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मिडिल क्लास का चेहरा BJP में! विकास के महायज्ञ में शामिल होने आईं ‘मोनिशा’ तो लोगों को याद आई नसीरुद्दीन शाह की बीवी, बोलीं ‘अनुपमा’ – देशसेवा में आगे बढ़ूँगी

लोकप्रिय टीवी अभिनेत्री रुपाली गांगुली भाजपा में शामिल हो गई हैं। वो ‘साराभाई Vs साराभाई’ (2004-06) और में मोनिशा और ‘अनुपमा’ में टाइटल किरदार निभाने के लिए जानी जाती हैं। सीरियल देखने वाली महिलाओं के बीच उनका क्रेज है। उन्होंने बुधवार (1 मई, 2024) को दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में तीसरे चरण के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा ज्वाइन की। इसके बाद उन्होंने पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष JP नड्डा से भी मुलाकात की।

रुपाली गांगुली ने कहा कि एक नागरिक के नाते ही सही लेकिन हम सबको इसमें सहभागिता देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि महाकाल और माता रानी का आशीर्वाद है कि वो अपनी कला के माध्यम से कई लोगों से मिलती हैं, बातचीत करती हैं, जब वो विकास का महायज्ञ देखती हैं तो उन्हें लगता है कि क्यों न वो भी इसमें सहभागी बनें। उन्होंने बताया कि उन्हें विनोद तावड़े (भाजपा के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी) का आशीर्वाद, अनिल बलूनी (भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया इंचार्ज) का मार्गदर्शन और संजय मयूख (भाजपा के नेशनल मीडिया को-हेड) की सहायता मिली।

रुपाली गांगुली ने कहा कि वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बताए रास्ते पर चलेंगी और किसी तरह देशसेवा में आगे बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में वो आगे बढ़ना चाहती हैं ताकि भाजपा के उन नेताओं को भी उन पर गर्व हो जो उन्हें पार्टी में लेकर आए हैं। रुपाली गांगुली ने इस दौरान लोगों का साथ माँगते हुए कहा कि वो जो भी करें अच्छा करें यही कामना है, अगर गलत करने पर उन्हें बताया जाए, सही रास्ता दिखाया जाए।

दिल्ली भाजपा महिला मोर्चा की स्टेट जनरल सेक्ट्री वैशाली पोद्दार ने रुपाली गांगुली का स्वागत करते हुए लिखा, “मिडिल क्लास की फेवरेट एक्ट्रेस मिडिल क्लास की फेवरेट पार्टी में आ गईं।” वहीं इस दौरान उनके किरदारों के नाम ‘मोनिशा’ और ‘अनुपमा’ भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड होने लगे। उनके सीरियल वाले डायलॉग्स के कारण ‘मिडल क्लास’ भी ट्रेंड होने लगा। बता दें कि ‘साराभाई Vs साराभाई’ में उनके किरदार को मिडल क्लास का चेहरा माना जाता था।

वहीं कुछ लोगों ने इस दौरान इस सीरियल में उनकी सास का रोल करने वाली रत्ना पाठक शाह पर भी तंज कसा। लोगों ने लिखा कि ‘मोनिशा’ को भाजपा में आना ही था, क्योंकि ‘मम्मी जी’ तो कट्टर कॉन्ग्रेसी हैं। बता दें कि नसीरुद्दीन शाह की पत्नी रत्ना पाठक शाह अक्सर अपने शौहर की तरह ही भाजपा के खिलाफ बयान देती रहती हैं। 47 वर्षीय रुपाली गांगुली का जन्म महाराष्ट्र के एक बंगाली हिन्दू परिवार हुआ हुआ था। उन्होंने होटल मैनेजमेंट और थिएटर की पढ़ाई कर रखी है।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी से खींचकर बाहर निकाले गए फिलीस्तीन समर्थक, 100 से ज्यादा गिरफ्तार: कब्जा करके कर रहे थे तोड़फोड़, लगा रहे थे आजादी के नारे

अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी को फिलीस्तीन समर्थकों से खाली करा लिया गया है। मंगलवार (30 अप्रैल 2024) रात को 100 से अधिक पुलिसकर्मी रैंप लगाकर यूनिवर्सिटी के परिसर में दाखिल हुए थे। उसके बाद गिरफ्तारियाँ हुईं और परिसर खाली कराया गया। परिसर हैमिल्टन हॉल की बिल्डिंग का था जहाँ इजरायली विरोधी प्रदर्शनकारियों ने सोमवार देर रात कब्जा किया था।

रिपोर्ट्स बताती हैं कि इन लोगों ने बिल्डिंग के गेट को यूनिवर्सिटी के फर्नीचर और वेंडिंग मशीन के जरिए बंद कर दिया था। वहीं खिड़कियों पर अखबार भी चिपका दिए थे ताकि अंदर क्या हो रहा इसके बारे में कुछ पता न चले। इसके बाद इन लोगों ने खिड़की से फिलीस्तीन का झंडा फहराया और वहाँ आजादी की नारेबाजी की थी।

इसके अलावा विश्वविद्यालय के लोगों ने ये भी जानकारी दी कि प्रदर्शनकारियों ने यूनिवर्सिटी में तोड़फोड़ करने का भी काम किया था जिसके बाद उन्हें परेशान होकर पुलिस बुलानी पड़ी। पुलिस ने इसके बाद बड़ी मशक्कत से सिटी कॉलेज से करीब 100 प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया।

वहीं यूनिवर्सिटी ने पुलिस से कहा कि वो 17 मई तक स्थिति पर ध्यान बनाए रखें। न्यूयॉर्क पुलिस विभाग ने खुद इस संबंध में जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया है कि वे अब भी शहर के दूसरे इलाकों में प्रदर्शनकारियों को पकड़ने के लिए छानबीन कर रहे हैं। यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता ने बताया कि जिन लोगों ने हैमिल्टन हॉल को कब्जे में लिया था, वो वहाँ के छात्र नहीं थे इसलिए पुलिस बुलाई गई।

