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दादा क्यों हो रहे अधीर, न नौ मन तेल होगा न ‘दीदी’ नाचेगी: फिर काहे का अविश्वास, काहे का बाहर से समर्थन

एक कहावत है- ना नौ मन तेल होगा और ना राधा नाचेगी। यह कहावत पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री एवं सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी के फैसले पर सटीक बैठती है। ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी केंद्र में सरकार बनाने के लिए विपक्षी इंडी (INDI) गुट को बाहर से समर्थन देगी।

इसके पहले ममता बनर्जी ने कुछ अलग हटकर बयान दिया था। उस दौरान उन्होंने कहा था, “पश्चिम बंगाल में कोई INDI गठबंधन नहीं है। मैंने विपक्षी INDI गठबंधन के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यहाँ तक कि गठबंधन का नाम भी मेरे द्वारा दिया गया था, लेकिन यहाँ पश्चिम बंगाल में सीपीआई (एम) और कॉन्ग्रेस भाजपा के लिए काम कर रहे हैं।”

इस बयान के कुछ ही सप्ताह बाद ममता बनर्जी का हृदय परिवर्तन हो गया और अब वह INDI गठबंधन की सरकार बनने की स्थिति में बाहर से समर्थन देने की बात करने लगी हैं। ममता बनर्जी को लगने लगा है कि INDI गठबंधन केंद्र में बना सकती है। हालाँकि, INDI गठबंधन के प्रमुख घटक कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने ममता बनर्जी की इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है।

अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “मैं उन पर भरोसा नहीं करता। वह गठबंधन तोड़ने वाली महिला हैं। अगर बीजेपी का पलड़ा भारी रहा तो उस तरफ भी जा सकती हैं। वह हिंदुस्तान से कॉन्ग्रेस खत्म करने की बात कर रही थीं। कह रही थीं कि 40 सीटें भी नहीं मिलेंगी। कॉन्ग्रेस खत्म हो चुकी है। अब दुहाई दे रही हैं, इसका मतलब कि INDI गठबंधन सत्ता में आ रही है। ये अभी से लाइन लगाना शुरू कर दीं।”

ममता बनर्जी दोनों तरफ ही संभावनाएँ तलाश रही हैं। उन्हें लग रहा है कि INDI गठबंधन शायद सत्ता में आ जाए तो उनके लिए सत्ता के दरवाजे खुले रखें। हालाँकि, अभी तक हुए मतदान में जो आँकड़े सामने आ रहे हैं, उसमें भाजपा को स्पष्ट बहुमत मिलता दिख रहा है। सिर्फ बहुमत ही नहीं ये आँकड़े 350 के पार जाती हुई भी दिखाई दे रही है। भाजपा अपनी जीत को लेकर पूरी तरह आश्वस्त है।

गृहमंत्री अमित शाह ने भी कहा है कि अब तक हुए चार चरण के मतदान में भाजपा को बहुमत मिल चुका है। अब सिर्फ 400 के आँकड़े की लड़ाई है। अमित शाह ने कहा, “चार चरणों तक 380 सीटों पर चुनाव पूरा हो चुका है। मैं बता रहा हूँ कि 380 सीटों में 270 सीटें लेकर पीएम मोदी बहुमत प्राप्त कर चुके हैं। आगे की लड़ाई 400 पार करने की है।”

इतना ही नहीं, संदेशखाली और अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा पूरे देश का मुद्दा बन चुका है। इन मुद्दों पर भाजपा ने बंगाल में भी बढ़त बना ली है। ममता बनर्जी के कभी सलाहकार रहे चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर भी स्पष्ट कर चुके हैं कि इस बार भाजपा बंगाल में चौंकाएगी। उन्होंने कहा था कि भाजपा बंगाल की नंबर वन पार्टी बन सकती है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में लोकसभा की कुल 42 सीटें हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में 42 सीटों में से तृणमूल कॉन्ग्रेस को 22 सीटें मिली थीं। वहीं, भाजपा को 18 सीटें मिली थीं। कॉन्ग्रेस को महज दो सीटों पर संतोष करना पड़ा था। अब अमित शाह ने भी बंगाल की रैली में लोगों से कम से कम 30 सीटों की माँग की है। अगर भाजपा 25 के आँकड़े को पार कर जाए तो आश्चर्य नहीं होगा।

बंगाल में भाजपा को लाभ मिलने का सीधा नुकसान ममता बनर्जी को होगा। अगर भाजपा के दावे को हटा दें तो ममता बनर्जी के नाराज वोटरों का लाभ कॉन्ग्रेस या वामदलों को मिल सकता है। इस समय TMC के 22 सांसद हैं। अगर भाजपा या कॉन्ग्रेस को फायदा मिलता है तो TMC 10 सीटों तक भी सिमट सकती है। ऐसी स्थिति में ममता बनर्जी का राष्ट्रीय राजनीति में हैसियत बेहद कम रह जाएगी।

इसका दूसरा पक्ष INDI गठबंधन को लेकर है। INDI गठबंधन को विशेष फायदा भी मिलने की गुंजाइश नहीं है पीएम मोदी और भाजपा के विरोध में भले सारे दल एक साथ आ गए हों, लेकिन उनकी विचारधारा कहीं से भी आपस में नहीं मिल रही है। अंदर-अंदर एक दूसरे की टाँग खींचने की कवायद अभी भी जारी है।

आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस के बीच का ही उदाहरण लें तो दिल्ली में दोनों दल साथ लड़ रहे हैं, लेकिन पंजाब में दोनों पक्ष एक दूसरे का विरोधी है। ऐसी ही स्थिति कमोबेश कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी के भीतर गुटबाजी को लेकर भी है। लोकसभा चुनाव की प्रक्रिया जारी है, लेकिन INDI गठबंधन के दलों में आपसी तालमेल का घनघोर अभाव दिख रहा है।

ममता बनर्जी को भले लग रहो हो कि INDI गठबंधन सत्ता में आ सकता है, लेकिन राहुल गाँधी भी इतने आश्वस्त नहीं हैं। राहुल गाँधी इस बार खुद दो जगहों से चुनाव लड़ रहे हैं। अमेठी से हारने के बाद वे केरल के वायनाड से साल 2019 में सांसद बने। इस बार वे वायनाड के साथ-साथ यूपी के रायबरेली से नामांकन भरा है। इस बार वायनाड से भी उनकी हालत पतली बताई जा रही है।

