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हाजीपुर, मुजफ्फरपुर, सारण… बिहार में PM मोदी ने जलाया रैलियों का ‘चिराग’: कहा- पाकिस्तान को पहना देंगे चूड़ियाँ, जंगलराज पर RJD को घेरा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सोमवार (13 मई, 2024) को बिहार में तीन रैली की। प्रधानमंत्री मोदी ने बिहार के हाजीपुर, मुजफ्फरपुर और सारण में लोकसभा चुनावों के लिए वोट की अपील की। पीएम मोदी ने इस दौरान लालू प्रसाद यादव, राजद और कॉन्ग्रेस पर जम कर हमला बोला।

पीएम मोदी ने बिहार की इन चुनावी रैली में हाजीपुर में NDA सहयोगी और LJP प्रमुख चिराग पासवान, मुजफ्फरपुर में राजभूषण चौधरी निषाद और सारण से उम्मीदवार राजीव प्रताप रूडी के लिए वोट माँगे। इन तीनों रैलियों से पहले वह पटना साहिब में मत्था टेकने के लिए भी गए थे।

पीएम मोदी ने बिहार में कहा कि INDI गठबंधन वाले इतना डरे हुए हैं कि इन्हें रात में भी पाकिस्तान का परमाणु बन दिखाई देता है। पीएम मोदी ने कहा कि यह लोग बोलते हैं कि पाकिस्तान ने चूड़ियाँ नहीं पहनी, अरे भाई, अगर नहीं पहनी है तो पहना देंगे। उन्होंने पूर्ववर्ती सरकारों पर नक्सलवाद को पालने के आरोप लगाए।

उन्होंने यहाँ राजद और कॉन्ग्रेस पर भी जंगलराज को लेकर हमला बोला। उन्होंने कहा, “सामाजिक न्याय के नाम पर लालटेन वालों ने बिहार में कितनी अंधेरगर्दी फैलाई। इन लोगों ने बिहार के लोगों को गरीबी और अभाव में धकेल दिया, जंगलराज दिया, इन लोगों ने सबको बर्बाद किया और खुद अपने आलीशान महल खड़े कर दिए।”

पीएम मोदी ने कहा कि NDA को दिया आपका वोट केंद्र में मोदी की मजबूत सरकार बनाएगा जबकि RJD, कॉन्ग्रेस या इंडी अलायंस को दिया गया वोट बेकार हो जाएगा। पीएम मोदी ने दोनों पार्टियों ने तुष्टिकरण को अपना सबसे बड़ा राजनीतिक हथियार बनाया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि INDI गठबंधन के नेता राम मंदिर को लेकर भद्दी बातें कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये राम मंदिर को गाली देकर, उसका बहिष्कार करके चिढ़ा रहे हैं। पीएम मोदी ने यहाँ मुस्लिम आरक्षण का भी मुद्दा उठाया।

उन्होंने इसको लेकर लालू यादव पर हमला बोला। पीएम मोदी ने कह़ा, ”बिहार में जंगलराज लाने वाले जो व्यक्ति हैं, जिनको चारा घोटाले में कोर्ट ने गुनहगार माना है और सजा दी है, उन्होंने एक बयान दिया कि मुसलमानों को आरक्षण दिया जाना चाहिए, वो भी पूरा का पूरा। यानी दलितों, पिछड़ों और आदिवासियों को मिलने वाला पूरा आरक्षण अब ये मुसलमानों को देना चाहते हैं। मैं आपको गारंटी देता हूं, जब तब मोदी जिंदा है, ये आपके ​अधिकारों पर डाका नहीं डाल सकते, ये आपके आरक्षण को छीन नहीं सकते।”

पीएम मोदी ने कहा, “RJD-कॉन्ग्रेस ने बिहार को सिर्फ पलायन दिया, सिर्फ तबाही दी, जबकि मोदी ‘विकसित बिहार, विकसित भारत’ के संकल्प को लेकर निकला है। कॉन्ग्रेस सरकारों ने इतने दशकों तक गरीब का पेट नहीं भरने दिया। गरीब और गरीब होता जा रहा था, देश की अर्थव्यवस्था बदहाल होती जा रही थी और सरकार में बैठे लोग बिना शर्म कहते थे कि हमारे पास जादू की छड़ी है क्या। ये घोटाले करके अपनी तिजोरियाँ भर रहे थे, लेकिन गरीब का पेट भरने की चिंता उन्हें नहीं थी।”

‘हैदराबाद में 90% बूथों पर गड़बड़ी, मरे हुए लोगों के भी डले वोट’: माधवी लता ने बताया क्यों बुर्का वालियों की उन्हें खुद करनी पड़ी पहचान, बवाल के बाद FIR

लोकसभा90% चुनाव 2024 के चौथे चरण के लिए सोमवार (13 मई, 2024) को जिन 96 सीटों पर मतदान हो रहा है, उनमें एक हाईप्रोफाइल सीट हैदराबाद भी है। तेलंगाना के हैदराबाद में मुख्य मुकाबला AIMIM के बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी और भाजपा की कोम्पेल्ला माधवी लता के बीच है। माधवी लता उस क्षेत्र में लंबे समय से समाजसेवा का कार्य करती आ रही हैं, वहीं ये सीट पिछले 40 वर्षों से ओवैसी परिवार के कब्जे में है। अब मतदान के दिन ही माधवी लता के खिलाफ FIR दर्ज कर दी गई है।

