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सरकारी कर्मचारी को पीटने वाले 2 हमलावर धराए, मदरसे का सर्वे करने पर मुस्लिम भीड़ ने की थी मारपीट: प्रिंसिपल के साथ हुई थी लूटपाट भी

गुजरात के अहमदाबाद में मदरसे का सर्वे करने गए एक सरकारी कर्मचारी की पिटाई की गई है। पीड़ित कर्मी एक स्कूल का टीचर है। घटना के समय पीड़ित एक मदरसे का फोटो खींच रहा था। इसी दौरान मुस्लिमों की एक भीड़ वहाँ पहुँच गई और मारपीट शुरू कर दी। घटना शनिवार (18 मई, 2024) की है। पुलिस ने कुल 35 हमलावरों के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। अब तक 2 हमलावरों को गिरफ्तार किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग (NCPCR) के निर्देश पर गुजरात का शिक्षा विभाग पूरे प्रदेश में मदरसों का सर्वेक्षण करवा रहा है। इसी दौरान एक टीम अहमदाबाद के दरियापुर इलाके में गई थी। इस टीम का नेतृत्व सरकारी स्कूल के एक प्रिंसिपल संदीप पटेल कर रहे थे। प्रिंसिपल एक मदरसे के आगे पहुँचे जो उस समय बंद था। वो मदरसे के आगे खड़े हो कर फोटो खींचने के साथ अन्य कागजात बनाने लगे। इसी दौरान वहाँ 30-35 लोगों की भीड़ पहुँच गई। उन लोगों ने प्रिंसिपल से फोटो खींचने की वजह पूछी।

घटना सैयद सुल्तान मस्जिद के पास की है। संदीप पटेल ने भीड़ को पूरी वजह बताई और कहा कि वो ऐसा सरकारी आदेश पर कर रहे थे। हालाँकि इस सफाई का भीड़ पर कोई असर नहीं पड़ा। उन लोगों ने प्रिंसिपल की पिटाई शुरू कर दी। पिटाई के दौरान संदीप के साथ लूटपाट भी की गई। जैसे-तैसे पीड़ित प्रिंसिपल भीड़ से चंगुल से छूट पाया। संदीप ने थाने में जा कर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत में उन्होंने भीड़ पर सरकारी काम में बाधा डालने और अपने साथ लूटपाट करने का आरोप लगाया।

संदीप पटेल ने अपनी शिकायत में आरोपितों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। पुलिस ने मामले में FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। अब तक 2 हमलावरों की गिरफ्तारी की सूचना है। घटनास्थल से फुटेज और अन्य साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं। केस दर्ज होने के बाद कई हमलावर फरार बताए जा रहे हैं जिनकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। बताते चलें कि गुजरात में चल रहे मदरसों के राज्यव्यापी सर्वे में वहाँ के बुनियादी ढाँचे, मैनेजमेंट और अग्नि सुरक्षा आदि के मापदंड जाँचे जा रहे हैं।

‘खिलाड़ियों की थोड़ी सी जिंदगी निजी भी रहने दो यार’: प्राइवेसी की चिंताओं के बीच प्रदर्शन पर भी पड़ता है फर्क, रोहित शर्मा का गुस्सा बिल्कुल सही

क्या खिलाड़ियों का निजी जीवन नहीं है? क्या वो प्रैक्टिस के दौरान किसी से चुपचाप बात भी नहीं कर सकते? क्या उनके जीवन के हर सेकंड को टीवी पर दिखाना जरूरी है? क्या खिलाड़ियों के पास निजी जीवन जैसा कुछ बचा है? ये सवाल अक्सर उठता रहा है, लेकिन अब इसलिए उठा है, क्योंकि भारतीय क्रिकेट के सबसे बड़े चेहरों में से एक रोहित शर्मा ने इसके खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने प्रसारण चैनल स्टार स्पोर्ट्स को सार्वजनिक तौर पर फटकार भी लगाई है।

स्टार स्पोर्ट्स के कैमरामैन और पूरी क्रू को अपने आसपास ही पाने वाले रोहित शर्मा के सब्र का बाँध आखिर टूट गया। उन्होंने स्टार स्पोर्ट्स को फटकार लगाते हुए खिलाड़ियों को बख्शने के लिए भी कहा है। रोहित शर्मा ने इस मामले को लेकर एक्स पर लंबा पोस्ट लिखा।

रोहित शर्मा ने लिखा, ‘क्रिकेटर्स की जिंदगी काफी दखलंदाजी वाली बन गई है। कैमरे हमारे हर कदम और बातचीत को रिकॉर्ड कर रहे हैं, जो हम अपने निजी तौर पर अपने दोस्तों, साथियों, ट्रेनिंग के दौरान और मैच वाले दिन करते हैं। स्टार स्पोर्ट्स ने रिकॉर्डिंग के लिए मना करने के बाद भी न सिर्फ वो किया, बल्कि उसे ऑन एयर भी कर दिया, जो गोपनीयता का उल्लंघन है। एक्सक्लूसिव कंटेंट पाने और सिर्फ व्यूज पाने अलावा इंगेजमेंट पर फोकस करना एक दिन फैन्स, क्रिकेटर्स और क्रिकेट के बीच विश्वास खो देगा।’

