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फंदे से लटकी मिली तेलुगु एक्टर की लाश: 5 दिन से लिख रहे थे अवसाद भरे पोस्ट, कार एक्सीडेंट में हो गई थी पार्टनर पवित्रा की मौत

तेलुगु एक्टर चंद्रकांत ने शुक्रवार (17 मई 2024) को सुसाइड कर लिया। उनका शव हैदराबाद के अलकापुर स्थित उनके घर में मिली। कहा जा रहा है कि वे अपनी पार्टनर पवित्रा जयराम की मौत से वे बेहद दुखी थे और इसी वजह से खुदकुशी जैसा कदम उठाया। दरअसल, पवित्रा की कुछ दिन पहले कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। हालाँकि, पुलिस इसे संदिग्ध मौत मानकर जाँच कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 39 साल के चंद्रकांत ने फाँसी लगाकर आत्महत्या की है। 12 मई को आंध्र प्रदेश के महबूब नगर में एक भीषण कार एक्सीडेंट में एक्ट्रेस पवित्रा जयराम की मौत के बाद से वे डिप्रेशन में चल रहे थे। पिछले एक हफ्ते से वे सोशल मीडिया पर पवित्रा के लिए लगातार पोस्ट लिख रहे थे। इसमें वे तरह-तरह की बातें कह रहे थे।

एक्टर चंद्रकांत ने 3 दिन पहले एक अजीब सा पोस्ट किया था। उस पोस्ट में लिखा था, “हे नन्ना, बस दो दिनों का इंतजार करो।” कुछ दिन पहले उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया था, जिसके कैप्शन में उन्होंने ‘आई लव यू लिखा’ था। एक्टर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर आखिरी पोस्ट भी लिखा था, “प्लीज वापस आ जाओ। मैं यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूँ कि तुम मुझे अकेला छोड़ कर चली गई हो।”

उनके हर में डिप्रेशन के लक्षण दिख रहे थे। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “गुड मार्निंग नन्ना, जिम का वक्त हो गया है। हमारे काउच ने हमें बुलाया है। लव यू पापा।” एक्टर की इस पोस्ट पर उनके फैंस भी चिंतित हो गए थे और इस चिंता को जाहिर भी करते दिखे। एक यूजर्स ने लिखा, “आपकी हर पोस्ट दुख भरी लग रही है। लग रहा है आप बहुत बुरा सोच रहे हैं। प्लीज अपने मन पर काबू रखिए।”

चंद्रकांत के पिता ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा पवित्रा जयराम की मौत से बेहद दुखी था। वह इस गम से उबर नहीं पा रहा था। नरसिंह पुलिस ने बताया कि चंद्रकांत के दोस्तों और वॉचमैन ने कॉल करके घटना की सूचना दी। पुलिस ने फिलहाल CrPC की धारा 174 यानी संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत के मुताबिक केस दर्ज कर लिया है।

बताते चलें कि चंद्रकांत ने टीवी सीरीज त्रिनयनी से पॉपुलैरिटी हासिल की थी। पवित्रा भी टीवी की जानी-मानी स्टार थीं। पवित्रा और चंद्रकांत साथ में ही रहते थे। हालाँकि, पवित्रा तलाकशुदा थीं और उनके दो बच्चे भी हैं, जो उनके पहले पति के साथ रहते हैं। शादी के कुछ समय बाद ही उनका अपने पहले पति से तलाक हो गया था। लोगों का यह कहना है कि पवित्रा और चंद्रकांत ने गुचचुप शादी रचा ली थी।

अकबरशा सैयद, हाकिमशा सैयद, जैनुलशा सैयद, अलीअसगर सैयद… BJP समर्थक बता कर अपने ही दोस्त अलीमदाद को बाँध कर पीटा, बोला पीड़ित – आत्महत्या करता हूँ तो…

गुजरात के कच्छ जिले में अपने मित्रों को भाजपा ज्वाइन करवाने पर एक मुस्लिम युवक को अपहरण के बाद पीटे जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित की पहचान अलीमदाद इलियास के तौर पर हुई है। आरोपितों के नाम अकबरशा सैयद, हाकिमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलीअसगर सैयद बताए जा रहे हैं। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना शुक्रवार (10 मई 2024) की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला कच्छ के मांडवी इलाके का है। यहाँ के गाँव शिवा के रहने वाले अलीमदाद ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि अलीमदाद के कुछ दोस्तों ने लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भारतीय जनता पार्टी का समर्थन किया था। कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े कुछ लोगों को लगा कि उन लोगों को भाजपा में लाने का काम अलीमदाद ने किया होगा। 10 मई को अलीमदाद सड़क से कहीं जा रहा था। तभी अकबरशा सैयद, हाकिमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलीअसगर सैयद ने उसका अपहरण कर लिया।

आरोप है कि चारों आरोपितों ने अलीमदाद को किसी अज्ञात जगह ले जाया गया। यहाँ पीड़ित को बाँध कर बेरहमी से पीटा गया। पिटाई से अलीमदाद घायल हो गया। इसी हालत में पीड़ित को आरोपितों ने सड़क पर फेंक दिया। बाद में किसी ने 108 नंबर डायल कर के एम्बुलेंस मंगवाई और पीड़ित को अस्पताल भिजवाया। अलीमदाद का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वो अपनी पिटाई के लिए अकबरशा सैयद, हाकिमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलीअसगर सैयद को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

