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‘बड़ी काशी’ में PM मोदी, ‘छोटी काशी’ में कंगना… पग-पग पर शिवधाम, 8 दिन मनता है शिवरात्रि का त्योहार; जानिए क्यों हिमाचल के मंडी को कहते हैं ‘छोटा काशी’

लोकसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी ने जब से बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत को प्रत्याशी बनाकर मंडी से उतारा है, उसके बाद से ये क्षेत्र लगातार सुर्खियों में है। आज कंगना ने नामांकन दाखिल करने के बाद भी मंडी की महत्ता का जिक्र करते हुए इसे छोटा काशी कहा।

उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा- “प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी काशी-वाराणसी से नामांकन पत्र दाखिल किया है जबकि मैंने छोटी काशी-मंडी से नामांकन किया है। ये बहुत महत्वपूर्ण दिन है।” उनकी इस टिप्पणी के बाद से मंडी की चर्चा तेज है। लोग जानने के इच्छुक हैं कि मंडी को आखिर क्यों ‘छोटी काशी’ कहा जाता है उसके आध्यात्मिक महत्व क्या हैं। तो आज चलिए आपको इस खास जगह से परिचय करवाते हैं।

हिमाचल प्रदेश एक पर्वतीय स्थल है लेकिन इस पर्वतीय स्थल पर बसा मंडी क्षेत्र ऐसा है जिसकी सुंदरता उसे अपनी ओर खींचती है। यहाँ से लोग सुंदर पहाड़ियों का आनंद लेते हैं और आध्यात्म की अनुभूति करते हैं। मात्र  3,950 वर्ग किलोमीटर में फैले इस छोटे से क्षेत्र में 81 प्राचीन मंदिर हैं। खास बात ये है कि इनमें से ज्यादातर भगवान शिव के धाम हैं।

माना जाता है कि मंडी रियासत पर राज करने वाले सभी राजाओं की भगवान शिव के प्रति अटूट आस्था थी। इसके कारण यहाँ के राजाओं ने कई शिव मंदिरों को निर्माण करवाया था। इनमें सबसे खास मंदिर एकादश रूद्र, अर्धनारिश्वर, त्रिलोकीनाथ, पंचवक्त्र, नीलकंठ महादेव, बाबा भूतनाथ, महामृत्युंज्य मंदिर माने जाते हैंये मंदिर इतने भव्य हैं और इनकी इतनी मान्यता है कि इसके दर्शन के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं।

इतना ही नहीं शिवरात्रि के समय में हिमाचल प्रदेश का यह जिला यहाँ की सुंदरता देखने योग्य होती है। शिवरात्रि के समय बड़ी संख्या में शिवभक्त यहाँ आते हैं। सब मंदिरों में पूजा करते हैं और उस माहौल का आनंद उठाते हैं जो स्थानीयों की श्रद्धा के कारण चारों ओर दिखाई देता है। इस जगह शिवरात्रि का इतना महत्व है कि यहाँ किसी के एक दिन इस त्योहार का उत्साह नहीं दिखता बल्कि पूरे 8 दिन तक जब इस त्योहार को मनाते हैं। यहाँ निर्मित शिव मंदिर और उन शिव के लिए स्थानीयों की भक्ति देखकर ही इस जगह को छोटा काशी कहते हैं।

इसके अलावा मंडी का प्राचीन महत्व इसलिए भी है क्योंकि इस जिले का नाम ऋषि मांडव के नाम पर पड़ा था। बताया जाता है कि तपस्वी मांडव ने मंडी में ही अपनी घोर तपस्या की थी और उन्हें आलौकिक शक्तियाँ मिली थीं। उन्होंने अपनी तपस्या कुल्लू के नजदीक कोलसरा नामक स्थान पर एक चट्टान पर बैठकर व्यास नदी के पास की थी। इसके बाद इस जगह का नाम उनके नाम पर पड़ा। यहाँ नमक की खानें होने की वजह से इस जिले को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली और लोग यहाँ के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहे।

CM केजरीवाल के घर में स्वाति मालीवाल के साथ हुई थी बदसलूकी, AAP सांसद संजय सिंह ने मानी: बताया ड्राइंग रूम में विभव कुमार ने क्या-क्या किया

राष्ट्रीय राजधानी की राजनीति में सोमवार (13 मई, 2024) को अचानक से भूचाल आ गया था जब 9 वर्षों तक ‘दिल्ली महिला आयोग’ (DCW) की अध्यक्ष रहीं स्वाति मालीवाल के साथ मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास में मारपीट हुई है। इसमें CM के पूर्व PA विभव कुमार का नाम आया था। स्वाति मालीवाल थाने भी पहुँची थीं, लेकिन बिना कोई लिखित शिकायत दर्ज कराए वो ऑटो से लौट गई थीं। उन्हें कुछ फोन कॉल्स आए, जिसके बाद वो वापस गई थीं।

अब पहली बार इस पूरे प्रकरण पर AAP की तरफ से प्रतिक्रिया आई है। पार्टी के राज्यसभा संसद और अरविंद केजरीवाल की तरह ही जमानत पर बाहर चल रहे नेता संजय सिंह ने इसे एक बहुत ही निंदनीय घटना बताते हुए कहा कि सुबह अरविंद केजरीवाल के आवास पर स्वाति मालीवाल मिलने के लिए पहुँची थीं और ड्राइंग रूम में इंतज़ार कर रही थीं, इस बीच विभव कुमार वहाँ पर पहुँचे और उन्होंने स्वाति मालीवाल के साथ बहुत बदतमीजी की, अभद्रता की।