कुल मिलाकर देश में जो माहौल है, वह पीएम मोदी की लोकप्रियता, भाजपा का विकास और देश का दुनिया में बढ़ता कद महत्वपूर्ण कारक बनकर उभरा है। जनता में भी भाजपा को लेकर भारी उत्साह है। इस उत्साह को देखकर ही भाजपा अपनी भारी जीत को लेकर आश्वस्त है। बाकी राजनीति में खेल कब और कैसे बिगड़ जाए कहा नहीं जा सकता है। ममता बनर्जी को अपनी महत्वाकांक्षा की हकीकत देखने के लिए अब ज्यादा इंतजार करने की जरूरत नहीं है।

‘मैं दाढ़ी रखता हूँ, जरा तो ख्याल करती’: मोबाइल पर फकीर के बेटे से बात करती थी 18 साल की सहनुमा, अब्बा शाहिद ने ही रेत दिया गला

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में झूठी शान की खातिर शाहिद नाम के व्यक्ति ने अपनी 18 साल की बेटी की गला रेतकर हत्या कर दी। वो हत्या के बाद फरार हो गया था, लेकिन पुलिस आने के बाद वापस अपने घर पहुँचा और आराम से पुलिस वालों के सामने सरेंडर कर दिया। शाहिद ने पुलिस वालों के सामने अपनी बेटी की हत्या की बात स्वीकार की है। शाहिद की पुलिस वालों से बातचीत सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नई मंडी कोतवाली इलाके के कूकड़ा गाँव के रहने वाले शाहिद ने अपनी बेटी सहनुमा (18) की हत्या कर दी। सहनुमा का शव फर्श पर पड़ा देख परिजनों के होश उड़ गए। सहनुमा की बेरहमी से हत्या की गई थी। पुलिस ने छानबीन के बाद शव पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया।

पुलिस मौके पर पहुँचकर पूछताछ कर ही रही थी, तभी शाहिद अपने घर पहुँचा और पुलिस वालों के सामने बेटी की हत्या की बात कबूलते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। लोगों के बीच खड़े आरोपित शाहिद ने कहा कि किसी का कोई कसूर नहीं है, मैने हत्या की है। बेटी को बार-बार इज्जत की दुहाई दे रहा था। मैं दाढ़ी रखता हूँ, जरा तो ख्याल करती। तीन दिन से बेटी लगातार मोबाइल पर बात कर रही थी।

शाहिद ने बताया कि वो पल्लेदारी का काम करता है। उसकी बेटी सहनुमा इस्सेपुर गाँव के फकीर के लड़के से बेटी बात करती थी। बेटी को उससे बात करने से मना किया गया था, लेकिन वो नहीं मानी। ऐसे में उसने उसकी हत्या कर दी।

मौके पर नई मंडी कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बबलू कुमार अपनी टीम के साथ पहुँचे। उन्होंने मौका-मुआयना करते हुए जाँच पड़ताल की और शव को कब्जे लकर पंचनामा भरते हुए पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। आरोपित शाहिद के 7 बच्चे थे, जिसमें 4 बेटे और 3 बेटियाँ थी। अब 6 बच्चे बचे हैं। एसपी सिटी सत्यनारायण प्रजापत ने कहा कि मृतका की माँ ने बताया है कि प्रेम प्रसंग चल रहा था। पुलिस तथ्य जुटा रही है, इसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष की छाती पर मूँग दलती रहेगी मोदी-योगी की जोड़ी, केजरीवाल ने चली थी जो चाल उसे PM ने किया फुस्स: पूर्वांचल से किया वादा, संदेश पूरे देश को

दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गुरुवार (16 मई 2024) को एक बार फिर दावा किया कि अगर भाजपा फिर से सरकार में लौटी तो उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को हटा दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्रधानमंत्री बनने की राह में अब केवल योगी आदित्यनाथ ही काँटा बचे हैं। हालाँकि, समय-समय पर पीएम मोदी द्वारा परोक्ष रूप से इसका खंडन किया गया है।

अरविंद केजरीवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बार चुनाव में अमित शाह को पीएम बनाने के लिए लोगों से वोट माँग रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि पीएम मोदी अगले वर्ष 17 सितंबर को जैसे ही 75 वर्ष के हो जाएँगे, वे प्रधानमंत्री पद छोड़कर अमित शाह को पीएम बना देंगे। चुनाव जीतने के बाद दो से तीन महीने में योगी आदित्यनाथ को हटा दिया जाएगा। 

समाजवादी पार्टी के प्रदेश मुख्यालय में अखिलेश यादव के साथ प्रेस वार्ता करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि अमित शाह को पीएम बनाने के लिए नरेंद्र मोदी पिछले डेढ़-दो वर्षों से लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने शिवराज सिंह चौहान, वसुन्धरा राजे सिंधिया, देवेंद्र फडणवीस, रमन सिंह और मनोहर लाल खट्टर को पहले ही हटा दिया है। अब योगी उनकी राह में आखरी कांटा बचे हैं।

सीएम केजरीवाल ने यह भी कहा कि योगी आदित्यनाथ को हटाए जाने के मामले में भाजपा के किसी भी नेता ने पिछले चार दिनों में कोई भी जवाब नहीं दिया है। इससे साफ है कि चुनाव बाद भाजपा योगी आदित्यनाथ को मुख्यमंत्री पद से हटा देगी। उन्होंने कहा कि इससे साफ होता है कि वो जो कह रहे हैं वो सही है। यह पहला मौका है जब केजरीवाल अपना विजन बताने के बजाय सत्ताधारी दल के अंदरूनी मामले को लेकर राजनीति कर रहे हैं।

ये दूसरा मौका है, जब अरविंद केजरीवाल इस तरह का दावा कर रहे हैं। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत पर बाहर आने के बाद उन्होंने जो पहला प्रेस कॉन्फ्रेंस किया था, उसमें भी उन्होंने यही दावा किया था। केजरीवाल ने यह दावा सोशल मीडिया यूजर से लेकर किया है। पिछले लगभग छह महीने से विपक्षी दलों से सहानुभूति रखने वाले X हैंडल यही दावा करते आ रहे हैं। यही दावा अब केजरीवाल ने भी करना शुरू कर दिया है।

इससे पहले गृहमंत्री अमित शाह ने साफ कर दिया था कि प्रधानमंत्री मोदी अपना कार्यकाल पूरा करेंगे और 2029 के बाद भी वे पार्टी का नेतृत्व करते रहेंगे। पीएम मोदी 75 वर्ष की आयु के बाद भी अपने पद पर बने रहेंगे। यानी स्पष्ट शब्दों में अमित शाह ने बता दिया था कि उनका प्रधानमंत्री बनने का अभी कोई इरादा नहीं है। वहीं, भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी साफ कर दिया था कि 75 साल के बाद रिटायरमेंट वाली बात पार्टी के संविधान में नहीं है।