वीडियो में अलीमदाद ने बताया कि पिटाई की वजह से उनके आंतरिक अंगों को काफी नुकसान पहुँचा है। पीड़ित ने कहा कि उन्हें पेशाब आने बंद हो गए हैं। अलीमदाद ने कहा कहा, “अगर मुझे कुछ होता है, मुझे दिल का दौरा पड़ता है या मैं आत्महत्या कर लेता हूँ तो मेरी मौत के लिए अकबरशा सैयद, हकीमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलीअसगर सैयद को जिम्मेदार माना जाए।” इसी वीडियो में पीड़ित ने कुछ अन्य नामों का भी जिक्र किया है।

पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 365, 341, 323, 506 (2) और 120 (बी) के तहत FIR दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। इस मामले में ऑपइंडिया अन्य अपडेट की पड़ताल कर रहा है। सूचना आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

कौन हैं 84 साल के वो भारतीय बुजुर्ग, जो बने UK के सबसे अमीर शख्स: ₹3.37 लाख करोड़ की संपत्ति, 75 साल पहले बिजनेस की दुनिया में रखा था कदम

भारतीय मूल के गोपीचंद हिंदुजा UK (यूनाइटेड किंगडम) के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में शीर्ष पर बरकरार हैं। वो ‘हिंदुजा ग्रुप’ के चेयरमैन हैं। ‘सन्डे टाइम्स’ ने उन्हें UK के सबसे अमीर उद्योगपतियों की सूची में शीर्ष स्थान पर रखा है। ये मीडिया संस्थान यूके के 1000 सबसे अमीर लोगों और परिवारों की सूची हर साल जारी करता है। ये लगातार छठा साल है, जब गोपीचंद हिंदुजा इस सूची में टॉप पर हैं। उनकी संपत्ति 37.196 बिलियन यूरो (3.37 लाख करोड़ रुपए) आँकी गई है।

पिछले 1 वर्ष में गोपीचंद हिंदुजा की संपत्ति में 23.91 हजार करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है। 84 वर्षीय गोपीचंद हिंदुजा का जन्म 1940 में हुआ था। उन्हें बिजनेस इंडस्ट्री में लोग GP के नाम से जानते हैं। वो ‘हिंदुजा ग्रुप’ के साथ-साथ ‘हिंदुजा ऑटोमोटिव लिमिटेड’ के भी चेयरमैन हैं। उनकी कंपनी मल्टीनेशनल है, जो ट्रकों और लुब्रिकेंट्स से लेकर बैंकिंग और केबल टेलीविजन तक में कारोबार करती है। वो अपने पिता परमानन्द दीपचंद हिंदुजा के दूसरे बेटे हैं।

उनका परिवार अखंड भारत के सिंध क्षेत्र से आता है, जो अब पाकिस्तान में है। परमानन्द दीपचंद हिंदुजा ने 1914 में कारोबार की दुनिया में कदम रखा था। उन्होंने भारत और मध्य-पूर्व की देशों के बीच कारोबार में कदम रखा और फिर अपनी कंपनी को करोड़ों डॉलर का बनाया। 1959 में मुंबई में गोपीचंद हिंदुजा ने अपने पारिवारिक कारोबार में कदम रखा। मई 2023 में अपने बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा के निधन के बाद उन्होंने ग्रुप के चेयरमैन के पद का कार्यभार सँभाला।

उन्होंने मुंबई के जय हिन्द कॉलेज से स्नातक किया था। उनके पास यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिनिस्टर से डॉक्टरेट ऑफ लॉ की मानद डिग्री है, साथ ही रिचमंड कॉलेज ने उन्हें इकोनॉमिक्स में डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान की। गोपीचंद हिंदुजा 4 भाई हैं और सब मिल कर इस बिजनेस के मालिक हैं। प्रकाश और अशोक उनके छोटे भाई हैं। ब्रिटिश-अमेरिकन कारोबारी लियोनार्ड ब्लावत्निक इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं। इस सूची में सटीक लिंग लक्ष्मीनिवास मित्तल और ब्रिटेन के PM ऋषि शौनक की पत्नी व इन्फोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति की बेटी अक्षता को भी शामिल किया गया है।

मुस्लिम युवक का अपहरण, बाँध कर घंटों तक पीटा: कुछ लोगों को BJP से जोड़ने पर उसके समाज के लोग थे नाराज, मामला दर्ज

गुजरात के कच्छ स्थित मांडवी इलाके में 10 मई को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई। मेरौ गाँव में रहने वाले एक मुस्लिम युवक को इसलिए पीटा गया, क्योंकि उसने अपने परिचितों को भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) से जोड़ा था। पीड़ित की पहचान अलीमामद इलियास शिरू के रूप में हुई है। आरोपितों ने अलीमामद का अपहरण कर उसे घंटों तक बाँध कर रखा और उसके साथ मारपीट की।

इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में वह इस हमले के लिए साजिशकर्ताओं को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। दरअसल, पास के गाँव शिरवा में रहने वाले अलीममद के कुछ मुस्लिम मित्रों ने मौजूदा लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा का समर्थन किया था। कॉन्ग्रेस का समर्थन करने वाले बदमाशों को संदेह था कि इसके लिए लोगों को राजी करने में अलीममद की भूमिका थी।

इसके बाद 10 मई को अकबरशा सैयद, हाकिमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलियासगर सैयद ने अलीमामद का अपहरण कर लिया। अलीमामद उस समय सड़क पर जा रहा था। बाद में लोगों ने उसकी पिटाई की और उसे कई घंटों तक बाँध कर रखा। इसके बाद उन्होंने पीड़ित को घायल हालत में सड़क पर फेंक दिया। बाद में उन्हें इलाज के लिए 108 (आपातकालीन चिकित्सा देखभाल) में ले जाया गया।