संजय सिंह ने बताया कि इसके बाद स्वाति मालीवाल ने 112 नंबर पर फोन कॉल कर के पुलिस को इस पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस घटना की जितनी निंदा की जाए कम है। संजय सिंह का ये भी कहना है कि AAP संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस घटना को संज्ञान में लिया है और सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया है। संजय सिंह ने स्वाति मालीवाल को देश-समाज के लिए बड़ा कार्य करने वाली महिला बताते हुए कहा कि वो पार्टी की वरिष्ठ नेताओं में से एक हैं, हम सब उनके साथ हैं।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस प्रकरण को गंभीरता से लिया है, आम आदमी पार्टी ऐसे लोगों का समर्थन नहीं करती है। विभव कुमार को विजिलेंस डिपार्टमेंट ने हटा दिया था, उससे शराब घोटाले में भी ED पूछताछ कर चुकी है। 2007 में उस पर सरकारी कर्मचारी से मारपीट का भी आरोप लगा था। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि केजरीवाल के जेल जाने के बाद मालीवाल निष्क्रिय थीं और अमेरिका चली गई थीं, इसीलिए उन्हें इस्तीफा देने को कहा गया और ये घटना हुई।

‘मेरे बेटे के पेट-छाती में 20 बार चाकू घोंपा’: अंकित मीणा के पिता का दावा- सलमान सहित कई लोग हत्या में शामिल, पत्थर से सिर कूचने का वीडियो भी बनाया

राजस्थान के गंगापुर सिटी में 11 मई 2024 को अंकित मीणा नाम के युवक की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। गला रेत कर हुई इस हत्या का आरोप सलमान और उसके 2 नाबालिग साथियों पर है। पुलिस ने तीनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। अब मृतक के पिता राम बाबू सामने आए हैं। उन्होंने इस हत्याकांड में कई लोगों के शामिल होने का दावा किया है। रामबाबू ने बताया कि अंकित की कातिलों से कोई दुश्मनी नहीं थी।

ऑर्गेनाइजर की पत्रकार सुभी विश्वकर्मा ने अंकित के पिता से बात की। उन्होंने बताया कि अंकित के हत्यारों को वे नहीं जानते। शादीशुदा अंकित 2 बच्चों के पिता थे। उनका बड़ा बेटा 6 साल और बेटी 2 साल की है। रामबाबू ने बताया कि शुक्रवार (10 मई) की शाम अंकित लगभग 4 बजे अपने घर से निकला था। रात में लगभग 8 बजे अंकित ने अपने पिता को कॉल किया और 160 रुपए भेजने के लिए कहा। इसके बाद अंकित ने अपनी बाइक की चाबी खो जाने की जानकारी दी।

आखिरी कॉल में अंकित ने अपने घर से किसी को चाबी लेकर आने के लिए कहा। रामबाबू ने आगे बताया कि उनके बेटे को मारने में सलमान और उनके 2 नाबालिग साथियों के अलावा कई और लोग शामिल थे। उनका यह भी दावा है कि एक आरोपित ने उनके बेटे की हत्या की रिकॉर्डिंग भी अपने मोबाइल में की थी। यह वीडियो 22 मिनट लम्बा बताया गया है जिसमें कथित तौर पर अंकित को चाकू घोंपने से ले कर सिर को पत्थर तक से कुचलने की घटना रिकॉर्ड है। बकौल रामबाबू अंकित के पेट और छाती में 20 बार चाकू घोंपा गया था।

अंकित के पिता का कहना है कि पेट और छाती में चाकू मारने के बाद हत्यारों ने उनके बेटे का गला रेता और हाथों को काट दिया। किसी लड़की से अंकित के अफेयर की बातों को रामबाबू ने अफवाह बताया। उन्होंने कहा कि उनका बेटा न सिर्फ शादीशुदा, बल्कि 2 बच्चों का पिता भी था। रामबाबू को अपने बेटे की हत्या की जानकारी पड़ोसी शिवराज मीणा से मिली थी। उनका यह भी दावा है कि उनके बेटे ने अपने जीवन में कभी भी इस्लाम या मुस्लिमों के खिलाफ सोशल मीडिया अथवा कहीं भी अन्य जगह कुछ नहीं बोला।

अंकित मीणा केस में ऑर्गेनाइजर द्वारा हासिल की गई एफआईआर की कॉपी का स्क्रीनशॉट

रामबाबू ने कातिलों पर कठोर कार्रवाई की माँग की है। इस मामले में शनिवार (11 मई) को गंगापुर सिटी थाने में FIR दर्ज हो चुकी है। अंकित मीणा की हत्या के विरोध में नाराज व्यापारियों ने बाजार को बंद रखा। पीड़ित परिवार के लिए 50 लाख रुपए मुआवजे की माँग की जा रही है। बताते चलें कि गंगापुर सिटी पुलिस को शुरुआत में शक था कि सलमान की गर्लफ्रेंड से अंकित की नजदीकी होना इस हत्या की वजह बनी है। पीड़ित पिता ने अपने दिवंगत बेटे के लिए इंसाफ की माँग की है।

दिल्ली शराब घोटाले में जुड़ेगा AAP का भी नाम: ED ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया, पहली बार करप्शन केस में राजनीतिक पार्टी बनेगी आरोपित

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि वह दिल्ली शराब घोटाला मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) को आरोपित बनाएगी। ED ने कोर्ट को बताया है कि वह AAP के एक प्रवक्ता को भी आरोपित बनाने जा रही है। इसके लिए नई चार्जशीट लगाई जाएगी।

मंगलवार (14 मई, 2024) को ED ने दिल्ली हाई कोर्ट में पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की जमानत का विरोध किया। इस मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा की बेंच कर रही थी। इस मामले की सुनवाई के दौरान ही ED ने कोर्ट को बताया कि वह AAP को भी इस मामले में आरोपित बनाएगी। ED ने सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया कि वह AAP को आरोपित बनाने के लिए मामले में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल करेगी, इसी चार्जशीट में ED AAP के एक प्रवक्ता को भी दिल्ली शराब घोटाला मामले में आरोपित बनाएगी।

ऐसा पहली बार हो रहा है कि किसी राजनीतिक दल को भ्रष्टाचार के मामले में आरोपित बनाया जा रहा है। ED ने सुप्रीम कोर्ट में AAP को इस मामले में शामिल करने को लेकर सूचना दी थी। AAP को आरोपित बनाने के लिए दिल्ली हाई कोर्ट का एक आदेश काम आया है।