असल में माधवी लता को कई मतदान केंद्रों पर बुर्कानशीं महिलाओं के चेहरे और उनके वोटर आईडी कार्ड में दर्ज तस्वीर का मिलान करते हुए देखा गया। माधवी लता पहले से ही आरोप लगाती रही हैं कि हैदराबाद में असदुद्दीन ओवैसी लाखों फर्जी मतों के दम पर जीतते हैं और बुर्के में महिलाओं को फर्जी मतदान के लिए लाया जाता है। इस दौरान माधवी लता ने इन महिलाओं को बुर्का हटाने के लिए कहा। ‘ग्रेटर हैदराबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन’ के कमिश्नर के आदेश पर ये FIR दर्ज की गई है।

कमिश्नर रोनाल्ड रोज को ही चुनाव आयोग ने हैदराबाद लोकसभा क्षेत्र के लिए रिटर्निंग ऑफिसर भी बनाया है। मालकपट पुलिस थाने में माधवी लता के विरुद्ध IPC की धारा-171C (मताधिकार के प्रयोग की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करना), 186 (सरकारी कर्मचारी की ड्यूटी में बाधा डालना) और 505(1)(c) (किसी वर्ग को भड़काने के लिए बयान देना) के तहत FIR दर्ज हुई है। साथ ही लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा-132 भी लगाई गई है।

माधवी लता ने आरोप लगाया है कि कई मतदाताओं के नाम वोटर्स लिस्ट में से डिलीट भी कर दिए गए हैं। सफाई में माधवी लता ने कहा है कि वो एक उम्मीदवार हैं और उन्हें मतदाताओं की पहचान की पुष्टि करने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि वो खुद एक महिला हैं, ऐसे में वो दूसरी महिलाओं का सम्मान करती हैं। बकौल माधवी लता, उन्होंने सिर्फ बुर्कानशीं महिलाओं से निवेदन किया था कि वो अपनी पहचान बताएँ। भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि जिनकी गड़बड़ियाँ उजागर हो रही हैं वो हो-हल्ला कर रहे हैं।

उन्होंने कई मतदान केंद्रों पर बड़े स्तर पर बोगस वोटिंग का आरोप लगाते हुए कहा कि पिछले कुछ वर्षों में जिनलोगों की मौत हो गई है उनके नाम पर भी वोट डाले गए हैं। आज़मपुरा और गोशमहल में गड़बड़ियों को लेकर उन्होंने चुनाव आयोग में शिकायत देने की बात भी कही है। माधवी लता ने कहा कि 90% बूथों पर गड़बड़ियाँ हो रही हैं, महिला कॉन्स्टेबलों को बुर्कानशीं महिलाओं के चेहरे का उनके पहचान-पत्र से मिलान करने को नहीं कहा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पुलिस को शिकायत करने पर वो कह रहे हैं कि ये उनकी जिम्मेदारी नहीं है।

तालाब में नहा रही थी ST महिला, सरफराज ने साथी के साथ मिलकर किया रेप का प्रयास: शोर मचाने पर मुँह में हाथ डाल खींच दी जीभ

झारखंड के जामताड़ा में एक जनजातीय समुदाय (Scheduled Tribes) की महिला के साथ रेप का प्रयास किया गया है। घटना के समय पीड़िता तालाब में नहा रही थी। रेप के प्रयास का आरोप मुस्लिम समुदाय के 2 युवकों पर लगा है। इनमें से एक की पहचान सरफराज अंसारी के तौर पर सामने आई है।

रिपोर्टों के अनुसार महिला ने जब जबर्दस्ती का विरोध करते हुए शोर मचाया तो आरोपितों ने उसकी जीभ खींच ली और उसे बेरहमी से पीटा। केस दर्ज कर पुलिस मामले की जाँच कर रही है। दोनों आरोपितों को हिरासत में ले लिया गया है। रविवार (12 मई 2024) की इस घटना से ST समुदाय में काफी नाराजगी है। भाजपा ने राज्य की झामुमो सरकार पर मनचलों को मनबढ़ करने का आरोप लगाया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक घटना जामताड़ा के करमाटांड थाना क्षेत्र की है। रविवार को पीड़िता दोपहर 12 से 1 बजे के बीच तालाब में नहा रही थी। तभी लावाडीह गाँव का सरफराज अंसारी अपने एक साथी के साथ वहाँ पहुँचा। उसने पीड़िता को अकेला पा कर रेप करने की कोशिश की। पीड़िता ने आरोपितों की इस हरकत का विरोध किया और शोर मचाने लगी। इससे नाराज हो कर सरफराज और उसके साथी ने महिला की बेरहमी से पिटाई की। महिला की जमीन पर पटक कर उसके मुँह में हाथ डाल जीभ खींच दी।

पीड़िता के लगातार विरोध के चलते आरोपित धमकी देते हुए मौके से भाग निकले। पीड़िता सरफराज के पड़ोस के गाँव की है। महिला भागते हुए अपने गाँव पहुँची तो लोगों को सारी बात पता चली। जीभ खींचे जाने की वजह से पीड़िता ठीक से बोल नहीं पा रही है। मामले की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस पहुँची। घटना के बाद दोनो आरोपित फरार हो गए थे लेकिन बाद में वे हिरासत में ले लिए गए।

इस घटना के बाद जनजातीय समुदाय में काफी आक्रोश है। भारतीय जनता पार्टी ने इस घटना को झारखंड की वर्तमान सरकार में लॉ एन्ड ऑर्डर की विफलता बताया है। पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने अपने X हैंडल पर लिखा, “हेमंत सोरेन ने अपने शासन में सिर्फ सरफराज अंसारी जैसे मनचलों की हिम्मत बढ़ाई है। पिछले साढ़े 4 सालों में झारखंड में झामुमो-कॉन्ग्रेस शासन के दौरान महिलाओं विशेषकर आदिवासी युवतियों के खिलाफ अपराध की घटनाओं में काफी वृद्धि आई है।”

