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काल भैरव से अनुमति ले PM मोदी ने लगातार तीसरी बार वाराणसी से भरा पर्चा: राम मंदिर का मुहूर्त निकालने वाले गणेश शास्त्री भी बने प्रस्तावक, NDA दिग्गजों का जमघट

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी से लगातार तीसरी बार बतौर लोकसभा उम्मीदवार पर्चा भरा है। मंगलवार (14 मई, 2024) को इस मौके पर कई राज्यों के मुख्यमंत्री, केंद्रीय मंत्री और यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे। वाराणसी के जिला निर्वाचन अधिकारी एवं DM एस राजलिंगम के समक्ष पर्चा दाखिल किया। कलेक्ट्रेट परिसर में नॉमिनेशन के बाद वो सीधे कॉन्वेंशन सेंटर ‘रुद्राक्ष’ पहुँचे, जहाँ उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।

पीएम मोदी ने गंगा सप्तमी के दिन नॉमिनेशन दाखिल किया है, साथ ही इस दिन राज पुष्य नक्षत्र का योग भी है। उससे पहले उन्होंने बाबा कालभैरव की पूजा-अर्चना की। दशाश्वमेध घाट पर उन्होंने माँ गंगा की भी पूजा की। वो क्रूज पर सवार होकर नमो घाट पहुँचे थे। गर्मी के बावजूद समाहरणालय के सामने बड़ी संख्या में लोग जुटे। BJP अध्यक्ष JP नड्डा और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी इस दौरान उनके साथ रहे। 1 दिन पहले ही वाराणसी में उन्होंने भव्य रोडशो किया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावकों में गणेश्वर शास्त्री, वैजनाथ पटेल, लालचंद कुशवाहा और संजय सोनकर का नाम तय किया गया था। जहाँ गणेश्वर शास्त्री द्रविड़ ब्राह्मण हैं और अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा का मुहूर्त उन्होंने ही निकाला था और साथ ही समारोह में मुख्य पुजारी भी थे। सेवापुरी हरसोस गाँव के निवासी और जनसंघ के जमाने से कार्यकर्ता वैजनाथ पटेल व लालचंद कुशवाहा OBC समाज से आते हैं, जबकि संजय सोनकर दलित समुदाय से हैं।

पीएम मोदी के वाराणसी का रोडशो ढाई घंटे चला था और इसमें 5 लाख लोगों ने हिस्सा लिया। नॉमिनेशन के दौरान LJP (रामविलास) के चिराग पासवान, TDP के चंद्रबाबू नायडू, जनसेना नेता व सुपरस्टार पवन कल्याण, शिवसेना (BT) नेता व महाराष्ट्र के CM एकनाथ शिंदे और महाराष्ट्र की ही ‘रिपब्लिकन पार्टी’ के नेता रामदास अठावले के अलावा RLD के जयंत चौधरी भी शामिल हुए। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और RLSP के ओमप्रकाश राजभर भी वहाँ मौजूद रहे।

मोईन शेख ने किया महिला का यौन शोषण, शादी का दिया झाँसा, फिर धर्मांतरण करने को कहा, FIR दर्ज: इंदौर का मामला

मध्य प्रदेश के इंदौर में मोईन अली नाम के एक शख्स ने एक महिला का लम्बे समय तक यौन शोषण किया और उसका धर्म परिवर्तन करवाने के लिए दबाव डाला। मोईन ने महिला पर धर्म परिवर्तन ना करने पर उसकी बेटियों को मारने की धमकी दी। इस मामले में FIR दर्ज करवाई गई है।

दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार, इंदौर की एक महिला ने बताया कि वह अपने पति से कुछ समय से अलग रहती है। उसका पति उसे कुछ वर्ष पहले छोड़ गया था। उसके तीन बेटियाँ हैं। वह अपने पति से अलग बेटियों को लेकर रहती है।

महिला ने बताया कि उसके पति का एक दोस्त मोईन शेख उसके घर आता जाता था। पति ने जब उसे छोड़ दिया तो भी मोईन शेख उसके घर आता रहा। उसने महिला ने अपनी नजदीकियाँ बढ़ा ली। इसके बाद उसने महिला का कई बार यौन शोषण किया।

महिला ने आरोप लगाया है कि मोईन शेख ने उससे उसकी बेटियों की पढ़ाई में सहायता और शादी का वादा किया। उसने महिला से कहा कि अगर उसे कोई ऐतराज नहीं है तो वह शादी कर लेगा। वह शादी करने का झांसा महिला को लम्बे समय तक देता रहा।

इसके बाद वह अपनी की गई बात से मुकरने लगा। महिला जब भी उसे शादी करने को कहती तो वह नए बहाने बनाता। इसके बाद उसने महिला के सामने शादी करने के लिए धर्म परिवर्तन की शर्त रख दी। उसने कहा कि महिला जब तक इस्लाम कबूल नहीं करती तब तक वह निकाह नहीं करेगा।

महिला को मोईन शेख ने धमकी दी कि अगर वह धर्म परिवर्तन नहीं करती तो वह उसकी बेटियों को मार देगा। महिला ने यह भी बताया कि उसे छोड़ कर मोईन शेख ने कहीं और शादी भी कर ली और उसे बिना शादी के ही रहने को लेकर कहने लगा। महिला ने इस मामले में इंदौर पुलिस के पास FIR दर्ज करवाई है।

बिना बुर्के-हिजाब के दिखीं क्रिकेटर इरफान पठान की बीवी, इस्लामी कट्टरपंथी करने लगे हल्ला: लिखा- कुछ दिन बाद यह कपड़े भी नहीं पहनेगी

पूर्व भारतीय क्रिकेटर इरफान पठान की एक बिना बुर्का-हिजाब पहने हुए वीडियो सामने आई तो इस्लामी कट्टरपंथी भड़क गए। इरफ़ान पठान की पत्नी को लेकर इस्लामी कट्टरपंथियों ने सोशल मीडिया पर अभद्र कमेन्ट किए और उन्हें इस्लामी दीन की तालीम देने लगे। किसी ने कहा कि इरफान की पत्नी कुछ दिन में बिना कपड़े के दिखेंगी तो किसी ने कहा कि वह आगे अब बिकनी भी पहनने लगेंगी। उन्हें बेशर्म करार दिया गया।

