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‘मतदान के बीच 99% दुकानें बंद’: श्रीनगर रिपोर्टिंग करने गई आरफा खानम शेरवानी, पत्रकारिता के नाम पर फैलाने लगी प्रोपेगेंडा; जानिए सच

प्रोपेगेंडा पोर्टल द वायर की एंकर आरफा खानम शेरवानी ने जम्मू-कश्मीर को लेकर फिर से एक बार फेक न्यूज फैलाई है। आरफा ने जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में वोटिंग के दिन दुकानें बंद रहने को लेकर झूठ फैलाया है। आरफा ने कश्मीर के बदलते हालातों को लेकर भी झूठ फैलाने की कोशिश की है।

आरफा खानम शेरवानी ने सोमवार (13 मई, 2024) को एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा, “श्रीनगर से रिपोर्ट कर रही हूँ, यह अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहला चुनाव है।
शहर में मतदान हो रहा है लेकिन 99% दुकानें बिना किसी औपचारिक आदेश के बंद हैं। 2019 के पिछले चुनाव की तुलना में वोटिंग प्रतिशत बढ़ने की संभावना है। लोग बड़े पैमाने पर अपनी अस्वीकृति जताने करने के लिए बाहर आ रहे हैं।”

आरफा ने अपने इस पोस्ट में दावा किया कि श्रीनगर में लोकसभा चुनावों की वोटिंग के दौरान दुकानों को बिना आदेश के बंद कर दिया गया है। इसके लिए कोई छुट्टी का आदेश नहीं निकाला गया। हालाँकि उनका यह दावा तथ्यों से परे था।

श्रीनगर में सोमवार को दुकानें इस लिए बंद थीं क्योंकि इस दिन सरकार ने छुट्टी घोषित की थी। 1 अप्रैल, 2024 को जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा जारी किए गए एक आदेश में यह स्पष्ट रूप से लिखा हुआ था कि जिस भी दिन जम्मू कश्मीर राज्य में लोकसभा चुनावों के लिए मतदान होगा, उस दिन उस लोकसभा क्षेत्र में छुट्टी रहेगी।

श्रीनगर फेक न्यूज
श्रीनगर में छुट्टी को लेकर जारी किया गया आदेश (चित्र साभार: JKCDC/X)

इसी आदेश के तहत, उधमपुर लोकसभा में 19 अप्रैल, जम्मू में 26 अप्रैल, अनंतनाग-राजौरी में 7 मई और श्रीनगर में सोमवार (13 मई, 2024) को छुट्टी घोषित की गई थी। इससे आगे 20 मई को बारामूला में भी छुट्टी घोषित की गई है।

जम्मू कश्मीर में वोटिंग के दिन छुट्टी को लेकर खबर
जम्मू कश्मीर में वोटिंग के दिन छुट्टी को लेकर खबर

जम्मू कश्मीर सरकार द्वारा जारी किए गए आदेश में स्पष्ट रूप से लिखा है, “बताए गए मतदान के दिनों को किसी भी व्यवसाय, फैक्ट्री या किसी अन्य प्रतिष्ठान में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति के लिए सवैतनिक छुट्टी रहेंगी और वह मतदान करने का हकदार है।” यानी इस आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि इस दिन सभी कामकाजी लोगों के लिए छुट्टी रहेगी।

ऐसे में मतदान के श्रीनगर में दुकानों का बंद होना असामान्य बात नहीं थी और ना ही यह बिना किसी आदेश के किया गया था। मात्र श्रीनगर ही नहीं चुनावों के समय प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में अवकाश घोषित किया जाता है और इस दिन दुकानों सहित सभी निजी और सरकारी दफ्तर बंद रहते हैं।

ऐसे में फैक्ट चेक में आरफा खान शेरवानी का दावा झूठा साबित हुआ है। उन्होंने श्रीनगर में दुकानों के ना खुलने को लेकर झूठ फैलाया है। श्रीनगर में 28 वर्षों के बाद सबसे अधिक मतदान इस लोकसभा चुनाव में देखा गया है। श्रीनगर लोकसभा के लिए सोमवार को 38% मतदान हुआ है जो कि 1996 के बाद के किसी भी लोकसभा चुनाव से अधिक है।

‘नमाज कायम करो’ वाली किताब, पूर्व कॉन्ग्रेस सांसद के नाम की बेंच, इत्र की शीशियाँ… उस बाँध का हाल जहाँ कब्ज़ा कर के बना दिया दरगाह, पशु-पक्षियों को भी नुकसान

हाल ही में, ऑपइंडिया ने रणजीत सागर बाँध में सरकारी भूमि पर अवैध रूप से बनाए गए दरगाह और दरगाह के माध्यम से हजारों वर्ग फुट जगह पर किए गए कब्जे के बारे में एक रिपोर्ट दी थी। 2022 में, एक सरकारी सर्वेक्षण द्वारा इसे अवैध घोषित कर दिया गया था, इसे हटाने का आदेश देने के बाद भी आज तक कब्जा जारी रहा। 13 मई, 2024 को अवैध कब्जा हटाओ संघर्ष समिति के कार्यकर्ता युवराज सोलंकी की मदद से ऑपइंडिया रणजीत सागर बाँध पहुँचा।

रणजीत सागर बाँध में किए गए कब्जे के वर्तमान समय की परिस्थितियों का जायजा ऑपइंडिया द्वारा लिया गया। ऑपइंडिया ने ग्राउंड जीरो से जो जानकारी जुटाई वह वाकई चौंकाने वाली थी। यह कब्जा हजारों वर्ग फुट सरकारी जमीन पर दरगाह बनवाकर, कब्जेको घेरने के लिए की गई बाड़ लगाकर, अतिरिक्त निर्माण के लिए संसाधन, राजनेताओं के अनुदान से आवंटित बेंच, जहां देखे वहा, इत्र की बोतलें और मजहबी साहित्य … दृश्य वास्तव में चौंकाने वाले थे।