एक सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था कि PMLA एक्ट के तहत आम आदमी पार्टी को आरोपित बनाया जा सकता है। हाई कोर्ट ने कहा था कि PMLA एक्ट में किसी कम्पनी को धारा 70 के तहत जाँच के दायरे में लाया जा सकता है। चूंकि राजनीतिक दल और कम्पनी, दोनों ही लोगों संगठन होते हैं, ऐसे में राजनीतिक दलों को भी इस धारा के तहत जाँच में लाया जा सकता है। दिल्ली हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि AAP के मुखिया अरविन्द केजरीवाल थे इसलिए वह AAP द्वारा किए गए घोटाले के जिम्मेदार होंगे।

दिल्ली हाई कोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान ED ने आरोप लगाया कि मुकदमे को धीमा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। ED ने कहा कि मुकदमे को धीमा करने के लिए याचिकाएँ लगाई जा रही हैं। ED ने कहा कि इस मामले में अब तक 250 याचिकाएँ लगाई गई हैं।

गौरतलब है कि शराब घोटाला मामले में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल को 21 मार्च, 2024 को गिरफ्तार किया था। उन्हें सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में अंतरिम जमानत दे दी थी। उन्हें यह जमानत चुनाव प्रचार के लिए मिली थी। केजरीवाल को 2 जून को सरेंडर करना है।

जिस महिला पत्रकार की मुस्कान कैमरे में दिखाना चाहते थे राहुल गाँधी, अब कॉन्ग्रेस ने बनाया अपना राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक: जानिए कौन हैं सुप्रिया भारद्वाज, क्यों ट्रॉल हो रहीं श्रीनेत

कॉन्ग्रेस पार्टी अक्सर सवाल पूछने वाली मीडिया को ‘गोदी मीडिया’ कह कर संबोधित करती रही है। खुद पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पत्रकारों को भाजपा का एजेंट तक बता कर अपमानित करते हैं। ये अलग बात है कि रवीश कुमार, अजीत अंजुम, पुण्य प्रसून वाजपेयी और ध्रुव राठी जैसे यूट्यूबरों का एक समूह पत्रकारिता के नाम पर इसी कॉन्ग्रेस का प्रोपेगंडा आगे बढ़ाते रहता है। अब पार्टी ने एक पत्रकार को ही राष्ट्रीय मीडिया समन्वयक के दायित्व से नवाज़ा है।

सुप्रिया भारद्वाज एक पत्रकार रही हैं, जो कम्युनिकेशन स्किल पर लंबे समय तक काम कर चुकी हैं। उनका पत्रकारिता का करियर 16 वर्षों का रहा है। वो TOI, NewsX, TV9 और ‘इंडिया टुडे’ के साथ काम कर चुकी हैं। उन्होंने BAA किया हुआ है, साथ ही उनके पास मास कम्युनिकेशंस में मास्टर्स की डिग्री है। इससे पहले ये पद राधिका खेड़ा सँभाल रही थीं, लेकिन पार्टी में प्रताड़ित किए जाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने इस्तीफा दे दिया और भाजपा का दामन थाम लिया।

राधिका खेड़ा ने बताया था कि अयोध्या स्थित राम मंदिर में रामलला का दर्शन करने के बाद उन्हें टॉर्चर किया जा रहा था। सुप्रिया भारद्वाज लंबे समय से अपने सोशल मीडिया हैंडल्स से कॉन्ग्रेस का एजेंडा आगे बढ़ाती रही हैं। 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान TV9 के लिए उन्होंने राहुल गाँधी का इंटरव्यू लिया था, जिसमें राहुल गाँधी ने खुद बताया था कि संसद में सुप्रिया भारद्वाज ने उनसे कहा था कि ‘राफेल का मुद्दा खून में घुस गया है।’ याद दिलाते चलें कि तब फ़्रांस के साथ राफेल विमान के सौदों में घोटाले का आरोप लगाया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट और CAG ने नकार दिया था।

उस इंटरव्यू के दौरान ‘चौकीदार चोर है’ के नारे भी लगाए गए थे। इस दौरान मुस्कुराती हुई सुप्रिया भारद्वाज का चेहरा भी राहुल गाँधी ने कैमरामैन को दिखाने को कहा था। सुप्रिया भारद्वाज ने ‘इंडिया टुडे’ में एक लेख भी लिखा था, जिसमें उन्होंने राहुल गाँधी की दाढ़ी, उनके बाल और सूट तक की तारीफ़ की थी। उनकी ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) टाइमलाइन पर कॉन्ग्रेस पार्टी के ही ट्वीट्स मिलेंगे। साथ ही वो 2019 की तरह 2024 में भी राहुल गाँधी के लिए हवा बना रही हैं।

उधर सुप्रिया भारद्वाज को नेशनल मीडिया कोऑर्डिनेटर बनाए जाने पर लोग सुप्रिया श्रीनेत को ट्रॉल कर रहे हैं। वो पार्टी की प्रवक्ता हैं और अक्सर प्रेस कॉन्फ्रेंस और टीवी डिबेट्स में नज़र आती हैं। लोगों का कहना है कि एक तो उन्हें टिकट नहीं मिला, ऊपर से अब सुप्रिया भारद्वाज को लेकर सुप्रिया श्रीनेत को बैकसीट दे दी गई है। कंगना रनौत पर अमर्यादित टिप्पणी को लेकर चुनाव आयोग भी उन्हें फटकार चुका है। सुप्रिया श्रीनेत भी पहले पत्रकार ही हुआ करती थीं।

‘तेरी पत्नी को नंगा कर घुमाएँगे, बेटी के साथ करेंगे रेप, बेटे का तोड़ेंगे जबड़ा’: एक मेजर को किया टॉर्चर ताकि कॉन्ग्रेस के ‘हिंदू आतंकवाद’ की थ्योरी को ठहराया जा सके सही