मरांडी ने आगे लिखा कि आदिवासी युवतियों के साथ लव जिहाद, पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने, गाड़ियों से कुचलकर मारने की घटनाएँ हो रही है, लेकिन राज्य सरकार इन मामलों में चुप्पी साधे रहती है। उन्होंने मुख्यमंत्री चम्पई सोरेन से पुलिस के विशेष बल का गठन कर आरोपितों पर कड़ी कार्रवाई की माँग की है। उन्होंने पीड़िता को शारीरिक और मानसिक दहशत में बताया है। बताया जाता है कि शुरुआत में इस मामले में FIR अज्ञात के खिलाफ दर्ज की गई थी। बाद में दोनों आरोपितों को हिरासत में लिया गया है। मामले में जाँच और अन्य कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

8 पैक एब्स से जिस हीरो की पहचान, पीटकर उसके नाक की हड्डी तोड़ी: खून से लथपथ Video किया शेयर, कहा- माँ के साथ मंदिर से लौट रहा था तो हुआ हमला

साउथ के अभिनेता चेतन चंद्रा की इंस्टा पर एक वीडियो सामने आई है। इस वीडियो में चेतन खून से लथपथ नजर आ रहे हैं। वीडियो में वो कन्नड़ में अपने साथ घटित घटना के बारे में बताते हैं। उनकी इस वीडियो पर बनी खबरों में दावा है कि एक्टर पर नशे में धुत एक आदमी और करीबन 20 लोगों ने हमला किया।

मीडिया रिपोर्टस की मानें तो चेतन मदर्स डे पर मंदिर से लौट रहे थे तब उनके ऊपर हमला हुआ। चेतन बताते हैं कि उन्होंने घटना के फौरन बाद पुलिस से मदद माँगी और अपनी शिकायत दर्ज करवाई। इस मामले में कागलीपुरा थाने में मामला दर्ज हुआ है।

अभी तक की छानबीन में यही सामने आया है कि आरोपित नशे में था और एक्टर की कार को ओवरटेक करने में लगा था। विरोध होने पर उसने हमला किया। अब पुलिस आरोपित को पकड़कर उससे अपनी पूछताछ कर रही है।

चेतन कहते हैं, “देखो आज मेरे साथ क्या हुआ। उन्होंने मुझ पर हमला किया और मेरी नाक तोड़ दी। वह आदमी मुझे ओवरटेक करने की कोशिश कर रहा था। जब मैं उसके पास गया और कार को नुकसान पहुँचाने के बारे में पूछने लगा। कुछ ही मिनटों में वहाँ एक महिला और करीब 20 लोग जमा हो गए और मेरे साथ मारपीट करने लगे। मैं फौरन इस संबंध में पुलिस को सूचना दी जिसके बाद पुलिस ने आकर मेरा इलाज करवाया। हालाँकि इसके बाद वो रुके नहीं। वो गैंग दोबारा लौटा और मेरी कार को नुकसान पहुँचाया।”

बता दें कि इस घटना के संबंध में चेतन ने वीडियो शेयर की है। इस वीडियो में वो अपनी टूटी नाक, उससे बहता खून दिखा रहे हैं। उन्होंने कैप्शन में लिखा है- “बहुत बुरा अनुभव था, मुझे न्याय चाहिए।” उनकी यह वीडियो देखने के बाद उनके चाहने वाले उन्हें ऐसे लोगों से सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं और साथ ही उनके जल्द ठीक होने की काम कर रहे हैं।

चेतन के वर्क फ्रंट की बात करें तो लोग उन्हें उनके छोटे-बड़े रोल्स के लिए जानते हैं। इसके अलावा कुछ समय पहले वह अपने 8 पैक्स के कारण चर्चा में आए थे। उनकी मसल प्लैनेट की ट्रेनर किटी ने जानकारी दी कि थी कि वो 8 महीने से 12 घंटे वर्कआउट और स्ट्रिक्ट डाइट पर थे ताकि अपनी फिल्म में एब दिखा सकें।

वही CM, वही घर… तब मुख्य सचिव की पिटाई पर हंगामा, अब खासमखास स्वाति मालीवाल से बदसलूकी: 6 साल बाद फिर कलंकित हुई दिल्ली

आम आदमी पार्टी (AAP) की ज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल ने सोमवार (13 मई, 2024) को आरोप लगाया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर उनके साथ मारपीट हुई। बताया गया कि यह मारपीट केजरीवाल के निजी सचिव विभव कुमार ने की। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए दी गई है।

इस मामले में आधिकारिक शिकायत नहीं हुई है लेकिन बताया गया कि स्वाति मालीवाल थाने पहुँची थी। हालाँकि, यह पहली बार नहीं है जब दिल्ली मुख्यमंत्री आवास पर मारपीट की घटना हुई हो। इससे पहले यहाँ 2018 में दिल्ली के तत्कालीन मुख्य सचिव अंशु प्रकाश को पीटा जा चुका है।

फरवरी, 2018 में दिल्ली के मुख्य सचिव IAS अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया था कि 19-20 फरवरी की दरम्यानी रात को उन्हें CM केजरीवाल के आधिकारिक आवास पर एक बैठक के नाम पर बुलाया गया। इस बैठक में CM अरविन्द केजरीवाल, डिप्टी CM मनीष सिसोदिया और AAP MLA अमातुल्लाह खान समेत अन्य कई विधायक मौजूद थे।

