट में दावा किया है कि पार्टी के अन्य बड़े नेताओं पर प्रेशर बनाया जा रहा है कि वो लोग स्वाति के खिलाफ बोलें, उनकी निजी तस्वीरें लीक करें और उनके फर्जी स्टिंग ऑपरेशन करके लाएँ।

स्वाति ट्वीट में लिखती हैं– “कल पार्टी के एक बड़े नेता का फोन आया। उसने बताया कैसे सब पर बहुत ज़्यादा दबाव है, स्वाति के ख़िलाफ़ गंदी बातें बोलनी हैं, उसकी पर्सनल फ़ोटोज़ लीक करके उसे तोड़ना है। ये बोला जा रहा है कि जो उसको सपोर्ट करेगा उसको पार्टी से निकाल देंगे। किसी को PC करने की और किसी को ट्वीट्स करने की ड्यूटी मिली है। किसी की ड्यूटी है अमेरीका में बैठे वॉलंटियर्स को फ़ोन करके मेरे ख़िलाफ़ कुछ निकलवाने को कहा गया है। आरोपित के कुछ करीबी बीट रिपोर्टर्स की ड्यूटी है कुछ फ़र्ज़ी स्टिंग ऑपरेशन बनाकर लाओ।”

अपने ट्वीट में स्वाति ने यह बात पार्टी के बड़े नेता के हवाले से बताई है। उन्होंने अपने ट्वीट में आम आदमी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा, “तुम हजारों की फौज को खड़ी कर दो। अकेले सामना करूँगी क्यों सच मेरे साथ है।”

दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति ने पोस्ट में यह भी कहा है कि उन्हें ऐसे नेताओं से कोई नाराजगी नहीं लेकिन आरोपित बहुत शक्तिशाली आदमी है। बड़े से बड़ा नेता भी उससे डरता है। किसी की हिम्मत नहीं उसके ख़िलाफ़ स्टैंड ले पाए। ऐसे में स्वाति के मुताबिक वो किसी से उम्मीद भी नहीं करती कि कोई उनके लिए खड़ा होगा। लेकिन उन्हें दुख इस बात का लगा कि दिल्ली की महिला मंत्री कैसे हंसते मुस्कुराते पार्टी की एक पुरानी महिला साथी का चरित्र हरण किया। स्वाति कहती हैं, “मैंने अपनी स्वाभिमान की लड़ाई शुरू की है, इंसाफ़ मिलने तक लड़ाई लड़ती रहूँगी। इस लड़ाई में मैं पूरी तरह अकेली हूँ पर हार नहीं मानूँगी!”

बता दें कि दिल्ली के मुख्यमंत्री निवास पर राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल से कथित मारपीट के आरोप में 23 मई तक पुलिस हिरासत में लिए गए अरविंद केजरीवाल के पूर्व पीए को मुंबई से वापस दिल्ली ले आया गया। हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार एक अधिकारी ने इस संबंध में बताया कि दिल्ली पुलिस बुधवार (22 मई 2024) को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के पीए रहे विभव कुमार को मुंबई से वापस ले आई है। उन्हें वहाँ एक दिन पहले उनके आईफोन के डेटा की खोज के लिए ले जाया गया था।

बताया जा रहा है कि विभव ने गिरफ्तारी से पहले अपने फोन को फॉर्मेट कर दिया था और डेटा किसी और को ट्रांसफर कर दिया था। पुलिस फिलहाल सारे एंगल पर पड़ताल कर रही है। विभव के फोन, लैपटॉप और केजरीवाल के घर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग की फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा गया है। कल यानी 23 मई को उसकी हिरासत खत्म हो रही है। इससे पहले दिल्ली पुलिस ने 18 मई को विभव की 7 दिन की कस्टडी माँगी थी, लेकिन उन्हें 5 दिन की ही रिमांड मिली। उनके ऊपर दिल्ली की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ बदसलूकी करने का आरोप है।