मालेगाँव बम धमाका मामले में मुकदमे का सामना करने वाले मेजर रमेश उपाध्याय ने कहा है कि उन्हें कॉन्ग्रेस की अगुवाई वाली UPA सरकार ने फँसाया था। उन्होंने कोर्ट को दिए गए एक बयान में बताया है कि UPA सरकार ने हिन्दू आतंकवाद को सच साबित करने के लिए ATS पर दबाव डाला था। मेजर उपाध्याय ने आरोप लगाया है कि ATS ने उनके साथ बर्बरता की और उनकी पत्नी को नंगा घुमाने और बेटी के रेप तक की धमकी दी।

मेजर रमेश उपाध्याय ने कोर्ट को दिए गए बयान में बताया, “मैं पूरी तरह से निर्दोष हूँ, ATS पर केंद्र और राज्य की UPA सरकार द्वारा हिंदू आतंकवाद थ्योरी को सही ठहराने के लिए राजनीतिक दबाव डाला गया था, इसके कारण मुंबई ATS ने मुझे मालेगाँव धमाका मामले में झूठा फँसाया था।”

उन्होंने कोर्ट को बताया है कि ATS ने 24 अक्टूबर, 2008 को उन्हें उनके घर से ATS ने उठा लिया था। उन्होंने बताया कि उनके घर की तलाशी भी ली गई थी लेकिन वहाँ कुछ नहीं मिला। उन्होंने आरोप लगाया कि ATS मुंबई ने उन्हें उठाने के बाद बुरी तरीके से मारा, उनको यातनाएँ दी और उन पर दबाव डाला कि वह मालेगाँव धमाका मामले में जबरदस्ती गुनाह कबूल करें।

मेजर रमेश उपाध्याय को गिरफ्तार करने को लेकर ATS ने आरोप लगाया था कि उन्होंने पूछताछ में शामिल होने को लेकर दी गई नोटिस का जवाब नहीं दिया था। इसको लेकर मेजर उपाध्याय ने कहा है कि उनको नोटिस भेजे जाने की बात झूठी है। मेजर ने कहा है कि ATS ने उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखा।

मेजर उपाध्याय ने ATS द्वारा दी गई प्रताड़ना को लेकर बताया, “मुंबई ATS की अवैध हिरासत में मुझे ना केवल शारीरिक यातना दी गई और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया, बल्कि मेरे मकान मालिक को धमकी देकर मुझ पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी डाला गया। उससे कहा गया कि वह आतंकवादी को शरण क्यों दे रहा है। इसके बाद मेरे परिवार और सामान को सड़क पर फेंक दिया गया।”

मेजर उपाध्याय ने बताया, ” मुझे धमकी दी गई कि मेरी पत्नी को नंगा कर घुमाया जाएगा, मेर बेटी के साथ बलात्कार किया जाएगा, बेटे का जबड़ा तोड़ दिया जाएगा। इसके बाद उन लोगों ने इस धमकी को अंजाम देने के लिए मेरी विवाहित बेटियों के घरों पर छापा मारना चालू कर दिया। इससे उन्हें और उनके ससुराल वालों को अपमानित किया गया। मुझ पर लगातार उस अपराध को कबूल करने के लिए मनोवैज्ञानिक दबाव डालना जो मैंने नहीं किया था।”

मालेगाँव मामले में सच्चाई बाहर लाने के लिए ATS ने मेजर उपाध्याय का पॉलीग्राफ और नारको टेस्ट भी करवाया गया था। मेजर उपाध्याय ने आरोप लगाया कि जब इन टेस्ट में उन्हें क्लीन चिट मिल गई तो इसकी रिपोर्ट ATS ने दबा दी और कोर्ट के सामने प्रस्तुत नहीं की। मेजर उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने बाद में यह रिपोर्ट कोर्ट के सामने रखीं।

उन्होंने कोर्ट को यह भी बताया कि पुलिस कमिश्नर सुखविंदर सिंह ने तमाम सादे कागजों पर दस्तखत करवाए और उनको एक बयान पढवा कर कैमरे पर रिकॉर्ड किया। मेजर ने आरोप लगाया कि सुखविंदर सिंह ने पहले उन्हें छोड़े जाने और उनके खिलाफ सबूत ना होने की बात कही और बाद में उन पर MCOCA लगाने की बात की।

मेजर उपाध्याय ने कहा है कि NIA चार्जशीट के कारण उन्हें काफी राहत मिली थी। उन्होंने कहा है कि उनके खिलाफ पेश किए गए सारे सबूत फर्जी हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि यह सारे फर्जी सबूत ATS ने बनाए थे ताकि उनके राजनीतिक मास्टरों के हित साधे जा सकें। उन्होंने कोर्ट से अपील की है कि उन लोगों के खिलाफ एक्शन लिया जाए जिन्होंने उन्हें प्रताड़ित किया।

गौरतलब है कि पहले मालेगाँव धमाका में मुकदमे का सामना करने वाले कर्नल पुरोहित ने भी ऐसे ही आरोप ATS पर लगाए थे। उन्होंने हाल ही में कोर्ट को दिए गए एक बयान में बताया था कि उनको लगातार इस बात के लिए मारापीटा जाता था कि वह RSS-VHP नेताओं का नाम लें। उन पर तत्कालीन भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ को भी इस मामले में फँसाने का दबाव भी डाला गया था। उनके साथ भी ATS ने बर्बरता की थी और उनका घुटना तोड़ दिया था।

जिस मालेगाँव धमाका मामले में मेजर उपाध्याय और कर्नल पुरोहित समेत कई हिन्दुओं को आरोपित बनाया गया था वह 29 सितम्बर, 2008 को महाराष्ट्र के मालेगाँव में हुआ था। इसमें 6 लोगों की मौत हुई थी और बड़ी संख्या में लोग घायल हुए थे। इस धमाके के बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने हिन्दू आतंकवाद की थ्योरी को हवा देना चालू किया था। इस मामले में साध्वी प्रज्ञा को भी आरोपित बनाया गया था और टॉर्चर किया गया था लेकिन उन्हें बाद में क्लीनचिट मिल गई थी।