ये सच है कि योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता सिर्फ उत्तर प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में है। ना सिर्फ उनका हिंदूवादी स्वरूप लोगों को पसंद आता है, बल्कि स्पष्टवादिता और काम करने का अंदाज भी लोग खूब पसंद करते हैं। पीएम मोदी और सीएम योगी की लोकप्रियता और अमित शाह के चुनाव प्रबंधन के कारण भाजपा आज इस मुकाम पर है। यही कारण है कि देश के लोग सीएम योगी से भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।

सीएम योगी के साथ लोगों के इसी भावनात्मक जुड़ाव को ध्यान रखकर अरविंद केजरीवाल माइंडगेम खेल रहे हैं और जनता को ब्लैकमेल कर रहे हैं। जनता भी जानती है और भारतीय जनता पार्टी भी जानती है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य को संभालना आसान नहीं है। सीएम योगी ने पिछले दो कार्यकाल से ना सिर्फ यूपी में कानून-व्यवस्था की स्थिति को मजबूत किया है, बल्कि लोगों के दिलों में अपनी जगह भी बनाई है।

अरविंद केजरीवाल अब अपनी पार्टी के विजन के बारे में बताने की जगह देश के दो सबसे लोकप्रिय नेताओं के बीच मतभेद को लेकर जनता में भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि जनता भाजपा से दूर हो जाए और विपक्षी दलों के साथ खड़ी हो जाए। हालाँकि, इसकी संभावना कम ही नजर आ रही है। दूसरी बात, सीएम केजरीवाल दावा कर रहे हैं कि उनके इस दावे पर भाजपा या उसके किसी बड़े नेता की ओर से कोई जवाब नहीं आया है।

अरविंद केजरीवाल का यह दावा भी गलत है। प्रधानमंत्री मोदी ने इस बात का खंडन परोक्ष रूप से किया है। जौनपुर की रैली में प्रधानमंत्री मोदी ने गुरुवार (16 मई) को साफ कर दिया कि अरविंद केजरीवाल और विपक्ष योगी आदित्यनाथ को लेकर जिस तरह का भ्रम फैला रहा है, वह सही नहीं है। पीएम मोदी ने कहा, “आने वाले पाँच सालों में मोदी-योगी पूर्वांचल की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने वाले हैं।”

अपने इस बयान से पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि अगले पाँच साल तक योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री बने रहेंगे। इससे पहले भी प्रधानमंत्री मोदी ने योगी आदित्यनाथ की तारीफ करके साफ संदेश दिया था कि विपक्ष के दावे झूठे हैं। इतना ही नहीं, भाजपा के स्टार प्रचारकों की लिस्ट में योगी आदित्यनाथ का होना भी उनके कद की ओर इशारा करता है।

पीएम मोदी ने सीएम योगी की जमकर तारीफ की थी। इसको लेकर आजतक के साथ बातचीत में पीएम मोदी ने कहा था, “मेरा सौभाग्य है कि मुझे हर राज्य में ऐसी टीम मिली है- चाहे विपक्ष में हो या सरकार में, चाहे मुख्यमंत्री हो या मंत्री, हर कोई सिद्धांतों और मूल्यों के साथ जी-जान से जुटे रहते हैं। मेरे लिए गर्व की बात है कि मेरे पास ऐसे सैकड़ों होनहार लोग हैं।”

अलीगढ़ की एक रैली में पीएम मोदी ने कहा, “मैं उन लोगों की आँखें खोलना चाहता हूँ, जो लोग योगी जी की पहचान सिर्फ बुलडोजर से करते हैं, मैं उनकी आँखें खोलना चाहता हूँ। योगी आदित्यनाथ का ‘एक जिला, एक उत्पाद’ मिशन देश में नया सम्मान पैदा कर रहा है।” उन्होंने आगे कहा था, “काशी के सांसद होने के नाते योगी जी हमारे भी माननीय मुख्यमंत्री हैं। इस पर मैं गर्व अनुभव करता हूँ।”

उन्होंने आगे कहा था, “एक समय में उत्तर प्रदेश में हमारी बहन-बेटियाँ घर घर से बाहर नहीं निकल पाती थीं। योगी जी की सर्वार्थ सरकार में अपराधियों की हिम्मत नहीं है कि वो नागरिकों का अमन-चैन बिगाड़े। आजादी के बाद यूपी में जितना औद्योगिक विकास नहीं हुआ, उससे अधिक अकेले योगी जी के कालखंड में हुआ। यूपी को विकास की नई ऊँचाइयों पर योगी जी की सरकार लेकर गई है।”

प्रधानमंत्री मोदी के ये बयान अरविंद केजरीवाल और विपक्षी दलों के सवालों का जवाब है। हालाँकि, अरविंद केजरीवाल इस चर्चा तक नहीं करते। वे सिर्फ और सिर्फ योगी जी की लोकप्रियता के आधार पर अपनी राजनीतिक रोटी सेंक रहे हैं। जो कोई भी पीएम मोदी के इन बयानों को सुना होगा, उन्हें पता होगा कि पीएम मोदी और भाजपा के लिए योगी आदित्यनाथ कितना जरूरी हैं।

भव्य राम मंदिर का काम हुआ पूर्ण, अब माता जानकी का बनाएँगे भव्य मंदिर: जानकी नवमी पर सीतामढ़ी की धरती से अमित शाह ने किया वादा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बिहार के सीतामढ़ी में चुनावी रैली को संबोधित किया और बीजेपी उम्मीदवार के लिए वोट माँगे। गृहमंत्री ने विपक्ष के इंडी गठबंधन पर निशाना साधते हुए सीतामढ़ी के लोगों से कहा कि हम बीजेपी वाले वोट बैंक से नहीं डरते। पीएम मोदी ने अयोध्या में रामलला का मंदिर बना दिया है। अब जो काम बाकी है वह है माँ सीता की जन्मभूमि पर एक महान स्मारक, मंदिर बनाने का। उन्होंने कहा कि सीता माता के जीवन के अनुरूप स्मारक केवल नरेन्द्र मोदी जी और बीजेपी ही बना सकती है।