अलीमामद ने एक वीडियो भी रिकॉर्ड किया है, जिसमें उसने बताया कि हमले के बाद उसका पेशाब बंद हो गया है। उसने कहा, “अगर मुझे कुछ होता है, मुझे दिल का दौरा पड़ता है या मैं आत्महत्या कर लेता हूँ तो मेरी मौत के लिए अकबरशा सैयद, हकीमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलीअसगर सैयद को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।” उसने फुटेज में कुछ अन्य लोगों के नामों का भी उल्लेख किया है।

कच्छ जिले की मांडवी पुलिस ने अकबरशा अब्दुल्शा सैयद, हकीम्शा कदरशा सैयद, जैनुलशा कासमशा सैयद और अलियासगर इब्राहिमशा सैयद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 365, 341, 323, 506 (2) और 120 (बी) के तहत शिकायत दर्ज की है। ऑपइंडिया इस मामले पर ज़मीनी स्तर से और अधिक जानकारी एकत्र करने का प्रयास कर रहा है।

CCTV फुटेज गायब, फोन फॉर्मेट: जाँच में सहयोग नहीं कर रहा विभव कुमार, AAP के मार्च के बीच बोलीं स्वाति मालीवाल – काश मनीष सिसोदिया के लिए…

स्वाति मालीवाल पिटाई मामले में बिभव की गिरफ्तारी से अरविंद केजरीवाल बौखलाए दिख रहे हैं। वो बीजेपी ऑफिस तक मार्च कर रहे हैं। वहीं, बिभव कुमार को कोर्ट ने 5 दिन की हिरासत में भेज दिया है, क्योंकि पुलिस ने बताया कि बिभव कुमार जाँच में सहयोग नहीं कर रहे हैं और वो मजबूत आदमी हैं। वो गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और चीजों को बदल सकते हैं। कोर्ट में दिल्ली पुलिस ने बताया कि स्वाति मालीवाल पर हुआ हमला भयावह था, इसमें उन्हें काफी नुकसान पहुँच सकता था। यही नहीं, पुलिस ने कहा है कि बिभव कुमार ने अपने फोन तक को फॉर्मेट कर दिया है, ताकी उसकी जानकारी पुलिस तक न पहुँचे।

अरविंद केजरीवाल के मार्च पर स्वाति का तंज

बिभव कुमार को 5 दिन के लिए पुलिस कस्टडी में भेजे जाने के खिलाफ अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी ऑफिस को घेरने के ऐलान के बाद स्वाति मालीवाल ने आम आदमी पार्टी के जेल में बंद नेता मनीष सिसोदिया का नाम लेकर तंज कसा है।

स्वाति मालीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “किसी दौर में हम सब निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए सड़क पर निकलते थे, आज 12 साल बाद सड़क पर निकले हैं ऐसे आरोपी को बचाने के लिए, जिसने CCTV फुटेज गायब किए और फोन फॉर्मेट किया? काश इतना ज़ोर मनीष सिसोदिया जी के लिए लगाया होता… वह यहां होते तो शायद मेरे साथ इतना बुरा नहीं होता!”

कोर्ट में क्या क्या हुआ?

इससे पहले, स्वाति मालीवाल को पीटने के मामले में पुलिस ने शनिवार को बिभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया। उन्हें कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ कोर्ट ने उन्हें 5 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। शनिवार देर शाम दाखिल की गई रिमांड अर्जी में कहा गया था यह एक गंभीर मामला है जिसमें बेरहमी से किया गया हमला घातक हो सकता था। पुलिस का दावा है कि आरोपी बिभव कुमार शनिवार को घटनास्थल पर सबूत नष्ट करने के लिए गया था, तभी उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस ने अदालत में एक वीडियो पेश किया। जिसमें वह बिभव से पूछ रहे हैं कि उन्होंने राज्यसभा सांसद पर हमला क्यों किया, लेकिन वह जवाब नहीं दे रहा। दिल्ली पुलिस ने अदालत को बताया कि उपलब्ध कराया गया सीसीटीवी फुटेज खाली है और बिभव का जो फोन जब्त किया गया था, वह फॉर्मेट किया गया है, इसलिए उसे गिरफ्तार किया गया।

साजिशों की भी हद होती है: स्वाति

इस मामले में स्वाति मालीवाल ने गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने एक्स पर लिखा, “पहले मुझे बेरहमी से बिभव ने पीटा। थप्पड़ और लातें मारी। जब मैंने ख़ुद को छुड़ा के 112 कॉल करी, तो बाहर जाके सिक्योरिटी बुलायी और वीडियो बनाने लगा। मैं सिक्योरिटी को चीख चीख के बता रही थी की मुझे बहुत बेरहमी से बिभव ने पीटा है। वो पूरा लंबा हिस्सा वीडियो का एडिट कर दिया गया। सिर्फ़ 50 सेकंड रिलीज़ किए गये जब मैं सिक्योरिटी वालों को समझा समझा के खीज चुकी थी। अब फ़ोन फॉर्मेट करके पूरी वीडियो डिलीट कर दी ? सीसीटीवी की फुटेज भी ग़ायब! साज़िश की भी हद्द है!”