दरअसल, पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान हाल ही में मुंबई के बांद्रा के एक कैफे के बाहर पत्नी सबा बेग और बेटे के साथ नजर आए थे। यहाँ मौजूद कुछ फोटोग्राफर ने उनकी तस्वीरें खींचना और चालू कर दिया। इस वीडियो में इरफान की पत्नी एक जींस- टॉप पहने नजर आईं। हालाँकि, वह कैमरे देखते ही किनारे हो गईं।

जब फोटोग्राफरों ने उनसे कहा कि वह भी इरफान पठान के साथ आकर फोटो खिंचवा लें तो उन्होंने मना कर दिया। इरफान पठान ने भी इस बात को मना किया। इसके बाद इरफान पठान और उनकी पत्नी की यह वीडियो वायरल हो गई। वीडियो वायरल होते ही इस्लामी कट्टरपंथी उन पर हमलावर हो गए।

ट्विटर पर इरफान की पत्नी की फोटो के साथ ज़ारा नाम की एक यूजर ने लिखा, “कुछ दिन बाद ये कपड़े भी नहीं पहनेगी।” इसके आगे इस यूजर ने लिखा कि जो भी मुस्लिम इसे निजी चॉइस बताएगा वो ‘बेशर्म’ और ‘भ$वा’ है।

उर्दू में खान लिखने वाले एक हैंडल ने इरफान पठान को ‘दय्यूस’ और ‘ह₹मी’ बताया। दय्यूस सामान्यत: उस आदमी को कहते हैं जो अपने घर की महिलाओं को नियंत्रण में नहीं रखता।

एक अन्य अकाउंट ने, जिसमें बांग्लादेश और फिलिस्तीन का झंडा लगाया हुआ था, इरफ़ान पठान को लानतें दी और दय्युस कहा।

इरफ़ान पठान

इरफ़ान पठान और उनकी पत्नी की इन्स्टाग्राम पर डाली गई वीडियो के नीचे भी कट्टरपंथियों ने काफी अश्लील टिप्पणियाँ की। जीशान अहमद ने लिखा कि इरफ़ान ई बीवी ‘सेक्सी’ हैं और तो अमान अली ने लिखा कि वह दिन दूर नहीं जब सबा बेग बिकनी में नजर आएँगी।

इरफ़ान पठान

इन्स्टाग्राम पर एक और यूजर ने पूछा कि बुर्का कहाँ गया वहीँ दूसरे ने इसे हलाल से हराम की तरफ जाना बताया।

इरफ़ान पठान

इरफान पठान की पत्नी और उनको लेकर और भी कई भद्दे कमेन्ट किए गए। ऐसा नहीं है कि यह पहली बार हुआ है। इससे पहले जब फरवरी, 2024 में वह बिना बुर्के के दिखीं थी तब भी उन पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने हमला बोला था।

इरफ़ान पठान की पत्नी सबा बेग है पूर्व में एक मॉडल थीं और उनकी परवरिश सऊदी अरब में हुई है। उनकी शादी 4 फरवरी, 2016 को सबा बेग से हुई थी। सबा ने इरफ़ान के साथ शादी के बाद अपना मॉडलिंग करियर छोड़ दिया था।

रिपोर्ट्स के अनुसार, उनकी इरफ़ान के साथ मुलाक़ात 2014 में हुई थी। इसके बाद दोनों में नजदीकियाँ बढ़ना चालू हो गईं। 2016 में दोनों ने विवाह कर लिया। जब सबा की शादी इरफ़ान से हुई थी तब वह आत्र 21 साल की थीं। उनकी और इरफ़ान की उम्र में 10 वर्ष का अंतर है। उन दोनों के दिसम्बर 2016 में एक बेटा इमरान खान भी हुआ था।

इरफ़ान पठान कुछ समय पहले तक अपनी पत्नी की फोटो नहीं डालते थे जिनमें उनका चेहरा दिखता हो। इससे पहली डाली गई फोटो में उनकी पत्नी का चेहरा बुर्का या फिर हाथों से ढका हुआ होता था। मुस्लिम कट्टरपंथियों के अनुसार, इस्लाम में महिलाओं को सार्वजनिक स्थान पर चेहरा ढकने की हिदायत दी गई है। इससे पहले मोहम्मद शामी की बेटी के सरस्वती पूजा करने और अभिनेत्री सारा अली खान के मंदिर जाने को लेकर भी इस्लामी कट्टरपंथी बवाल मचाते आए हैं।

‘जेल गए अरविंद केजरीवाल तो USA में बैठी थीं स्वाति मालीवाल, इसीलिए CM आवास में हुई पिटाई’: मीडिया रिपोर्ट में दावा – इस्तीफा देने को कहा गया, थाने में रोने लगीं

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास में उनकी ही पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल की पिटाई हुई। अरविंद केजरीवाल कुछ ही दिनों पहले तिहाड़ जेल से निकले हैं और चुनाव खत्म होने पर उन्हें फिर से आत्मसमर्पण करना है, ऐसे में उनके लिए मुश्किलें और बढ़ती ही जा रही हैं। सोमवार (13 मई, 2024) को सिविल लाइंस पुलिस थाने में आई PCR कॉल में स्वाति मालीवाल की तरफ से कहा था कि उनके साथ मारपीट हो रही है। इसके बाद वो थाने भी पहुँची थीं।

हालाँकि, स्वाति मालीवाल बिना कोई लिखित शिकायत दर्ज कराए वहाँ से निकल गई थीं। इस प्रकरण में उन्होंने फोन कॉल पर विभव कुमार का नाम लिया था, जो अरविंद केजरीवाल के निजी सचिव हैं और एक विवादित अधिकारी रहे हैं। मीडिया ने सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि स्वाति मालीवाल द्वारा अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद उनके पक्ष में खुल कर आवाज़ न उठाने और जेल में उनसे एक बार भी मिलने नहीं जाने के कारण उनसे नाराज़गी है।