बाहर मुख्य सड़क पर हमें सफेद रंग का एक बोर्ड मिला जिस पर हरे अक्षरों में 786-92 और, ‘हजरत पंजू पीर दरगाह शरीफ’ लिखा था। बोर्ड के ऊपरी दो कोनों में चाँद-तारे के निशान के निशान बने हुए थे। बोर्ड के ऊपर दो चौकोर झंडे, एक हरा और एक लाल, जिस पर इस्लामी चिह्न मुद्रित थे। सीमेंट के पक्के फाउंडेशन में यह बोर्ड मज़बूती से लगाया गया था।

मुख्य सड़क पर उस दरगाह का बोर्ड लगा हुआ है

बांध की भूमि के एक बड़े टुकड़े को तारों से घेर कर कब्जाया गया

जब ऑपइंडिया युवराज सोलंकी की मदद से रणजीत सागर बाँध पहुँचा। जैसे ही हम बाँध में पहुंचे, हमें कँटीले तारों के साथ बाड़ लगा कर सुरक्षित की गई जगह देखने को मिली। दरगाह के चारों ओर काँटेदार तार की बाड़ लगाई गई है ताकि कब्जे वाले स्थान को घेरकर सुरक्षित किया जा सके। रणजीत सागर बांध की हजारों वर्ग फीट जगह को इस बाड़ से घेर लिया गया है। आमतौर पर, इस प्रकार की बाड़ लोगों द्वारा अपनी भूमि/स्थान की रक्षा के लिए बनवाई जाती है। रणजीत सागर बांध की सरकारी जमीन को इसी तरह कँटीले तार लगाकर घेरा गया है।

लम्बी-लम्बी मजारें और बहुत बड़ा अतिक्रमण

युवराज सोलंकी के माध्यम से आगे बढ़ते हुए, हमने पाया कि 2022 में किए गए सर्वेक्षण के बाद दिए गए आदेशों के बाद भी अतिक्रमण जारी रहा है। निर्माण वैसा ही है जैसा पहले था। सबसे आगे सीमेंट का एक पक्का चबूतरा बनाया गया है, जिस पर 31 फीट तक लंबी 3 मजार हैं। इस चबूतरें के किनारे पर कॉलम बीम लगाया गया है और ऊपर से पाइप लगाए गए हैं। इस ढाँचे पर छत बनाई गई है। इसके बगल में ईंटों और सीमेंट का एक छोटा आकर बनाया गया है, जिसमें मिट्टी के दीये रखे गए हैं। यहाँ हमें हरे रंग के कागज वाली चॉकलेट का एक पैकेट भी मिला, शायद कोई व्यक्ति कुछ समय पहले इस जगह पर आकर गया था।

मजार के ऊपर चादरपोशी के लिए बनी जगह

इस जगह से थोड़ी ही दुरी पर ऐसी ही एक और संरचना बनाई है। वहाँ पक्के चबूतरें पर 31 फीट लंबी दो मजार देखी जा सकती हैं। यहाँ भी खंभे लगाए गए हैं। यहाँ बस उपर छत लगाना ही बाकी है। इस संरचना के बगल में एक और 6 फुट की मजार भी दिखाई देती है। गौरतलब है कि इस्लाम में बनी मजार (एक प्रकार की कब्र) पाँच से छह फीट तक लंबी होती है। लेकिन हैरानी की बात यह है कि यहाँ बनी 5 मजार तकरीबन 31 फीट तक लंबी हैं। खास बात यह है कि इन सभी मजारों पर एक ही लंबाई की चादरें लगाई गई हैं।

मजारें पक्की चिनाई और शेड के लिए ऊँचे खंभों पर बनाई गईं

आमतौर पर पाँच-छह फीट लंबी मजारों पर उतनी ही लंबाई की चादर लगाई जाती है, लेकिन यहाँ चढ़ी हुई वाली चादरें खास लगती हैं। मजार पर पेश की गई चादरों की बात करें तो वे सभी चादरें नई और साफ हैं। क्योंकि अगर बांध के पानी के उतरने के बाद भी वही चादरें होतीं, तो वह गंदगी और कीचड़ से सनी होती। इसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि हाल ही में किसी ने यहाँ आकर सफाई की है और नई चादर चढ़ाई है।

जगह-जगह इत्र की शीशियाँ, मजहबी साहित्य और कूड़ा

ऑपइंडिया ने जब आसपास की जगह की जाँच की तो हमें यहाँ अनगिनत इत्र की खाली और भरी हुई शीशियाँ मिलीं। कुछ शीशियाँ गर्मी से सूख चुकी जमीन पर पड़ी थीं और कुछ बाँध के पानी में पड़ी थीं। कुछ खाली और कुछ भरी इत्र की बोतलें ज्यादातर काँच की थीं और कुछ प्लास्टिक की। हमें इन शीशियों को पैक करने वाले रैपर भी पड़े मिले। पूरे इलाके में पानी की नमी और इत्र की तेज गंध भी आ रही थी।

इत्र की बोतलें ही नहीं, हमें यहाँ कुछ इस्लामिक साहित्य भी देखने को मिले। हमें अरबी, कुछ हिंदी और गुजराती में लिखे कागज़ मिले। इन्हीं में से एक साहित्य पर लिखा था, “कायम नमाज़ करो, नमाज़ मोमिन की मेअराज़ है”। एक अन्य कागज़ पर एक और हजरत शालू पीर दरगाह शरीफ लिखा हुआ था। शेख उस्मानशाह जफरशाह मुल्तानी के नाम वाले कागज पर जामनगर में कलावाड रोड का पता लिखा हुआ था।

बाँध के अंदर सूखी ज़मीन और पानी में बहुत सारी इत्र की बोतलें मिलीं

इतना ही नहीं इसके अलावा ऑपइंडिया को इस जगह पर कई बड़ी चादरों से बँधा सामान भी मिला। यह जानना असंभव था कि इसके अंदर क्या बँधा हुआ था। लेकिन हो सकता है कि यहाँ दी जाने वाली चादरें और पुरानी चढ़ाई सब इसी में रखी हों। इसके साथ ही हमने यहाँ सीमेंट के छोटे-बड़े चबूतरे भी देखे। इस जगह पर हर जगह प्लास्टिक का कचरा भी देखने को मिला।