भारत की ज्ञानकीर्ति का मुकुटमणि है कश्मीर का शंकराचार्य मंदिर: ईसाई-इस्लाम के आगामी प्रभाव से परिचित थे आचार्य शंकर, जानिए कैसे एक सूत्र में भारत को बाँधा

ऋषियों एवं मनीषियों द्वारा अनुभूत आध्यात्मिक ज्ञान ही विविधता पूर्ण विश्व में एकात्म्य स्थापित करने में प्रासंगिक हो सकता है। यद्यपि प्रौद्योगिकी के वर्तमान समय में विश्व तीव्रता से निरन्तर आगे बढ़ रहा है, तथापि इस मार्ग में अनेक विकट चुनौतियाँ भी जन्म ले रही है। जो मानवीय जीवन को व्यवहारिक रूप से साक्षात् प्रभावित कर रही है। पृथिवी के निवासियों में मानव के प्रति ही स्वार्थ प्रवृत्ति के कारण, परस्पर मैत्रीभाव की कमी तथा करणीय कर्तव्यों का अभाव से युद्ध एवं अघोषित युद्ध जैसी समस्याएँ उत्पन्न हो रही हैं।

ऐसे परिवेश में वैश्विक परिदृश्य में भारतीय जीवन दर्शन की सार्वभौमिकता सर्वत्र प्रासंगिक है। समस्त अभ्युदयों का प्रयोजक है समाज एवं राष्ट्र में परस्पर संगठन, संवर्द्धन, सद्भाव तथा अपने ही न्यायोचित भाग में एक मात्र संतोष रखना, दूसरों के वस्तु  को लेने की इच्छा तक भी नही करना इत्यादि। यही मानवता का आदर्श भी है, जो मानव का धर्म भी है। अत एव धर्म जिसको धारण किया जा सके; जिसको धारण करने से ही पंच तत्त्वों से मिलकर बना यह भौतिक शरीर मनुष्य कहलाता है।

सम्पूर्ण उपनिषद् एवं भारतीय ज्ञान परम्परा का यही प्रतिपाद्य है। जहाँ भेद से अभेद, व्यष्टि से समष्टि, अनेकत्व में एकत्व, विषमता में समता एवं विविधता का एक एकत्व एवं एकत्व की ही वैविध्य में अभिव्यक्ति इत्यादि विविध विषय हैं। औपनिषदिक ऋषि कहते हैं –

ईशावास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत्।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा, मा गृधः कस्य स्विद्धनम्॥

(ईशावास्योपनिषद्)

औपनिषदिक् ऋषियों द्वारा प्रदत्त त्यागभाव का यह उपदेश आज समस्त राष्ट्रों के लिए अनुकरणीय है। परस्पर मैत्रीभाव से युक्त होकर एक साथ रहने, बोलने, खाने-पीने तथा एक दूसरे की भावनाओं का आदर करने का उपदेश वेद में मिलते हैं। जो समस्त राष्ट्रों, समुदायों, एवं मनुष्यों से समदृष्टि एवं समभाव से परस्पर आगे बढ़ने का आह्वाहन करते हैं। वैदिक ऋषि कहते हैं कि – 

संगच्छध्वं सं वदध्वं सं वो मनांसि जानताम्।
देवा भागं यथा पूर्वे सञ्जानाना उपासते।

(ऋग्वेद १०/१९१/२)

वैदिक ऋषियों की वेदोक्त समदृष्टि केवल उपदेश मात्र नही; अपितु यह उनका अनुभव जन्य साक्षात्कृत् ज्ञान है। जो सभी काल, स्थान, परिस्थिति में अनुकरणीय एवं अकाट्य हैं। वैदिक ऋषियों के इसी ज्ञान को मानव कल्याण के लिए आद्य शंकराचार्य ने सर्वत्र प्रचारित किया जो आज तक हो रहा है। यह समस्त वैदिक ज्ञान वैश्विक जड़-चेतन, स्त्री-पुरुष तथा सभी वर्गों में अभेद दृष्टि को प्रस्तुत करता है। इसी को वेदान्त दर्शन ने अद्वैत की संज्ञा दी। यह अद्वैत ही समस्त विश्व के लिए आज भी पथ प्रदर्शक है। 