1986 बैच के IAS अंशु प्रकाश ने अपनी शिकायत में कहा था कि उन्हें AAP सरकार के लिए किए जाने विज्ञापन को लेकर एक मीटिंग में बुलाया गया था। अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया कि इसी बैठक में उनके साथ AAP MLA अमानतुल्लाह खान समेत अन्य ने उन पर हमला बोला। अंशु प्रकाश ने आरोप लगाया कि उनके मुंह और सर पर कई घूंसे मारे गए।

उन्होंने दिल्ली पुलिस को की गई शिकायत में CM अरविन्द केजरीवाल और डिप्टी CM मनीष सिसोदिया के खिलाफ भी आरोप लगाया था। अंशु प्रकाश ने इन दोनों समेत 12 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई करते हुए बाद में अमानतुल्लाह खान और प्रकाश जारवाल को दोषी ठहराया था जबकि बाकी सभी लोगों को बरी कर दिया था।

अंशु प्रकाश को इस पूरे विवाद के बाद दिल्ली सरकार से स्थानांतरित करने केंद्र सरकार में भेज दिया गया था। अब CM केजरीवाल के आवास पर ही राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के साथ मारपीट की खबरें आई हैं। इस मामले में अभी CM आवास या स्वाति मालीवाल की तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

दिल्ली पुलिस ने मीडिया को बताया है कि उन्हें CM आवास से एक महिला के साथ मारपीट को लेकर फोन आया था। दिल्ली पुलिस ने बताया कि शिकायत करने वाली महिला बाद में थाने आ गई और बिना FIR दर्ज करवाए ही चली गई। महिला ने कहा कि वह बाद में FIR दर्ज करवाएगी।

जयपुर के जिस सीरियल ब्लास्ट में गई थी 71 की जान, उसकी बरसी पर 37 स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी: बच्चे भेजे गए घर, जाँच में जुटी पुलिस

दिल्ली के बाद अब जयपुर के स्कूलों को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। जयपुर सीरियल ब्लास्ट 2008 की बरसी पर ई-मेल के जरिए यह धमकी लगभग 37 स्कूलों को मिली है। इन स्कूलों में माहेश्वरी पब्लिक स्कूल तिलक नगर, विद्याआश्रम स्कूल ओटीएस चौराहा, निवारू रोड सेंट टेरेसा स्कूल, महर्षि पीजी कॉलेज सांगानेर, मालवीयनगर कान्वेंट स्कूल आदि शामिल हैं। सूचना मिलते ही पुलिस टीम बम निरोधक दस्ते के साथ स्कूलों में पहुँची और सघन तलाशी ली। फिलहाल कोई भी आपत्तिजनक सामान अथवा विस्फोटक बरामद नहीं हुआ है। घटना की जाँच के लिए SIT का गठन किया गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 37 स्कूलों को ई-मेल के जरिए मिली इस धमकी के बाद पुलिस की कई टीमें इन स्कूलों में पहुँच गई हैं। ई-मेल भेजने वाले ने लिखा, “स्कूल की बिल्डिंग में बम है, जो कि कभी भी फट सकता है।” राजस्थान के DGP यू आर साहू ने बताया कि सुबह 6 बजे से पुलिस टीमें सर्च अभियान चला रहीं हैं जो अब तक जारी है। अभी तक कोई संदिग्ध सामान नहीं मिला है। पुलिस की साइबर टीमों को मेल भेजने वाले की तलाश में लगाया गया है।

अभी तक मिली जानकारी के अनुसार, धमकी रूसी सर्वर से भेजी गई है। पुलिस ने लोगों से पैनिक न होने और अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है।

राजस्थान के मुख्य सचिव सुधांश पंत ने आपातकालीन मीटिंग बुलाई है। मीटिंग में राज्य के गृह सचिव आनंद कुमार और इंटेलीजेंस विंग के DG IPS संजय अग्रवाल को भी बुलाया गया है। बम की धमकी के बाद कई स्कूलों में छुट्टी कर दी गई है। कुछ स्कूलों को समय से पहले बंद कर दिया गया है। बच्चों के अभिभावकों को भी काफी परेशान देखा गया। कई माता-पिता स्कूल पहुँच कर अपने बच्चे को साथ ले गए।

अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, माहेश्वरी पब्लिक स्कूल तिलक नगर, विद्याआश्रम स्कूल ओटीएस चौराहा, निवारू रोड सेंट टेरेसा स्कूल, महर्षि पीजी कॉलेज सांगानेर, मालवीयनगर कान्वेंट स्कूल को बम की धमकी दी गई है।

2008 में हुआ था सीरियल ब्लास्ट

बताते चलें कि 13 मई, 2008 को जयपुर में सीरियल ब्लास्ट हुए थे। इस दिन जयपुर के अलग-अलग हिस्सों में 15 मिनट के अंदर 8 धमाके हुए थे। इन विस्फोटों में 71 लोगों की मौत हो गई थी और 185 लोग घायल हुए थे। धमाके के लिए साइकिलों का प्रयोग किया गया था। कुछ लोगों के शव तो हवा में उड़ते दिखाई दिए थे। 18 दिसंबर, 2019 को इस केस में मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजम, सैफुर्रहमान और मोहम्मद सलमान को अदालत ने दोषी करार दिया था।

हिंदुओं की आबादी 66 से घटकर 54%, मुस्लिम बढ़ गए 6 से 26%: मिलिए जनसंख्या वृद्धि दर के ‘केरल मॉडल’ से – यह लेख नहीं, आँकड़े हैं