बता दें कि 3 बार दिल्ली महिला आयोग (DCW) की अध्यक्ष रह चुकीं स्वाति मालीवाल हाल ही में कई दिनों तक अमेरिका में रह कर आई हैं और अरविंद केजरीवाल के जेल जाने के बाद जब उनकी पार्टी सड़क पर थी तब वो परिदृश्य से गायब थीं। दिल्ली के उप-मुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और मंत्री रहे सत्येंद्र जैन इस मामले में पहले से ही जेल में हैं। वहीं राज्यसभा सांसद संजय सिंह जमानत पर बाहर हैं। बताया जा रहा है कि स्वाति मालीवाल के AAP से संबंध अब ठीक नहीं हैं।

‘Daily Pioneer’ में प्रकाशित सौम्या शुक्ला की रिपोर्ट के अनुसार, स्वाति मालीवाल को पार्टी द्वारा राज्यसभा सांसदी से इस्तीफा देने को कहा गया है। स्वाति मालीवाल थाने आई थीं, लेकिन उन्हें फिर एक फोन कॉल आया और वो बाद में आने की बात कह कर चली गईं। उन्होंने फोन पर कहा था कि वो अभी ठीक स्थिति में नहीं हैं, इसीलिए बाद में रिपोर्ट दर्ज कराएँगी। थाने में उन्हें कहा गया था कि FIR दर्ज कराने के लिए मेडिकल परीक्षण ज़रूरी है।

इसके बाद दिल्ली पुलिस की तरफ से उनसे संपर्क करने की कोशिशें सफल नहीं हो पा रही हैं। पुलिस स्टेशन में वो रोने भी लगी थीं। दिल्ली CMO या AAP की तरफ से अब तक इस मामले पर चुप्पी साधी हुई है। राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) स्पष्ट कर चुका है कि वो इस मामले की जाँच के लिए एक टीम भेजेगी, साथ ही दिल्ली पुलिस से कार्रवाई के संबंध में रिपोर्ट तलब करेगी। अब इस मामले में ये समझते हैं कि पुलिस आगे क्या कर सकती है।

अगर स्वाति मालीवाल लिखित शिकायत दायर नहीं करती हैं तो फिर दिल्ली पुलिस PCR कॉल के आधार पर FIR दर्ज कर सकती है। विभव कुमार और अरविंद केजरीवाल, दोनों 2007 में स्थापित ‘इंडिया अगेंस्ट करप्शन’ (IAC) वाले दिनों से ही अरविंद केजरीवाल के साथ हैं और 2011 में अन्ना हजारे के आंदोलन में भी सक्रिय थे। दिल्ली पुलिस के पास एक विकल्प है कि वो स्वाति मालीवाल को मजिस्ट्रेट के सामने बयान देने के लिए कहे।

PCR कॉल रिकॉर्ड के मुताबिक, स्वाति मालीवाल ने कहा, “मैं अभी CM के घर पर हूँ। उन्होंने अपने PA विभव कुमार से बुरी तरह पिटवाया है।” इसके बाद सिविल लाइंस के SHO 6, फ्लैग स्टाफ रोड स्थित अरविंद केजरीवाल के घर पहुँचे। स्वाति मालीवाल ऑटो से थाने से वापस गई थीं। स्वाति मालीवाल को हाल ही में AAP के स्टार प्रचारकों की सूची से भी हटा दिया गया है। भाजपा नेताओं ने भी एक महिला के साथ मारपीट के खिलाफ आवाज़ उठाई है।

‘मतदान के बीच 99% दुकानें बंद’: श्रीनगर रिपोर्टिंग करने गई आरफा खानम शेरवानी, पत्रकारिता के नाम पर फैलाने लगी प्रोपेगेंडा; जानिए सच

प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर की एंकर आरफा खानम शेरवानी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर फिर से एक बार फेक न्यूज फैलाई है। आरफा ने जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में वोटिंग के दिन दुकानें बंद रहने को लेकर झूठ फैलाया है। आरफा ने कश्मीर के बदलते हालातों को लेकर भी झूठ फैलाने की कोशिश की है।

आरफा खानम शेरवानी ने सोमवार (13 मई, 2024) को एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “श्रीनगर से रिपोर्ट कर रही हूँ, यह अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहला चुनाव है।
शहर में मतदान हो रहा है लेकिन 99% दुकानें बिना किसी औपचारिक आदेश के बंद हैं। 2019 के पिछले चुनाव की तुलना में वोटिंग प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। लोग बड़े पैमाने पर अपनी अस्वीकृति जताने करने के लिए बाहर आ रहे हैं।”

आरफा ने अपने इस पोस्ट में दावा किया कि श्रीनगर में लोकसभा चुनावों की वोटिंग के दौरान दुकानों को बिना आदेश के बंद कर दिया गया है। इसके लिए कोई छुट्टी का आदेश नहीं निकाला गया। हालाँकि उनका यह दावा तथ्यों से परे था।

श्रीनगर में सोमवार को दुकानें इस लिए बंद थीं क्योंकि इस दिन सरकार ने छुट्टी घोषित की थी। 1 अप्रैल, 2024 को जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा जारी किए गए एक आदेश में यह स्पष्ट रूप से लिखा हुआ था कि जिस भी दिन जम्मू कश्मीर राज्य में लोकसभा चुनावों के लिए मतदान होगा, उस दिन उस लोकसभा क्षेत्र में छुट्टी रहेगी।

श्रीनगर फेक न्यूज
श्रीनगर में छुट्टी को लेकर जारी किया गया आदेश (चित्र साभार: JKCDC/X)

इसी आदेश के तहत, उधमपुर लोकसभा में 19 अप्रैल, जम्मू में 26 अप्रैल, अनंतनाग-राजौरी में 7 मई और श्रीनगर में सोमवार (13 मई, 2024) को छुट्टी घोषित की गई थी। इससे आगे 20 मई को बारामूला में भी छुट्टी घोषित की गई है।

जम्मू कश्मीर में वोटिंग के दिन छुट्टी को लेकर खबर
जम्मू कश्मीर में वोटिंग के दिन छुट्टी को लेकर खबर

जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा है, “बताए गए मतदान के दिनों को किसी भी व्यवसाय, फैक्ट्री या किसी अन्य प्रतिष्ठान में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति के लिए सवैतनिक छुट्टी रहेंगी और वह मतदान करने का हकदार है।” यानी इस आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इस दिन सभी कामकाजी लोगों के लिए छुट्टी रहेगी।

ऐसे में मतदान के श्रीनगर में दुकानों का बंद होना असामान्य बात नहीं थी और ना ही यह बिना किसी आदेश के किया गया था। मात्र श्रीनगर ही नहीं चुनावों के समय प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में अवकाश घोषित किया जाता है और इस दिन दुकानों सहित सभी निजी और सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं।

ऐसे में फैक्ट चेक में आरफा खान शेरवानी का दावा झूठा साबित हुआ है। उन्होंने श्रीनगर में दुकानों के ना खुलने को लेकर झूठ फैलाया है। श्रीनगर में 28 वर्षों के बाद सबसे अधिक मतदान इस लोकसभा चुनाव में देखा गया है। श्रीनगर लोकसभा के लिए सोमवार को 38% मतदान हुआ है जो कि 1996 के बाद के किसी भी लोकसभा चुनाव से अधिक है।

‘नमाज कायम करो’ वाली किताब, पूर्व कॉन्ग्रेस सांसद के नाम की बेंच, इत्र की शीशियाँ… उस बाँध का हाल जहाँ कब्ज़ा कर के बना दिया दरगाह, पशु-पक्षियों को भी नुकसान

हाल ही में, ऑपइंडिया ने रणजीत सागर बाँध में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए दरगाह और दरगाह के माध्यम से हजारों वर्ग फुट जगह पर किए गए कब्जे के बारे में एक रिपोर्ट दी थी। 2022 में, एक सरकारी सर्वेक्षण द्वारा इसे अवैध घोषित कर दिया गया था, इसे हटाने का आदेश देने के बाद भी आज तक कब्जा जारी रहा। 13 मई, 2024 को अवैध कब्जा हटाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ता युवराज सोलंकी की मदद से ऑपइंडिया रणजीत सागर बाँध पहुँचा।

रणजीत सागर बाँध में किए गए कब्जे के वर्तमान समय की परिस्थितियों का जायजा ऑपइंडिया द्वारा लिया गया। ऑपइंडिया ने ग्राउंड जीरो से जो जानकारी जुटाई वह वाकई चौंकाने वाली थी। यह कब्जा हजारों वर्ग फुट सरकारी जमीन पर दरगाह बनवाकर, कब्जेको घेरने के लिए की गई बाड़ लगाकर, अतिरिक्त निर्माण के लिए संसाधन, राजनेताओं के अनुदान से आवंटित बेंच, जहां देखे वहा, इत्र की बोतलें और मजहबी साहित्य … दृश्य वास्तव में चौंकाने वाले थे।

बाहर मुख्य सड़क पर हमें सफेद रंग का एक बोर्ड मिला जिस पर हरे अक्षरों में 786-92 और, ‘हजरत पंजू पीर दरगाह शरीफ’ लिखा था। बोर्ड के ऊपरी दो कोनों में चाँद-तारे के निशान के निशान बने हुए थे। बोर्ड के ऊपर दो चौकोर झंडे, एक हरा और एक लाल, जिस पर इस्लामी चिह्न मुद्रित थे। सीमेंट के पक्के फाउंडेशन में यह बोर्ड मज़बूती से लगाया गया था।

मुख्य सड़क पर उस दरगाह का बोर्ड लगा हुआ है

बांध की भूमि के एक बड़े टुकड़े को तारों से घेर कर कब्जाया गया

जब ऑपइंडिया युवराज सोलंकी की मदद से रणजीत सागर बाँध पहुँचा। जैसे ही हम बाँध में पहुंचे, हमें कँटीले तारों के साथ बाड़ लगा कर सुरक्षित की गई जगह देखने को मिली। दरगाह के चारों ओर काँटेदार तार की बाड़ लगाई गई है ताकि कब्जे वाले स्थान को घेरकर सुरक्षित किया जा सके। रणजीत सागर बांध की हजारों वर्ग फीट जगह को इस बाड़ से घेर लिया गया है। आमतौर पर, इस प्रकार की बाड़ लोगों द्वारा अपनी भूमि/स्थान की रक्षा के लिए बनवाई जाती है। रणजीत सागर बांध की सरकारी जमीन को इसी तरह कँटीले तार लगाकर घेरा गया है।

लम्बी-लम्बी मजारें और बहुत बड़ा अतिक्रमण

युवराज सोलंकी के माध्यम से आगे बढ़ते हुए, हमने पाया कि 2022 में किए गए सर्वेक्षण के बाद दिए गए आदेशों के बाद भी अतिक्रमण जारी रहा है। निर्माण वैसा ही है जैसा पहले था। सबसे आगे सीमेंट का एक पक्का चबूतरा बनाया गया है, जिस पर 31 फीट तक लंबी 3 मजार हैं। इस चबूतरें के किनारे पर कॉलम बीम लगाया गया है और ऊपर से पाइप लगाए गए हैं। इस ढाँचे पर छत बनाई गई है। इसके बगल में ईंटों और सीमेंट का एक छोटा आकर बनाया गया है, जिसमें मिट्टी के दीये रखे गए हैं। यहाँ हमें हरे रंग के कागज वाली चॉकलेट का एक पैकेट भी मिला, शायद कोई व्यक्ति कुछ समय पहले इस जगह पर आकर गया था।

मजार के ऊपर चादरपोशी के लिए बनी जगह

इस जगह से थोड़ी ही दुरी पर ऐसी ही एक और संरचना बनाई है। वहाँ पक्के चबूतरें पर 31 फीट लंबी दो मजार देखी जा सकती हैं। यहाँ भी खंभे लगाए गए हैं। यहाँ बस उपर छत लगाना ही बाकी है। इस संरचना के बगल में एक और 6 फुट की मजार भी दिखाई देती है। गौरतलब है कि इस्लाम में बनी मजार (एक प्रकार की कब्र) पाँच से छह फीट तक लंबी होती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यहाँ बनी 5 मजार तकरीबन 31 फीट तक लंबी हैं। खास बात यह है कि इन सभी मजारों पर एक ही लंबाई की चादरें लगाई गई हैं।