इसी एकत्व एवं विश्वबन्धुत्व के अप्रतिम उदाहरण आद्य शंकराचार्य का व्यक्तित्व एवं कश्मीर भूमि हैं। जिस कालखण्ड में वैदिक ज्ञान की विविध व्याख्याओं द्वारा वैदिक आध्यात्मिक उपासना पद्धति में कर्मकाण्ड अधिक महत्त्वपूर्ण होने लगा तथा वैदिक ज्ञान के दुरूह होने की स्थिति में शंकराचार्य ने ब्रह्मसूत्र एवं उपनिषदों पर भाष्य शैली में लिखित व्याख्यान द्वारा पुनः वैदिक ज्ञान को प्रतिष्ठापित करने का अद्भुत प्रयास किया; जिसमें वे सफल भी हुए।

उस कालखण्ड में विश्व में अनेक नवीन विचारों का प्रचार-प्रसार हो रहा था; जिसमें इस्लाममत एवं ईसाईमत प्रमुख हैं। शायद उसके आगामी प्रभाव से शंकराचार्य परिचित थे। अतएव शंकराचार्य ने केवल वैदिक ज्ञान का दार्शनिक दृष्टि व्याख्यान प्रारम्भ किया अपितु इस एकात्म्यपूर्ण आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा सम्पूर्ण भारत को एक सूत्र में बाधने हेतु भारतभ्रमण करते हुए सम्पूर्ण भारत में चार मठों की स्थापना की। 

अद्वैतवाद के प्रवल प्रवर्तक आचार्य द्वारा न केवल ज्ञान के स्तर पर एकत्व में बांधना एक मात्र उद्देश्य नही था, अपितु सम्पूर्ण भारतवर्ष को संस्कृति, सभ्यता एवं संस्कारों के माध्यम से एक सूत्र में बांधना भी परम उद्देश्य था। अतएव भारतवर्ष के चार दिशाओं में वैदिक संस्कृति को सम्पूर्ण स्थलों पर फैलाने के लिए एवं मठों के रक्षण हेतु दशनामी संन्यासियों की प्रकल्पना की। दशनामी संन्यासियों का उद्देश्य धर्मप्रचार के अतिरिक्त धर्मरक्षा करना भी था।

इस द्वितीय उद्देश्य की सिद्धि के लिए उन्होंने अपना संगठन विभिन्न अखाड़ों के रूप में भी किया है। इन विविध अखाड़ों के साधुओं ने भारत एवं भारतीय संस्कृति को विदेशी आक्रमणकारियों से बचाने हेतु अनेक बार बलिदान दिए हैं; जो इतिहास प्रसिद्ध ही है।

शंकराचार्य के समय से वैदिक ज्ञान की नवीन दृष्टि से व्याख्याएँ होने लगी। विविध सम्प्रदायों में बाह्य कर्मकाण्ड के प्रबल होने से बढ़ते मतभेद से भी आचार्य शंकराचार्य पूर्ण परिचित ही थे; अत एव उन विभेदों को भी समाप्त करने का कार्य आचार्य शंकराचार्य ने किया। इसी उद्देश्य की पूर्ति हेतु आचार्य शंकराचार्य भारत के मुकुटमणि, ज्ञान के सर्वोत्तम तीर्थ एवं शैव परम्परा के प्रमुख क्षेत्र कश्मीर भी गए। उस काल में न केवल कश्मीर की ज्ञान कीर्ति प्रचलित थी; अपितु विविध परम्पराओं एवं सम्प्रदायों में अद्भुत समन्वय के लिए उसकी कीर्ति थी।