बताया जा रहा है कि कोलंबिया यूनिवर्सिटी में यह दूसरी बार है किसी प्रदर्शन की वजह से पुलिस दाखिल हुई। इससे पहले 30 अप्रैल 1968 को भी वियतनाम जंग के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे करीब 700 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद यह मंगलवार को हुआ जब कैंपस में पुलिस के दाख़िल होने और गिरफ़्तारी किए जाने से क़रीब तीन घंटे तक अफ़रा-तफ़री का माहौल रहा। अभी भी पुलिस यूनिवर्सिटी के बाहर तैनात है।

बेटे को लेकर प्रेमी के साथ फरार हो गई सबीना खातून, शौहर से कहती थी- तुम बूढ़े हो गए… ‘भाई’ बनकर घर आता था आशिक

बिहार के मुजफ्फरपुर में निकाह के दो साल बाद एक निकाहशुदा महिला अपने शौहर को छोड़कर प्रेमी के साथ फरार हो गई। इस दौरान वह अपने साथ नकदी और गहने के साथ-साथ अपने 18 महीने के बेटे को भी ले गई। महिला अपने शौहर को बूढ़ा होने का अक्सर ताना मारती थी। वह कहती थी कि उसका शौहर बूढ़ा है। शिकायत मिलने के बाद पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

यह मामला मुजफ्फरपुर शहर के ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र का है। बीवी के प्रेमी के साथ भाग जाने पर उसके शौहर ने ब्रह्मपुरा थाने में मामला दर्ज कराया है। जानकारी के अनुसार, गुड्डू और सबीना खातून का निकाह 31 जनवरी 2022 को परिजनों की सहमति से हुआ था। कुछ समय पहले दोनों को एक बेटा भी हुआ था। गुड्डू घर से लहठी कारोबार करता था।

वहीं, गुड्डू की बीवी सबीना उसे बाहर जाकर काम करने के लिए बोलती थी। हालाँकि, गुड्डू उसकी बातों पर ध्यान नहीं देता था। गुड्डू ने बताया कि बीवी के कहने पर उसने अपने भाई की दुकान पर रहकर काम करना शुरू कर दिया। इसी बीच 25 अप्रैल 2024 को गुड्डू काम करने के लिए घर से निकाल गया। दोपहर को उसने एक लड़के को किसी काम से अपने घर भेजा।

जब लड़का गुड्डू के घर पहुँचा तो देखा घर का दरवाजा बंद है। इसके बाद लड़के ने गुड्डू को फोन करके इसकी जानकारी दी। जब गुड्डू घर आया तो उसे पता चला कि उसकी बीवी एक बाइक सवार युवक के साथ चली गई। वह अपने साथ बेटे को भी ले गई है। इसके बाद गुड्डू ने अपने ससुराल वालों से इस संबंध में बात की। ससुराल वालों ने बताया कि वह घर नहीं आई है।

इसके बाद उसने आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी। इसमें वह एक युवक से बाइक पर सवार होकर जा रही है। गुड्डू ने इस युवक के बारे में पता किया तो पता चला कि उसकी बीवी का युवक के साथ उसका प्रेम संबंध चल रहा था। उसने युवक को अपने साले का दोस्त बताया है। इसके बाद गुड्डू ने पुलिस को मामले की जानकारी दी।

गुड्डू ने बताया कि निकाह के बाद से सबीना उसे बूढ़ा कहकर ताना मारती रहती थी। उसके कहने पर उसने अपने भाई की दुकान पर काम शुरू कर दिया। 25 अप्रैल को वह घर पर सब्जी और अन्य सामान लेकर आया था। उसे खाना बनाने के लिए कहा था, लेकिन उसने खाना नहीं बनाया। इसके बाद गुड्डू काम पर चला गया।

उसने बताया कि लड़के के यह बताने पर कि घर पर ताला लगा हुआ है, वह अपने घर आया। उसने ताला तोड़कर घर देखा तो सारा सामान बिखरा हुआ था। उसने बताया कि घर के कई कीमती सामान, लगभग डेढ़ लाख रुपए नकद और 3 लाख रुपए के गहने लेकर वह भाग गई है। उसका कहना है कि उसकी बीवी का वर्तमान लोकेशन दिल्ली आ रहा है।

गुड्डू ने बताया, “मुझे लोगों से जानकारी मिली कि मेरी अनुपस्थिति में लगभग 3 महीने से वह दिन में घर पर आया करता था। मेरी बीवी ने अगल-बगल वाले लोगों को उसने उसे अपना भाई बता रखा था।” पीड़ित शौहर ने बताया कि निकाह के वक्त उसकी बीवी के भाई का यह दोस्त भी आया था और उसने निकाह में खाना भी खिलाया था।

‘TMC को वोट क्यों देना? BJP को वोट करना बेहतर’: कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का वीडियो वायरल, टीएमसी ने बताया भाजपा का ‘स्टार प्रचारक’

वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता अधीर रंजन चौधरी ने बुधवार (01 मई 2024) को पश्चिम बंगाल के बेरहामपुर में एक राजनीतिक रैली में बीजेपी के लिए वोटिंग की अपील कर दी। वायरल वीडियो में अधीर रंजन चौधरी वीडियो में कहते दिख रहे हैं, ‘टीएमसी को वोट देने के बजाय बीजेपी को वोट देना चाहिए।”

पश्चिम बंगाल के बहरामपुर लोकसभा सीट से पाँच बार के लोकसभा सांसद अधीर रंजन चौधरी ममता बनर्जी के तीखे आलोचकों में से एक हैं। वो बहरामपुर में लोकसभा चुनाव के लिए प्रचार करते समय मंच पर थे, तभी उन्होंने बंगाली में कहा, “टीएमसी को वोट क्यों दें, बीजेपी को वोट देना बेहतर है।” अधीर रंजन चौधरी का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार पल्लवी घोष ने ये वीडियो एक्स पर शेयर करते हुए लिखा, “अधीर रंजन चौधरी बोल रहे हैं कि टीएमसी की जगह बीजेपी को वोट दें, ऐसे में इंडी अलायंस का क्या होगा?”