मजारें पक्की चिनाई और शेड के लिए ऊँचे खंभों पर बनाई गईं

आमतौर पर पाँच-छह फीट लंबी मजारों पर उतनी ही लंबाई की चादर लगाई जाती है, लेकिन यहाँ चढ़ी हुई वाली चादरें खास लगती हैं। मजार पर पेश की गई चादरों की बात करें तो वे सभी चादरें नई और साफ हैं। क्योंकि अगर बांध के पानी के उतरने के बाद भी वही चादरें होतीं, तो वह गंदगी और कीचड़ से सनी होती। इसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हाल ही में किसी ने यहाँ आकर सफाई की है और नई चादर चढ़ाई है।

जगह-जगह इत्र की शीशियाँ, मजहबी साहित्य और कूड़ा

ऑपइंडिया ने जब आसपास की जगह की जाँच की तो हमें यहाँ अनगिनत इत्र की खाली और भरी हुई शीशियाँ मिलीं। कुछ शीशियाँ गर्मी से सूख चुकी जमीन पर पड़ी थीं और कुछ बाँध के पानी में पड़ी थीं। कुछ खाली और कुछ भरी इत्र की बोतलें ज्यादातर काँच की थीं और कुछ प्लास्टिक की। हमें इन शीशियों को पैक करने वाले रैपर भी पड़े मिले। पूरे इलाके में पानी की नमी और इत्र की तेज गंध भी आ रही थी।

इत्र की बोतलें ही नहीं, हमें यहाँ कुछ इस्लामिक साहित्य भी देखने को मिले। हमें अरबी, कुछ हिंदी और गुजराती में लिखे कागज़ मिले। इन्हीं में से एक साहित्य पर लिखा था, “कायम नमाज़ करो, नमाज़ मोमिन की मेअराज़ है”। एक अन्य कागज़ पर एक और हजरत शालू पीर दरगाह शरीफ लिखा हुआ था। शेख उस्मानशाह जफरशाह मुल्तानी के नाम वाले कागज पर जामनगर में कलावाड रोड का पता लिखा हुआ था।

बाँध के अंदर सूखी ज़मीन और पानी में बहुत सारी इत्र की बोतलें मिलीं

इतना ही नहीं इसके अलावा ऑपइंडिया को इस जगह पर कई बड़ी चादरों से बँधा सामान भी मिला। यह जानना असंभव था कि इसके अंदर क्या बँधा हुआ था। लेकिन हो सकता है कि यहाँ दी जाने वाली चादरें और पुरानी चढ़ाई सब इसी में रखी हों। इसके साथ ही हमने यहाँ सीमेंट के छोटे-बड़े चबूतरे भी देखे। इस जगह पर हर जगह प्लास्टिक का कचरा भी देखने को मिला।

दरगाह के आसपास इस्लामी साहित्य पड़ा हुआ मिला

कॉन्ग्रेसी नेता के नाम वाले बेंच और दरगाह बनाने का सामान

हमें अतिक्रमण की गई भूमि के एक कोने में कुछ मलबा भी मिला। जब हमने वहाँ जाकर जाँच की तो पता चला कि ये वही खंभे हैं जिनका इस्तेमाल दरगाह का शेड बनाने के लिए किया गया था। इस दौरान युवराज ने हमें बताया कि सामान बगल वाली अधूरी दरगाह का है। इसे दरगाह की छत और अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने के उद्देश्य से यहां लाया गया है।

इसी मलबे के बीच हमने कुछ बैठने की बेंच देखी। आमतौर पर इस प्रकार के बेंचों को सांसदों से लेकर नगरसेवकों तक अपना बजट आवंटित कर सोसायटी, उद्यानों और सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के बैठने के लिए लगाए जाते है। इन बेंच पर लिखे अक्षर कुछ समय तक पानी के अंदर रहने के कारणों से कीचड़ के नीचे दब गए थे। कुछ सफाई करते ही, हमने इन बेंचो पर लिखा पाया “माननीय सांसद श्री विक्रमभाई माडम, जामनगर – वर्ष 2011-12 के अनुदान से, स्वच्छता बनाए रखें”।

दरगाह का काम पूरा करने के लिए सामान

गौरतलब है कि विक्रम माडम कॉन्ग्रेस के जानेमाने नेता हैं। विक्रम माडम भानवड़ और खंभालिया से विधायक रह चुके हैं। वह 2004 और 2009 में कांग्रेस के सांसद भी रह चुके हैं। 2014 में विक्रम मडाम बीजेपी नेता पूनम माडम से हार गए थे।

बेंचों का नाम कॉन्ग्रेस नेता विक्रम माडम के नाम पर रखा गया है

सिर्फ जामनगर के लोगों के लिए ही नहीं, वाइल्ड लाइफ के लिये भी ये बाँध महत्वपूर्ण

गौरतलब है कि जामनगर की भौगोलिक स्थिति वन्यजीवों की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। समुद्री तट से सटे इस जिले में हर साल कई तरह के विदेशी पक्षी लम्बी यात्रा कर के आते है। खिजड़िया पक्षी अभयारण्य रणजीत सागर बांध से मुश्किल से 20/22 किमी दूर होगा। तब स्वाभाविक है की आने वाले देशी-विदेशी पक्षी यह जलाशय में भी आएँगे। इस अवैध दरगाह से बांध का पानी कम होकर महज 100 मीटर दूर चला गया है।

जब ऑपइंडिया यहाँ निरीक्षण कर रहा था, हमारी नज़र फ्लेमिंगो पक्षियों के झुंड पर पड़ी जो बाँध में उतरे थे। आमतौर पर सर्दियों के मौसम में यहाँ आने वाले इन पक्षियों की मौजूदगी हमें उतनी ही हैरान करने वाली थी जितनी आप इसे पढ़ कर महसूस कर रहे हैं। और हमने दूर से ही इन खूबसूरत पक्षियों को मोबाइल फोन के कैमरे में कैद करने का प्रयत्न किया।

बाँधमें उतरता राजहंस पक्षी

इस दौरान युवराज ने हमें बताया कि यह जगह सिर्फ पक्षियों के लिए ही नहीं बल्कि मछलियों और मगरमच्छों के लिए भी महत्वपूर्ण है। बकौल युवराज, मेटिंग सीजन के दौरान मगरमच्छ यहाँ मेटिंग प्रक्रिया के लिए आते हैं। यह सब सुनकर हम सोच में पड़ गए कि जिस तरह से हमें यहाँ बाँध के पानी में इत्र की बोतलें, प्लास्टिक कचरा और अन्य हानिकारक चीजें मिलती हैं, उससे यहाँ के वन्यजीवों को किस हद तक नुकसान हो सकता है?