रोहित शर्मा ने उठाया बड़ा सवाल

रोहित शर्मा ने जो मुद्दा उठाया है, वो मुद्दा उनका अकेले का नहीं है। बहुत सारे खिलाड़ी इस बात से परेशान होते हैं, लेकिन बात सिर्फ खिलाड़ियों तक ही सीमित नहीं है। उनकी लाइफस्टाइल को बेचने का भी उन प्रसारकों के लिए जरूरी हो गया है, क्योंकि उसके ही कोई प्रोडक्ट बिकेगा और फिर उससे कमाई होगी। एक्सक्लूसिव फुटेज के प्रसारण के दौरान उनके पास पैसा देने वाले ब्रांड यानी स्पॉन्सर्ड भी होते हैं, ऐसे में वो भी उस महीन रेखा को भूल जाते हैं, जिसका ध्यान रखा जाना नितांत आवश्यक है।

दरअसल, भारत में क्रिकेटरों की जिंदगी से जुड़े हरेक पहलू को लोग जानना चाहते हैं। सोशल मीडिया के इस ‘रीलयुग’ में खिलाड़ियों का होना ही उसके व्यूज और उससे जुड़ी कमाई की गारंटी बन जाती है। फिर सैकड़ों-हजारों करोड़ रुपए देकर प्रसारण अधिकार हासिल करने वाली ब्रॉडकास्टिंग कंपनियों का भी क्या ही कसूर है? उन्हें भी प्रॉडक्ट बेचना है। उन्हें एयर टाइम भी बेचना है और उसके लिए भी एक भारी भरकम टीम काम पर लगी होती है। ऐसे में कुछ एक्सक्लूसिव ‘मसाला’ उनके लिए फायदे का सौदा हो जाता है।

कुछ दिन पहले ही रोहित शर्मा का एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें वो स्टार स्पोर्ट्स के कैमरामैन को रिकॉर्डिंग से मना कर रहे थे। लेकिन कैमरामैन ने न सिर्फ उन पलों को रिकॉर्ड किया, बल्कि रोहित शर्मा के रोकने के बावजूद स्टार स्पोर्ट्स की प्रोग्रामिंग टीम ने उसे ऑन एयर भी कर दिया। दरअसल, यहाँ चैनल के लिए काम कर रहे प्रोग्रामरों पर भी दबाव होता है, ‘हिट’ कार्यक्रमों को देने का। ऐसे में कुछ ‘मसाला’ उन्हें वो भी करने की ताकत दे देता है, जैसा रोहित शर्मा के साथ हुआ। सोचिए, ये किस तरह के बाजारीकरण के दौर में हम आ गए हैं, जहाँ किसी खिलाड़ी की जिंदगी का हरेक सेकंड किसी चैनल के लिए बेचने का प्रोडक्ट हो सकता है।

वैसे, एक और वाकया कुछ दिन पहले रोहित शर्मा के साथ हुआ था, जब केकेआर की सोशल मीडिया टीम ने रोहित शर्मा और अभिषेक नायर के बीच की निजी बातचीत भी सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दिया था। उस वीडियो के सामने आने के बाद तमाम तरह की सुगबुगाहट शुरू हो गई। कुछ ही घंटों में वो वीडियो डिलीट कर दिया गया, लेकिन उस वीडियो का जो असर होना था, वो हो गया। ऐसे में रोहित शर्मा जो सवाल उठा रहे हैं, वो बिल्कुल वाजिब है।

रोहित शर्मा का गुस्सा भी वाजिद लगता है। लेकिन रोहित शर्मा ही नहीं, बल्कि हमें भी ये सोचने की जरूरत है कि स्टार स्पोर्ट्स की आखिर ऐसी क्या मजबूरी थी कि उसने रोहित शर्मा के मना करने के बावजूद उनका फुटेज जारी करने का जोखिम उठाया। वैसे, इसका सीधा जवाब बाजार से जुड़ेगा, जिसके लगभग हम सभी गुलाम बन चुके हैं, हम मानें या न मानें।

आज के युग में जहाँ विराट कोहली अपनी शादी की फुटेज बाहर न जाए, इसके लिए इटली में जाकर शादी करते हैं। महेंद्र सिंह धोनी चोरी-चुपके शादी करते हैं। ये खिलाड़ी बाहर तो कूल दिखते हैं, लेकिन जब बात निजी जिंदगी की आती है, तो ये भी बाजार के दबाव में आ जाते हैं, या फिर बाजार से फायदा उठाने की कोशिश करने लगते हैं। विराट कोहली ने अपनी बच्ची का चेहरा टीवी स्क्रीन पर न दिखे, इसके लिए काफी मशक्कत की थी। फिल्मी सितारों की शादियों के एलबम बिकने तक की खबरें आती रही हैं। ऐसे में जब हम सभी बाजार से जुड़ चुके हैं, तो बाजार के खिलाड़ियों चाहे वो क्रिकेटर हों या ब्रॉडकास्टिंग कंपनी स्टार स्पोर्ट्स, सभी को निजी जीवन को पहचानने और उसे स्पेस देने की जरूरत है, क्योंकि हमने इसी बाजार के दबाव और फोटो के चक्कर में प्रिंसेज डायना जैसे हादसे भी देखे हैं, तो कैमरों के दबाव में आकर खिलाड़ियों का बर्बाद होना भी देखा है। ऐसे में ‘कुछ तो निजी रहने दो न यार…।’