वैष्णव, शाक्त, शैव, सौरपरम्परा, बौद्ध, जैन एवं तन्त्र की विविध परम्पराएँ कश्मीर क्षेत्र से सम्पूर्ण भारत में प्रचारित हुई। इन सभी सम्प्रदायों में कोई भी वैमनस्य नही था। अत एव कश्मीर के शारदा पीठ में शास्त्रार्थ हेतु आचार्य शंकर स्वयं गए। कश्मीर की धरा पर पल्लवित पुष्पित शंकराचार्य मन्दिर भारत की ज्ञानकीर्ति को आज भी शिरोधार्य किए हुए है।

अपनी सम्पूर्ण भारत की यात्रा से शंकराचार्य ने आध्यात्मिक ज्ञान के महत्व को भी स्पष्ट किया; जिसके द्वारा विविध मत-मतान्तरों में समन्वय स्थापित हो सकता है। वे शंकराचार्य ही थे; जिन्होंने न केवल अपने कालखण्ड में वैदिक ज्ञान को संरक्षित किया अपितु उनके द्वारा प्रतिष्ठापित सिद्धान्त आज भी उसी रूप में भारत का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अपने इसी आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा भारत आज भी अपनी कीर्ति सम्पूर्ण विश्व में फैला रहा है।

जिसमें अहं ब्रह्मास्मि (बृहदारण्यकोपनिषद १/४/१०), तत्त्वमसि (छान्दोग्योपनिषद ६/८/७), अयमात्मा ब्रह्म (माण्डूक्योपनिषद् १/२) एवं प्रज्ञानं ब्रह्म (ऐतरेयोपनिषद् १/२) की ही भावना निहित है। अत एव आज के बदलते वैश्विक परिदृश्य में आचार्य शंकर अत्यन्त प्रासंगिक हैं।

फर्जी वोटिंग करते पकड़े गए मोहम्मद सनाउल्लाह और 3 खातूनें, भीड़ ने थाने पर हमला कर सबको छुड़ाया: बिहार के जाले की घटना, 20 मई को हुआ था मतदान

बिहार की मधुबनी लोकसभा सीट पर 20 मई 2024 को वोट डाले डाले गए थे। जाले में 4 लोगों को फर्जी वोट डालते पकड़ा गया। उसी रात करीब 150 लोगों की भीड़ ने थाने पर हमला कर चारों को छुड़ा लिया। मामले की जाँच के लिए पुलिस ने एसआईटी का गठन किया है।

जाले बिहार के दरभंगा जिले का हिस्सा है, लेकिन ये मधुबनी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। मिली जानकारी के अनुसार, जाले थाना क्षेत्र में आने वाले मतदान केंद्र- हक्कानिया मदरसा देवरा बंधौली पर फर्जी वोटिंग करते 4 लोगों को पकड़ा गया था। इन चारों को लोगों को जाले थाना परिसर में रखा गया था, कि शाम के समय 130-140 लोगों की भीड़ ने थाने पर हमला बोल दिया और फर्जी वोटिंग करते पकड़े गए चारों लोगों को छुड़ा लिया।

ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी के मुताबिक, 20 मई 2024 को मतदान के दौरान गस्ती के क्रम में सेक्टर पदाधिकारी निर्भय कुमार ने 4 लोगों को पकड़ा था और पुलिस अभिरक्षा में सौंप दिया था। इस बारे में जाले थाना कांड संख्या 103/24 दर्ज किया। इस मामले में 1-सनाउल्ला. पिता का नाम-परवेज आलम, 2-सादिया शेख पिता-मो हसन, 3-सालेहा फातिमा पिता मो हसनैन और 4-जीनत परवीन पिता मो इजराह, सभी निवासी देवरा बंधौली, थाना-जाले, जिला दरभंगा को फर्जी वोटिंग करते पकड़ा गया। सेक्टर पदाधिकारी निर्भय कुमार ने चारों को पुलिस को सौंप दिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फर्जी वोटिंग में पकड़े गए लोगों को छुड़ाने के लिए 130-140 लोगों ने थाने पर हमला कर दिया और पुलिस पदाधिकारियों के साथ दुर्व्यवहार करते हुए चारों को पुलिस की अभिरक्षा से छुड़ा लिया। अब पुलिस ने एफआईआर संख्या 104/24 दर्ज की है, जिसमें 24 लोगों के खिलाफ नामजद और सौ से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस मामले से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें बताया जा रहा है कि इसी भीड़ ने थाने पर हमला बोला।