भले ही कॉन्ग्रेस और अन्य विपक्षी दल ‘INDI’ गठबंधन के बैनर तले “एकता” का दावा कर रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्थिति उस बात से बहुत दूर है, जिस पर विपक्ष देश को विश्वास दिलाना चाहता है। पश्चिम बंगाल में कॉन्ग्रेस और टीएमसी के बीच टकराव चल रहा है, खासकर ममता बनर्जी द्वारा इंडी गठबंधन को मामूली 2 सीटों की पेशकश के बाद, जिससे दोनों राजनीतिक दलों के बीच बातचीत खत्म हो गई। इसके बाद टीएमसी ने पश्चिम बंगाल की सभी 42 लोकसभा सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा कर दी।

बता दें कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर चौधरी द्वारा लगातार विरोध ने इंडी गठबंधन से हटने के फैसले को महत्वपूर्ण माना जाता है। हालाँकि इस बीच टीएमसी नेता सुस्मिता देव ने अधीर रंजन चौधरी पर जोरदार हमला बोला है। उन्होंने अधीर रंजन चौधरी को बंगाल में ‘बीजेपी का स्टार कैंपेनर’ बताया है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी टीएमसी पहले इंडी गठबंधन में शामिल थी, लेकिन लोकसभा चुनाव के लिए सीटों के बँटवारे में वो इंडी गठबंधन से निकल गई। दोनों ही पक्ष एक-दूसरे को बीजेपी का सहयोगी बताते हैं। अधीर रंजन चौधरी के सामने टीएमसी ने पूर्व क्रिकेट यूसुफ पठान को मैदान में उतारा है। अधीर रंजन चौधरी बहरामपुर लोकसभा सीट से पाँच बार के सांसद हैं, लेकिन इस बार उनकी राह कठिन नजर आ रही है।

हिन्दू के हृदय से बची मुस्लिम लड़की की जान, इमाम बोला- ये काफिर का दिल, बुतों के सामने झुकता था…

चेन्नई के एक अस्पताल में पाकिस्तानी युवती आएशा को हिन्दू व्यक्ति का ह्रदय लगाए जाने पर एक इमाम ने कहा है कि यह हृदय काफिर है। इमाम ने बताया कि यह ह्रदय पहले बुतों के सामने झुकता था और अब अल्लाह के सामने झुकेगा। इमाम का दावा है कि गैर मुस्लिम व्यक्ति ने भले ही पाकिस्तानी लड़की को ह्रदय दिया हो लेकिन उसका यह काम नेक नहीं है क्योंकि वह मुसलमान नहीं है। यह बातें कहने वाला इमाम पाकिस्तानी है। इसका एक वीडियो वायरल हो रहा है।

इसमें इमाम से जब एक यूट्यूबर ने इस मामले के विषय में पूछा तो उसने कहा कि पाकिस्तानी लड़की को ह्रदय देने वाला शख्स हिन्दू होकर मरा इसलिए उसका कोई भी शबाब नहीं गिना जाएगा। शबाब (पुण्य) पाने के लिए आदमी को मुसलमान हो कर मरना जरुरी है। इमाम ने कहा कि मुसलमान बच्ची की हिम्मत ये है कि उसने बुतों के सामने झुकने वाले का दिल रब (अल्लाह) के सामने झुका दिया। इमाम ने एक कहानी सुना कर बताया कि मुसलमान होकर मरना जरूरी है।

इमाम ने बताया कि काफिरों का कोई भी काम आखिरत (दुनिया के खात्मे) के समय गिना नहीं जाएगा। इमाम ने मुस्लिमों के अंगदान को भी गलत बताया। इमाम ने कहा कि बगैर जरूरत के रक्तदान भी जायज नहीं है। इमाम ने कहा कि जब रोगी की जान पर बन आए तभी रक्तदान होना चाहिए, ऐसे नहीं। इमाम ने इस बात पर गुस्सा जताया कि पाकिस्तान पूरी तरीके से इस्लामी नहीं है। उसने कहा कि पाकिस्तान के केवल नाम में ही इस्लामी बचा है।

गौरतलब है कि पाकिस्तानी के कराची की रहने वाली एक 19 वर्षीय मुस्लिम युवती आएशा को चेन्नई में जनवरी, 2024 में एक 68 वर्षीय हिन्दू व्यक्ति का ह्रदय लगाया गया था। हिन्दू व्यक्ति को अपस्ताल ने ब्रेन डेड घोषित कर दिया था जिसके बाद उनका अंगदान किया गया। इस ऑपरेशन के लिए लगे पैसों को भी भारत में ही इकट्ठा किया गया था। इसमें लगभग ₹30 से ₹40 लाख का खर्च आया। आएशा को अब अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। बताया गया कि आएशा का इलाज इस अपस्ताल से 2019 से ही चल रहा था।

इजरायल की महिला को प्रताड़ित कर खदेड़ दिया, भारतीय पर्यटकों पर हमला… जानिए कैसे मालदीव इस्लामी कट्टरपंथ का बना गढ़, सुनामी का आतंकी संगठनों ने उठाया फायदा

मालदीव के हुलहुमले में में 2 भारतीयों और वहाँ के स्थानीय लोगों के बीच सोमवार (29 अप्रैल, 2024) को वाद-विवाद की खबर आई है। घटना माले से 7 किलोमीटर उत्तर-पूर्व स्थित शहर के सेन्ट्रल पार्क की है। रात के 9 बजे के करीब हुई इस घटना में घायल 2 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। स्थानीय पुलिस ने हमले के आरोप में मालदीव के एक स्थानीय शख्स को गिरफ्तार किया है। घायलों को इलाज के बाद अस्पताल से रिहा कर दिया गया है।