बिना भाषण दिए सभा छोड़ भागे राहुल गाँधी और अखिलेश यादव: जहाँ से सांसद रहे जवाहरलाल नेहरू, वहाँ कॉन्ग्रेस-सपा की घनघोर बेइज्जती

उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के पास स्थित फूलपुर में रविवार (19 मई 2024) को आयोजित राहुल गाँधी और अखिलेश यादव की संयुक्त रैली में हंगामा हो गया। दोनों नेताओं के मंच पर पहुँचते ही समर्थक बेकाबू हो गए और सुरक्षा घेरा तोड़ दिया। धक्का-मुक्की के दौरान पुलिस ने लाठी चलाई तो भगदड़ मच गई। इसके बाद दोनों नेता वहाँ से चले गए। इस हंगामे में कई लोग चोटिल हो गए हैं।

जब मंच राहुल गाँधी और अखिलेश यादव पहुँचे तो उनके समर्थक सुरक्षा घेरा तोड़कर मंच की ओर बढ़ने लगे। इस दौरान अखिलेश ने समर्थकों से शांत रहने की भी अपील की, लेकिन उनकी बात का किसी ने ध्यान नहीं दिया। अखिलेश के साथ राहुल ने भी हाथ उठाकर लोगों से शांत रहने की अपील की। बेकाबू भीड़ को रोकने के दौरान पुलिस से भी धक्का-मुक्की की गई। इसके बाद लाठी भाँजनी पड़ी।

इतना ही नहीं, जब दोनों नेताओं की बात किसी ने नहीं सुनी तो अखिलेश यादव नाराज हो गए। वे उठे और मंच से जाने लगे। इस दौरान मंच पर मौजूद नेताओं ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन वे रूके नहीं और मंच के पीछे बने हेलिपेड की तरफ चल पड़े। अखिलेश यादव के साथ राहुल गाँधी भी मंच से उतर आए। दोनों नेता रैली को संबोधित किए बिना ही वहाँ से रवाना हो गए।

दरअसल, फूलपुर से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी अमरनाथ मौर्य मैदान में हैं। उनके प्रचार के लिए अखिलेश यादव और राहुल गाँधी पडिला पहुँचे थे। वहीं, फूलपुर से भाजपा ने प्रवीण पटेल को चुनावी मैदान में उतारा है। इस बार INDI गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी और कॉन्ग्रेस एक साथ मैदान में उतरी है। फूलपुर से कभी जवाहरलाल नेहरू सांसद चुने गए थे।

दोनों नेताओं की फूलपुर और प्रयागराज में संयुक्त रैली थी। फूलपुर से दोनों को बिना भाषण दिये ही वापस लौटना पड़ा। इसके बाद वे प्रयागराज पहुँचे और वहाँ दोनों ने सत्ताधारी भाजपा पर निशाना साधा। प्रयागराज से कॉन्ग्रेस के उज्ज्वल रमण सिंह खड़े हैं। उनके समर्थन में यमुना पार के कछार के मुंगारी गाँव में रैली का आयोजन किया गया था।

जैद और जुहैब ने साथियों सहित किया दलित लड़की का किया अपहरण, मिन्नत करने गई माँ को दी जातिसूचक गाली: इस्लाम कबूल करवा के निकाह करने की धमकी

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक दलित युवती के अपहरण का मामला सामने आया है। पीड़िता की माँ ने अपनी बेटी के धर्मांतरण की साजिश की आशंका जताई है। आरोपितों के नाम जुहैब, साहिल, भोलू और जैद हैं। पीड़िता की माँ को जातिसूचक शब्द बोले गए। पुलिस का दबाव बनता देख कर आरोपित पीड़िता को उसके घर के पास छोड़ कर भाग गए हैं। केस दर्ज कर के जाँच और आरोपितों की तलाश की जा रही है। घटना शुक्रवार (17 मई, 2024) की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना लखनऊ के थानाक्षेत्र महिलाबाद की है। यहाँ की रहने वाली दलित समुदाय की एक महिला ने थाने में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में महिला ने बताया कि शुक्रवार की शाम लगभग 7:30 बजे वह अपनी बेटी के साथ खेतों से लौट रही थी। जब महिला बख्तियारपुर के पास पहुँची तब 2 बाइकों पर सवार 4 युवक वहाँ आ धमके। इन सभी ने शिकायतकर्ता की बेटी को जबरन खींच कर अपनी बाइक पर बिठा लिया। महिला शोर मचाते हुए बाइक सवारों के पीछे दौड़ी लेकिन तब तक आरोपित फरार हो चुके थे।

पीड़िता ने आरोपितों के तौर पर जुहैब, साहिल, भोलू और जैद की पहचान की। उसी रात वह जुहैब के घर पहुँची। महिला ने जुहैब के घर वालों से अपनी बेटी को मुक्त करने की मिन्नत की। आरोप है कि इन मिन्नतों का जुहैब के परिजनों पर कोई असर नहीं पड़ा। उन्होंने पीड़िता माँ से बताया कि वो लड़की को इस्लाम कबूल करवा के उसका निकाह जुहैब से करवाएँगे। आखिरकार पीड़िता ने अपने पति को सारी बात बताई। पति-पत्नी ने आरोपितों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने जुहैब, जैद, भोलू और साहिल के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी। पुलिस की कार्रवाई शुरू होते ही आरोपित पीड़िता को उसके घर के पास छोड़ दिया और भाग निकले। पुलिस मामले में जरूरी कानूनी कार्रवाई कर रही है।