दरगाह के आसपास इस्लामी साहित्य पड़ा हुआ मिला

कॉन्ग्रेसी नेता के नाम वाले बेंच और दरगाह बनाने का सामान

हमें अतिक्रमण की गई भूमि के एक कोने में कुछ मलबा भी मिला। जब हमने वहाँ जाकर जाँच की तो पता चला कि ये वही खंभे हैं जिनका इस्तेमाल दरगाह का शेड बनाने के लिए किया गया था। इस दौरान युवराज ने हमें बताया कि सामान बगल वाली अधूरी दरगाह का है। इसे दरगाह की छत और अन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग किए जाने के उद्देश्य से यहां लाया गया है।

इसी मलबे के बीच हमने कुछ बैठने की बेंच देखी। आमतौर पर इस प्रकार के बेंचों को सांसदों से लेकर नगरसेवकों तक अपना बजट आवंटित कर सोसायटी, उद्यानों और सार्वजनिक स्थानों पर नागरिकों के बैठने के लिए लगाए जाते है। इन बेंच पर लिखे अक्षर कुछ समय तक पानी के अंदर रहने के कारणों से कीचड़ के नीचे दब गए थे। कुछ सफाई करते ही, हमने इन बेंचो पर लिखा पाया “माननीय सांसद श्री विक्रमभाई माडम, जामनगर – वर्ष 2011-12 के अनुदान से, स्वच्छता बनाए रखें”।

दरगाह का काम पूरा करने के लिए सामान

गौरतलब है कि विक्रम माडम कॉन्ग्रेस के जानेमाने नेता हैं। विक्रम माडम भानवड़ और खंभालिया से विधायक रह चुके हैं। वह 2004 और 2009 में कांग्रेस के सांसद भी रह चुके हैं। 2014 में विक्रम मडाम बीजेपी नेता पूनम माडम से हार गए थे।

बेंचों का नाम कॉन्ग्रेस नेता विक्रम माडम के नाम पर रखा गया है

सिर्फ जामनगर के लोगों के लिए ही नहीं, वाइल्ड लाइफ के लिये भी ये बाँध महत्वपूर्ण

गौरतलब है कि जामनगर की भौगोलिक स्थिति वन्यजीवों की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। समुद्री तट से सटे इस जिले में हर साल कई तरह के विदेशी पक्षी लम्बी यात्रा कर के आते है। खिजड़िया पक्षी अभयारण्य रणजीत सागर बांध से मुश्किल से 20/22 किमी दूर होगा। तब स्वाभाविक है की आने वाले देशी-विदेशी पक्षी यह जलाशय में भी आएँगे। इस अवैध दरगाह से बांध का पानी कम होकर महज 100 मीटर दूर चला गया है।

जब ऑपइंडिया यहाँ निरीक्षण कर रहा था, हमारी नज़र फ्लेमिंगो पक्षियों के झुंड पर पड़ी जो बाँध में उतरे थे। आमतौर पर सर्दियों के मौसम में यहाँ आने वाले इन पक्षियों की मौजूदगी हमें उतनी ही हैरान करने वाली थी जितनी आप इसे पढ़ कर महसूस कर रहे हैं। और हमने दूर से ही इन खूबसूरत पक्षियों को मोबाइल फोन के कैमरे में कैद करने का प्रयत्न किया।

बाँधमें उतरता राजहंस पक्षी

इस दौरान युवराज ने हमें बताया कि यह जगह सिर्फ पक्षियों के लिए ही नहीं बल्कि मछलियों और मगरमच्छों के लिए भी महत्वपूर्ण है। बकौल युवराज, मेटिंग सीजन के दौरान मगरमच्छ यहाँ मेटिंग प्रक्रिया के लिए आते हैं। यह सब सुनकर हम सोच में पड़ गए कि जिस तरह से हमें यहाँ बाँध के पानी में इत्र की बोतलें, प्लास्टिक कचरा और अन्य हानिकारक चीजें मिलती हैं, उससे यहाँ के वन्यजीवों को किस हद तक नुकसान हो सकता है?

हर साल पानी में डूब जाने वाली इस जगह को फिर से बनाने का खर्च कौन देता होता होगा?

हर चीज की गहन जाँच के बाद, यहाँ एक बात विचार करने योग्य लगी। यह जगह साल के लगभग 6 महीने पानी में डूबी रहती है। बाँध पहले बारिश से और फिर नर्मदा के नीर से भरा रहता है। बाँध में पानी भरा होने पर यहाँ आना मुश्किल है। लेकिन जब पानी कम हो जाता है, तो जगह मलवे और कीचड़ से ढँक जाती है। यहाँ देखभाल करने आते रहते कासमभाई ने ऑपइंडिया को बताया था कि वो यहां सिर्फ धूप करने मौर माथा टेकने आते हैं, उनकी इस जगह पर खर्च करने की क्षमता नहीं है।

अगर कोई और यहाँ नहीं आता है तो हर साल इस जगह की देखभाल कौन करता है? इसके निर्माण और रखरखाव की लागत कौन प्रदान करता है? यहाँ जिस तरह का सामान पड़ा है, उसे लाने के लिए पैसे किसने निकाले होंगे? प्रशासन को इस दिशा में भी जाँच करानी चाहिए कि सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनी इस दरगाह की फंडिंग आखिर कहाँ से हुई।

बटन दबाया साइकिल वाला, पर्ची निकली कमल की… लखीमपुर-खीरी से हसन रज़ा और कमरजहाँ के वीडियो: जिसे सपा एन्ड गिरोह बता रहा बेईमानी, जानिए उसका सच