हर साल पानी में डूब जाने वाली इस जगह को फिर से बनाने का खर्च कौन देता होता होगा?

हर चीज की गहन जाँच के बाद, यहाँ एक बात विचार करने योग्य लगी। यह जगह साल के लगभग 6 महीने पानी में डूबी रहती है। बाँध पहले बारिश से और फिर नर्मदा के नीर से भरा रहता है। बाँध में पानी भरा होने पर यहाँ आना मुश्किल है। लेकिन जब पानी कम हो जाता है, तो जगह मलवे और कीचड़ से ढँक जाती है। यहाँ देखभाल करने आते रहते कासमभाई ने ऑपइंडिया को बताया था कि वो यहां सिर्फ धूप करने मौर माथा टेकने आते हैं, उनकी इस जगह पर खर्च करने की क्षमता नहीं है।

अगर कोई और यहाँ नहीं आता है तो हर साल इस जगह की देखभाल कौन करता है? इसके निर्माण और रखरखाव की लागत कौन प्रदान करता है? यहाँ जिस तरह का सामान पड़ा है, उसे लाने के लिए पैसे किसने निकाले होंगे? प्रशासन को इस दिशा में भी जाँच करानी चाहिए कि सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी इस दरगाह की फंडिंग आखिर कहाँ से हुई।

बटन दबाया साइकिल वाला, पर्ची निकली कमल की… लखीमपुर-खीरी से हसन रज़ा और कमरजहाँ के वीडियो: जिसे सपा एन्ड गिरोह बता रहा बेईमानी, जानिए उसका सच

लोकसभा चुनाव 2024 में चौथे चरण के लिए सोमवार (13 मई, 2024) को 96 सीटों पर मतदान सम्पन्न हुआ। इस दौरान उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में खासतौर पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने EVM में गड़बड़ी की शिकायत की है। इसमें से अधिकतर की शिकायत यह है कि उन्होंने वोट साइकिल यानी समाजवादी पार्टी को दिया लेकिन पर्ची कमल के निशान यानी भाजपा की निकली। इन शिकायतों के वीडियो कुछ पत्रकारों के अलावा सपा के आधिकारिक ‘X’ हैंडल ने भी चुनाव आयोग को टैग कर के शेयर की हैं।

13 मई को समाजवादी पार्टी ने अपने मीडिया सेल के आधिकारिक हैंडल से 30 सेकेंड का एक वीडियो शेयर किया है। सपा ने यह वह वीडियो लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र के गोला का बताया है। इस वीडियो में हसन रज़ा बरकाती ने कहा, “प्रशांत कुमार यहाँ जो पीठासीन अधिकारी हैं, जो मोहम्मडन (मुस्लिम) वोट डालने आते हैं तो मशीन नहीं दाबते। कह देते हैं जाओ, वोट पड़ गया। जब हम डालने गए, हमने साइकिल का बटन दबाया पर कमल का निशान निकल रहा है।” हसन ने इसे धाँधली और कई लोगों की समस्या बताया।

चुनाव आयोग को टैग करते हुए सपा ने लिखा, “वोट डाल रहे साइकिल में और VVPAT से पर्ची निकल रही कमल की। देश में चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए जबकि भाजपा सत्ता के इशारे पर बेईमानी की जा रही।” लखीमपुर खीरी की कमरजहाँ ने भी कमोबेश इसी प्रकार से शिकायत की है। उनके वीडियो को सचिन गुप्ता नाम के पत्रकार ने अपने ‘X’ हैंडल पर शेयर किया है।

‘रेडियो मिर्ची’ की RJ सायमा ने भी इस दावे को आगे बढ़ाया।

कमरजहाँ ने कहा, “मुझे घर में बताया गया था कि साइकिल पर वोट देना तो साइकिल ही छप कर आएगी। उस पर फूल छप कर आया।” कमरजहाँ का दावा है कि जब उन्होंने पीठासीन अधिकारी से इसकी शिकायत की तो उनको बाहर चले जाने के लिए कहा गया। कमरजहाँ की इच्छा है कि उनकी पर्ची पर साइकिल छप कर आए। इन तमाम आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने इसके क्रमवार जवाब दिए।

खुद कमरजहाँ ने मानी अपनी गलती

इन आरोपों को लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी (DM) ने आधारहीन बताया है। उन्होंने कमरजहाँ का एक और वीडियो शेयर किया है। वीडियो में कमरजहाँ ने कबूल किया है कि गलती से उन्होंने कमल का बटन दबा दिया था। कमरजहाँ ने अब खुद को संतुष्ट बताया है।

जिसे डाला वोट उसी की निकली पर्ची

लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन ने हसन रजा बरकाती के आरोपों का भी खंडन किया है। जिलाधिकारी लखीमपुर के आधिकारिक हैंडल से एक अन्य वीडियो शेयर किया गया है। इस वीडियो में प्रशासनिक अधिकारी कुछ मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों से सवाल करते हैं कि क्या उन्होंने जिसे वोट दिया उसके अलावा किसी और की पर्ची निकली? इसके जवाब में सभी ने स्वीकार किया कि उन्होंने जिसे वोट दिया उसकी ही पर्ची निकली। बाद में अधिकारी ने हसन रजा बरकाती व उनके जैसे कुछ अन्य लोगों के आरोपों को निराधार बताते हुए इसे सनसनी फैलाने की साजिश करार दिया।