यूरोपीय मीडिया भारत के बारे में दिखाता है झूठी खबरें: ब्रिटिश पत्रकार ने कहा – PM मोदी की रैली में जाती हैं बुर्का वाली महिलाएँ, फिर भी बताते हैं मुस्लिम विरोधी

पश्चिमी मीडिया भारत को लेकर पूर्वाग्रह से ग्रसित है। वह भारत को लेकर उन्हीं खबरों को तवज्जो देती है, जो सुनी-सुनाई बातों पर विश्वास करती है। हालाँकि, पश्चिम मीडिया जिस तरह भारत का चित्रांकन अपनी खबरों में करती है, उससे बिल्कुल अलग भारत है। यहाँ ना ही धार्मिक आधार पर विभाजन है और ना ही अल्पसंख्यकों के प्रति किसी तरह का नफरत है। एक ब्रिटिश पत्रकार ने भी इस हकीकत को स्वीकार किया है।

ब्रिटेन की अखबार ‘डेली एक्सप्रेस’ के असिस्टेंट एडिटर सैम स्टीवेन्सन ने कहा, “मुझे लगता है कि अब भारत की आलोचना के साथ-साथ काफी कुछ कहने का समय आ गया है। अब भारत विरोधी ‘बकवास’ का समय खत्म हो गया। हमें यहाँ आकर नए भारत की सच्ची एवं सकारात्मक कहानियाँ बताने की जरूरत है।”

पत्रकार स्टीवेन्सन ने आगे कहा, “दुर्भाग्य से लंदन और पूरे यूरोप में मौजूद बहुत-सी कहानियाँ भारत के बारे में सिर्फ नकारात्मक कहानियाँ हैं। हम धार्मिक विभाजन जैसी बातें सुन रहे हैं, लेकिन हमने ज़मीन पर ऐसा नहीं देखा है। हमने मुस्लिम महिलाओं को पूरे बुर्के में नरेंद्र मोदी की रैली में आते देखा है।” उन्होंने कहा, “यह इस जगह के बारे में बिल्कुल शानदार बात है।”

ब्रिटिश पत्रकार ने कहा कि वे इस सच्चाई को दुनिया के सामने रखेंगे। उन्होंने कहा, “हमने इस महान और अद्भुत राष्ट्र के बहुलवाद के उदाहरण देखे हैं। हम इस राष्ट्र के बारे में ब्रिटिश मीडिया के कवरेज को बढ़ाने के लिए यहाँ हैं। हम यहाँ सच्चाई तक पहुँचने और कुछ वास्तविक तथ्य खोजने और उन्हें अपने घर लंदन लाने के लिए हैं।”

स्टीवेन्सन ने कहा कि नया भारत की 5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है। इसके अलावा भी बहुत कुछ सकारात्मक खबरें हैं भारत के बारे में, जिसे दुनिया को बताया जा सकता है। सैम स्टीवेन्स इस समय लोकसभा चुनावों को कवर करने के लिए भारत में हैं। इसी दौरान रविवार (19 मई 2024) को इस संबंध में ANI से बात की।

स्टीवेंसन ने आगे कहा कि पूरे यूरोप और पश्चिम में भारत के बारे में धारणा अच्छी नहीं है। उन्होंने बताया, “हमें यहाँ की नकारात्मक कहानियाँ सुनाई जाती हैं। यह शर्म की बात है, क्योंकि लोगों को यहाँ आने, इसे अपनी आँखों से देखने, इसे जीने, इसमें साँस लेने, इससे मिलने की ज़रूरत है। लोग ज़मीनी स्तर पर लोगों से बात करें। आप देखेंगे कि सबकी भलाई के लिए नया भारत और ब्रिटेन एक वैश्विक ताकत बन सकते हैं।”

ब्रिटिश पत्रकार ने कहा कि दोनों देशों की संस्कृति, भाषा, विरासत और इतिहास साझा है। स्टीवेन्सन ने कहा, “ब्रिटिश मीडिया उस चीज़ को सरल बनाने का प्रयास कर रहा है जो बहुत जटिल है। वे कह रहे हैं कि मोदी इस्लाम विरोधी हैं, लेकिन जब आप जमीन पर उतरते हैं और मुस्लिमों से बात करते हैं, हिंदुओं-सिखों से बात करते हैं तो आप देखेंगे कि भारत सभी संस्कृतियों या धर्मों को स्वीकार कर रहा है।”

कैप्टन गोपीचंद थोटाकुरा: आंध्र प्रदेश में जन्मा वो पायलट, जो अंतरिक्ष यात्रा पर जाकर रचने वाला है इतिहास, राकेश शर्मा के बाद सिर्फ दूसरे भारतीय