हमारे देश में 28 राज्य हैं, जिसमें से 8 राज्यों में हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। देश की जनसंख्या में लगातार वृद्धि हो रही है, जो बहुत ही चिंता का विषय है। ऐसे समय में यह जानना अतिमहत्वपूर्ण है कि इस जनसंख्या वृद्धि में हिन्दुओं की संख्या का कितना अनुपात है।

अगर हम एक साधारण हिन्दू परिवार की बात करें, तो हम पाएँगे कि हमारी दादी, नानी और हमारे माता-पिता कम से कम 5 से 6 भाई-बहन हुआ करते थे। लगभग 40 वर्ष के युवा के माता-पिता का जन्म आजाद भारत में हुआ, बढ़ती हुई जनसंख्या निश्चित रूप से देश की प्रगति में बहुत बड़ी समस्या है और इसका सीधा असर आर्थिक और सामाजिक रूप से दिखता है।

अगर सही मायनों में हम जनसंख्या के प्रति जागरूक हैं तो हमें जनसंख्या वृद्धि के डेटा को समझना होगा। इंदिरा गाँधी की सरकार ने 1970 के दशक में हम दो हमारे दो का नारा दिया। कहीं न कहीं यह नीति साफ तौर पर हिन्दुओं के लिए थी। कैसे? इसका उत्तर आसानी से समझने के लिए पहले हम अभी के आँकड़ों को समझ लेते हैं।

अगर हम हिन्दू और मुस्लिम की जनसंख्या वृद्धि के अनुपात को देखें तो हम पाएँगे कि हिन्दुओं की जनसंख्या वृद्धि की दर 2011 के डेटा के हिसाब से 16.08% थी जबकि मुस्लिम जनसंख्या की वृद्धि दर 24.6% थी। हिन्दुओं की जनसंख्या वृद्धि दर पिछले चार दशकों से घट रही है। यह वृद्धि दर 1981 में 24.1%, 1991 में 22.7%, 2001 में 19.9% तथा 2011 में 16.8% है। देश में हिन्दू की जनसंख्या, देश की कुल आबादी का 80% भी नहीं रह गई है और हर दशक के बाद यह अनुपात कम ही होता जा रहा है।

2011 की जनगणना के अनुसार केरल की बात करें तो हम पाएँगे कि हिन्दू की आबादी वहाँ सिर्फ 54.72% है, जबकि 1911 (तब त्रावणकोर राज्य) के डाटा के हिसाब से यह 66.57% थी। 1911 के उसी केरल में मुस्लिम आबादी थी मात्र 6.61%, और 2011 में कितनी थी? 26.56% मुस्लिम थे केरल में जनगणना 2011 के अनुसार।

मतलब केरल में हिंदू घट रहे हैं, मुस्लिम बढ़ते चले जा रहे हैं। 2011 और 1911 के आँकड़ों से अगर क्लियर नहीं डेमोग्राफी चेंज का मसला तो एक आँकड़ा 2011 और 2001 का भी है। इन 10 सालों में केरल में हिंदुओं और ईसाइयों की जनसंख्या के मुकाबले मुस्लिम आबादी 10% ज्यादा बढ़ी थी। सिर्फ केरल ही नहीं, पश्चिम बंगाल में भी हिन्दुओं की जनसंख्या घटती जा रही है, जो चिंता का विषय है।

वर्ष 1975 में इंदिरा गाँधी ने देश में आपातकाल लगा दिया, राजनीतिक गलियारों से लेकर एक आम आदमी के निजी जीवन तक इसका प्रभाव पड़ा। यह वही समय था, जब इंदिरा गाँधी ने जनसंख्या को नियंत्रण करने के लिए नसबंदी जैसे सख्त फैसले किए। यह फैसला इंदिरा सरकार ने लिया था, पर इसे लागू करने की जिम्मेदारी उनके छोटे बेटे संजय गाँधी को दी गई थी। एक रिपोर्ट के मुताबिक 60 लाख से ज्यादा लोगो की नसबंदी कर दी गई। अगर हम इस मुद्दे पर प्रकाश डालें तो पाएँगे कि मीडिया में ऐसा कोई भी डेटा प्रकाशित नहीं हुआ, जो यह बता सके कि 60 लाख लोगों में से किस धर्म के कितने लोग थे, जिनकी नसबंदी हुई।

अगर हम हिन्दुओं की जनसंख्या वृद्धि को ध्यान में रख कर 1971 और 1981 के डेटा का अनुपात देखें तो पाएँगे कि 1981 के बाद हिन्दुओं की जनसंख्या घटती जा रही है, जबकि बाकी वर्ग की जनसंख्या हिन्दुओं के अनुपात में तेजी से बढ़ रही है। अगर सभी धर्म-मजहब के लोगों की नसबंदी जनसंख्या के आधार पर समानुपातिक किया गया होता तो क्या कारण है कि सिर्फ हिंदुओं की जनसंख्या घटी, जबकि बाकियों की बढ़ी? इंदिरा गाँधी की सरकार को जनसंख्या नियंत्रण करने के लिए वर्ल्ड बैंक, स्वीडिश अंतरराष्ट्रीय विकास प्राधिकरण और संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष से 10 मिलियन डॉलर की आर्थिक मदद मिली थी।

इस पूरे प्रकरण से अगर हम दो साल पीछे 1973 में देखें तो हम पाएँगे कि इंदिरा गाँधी ने वर्ष 1973 में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, जो एक गैर सरकारी मुस्लिम संगठन है, का गठन किया। इसके लिए देश के हिन्दुओं के साथ-साथ सीधे तौर पर संविधान को भी दर किनार किया गया। यहाँ, यह जानना अति आवश्यक है कि यह वही मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड है, जो राम मंदिर जन्मभूमि विवाद में न्यायालय में राम मंदिर के विरुद्ध पार्टी था। क्या यह सब महज एक संयोग है या फिर हिन्दुओं के विरुद्ध किसी सोची समझी साजिश का हिस्सा?