सूत्रों के मुताबिक, चारों की गिरफ्तारी के तुरंत बाद ही स्थानीय लोगों ने थाने पर बवाल काटा था, लेकिन तब पुलिस ने किसी तरह से मामले को संभाल लिया था। इसके बाद दूसरी बार रात के समय 130-140 लोगों ने दोबारा हमला बोला। पुलिस कुछ समझ पाती, इससे पहले ही भीड़ चारों आरोपितों को थाने से निकाल कर भगा ले गई। इस घटना के वायरल फुटेज में भी घटना साफ दिखाई दे रही है, जिसमें भारी संख्या में भीड़ नजर आ रही है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील और एक्स यूजर शशांक शेखर झा ने इस घटना का वीडियो शेयर किया है। उन्होंने एक्स पर लिखा, ‘शॉकिंग, दरभंगा बिहार में मोहम्मद सनाउल्लाह और 3 मुस्लिम महिलाओं को हक्कानिया मदरसा पोलिंग स्टेशन से गिरफ्तार किया गया। क्यों? क्योंकि वो बुर्का पहनकर फर्जी वोटिंग कर रहे थे। इसके बाद 100-150 मुस्लिमों की भीड़ ने जाले पुलिस स्टेशन पर रात में हमला किया और सभी आरोपितों को थाने से छुड़ा ले गए।’

इस बारे में दरभंगा पुलिस ने भी जानकारी साझा की है और थाने पर हमले की बात को स्वीकारी है। दरभंगा पुलिस के मुताबिक, दरभंगा पुलिस ने जाले थाना अध्यक्ष के बयान के आधार पर 130-140 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। दरभंगा पुलिस ने धारा 147/148/149/323/324/225/353/354 (बी)/504 भादवि में मामला दर्ज किया है। इस केस की जाँच के लिए दरभंगा के एसपी के नेतृत्व में एक एसआईटी का गठन किया गया है, जिनके द्वारा छापेमारी की कार्रवाई की जा रही है।

दरभंगा के एसएसपी जगुनाथ रेड्डी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया है कि इस केस में 24 लोगों को नामजद किया गया है और अज्ञात 130 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस घटना से जुड़े वीडियो व अन्य सबूतों की छानबीन की जा रही है। इस केस की जाँच अब एसआईटी कर रही है, जिसका नेतृत्व दरभंगा के एसपी कर रहे हैं।

क्यों चीन की कंपनियाँ भी कर रहीं ‘मेक इन इंडिया’ का जाप, क्यों भारतीय बाजार के लिए ‘गद्दार’ कहलाना भी है कबूल?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान में चीन की बड़ी कम्पनियाँ भी सहयोग कर रही हैं। ऐसा चीन की कम्पनियों को मजबूरी में करना पड़ रहा है। चीन कम्पनियों को ऐसा करने के कारण अपने देश के भीतर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है, उन्हें गद्दार कहा जा रहा है।

चीन की कम्पनियाँ पहले भारतीय बाजार से केवल लाभ कमाने के चक्कर में रहती थीं लेकिन अब उन्हें भारत के बाजार में रहने के लिए देश के भीतर ही निर्माण करना पड़ रहा है। उन्हें देश के भीतर ही अपनी सप्लाई चेन स्थापित करना पड़ रहा है, भारत में इससे लाखों नौकरियाँ पैदा हो रही हैं। चीन की कम्पनियों पर मोदी सरकार ने शिंकजा कसा है, इसके कारण जो भी कम्पनियाँ भारत में व्यापार करना चाहती हैं, उन्हें भारत के नियम कानून मानने पर मजबूर होना पड़ रहा है और साथ ही वह भारत के मिशन में भी सहयोग कर रही हैं।