इस घटना के अगले ही दिन इजरायल की एक महिला के साथ मालदीव के स्थानीय लोगों ने बदतमीजी की और उसे पीट खदेड़ दिया। मालदीव मल्टी पार्टी डेमोक्रेडिट सिस्टम के संस्थापक माउद मोहम्मद ज़की ने गर्व जताते हुए इस वीडियो को शेयर किया। उन्होंने इजरायली महिला की ब्लर की हुई तस्वीर शेयर करते हुए लिखा कि इजरायल नरसंहार करता है जबकि वहाँ की एक महिला मालदीव के एक द्वीप में घुसने की कोशिश कर रही थी। उन्होंने लिखा कि उक्त महिला वहाँ से एयरपोर्ट के लिए निकल गई, क्योंकि उसे पता चल गया कि मानवता उनलोगों का स्वागत नहीं कर सकती।

मालदीव में हमास आतंकियों और फिलिस्तीन का समर्थन

हाल ही में हमास आतंकियों ने इजरायल में घुस कर वहाँ के 1100 लोगों का नरसंहार किया। इसके बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की। मुस्लिम बहुल मालदीव ने इस मामले में फिलिस्तीन का समर्थन किया। अक्टूबर 2023 में हुए इस हमले में बच्चों और पालतू पशुओं तक को नहीं छोड़ा गया, महिलाओं से रेप हुआ, उनका नग्न परेड निकाला गया। ईरान और अल्जीरिया जैसे देशों ने भी फिलिस्तीन का समर्थन किया। मालदीव ने गाजा पट्टी में हिंसा पर चिंता ज़ाहिर की।

मालदीव ने कहा कि 1967 के पहले की भौगोलिक स्थिति के हिसाब से द्विराष्ट्रीय व्यवस्था ही इस समस्या का समाधान है, जिसके तहत पूर्वी जेरुसलम को फिलिस्तीन की राजधानी बनाई जाए। इजरायल के पर्यटकों और वहाँ के उत्पादों पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया। वहाँ की संसद में प्रस्ताव पारित कर ये नियम बनाया गया। 14 अक्टूबर, 2023 को विल्लिंगिली के सांसद सऊद हुसैन ये प्रस्ताव लेकर आए, जिसे 41 सांसदों का समर्थन मिला।

मालदीव ने आरोप लगाया कि वेस्ट बैंक और गाजा पट्टी में इजरायली सेना अत्याचार कर रही है, साथ ही इसकी निंदा भी की। अधिकतर सांसदों ने इजरायल का पासपोर्ट रखने वालों की मुल्क में एंट्री बैन करने को कहा। इजरायल से आने वाली वस्तुओं पर प्रतिबंध लगाने को कहा गया, सरकार को सलाह दी गई कि वो इजरायल से कूटनीतिक संबंध तोड़ दे। विश्लेषकों का मानना है कि मालदीव इस्लामी कट्टरपंथी गतिविधियों का गढ़ बन गया है, न सिर्फ ISIS बल्कि जैश-ए-मुहम्मद और लश्कर-ए-तैय्यबा ने भी यहाँ ठिकाना बना रखा है

पत्रकार गौरव सावंत ने कहा कि इजरायल की उक्त महिला को खुद को भाग्यशाली मानना चाहिए, वो वहाँ से जीवित निकलने में कामयाब हो गईं, वरना मालदीव में युवा उच्च-स्तर पर कट्टरपंथी बनाए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो 2004 की सुनामी के बाद से ही मालदीव में कट्टरपंथ तेज़ी से प्रसारित होने लगा। 2022 की जनगणना को एक नज़र देखें तो मालदीव की 5.15 लाख जनसंख्या में 1.32 लाख विदेशी हैं। जिनमें अधिकतर दक्षिण एशियाई और पड़ोसी देशों के ही हैं जो ब्लू कॉलर्ड (फैक्ट्री वगैरह वाली नौकरियाँ) जॉब में काम करते हैं।

सांप्रदायिक इस्लामी विचारधारा में सना मालदीव

मालदीव में 189 द्वीप, 18 प्रवालद्वीप और 4 शहर हैं। सैकड़ों वर्षों तक मालदीव में बौद्ध धर्म का बोलबाला रहा। 12वीं शताब्दी में बड़े पैमाने पर इस्लामी धर्मांतरण हुआ। पाकिस्तान और सऊदी अरब से बड़ी संख्या में लोग स्थानीय जनसंख्या की मदद के नाम पर 2004 में राजधानी माले में बसे। इनमें से अधिकतर सांप्रदायिक व सशस्त्र समूहों का हिस्सा थे, जैसे – खिदमत-ए-खल्क और लश्कर-ए-तैय्यबा चैरिटी विंग। इन्होंने जोर-शोर से सांप्रदायिक इस्लाम का प्रचार-प्रसार शुरू किया।

जब इन समूहों ने मालदीव छोड़ा तब वो बड़ी संख्या में वहाँ के किशोरों और युवाओं को कट्टरपंथ का प्रशिक्षण देने के लिए अपने साथ पाकिस्तान और सऊदी अरब ले गए। इस तथाकथित चैरिटेबल यूनिट को अमेरिका ने भी अप्रैल 2006 में आतंकी संगठन घोषित किया। दिसंबर 2011 में कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी में प्रकाशित एक रिसर्च पेपर के अनुसार, राजधानी माले कट्टरपंथ का सबसे ज्यादा शिकार हुआ। इस रिसर्च पेपर को प्रकाशित करने वाले हस्सन आमिर अब मालदीव की नेशनल फोर्स में एक वरिष्ठ अधिकारी हैं।