अगर हम नेहरू गाँधी परिवार के इतिहास की पड़ताल करें तो पाएँगे कि कहीं न कहीं इसके तार मुगलों से जुड़ते दिखते हैं। क्या हिन्दू की आवाज़ उठाने वाला कोई नहीं है? ये कौन लोग हैं, जो हिन्दुओं या यूँ कहें की जो सनातन धर्म के अनुयायियों को मिटाने पर तूले हैं? राम मंदिर आंदोलन के समय लाखों कारसेवकों पर अंधाधुँध गोली चलाने वाले कौन थे? सनातन धर्म के विरोधी ये कौन लोग हैं, जो हिन्दू को हिन्दू के विरुद्ध भड़काना चाहते हैं?

अगर हम कानपूर के बिकरू कांड की बात करें तो पाएँगे कि अपराधी विकास दुबे एक ब्राह्मण था, जिसकी मुठभेड़ में हुई मृत्यु पर ब्राह्मणों को भड़काने की राजनीति शुरू हो गई परन्तु बिकरू कांड में बलिदान हुए पुलिस ऑफिसर देवेंदर मिश्रा भी ब्राह्मण थे, पर इस पर कोई चर्चा नहीं हुई।

यह सब उस षड्यंत्र का हिस्सा है, जो सदियों से उन लोगों के खिलाफ चल रहा है, जो सनातन धर्म का परचम लहरा रहे हैं। हिन्दुओं में आपस में फुट डालकर राजनीति करने की आदत देश विरोधी ताकतों की बहुत पुरानी है। परन्तु अब समय आ गया है कि हिन्दुओं को संगठित होकर, ब्राह्मण और दलित की राजनीति से ऊपर उठकर अपने असली दुश्मनों के विरुद्ध रण के लिए तैयार होना होगा।

ईरान के चाबहार बंदरगाह का ‘ठेकेदार’ बना भारत, 10 साल तक देखेगा संचालन: वाजपेयी के जमाने में शुरू हुई कवायद, मोदी राज में पूरा हुआ मिशन

अब भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह को चलाएगा। इसके लिए भारत और ईरान के बीच 10 साल का समझौता हो रहा है। भारत के बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मामलों के मंत्री सर्बानंद सोनोवाल भारत और ईरान के इस समझौते पर हस्ताक्षर के लिए सोमवार (13 मई, 2024) को ईरान गए हैं।

भारत ने इस चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए बड़ी धनराशि का निवेश किया है। इसका प्रबंधन अभी तक भारत सीमित रूप से करता है। नया समझौता बंदरगाह को चलाने के लिए होगा जो कि 10 वर्षों का होगा। इसे आगे बढ़ाया भी जा सकेगा। चाबहार बंदरगाह आर्थिक के साथ ही सामरिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

क्या है नया समझौता?

नए समझौते के अनुसार, भारत ईरान के चाबहार बंदरगाह का पूरी तरह से प्रबन्धन करेगा। इसके ऑपरेशन को भारत ही चलाएगा। इसके अंतर्गत इस बंदरगाह पर होने वाली सभी गतिविधियों को भारत नियंत्रित करेगा। यहाँ आने जाने वाले जहाजों और माल के आवागमन को भारतीय कम्पनियाँ नियंत्रित करेंगी। भारत और ईरान के बीच यह समझौता 10 वर्षों के लिए होगा। भारत और ईरान के बीच पहले भी चाबहार पोर्ट के संचालन का समझौता हुआ था।

हालाँकि, इस समझौते के अंतर्गत भारत को चाबहार पोर्ट पर सीमित अधिकार थे। यह समझौता 2016 में हुआ था। इसके अंतर्गत चाबहार पोर्ट के शाहिद बेहेश्ती टर्मिनल के संचालन की जिम्मेदारी भारत के पास थी। यह समझौता लम्बे समय के लिए नहीं किया गया था। यह समझौता प्रत्येक वर्ष दोहराया जाता था। यह समझौता भारत और ईरान के अलावा अफगानिस्तान के साथ भी किया गया था। भारत की चाबहार में बड़ी हिस्सेदारी के लिए ईरान पहले से जोर लगाता रहा है।

चाबहार में भारत ने किया है निवेश, अटल बिहारी सरकार से शुरू हुई कवायद

चाबहार बंदरगाह को विकसित करने में भारत का बड़ा रोल है। चाबहार बंदरगाह को विकसित करने की बातचीत 2002 में चालू हुई थी। 2003 में तत्कालीन ईरानी राष्ट्रपति मुहम्मद खतामी नई दिल्ली की यात्रा पर आए थे, इस यात्रा के दौरान तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के साथ उन्होंने कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें आवागमन को लेकर सहयोग भी एक बिंदु था। इसके बाद देश में सत्ता बदल गई और UPA सरकार ने इस मोर्चे पर कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया।