लोकसभा चुनाव 2024 में चौथे चरण के लिए सोमवार (13 मई, 2024) को 96 सीटों पर मतदान सम्पन्न हुआ। इस दौरान उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में खासतौर पर समाजवादी पार्टी के समर्थकों ने EVM में गड़बड़ी की शिकायत की है। इसमें से अधिकतर की शिकायत यह है कि उन्होंने वोट साइकिल यानी समाजवादी पार्टी को दिया लेकिन पर्ची कमल के निशान यानी भाजपा की निकली। इन शिकायतों के वीडियो कुछ पत्रकारों के अलावा सपा के आधिकारिक ‘X’ हैंडल ने भी चुनाव आयोग को टैग कर के शेयर की हैं।

13 मई को समाजवादी पार्टी ने अपने मीडिया सेल के आधिकारिक हैंडल से 30 सेकेंड का एक वीडियो शेयर किया है। सपा ने यह वह वीडियो लखीमपुर लोकसभा क्षेत्र के गोला का बताया है। इस वीडियो में हसन रज़ा बरकाती ने कहा, “प्रशांत कुमार यहाँ जो पीठासीन अधिकारी हैं, जो मोहम्मडन (मुस्लिम) वोट डालने आते हैं तो मशीन नहीं दाबते। कह देते हैं जाओ, वोट पड़ गया। जब हम डालने गए, हमने साइकिल का बटन दबाया पर कमल का निशान निकल रहा है।” हसन ने इसे धाँधली और कई लोगों की समस्या बताया।

चुनाव आयोग को टैग करते हुए सपा ने लिखा, “वोट डाल रहे साइकिल में और VVPAT से पर्ची निकल रही कमल की। देश में चुनाव निष्पक्ष होने चाहिए जबकि भाजपा सत्ता के इशारे पर बेईमानी की जा रही।” लखीमपुर खीरी की कमरजहाँ ने भी कमोबेश इसी प्रकार से शिकायत की है। उनके वीडियो को सचिन गुप्ता नाम के पत्रकार ने अपने ‘X’ हैंडल पर शेयर किया है।

‘रेडियो मिर्ची’ की RJ सायमा ने भी इस दावे को आगे बढ़ाया।

कमरजहाँ ने कहा, “मुझे घर में बताया गया था कि साइकिल पर वोट देना तो साइकिल ही छप कर आएगी। उस पर फूल छप कर आया।” कमरजहाँ का दावा है कि जब उन्होंने पीठासीन अधिकारी से इसकी शिकायत की तो उनको बाहर चले जाने के लिए कहा गया। कमरजहाँ की इच्छा है कि उनकी पर्ची पर साइकिल छप कर आए। इन तमाम आरोपों के बाद जिला प्रशासन ने इसके क्रमवार जवाब दिए।

खुद कमरजहाँ ने मानी अपनी गलती

इन आरोपों को लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारी (DM) ने आधारहीन बताया है। उन्होंने कमरजहाँ का एक और वीडियो शेयर किया है। वीडियो में कमरजहाँ ने कबूल किया है कि गलती से उन्होंने कमल का बटन दबा दिया था। कमरजहाँ ने अब खुद को संतुष्ट बताया है।

जिसे डाला वोट उसी की निकली पर्ची

लखीमपुर खीरी जिला प्रशासन ने हसन रजा बरकाती के आरोपों का भी खंडन किया है। जिलाधिकारी लखीमपुर के आधिकारिक हैंडल से एक अन्य वीडियो शेयर किया गया है। इस वीडियो में प्रशासनिक अधिकारी कुछ मुस्लिम महिलाओं और पुरुषों से सवाल करते हैं कि क्या उन्होंने जिसे वोट दिया उसके अलावा किसी और की पर्ची निकली? इसके जवाब में सभी ने स्वीकार किया कि उन्होंने जिसे वोट दिया उसकी ही पर्ची निकली। बाद में अधिकारी ने हसन रजा बरकाती व उनके जैसे कुछ अन्य लोगों के आरोपों को निराधार बताते हुए इसे सनसनी फैलाने की साजिश करार दिया।

प्रशासनिक अधिकारियों के बयानों के आधार पर ऑपइंडिया की पड़ताल में यह बात निकल कर सामने आई कि वायरल वीडियो में EVM में गड़बड़ी के आरोप निराधार हैं।

जिस इंस्टाग्राम हैंडल से शेयर हो रही थी हिन्दू देवी-देवताओं की आपत्तिजनक तस्वीरें, उसके पीछे अब्दुल: मुंबई में FIR दर्ज

सोशल मीडिया पर हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान करने वाले व्यक्ति के खिलाफ मुंबई पुलिस को शिकायत दी गई है। आरोपित का नाम अब्दुल रशीद अब्दुल लतीफ़ बताया जा रहा है। अब्दुल ने इंस्टाग्राम पर ‘लॉस्ट बैक’ नाम से हैंडल बना रखा है जिस से वो लगातार हिन्दुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत कर रहा है। गुरुवार (9 मई, 2024) को पुलिस ने अब्दुल के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। फ़िलहाल आरोपित की गिरफ्तारी अभी तक नहीं हो पाई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामला मुंबई के नवघर पुलिस स्टेशन का है। गुरुवार को यहाँ 24 साल के एक युवक ने शिकायत दी है। अपनी शिकायत में युवक ने बताया कि वो एक वीडियो एडिटर के तौर पर काम करता है। इस काम के दौरान उसे सोशल मीडिया के तमाम प्लेटफॉर्म पर नजर रखनी पड़ती है। 8 मई को शिकायतकर्ता जब इंस्टाग्राम स्क्रॉल कर रहा था तब उसे कई ऐसी रील्स मिलीं जिसमें हिन्दू देवी-देवताओं का अपमान किया गया था। जिस हैंडल से लगातार देवी-देवताओं के एडिटेड चित्र शेयर किए जा रहे थे वो ‘लॉस्ट बैक’ नाम से था।

अब्दुल पर दर्ज FIR

शिकायतकर्ता ने बताया कि प्रोफ़ाइल चेक करने पर उसे ऑपरेट करने वाला अब्दुल रशीद अब्दुल लतीफ निकला। शिकायत में अब्दुल पर कड़ी कार्रवाई की माँग की गई है। पुलिस ने इस शिकायत पर अब्दुल रशीद अब्दुल लतीफ़ को नामजद करते हुए FIR दर्ज कर ली है। उस पर IPC की धारा 295 A, 153 A और IT एक्ट (सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66सी और 67) के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस मामले की जाँच में जुटी है। अब्दुल अभी पुलिस की पकड़ से दूर है। ऑपइंडिया के पास FIR कॉपी मौजूद है।