भारतीय मूल के पायलट गोपीचंद थोटाकुरा इतिहास रचने जा रहे हैं। वो अरबपति व्यवसाई जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू-ओरिजिन की कमर्शियल अंतरिक्ष यात्रा का हिस्सा हैं, जो रविवार (19 मई 2024) को उड़ान भरेगी। वह अंतरिक्ष की उड़ान भरते ही ऐसा करने वाले दूसरे भारतीय होंगे। इससे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने यह कारनामा किया था।

अमेरिका में रहने वाले गोपीचंद को ब्लू ओरिजिन के न्यूशेपर्ड-25 (NS-25) मिशन के लिए चालक दल में चुना गया है। उनके अलावा चालक दल में दुनिया भर के पाँच अन्य अंतरिक्ष यात्री भी हैं। यह मिशन न्यूशेपर्ड कार्यक्रम के लिए सातवाँ मानव युक्त मिशन है और कुल 25वाँ। कैप्टन गोपीचंद के साथ ब्लू ओरिजिन के NS-25 मिशन में क्रू मेंबर मेसन एंजेल, सिल्वेन चिरोन, केनेथ एल. हेस कैरोल स्कालर के साथ पूर्व वायुसेना कप्तान एड ड्वाइट भी होंगे। कंपनी के अनुसार मिशन को पश्चिम टेक्सास में लॉन्च साइट वन लान्च किया जाएगा।

कैप्टन गोपीचंद ने कहा कि ‘ब्लू ओरिजिन के NS-25 मिशन के साथ इस ऐतिहासिक यात्रा पर निकलने में भारत का अंतरिक्ष यात्रा में प्रतिनिधित्व करना गर्व की बात है और मैं सम्मानित महसूस कर रहा हूँ। भारत दुनिया भर में अंतरिक्ष रिसर्च में अपनी पहचान बना रहा है। यह यात्रा ग्लोबल लेवल पर मानवीय प्रयास और सरलता की भावना का प्रतीक है। मुझे उम्मीद है कि यह रिसर्च STEAM प्रोफेशनल्स की जनरेशन को प्रेरित करेगा। हम अंतरिक्ष रिसर्च की सीमाओं को एक साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

कौन हैं कैप्टन गोपीचंद?

आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में जन्मे गोपीचंद आज 30 साल के हैं। वह एक उद्यमी और कुशल पायलट हैं। ब्लू ओरिजिन वेबसाइट के मुताबिक, गोपीचंद एक पायलट और एविएटर है। जिन्होंने सड़क पर गाड़ी चलाने से पहले ही हवाई उड़ान भरना शुरू कर लिया था। वह कमर्शियली जेट उड़ाने के अलावा, बुश, एरोबेटिक और सीप्लेन के साथ-साथ ग्लाइडर भी उड़ा चुके हैं। वह एक अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जेट पायलट के रूप में भी काम कर चुके हैं। अपनी विमानन उपलब्धियों के अलावा, एम्ब्री-रिडल एरोनॉटिकल यूनिवर्सिटी से स्नातक पूरा कर चुके गोपीचंद यात्रा के शौकीन हैं। उन्होंने माउंट किलिमंजारो पर सफलतापूर्वक चढ़ाई की है।

बता दें कि साल 1984 में रूसी सोयुज टी-11 पर राकेश शर्मा की यात्रा के बाद वह अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बन जाएँगे। राकेश शर्मा के बाद केवल भारतीय मूल के लोग ही अंतरिक्ष में गए हैं। इस लिस्ट में कल्पना चावला (1997), सुनीता विलियम्स (2006) और राजा चारी (2021) का नाम भी शामिल हैं।

किर्गिज्स्तान में जम कर हो रही पाकिस्तानी छात्रों की पिटाई, पाक सरकार के साथ अब ‘उम्माह’ को ही दे रहे गाली: अपने खर्च पर भागना पड़ा लाहौर

किर्गिज्स्तान में पाकिस्तानी छात्रों को लगातार स्थानीय लोग निशाना बना रहे हैं। भारतीय छात्रों के लिए भी एडवायजरी जारी की गई है, कि वो अपने घरों से बाहर न निकलें, ताकि किसी गलतफहमी का शिकार वो न बने सकें। इस बीच, पाकिस्तान के बहुत से छात्र किर्गिज्स्तान से भागकर अपने देश वापस लौट रहे हैं। वो अपनी सरकार से गुस्सा हैं कि सरकार ने उनकी कोई मदद नहीं की, जबकि भारतीय छात्रों के लिए भारत सरकार हमेशा खड़ी रहती है। ऐसे में पाकिस्तानियों का गुस्सा अपने ही देश पर निकल रहा है, साथ ही उस पूरी इस्लामिक जमात पर भी, जो ‘इस्लामिक उम्माह’ यानी एकजुटता के नाम पर सिर्फ दिखावा करते हैं, लेकिन जब भी उन्हें जरूरत होती है, वो एक-दूसरे का साथ नहीं देते।

किर्गिज्स्तान से भाग कर लाहौर पहुँचे एक युवक ने कहा, “किर्गिज्स्तान में कोई भी जगह हमारे लिए सुरक्षित नहीं। स्थानीय लोगों का साथ वहाँ की पुलिस भी दे रही है। घटना की रिपोर्ट करने के 2-3 घंटों के बाद पुलिस पहुँच रही है और खानापूर्ति करके निकल जा रही है। छात्र ने बताया कि किर्गिज्स्तान में 10 हजार से ज्यादा छात्र हैं, जिसमें से अधिकाँश के साथ ज्यादतियाँ हो रही हैं, लेकिन उनकी कोई मदद नहीं की जा रही है। सभी छात्र अपनी किस्मत के भरोसे हैं।”