बता दें कि 13 मई की सुबह स्वाति मालीवाल के साथ दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पर मारपीट की गई। मारपीट उनके पीए बिभव कुमार ने की। इस मामले में 16 मई को आधिकारिक एफआईआर दर्ज कराई गई, जिसके बाद पुलिस ने 18 मई को बिभव कुमार को गिरफ्तार कर लिया। कोर्ट ने बिभव को 5 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोप है कि बिभव ने सबूतों के साथ छेड़छाड़ भी की है और अपना फोन भी फॉर्मेट कर दिया है। वो जाँच में सहयोग नहीं कर रहा है।

पानी की टंकी में हथियार, जवानों के खाने-पीने की चीजों में ज़हर… जानें क्या था ‘लाल आतंकियों’ का ‘पेरमिली दलम’ जिसे नेस्तनाबूत करने में लगे 39 साल, जंगल में चलाते थे ‘सरकार’

महाराष्ट्र के गढ़चिरौली इलाके में सोमवार (13 मई, 2024) को सुरक्षा बलों ने पेरमिली दलम नाम के नक्सल गिरोह को पूरी तरह से खत्म कर दिया है। यह संगठन अबूझमाड़ में नक्सलियों के हेडक्वार्टर का सप्लाई चेन माना जाता था। अबूझमाड़ के लिए नक्सल विरोधी अभियान में लगे पैरामिलिट्री और राज्य पुलिस के जवानों को यह सफलता 39 वर्षों के बाद मिली है। देश विरोधी कार्यों में लगे इस गैंग को खत्म करने में कई जवानों और अधिकारियों ने अपना योगदान दिया जिसमें बलिदान तक शामिल हैं।

सोमवार (13 मई) को सुरक्षा बलों को गढ़चिरौली इलाके में पेरमिली दलम के कुछ सदस्यों की मूवमेंट की सूचना मिली थी। इस सूचना पर खासतौर पर नक्सल विरोधी अभियान के लिए बनी C-60 टीम को मौके पर भेजा गया। तलाशी के दौरान नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर गोलियाँ बरसानी शुरू कर दी थीं। जवाबी कार्रवाई में 3 नक्सली मारे गए थे। इनमें महिला नक्सली भी शामिल हैं। मारे गए पुरुष नक्सली की पहचान कमांडर वासु के तौर पर हुई थी। तलाशी के दौरान इन नक्सलियों के पास से एक AK 47, एक कार्बाइन, एक इंसास राइफल, नक्सली साहित्य के साथ कई अन्य चीजें बरामद हुईं थीं।

39 वर्षों के लम्बे संघर्ष के बाद सुरक्षा बलों ने पेरमिली दलम को नेस्तोनाबूत करने में सफलता पाई है। इस संगठन के खात्मे के बाद सुरक्षा बलों ने नक्सलियों के अंतिम गढ़ अबूझमाड़ की तरफ मजबूती से कदम बढ़ा दिए हैं। अबूझमाड़ को अघोषित तौर पर नक्सलियों का हेडक्वार्टर भी कहा जाता है। पेरमिली दलम इस मुख्यालय के लिए सप्लाई-चेन का काम करता था।

क्या था पेरमिली दलम

पेरमिली दलम की स्थापना कुछ तेलगु युवकों द्वारा साल 1985 में की गई थी। बाद में यह संगठन गढ़चिरौली में सक्रिय हो गया। धीरे-धीरे अपना कैडर को बढ़ाता चला गया। शुरुआत में इस गिरोह ने वन विभाग के अधिकारियों को धमकाना शुरू किया। कुछ समय बाद इस संगठन का कनेक्शन अबूझमाड़ के जंगलों से जुड़ गया। माओवादी सोच को आगे बढ़ाने के लिए इस गैंग ने स्थानीय थानों पर तैनात पुलिस वालों के खिलाफ जनजातीय लोगों को भड़काना शुरू कर दिया।

धीरे-धीरे कैडर का विस्तार करने के साथ पेरमिली दलम ने महिलाओं को भी भर्ती करना शुरू कर दिया। गढ़चिरौली इलाके में पेरमिली दलम द्वारा जब हालात को बदतर कर दिया गया तब से अर्धसैनिक बलों ने वहाँ मोर्चा सँभाला। 39 वर्षों तक संघर्ष चला। सुरक्षा बलों के कई जवानों ने वीरगति पाई। सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचने के साथ क्षेत्र में विकास होने की वजह से तमाम युवाओं ने इस गिरोह से मुँह फेर लिया। अंत में सिमट रहे नक्सली आतंक के अभियान में पेरमिली दलम का सफाया हुआ।

कैसे आतंक फैलाता था पेरमिली दलम

ऑपइंडिया ने नक्सल विरोधी अभियान में तैनात रहे पैरामिलिट्री के एक अधिकारी से बात की। नाम न छापने की शर्त पर उन्होंने हमें बताया कि पेरमिली दलम भी अन्य नक्सली संगठनों की तर्ज पर पहले उन इलाकों को चिह्नित करता था जो शासन की नजर से दूर होते थे। जंगलों के बीच पहले कम संख्या में तैनात वन विभाग और पुलिस वालों को निशाना बनाया जाता था। बाद में इलाके को अपना क्षेत्र घोषित कर दिया जाता था जहाँ से समांतर सरकार चलाने के दावे होते थे।

हमें बताया गया कि पेरमिली दलम ने गढ़चिरौली के घने जंगलों में अपने ट्रेनिंग कैम्प खोल रखे थे। यहाँ वो जनजातीय समुदाय के युवाओं को सरकार के खिलाफ भड़का कर हथियार चलाने की ट्रेनिंग दिया करते थे। नक्सलियों द्वारा झारखंड और छत्तीसगढ़ की खदानों पर हमला कर के डेटोनेटर लूटे जाते थे जो पेरमिली दलम जैसे गिरोहों को बाँटे जाते थे। इन डेटोनेटर का उपयोग लैंडमाइंस बिछाने से ले कर बम बनाने तक में होता था। हथियारों को छिपाने के लिए पेरमिली दलम अन्य नक्सली संगठनों की तरह पानी की टंकियों में उन्हें भर के जमीन में दबा कर रखता था।