उनका मानना है कि 1990 के दशक से ही मालदीव के लोगों में इस्लामी कट्टरपंथ का ज़हर बोया जाने लगा था। उन्होंने बताया कि पाकिस्तान जामिया-अल-सलफ़िया द्वारा पाकिस्तान में चलाए जा रहे शिक्षण संस्थानों में भर्ती होने वाले एक दर्जन से भी अधिक युवाओं को कयूम की सरकार के खिलाफ भड़काया गया। शरिया पर आधारित सरकार की स्थापना के लिए उनमें तख्तापलट के विचार डाले गए। पाकिस्तान में मालदीव के इन युवाओं को गिरफ्तार भी किया गया, लेकिन फिर बाद में वो बिना किसी भय के द्वीपों पर इस्लामी कट्टरंथ का प्रचार-प्रसार करने लगे।

अफगान युद्ध के दौरान पाकिस्तान के मदरसों में पढ़ने वाले कई छात्र इसका हिस्सा बने। 2004 के सुनामी से मालदीव में भारी तबाही आई, आतंकी समूहों ने इसका फायदा उठाया। चैरिटी की आड़ में इन्होंने लोगों को वित्तीय मदद दी, राहत कार्य में हाथ बँटाया। लामू प्रवालद्वीप क्षेत्र में इसका ज्यादा असर दिखा। आपदा पीड़ित युवाओं को पाकिस्तानी शैक्षिक संस्थानों में भर्ती कराया गया, उनका ब्रेनवॉश किया गया। इस तरह मालदीव के युवा पूरी तरह उनके चंगुल में आ गए।

1400 कट्टरपंथी, जो इस्लाम के लिए हत्याएँ करने को तैयार

2007 में हुए सुल्तान पार्क बम ब्लास्ट के आतंकियों में से एक मूसा इनास आपदा के मददगारों में शामिल था, जिसके पीछे कोई रहस्यमयी वित्तीय ताकत थी। इस हमले में 12 अंतरराष्ट्रीय पर्यटक घायल हुए थे। इद्रा खिदमत-ए-खल्क जैसे चैरिटी संस्था बनाए गए। IKK का कनेक्शन अहल-ए-हदीथ से है, उसने भी खुद को मालदीव में स्थापित किया। IKK तब्लीग को समर्पित जमात-उल-दावा से भी जुड़ा हुआ है। ये भारत में कई हमले करने वाले लश्कर-ए-तैय्यबा से भी अधिक खतरनाक है।

मालदीव के इस्लामी मंत्रालय ने दिसंबर 2019 में 3 प्रोफेसरों को निलंबित किया, जो आतंकी विचारधारा का प्रसार कर रहे थे। आरोप लगाया गया कि वो घृणा फैला रहे थे, अमानवीय कृत्यों को बढ़ावा दे रहे थे, और अन्य देशों में गृहयुद्ध के लिए उकसा रहे थे। उसी दौरान ये खुलासा हुआ कि मालदीव में 1400 कट्टरपंथी इस्लाम के लिए खून बहाने को तैयार हैं। सीरिया और इराक में ISIS के लिए लड़ने वालों में सबसे ज्यादा मालदीव के ही लोग थे। 2013-18 तक ये स्थिति और भयवाह रही।

याद दिलाते चलें कि कुछ महीने पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप के पर्यटन को वहाँ जाकर प्रमोट किया, जिसके बाद मालदीव के 3 मंत्रियों ने उन पर आपत्तिजनक टिप्पणी की। विरोध के बाद उन तीनों को बाहर का रास्ता दिखाया गया। फिर मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जु ने भारत की सेना की एक टुकड़ी को वहाँ से जाने का आदेश दे दिया। भारतीय पर्यटकों ने मालदीव का बॉयकॉट भी किया। हाल ही में भगवान की प्रतिमा रखने के आरोप में 3 भारतीयों को वहाँ गिरफ्तार कर लिया गया था।

पहली बार ₹2 लाख करोड़ के पार पहुँचा GST कलेक्शन, अप्रैल 2024 में हुई सरकार की बम्पर कमाई: उद्योग धंधों में तेजी बरकरार

अप्रैल, 2024 में वस्तु एवं सेवा कर (GST) का संग्रह रिकॉर्ड ₹2 लाख करोड़ के पार पहुँच गया। वित्त वर्ष 2024-25 के पहले महीने में ही केंद्र सरकार और राज्य सरकारों की बम्पर कमाई हुई। महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों ने GST संग्रह में बड़ी बढ़त दिखाई।

वित्त मंत्रालय द्वारा बुधवार (1 मई, 2024) को जारी किए गए आँकड़े के अनुसार, अप्रैल माह में GST संग्रह कुल ₹2,10,267 करोड़ रहा। इसमें अप्रैल 2023 की तुलना में 12.4% की बढ़त देखी गई। मार्च महीने में GST का संग्रह ₹1.78 लाख करोड़ रहा था, उसके मुकाबले इसमें लगभग 20% की बढ़त देखी गई।

वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, GST के केन्द्रीय हिस्से (CGST) के रूप में सरकार को ₹43,846 करोड़ की कमाई हुई। जबकि राज्यों को इससे ₹53,538 करोड़ की कमाई हुई। इसके अलावा एक राज्य से दूसरे राज्य के बीच माल जाने पर लगने वाला GST ₹99,623 करोड़ रहा। इसके अलावा ₹13,260 करोड़ की कमाई सेस से भी हुई।

GST से केंद्र को होने वाली कुल कमाई अप्रैल महीने में ₹94,153 करोड़ जबकि राज्यों को मिलने वाली GST ₹95,138 करोड़ रहा। GST के संग्रह ने पहली बार ₹2 लाख करोड़ का आँकड़ा पार किया है। सबसे अधिक GST महाराष्ट्र से संग्रहित किया गया, यहाँ से ₹37,671 करोड़ की कमाई हुई।

गौरतलब है कि GST को 1 जुलाई, 2017 को लागू किया गया था। इसके कारण देश के करों का जंजाल खत्म करने में सहायता मिली थी। GST में 17 अलग-अलग तरह के करों को समाहित कर दिया गया। GST के लिए एक एकीकृत पोर्टल भी लाया गया।