खास बात ये है कि जो छात्र खुद के दम पर किर्गिज्स्तान से भागकर लाहौर पहुँचे, उनका स्वागत करने पाकिस्तान के गृहमंत्री तक पहुँच गए, जबकि होना ये चाहिए था कि अगर सरकार उन्हें लाती, तब स्वागत करती। कौन सा वो खुशी-खुशी लौट रहे हैं। इस बात से पाकिस्तानी बेहद नाराज नजर आ रहे हैं।

छात्र ने बताई विवाद की असली जड़

इस पूरे विवाद की शुरुआत की कहानी को बताते हुए पाकिस्तानी छात्र ने कहा, ‘इजिप्टियन छात्रों ने एक स्थानीय छात्र को प्लेन में पीट दिया। इसका उन्होंने वीडियो बनाया और सोशल मीडिया पर डाल दिया। ये वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय लोग भड़क उठे और जहाँ भी विदेशी छात्र मिले, उन्हें निशाना बनाया जाने लगा। स्थानीय लोगों ने छात्रों के ठिकानों में तलाशी ली। वो विदेशी छात्रों को ढूँढकर पीट रहे हैं। उन्होंने पूरी रात हमले किए।’ छात्र ने कहा कि यूनिवर्सिटी प्रशासन से जुड़े लोग झूठ बोल रहे हैं कि हालात सामान्य है, वहाँ कुछ भी सामान्य नहीं है और कोई भी विदेशी छात्र सुरक्षित नहीं है।

मुस्लिम उम्माह पर फूटा गुस्सा, पाकिस्तानियों ने बकी गालियाँ

पूजा सांगवान नाम की एक्स यूजर ने मुस्लिम उम्माह पर बरस रहे पाकिस्तानियों के ट्वीट्स को एक जगह पर रखा है। उन्होंने लिखा, “पाकिस्तानी छात्रों पर किर्गिज्स्तानी लोगों के हमले के बाद पाकिस्तानी इस्लामिक कट्टरपंथियों को समझ में आ गया है कि ‘उम्माह’ नाम की कोई चीज नहीं है। इन हमलों के बाद तुर्किश मुस्लिम उम्माह भी पाकिस्तानी उम्माहजियों पर हमले कर रहे हैं।”

पूजा ने पश्तून मैटर्स नाम के एक्स हैंडल का स्क्रीनशॉट पोस्ट किया है, जिसमें लिखा है, “भाड़ में जाए उम्माह, पाकिस्तान पहले…”

शेर खान नाम का पाकिस्तानी यूजर अपने देश के न्यूक्लियर वेपन को दिखा रहा है। उसने लिखा, ‘भाड़ में जाए उम्माह और ऐसी कोई भी चीज। हम एक परमाणु संपन्न देश हैं और सभी मुस्लिम देशों में हमारी सेना सबसे बड़ी है। हमें हरेक देश की बैंड बजानी चाहिए।’ अरे भाई, जनाब शेर खान की चले तो वो हर मुस्लिम देश में घुसकर उसे सबक सिखाना चाहेंगे।

ब्लैकपिल्ड नाम के पाकिस्तानी ने लिखा, “समय आ गया है जब पाकिस्तान राष्ट्रवादी सैन्यवाद अपनाए। भाड़ में जाए उम्माह और हर वो व्यक्ति, जो पाकिस्तान के खिलाफ है। उम्माह की बात करने वालों को तुर्की डिपोर्ट कर दो, जिन्हें लोकल लोग जकर तोड़ (पीटेंगे) देंगे।”

दरअसल, स्थानीय किर्गिज्स्तानियों के हमलों का समर्थन तुर्की के लोग कर रहे हैं, ऐसे में पाकिस्तानियों का गुस्सा तुर्कों पर भी फूट पड़ा है।

पूजा सांगवान ने ऐसे कई ट्वीट्स संकलित किए हैं, जिसमें पाकिस्तानी और तुर्किश लोग ही आमने-सामने आ गए हैं। एक तरफ तो किर्गिज्स्तान में पाकिस्तानियों की जान पर बन आई है, तो अब एक्स पर मुस्लिम उम्माह को लेकर गुस्सा देखा जा रहा है। ये हालात बताते हैं कि पाकिस्तान का मुस्लिम देशों पर कितना असर है। चूँकि किर्गिज्स्तान में मुस्लिम आबादी ही बहुसंख्यक है और वो भी मुस्लिम उम्माह के सदस्य हैं, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में जिस तरह से पाकिस्तानियों को बलि का बकरा बनाया गया, उसने पाकिस्तानी सरकार की हैसियत को भी एक्सपोज कर दिया है। वहीं, इसके उलट, भारत सरकार न सिर्फ किर्गिज्स्तान में भारतीय छात्रों के साथ खड़ी है, बल्कि आर्मीनिया, यूक्रेन या अन्य युद्धग्रस्त क्षेत्रों तक से उन्हें निकालने के लिए स्पेशल ऑपरेशन चलाए, वहीं पाकिस्तानी सरकार मदद करने की जगह अपने ही खर्चे पर भागकर पाकिस्तान पहुँच रहे छात्रों के साथ फोटोबाजी करके ही खुश है।