110 दिन में 200 उड़ान, दिन में 4-4 बार लेता था फ्लाइट… हवाई जहाज से चुराता था गहने-पैसे, दिल्ली में खोल रखा है गेस्ट हाउस: जानिए कैसे पुलिस के चढ़ा हत्थे

दिल्ली पुलिस ने सोमवार (13 मई, 2024) को हवाई जहाज़ों में चोरी करने वाले एक चोर को गिरफ्तार किया है। चोर का नाम राजेश कपूर है जिसकी उम्र 40 साल है। राजेश पिछले 19 वर्षों से चोरी करता आ रहा था। वह पहले ट्रेनों में चोरी करता था। राजेश के निशाने पर खासतौर पर बुजुर्ग महिलाएँ हुआ करती थीं। वह बोर्डिंग के दौरान उनके हैंडबैग को चुराया करता था। राजेश के निशाने पर खासतौर पर बुजुर्ग महिलाएँ हुआ करती थीं। वह बोर्डिंग के दौरान उनके हैंडबैग को चुराया करता था। आरोपित चोरी के इरादे से लगभग 200 उड़ानों में यात्रा कर चुका है। वो पहाड़गंज में ‘रिक्की डीलक्स’ नाम से गेस्ट हाउस भी चलाता है।

राजेश कपूर की गिरफ्तारी की पुष्टि दिल्ली पुलिस की DCP IGI उषा रंगनानी ने की है। सोमवार को उन्होंने इस बाबत एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने बताया कि पिछले 3 माह के अंदर इंदिरा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से चोरी के 3 मामले आए। इसमें से पहला केस 2 फरवरी 2024 का था। तब अमृतसर से दिल्ली की यात्रा के दौरान एक यात्री के 20 लाख के आभूषण चोरी हो गए थे। एक अन्य केस में 11 अप्रैल को हैदराबाद से दिल्ली जा रही फ्लाइट में एक यात्री का 7 लाख रुपए मूल्य का आभूषण चोरी हो गया था।

इन केसों का खुलासा करने के लिए दिल्ली पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया। हवाई अड्डे की CCTV और जिन विमानों में चोरियाँ हुई थीं उनके यात्रियों की जानकारियाँ जुटाई गईं। इनमें एक यात्री को चिह्नित किया गया जो दोनों उड़ानों में मौजूद था। संदिग्ध का नाम राजेश कपूर निकला। जब एयरलाइंस से राजेश का नंबर निकाला गया तो वह फर्जी मिला। पुलिस ने प्रयास कर के राजेश कपूर का असली नंबर खोज निकाला। आरोपित को करोल बाग़ इलाके से हिरासत में ले लिया गया जहाँ वो चोरी के आभूषण किसी शरद जैन नाम के व्यक्ति को बेचने आया था।

पुलिस की पूछताछ में राजेश कपूर ने अपना गुनाह कबूल कर लिया। राजेश ने कुल 5 ऐसे मामले बताए जहाँ उसने उड़ानों में चोरियाँ की थीं। इन चोरियों से मिले पैसे राजेश ने ऑनलाइन और ऑफ़लाइन जुआ खेला। पुलिस ने और खोजबीन की तो राजेश कुल 11 अपराधों में शामिल निकला। ये अपराध चोरियों और जुआ खेलने के थे। चोरी करने के लिए राजेश लगभग 200 विमानों में यात्रा कर चुका था। वह कुल 110 दिनों तक हवाई जहाज में ही रहा था। राजेश के निशाने पर एयर इंडिया और विस्तारा की जहाजें हुआ करती थीं।

अब तक हुई जाँच में यह सामने आया है कि राजेश पहले ट्रेनों में चोरियाँ करता था। साल 2005 से उसने चोरी करना शुरू किया। कुछ दिनों बाद राजेश ने हवाई जहाज़ों में चोरियाँ करना शुरू कर दिया। चोरी करने के लिए वह उन बुजुर्ग महिलाओं को चिह्नित करता था जो विदेश की यात्रा पर निकली होती थीं। यात्रा के दौरान राजेश अपनी सीट बार-बार बदलता रहता था। उड़ान के दौरान राजेश ओवरहेड केबिनों में रखे बैग को टटोलता था और उसमें से कीमती सामान निकाल लिया करता था।

पुलिस की जाँच में यह बात भी निकल कर सामने आई है कि राजेश अपने मृत भाई ऋषि की ID पर कई यात्राएँ कर चुका है। वह दिल्ली के पहाड़गंज इलाके में रहता है। चोरी करने के बाद राजेश अपने फोन को बंद कर दिया करता था। उसका फोन काफी कम समय के लिए ऑन होता था। राजेश की गिरफ्तारी उसके घर से हुई है। उसके पास से चोरी किए गए सोने-चाँदी के आभूषण और कई अन्य कीमती सामन बरामद हुए हैं। पुलिस ने राजेश से चोरी का आभूषण खरीदने वाले 46 वर्षीय शरद जैन को भी गिरफ्तार कर लिया है। मामले में पुलिस की जाँच अभी जारी है।

पतंजलि को ‘भ्रामक विज्ञापनों’ पर सुप्रीम कोर्ट में खींचा, अब खुद के अध्यक्ष का बयान ही बना IMA के गले की फाँस: जानिए क्यों डॉक्टर अशोकन की माफी नहीं हुई कबूल

भ्रामक विज्ञापनों के नाम पर पतंजलि को सुप्रीम कोर्ट तक लेकर जाने वाला इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) अपने ही बिछाए जाल में फँस गया है। 14 मई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने IMA अध्यक्ष द्वारा मीडिया में की गई टिप्पणी पर फटार लगाई और IMA अध्यक्ष डॉ आरवी अशोकन द्वारा माँगी गई माफी पर असंतोष जताया।