गृहमंत्नी ने जनसभा में कॉन्ग्रेस और आरजेडी पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने कहा, “जिन्होंने खुद को राम मंदिर से दूर रखा, वे माता सीता का स्मारक नहीं बना सकते। अगर कोई माँ सीता के जीवन के त्याग समर्पण और आदर्श के अनुरूप कोई स्मारक बना सकता है, तो वह नरेंद्र मोदी और बीजेपी बना सकती है। मैं आज आप लोगों को विश्वास दिलाता कि न केवल भारत, न केवल बिहार, न केवल पूर्वांचल, मिथिलाँन्चल बल्कि सीतामढ़ी पूरी दुनिया के आकर्षण का केंद्र बने सीता माता का ऐसा भव्य मंदिर बनाने का काम करेंगे।”

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, “मोदी जी ने अयोध्या में रामलला का भव्य मंदिर बनाने का काम पूरा किया। अब माँ सीता की जन्मभूमि पर महान स्मारक बनाने का काम बाकी है। जिन लोगों ने अपने-आप को रामलला के मंदिर से दूर रखा, वो ये स्मारक नहीं बना सकते। सीता माता के जीवन के अनुरूप स्मारक केवल नरेन्द्र मोदी जी और भाजपा बना सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि बाबर के काल में राम मंदिर को तोड़ा गया था। सीतामढ़ी वासियों आप मुझे बताओ राम मंदिर बनना चाहिए था या नहीं बनना चाहिए था? कॉन्ग्रेस आरजेडी कई वर्षों तक राम मंदिर के मुद्दे पर रोड़े अटकाते रहे। मोदीजी को दूसरी बार पीएम बनाया गया, और केवल पाँच साल में राम जन्मभूमि केस जीता गया, भूमि पूजन किया गया और 22 जनवरी को मंदिर की ‘प्राण प्रतिष्ठा’ भी की गई।

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा, जिस कॉन्ग्रेस पार्टी ने हमेशा पिछड़ों और अति पिछड़ों का विरोध किया, आज लालू यादव सत्ता की राजनीति के लिए, अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाने के लिए उसी कॉन्ग्रेस पार्टी की गोद में जाकर बैठ गए हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मधुबनी में जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मैं लालू यादव से सवाल पूछना चाहता हूँ कि आप बिहार में 15 साल मुख्यमंत्री और केंद्र में 10 साल मंत्री के पद पर रहे।

बता दें कि सीतामढ़ी में माता सीता का भव्य मंदिर बनाया जा रहा है। बिहार सरकार माता सीता के प्राकट्य स्थल पर स्मारक बना रही है। इसके लिए बिहार सरकार 50 एकड़ जमीन अधिग्रहीत कर रही है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए नए मंदिर के लिए प्रयासरत कामेश्वर चौपाल ने बताया था कि, “माता सीता के लिए सीतामढ़ी का वही महत्व है जो भगवान राम के लिए अयोध्या का है। यह हिन्दुओं के लिए पवित्र है। विश्व भर से लोग अयोध्या के राम मंदिर में दर्शन करने आएँगे और माता सीता की जन्मभूमि भी देखना चाहेँगे। हम चाहते हैं कि सीतामढ़ी में माता सीता का उसी तरह का एक भव्य का निर्माण किया जाए।” चौपाल ने बताया कि अभी जो मंदिर सीतामढ़ी में है, वह 100 वर्ष पूर्व बनाया गया था और उसकी स्थिति अब अच्छी नहीं है।

‘औरतें काम पर जा रहीं, इसलिए बढ़ रहा तलाक’: क्रिकेटर से मौलवी बने सईद अनवर का Video वायरल, कभी कहा था क्रिकेट वर्ल्ड कप लोगों को मुस्लिम बनाने का जरिया

पूर्व क्रिकेटर और अब मौलाना बने सईद अनवर ने कहा है कि जब से ऑस्ट्रेलिया में औरतों ने काम पर जाना चालू किया है, तब से हालात खराब हो गए हैं। उन्होंने पाकिस्तान में बढ़ते तलाक का ठीकरा महिलाओं के काम करने पर फोड़ा है। सईद अनवर का यह वीडियो अब सोशल मीडिया पर वायरल है।

इस वीडियो में सईद अनवर कहते हैं, “मैं पूरी दुनिया घूम कर आ रहा हूँ। युवा रो रहे हैं, घरवाले जलील हो रहे हैं, मियाँ-बीवी में लड़ाइयाँ हो रही हैं। इतना हालात खराब हो गए हैं कि उन्होंने महिलाओं को कमाई पर लगा दिया है। मुझे ऑस्ट्रेलिया की एक मेयर ने कहा कि इतना डिप्रेशन क्यों है। न्यूजीलैंड के कप्तान केन विलियम्सन ने मुझसे पूछा कि हमारे हालात कैसे सही हों।”

आगे सईद अनवर ने कहा, “मुझे ऑस्ट्रेलिया के मेयर ने बताया कि जबसे हमें औरतों को कमाई पर लगाया तबसे हमारा सब बर्बाद हो गया, हमारे इतने हालात खराब हो गए कि औरतें भी कमाई कर रही हैं। पाकिस्तान में जबसे औरतें कमाई करने लगी हैं तब से तलाक के मामले 30% बढ़ गए हैं।”

सईद अनवर ने इस वीडियो में दावा किया कि यूरोप में महिलाओं को इसलिए काम करना पड़ रहा है क्योंकि उनके हालात खराब हैं। असल में इस्लामी देशों को छोड़ कर सब जगह महिलाओं की कामकाज में भागीदारी बढ़ रही है, ऐसे सईद अनवर अपनी इस्लामी कट्टरपंथी सोच बता रहे हैं।

इससे पहले भी सईद अनवर इस्लाम के प्रचार के लिए कई विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने बताया था कि क्रिकेटर हाशिम अमला एक हिन्दू परिवार का इस्लाम में धर्मांतरण करवा चुके हैं। उन्होंने वर्ल्ड कप को धर्मांतरण का एक जरिया बताया था।

उन्होंने कहा, “विश्व कप में कई लोग इस्लाम कबूल कर रहे हैं। अल्लाह ने वर्ल्ड कप को मोहरा बना रखा है। हाशिम अमला एक शानदार क्रिकेटर हैं। उसने कितने लोगों को कलाम पढ़ाया। एक पूरा हिन्दू खानदान मुस्लिम बन गया। मोहम्मद यूसुफ कई लोगों का जरिया बना। आप में अल्लाह ने बहुत टैलेंट दिया है। जो करना है करो, कारोबार करो, हुकूमत करो। अल्लाह को साथ ले लो और नबी का काम अपना काम बना लो।”

बंगाल की इंच-इंच जमीन मुस्लिमों की… स्वतंत्र भारत में सुरसा की तरह बढ़ रहा ‘मजहबी जमींदार’: इस्लामी मुल्कों में वक्फ बोर्ड का नामलेवा नहीं, यहाँ बढ़ती ही जा रही प्रॉपर्टी