यहाँ आसानी ने GST जमा किया जा सकता था। GST के कारण सरकार को भी बम्पर कमाई होना चालू हुई। वित्त वर्ष 2023-24 में सरकार को ₹20.18 लाख करोड़ की कमाई हुई थी। इसकी तुलना अगर GST से पहले के समय से की जाए तो यह 2016-17 के दौरान मात्र ₹3.19 लाख करोड़ था। यानी GST के बाद इसमें लगभग 6 गुने की वृद्धि हुई है।

टैबलेट खिलाकर बच्ची से करता था रेप, अब सेक्स के बिना नहीं रह सकती: हाई कोर्ट ने माना यौन प्रताड़ना की वजह से हुई ‘निम्फोमैनियाक’, बेल देने से इनकार

बॉम्बे हाई कोर्ट ने एक लड़की का 10 साल की उम्र से एक लड़की का रेप करने के आरोपित को जमानत देने से इनकार कर दिया है। इतनी छोटी उम्र से रेप का शिकार बनने का बाद यह लड़की आगे चलकर यौन विकार से ग्रस्त होकर निम्फोमेनिक (Nymphomaniac) हो गई है। यानी पीड़िता अब अपनी यौन इच्छा को रोक नहीं पाती और उसके बिना रह नहीं पाती। अदालत ने इसे बेहद भयावह बताया।

बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति पृथ्वीराज चव्हाण की एकल पीठ ने सोमवार (29 अप्रैल 2024) को अपने फैसले में आरोपित द्वारा दायर जमानत याचिका को खारिज कर दिया। इसके साथ न्यायमूर्ति चव्हाण ने कहा कि अपराध न केवल एक विवेकशील व्यक्ति की अंतरात्मा को झकझोरने वाला है, बल्कि बेहद अप्रिय भी है। ऐसे भयानक अपराध के कारण पीड़िता एक निम्फोमेनियाक बन गई है।

उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में शब्दश: पीड़िता द्वारा अपनी आपबीती का वर्णन करते हुए लिखी गई 27 पेज की डायरी का हवाला दिया। अदालत ने कहा, “उसकी मानसिक, मनोवैज्ञानिक और शारीरिक स्थिति और आरोपित के हाथों हुई दरिंदगी के प्रभाव का वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जाएँगे।”

पीड़िता के पिता ने कहा कि वह दुबई में काम करते थे। इस बात का फायदा आरोपित और उसकी पत्नी ने उठाया। लड़की के माता-पिता ने कहा कि उन्हें इस बात की जानकारी साल 2021 में पीड़िता की डायरी से मिली। तब 17 साल की पीड़िता की डायरी उसके कमरे से मिली थी। दरअसल, यह लड़की एक लड़के के साथ भाग गई थी जिसके बाद उसके माता-पिता ने उसके कमरे की तलाशी ली थी।

अपनी डायरी में पीड़िता ने लिखा था कि आरोपित ने उसके साथ तब से रेप करना शुरू किया, जब वह चौथी कक्षा में पढ़ती थी। इस बात से आरोपित की पत्नी भी अवगत है। पीड़िता ने यह भी लिखा है कि आरोपित अक्सर उसे एक टैबलेट खिलाता था, जिसके कारण वह यौन रूप से उत्तेजित हो जाती थी।

इस डायरी को पढ़ने के बाद पीड़िता के माता-पिता ने साल 2021 में आरोपित और उसकी पत्नी के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। इस मामले में विशेष अदालत ने आरोपित पत्नी को जमानत दे दी, लेकिन आरोपित पत्नी को जमानत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद आरोपित ने बॉम्बे हाई कोर्ट का रूख किया था।

उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि आरोपित की पत्नी ने जानबूझकर और गैर-कानूनी कृत्यों में सहायता की और उकसाया। इसलिए वह भी समान रूप से दोषी प्रतीत होती है। पीठ ने यह भी कहा कि लड़की की डायरी में यह भी कहा गया है कि उसने कथित बलात्कार के बारे में अपनी माँ को बहुत पहले ही बता दिया था, लेकिन सामाजिक कलंक के कारण माँ ने कोई कार्रवाई नहीं की।

उच्च न्यायालय ने कहा कि ज्यादातर मामलों में यौन शोषण करने वाले बच्चे के परिचित व्यक्ति होते हैं। ऐसे में आरोपित को जमानत देना पीड़िता के घावों को और अधिक बढ़ाने एवं दुखाने जैसा होगा, जो कि अभी भी पीड़िता के दिमाग, शरीर और आत्मा में ताजा है।

लश्कर से लिंक, शरजील इमाम से लेकर नक्सलियों तक पहुँचाए पैसे: चीनी पोपट NewsClick के फाउंडर प्रबीर पुरकायस्थ की पोल दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में खोली

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने न्यूज़क्लिक के फाउंडर-एडिटर प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ 8000 पन्नों की चार्जशीट दायर की है, जिसमें प्रतिबंधित इस्लामिक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के साथ उनके संबंधों का खुलासा किया गया है। चार्जशीट के मुताबिक, प्रबीर पुरकायस्थ का लश्कर आतंकियों के साथ भी जुड़ाव रहा है और वो लश्कर के आतंकियों को फंडिंग भी करते थे।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, न्यूज़क्लिक संस्थापक राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध के बहाने दुष्प्रचार अभियान का नेतृत्व कर रहा था। स्पेशल सेल ने कहा कि फंड लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) को दिया गया था, जो यूए(पी)ए- 1967 की पहली अनुसूची के तहत प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन है, जो जम्मू-कश्मीर में सक्रिय है और कई आतंकी हमलों के लिए जिम्मेदार है।