मोदी सरकार आने के बाद इस मामले में तेजी से कदम बढ़ना चालू हुए। 2015 में भारत ने विदेश में पोर्ट चलाने के लिए एक नई सरकारी कम्पनी का गठन किया। भारत और ईरान के बेच इस दौरान चाबहार बंदरगाह को विकसित करने की बातचीत ने जोर पकड़ा और 2016 में दोनों देशों के बीच समझौता हुआ। पीएम मोदी ने 2016 में अपनी यात्रा के दौरान ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी और अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के साथ इस समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।

भारत ने चाबहार के एक टर्मिनल में 85 मिलियन डॉलर (लगभग ₹7.09 करोड़) निवेश करने की घोषणा की थी। भारत ने इस बंदरगाह के विकास के लिए 150 मिलियन डॉलर (लगभग ₹1250 करोड़) का कर्ज देने की भी घोषणा की थी।

चाबहार को विकसित करने वाली भारतीय कम्पनी IPGL के अनुसार, बंदरगाह के पूरी तरह विकसित होने पर इसकी क्षमता 82 मिलियन टन हो जाएगी। इससे ईरान के बंदर अब्बास बंदरगाह से भीड़ कम करने में राहत मिलेगी। इसी के साथ इसके नए तकनीक से बने होने के कारण यहाँ माल की आवाजाही आसानी से हो सकेगी।

अफगानिस्तान का रास्ता आसान करता है चाबहार

भारत चाबहार में अफगानिस्तान के कारण सबसे अधिक रूचि रखता है। पहले भारत से अफगानिस्तान कोई भी माल भेजने के लिए उसे पाकिस्तान से गुजरना होता था। चाबहार बंदरगाह के विकास के बाद से अफगानिस्तान माल भेजने का यह सबसे अच्छा विकल्प है। भारत अफगानिस्तान को गेंहू भी इस रास्ते से भेज रहा है। अफगानिस्तान के अलावा यह बंदरगाह भारत के लिए मध्य एशियाई देशों के भी रास्ते खोलेगा। इन देशों से गैस और तेल भी इस पोर्ट के जरिए लाया जा सकता है। इन देशों के साथ व्यापार इस चाबहार बंदरगाह के जरिए आसान हो जाएगा।

सामरिक महत्व भी रखता है चाबहार

चाबहार इस क्षेत्र में भारत के आर्थिक हितों के साथ ही सामरिक हितों को भी साधेगा। यह अफगानिस्तान से जुड़ने के लिए भारत की पाकिस्तान पर निर्भरता को खत्म कर देगा। इससे भारत अफगानिस्तान को सीधे मदद पहुँचा पाएगा। इस बंदरगाह की भौगोलीय स्थिति इसे और भी महत्वपूर्ण बनाती है। चाबहार बंदरगाह ईरान के सिस्तान और बलूचिस्तान में स्थित है। चाबहार, पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के बराबर ही ओमान की खाड़ी में स्थित है।

ग्वादर बंदरगाह चीन ने बनाया है। ऐसे में भारत इस इलाके में चीन को भी चाबहार के जरिए चुनौती दे रहा है। चीन ग्वादर को बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के तहत बना रहा है। इससे वह पूरी दुनिया को रोड, रेल और समुद्री मार्ग से जोड़ना चाहता है।

चाबहार से अफगानिस्तान की सीमा भी नजदीक है। ईरान से तेल समेत अन्य सामनों की आपूर्ति भी भारत में चाबहार के जरिए जल्दी हो सकती है। इससे इस इलाके में भारत का दबदबा भी बढ़ेगा। इसके अलावा चाबहार से जुड़ी हुई एक रेल लाइन भी बनाए जाने का प्रस्ताव है। ईरान को भी इस बंदरगाह से फायदा होगा। वह अपने ऊपर पर लगे प्रतिबंधों को इस बंदरगाह के जरिए बच सकता है। ऐसे में दोनों देशों को फायदा होगा।

फर्जी OBC सर्टिफिकेट पर लुबना शौकत ने की MBBS की पढ़ाई, हाईकोर्ट ने कहा- डॉक्टरी करने दीजिए नहीं तो होगा ‘देश का नुकसान’

बॉम्बे उच्च न्यायालय ने एक महिला डॉक्टर का MBBS एडमिशन रद्द करने से इनकार कर दिया। उस पर आरोप था कि उसने झूठी सूचनाएँ लेकर OBC नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट प्राप्त किया था। हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का एडमिशन रद्द करने का अर्थ होगा देश को एक डॉक्टर का नुकसान होना, क्योंकि उक्त महिला अब एक डॉक्टर बन चुकी है। बता दें कि उसने MBBS का कोर्स पूरा कर लिया था। उच्च न्यायालय ने कहा कि ऐसी स्थिति में उसकी डिग्री छीन लेना उचित नहीं होगा।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे देश में पहले से ही जनसंख्या के हिसाब से डॉक्टरों का अनुपात काफी कम है। इसीलिए, बॉम्बे हाईकोर्ट का मानना है कि एक डॉक्टर की डिग्री छीनना राष्ट्रीय हानि होगी, क्योंकि देश के नागरिक एक एक डॉक्टर को खो देंगे। हालाँकि, जस्टिस AS चांदुरकर और जस्टिस जितेंद्र जैन की एक खंडपीठ ने OBC नॉन-क्रीमी लेयर वाला सर्टिफिकेट रद्द करते हुए याचिकाकर्ता का एडमिशन ओपन कैटेगरी से हुए में बदल दिया। इसके अलावा अब उसे अपनी फी भी इसी हिसाब से चुकानी पड़ेगी।