अब्दुल द्वारा शेयर आपत्तिजनक तस्वीरें

शिकायतकर्ता ने सबूत के तौर पर अब्दुल द्वारा शेयर किए गए कुछ रील्स के स्क्रीनशॉट पुलिस को दिए हैं। ऑपइंडिया के पास भी वो तस्वीरें मौजूद हैं जिन्हे बेहद आपत्तिजनक ढंग से एडिट किया गया है।

हिन्दू नेताओं की हत्या के लिए PFI ने बनाया ‘मौत का दस्ता’, मस्जिद-मदरसों में ट्रेनिंग: RSS नेता रुद्रेश-BJYM के प्रवीण नेट्टारू की हत्या ‘मिशन 2047’ का हिस्सा

NIA ने RSS नेता रुद्रेश की हत्या के मामले में 2 मार्च, 2024 को एक बड़ी सफलता मिली। ये हत्याकांड 2016 में हुआ था। PFI के प्रतिबंधित आतंकी मोहम्मद गौस नियाज़ी को दक्षिण अफ्रीका से गिरफ्तार किया गया। इसके बाद उसका प्रत्यर्पण किया गया। उसने बेंगलुरु में इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। उस पर 5 लाख रुपए का इनाम रखा गया था। 35 वर्षीय रुद्रेश का हत्यारा मोहम्मद गौस नियाज़ी PFI का बड़ा चेहरा था। हत्या के बाद वो भारत से बाहर अपने ठिकाने बदल रहा था।

गुजरात ATS को उसके दक्षिण अफ्रीका में होने का पता चला, जिसके बाद NIA को सूचित किया गया। दक्षिण अफ़्रीकी पुलिस ने सहयोग किया और उसे धर-दबोचने में कामयाबी मिली। रुद्रेश को बेंगलुरु के शिवाजी नगर में मार डाला गया था। वो RSS के एक कार्यक्रम से लौट रहे थे। आतंकी घात लगा कर छिपे हुए थे। अब 2016 के इस हत्याकांड और 2022 के प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड में कनेक्शन मिला है। 26 जुलाई, 2022 को BJYM नेता प्रवीण नेट्टारू की हत्या हुई थी।

दक्षिण कन्नड़ के बेल्लारी में आतंकियों ने उन पर धारदार हथियार से हमला किया था। वो पॉल्ट्री का कारोबार करते थे। जनवरी 2023 में NIA ने खुलासा किया कि PFI ने ‘सर्विस टीम’ और ‘किलर स्क्वाड’ बना रखा है, ताकि वो अपने ‘दुश्मनों’ की हत्या कर सके और भारत को 2047 तक इस्लामी मुल्क बनाने का उसका सपना पूरा हो। आतंक, सांप्रदायिक घृणा और समाज में अराजकता के जरिए ये अपनी मंशा पूरी करना चाहते थे। इन टीमों को हथियार दिया गया था, प्रशिक्षण भी।

इन्हें सिखाया गया था कि कैसे हिन्दू नेताओं की रेकी करें, फिर उन्हें निशाना बनाएँ। रुद्रेश की हत्या के बाद ये टीमें बनाई गई थीं, PFI के जिलाध्यक्ष असीम शरीफ की गिरफ़्तारी भी हुई थी। PFI ने मुस्लिमों की भर्ती की, मस्जिदों-मदरसों में उन्हें हथियार देकर प्रशिक्षित किया गया। रुद्रेश की हत्या सफल होने के बाद ये साजिश उनके दिमाग में आई थी। 2019 में असीम शरीफ की याचिका सुप्रीम कोर्ट ने ख़ारिज कर दी, वो चाहता था कि रुद्रेश की हत्या में उसके ऊपर आरोप न तय किए जाएँ।

उसने दावा किया था कि उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चार्जेज फ्रेम करने के लिए पर्याप्त सबूत मौजूद हैं। रिपोर्ट्स में बताया गया था कि वही इस हत्याकांड के पीछे का मास्टरमाइंड था और उसके निर्देश पर ही हत्या हुई थी। अक्टूबर 2016 में बेंगलुरु पुलिस ने रुद्रेश हत्याकांड में प्रत्यक्ष रूप से शामिल आतंकियों JC नगर के मोहम्मद मज़हर (35) और ऑस्टिन टाउन के वसीम अहमद (30) को गिरफ्तार किया था।

इन्होंने ही बाइक से आकर नाला जंक्शन के पास रुद्रेश की हत्या की थी। उनके साथ एक अन्य बाइक पर मुजीब और इरफ़ान थे, इनके साथ वो दोनों भी धराए। इन सबको असीम शरीफ निर्देश दे रहा था। ज्ञात हो कि PFI 2047 तक भारत को इस्लामी मुल्क में परिवर्तित करना चाहता था। उसका मानना था कि अंग्रेजों ने अन्यायपूर्ण तरीके से मुस्लिमों से सत्ता झपट ली। PFI के दस्तावेज का कहना था कि मुस्लिम हमेशा से अल्पसंख्यक रहे हैं और उन्हें जीत के लिए बहुसंख्यक होने की आवश्यकता नहीं है।

इस्लाम के इतिहास की बात करते हुए प्रतिबंधित संगठन का मानना था कि अगर 10% मुस्लिम भी उसका साथ दे दें तो वो ‘कायर’ बहुसंख्यकों का दमन कर के उन्हें घुटनों पर ले आएगा और इस्लाम का पुराना परचम फिर लहराएगा। उसने लिखा था कि मुस्लिमों को याद रखना चाहिए कि अल्लाह की बनाई कायनात में उन्हें दीन का काम करने के लिए भेजा गया है, उनका लक्ष्य होना चाहिए अल्लाह के कानून की स्थापना। इसी में हिन्दू नेताओं के बारे में डिटेल जुटाने के लिए कहा गया था।