चार्जशीट के मुताबिक, प्रबीर पुरकायस्थ सीएए और एनआरसी के विरोध प्रदर्शनों के दौरान खूब सक्रिय था और अपने कर्मचारियों के माध्यम से दंगाइयों तक पैसे पहुँचा रहा था। वो न्यूजक्लिक के माध्यम से एनआरसी और सीएए के विरोध में माहौल भी बना रहा था। पुलिस ने बताया है कि प्रबीर ने जिन लोगों को पैसे देकर दंगे फैलाने में सहायता की, उनमें से शरजीम इमाम जैसे लोग दिल्ली के हिंदू-विरोधी दंगों और आतंकी संगठनों से साँठगाँठ के आरोपों में जेल में बंद हैं। उन पर यूएपीए जैसे मामलों में केस चल रहे हैं। इन दंगाइयों में वे लोग शामिल हैं जिन्होंने सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान शाहीन बाग और चांद बाग में उत्पात मचाया था और तथाकथित किसान भी शामिल हैं जिन्होंने देश की राजधानी में कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था।

कोरोना के दौरान वैक्सीन को लेकर फैलाई अफवाह

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने चार्जशीट में बताया है कि प्रबीर पुरकायस्थ और उसकी कंपनी न्यूजक्लिक ने कोविड-19 के दौरान चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (सीसीपी) के सदस्य नेविल रॉय सिंघम के साथ मिलकर भारत सरकार को बदनाम करने की कोशिश की। उन्होंने भारत सरकार की विफलता को हाईलाइट करने किया और भारतीय कंपनी द्वारा बनाए गए को-वैक्सीन की आलोचना वाले लेख प्रकाशित किए, ताकि भारत के आम जनमानस में सरकार के खिलाफ असंतोष और गुस्सा भड़के।

नक्सलियों को दी फंडिंग

चार्जशीट के मुताबिक, प्रबीर पुरकायस्थ ने ‘अर्बन नक्सली’ गौतम नवलखा के साथ मिलकर नक्सलियों को हिंसा बढ़ाने के लिए फंडिंग दी, ताकि छत्तीसगढ़, तेलंगाना, आँध्र प्रदेश जैसे नक्सल प्रभावित इलाकों में नक्सली हिंसा बढ़े।

पुलिस ने कहा कि ईमेल के रूप में सबूत हैं कि साजिश 2016 में शुरू हुई और अपने उद्देश्य के अनुसार, पीपीके न्यूज़क्लिक को पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड में बदल दिया गया ताकि भारत में आतंकवादी कृत्य और गैरकानूनी गतिविधियाँ के लिए धन उगाही की जा सके। न्यूज़क्लिक को 91 करोड़ रुपये मिले, जिसका इस्तेमाल बाद में आतंकवादी गतिविधियों के लिए किया गया। पीपी न्यूज़क्लिक इंडिया एलएलपी को एक निजी कंपनी में बदल दिया गया ताकि निवेश और सेवा समझौते की आड़ में धन दिया जा सके।

पुरकायस्थ के न्यूज़क्लिक पर कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश के मानचित्र के साथ छेड़छाड़ करने का आरोप है। इसने कथित तौर पर चीनी मानचित्र को बदल दिया ताकि अक्साई चिन को चीन के हिस्से के रूप में शामिल किया जा सके और एक समाचार बुलेटिन में भारत को कश्मीर के बिना दिखाया गया।

चार्जशीट में बताया गया है कि इस मामले में कुल 8 गवाह हैं, जिसमें से 5 न्यूजक्लिक के साथ जुड़े हुए हैं। इसमें से एक अमित चक्रवर्ती भी हैं, जो गिरफ्तारी के बाद गवाह बन गए और कोर्ट ने उन्हें माफी दे दी, इसलिए उनके खिलाफ कोई चार्जशीट दाखिल नहीं दी जा रही।

प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ 3 अहम गवाह

प्रबीर पुरकायस्थ के खिलाफ कई अहम गवाह भी हैं। इस केस से जुड़े गवाहों की पहचान गुप्त रखी गई है। उन्हें गामा-1, गामा-2 और गामा-3 नाम दिया गया है। इसमें ‘गामा-1’ ने बताया है, कि “सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान, पुरकायस्थ कर्मचारियों को भाग लेने के लिए भेजते थे और मुस्लिम समुदाय को हिंसक कृत्य और दंगे करने के लिए उकसाते थे। वह दंगाइयों के बीच बाँटने के लिए न्यूजक्लिक के कर्मचारियों को पैसे देता था। प्रबीर पुरकास्थ, चक्रवर्ती और इस गैंग के अधिकतर सदस्य वामपंथी और माओवादी विचार धारा वाले हैं, जिस्हें चीन की कम्युनिष्ट पार्टी से फंड मिलता था।”

एक अन्य गवाह ‘गामा2’ ने कहा कि न्यूज़क्लिक के संस्थापक ने इस्लामी चरमपंथी शरजील इमाम को पैसे देने के लिए एक व्यक्ति को शाहीन बाग भेजा था, जो वर्तमान में हिंदू विरोधी दिल्ली दंगों में अपनी भूमिका के लिए सलाखों के पीछे है। उन्होंने कहा, “इस पैसे से उसे (इमाम को) हिंसा और दंगा भड़काने के लिए हथियार और अन्य उपकरण खरीदने चाहिए।” ‘गामा2’ ने यह भी गवाही दी कि हिंसा भड़काने के लिए बाद में महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में नक्सलियों को पैसा भेजा गया था। ‘गामा3’ ने बताया, “फंड (न्यूज़क्लिक द्वारा प्राप्त) का इस्तेमाल सीएए/एनआरसी विरोध, किसानों के आंदोलन, अनुच्छेद 370 के निरस्तीकरण के खिलाफ कश्मीरी अलगाववादियों और माओवादी समूहों के समर्थन में किया गया था।”

बता दें कि न्यूज़क्लिक के संस्थापक को 3 अक्टूबर, 2023 को कंपनी के एचआर हेड अमित चक्रवर्ती के साथ संयुक्त राज्य अमेरिका के रास्ते चीन से अवैध धन प्राप्त करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसमें से अजय चक्रवर्ती बाद में सरकारी बवाह बन गया।