फंदे से लटकी मिली तेलुगु एक्टर की लाश: 5 दिन से लिख रहे थे अवसाद भरे पोस्ट, कार एक्सीडेंट में हो गई थी पार्टनर पवित्रा की मौत

तेलुगु एक्टर चंद्रकांत ने शुक्रवार (17 मई 2024) को सुसाइड कर लिया। उनका शव हैदराबाद के अलकापुर स्थित उनके घर में मिली। कहा जा रहा है कि वे अपनी पार्टनर पवित्रा जयराम की मौत से वे बेहद दुखी थे और इसी वजह से खुदकुशी जैसा कदम उठाया। दरअसल, पवित्रा की कुछ दिन पहले कार दुर्घटना में मौत हो गई थी। हालाँकि, पुलिस इसे संदिग्ध मौत मानकर जाँच कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 39 साल के चंद्रकांत ने फाँसी लगाकर आत्महत्या की है। 12 मई को आंध्र प्रदेश के महबूब नगर में एक भीषण कार एक्सीडेंट में एक्ट्रेस पवित्रा जयराम की मौत के बाद से वे डिप्रेशन में चल रहे थे। पिछले एक हफ्ते से वे सोशल मीडिया पर पवित्रा के लिए लगातार पोस्ट लिख रहे थे। इसमें वे तरह-तरह की बातें कह रहे थे।

एक्टर चंद्रकांत ने 3 दिन पहले एक अजीब सा पोस्ट किया था। उस पोस्ट में लिखा था, “हे नन्ना, बस दो दिनों का इंतजार करो।” कुछ दिन पहले उन्होंने एक वीडियो भी शेयर किया था, जिसके कैप्शन में उन्होंने ‘आई लव यू लिखा’ था। एक्टर ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर आखिरी पोस्ट भी लिखा था, “प्लीज वापस आ जाओ। मैं यह बर्दाश्त नहीं कर पा रहा हूँ कि तुम मुझे अकेला छोड़ कर चली गई हो।”

उनके हर में डिप्रेशन के लक्षण दिख रहे थे। एक पोस्ट में उन्होंने लिखा, “गुड मार्निंग नन्ना, जिम का वक्त हो गया है। हमारे काउच ने हमें बुलाया है। लव यू पापा।” एक्टर की इस पोस्ट पर उनके फैंस भी चिंतित हो गए थे और इस चिंता को जाहिर भी करते दिखे। एक यूजर्स ने लिखा, “आपकी हर पोस्ट दुख भरी लग रही है। लग रहा है आप बहुत बुरा सोच रहे हैं। प्लीज अपने मन पर काबू रखिए।”

चंद्रकांत के पिता ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा पवित्रा जयराम की मौत से बेहद दुखी था। वह इस गम से उबर नहीं पा रहा था। नरसिंह पुलिस ने बताया कि चंद्रकांत के दोस्तों और वॉचमैन ने कॉल करके घटना की सूचना दी। पुलिस ने फिलहाल CrPC की धारा 174 यानी संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत के मुताबिक केस दर्ज कर लिया है।

बताते चलें कि चंद्रकांत ने टीवी सीरीज त्रिनयनी से पॉपुलैरिटी हासिल की थी। पवित्रा भी टीवी की जानी-मानी स्टार थीं। पवित्रा और चंद्रकांत साथ में ही रहते थे। हालाँकि, पवित्रा तलाकशुदा थीं और उनके दो बच्चे भी हैं, जो उनके पहले पति के साथ रहते हैं। शादी के कुछ समय बाद ही उनका अपने पहले पति से तलाक हो गया था। लोगों का यह कहना है कि पवित्रा और चंद्रकांत ने गुचचुप शादी रचा ली थी।

अकबरशा सैयद, हाकिमशा सैयद, जैनुलशा सैयद, अलीअसगर सैयद… BJP समर्थक बता कर अपने ही दोस्त अलीमदाद को बाँध कर पीटा, बोला पीड़ित – आत्महत्या करता हूँ तो…

गुजरात के कच्छ जिले में अपने मित्रों को भाजपा ज्वाइन करवाने पर एक मुस्लिम युवक को अपहरण के बाद पीटे जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित की पहचान अलीमदाद इलियास के तौर पर हुई है। आरोपितों के नाम अकबरशा सैयद, हाकिमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलीअसगर सैयद बताए जा रहे हैं। पुलिस ने FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। घटना शुक्रवार (10 मई 2024) की है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला कच्छ के मांडवी इलाके का है। यहाँ के गाँव शिवा के रहने वाले अलीमदाद ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। शिकायत में बताया गया है कि अलीमदाद के कुछ दोस्तों ने लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान भारतीय जनता पार्टी का समर्थन किया था। कॉन्ग्रेस पार्टी से जुड़े कुछ लोगों को लगा कि उन लोगों को भाजपा में लाने का काम अलीमदाद ने किया होगा। 10 मई को अलीमदाद सड़क से कहीं जा रहा था। तभी अकबरशा सैयद, हाकिमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलीअसगर सैयद ने उसका अपहरण कर लिया।