प्रशासनिक अधिकारियों के बयानों के आधार पर ऑपइंडिया की पड़ताल में यह बात निकल कर सामने आई कि वायरल वीडियो में EVM में गड़बड़ी के आरोप निराधार हैं।

जिस इंस्टाग्राम हैंडल से शेयर हो रही थी हिन्दू देवी-देवताओं की आपत्तिजनक तस्वीरें, उसके पीछे अब्दुल: मुंबई में FIR दर्ज

सोशल मीडिया पर हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मुंबई पुलिस को शिकायत दी गई है। आरोपित का नाम अब्दुल रशीद अब्दुल लतीफ़ बताया जा रहा है। अब्दुल ने इंस्टाग्राम पर ‘लॉस्ट बैक’ नाम से हैंडल बना रखा है जिस से वो लगातार हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत कर रहा है। गुरुवार (9 मई, 2024) को पुलिस ने अब्दुल के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। फ़िलहाल आरोपित की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला मुंबई के नवघर पुलिस स्टेशन का है। गुरुवार को यहाँ 24 साल के एक युवक ने शिकायत दी है। अपनी शिकायत में युवक ने बताया कि वो एक वीडियो एडिटर के तौर पर काम करता है। इस काम के दौरान उसे सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर नजर रखनी पड़ती है। 8 मई को शिकायतकर्ता जब इंस्टाग्राम स्क्रॉल कर रहा था तब उसे कई ऐसी रील्स मिलीं जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान किया गया था। जिस हैंडल से लगातार देवी-देवताओं के एडिटेड चित्र शेयर किए जा रहे थे वो ‘लॉस्ट बैक’ नाम से था।

अब्दुल पर दर्ज FIR

शिकायतकर्ता ने बताया कि प्रोफ़ाइल चेक करने पर उसे ऑपरेट करने वाला अब्दुल रशीद अब्दुल लतीफ निकला। शिकायत में अब्दुल पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। पुलिस ने इस शिकायत पर अब्दुल रशीद अब्दुल लतीफ़ को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। उस पर IPC की धारा 295 A, 153 A और IT एक्ट (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66सी और 67) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। अब्दुल अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

अब्दुल द्वारा शेयर आपत्तिजनक तस्वीरें

शिकायतकर्ता ने सबूत के तौर पर अब्दुल द्वारा शेयर किए गए कुछ रील्स के स्क्रीनशॉट पुलिस को दिए हैं। ऑपइंडिया के पास भी वो तस्वीरें मौजूद हैं जिन्हे बेहद आपत्तिजनक ढंग से एडिट किया गया है।

हिन्दू नेताओं की हत्या के लिए PFI ने बनाया ‘मौत का दस्ता’, मस्जिद-मदरसों में ट्रेनिंग: RSS नेता रुद्रेश-BJYM के प्रवीण नेट्टारू की हत्या ‘मिशन 2047’ का हिस्सा

NIA ने RSS नेता रुद्रेश की हत्या के मामले में 2 मार्च, 2024 को एक बड़ी सफलता मिली। ये हत्याकांड 2016 में हुआ था। PFI के प्रतिबंधित आतंकी मोहम्मद गौस नियाज़ी को दक्षिण अफ्रीका से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसका प्रत्यर्पण किया गया। उसने बेंगलुरु में इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। उस पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। 35 वर्षीय रुद्रेश का हत्यारा मोहम्मद गौस नियाज़ी PFI का बड़ा चेहरा था। हत्या के बाद वो भारत से बाहर अपने ठिकाने बदल रहा था।

गुजरात ATS को उसके दक्षिण अफ्रीका में होने का पता चला, जिसके बाद NIA को सूचित किया गया। दक्षिण अफ़्रीकी पुलिस ने सहयोग किया और उसे धर-दबोचने में कामयाबी मिली। रुद्रेश को बेंगलुरु के शिवाजी नगर में मार डाला गया था। वो RSS के एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। आतंकी घात लगा कर छिपे हुए थे। अब 2016 के इस हत्याकांड और 2022 के प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड में कनेक्शन मिला है। 26 जुलाई, 2022 को BJYM नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या हुई थी।

दक्षिण कन्नड़ के बेल्लारी में आतंकियों ने उन पर धारदार हथियार से हमला किया था। वो पॉल्ट्री का कारोबार करते थे। जनवरी 2023 में NIA ने खुलासा किया कि PFI ने ‘सर्विस टीम’ और ‘किलर स्क्वाड’ बना रखा है, ताकि वो अपने ‘दुश्मनों’ की हत्या कर सके और भारत को 2047 तक इस्लामी मुल्क बनाने का उसका सपना पूरा हो। आतंक, सांप्रदायिक घृणा और समाज में अराजकता के जरिए ये अपनी मंशा पूरी करना चाहते थे। इन टीमों को हथियार दिया गया था, प्रशिक्षण भी।

इन्हें सिखाया गया था कि कैसे हिन्दू नेताओं की रेकी करें, फिर उन्हें निशाना बनाएँ। रुद्रेश की हत्या के बाद ये टीमें बनाई गई थीं, PFI के जिलाध्यक्ष असीम शरीफ की गिरफ़्तारी भी हुई थी। PFI ने मुस्लिमों की भर्ती की, मस्जिदों-मदरसों में उन्हें हथियार देकर प्रशिक्षित किया गया। रुद्रेश की हत्या सफल होने के बाद ये साजिश उनके दिमाग में आई थी। 2019 में असीम शरीफ की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी, वो चाहता था कि रुद्रेश की हत्या में उसके ऊपर आरोप न तय किए जाएँ।

उसने दावा किया था कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार्जेज फ्रेम करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि वही इस हत्याकांड के पीछे का मास्टरमाइंड था और उसके निर्देश पर ही हत्या हुई थी। अक्टूबर 2016 में बेंगलुरु पुलिस ने रुद्रेश हत्याकांड में प्रत्यक्ष रूप से शामिल आतंकियों JC नगर के मोहम्मद मज़हर (35) और ऑस्टिन टाउन के वसीम अहमद (30) को गिरफ्तार किया था।