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक बंगाली मौलाना की वीडिया वायरल हुई थी। इस वीडियो में मौलाना दावा करता दिखाई दे रहा था कि बंगाल में इंच-इंच जमीन मुस्लिमों की है। वीडियो में सुनाई पड़ रहा था कि मौलाना कहता है- कलकत्ता हाईकोर्ट-मुस्लिमों की जमीन पर है, मुख्यमंत्री कार्यालय मुस्लिमों की जमीन पर है, कोलकाता एयरपोर्ट मुस्लिमों की जमीन पर है और ईडन गार्डन स्टेडियम तक मुस्लिमों की जमीन पर है।

मौलाना की इस छोटी सी वीडियो में कितनी सच्चाई है ये तो नहीं पता, लेकिन ये हकीकत जरूर है कि देश में वक्फ बोर्ड मजहबी जमींदार बनकर उभरा हुआ है। इन्होंने अपने हिस्से इतनी जमीन दिखाई हुई है कि सिर्फ देश में रेल और सेना के लोग ही इनके ऊपर आते हैं। आप खबरें उठाकर देख लीजिए आपको कभी वक्फ वाले मंदिर की संपत्ति पर अपना कब्जा बताते हुए मिलेंगे तो कभी कहेंगे पूरा का पूरा गाँव वक्फ की जमीन पर बसा है।

इनकी कोई सीमा नहीं है कि ये कहाँ तक वक्फ जमीन का दावा कर दें। वैसे असल में वक्फ की जमीन का कॉन्सेप्ट ये था कि जो कोई मुस्लिम व्यक्ति अपनी संपत्ति को अल्लाह के नाम पर दान करना चाहेगा वो वक्फ के हिस्से आ जाएगी। अब इसी क्रम में ये वक्फ बोर्ड वाले अल्लाह के नाम पर इकट्ठा कितनी जमीन पर अपना दावा ठोंक दें इसकी कोई सीमा है ही नहीं।

30 साल पहले वक्फ ने किया था कब्जा, फ्रॉड उजागर

हालिया खबर आज सामने आई है जिसमें बताया गया है कि कैसे दशकों पहले सहारनपुर की नगर निगम की तीन हेक्टेयर जमीन पर वक्फ द्वारा फर्जीवाड़ा किया गया था। इस खुलासे के बाद कमिश्नर ने डीएम को पत्र लिखकर 1994 के आदेश को निरस्त कर भूमि को पहले की तरह अभिलेखित करने के आदेश जारी किए। ये आदेश पूरी पड़ताल के बाद दिए गए। बताया जा रहा है कि उक्त भूमि 1874 से नगर पालिका परिषद की थी लेकिन वर्ष 1994 में सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के सचिनव ने इस जमीन को वक्फ की जमीन में दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। इसके बाद अन्य अधिकारियों ने इसका अनुपालन किया। साथ ही पूर्व में जिस पालिका के पास ये जमीन थी उन्हें अपना पक्ष रखने का कोई मौका भी नहीं मिला। इस तरह 3 हेक्टेयर की सरकारी जमीन को वक्फ अपने नाम कर गया। अब जब इस मामले में जाँच हुई है तो मंडलायुक्त ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए कि ये जमीन वक्फ की नहीं है इसे सहारनपुर नगर निगम के नाम पूर्व की भाँति अभिलेखों में दर्ज करवाया जाए।

ये सिर्फ कोई हालिया खबर नहीं है। 2022 में खबर आई थी कि वक्फ बोर्ड ने तमिलनाडु में हिंदुओं के गाँव पर कब्जा किया है जिसमें 1500 पुराना मंदिर भी बना हुआ। इसके अलावा हाल में जामा मस्जिद के पास बने सरकारी पार्कों को लेकर भी शिकायत आई थी कि उसे मस्जिद अपने काम में लेने लगा है, कोशिश करने पर भी वो उस जगह को नहीं छोड़ते। इससे पूर्व 2021 में बाराबंकी के कतुरीकला में वक्फ के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ था जहाँ पता चला था कि जमीनें धोखाधड़ी से वक्फ के नाम की गई हैं।

क्या है वक्फ बोर्ड और एक्ट

गौरतलब है कि वक्फ की धोखेधड़ियों की खबरें आने से मीडिया में सवाल अक्सर उठता ही रहता है कि इस तरह कैसे कोई बोर्ड आम लोगों की संपत्ति पर कब्जा कर लेता है और अगर कर लेता है, या उसे अपने अंतर्गत दर्ज करा लेता है तो क्यों वो वापस नहीं हो सकती? इसके अलावा सवाल ये भी उठते हैं कि आखिर लोकतांत्रिक देश में ऐसा बोर्ड क्यों बनाया गया कि एक मजहब के नाम पर प्रॉपर्टी इकट्ठा की जाए… तो इन सारे सवालों का जवाब नेहरू काल से मिलता है।

दरअसल, भारत में ‘वक्फ एक्ट’ की शुरुआत 1954 में नेहरू सरकार में हुई थी। इसके बाद 1964 में सेंट्रल वक्फ काउंसिल ऑफ इंडिया बना दिया गया। इसका काम केंद्रीय निकाय वक्फ अधिनियम, 1954 की धारा 9 (1) के प्रावधानों के तहत स्थापित विभिन्न राज्य वक्फ बोर्डों के तहत काम की देखरेख करने का था। साल 1995 में एक्ट में कुछ संशोधन हुए और इसे और मजबूती मिली। इन संशोधनों के बाद प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों में वक्फ बोर्डों के गठन की अनुमति दी गई, जिसमें कुछ ऐसे बदलाव भी हुए जिनपर अक्सर विवाद होता रहता है।

बता दें कि आज के समय में देश में एक सेंट्रल वक्फ काउंसिल और 32 स्टेट बोर्ड है। हर राज्य के अलग-अलग वक्फ बोर्ड होते हैं। इस बोर्ड का काम हर जकात में मिली संपत्ति की देखरेख करना होता है। वक्फ जकात में आई सारी संपत्ति को अल्लाह की संपत्ति मानता है और इससे जुड़ ेहर कानूनी काम खुद संभालता है। चाहे इसे खरीदना हो या लीज पर देना। इसके अलावा एक बार अगर कोई संपत्ति इस बोर्ड के अधीन आ जाती है तो व्यक्ति उसे वापस नहीं ले सकती चाहे वो पहले उसी की क्यों न रही हो। वहीं वक्फ उसका जैसे चाहे वैसे इस्तेमाल कर सकता है।