मूल रूप से ये समाचार अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित किया गया है। मूल रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहाँ क्लिक करें

कॉन्ग्रेस के OBC ‘प्रेम’ की पीड़ित पत्रकारों ने खोली पोल, एक ने बताया- हिंदू राष्ट्र ट्वीट करने पर नौकरी से निकलवाया: बोले अशोक श्रीवास्तव- 100 पत्रकार रातोंरात नपे थे

राहुल गाँधी लगातार अपनी रैलियों में OBC-OBC का रट्टा लगाते रहते हैं। कभी वो कहते हैं कि देश चलाने वाले अधिकारियों में कोई पिछड़ा नहीं है तो कभी वो पूछते हैं कि मीडिया में कितने पत्रकार OBC हैं? अब ‘Zee News’ में कार्यरत रहे दीपक चौरसिया ने खुलासा किया है कि UPA काल में उनके साथ कैसा व्यवहार हुआ था। ‘इंडिया टीवी’ पर एक चर्चा के दौरान उन्होंने पिछली बातों को याद किया। असल में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एक वीडियो को लेकर चर्चा चल रही थी।

अमित शाह ने एक रैली के दौरान कहा था कि कॉन्ग्रेस पार्टी अगर सत्ता में आ गई तो वो पिछड़ों, दलितों और जनजातीय समाज का आरक्षण छीन कर मुस्लिमों को दे देगी। कॉन्ग्रेस की तेलंगाना यूनिट ने इस वीडियो के साथ छेड़छाड़ कर अमित शाह को ये कहते हुए दिखा दिया कि भाजपा SC, ST और OBC का आरक्षण हटा देगी। जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई बार कह चुके हैं कि आरक्षण को कोई छू भी नहीं सकता। इस मामले में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी पर FIR हुई है, असम से कॉन्ग्रेस नेता रीतम सिंह गिरफ्तार हुआ है।

दीपक चौरसिया ने इस पर चर्चा के दौरान बताया, “मैं बड़े दिल से एक बात कहना चाहता हूँ। आरक्षण पर कॉन्ग्रेस पार्टी ने जितना फेक नैरेटिव फैलाया है, ऐसा कभी नहीं हुआ। मैं सच बोलूँ तो आधे लोगों को पता नहीं होगा। मैंने राहुल गाँधी का एक वीडियो देखा, जिसमें वो OBC पत्रकार ढूँढ रहे हैं। मैं हूँ न, मैं सामने बैठा हूँ। 2004 में राहुल गाँधी और उनकी पार्टी ने मुझे दूरदर्शन से निकाल कर बाहर कर दिया था। मैं DD का हेड था। मैं ओबीसी पत्रकार था, तब उनको नहीं दिखाई दिया।”

उन्होंने कहा कि राहुल गाँधी और उनके आसपास के लोगों को ये तक नहीं पता होगा कि उत्तर प्रदेश में OBC की कौन सी बड़ी जातियाँ हैं। उन्होंने बताया कि राहुल गाँधी की तरफ से आज पूरी कॉन्ग्रेस को चला रहे KC वेणुगोपाल को उत्तर भारत की 5 ओबीसी जातियों के नाम नहीं पता होंगे। राहुल गाँधी के मौजूदा सलाहकार जयराम रमेश को लेकर भी उन्होंने यही दावा किया। दीपक चौरसिया ने बताया कि इस घटना का जिक्र उन्होंने 20 साल बाद किया है, वो इस पर ज़्यादा बोलना नहीं चाहते।

DD न्यूज़ में कार्यकर्त पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने उनके इस दावे की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि आज दीपक चौरसिया ने यह सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि 2004 में कॉन्ग्रेस की, सोनिया गाँधी- राहुल गाँधी की सरकार आते ही उन्हें डीडी से निकाल दिया गया था जबकि वो ओबीसी पत्रकार हैं। बकौल अशोक श्रीवास्तव, इसका खुलासा उन्होंने अपनी पहली पुस्तक ‘Narendra Modi Censored’ में किया था। उन्होंने बड़ी जानकारी दी कि अकेले दीपक चौरसिया ही नहीं, करीब 100 पत्रकारों को रातोंरात दूरदर्शन ने टारगेट करके निकाल दिया गया था।

अशोक श्रीवास्तव ने तंज कसा कि आज यही कॉन्ग्रेस अपने घोषणा-पत्र में मीडिया को ‘आज़ादी’ का देने ढिंढोरा पीट रही है। OBC समाज से आने वाले राजस्थान के एक अन्य सक्रिय पत्रकार जीतेश जेठानंदानी ने भी इस दौरान अपनी पीड़ा व्यक्त की। उन्होंने बताया कि जब वो ‘TV9 भारतवर्ष’ में राजस्थान ब्योरो देख रहे थे, तब उन्हें एक ट्वीट के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था। उस ट्वीट में उन्होंने लिखा था कि भारत हिन्दू राष्ट्र था, हिन्दू राष्ट्र है और हिन्दू राष्ट्र रहेगा।

जीतेश जेठानंदानी ने बताया कि उस दौरान भाजपा की ही सरकार थी, लेकिन कॉन्ग्रेस नेताओं, कवि कुमार विश्वास और कुछ वामपंथी नेताओं के दबाव के कारण उन्हें नौकरी से हाथ धोना पड़ा। उन्होंने कहा कि वो इसका सबूत भी दे सकते हैं। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए बताया कि आज भी उन्हें अपने बच्चों की स्कूल फीस भरने में परेशानी हो रही है। हालाँकि, उन्होंने बताया कि ‘राष्ट्र प्रथम’ का उद्देश्य रखने वाले कुछ संगठनों ने उनकी मदद ज़रूर की, लेकिन भाजपा राज में भी मीडिया की स्थिति वही है।