वर्तमान में नक्सल विरोधी अभियान में तैनात CRPF के एक अन्य अधिकारी ने हमें बताया कि पेरमिली दलम माओवाद की उस विचारधारा से प्रेरित था जिसका मकसद किसी भी रूप में दुश्मन का खात्मा होता है। उन्होंने हमें बताया कि सुरक्षा बलों पर हथियारों से हमलों के अलावा यह संगठन जवानों के खाने के सामान और पीने के पानी तक में जहर डालने की साजिश रच चुका है। अधिकारी ने आशा जताई कि जिस गति से नक्सल विरोधी अभियान जारी है यह उसमें को बड़ी बाधा नहीं आती तो जल्द ही भारत नक्सल मुक्त होगा।

अबूझमाड़ को ही क्यों बनाया हेडक्वार्टर

नक्सल विरोधी अभियान में तैनात CRPF अधिकारी ने हमें आगे अबूझमाड़ के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि अबूझमाड़ का अर्थ है जिसे कोई बूझ नहीं पाया। 4400 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जंगल की मैपिंग भी अभी तक ठीक से नहीं हो पाई है। जनजातीय बहुल होने की वजह से यहाँ किसी आधिकारिक मूवमेंट के लिए पहले राज्यपाल की अनुमति आवश्यक है। हमें यह भी बताया गया कि कई राज्यों से इस जंगल की सीमा लगने की वजह से भी कई बार नक्सलियों को पुलिस के सीमा विवाद का भी फायदा मिल जाता है। अबूझमाड़ का कुछ हिस्सा महाराष्ट्र तो कुछ आंध्र प्रदेश में पड़ता है।

120 लोगों की हुई घर-वापसी, छत्तीसगढ़ में ‘श्री वनवासी राम कथा’ में जुटी श्रद्धालुओं की भारी भीड़: जशपुर राजघराने के लाल ने पाँव पखार कर सनातन धर्म में किया स्वागत

छत्तीसगढ़ में प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने पाँव पखारकर 50 परिवारों के 120 लोगों की घर-वापसी कराई। ‘श्री वनवासी राम कथा’ का आयोजन कंदरी स्थित श्री राम मंदिर समिति में आचार्य श्री सतानंद महाराज जी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ। शनिवार (18 मई, 2024) को घर-वापसी कार्यक्रम में पहुँचे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव का भव्य स्वागत भी हुआ। उन्होंने 50 परिवारों के 120 लोगो की घर-वापसी संपन्न कराने में बड़ी भूमिका निभाई है। ज्ञात हो कि 9 कुंडीय महायज्ञ एवं ‘श्री वनवासी राम कथा’ का आयोजन श्री राम मंदिर समिति कंदरी में आचार्य सतानंद महाराज जी के सानिध्य में सम्पन्न हुआ।

इससे प्रभावित होकर ही लोग सनातन धर्म में घर-वापसी कर रहे हैं। बलरामपुर जिले के महज 35 किलोमीटर पर स्थित प्राचीन श्री राम मंदिर कंदरी में 10 मई को भव्य कलश यात्रा के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ करीब 5000 महिलाएँ कलश यात्रा में शामिल हुईं। करीब 3 किलोमीटर यात्रा कर रिगड़ नदी जनकपुर से जल लेकर मंदिर प्रांगण पहुँचे जहाँ काशी एवं प्रयागराज से आए ब्राह्मणों ने करीब डेढ़ लाख आहुति एवं करीब 50 लाख राम नाम का जप भक्तों द्वारा मंदिर प्रांगण में किया।

राम कथा सुनने के लिए प्रतिदिन निरंतर भीड़ देखने को मिला। मंदिर समिति के द्वारा प्रतिदिन सुबह शाम भंडारा की भी व्यवस्था की गई थी। लगातार कथा के मंच से जो लोग सनातन धर्म छोड़कर दूसरे धर्म में चले गए थे। करीब 150 महिला-पुरुष ने अपनी घर-वापसी कराई। कार्यक्रम के अंतिम दिन दिवंगत केंद्रीय मंत्री दिलीप सिंह जूदेव जी के बेटे प्रबल प्रताप सिंह जूदेव द्वारा मुख्य अतिथि के रूप में घर-वापसी का कार्यक्रम कराया गया।

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इन लोगों के पाँव भी पखारे। कार्यक्रम के आयोजक हनुमान जी महाराज रहे। पहली बार प्राचीन राम मंदिर में ऐतिहासिक कार्यक्रम संपन्न हुआ। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव जशपुर राजघराने से ताल्लुक रखते हैं और भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। उनके पिता दिलीप सिंह मध्य भारत में जनजातीय समाज के बीच एक लोकप्रिय नेता थे। उनके 3 बेटों में 2 की बीमारी की वजह से मृत्यु हो गई, प्रबल प्रताप सिंह जूदेव भाइयों में अकेले ही बचे हैं।

निशा हुईं राधिका, निदा बनीं निधि: 2 मुस्लिम लड़कियों की घरवापसी, हिन्दू युवकों से विवाह – एक की शादी के बाद धमकी, दूसरी का गला दबा मारा था भाई