आरोप है कि चारों आरोपितों ने अलीमदाद को किसी अज्ञात जगह ले जाया गया। यहाँ पीड़ित को बाँध कर बेरहमी से पीटा गया। पिटाई से अलीमदाद घायल हो गया। इसी हालत में पीड़ित को आरोपितों ने सड़क पर फेंक दिया। बाद में किसी ने 108 नंबर डायल कर के एम्बुलेंस मंगवाई और पीड़ित को अस्पताल भिजवाया। अलीमदाद का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में वो अपनी पिटाई के लिए अकबरशा सैयद, हाकिमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलीअसगर सैयद को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।

वीडियो में अलीमदाद ने बताया कि पिटाई की वजह से उनके आंतरिक अंगों को काफी नुकसान पहुँचा है। पीड़ित ने कहा कि उन्हें पेशाब आने बंद हो गए हैं। अलीमदाद ने कहा कहा, “अगर मुझे कुछ होता है, मुझे दिल का दौरा पड़ता है या मैं आत्महत्या कर लेता हूँ तो मेरी मौत के लिए अकबरशा सैयद, हकीमशा सैयद, जैनुलशा सैयद और अलीअसगर सैयद को जिम्मेदार माना जाए।” इसी वीडियो में पीड़ित ने कुछ अन्य नामों का भी जिक्र किया है।

पुलिस ने चारों आरोपितों के खिलाफ IPC की धारा 365, 341, 323, 506 (2) और 120 (बी) के तहत FIR दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। इस मामले में ऑपइंडिया अन्य अपडेट की पड़ताल कर रहा है। सूचना आने पर उसे खबर में अपडेट किया जाएगा।

कौन हैं 84 साल के वो भारतीय बुजुर्ग, जो बने UK के सबसे अमीर शख्स: ₹3.37 लाख करोड़ की संपत्ति, 75 साल पहले बिजनेस की दुनिया में रखा था कदम

भारतीय मूल के गोपीचंद हिंदुजा UK (यूनाइटेड किंगडम) के सबसे अमीर व्यक्ति के रूप में शीर्ष पर बरकरार हैं। वो ‘हिंदुजा ग्रुप’ के चेयरमैन हैं। ‘सन्डे टाइम्स’ ने उन्हें UK के सबसे अमीर उद्योगपतियों की सूची में शीर्ष स्थान पर रखा है। ये मीडिया संस्थान यूके के 1000 सबसे अमीर लोगों और परिवारों की सूची हर साल जारी करता है। ये लगातार छठा साल है, जब गोपीचंद हिंदुजा इस सूची में टॉप पर हैं। उनकी संपत्ति 37.196 बिलियन यूरो (3.37 लाख करोड़ रुपए) आँकी गई है।

पिछले 1 वर्ष में गोपीचंद हिंदुजा की संपत्ति में 23.91 हजार करोड़ रुपए का इजाफा हुआ है। 84 वर्षीय गोपीचंद हिंदुजा का जन्म 1940 में हुआ था। उन्हें बिजनेस इंडस्ट्री में लोग GP के नाम से जानते हैं। वो ‘हिंदुजा ग्रुप’ के साथ-साथ ‘हिंदुजा ऑटोमोटिव लिमिटेड’ के भी चेयरमैन हैं। उनकी कंपनी मल्टीनेशनल है, जो ट्रकों और लुब्रिकेंट्स से लेकर बैंकिंग और केबल टेलीविजन तक में कारोबार करती है। वो अपने पिता परमानन्द दीपचंद हिंदुजा के दूसरे बेटे हैं।

उनका परिवार अखंड भारत के सिंध क्षेत्र से आता है, जो अब पाकिस्तान में है। परमानन्द दीपचंद हिंदुजा ने 1914 में कारोबार की दुनिया में कदम रखा था। उन्होंने भारत और मध्य-पूर्व की देशों के बीच कारोबार में कदम रखा और फिर अपनी कंपनी को करोड़ों डॉलर का बनाया। 1959 में मुंबई में गोपीचंद हिंदुजा ने अपने पारिवारिक कारोबार में कदम रखा। मई 2023 में अपने बड़े भाई श्रीचंद हिंदुजा के निधन के बाद उन्होंने ग्रुप के चेयरमैन के पद का कार्यभार सँभाला।

उन्होंने मुंबई के जय हिन्द कॉलेज से स्नातक किया था। उनके पास यूनिवर्सिटी ऑफ वेस्टमिनिस्टर से डॉक्टरेट ऑफ लॉ की मानद डिग्री है, साथ ही रिचमंड कॉलेज ने उन्हें इकोनॉमिक्स में डॉक्टरेट की डिग्री प्रदान की। गोपीचंद हिंदुजा 4 भाई हैं और सब मिल कर इस बिजनेस के मालिक हैं। प्रकाश और अशोक उनके छोटे भाई हैं। ब्रिटिश-अमेरिकन कारोबारी लियोनार्ड ब्लावत्निक इस सूची में दूसरे स्थान पर हैं। इस सूची में सटीक लिंग लक्ष्मीनिवास मित्तल और ब्रिटेन के PM ऋषि शौनक की पत्नी व इन्फोसिस के संस्थापक नारायणमूर्ति की बेटी अक्षता को भी शामिल किया गया है।