‘अंतिम शो’ की बात करते हुए RSS/हिन्दू नेताओं की सूची और उनके विवरण जुटाने के लिए कहा गया था। साथ ही उनकी गतिविधियों पर नज़र रखने का निर्देश भी दिया गया था। PFI का कहना था कि हिन्दुओं का नरसंहार करने के लिए यही सही समय है। प्रतिबंधित संगठन के दस्तावेज में लिखा था कि जब उसके पास पर्याप्त मात्रा में लड़ाका और हथियार होंगे, तब भारतीय संविधान की जगह शरिया लागू कराया जाएगा। इसके रास्ते में आने वालों के नरसंहार की बात की गई थी।

इसके लिए तुर्की जैसे इस्लामी मुल्कों से मदद तक माँगी गई थी। साफ़ है, ये डेथ स्क्वाड्स हिन्दुओं की हत्या के लिए बनाए गए थे। प्रवीण नेट्टारू या रुद्रेश की PFI से कोई दुश्मनी भी नहीं थी, ऐसे में ये टार्गेटेड किलिंग था इससे इनकार नहीं किया जा सकता। दोनों हत्याओं में कनेक्शन का अर्थ है PFI की साजिश गहरी थी हिन्दुओं को निशाना बनाने की। ये सब PFI के ‘विजन 2047’ विजन डॉक्यूमेंट के हिसाब से किया गया। सिर्फ ये दोनों ही नहीं, कई हिन्दू नेता इनके निशाने पर थे।

मुस्लिम महिला को ऑटो में बिठाने पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने बुजुर्ग हिन्दू ड्राइवर को पीटा, बुर्के वाली से बोले- नाम खराब कर रखा है: कर्नाटक में बिलाल, तौसीफ, इब्राहिम गिरफ्तार

कर्नाटक के बीदर जिले का एक वीडियो सोशल मीडिया पर रविवार (12 मई 2024) से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में बुर्का पहने मुस्लिम महिला सवारी को बिठाने पर एक हिन्दू ड्राइवर की पिटाई की जा रही है। हमलावर मुस्लिम समुदाय के लोग बताए जा रहे हैं जिन्होंने बुर्काधारी महिला पर भी हाथ उठाया और उसे अपशब्द कहे।

यह घटना 17 अप्रैल 2024 की बताई जा रही है जिस पर पुलिस ने FIR दर्ज करके 3 हमलावरों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार हुए इन हमलावरों की पहचान सैयद बिलाल, तौसीफ अयूब और सैयद इब्राहिम के तौर पर हुई है। कादिर कुरैशी और मकदूम नाम के 2 अन्य आरोपित फरार हैं। पुलिस इनकी तलाश में जुटी है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना बीदर जिले के बसवकल्याण इलाके की है। 17 अप्रैल को 72 वर्षीय ऑटो ड्राइवर अशोक पांडुरंगा रेड्डी बसवकल्याण से कौडियाला सवारी ले जा रहे थे, तभी उनकी ऑटो में बुर्का पहने एक महिला बैठती है जिसका नाम हजरतबी हनुमिया बताया जा रहा है।

थोड़े आगे चलने के बाद लगभग 5 लोगों ने इस ऑटो को थिमक्का गार्डन के पास दोपहर लगभग 1 बजे रोक लिया। इन लोगों के नाम सैयद बिलाल, तौसीफ अयूब चावुस, सैयद इब्राहिम, कादिर कुरेशी और मगदूम बताए जा रहे हैं।

इन सभी ने ऑटो रोक कर ड्राइवर अशोक रेड्डी की बुरी तरह से थप्पड़ों और घूंसों से पिटाई कर दी। पिटाई के दौरान इन सभी ने पीड़ित को जान से मार डालने की भी धमकी दी और दोबारा किसी मुस्लिम लड़की के साथ न दिखने की चेतावनी दी। इसके बाद ये सभी आरोपित मुस्लिम महिला की तरफ मुड़े।

उन्होंने बुर्कानशीं महिला को भला-बुरा कहा। वायरल वीडियो में एक आरोपित ने कहा, “तुमको शर्म नहीं आ रही मुसलमानों का नाम खराब करने में?” बुर्का वाली महिला ने हमलावरों के आगे हाथ भी जोड़े लेकिन उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा।

बाद में अशोक रेड्डी ने इस घटना की FIR बसवकल्याण नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज करवाई। बीदर जिले के पुलिस अधीक्षक चन्नाबसवन्ना एसएल ने घटना की पुष्टि करते हुए इसे 17 अप्रैल का बताया है। उन्होंने कहा कि मॉरल पुलिसिंग के आरोप में पहले ही सैयद बिलाल, तौसीफ अयूब चावुस और सैयद इब्राहिम को गिरफ्तार किया जा चुका है। केस दर्ज होने के बाद कादिर कुरैशी और मगदूम फरार हैं जिनकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है।

डमरू की डमडम, मंत्रों की गूँज, शंखनाद, कलाकारों की प्रस्तुतियाँ, साथ में ‘शिवगण’… वाराणसी की गलियों में PM के रोडशो में उमड़ा जनसैलाब, लोग बोले – हमार काशी, हमार मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार वाराणसी लोकसभा क्षेत्र से नामांकन के 1 दिन पहले सोमवार (13 मई, 2024) को वहाँ भव्य रोडशो किया, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी उनके साथ मौजूद रहे। रोडशो के दौरान उन्होंने BHU के संस्थापक महामना मदन मोहन मालवीय की प्रतिमा पर उन्हें पुष्पांजलि भी अर्पित की। वाराणसी से नरेंद्र मोदी ने 2014 में 3.71 लाख और 2019 में 4.79 लाख वोटों से जीत दर्ज की थी।