उत्तर प्रदेश के बरेली और सीतापुर जिलों में 2 अलग-अलग मुस्लिम लड़कियों द्वारा हिन्दू धर्म में घर वापसी की गई है। बरेली में निशा नाम की लड़की सत्य सनातन स्वीकार करते हुए राधिका बन गईं। राधिका ने राजेश कुमार नाम के युवक से विवाह किया है। वहीं सीतापुर जिले में निदा बानो ने भी हिन्दू धर्म अपना लिया है। निदा अब निधि नाम से जानी जाएँगी। निधि ने रचित कुमार को अपना जीवन साथी चुना है। शनिवार (18 मई 2024) को सम्पन्न हुए इन दोनों विवाहों में वेदमंत्रों का उच्चारण किया गया और हिन्दू संगठनों द्वारा जय श्री राम के नारे लगाए गए।

बरेली में निशा बनीं राधिका

पहला मामला बरेली जिले का है। यहाँ अगत्स्य मुनि आश्रम में 18 मई को निशा अपने प्रेमी राजेश के साथ पहुँचीं। उन्होंने खुद को बालिग होने के प्रमाण पंडित के के शंखधर को सौंपे और राजेश से विवाह करने की इच्छा जताई। पंडित शंखधर ने राजेश और निशा ने शपथ-पत्र व अन्य कानूनी कागजात लिए और उसकी तस्दीक के बाद दोनों का विवाह वैदिक विधि-विधान के मुताबिक सम्पन्न करवाया। इस अवसर पर निशा ने राजेश के साथ हवन किया और हिन्दू देवी-देवताओं के जयकारे लगाए।

ज़ाकिर की बेटी निशा मूल रूप से बिजनौर के श्योहरा थानाक्षेत्र की निवासिनी हैं। वहीं राजेश भी बिजनौर जिले के नेहटौर इलाके में रहते हैं। निशा ने बताया कि राजेश उनके गाँव में अपनी रिश्तेदारी में आया करते थे। लगभग 5 साल पहले दोनों में जान पहचान हुई, जो बाद में प्यार में बदल गई। निशा के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे। निशा से विवाह के लिए राजेश कई जिलों में भटकते रहे। आखिरकार उन्हें बरेली के अगत्स्य मुनि आश्रम का पता चला। यहाँ दोनों का विधि-विधान से विवाह सम्पन्न हुआ। ऑपइंडिया के पास विवाह संबंधी सभी कागजात मौजूद हैं।

यह विवाह सम्पन्न करवाने वाले पंडित के के शंखधर ने ऑपइंडिया से बात की। उन्होंने बताया कि विवाह के बाद उनको बरेली के आला हजरत से जुड़े कुछ लोगों ने धमकियाँ दी हैं। उन पर मुस्लिम लड़कियों के अवैध तौर पर धर्मान्तरण का आरोप भी लगाया गया। पंडित शंखधर ने बताया कि विवाह करने वाली तमाम लड़कियाँ बालिग़ हैं और घर वापसी उनका स्वयं का निर्णय होता है। पुजारी ने प्रशासन से उम्मीद जताई है कि वो न सिर्फ धमकी देने वालों पर कड़ी कार्रवाई करेगा बल्कि उनकी सुरक्षा को भी लेकर संजीदगी से विचार करेगा।

सीतापुर में निदा बनीं निधि

घर वापसी का दूसरा मामला उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले से आया है। यहाँ निदा बानो नाम की लड़की ने सत्य सनातन स्वीकार किया है। निदा अब निधि नाम से जानी जाएँगी। उन्होंने रचित कुमार नाम के हिन्दू युवक से वैदिक विधि-विधान से विवाह किया। यह विवाह एक हिन्दू मंदिर में हुआ, जिसमें बाराती और घराती की भूमिका राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना नाम के एक संगठन के सदस्यों ने निभाई। शादी के दौरान जय श्री राम के नारे लगे। निदा और रचित ने एक साथ हवन-पूजन किया।

ऑपइंडिया ने राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना के अध्यक्ष विकास हिन्दू से बात की। उन्होंने हमें बताया कि परवेज की 20 वर्षीया बेटी निदा बानो और रचित में 3 साल से प्रेम-प्रसंग चल रहा था। निदा मूलतः इमलिया थानाक्षेत्र सीतापुर जिले की रहने वाली हैं। वहीं 22 साल के रचित कुमार निदा के पड़ोसी हैं। दोनों एक साथ एक ही स्कूल में पढ़े थे। निदा के परिजन इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं थे। प्रेम-प्रसंग की जानकारी होने पर निदा के भाई ने अपनी बहन का गला दबा कर मारने की भी कोशिश की थी। इन लोगों ने रचित के घर तक जाकर धमकियाँ दी थीं।

आखिरकार रचित और निदा ने विकास हिन्दू से सम्पर्क किया। विकास ने उन्हें सम्मान और सुरक्षा दिलाने का वादा किया। पहले निदा बानो का शुद्धिकरण करवा कर उनका नामकरण निधि के तौर पर किया गया। बाद में सीतापुर शहर के कालीपीठ मंदिर में दोनों का विवाह सम्पन्न हुआ है।

विवाह से निदा बेहद खुश हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें तीन तलाक और हलाला जैसे बातें सुन कर डर लगता था। हिन्दू धर्म में घर वापसी और रचित को अपने पति के तौर पर पाकर निदा बेहद खुश हैं। राष्ट्रीय हिन्दू शेर सेना ने प्रशासन से इस नवदम्पति को सुरक्षा देने की माँग की है। ऑपइंडिया के पास विवाह संबंधी सभी कागजात मौजूद हैं।

‘गिरफ्तारी से आजादी’ अपने घोषणापत्र में लिखने वाली कॉन्ग्रेस ने गिरफ्तार करवाया एक आम नागरिक को… ‘न्याय’ सिर्फ एक परिवार तक सीमित होगा?