आईएमए के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का ऐसा रवैया तब देखने को मिला है जब खुद डॉ आरवी अशोकन कोर्ट के आगे पेश हुए थे। उन्होंने जस्टिस हिमा कोहली और असहानुद्दीन अमानुल्लाह की बेंच के आगे बिन कोई शर्त माफी भी माँगी लेकिन जज फिर भी IMA अध्यक्ष से नाराज रहे।

बता दें कि पतंजलि का विवाद सुप्रीम कोर्ट में चलने के दौरान IMA चीफ ने मीडिया में एक विवादित बयान दिया था और दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट उन पर उंगली उठाने लगा है। बाद में इसी इंटरव्यू के बारे में पतंजलि के वकील मुकुल रोहतगी ने जजों को बताया जिसके बारे में जानकर कोर्ट IMA पर नाराज हुआ और मानहानि केस तक की बात कही। इसके अलावा उन्होंने 23 अप्रैल, 2024 को भी संस्था से कहा था कि वो पहले अपने घर को व्यवस्थित करे। आधुनिक दवाओं को लेकर अनैतिक कारोबार और अस्पतालों द्वारा महँगी और गैर-ज़रूरी दवाएँ लिखने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने आपत्ति जताई थी।

अब इसी मामले में आगे कोर्ट ने आईएमए चीफ से कहा- “डॉ अशोकन आपके अनुभव को देखते हुए हम आपसे जिम्मेदाराना रवैया चाहते थे, लेकिन आपने वही किया जो पतंजलि के संस्थापकों ने किया। आपने जाकर मीडिया में टिप्पणी की। ये बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। इस केस को भी वैसे ही ट्रीट किया जाएगा जैसे कि पतंजलि के साथ किया गया था।”

कोर्ट ने कहा, “आप IMA के अध्यक्ष हैं। IMA के 3 लाख 50 हजार डॉक्टर सदस्य हैं। किस तरह की आप लोगों पर अपनी छाप छोड़ना चाहते हैं। आपने पब्लिक में माफी नामी क्यों नही माँगी। आपने पेपर में माफीनामे क्यों नही छपवाया। आप एक जिम्मेदआर व्यक्ति हैं। आपको जवाब देना होगा। आपने 2 हफ़्ते में कुछ नहीं किया। आपने जो इंटरव्यू दिया उसके बाद क्या किया। हम आपसे जानना चाहते हैं। आपने जो लंबित मामले में कहा, हमें बहुत चौंकाने वाला लगा, जबकि आप खुद केस में एक पार्टी थे। आप देश के नागरिक हैं क्या देश में जज फैसले के लिए क्रिटिसिज्म नहीं सहते, लेकिन हम कुछ नही कहते क्योंकि हमारे में अहंकार नहीं है।”

जस्टिस कोहली ने IMA अध्यक्ष से कहा- “आपकी माफी के लिए हमें सिर्फ वही कहना है जो हमने पतंजलि के लिए कहा था। यह मामला कोर्ट में हैं, जिसमें आप पार्टी हैं। आपके वकील टिप्पणियों को हटाने के लिए कह सकते थे, लेकिन आप प्रेस के पास चले गए। हम बिलकुल इससे खुश नहीं हैं। हम आपको इतनी आसानी से माफ नहीं कर सकते हैं। आप सोचिए तो आप दूसरों के लिए कैसा उदाहरण तैयार कर रहे हैं।”

कोर्ट ने IMA की ओर से पेश वकील वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया से अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा हम मुवक्किल द्वारा माँगी गई माफी को स्वीकार करने के इच्छुक नहीं हैं। इस पर पटवालिया ने कोर्ट से एक और मौका माँगा। साथ ही कहा कि उन्होंने कुछ गलती की है, ऐसा करना उनकी नादानी थी। डॉ अशोकन ऐसी स्थिति में पड़ गए थे कि उन्हें वो बयान देना पड़ा। वहीं जस्टिस ने उनकी बात को यह कहकर खारिज कर दिया- “आपके कहने का क्या मतलब है समाचार एजेंसी ने ऐसा कहने के लिए जाल बिछाया था।” इसके बाद टीआरपी का मुद्दा छेड़ने पर इस पहलू पर सहमति बनी।

उल्लेखनीय है कि यह सारा मामला पिछले वर्ष नवंबर में शुरू हुआ था। उसी समय सुप्रीम कोर्ट ने आधुनिक चिकित्सा पर सवाल उठाने के लिए रामदेव और उनकी कंपनी को कड़ी चेतावनी जारी की थी। इसके बाद इस मामले में सुनवाई चली। पतंजलि के संस्थापक ने इस संबंध में बिन किसी शर्त माफी माँगी। 14 प्रोडक्ट जिनपर बैन लगा था उन्हें बाजार से वापस मँगाया।

अब इस समय में भ्रामक विज्ञापन केस में योग गुरु रामदेव, उनके सहयोगी आचार्य बालकृष्ण और पतंजलि आयुर्वेद पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। दोनों को अगले आदेश तक कोर्ट में पेश होने से छूट भी दे दी गई है। वहीं IMA पर सख्ती दिखाई गई है।

क्या ‘सालार के बेटे’ के खिलाफ चुनाव भी नहीं लड़ सकती एक हिंदू बेटी? हैदराबाद में AIMIM समर्थक भीड़ ने माधवी लता को दी माँ की गाली, देखती रही पुलिस

लोकसभा चुनाव 2024 के चौथे चरण में सोमवार (13 मई, 2024) को 96 सीटों पर मतदान हुआ, जिनमें से एक हैदराबाद भी था। तेलंगाना की राजधानी को AIMIM का गढ़ माना जाता है, जहा पिछले 40 वर्षों से ओवैसी परिवार का कब्ज़ा है। इस बार असदुद्दीन ओवैसी के खिलाफ भाजपा ने कोम्पेल्ला माधवी लता को उतारा है। उनका आरोप है कि बड़ी मात्रा में फर्जी मतदान हुआ है और पुलिस ने बुर्कानशीं महिलाओं की फोटो उनके पहचान-पत्र से मिलान नहीं किया।