मेक इन इंडिया में चीनी कम्पनियों की हिस्सेदारी

चीन की कम्पनियाँ भारत के मेक इन इंडिया में सहयोग कर रही हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मोबाइल फोन निर्माण क्षेत्र है। 2014 से पहले चीन की कम्पनियाँ भारत में सीधे बने बनाए फोन लाकर बेच रही थी और पैसा कमा कर चीन भेज रहीं थी। मोदी सरकार ने यह स्थिति बदल दी है। मोदी सरकार में भारत में कारोबार करने वाली सभी चीनी मोबाइल कम्पनियों को भारत में ही मोबाइल का निर्माण चालू करना पड़ा है। भारत चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फ़ोन उत्पादक बन गया है।

इन चीनी कम्पनियों ने भारत में ही अपनी सप्लाई लाइन स्थापित की है। इन चीनी कम्पनियों के उत्पाद देश में भी बिक रहे हैं और साथ ही वह विदेशों को भी जा रहे हैं। ऐसे में चीन को जाने वाला पैसा कम हो गया है। भारत में इससे बड़ी संख्या में रोजगार पैदा हुए हैं। चीनी कम्पनियाँ मात्र भारत में फ़ोन ही नहीं बना रही हैं, बल्कि वह मोबाइल फोन के लिए कल पुर्जे बनाने वाली कम्पनियों को भारत आने के लिए भी प्रोत्साहित कर रही हैं।

भारत में मोबाइल फोन निर्माण का क्षेत्र 2014-15 में ₹18,900 करोड़ का था, यह 2023-24 में बढ़ कर ₹4.1 लाख करोड़ का हो गया। भारतीय बाजार में चीनी मोबाइल कम्पनियों की हिस्सेदारी लगभग 50% है। चीनी कम्पनियों के अलावा सैमसंग और एप्पल का भी भारत के बाजार में हिस्सा बढ़ रहा है।

क्यों अपने देश में विरोध के बावजूद ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ा रहीं चीनी कम्पनियाँ

चीनी कम्पनियाँ अपने देश में विरोध के बावजूद भारत में मेक इन इंडिया को बढ़ा रही हैं। दरअसल इसके पीछे कई कारण हैं। इसके पीछे का सबसे बड़ा कारण भारत का चीन के बराबर का अकेला बड़ा बाजार होना है। चीनी कम्पनियों को चीन में प्रतिस्पर्धा के कारण वहाँ जगह नहीं मिल पा रही जबकि भारत एक उभरता हुआ बाजार है जहाँ खपत काफी ज्यादा है, ऐसे में उन्हें भारत जैसा और कोई विकल्प नहीं मिलता। भारत में लगातार इन्टरनेट का प्रसार हो रहा है, ऐसे में चीन की कम्पनियाँ यहाँ लगातार अपने लिए सम्भावनाएं तलाश रही हैं।

इसके अलावा भारत का बाजार चीनी कम्पनियों के अनुरूप है। उनके बनाए उत्पाद भारतीय ग्राहकों के अनुरूप हैं। उनकी दाल यूरोप या फिर लैटिन अमेरिका में नहीं गलती। इन देशों में फैक्ट्री लगाना काफी मुश्किल है। यहाँ लागत भी अधिक है। भारत का ग्राहक भी लगभग चीन के ग्राहक के ही समान आर्थिक पृष्ठभूमि वाला है। ऐसे में भारत चीनी कम्पनियों के लिए मज़बूरी हो जाता है। भारत ने बीते कुछ समय में चीनी कम्पनियों पर यह भी दबाव डाला है कि वह अपनी प्रक्रिया में अधिक से अधिक भारतीयों को लगाएँ।