कॉन्ग्रेस पार्टी के मेनिफेस्टो के बारे में लिखने पर ‘भीखू म्हात्रे’ नाम के सोशल मीडिया यूजर को बेंगलुरु पुलिस ने गोवा में जाकर गिरफ्तार कर लिया। खास बात ये है कि ‘भिकू म्हात्रे‘ कॉन्ग्रेस पार्टी के उसी मेनिफेस्टो के बारे में बता रहे थे, जिसमें कॉन्ग्रेस पार्टी ने ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ जैसी ‘बड़ी-बड़ी’ लिखी हैं। कॉन्ग्रेस पार्टी ने अपने मेनिफेस्टो में दावा किया है कि वो ‘मीडिया’, ‘सोशल मीडिया’, ‘बिना वजह गिरफ्तारी’ जैसी चीजों से लोगों की रक्षा करेगी। वो ‘जेल नहीं बेल’ को अधिकार बनाएगी। लेकिन ये सब कैसे?

कॉन्ग्रेस की जिन राज्यों में सरकारें हैं या फिर कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाले टूटे-फूटे गठबंधन इंडी अलायंस की, वहाँ सोशल मीडिया से लेकर मेनस्ट्रीम मीडिया तक का दमन किया जा रहा है। कर्नाटक की कॉन्ग्रेस सरकार की पुलिस गोवा से ‘भीखू म्हात्रे’ को गिरफ्तार करती है, तो कॉन्ग्रेस की सहयोगी डीएमके की पुलिस की बिहार से, आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार की पुलिस यूपी से बाकायदा ‘गिरफ्तारी के लिए किडनैपिंग’ करती है, तो ममता बनर्जी की सरकार संदेशखाली मुद्दे की कवरेज करने मात्र से मीडिया कर्मियों पर दनादन मुकदमे लाद देती है। वैसे, कॉन्ग्रेस नीत महाविकास आघाड़ी की महाराष्ट्र सरकार ने पत्रकारों के खिलाफ क्या क्या कदम उठाए, वो किसी को याद दिलाने भर की जरूरत नहीं। अर्नब गोस्वामी के मामले में उसे कोर्ट से बुरी तरह लताड़ भी मिली और वो बाइज्जत सभी मामलों में बरी भी हुए।

इन सबके बावजूद कॉन्ग्रेस पार्टी की हिम्मत देखिए, वो मेनिफेस्टो में ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ जैसे भारी भरकम शब्द का तो इस्तेमाल करती है, लेकिन भिकू म्हात्रे नाम से एक्स प्रोफाइल चलाने वाले को सिर्फ इसलिए कर्नाटक की बेंगलुरु पुलिस गिरफ्तार करती है, क्योंकि उन्होंने ‘कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में मुस्लिम शब्द के इस्तेमाल’ की बात जोर देकर कही, जिसे खुद कॉन्ग्रेस समर्थक नकार रहे थे। देखिए, कॉन्ग्रेस अपने मेनिफेस्टो में बेलगमा शक्तियों, कुर्की, जब्ती, गिरफ्तारी की सिर्फ ‘बात’ कैसे लिख रही है।

कॉन्ग्रेस मेनिफेस्टो का स्क्रीनशॉट

HT की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु में 29 अप्रैल 2024 को कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता ने साइबर क्राइम पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। ये शिकायत उनके किसी पोस्ट को लेकर थी, जिसमें सेक्शन 153(ए) और आईटी एक्ट की धारा 66(सी) के तहत केस दर्ज किया गया था। हालाँकि कहा ये जा रहा है कि वो ट्वीट भी डिलीट हो चुका है। इसके बावजूद बेंगलुरु पुलिस न सिर्फ गोवा पहुँची, बल्कि उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया।

दरअसल, उन्हें जिस ट्वीट को लेकर गिरफ्तार किया गया है, उसमें उन्होंने कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो की बात कही है। बेंगलुरु पुलिस की एफआईआर में भी इस बात का जिक्र है, जिसमें उन्होंने लिखा है, ‘ये हर लिबरल और पिद्दी के मुँह पर मारो, जो ये कह रहा है कि कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो में ‘मुस्लिम’ शब्द का जिक्र नहीं है। इसमें एससी/एसटी का भी जिक्र है।’ उन्होंने कॉन्ग्रेस के मेनिफेस्टो से जुड़ी सामग्री भी पोस्ट की थी। ये मामला उस बात से जुड़ा है, जिसमें कॉन्ग्रेस ने वेल्थ डिस्ट्रीब्यूशन की बात कही थी और उसमें इसे मुस्लिमों, एससी-एसटी को देने की बात थी। कॉन्ग्रेस और उसके समर्थक इस बात को नकार रही थी, जिसके बाक भिकू म्हात्रे ने मेनिफेस्टो का वो हिस्सा शेयर किया था, जिसमें मुस्लिमों और एससी-एसटी का जिक्र किया गया था। बस, इतना ही काफी था कर्नाटक की कॉन्ग्रेसी सरकार के लिए, और गोवा तक भेज दी बेंगलुरु पुलिस, करवा लिया भिकू म्हात्रे को गिरफ्तार…