उन्हें 2014 में कुल मतों का 56.37% तो 2019 में 63.62% प्राप्त हुआ था। इस बार भी उनके रोडशो में उमड़े जनसैलाब के बाद चर्चा है कि न सिर्फ वाराणसी, बल्कि आसपास की कई सीटों पर इसका प्रभाव पड़ेगा। इस दौरान डमरू की डमडम और मन्त्रों की गूँज भी सुनाई दे रही थी। पूरा वाराणसी भगवामय हो गया था। वाराणसी में नरेंद्र मोदी ने बतौर सांसद कई कार्य किए हैं, वहाँ कैंसर अस्पताल भी खुला। काशी में गंगा नदी की साफ़-सफाई को लेकर भी कार्य हुए हैं।

उनके ही कार्यकाल में बाबा विश्वनाथ कॉरिडोर भी बना। साथ ही ज्ञानवापी में पूजा शुरू हुई। 2014 के बाद से ही BHU के अस्पताल और जिला अस्पताल में भी कई कार्य किए गए हैं। वाराणसी की गलियों से भी पीएम मोदी का कारवाँ गुजरा। इस रोडशो में कई लोग भगवान शिव की वेशभूषा में थे। वाराणसी में स्वच्छता अभियान के तहत 1.38 लाख लोगों को शौचालय, 12 शमशान घाटों का पुनर्निर्माण हुआ और 14 पंचायत भवनों का भी निर्माण हुआ।

रोडशो के दौरान शंखनाद भी होता रहा, सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ भी कलाकार देते रहे। ये रोडशो लगभग 6 किलोमीटर चला। लंका गेट से लेकर संत रविदास दरवाजे के पास रोडशो का पहला पड़ाव रहा, उसके बाद अस्सी घाट वाले रोड में गोदौलिया चौराहा होते हुए पीएम नरेंद्र मोदी का काफिला गुजरा। बच्चों से लेकर महिलाओं तक की हिस्सेदारी इस रोडशो में रही। इस दौरान ‘विकास भी, विरासत भी’ के पोस्टर भी लोग लिए हुए थे।

RJD का मंच, RJD के ही वर्कर को तेजप्रताप ने धक्का देकर फेंका: माँ राबड़ी-बहन मीसा भी थीं मौजूद, Video वायरल होने पर कहा- असहाय दर्द हो रहा था…

लोकसभा चुनावों के बीच सोशल मीडिया पर राजद नेता तेज प्रताप यादव की एक वीडियो वायरल हो रही है। इस वीडियो में तेज प्रताप एक व्यक्ति को गुस्से में धक्का देते दिख रहे हैं। वीडियो में उनके आगे उनकी माँ राबड़ी देवी और बहन मीसा भारती भी जनता के आगे हाथ हिलाते हुए दिख रही हैं। झगड़े की शुरुआत में दोनों में से कोई उन्हें रोकने की कोशिश नहीं करतीं, लेकिन जब तेज प्रताप लड़ते ही रहते हैं तब मीसा भारती बीच में जाकर उन्हें छुड़ाती हैं और आगे लेकर आती हैं। इस वीडियो को देखने के बाद हर कोई अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है। वहीं तेज प्रताप यादव ने भी मामले में सफाई दी है।

जानकारी के मुताबिक, मीसा भारती आज अपना नामांकन दाखिल कराने के बाद श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल के मंच से वोट माँग रही थीं। इस दौरान उनके साथ उनका परिवार भी पाटलिपुत्र की जनता से मीसा के लिए समर्थन माँग रहा था।

इसी बीच अचानक तेज प्रताप यादव सामने खड़े व्यक्ति पर नाराज हो गए। उनके धक्का-मुक्की करने से स्टेज पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। अब ये वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है। दावा किया जा रहा है कि जिस व्यक्ति को तेज प्रताप यादव ने झापड़ मारा है वो राजद के प्रदेश महासचिव हैं।

इस वीडियो को देखने के बाद लोग कह रहे हैं कि ये पिछड़ों/दलित-गरीबों की लड़ाई लड़ते-लड़ते खुद राजा-महाराजा हो गए…अब इन शहजादों को गरीबों, दलितों के पास खड़े होने पर बदबू आती है और इनका पोजीशन डाउन होने लगता है…।

वहीं तेज प्रताप यादव ने इस बीच सफाई दी है। उन्होंने कहा, “ये जो कुछ लोग मेरा एक वीडियो वायरल कर रहे है उनको मैं बताना चाहता हूँ, कि सिक्के के दो पहलू होते है एक तरफ तो देख लिया आप सभी, दूसरी ओर हुआ ये था कि प्रत्याशी डॉ. मीसा भारती और मेरी माँ साथ में थे दोनों के बीच में आ के धक्का दे रहा था, मेरा हाथ पहले से जख्मी है और इनके द्वारा धक्का देकर आगे जाने के क्रम में असहाय दर्द महसूस होने पर मुझे खुद को बचाने के लिए अचानक से मजबूरन में इनको साइड करना पड़ा। मेरा मंशा कहीं से भी किन्हीं को आहत करने का नहीं रहा है। जनता मालिक मेरे लिए सर्वोपरि है, जनता का मान सम्मान ही हमारा कर्म है।”

‘प्रज्वल ने पिता के साथ मिलकर मेरी माँ का किया रेप, मुझे वीडियो कॉल पर नंगा किया’: रिपोर्ट में दावा- कर्नाटक सेक्स स्कैंडल की पीड़िता ने SIT के सामने दी गवाही

कर्नाटक के निलंबित जेडीएस सांसद प्रज्वल रेवन्ना के सेक्स स्कैंडल में एक और महिला सामने आई है। महिला ने प्रज्वल रेवन्ना और उनके पिता एचडी रेवन्ना पर यौन शोषण के आरोप लगाए हैं। महिला ने आरोप लगाया है कि उसके साथ ही उसकी माँ का भी रेप हुआ है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने यह आरोप इस मामले की जाँच कर रही SIT के सामने लगाए हैं। महिला ने बताया कि चार-पाँच वर्ष पहले सांसद प्रज्वल रेवन्ना और उनके पिता विधायक एचडी रेवन्ना ने उसकी माँ का रेप किया। महिला ने बताया कि उसकी माँ का रेप बेंगलुरु में हुआ। उसने यह भी आरोप लगाया कि प्रज्वल रेवन्ना ने उसे भी कपड़े उतारने पर मजबूर किया।