इन्होंने ही बाइक से आकर नाला जंक्शन के पास रुद्रेश की हत्या की थी। उनके साथ एक अन्य बाइक पर मुजीब और इरफ़ान थे, इनके साथ वो दोनों भी धराए। इन सबको असीम शरीफ निर्देश दे रहा था। ज्ञात हो कि PFI 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क में परिवर्तित करना चाहता था। उसका मानना था कि अंग्रेजों ने अन्यायपूर्ण तरीके से मुस्लिमों से सत्ता झपट ली। PFI के दस्तावेज का कहना था कि मुस्लिम हमेशा से अल्पसंख्यक रहे हैं और उन्हें जीत के लिए बहुसंख्यक होने की आवश्यकता नहीं है।

इस्लाम के इतिहास की बात करते हुए प्रतिबंधित संगठन का मानना था कि अगर 10% मुस्लिम भी उसका साथ दे दें तो वो ‘कायर’ बहुसंख्यकों का दमन कर के उन्हें घुटनों पर ले आएगा और इस्लाम का पुराना परचम फिर लहराएगा। उसने लिखा था कि मुस्लिमों को याद रखना चाहिए कि अल्लाह की बनाई कायनात में उन्हें दीन का काम करने के लिए भेजा गया है, उनका लक्ष्य होना चाहिए अल्लाह के कानून की स्थापना। इसी में हिन्दू नेताओं के बारे में डिटेल जुटाने के लिए कहा गया था।

‘अंतिम शो’ की बात करते हुए RSS/हिन्दू नेताओं की सूची और उनके विवरण जुटाने के लिए कहा गया था। साथ ही उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने का निर्देश भी दिया गया था। PFI का कहना था कि हिन्दुओं का नरसंहार करने के लिए यही सही समय है। प्रतिबंधित संगठन के दस्तावेज में लिखा था कि जब उसके पास पर्याप्त मात्रा में लड़ाका और हथियार होंगे, तब भारतीय संविधान की जगह शरिया लागू कराया जाएगा। इसके रास्ते में आने वालों के नरसंहार की बात की गई थी।

इसके लिए तुर्की जैसे इस्लामी मुल्कों से मदद तक माँगी गई थी। साफ़ है, ये डेथ स्क्वाड्स हिन्दुओं की हत्या के लिए बनाए गए थे। प्रवीण नेट्टारू या रुद्रेश की PFI से कोई दुश्मनी भी नहीं थी, ऐसे में ये टार्गेटेड किलिंग था इससे इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों हत्याओं में कनेक्शन का अर्थ है PFI की साजिश गहरी थी हिन्दुओं को निशाना बनाने की। ये सब PFI के ‘विजन 2047’ विजन डॉक्यूमेंट के हिसाब से किया गया। सिर्फ ये दोनों ही नहीं, कई हिन्दू नेता इनके निशाने पर थे।

मुस्लिम महिला को ऑटो में बिठाने पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने बुजुर्ग हिन्दू ड्राइवर को पीटा, बुर्के वाली से बोले- नाम खराब कर रखा है: कर्नाटक में बिलाल, तौसीफ, इब्राहिम गिरफ्तार

कर्नाटक के बीदर जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर रविवार (12 मई 2024) से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बुर्का पहने मुस्लिम महिला सवारी को बिठाने पर एक हिन्दू ड्राइवर की पिटाई की जा रही है। हमलावर मुस्लिम समुदाय के लोग बताए जा रहे हैं जिन्होंने बुर्काधारी महिला पर भी हाथ उठाया और उसे अपशब्द कहे।

यह घटना 17 अप्रैल 2024 की बताई जा रही है जिस पर पुलिस ने FIR दर्ज करके 3 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार हुए इन हमलावरों की पहचान सैयद बिलाल, तौसीफ अयूब और सैयद इब्राहिम के तौर पर हुई है। कादिर कुरैशी और मकदूम नाम के 2 अन्य आरोपित फरार हैं। पुलिस इनकी तलाश में जुटी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बीदर जिले के बसवकल्याण इलाके की है। 17 अप्रैल को 72 वर्षीय ऑटो ड्राइवर अशोक पांडुरंगा रेड्डी बसवकल्याण से कौडियाला सवारी ले जा रहे थे, तभी उनकी ऑटो में बुर्का पहने एक महिला बैठती है जिसका नाम हजरतबी हनुमिया बताया जा रहा है।

थोड़े आगे चलने के बाद लगभग 5 लोगों ने इस ऑटो को थिमक्का गार्डन के पास दोपहर लगभग 1 बजे रोक लिया। इन लोगों के नाम सैयद बिलाल, तौसीफ अयूब चावुस, सैयद इब्राहिम, कादिर कुरेशी और मगदूम बताए जा रहे हैं।

इन सभी ने ऑटो रोक कर ड्राइवर अशोक रेड्डी की बुरी तरह से थप्पड़ों और घूंसों से पिटाई कर दी। पिटाई के दौरान इन सभी ने पीड़ित को जान से मार डालने की भी धमकी दी और दोबारा किसी मुस्लिम लड़की के साथ न दिखने की चेतावनी दी। इसके बाद ये सभी आरोपित मुस्लिम महिला की तरफ मुड़े।

उन्होंने बुर्कानशीं महिला को भला-बुरा कहा। वायरल वीडियो में एक आरोपित ने कहा, “तुमको शर्म नहीं आ रही मुसलमानों का नाम खराब करने में?” बुर्का वाली महिला ने हमलावरों के आगे हाथ भी जोड़े लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

बाद में अशोक रेड्डी ने इस घटना की FIR बसवकल्याण नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई। बीदर जिले के पुलिस अधीक्षक चन्नाबसवन्ना एसएल ने घटना की पुष्टि करते हुए इसे 17 अप्रैल का बताया है। उन्होंने कहा कि मॉरल पुलिसिंग के आरोप में पहले ही सैयद बिलाल, तौसीफ अयूब चावुस और सैयद इब्राहिम को गिरफ्तार किया जा चुका है। केस दर्ज होने के बाद कादिर कुरैशी और मगदूम फरार हैं जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।