वक्फ बोर्ड के खिलाफ खड़े वकील अश्विनी उपाध्याय

हाल में इस पर सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी उपाध्याय ने भी ट्वीट किया था। उन्होंने मौलाना वाली वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए वक्त के मामले को उठाया था। साथ ही राहुल गाँधी के परिवार पर निशाना साधा था। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा था, “परनाना ( जवाहरलाल नेहरू) ने वक्फ एक्ट बनाया दादी (इंदिरा गाँधी) ने वक्फ एक्ट को मजबूत किया पिता (राजीव गाँधी) ने वक्फ एक्ट को और मजबूत किया 1995 में पुराना कानून वापस और नया कानून 2013 में वक्फ बोर्ड को असीमित शक्ति दिया कॉन्ग्रेस ने भारत को बर्बाद करने के लिए 50 घटिया कानून बनाए हैं।”

उन्होंने तो इस वक्फ बोर्ड को असंवैधानिक करार देने के लिए याचिका भी डाली थी लेकिन उसे कोर्ट ने यह कहकर खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से प्रभावित नहीं हुए। इस मामले में अश्विनी उपाध्याय साफ कहा था, “वक्फ के नाम से भारतीय संविधान में एक शब्द नहीं है। सरकार ने 1995 में वक्फ एक्ट बनाया और इसे मुस्लिमों का नाम कर दिया…।  वक्फ बोर्ड को असीमित शक्तियाँ दे दी गईं। उन्हें ये अधिकार दे दिया गया है कि उनके सब धार्मिक संपत्तियों से जुड़े मामले ट्रिब्यूनल कोर्ट में जाएँगे। वो सवाल करते हैं कि देश में इतनी ट्रिब्यूनल कोर्ट नहीं है ऐसे में अगर वक्फ जाकर किसी की संपत्ति पर दावा ठोंकता है तो लोगों को दर-दर भटकना पड़ता है तब सुनवाई होती है जबकि बाकी धर्मों के मामले आराम से सिविल कोर्ट में सुन लिए जाते हैं।” 

वक्फ बन रहा तीसरा सबसे बड़ा जमींदार

यहाँ आपको जानकर शायद हैरानी होगी कि वक्फ का कॉन्सेप्ट इस्लामी देशों तक में नहीं है। फिर वो चाहे तुर्की, लिबिया, सीरिया या इराक हो। लेकिन भारत में मुस्लिम तुष्टिकरण के चलते आज हालात ऐसे हैं कि इन्हें देश में तीसरा सबसे बड़ा जमींदार बताया जा रहा है। इनके पास अकूत संपत्ति है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के अनुसार वक्फ बोर्ड के पास पूरे देश भर में 8,65,646 संपत्तियाँ पंजीकृत हैं। इनमें से 80 हजार से ज्यादा संपत्ति वक्फ के पास केवल बंगाल में हैं। इसके बाद पंजाब में वक्फ बोर्ड के पास 70,994, तमिलनाडु में 65,945 और कर्नाटक में 61,195 संपत्तियाँ हैं। देश के अन्य राज्यों में भी इस संस्थान के पास बड़ी संख्या में संपत्तियाँ हैं।

प्रीति बनी तीन तलाक पीड़िता रुबीना, प्रमोद कश्यप संग किया विवाह: वृंदावन की महिला ने बरेली में की घर वापसी

बरेली में रुबीना सैय्यद ने सनातन में घर वापसी कर ली है। उन्होंने सनातन में वापसी कर अपना नाम प्रीति रखा है। साथ ही उन्होंने अपने प्रेमी प्रमोद कश्यप के साथ पूर्ण विधि-विधान से विवाह कर लिया है। रुबीना वृंदावन की रहने वाली हैं। उनका पहले निकाह हुआ था, जिसने उनके 2 बच्चे हैं, लेकिन उनके शौहर ने 6 महीने पहले तीन-तलाक देकर घर से निकाल दिया था। इसके बाद वो प्रमोद के संपर्क में आईं और अब प्रीति बन चुकी हैं। प्रीति का कहना है कि मुस्लिम होने की वजह से उन्हें प्रताड़ना झेलनी पड़ी और तीन तलाक का दंश भी, क्योंकि इस्लाम में महिलाओं की कोई इज्जत नहीं है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, गुरुवार (15 मई 2024) को बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में सनातन अपनाने वाली प्रीति का पुराना नाम रुबीना था। वो मथुरा के वृंदावन की रहने वाली हैं। उनका शौहर उनका उत्पीड़न करता था और 6 माह पहले तीन तलाक देकर उन्हें घर से निकाल दिया था। उनके 3 और 6 साल के दो बेटे हैं, लेकिन शौहर ने उन्हें अपने पास रख लिया। इसके बाद वो बदायूँ के रहने वाले प्रमोद कश्यप के संपर्क में आईं। दोनों में प्रेम हुआ, तो मिलने का रास्ता भी निकला। इसके बाद बरेली में आचार्य के के शंकधार ने उनका गोमूत्र-गंगाजल से शुद्धिकरण कराया और फिर प्रीति और प्रमोद सात जन्मों के बंधन में बंध गए। खास बात ये है कि प्रीति अपने पति प्रमोद से 8 साल बड़ी हैं, लेकिन अब दोनों सातों जन्म साथ निभाने की सौगंध ले चुके हैं।

प्रीति ने बताया कि उन्हें शुरू से हिंदू धर्म में आस्था थी। उन्हें हिंदू धर्म अच्छा लगता है। उन्होंने करीब 15 दिन पहले ही अपना घर छोड़ दिया। अब वह अपने पति के साथ रहेगी। दोनों एक-दूसरे को बहुत प्यार करते हैं। प्रीति ने कहा कि इस्लाम धर्म में महिलाओं का कोई सम्मान नहीं करता है। तीन तलाक और हलाला जैसी कुप्रथाएँ प्रचलित हैं। मैंने स्वेच्छा से घर वापसी कर हिंदू रीति रिवाज से सनातन धर्म स्वीकार कर लिया है। प्रीति ने बताया कि पहले बच्चों की याद आती थी, लेकिन अब धीरे-धीरे वो उनके बिना जीना सीख गई हैं।

बता दें कि पिछले 2 दिनों में घर वापसी का ये तीसरा मामला है। इससे पहले, उत्तर प्रदेश के बरेली और मुरादाबाद जिलों में 2 मुस्लिम लड़कियों ने घर वापसी की है। इन दोनों ने इस्लाम छोड़ कर हिन्दू धर्म अपनाया और हिन्दू युवकों से विवाह किया है। बरेली में जहाँ रामपुर की फरहाना पल्ल्वी बन चुकी हैं तो वहीं मुरादाबाद की नरगिस अभी मानसी नाम से जानी जाएँगी। दोनों लड़कियों ने हिन्दू धर्म में अपनी पहले से आस्था बताते हुए खुद को अब तीन तलाक और हलाला के डर से आज़ाद बताया है।

अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा भेजना चाहते हैं केजरीवाल, स्वाति मालीवाल से माँगा है इस्तीफा: रिपोर्ट में दावा, विभव कुमार को NCW ने बुलाया

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के पूर्व निजी सचिव बिभव कुमार को तलब किया है। आयोग ने उन्हें शुक्रवार (17 मई, 2024) को इस मामले में पेश होने को कहा गया है। उन्हें AAP की राज्यसभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालीवाल से बदसलूकी के मामले में तलब किया गया है।

स्वाति मालीवाल से दिल्ली CM आवास में हुई बदसलूकी मामले में अब दैनिक भास्कर ने एक रिपोर्ट में बताया है कि वह घटना वाले दिन अपनी राज्यसभा सीट को लेकर बात करने गईं थी। भास्कर की रिपोर्ट दावों के अनुसार, स्वाति मालीवाल से AAP ने सांसद पद से इस्तीफ़ा देने को कहा है। वह इस इस्तीफे को लेकर दिल्ली CM अरविन्द केजरीवाल से बात करने गईं थी।

स्वाति सिंघवी bhaskar
दैनिक भास्कर की खबर का वह हिस्सा, जहाँ स्वाति की जगह सिंघवी को राज्यसभा भेजे जाने की बात कही गई है।

इसी रिपोर्ट में कहा गया है कि स्वाति मालीवाल के बदले अब AAP वकील और कॉन्ग्रेस के पूर्व राज्यसभा सांसद अभिषेक मनु सिंघवी को राज्यसभा भेजना चाहती है। इसीलिए स्वाति से सीट खाली करने को कहा गया है। स्वाति को यह सन्देश कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं के जरिए भिजवाया गया था। उन्हें पार्टी में बड़ा पद दिए जाने की बात भी कही गई थी।

स्वाति की जगह जिन वकील अभिषेक मनु सिंघवी को AAP से राज्यसभा भेजे जाने की बात कही जा रही है, वह पूर्व में कॉन्ग्रेस से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। वह हाल ही में हिमाचल प्रदेश से कॉन्ग्रेस से राज्यसभा का चुनाव विधायकों की बगावत के चलते हार गए थे। अभिषेक मनु सिंघवी ही दिल्ली शराब घोटाला मामले में CM केजरीवाल की पैरवी कर रहे हैं। उनकी ही पैरवी से सुप्रीम कोर्ट ने CM केजरीवाल को 1 जून तक के लिए चुनाव प्रचार करने की अंतरिम जमानत दी है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट से पहले भी डेली पायनियर की एक रिपोर्ट में ऐसा ही दावा किया गया था। डेली पायनियर में सौम्या शुक्ला की एक रिपोर्ट के अनुसार, स्वाति मालीवाल से उनके राज्यसभा सांसद के पद से इस्तीफ़ा देने को पार्टी ने कह़ा है। हालाँकि, उस रिपोर्ट में उनकी जगह सिंघवी को भेजे जाने की बात नहीं कही गई थी।

इसके अलावा यह बात भी कही जा रही है कि स्वाति मालीवाल, CM केजरीवाल की गिरफ्तारी के समय अमेरिका में थी और इस मामले में अधिक सक्रिय नहीं रहीं थीं। कहा जा रहा इसको लेकर पार्टी का एक धड़ा उसने नाराज है, इसलिए भी उनके सांसद पद पर खतरा मंडरा रहा है।

गौरतलब है कि सोमवार (13 मई, 2024) को सुबह AAP राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने पुलिस को फ़ोन करके बताया कि उनके साथ CM आवास में मारपीट हुई। बताया गया कि उन्होंने CM केजरीवाल के निजी सचिव बिभव कुमार पर मारपीट के आरोप लगाए लेकिन थाने में रिपोर्ट नहीं दर्ज करवाई। इस मामले में दिल्ली पुलिस के अफसर उनके घर भी पहुँचे।

AAP की तरफ से इस मामले को लेकर राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और यह बात मानी कि बिभव कुमार ने मालीवाल के साथ बदसलूकी की है। उन्होंने यह भी कहा कि यह मामला CM केजरीवाल के संज्ञान में है और इस पर कार्रवाई होगी।

स्वाति मालीवाल से हुई बदसलूकी की वजह पर कयासों के बीच इसकी सच्चाई इस घटनाक्रम से जुड़े किरदार ही बता सकते हैं। पहला किरदार पीड़ित यानी स्वाति मालीवाल हैं, जिन्होंने घटना के बाद से चुप्पी साध रखी है। दूसरा किरदार आरोपित बिभव कुमार है, जो अरविन्द केजरीवाल के साथ घूम रहा है। तीसरे किरदार CM केजरीवाल खुद हैं, जिन्होंने इससे जुड़े सवालों के कोई जवाब नहीं दिए और जिनके साथ लखनऊ में बिभव कुमार को देखा गया।

‘दोनों मोदी-योगी बनकर आए हैं, शाबाश… बहुत अच्छे’: बच्चों को PM मोदी ने मंच से दिया लाड़-प्यार, अखिलेश-राहुल गाँधी की जोड़ी को बताया खतरनाक

लोकसभा चुनाव 2024 को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (16 मई 2024) को आजमगढ़, जौनपुर, भदोही और प्रतापगढ़ में चुनावी जनसभा करने वाले हैं। उन्होंने आजमगढ़ और जौनपुर में विशाल जनसभा को संबोधित किया है। इस दौरान उनके साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी साथ रहे। जौनपुर की जनसभा में पीएम और सीएम के वेश में आए दो बच्चे आकर्षण का केंद्र रहे।

मंच से भाषण देने के दौरान रैली में आए दो बच्चों को देखकर प्रधानमंत्री मोदी बेहद खुश हुए। इनमें से एक बच्चा पीएम मोदी का वेश बनाया था, जबकि दूसरा बच्चा सीएम योगी का वेश बनाया था। दोनों बच्चों को देखकर पीएम मोदी ने कहा, “ये क्या बढ़िया मोदी-योगी बना लाए हो भाई। ये मोदी तो इतना सुंदर लग रहा है।”