महिला ने आरोप लगाया कि प्रज्वल रेवन्ना उसे वीडियो कॉल करके कपड़े उतारने को कहता था और ऐसा ना करने पर उसकी माँ के साथ गलत करने की धमकी देता था। महिला ने बताया कि प्रज्वल उसे और उसकी माँ के फ़ोन पर वीडियो कॉल करता था। वह उसे और उसकी माँ को लगातार धमकाता था।

प्रज्वल रेवन्ना पर महिला ने आरोप लगाया कि उसकी माँ को लगातार उसके पति की नौकरी छीने जाने की धमकी दी जाती थी। उसके पति को बेरोजगार करने के अलावा महिला को रेप की धमकी भी दी जाती थी। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि जब उन्होंने इस विषय में शिकायत दर्ज करवाई तब उसके पिता को नौकरी को निकाल दिया गया।

महिला ने अपने और अपनी माँ के साथ यौन शोषण के अलावा अन्य कई महिलाओं के साथ ऐसा ही होने की बात कही है। महिला ने बताया, “हाँ, यह बात सच है कि एचडी रेवन्ना इनाम देने के बहाने नौकरानियों का यौन शोषण करता था, जबकि प्रज्वल मेरी माँ के साथ बलात्कार करता था। अब तक, केवल तीन लोगों ने सामने आकर इन घटनाओं के बारे में सार्वजनिक रूप से बात की है। तीन और नौकरानियों ने इन अत्याचारों के विषय में कुछ नहीं कहा, उनके साथ भी यौन शोषण किया गया।”

महिला ने कहा कि वह प्रज्वल रेवन्ना मामले में इंसाफ चाहती है। उसने कहा है कि उसका परिवार इस मामले में उसका साथ दे रहा है। गौरतलब है कि कर्नाटक के हासन से जेडीएस के सांसद और 2024 लोकसभा चुनावों के लिए प्रत्याशी प्रज्वल रेवन्ना के आपत्तिजनक वीडियो कथित तौर पर सामने आए हैं। इन वीडियो में उनके महिलाओं से दुराचार करने का आरोप है। उन पर महिलाओं को धमकाने और प्रताड़ित करने का भी आरोप है। उनके खिलाफ इस मामले में एक शिकायत भी दर्ज करवाई गई है।

प्रज्वल रेवन्ना मामले में कॉन्ग्रेस पर ढिलाई बरतने के आरोप भी लगे हैं। प्रज्वल के पूर्व ड्राइवर ने एक मीडिया संस्थान को बताया था कि उसने प्रज्वल की यह वीडियो कई महीने पहले कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार को दी थी लेकिन इस पर कार्रवाई नहीं की गई। प्रज्वल इस पूरे मामले के बाद विदेश चले गए थे, उनके खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है।

जगन रेड्डी के विधायक ने मतदाता को जड़ा थप्पड़, फिर समर्थकों ने भी मिल कर पीटा: वीडियो वायरल होने के बाद बोली TDP – ये आने वाली हार की हताशा

आंध्र प्रदेश के गुंटूर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में YSRCP के विधायक ए शिवकुमार एक वोटर को थप्पड़ मारते दिख रहे हैं। विधायक मतदाता द्वारा लाइन तोड़े जाने से नाराज थे। घटना सोमवार (13 मई, 2024) की है। पुलिस ने MLA ए शिवकुमार के खिलाफ FIR दर्ज कर के जाँच शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पर विधायक की इस हरकत का काफी विरोध हो रहा है। YSRCP की विरोधी TDP ने भी इस घटना में विधायक की आलोचना की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना गुंटूर में तेनाली क्षेत्र के एक मतदान केंद्र की है। वायरल वीडियो में YSRCP विधायक अपने समर्थकों के साथ खड़े नजर आ रहे हैं। इसी बीच एक वोटर को देख कर MLA ए शिवकुमार भड़क गए। उन्होंने मतदाता पर लाइन में कूदने का आरोप लगाया और उसे थप्पड़ मार दिया। हालाँकि, मतदाता ने भी पलट कर विधायक को थप्पड़ जड़ दिया। इसके बाद विधायक के तमाम समर्थक एकजुट हो गए। उन्होंने मिल कर वोटर को पीट डाला। इस घटना से मतदान केंद्र पर अफरातफरी और शोरगुल का माहौल हो गया।

मतदान केंद्र पर खड़े कुछ अन्य वोटरों ने मामले में बीच-बचाव करने की कोशिश की। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने आरोपित MLA के खिलाफ FIR दर्ज कर लिया है। मामले की जाँच की जा रही है। तेलगू देशम पार्टी के नेता नारा लोकेश ने इस घटना के वीडियो को शेयर किया है। उन्होंने YSRCP पार्टी के विधायक की हरकत की आलोचना की है। उन्होंने वोटर के साहस की सराहना की है। वहीं NDTV से बात करते हुए TDP की प्रवक्ता ज्योत्सना तिरुनागी ने इसे YSRCP की हताशा बताते हुए दावा किया कि MLA ए शिवकुमार जानते हैं कि उनकी पार्टी हार रही है।

बताते चलें कि आंध्र प्रदेश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हैं। यहाँ की सभी 175 विधानसभा और 25 लोकसभा सीटों पर 13 मई (सोमवार) को सुबह 7 बजे से वोट डाले जा रहे हैं। YSRCP फ़िलहाल यहाँ सत्ता में है। मुख्यमंत्री जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली वाईएसआरसीपी का मुकाबला भारतीय जनता और उसके साथ गठबंधन में मौजूद तेलुगु देशम पार्टी व पवन कल्याण से है। साल 2019 के विधानसभा में वाईएसआरसीपी ने 151 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी। तब इसी पार्टी ने लोकसभा में 23 सीटों पर जीत हासिल की थी।