अब एक वीडियो सामने आया है, जिसमें AIMIM समर्थक भीड़ जुटा कर माधवी लता को गाली देते हुए दिख रहे हैं। एक शख्स ‘चल निकल, माँ की $# तेरी’ चीख रहा है। उक्त शख्स ने नीले रंग की शर्ट पहन रखी है और ब्लैक गॉगल्स लगा रखा है। इस दौरान माधवी लता वहाँ शांत खड़ी रहीं और उन्होंने पलट कर जवाब भी नहीं दिया। बड़ी बात ये है कि ये सब हैदराबाद पुलिस के सामने हुआ। पुलिसकर्मियों ने गंदी-गंदी गालियाँ देने वाले उस व्यक्ति को गिरफ्तार भी नहीं किया।

वीडियो में देखा जा सकता है कि पुलिस उसे समझा रही है और पीछे जाने को कह रही है, लेकिन वो लगातार माँ की गालियाँ देते हुए चीख रहा है। माधवी लता उस दौरान फोन पर किसी से बात कर रही थीं, उन्हें उनके सुरक्षाकर्मियों ने अपने घेरे में ले लिया। वहाँ इकट्ठी भीड़ उन्हें वहाँ से निकलने को कह रही थी। पुलिस के हस्तक्षेप के बावजूद भीड़ वहाँ से तितर-बितर नहीं हुई। बता दें कि पोलिंग बूथ पर बुर्कानशीं महिलाओं का चेहरा उनके पहचान-पत्र से मिलाने को लेकर उनके खिलाफ FIR दर्ज की जा चुकी है।

माधवी लता ने इस वीडियो पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि क्या ऐसी गालियाँ दिए जाने से वो डर जाएँगी? उन्होंने कहा कि वो भी इस पाता बस्ती की गलियों में खेलते हुए बड़ी हुई हैं। भाजपा उम्मीदवार ने कहा कि एक महिला वहाँ लड़ने आ गई और जनता को भी पसंद आ गई, इससे विरोधी डरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि विपक्ष का हर चमचा रो रहा है। माधवी लता अपने हिन्दुवत्ववादी चेहरे के लिए जानी जाती हैं और राष्ट्रीय मीडिया में भी उन्हें अच्छी कवरेज मिली है।

बता दें कि बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी ने अपने भाई अकबरुद्दीन को ‘सालार का बेटा’ बताया था। वो अकबरुद्दीन ही है, जिसने 15 मिनट के लिए पुलिस हटा देने के बाद अंजाम देखने की धमकी हिन्दुओं को दी थी। बता दें कि ओवैसी भाइयों के अब्बा सुल्तान सलाहुद्दीन को ‘सालार-ए-मिल्लत’ कहा जाता था, इसका अर्थ है – जननेता। सलाहुद्दीन के अब्बा अब्दुल वहीद ने AIMIM की स्थापना की थी। सलाहुद्दीन ने 4 दशक के अपने राजनीतिक करियर में अखंड आंध्र प्रदेश के मुस्लिम वोटरों को अपने साथ रखा, अपने मनमुताबिक पाले में उन्हें झुकाया।

हनी ट्रैप, सेक्स टेप, पैसा… चीन ने खोल लिए सारे घोड़े फिर भी नेपाल में उखड़ गए पैर: भारत को घेरने के लिए लेकर आया BRI, वह 7 साल से अटका पड़ा

भारत को लगातार पड़ोसी देशों के बहाने घेरने का प्रयास करने वाला चीन, नेपाल में अपना एजेंडा पूरा नहीं कर पा रहा है। नेपाल के भीतर चीन का बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) रफ़्तार नहीं पकड़ पा रहा है। नेपाल और भारत के संबंध इस मामले में सबसे बड़ी रुकावट हैं। इसके अलावा चीन का विदेशों में दिए जाने वाले कर्जे के प्रति रवैया भी इसकी चाल धीमी कर रहा है।

नेपाल, चीन के इस महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में 7 साल पहले ही शामिल हो चुका है लेकिन इस पर असल प्रगति अभी नहीं हो पाई है। दोनों देशों के बीच कई मामलों पर तल्खी भी सामने आ चुकी है। चीन ने नेपाल में बनाए गए कुछ प्रोजेक्ट को BRI का नाम दिया है, इसे नेपाल ने नकार दिया है।

क्या है BRI, नेपाल में क्यों घुसना चाहता है चीन?

BRI चीन का एक बड़ा प्रोजेक्ट है। चीन इसके अंतर्गत ऐसे देशों में रोड, रेलवे, एयरपोर्ट और समुद्री बंदरगाहों का निर्माण या विकास करता है, जो कि काफी गरीब हैं और खुद यह करने में सक्षम नहीं है। BRI को चीन नए रेशम मार्ग की संज्ञा देता है। चीन पाकिस्तान और बांग्लादेश को पहले ही BRI का सदस्य बना चुका है। 2017 में नेपाल भी चीन के BRI का सदस्य बन गया था। उस समय नेपाल की सरकारों ने चीन से नजदीकी बढ़ाना चालू की थीं।

हालाँकि, इस समझौते में आने के 7 सालों के बाद भी नेपाल में चीन का यह प्रोजेक्ट रफ़्तार नहीं पकड़ पाया है। चीन, नेपाल में भारत का प्रभाव कम करने के कारण घुसना चाहता है। नेपाल, पारंपरिक रूप से भारत का सहयोगी रहा है। नेपाल अपनी लगभग 70% जरूरतों के लिए भारत पर निर्भर है। उसका विदेशों से होने वाला कारोबार भी भारत के जरिए होता है। खाद्य सामग्रियों से लेकर ईंधन तक भारत नेपाल को देता है। आर्थिक पहलू के अलावा भारत का नेपाल के साथ सांस्कृतिक संबंध भी है।

चीन भारत और नेपाल के इसी सहयोग को खत्म करना चाहता है। चीन नेपाल में भारत का प्रभाव कम करके भारत को दूसरी तरफ से घेरना चाहता है। चीन, नेपाल को इन्फ्रा प्रोजेक्ट के सपने दिखा रहा है ताकि वह उसे कर्ज दे सके और जब नेपाल यह कर्जे वापस करने में असफल हो तब वह नेपाल में अपने लिए रणनीतिक बेस तैयार कर सके। हालाँकि, अभी तक उसे इस काम में सफलता नहीं मिली है। उसका BRI नेपाल में आकार नहीं ले पा रहा।

समझौता अब तक क्यों नहीं हो पाया फाइनल?