बच्चों और उसके अभिभावक को प्रोत्साहित करते हुए पीएम मोदी ने आगे कहा, “क्या बढ़िया मेकअप किया है भाई। हाथ भी बढ़िया हिला रहे हो। दोनों मोदी-योगी बनकर आ गए। शाबाश… शाबाश… बहुत बढ़िया किया आपने। देखिए सब अखबार वालों की नजर मेरे से हट गई और आप पर आ गई। बढ़िया है। वाह..। ये मोदी को तो हाथ हिलाना भी आ गया है।”

लोगों को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये पूरा क्षेत्र हेल्थ और एजुकेशन का मजबूत हब बन रहा है। उन्होंने कहा कि ‘मोदी-योगी’ आने वाले पाँच सालों में पूर्वांचल की तस्वीर और तकदीर दोनों बदलने वाले हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि मतगणना के दिन 4 जून 2024 को जौनपुर में इतनी इमरती (एक प्रकार की मिठाई) बँटेगी कि सारे रिकॉर्ड टूट जाएँगे।

पीएम ने मोदी ने इस दौरान राहुल गाँधी और अखिलेश यादव पर भी जमकर हमला किया। पीएम मोदी ने कहा कि इन शहजादों का खेल खतरनाक है। ये लोग दक्षिण भारत में सनातन को गालियाँ दिलवाने का काम करते हैं। उन्होंने कहा कि पहले लोग विकास की बातें करते थे तो कभी दिल्ली की चर्चा होती थी तो कभी मुंबई की, लेकिन आज देश और दुनिया काशी की भी चर्चा करती है और अयोध्या की भी।

वहीं, आजमगढ़ में पीएम मोदी ने कहा कि देश में कोई माई का लाल पैदा नहीं हुआ जो CAA हटा दे। कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी पर हमला करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि दोनों दल भले ही अलग दल हैं, लेकिन उनकी दुकान एक ही है। उन्होंने कहा कि ये दोनों दल झूठ, तुष्टिकरण, परिवारवाद और भ्रष्टाचार के सामान बेचते हैं।

जापान, सिंगापुर, ऑस्ट्रेलिया… सब पीछे, एशिया-प्रशांत में सबसे अधिक डाटा सेंटर क्षमता अब भारत के पास: जानिए क्या होता है डाटा सेंटर, कितना महत्वपूर्ण है ये

जमीन से जुड़े निवेश को लेकर काम करने वाली एक कंपनी CBRE ने एक हालिया रिपोर्ट में कहा है कि भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सबसे अधिक डाटा सेंटर क्षमता वाला देश है। रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के पास जनवरी-मार्च 2024 की तिमाही में 950 मेगावॉट की डाटा सेंटर क्षमता है, जो कि सक्रिय है। भारत ने इस मामले में जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, और सिंगापुर जैसे देशों को पीछे छोड़ दिया है।

इस रिपोर्ट के अनुसार, आगे भी भारत के नेतृत्व के बने रहने की आशा है क्योंकि 2024 से 2026 के बीच भारत 850 मेगावॉट की क्षमता बढ़ाएगा। यह आसपास के किसी भी देश से अधिक है। रिपोर्ट बताती है कि भारत के पास 2023 के 2023 के अंत तक सक्रिय और निष्क्रिय डाटा सेंटर क्षमता कुल 1030 मेगावॉट थी। इसके 2024 के अंत तक 1370 मेगावॉट तक बढ़ने की उम्मीद है, जो कि इस वर्ष में 30% की बढ़ोतरी है।

रिपोर्ट में कहा गया, “भारत डाटा सेंटर सेक्टर, अपने आकर्षक निवेश के रिटर्न के कारण निवेशकों के लिए एक बढ़िया सेक्टर बन कर उभरा है। इस सेक्टर की सफलता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2018-2023 के बीच इसमें स्थानीय और विदेशी निवेशकों ने 40 बिलियन डॉलर (लगभग ₹3.3 लाख करोड़) निवेश करने के वादे किए हैं।

क्या होते हैं डाटा सेंटर?

हम और आप इंटरनेट पर जो भी देखते हैं, वह हमारे फोन या मोबाइल में सेव नहीं होता है। इसके उलट जब भी हम इन्टरनेट पर कोई गूगल सर्च या अन्य तरीक से इसकी खोज करते हैं तो यह हमारे सामने आ जाता है। ऐसे में जो भी हम देखते हैं, इसे कहीं ना कहीं स्टोर करने की जरूरत पड़ती है। डाटा सेंटर यही काम करते हैं। इनमें इंटरनेट का डाटा संग्रहित किया जाता है। जब भी कोई यूजर इसकी माँग करता है तो इस डाटा सेंटर से वह डाटा उस तक इंटरनेट के माध्यम पहुँचा दिया जाता है। यह काम कुछ माइक्रोसेकंड्स में होता है।

लगातार बढ़ते इंटरनेट के उपयोग के कारण डाटा सेंटर की माँग में तेजी देखी गई है। यह एक नए व्यापारिक क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। देश में बड़े बड़े दता सेंटर बनाए जा रहे हैं। सुरक्षा दृष्टि से भी यह जरूरी है कि भारत का इंटरनेट डाटा, भारत में ही रहे। डाटा सेंटर की आवश्यकता भी लगातार बढ़ रही है। दरअसल, इसके कारण कई आईटी कम्पनियों को अपने खुद के संसाधन इस काम में नहीं लगाने पड़ते और वह बाकी चीजों पर ध्यान लगा सकती हैं।

भारत में लगातार बढ़ रहा दायरा

भारत में बीते कुछ वर्षों में इंटरनेट का उपयोग तेजी से बढ़ा है। इस कारण से डाटा सेंटर की जरूरत भी बढ़ी है। इस क्षेत्र में अब विदेशी निवेशक भी पैसा लगा रहे हैं, वह भारतीय निवेशकों के साथ मिलकर इस क्षेत्र में निवेश कर रहे हैं। इस क्षेत्र में लाभ भी काफी अधिक है। 2018 से 2023 के बीच भारत को इस संबंध में ₹3.5 लाख करोड़ के निवेश के वादे मिले, यह इस क्षेत्र की मजबूती को दिखाता है।

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्य में इस क्षेत्र में सबसे अधिक निवेश आए हैं। इस क्षेत्र में निवेश करने वाली बड़ी विदेशी कम्पनियों की नजर भी अब भारत पर पड़ी है। वह भारत में नए मॉडल के तहत डाटा सेंटर बना रही हैं। आने वाले समय में भारत के इस क्षेत्र में और आगे बढ़ने की उम्मीद है क्योंकि नई IT सेवाओं को बड़े स्तर पर डाटा सेंटर की आवश्यकता होती है।