बहरहाल, इस मामले में बीजेपी खुलकर भिकू म्हात्रे के साथ खड़ी हो गई है। बीजेपी ने कहा है कि वो भिकू म्हात्रे के साथ न सिर्फ खड़ी है, बल्कि उन्हें कानूनी सहायता भी प्रदान करेगी। बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े ने कड़े शब्दों में कॉन्ग्रेस की निंदा की, तो केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बेंगलुरु के सांसद तेजस्वी सूर्या से बात कर उन्हें कानूनी सहायता देने की बात कही है। वहीं, खुद तेजस्वी सूर्या ने कहा है, कॉन्ग्रेस का कदम बेहद गलत है। हम (बीजेपी) कोर्ट और कोर्ट के बाहर भिकू म्हात्रे के साथ है और लड़ाई पूरी तरह से लड़ी जाएगी।

वैसे, ये पूरा कॉन्ग्रेस की उस मनोवृत्ति को दिखाता है, जिसमें वो न्याय, समानता, अधिकार, गरीबी, ओबीसी और जाने कितनी बड़ी-बड़ी बातें करती रहती है। राहुल गाँधी एक तरफ तो पूरे समुदाय को ही गालियों से नवाजते हैं, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पर अभद्र टिप्पणियाँ करते हैं, वहीं दूसरी तरफ कोई कॉन्ग्रेस की बातों का ही समर्थन कर दे और वो कॉन्ग्रेस पार्टी को अपने खिलाफ जान पड़े, तो तुरंत कानूनी कार्रवाई करती है। जिन राज्यों में कॉन्ग्रेस की सरकारें हैं, वहाँ स्थानीय तौर पर विरोधियों के दमन की बातें आती हैं, तो जहाँ कॉन्ग्रेस की सरकारें नहीं हैं, वहाँ पुलिस भेजकर लोगों को गिरफ्तार करती है। भिकू म्हात्रे का मामला ऐसा ही है। ऐसे में सवाल यही उठता है कि क्या अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार सिर्फ एक ही परिवार के पास है? बाकी लोगों के लिए इसका कोई मतलब नहीं, सिवाय इस बात से कि वो कॉन्ग्रेस को ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर वोट दें और फिर कॉन्ग्रेस उन्हें ही कुचलती रहे।

BJP रैली से लौट रहे दलित को मुस्लिम इलाके में लोहे की पाइप से मारा, दी जाति वाली गालियाँ: जीशान, नसीब, मोंटी खान सहित 30-40 पर FIR

झारखंड के हजारीबाग से दलित उत्पीड़न का मामला सामने आया है। यहाँ दलित समुदाय के एक युवक को कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा लोहे की पाइप से पीटा गया और जातिसूचक गालियाँ दी गईं। आरोपितों के नाम जीशान, नसीब और मोंटी खान है। घटना में 30-40 अन्य अज्ञात हमलावर भी शामिल बताए गए हैं। घटना के समय पीड़ित दिवाकर नायक अपनी बाइक से भाजपा की रैली से लौट रहे थे। अशोक नायक के साथ विक्की राणा नाम का एक अन्य युवक भी घायल हुए हैं। घटना शनिवार (18 मई 2024) की है। पुलिस ने इस मामले में FIR दर्ज कर के 3 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है।

झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने पीड़ित द्वारा थाने में दी गई तहरीर को अपने X हैंडल पर शेयर किया है। घटना हजारीबाग के बड़कागाँव थानाक्षेत्र की है। यहाँ के रहने वाले अनुसूचित जाति के दिवाकर कुमार नायक ने बताया कि शनिवार को वो अपने 150 साथियों के साथ भाजपा की रैली में शामिल हुए थे। वापसी में वो बाइक से अपने साथी विक्की राणा के साथ गोंदलपुरा लौट रहे थे। दिवाकर की बाइक सबसे पीछे चल रही थी। इसी दौरान बादम नाम के मुस्लिम बहुल मोहल्ले में उनको रोक लिया गया।

दिवाकर को रोकने वाले में बादम निवासी जीशान, नसीब और मोंटी खान के साथ 30 से 40 अन्य अज्ञात लोग बताए जा रहे हैं। आरोप है कि इन सभी ने पीड़ित को जातिसूचक शब्द बोलते हुए गंदी-गंदी गालियाँ देनी शुरू कर दीं। कुछ देर बाद वहाँ मौजूद लोगों ने पास की दुकान से लोहे की पाइप निकाल कर दिवाकर और विक्की राणा को मारना शुरू कर दिया। हमले में दिवाकर के गले और चेहरे पर चोटें आईं। इस दौरान भीड़ में शामिल अन्य लोग दिवाकर और विक्की को लात-घूँसों से भी पीटते रहे।

शिकायत में पीड़ित ने बताया है कि उनके शरीर में आई चोटों की वजह से फिलहाल वह चलने-फिरने में असमर्थ हैं। विक्की राणा को भी बुरी तरह से घायल बताया गया है। पीड़ित ने अपनी शिकायत के अंत में आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने 3 नामजदों सहित 30-40 अन्य अज्ञात लोगों पर FIR दर्ज कर ली है। अब तक 3 हमलावरों के गिरफ्तार होने की खबर है। अन्य आरोपितों की पहचान और पड़ताल की जा रही है। भाजपा ने इस घटना को राज्य सरकार की कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान बताया है।

मिली जानकारी के मुताबिक इस मामले में मुस्लिम पक्ष भी पुलिस में शिकायत देने की तैयारी कर रहा है। उनका आरोप है कि बड़कागाँव मस्जिद के पास आपत्तिजनक नारेबाजी की गई थी, जिससे माहौल बिगड़ गया। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जाँच कर रही है।