नेपाल और चीन के बीच BRI के लिए समझौता 2017 में ही हो चुका है लेकिन इस पार काम कुछ चिंताओं के चलते नहीं बढ़ पा रहा। दरअसल, नेपाल ने अभी तक BRI के तहत विकसित किए जाने वाले कोई भी प्रोजेक्ट नहीं चुने हैं। BRI ,किस तरीके से नेपाल में लागू किया जाए इसको लेकर चीन और नेपाल के बीच सहमति नहीं बन पाई है। नेपाल का कहना है कि वह अपने देश में बनने वाले BRI प्रोजेक्ट के लिए 1% से अधिक के ब्याज पर कर्ज नहीं ले सकता।

नेपाल ने चीन से यह भी कहा है कि वह BRI प्रोजेक्ट के लिए कर्जे की बजाय अनुदान लेना ज्यादा पसंद करेगा। नेपाल का कहना है कि इससे उनकी अर्थव्यवस्था पर दबाव पड़ेगा। इसके अलावा नेपाल को BRI लागू करने वाले दस्तावेज के कुछ उपबंधों से समस्या है। इसीलिए इस पर हस्ताक्षर नहीं हो रहे। इसके अलावा नेपाल ने चीन को समझौते के तहत विकसित किए जाने वाले प्रोजेक्ट की लिस्ट भी पूर्व में सौंपी थी, इसमें 30 से अधिक प्रोजेक्ट के नाम थे। बाद में चीन ने काट कर इन प्रोजेक्ट की सँख्या 9 कर चुका है।

BRI को लेकर जहाँ पिछले 7 सालों में कोई प्रगति नहीं हो पाई है, वहीं आगे भी इसके कोई आसार नहीं दिखते। इसके पीछे चीन की नीतियाँ और उसके BRI की छवि एक बड़ा कारण है। नेपाल की आंतरिक राजनीति भी इसमें एक बड़ा कारण है। नेपाल की पार्टियों ने कहा है कि चीन के BRI को लागू करने से पहले सबके बीच सहमति होनी चाहिए।

नेपाल में दखल के लिए महिला का राजदूत का चीन ने किया था इस्तेमाल

चीन, नेपाल में अपने हित साधने के लिए सभी प्रकार के हथकंडे अपनाता आया है। 2020 में चीन की नेपाल में राजदूत होऊ यांगी नेपाल के तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को हनी ट्रैप में फँसाने की खबरें सामने आई थी।

कहा गया था कि यांकी कहने पर ही ओली ने एक नक्शा पास करवाया था, जिसमें उत्तराखंड के तीन जगह कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख को अपना हिस्सा बताया था। इसके अलावा नेपाल के कुछ इलाकों पर चीन द्वारा अतिक्रमण करने की भी खबरें आई थी। कहा गया था कि ‘सेक्स टेप‘ की वजह से ओली इस अतिक्रमण को लेकर चुप हैं। बताया गया था कि होऊ यांगी को नेपाली सेना के प्रमुख जनरल पूर्णचंद्र थापा का दफ्तर हो या पीएम ओली का कार्यालय, चीनी राजदूत नेपाल के किसी भी क्षेत्र में बेरोकटोक आ-जा सकती थी।

नेपाल-चीन में होती रही है खींचतान

नेपाल और चीन में बीते कुछ समय में खींचतान भी होती आई है। नेपाल ने चीन से सहायता लेकर पोखरा एयरपोर्ट बनाया था। इसके लिए फंडिंग चीन की बैंकों ने की थी जबकि इसका निर्माण भी चीन की ही कम्पनियों ने किया था। नेपाल का कहना था कि यह प्रोजेक्ट BRI के तहत नहीं बना है और उससे अलग है। इसके उलट जब इसका उद्घाटन अक्टूबर 2023 में हुआ तब चीन ने इसे BRI के तहत बना हुआ बताया। नेपाल ने इससे इनकार किया। इसको लेकर नेपाल के भीतर चिंताएँ भी जाहिर की गईं।

भारत को घेरने की रणनीति हुई फेल

नेपाल के जरिए भारत को घेरने की रणनीति फेल हो गई है। भारत और नेपाल संबंधों में बीच में कुछ तल्खी आ गई थी जिसका चीन फायदा उठाना चाहता था। दोनों देशों पर BRI के लिए समझौता भी इसी दौरान हुआ था। हालाँकि, भारत से नेपाल के संबंध फिर से प्रगाढ़ हो गए। भारत वर्तमान में नेपाल के कई हाइड्रो और इन्फ्रा प्रोजेक्ट में भी मदद कर रहा है। बीते वर्ष 2023 में नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल प्रचंड भारत के दौरे पर आए थे।

इस दौरे में भारत ने नेपाल से 10,000 मेगावाट बिजली खरीदने का समझौता किया था। भारत ने इस दौरान नेपाल के कई बिजली प्रोजेक्ट बनाने को लेकर भी सहमति दी थी। इसके अलावा रेलवे लाइन और माल की आवाजाही को लेकर भी दोनों देशों में समझौते हुए थे। ऐसे में चीन की दाल नेपाल में गलना फिर से बंद हो गई है।