साथ ही उस पर 50,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। हाईकोर्ट ने कहा कि उसे भान है कि मेडिकल कोर्स में प्रवेश के लिए कितनी प्रतियोगिता है, साथ ही उसे ये भी पता है कि ओपन कैटेगरी में इसके लिए भारी फी चुकानी पड़ती है। जजों ने कहा कि इसका ये अर्थ नहीं है कि छात्र और अभिभावक अनुचित माध्यमों का इस्तेमाल कर के मेडिकल कोर्स में दाखिला ले लें। अवैध NCL सर्टिफिकेट मामले में एडमिशन रद्द होने से रोकने के लिए उक्त डॉक्टर हाईकोर्ट पहुँची थी।

याचिकाकर्ता लुबना शौकत मुजावर ने मुंबई के सिओन स्थित लोकमान्य तिलक म्युनिसिपल मेडिकल कॉलेज एन्ड जनरल हॉस्पिटल से डिग्री प्राप्त कर रखी है। उसने 2012-13 में एडमिशन लिया था। याचिकाकर्ता के पिता ने इन्क्वारी कमिटी के सामने झूठ कहा था कि उनकी पत्नी बेरोजगार है। तलाक के बावजूद उनका कहना था कि बच्चों के लिए दोनों साथ रह रहे हैं, साथ ही पत्नी कॉर्पोरेशन में कार्यरत थी। अक्टूबर 2013 में उसका एडमिशन रद्द कर दिया था था, लेकिन फरवरी 2014 में हाईकोर्ट ने उसे राहत देते हुए कोर्स जारी रखने का आदेश दिया।

उक्त महिला ने ऑब्सटेट्रिक्स और गायनेकोलॉजी में MBBS कोर्स, डिप्लोमा और इंटर्नशिप पूरी की थी। उसका कहना था कि तलाक के बाद पत्नी की आय से कुछ लेना-देना नहीं है, ये उसके पिता की सोच थी इसीलिए उन्होंने पत्नी की इनकम नहीं गिनाई। उसका कहना था कि उसके पिता की आय सर्टिफिकेट के लिए ज़रूरी लिमिट से कम है, ऐसे में उन्होंने सही जानकारी दी। हाईकोर्ट ने ये टिप्पणी भी की कि मेडिकल कोर्स का आधार अगर झूठी सूचनाएँ हैं तो ये इस प्रोफेशन के लिए एक कलंक होगा, किसी छात्र को ऐसा नहीं करना चाहिए।

30 साल पहले मर गई लड़की, उसके लिए ‘वर’ की तलाश में परिजनों ने अखबार में छपवाया विज्ञापन: जानिए क्या है ‘प्रेथा मडुवे’ जिसमें आत्माओं का होता है विवाह

मैट्रिमोनियल साइटों पर माता-पिता अपने बच्चों के लिए अक्सर अजीबोगरीब डिमांड करते हुए विज्ञापन छपवाते हैं, लेकिन कभी आपने सुना है कि कोई माता-पिता अपने मृत बच्चे जिसने 30 साल पहले शरीर छोड़ा हो एक लिए रूह वाले दूल्हे की खोज कर रहे हों… अगर नहीं सुना तो आपको बता दें कि हाल में एक अखबार में ऐसा विज्ञापन छपा है जिसे कर्नाटक के पुत्तूर में एक परिवार ने छपवाया है।

एक सप्ताह पहले प्रकाशित विज्ञापन में लिखा था: “कुलाल जाति और बंगेरा (‘गोत्र’) की लड़की के लिए लड़के की तलाश। बच्चे की करीब 30 साल पहले मौत हो गई हो। यदि ऐसी स्थिति आती है कि जहाँ एक ही जाति का कोई लड़का मिले, जो अलग बारी का हो और जिसकी मौत 30 साल पहले हो गई हो गई हो तो परिवार ‘प्रेथा मडुवे’ करने को तैयार है।”

परिवार का कहना है कि उन्हें शुरू में लगा था कि उन्हें इस विज्ञापन के लिए ट्रोल किया जाएगा लेकिन जब इस एड को देख उनके पास 50 परिवार पहुँचे तो उन्होंने कहा कि वह अनुष्ठान को संपन्न करने के लिए दिन तय करेंगे।

दरअसल, इस परिवार ने ‘कुले मदिमे’ या ‘प्रेथा मडुवे’ अनुष्ठान के लिए ऐसा विज्ञापन निकलवाया था। ये अनुष्ठान ‘कुले मदीम’ उडुपी और दक्षिण कन्नड़ के तटीय क्षेत्रों में संपन्न करवाया जाता है। यह सामान्य विवाह की तरह ही होता है लेकिन इसे संपन्न दिवंगत आत्माओं के बीच कराया जाता है।

डेक्कन हेराल्ड में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, ये अनुष्ठान पितृ पूजा या फिर पितृ आराधना का हिस्सा है। तुलुनाडु में माना जाता है कि इस अनुष्ठान से उन दिवंगत आत्माओं को मोक्ष मिलता है जिनकी बिना विवाह किए ही मृत्यु हो गई। कहा जाता है कि इस अनुष्ठान से उन अन्य दुल्हनों की शादी में बाधाएँ नहीं आतीं।

परिवार ने कहा, “विज्ञापन देते वक्त हमें चिंता थी कि हमें ट्रोल किया जाएगा लेकिन हैरानी की बात यह है कि इस विज्ञापन से अनुष्ठान के बारे में जागरुकता आई है। विभिन्न जातियों के लोगों को भी इस प्रथा के बारे में पता चला है और बाकी लोग भी इसके बारे में जानने हमारे पास पहुँचे हैं।” परिवार ने बताया कि वह लोग पिछले पाँच सालों से उपयुक्त रिश्ते की तलाश कर रहे थे।