मोदी सरकार ने कसा शिंकजा तो रोने लगा चीन

भारत ने इन चीनी कम्पनियों पर शिकंजा भी कसा है। एक रिपोर्ट बताती है कि चीनी मोबाइल कम्पनियों को भारत में नियामकों की सख्ती के कारण लगभग 1 बिलियन डॉलर (लगभग ₹8,000 करोड़) का नुकसान हुआ है। इसके अलावा भारत के चीनी एप्स पर प्रतिबन्ध लगाने से चीन को 10 बिलियन डॉलर (₹83,000 करोड़) का नुकसान हुआ है। चीन की कम्पनियों को लगातार कहा जा रहा है कि वह भारत ऊँचे पदों पर भारतीयों को बिठाएँ। अधिकाधिक ठेके भारतीय कम्पनियों को देने का दबाव भी चीनी कम्पनियों पर डाला जा रहा है।

चीन में गद्दार का मिल रहा तमगा

जहाँ एक और भारत में चीनी कम्पनियाँ लगातार अपनी निर्माण गतिविधि बढ़ा रही हैं, वहीं चीन में उन्हें इस काम के कारण विरोध का सामना करना पड़ रहा है। चीनी कम्पनियों को कहा जा रहा है कि वह गद्दारी कर रही हैं। वह अपने फायदे के लिए चीन के हितों को दरकिनार कर रही हैं। इन पर लगाम लगाने के लिए भी चीन में आवाज उठ रही है। इस मामले में कार्रवाई ना करने को लेकर चीन की सरकार की आलोचना भी हो रही है। यह भी माँग हो रही है कि चीन में होने वाले निर्माण को भारत में शिफ्ट किया जाए।

कानपुर में 100 की स्पीड से दौड़ रही कार ने 5 महिलाओं को रौंदा, 4 की मौत: मोहम्मद अहमद के नाम पर है गाड़ी, डेढ़ साल में कट चुका है 16 चालान

उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में मंगलवार (21 मई 2024) को मोहम्मद अहमद की बेकाबू कार ने 5 महिलाओं को रौंद दिया। इसमें अब तक 4 महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि 1 महिला गंभीर रूप से घायल है। मृतकाओं के नाम पूनम पांडेय, दिव्या पांडेय, सरिता द्विवेदी और ज्योति हैं। अपर्णा का इलाज चल रहा है। घटना के समय मारुति ईको कार की स्पीड 100 बताई जा रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना कानपुर जिले के महाराजपुर थाना क्षेत्र की है। मंगलवार की शाम यहाँ 50 वर्षीया पूनम पांडेय अपनी बेटी दिव्या और सरिता द्विवेदी, ज्योति और अपर्णा के साथ हाथीपुर का फ्लाईओवर पार कर रही थीं। सभी महिलाएँ एक ही परिवार की हैं। इसी दौरान फतेहपुर से एक मारुति ईको कार तेजी से हाइवे पर कानपुर की तरफ निकली।

गाड़ी मोहम्मद अहमद की बताई जा रही है। घटना के वक्त कार की स्पीड लगभग 100 के आसपास बताई जा रही है। इस कार ने सड़क पार कर रही पाँचों महिलाओं को रौंद दिया। इसके बाद वाहन डिवाइडर से जा टकराया। इसके बाद कार चला रहा ड्राइवर गाड़ी छोड़ कर भाग गया। हादसे के बाद अफरातफरी मच गई। मौके पर पुलिस और एम्बुलेंस पहुँची। मोहम्मद अहमद कानपुर का ही रहने वाला है।

पूनम, सरिता और ज्योति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दिव्या ने अस्पताल ले जाते हुए दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल अपर्णा का अस्पताल में इलाज चल रहा है। अपर्णा को बेहतर इलाज के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जानकारी के मुताबिक सभी महिलाएँ एक दूसरे से मिलने आईं थीं। पुलिस ने केस दर्ज करके फरार आरोपित की धर-पकड़ शुरू कर दी है।

2 साल में 16 चालान, एक भी नहीं भरा

जिस ईको कार से पाँचों महिलाओं को कुचला गया है, उसके बारे में ऑपइंडिया ने पड़ताल की। गाड़ी का मालिक मोहम्मद अहमद है। मोहम्मद अहमद कानपुर के राजीव नगर का रहने वाला है। यह गाड़ी साल 2022 में कमर्शियल कामों के लिए खरीदी गई थी। लगभग डेढ़ साल के अंदर ही इस वाहन के 16 अलग-अलग मौकों पर चालान हुए हैं। इसमें अधिकतर चालान अवैध तौर पर पार्किंग के हैं।

सरिता द्विवेदी की शव यात्रा

चालान की कुल रकम 20 हजार से भी अधिक है, जिसे अब तक नहीं भरा गया है। घटना में मृतकाओं का पोस्टमार्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया है। अंतिम संस्कार के दौरान स्थानीय लोगों मौजूद रहे। ऑपइंडिया ने गाड़ी मालिक मोहम्मद अहमद का पक्ष जानने के लिए उनके नंबर पर सम्पर्क किया तो फोन बंद आया।

इलाज कराने भारत आए बांग्लादेशी MP अनवारुल अजीम की टुकड़ों में मिली लाश, 8 दिन से थे लापता: कोलकाता में हुई हत्या, 3 गिरफ्तार

भारत में 8 दिन पहले लापता हुए बांग्लादेश के सांसद अनवारुल अजीम अनार का पश्चिम बंगाल में शव मिला है। 12 मई को वो भारत अपना इलाज कराने आए थे। उसके कुछ दिन बाद उनकी बेटी ने शिकायत की कि उनके पिता भारत में लापता हो गए हैं। उनसे कॉन्टैक्ट नहीं हो पा रहा है। अब रिपोर्ट बताती है कि बांग्लादेसी सांद उनका शव बंगाल में कई टुकड़ों में कटा मिला है।

कोलकाता पुलिस के हवाले से रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि बांग्लादेशी सांसद की हत्या सुनियोजित थी। हत्या के बाद उनके शव को टुकड़ों में काट दिया गया था। इनमें से कुछ टुकड़े कोलकाता के न्यू टाउन स्थित संजीवा गार्डन के एक अपार्टमेंट में बरामद हुए। यह फ्लैट आबकारी अधिकारी है।

अनवारुल अजीम की हत्या के बारे में बांग्लादेश के गृह मंत्री असदुज्जमान खान ने भी पुष्टि की। उन्होंने कहा, “भारत के एक डीआइजी के हवाले से, हमारी पुलिस को पता चला है कि अजीम का शव कोलकाता में बरामद किया गया है और इस मामले में तीन गिरफ्तार हुए हैं। हमारे महानिरीक्षक मामले को देख रहे हैं। सब पुष्टि हो जाने को बाद मीडिया को जानकारी दी जाएगी।”

वहीं सांसद के निजी सचिव अब्दुर रऊफ ने इस संबंध में बयान दिया है कि उन्हें सांसद की मौत के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं मिली है, लेकिन सांसद का परिवार ढाका में भारत जाने के लिए वीजा मंजूरी का इंतजार कर रहा है।

बता दें कि अनावरुल अजीम की लाश उनके लापता होने के 8 दिन बाद मिली है। इससे पहले आवामी लीग के दिग्गज नेता के लापता होने की खबर मीडिया में आई थी। बहुत खोजने पर भी उनकी लोकेशन का पता नहीं चल पा रहा था। रिपोर्ट्स में बताया गया था है कि उनकी आखिरी लोकेशन बिहार के मुजफ्फरपुर में मिली थी। उनकी बेटी ने इस संबंध में ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच से सहायता करने की अपील की थी।

बेटी ने प्रेस कॉन्फ्रेंल कर बताया था कि उनके अब्बा, जो कि तीन बार के सांसद और कालीगंज उपजिला में आवामी लीग के अध्यक्ष रहे, उनका कुछ पता नहीं चल पा रहा। वह एक कान से नहीं सुन पाते और उसी के इलाज के लिए भारत गए थे। उसके बाद उन्होंने किसी का भी फोन उठाना बंद कर दिया।