खुद को सामाजिक कार्यकर्ता और उद्यमी बताने वाले विनय दुबे भाजपा के खिलाफ लगातार जहर उगलता रहा है। एनसीपी और मनसे के नेताओं से उसकी करीबी दिखाई पड़ती है।
मजदूर घर जाने के लिए जमा हुए हैं तो इनके हाथों में थैले या बैग वगैरह क्यों नहीं हैं? भीड़ मस्जिद के पास ही क्यों जमा हुई और अल्लाह का नाम लेकर समझाने के पीछे क्या तुक है? महाराष्ट्र में 30 अप्रैल तक का लॉकडाउन पहले से ही घोषित था तो आज हंगामा क्यों हो रहा है?
विनोद कापड़ी ने जहाँ पॉलीथीन पहने एक डॉक्टर की फोटो शेयर की और दावा किया कि कोरोना से लड़ने के लिए डॉक्टरों को सिर में ये पहनना पड़ा रहा है। वहीं आगरा के डीएम ने दावा किया कि जिस डॉक्टर को देखकर वो चिंता कर रहे हैं, वो वास्तविकता में बालरोग डॉक्टर हैं। जो आइसोलेशन वार्ड में नहीं जाते।
कोहली ने कहा कि कुछ ऐसे लोग हैं, जो सरकार के दिशानिर्देशों और क़ानून का सम्मान नहीं करते, जिनके कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं, उन सबके अलावा भारत में स्थिति काफ़ी हद तक बहुत ठीक है।
मार्क्स या माओ के जीवन दर्शन की राह पर चलने वाले वामपंथी अतिवादी बौद्धिक जैव विषाणुओं से अधिक हिंसक हैं। इस नरपिपासु वर्ग ने ही कोरोना जैसे विषाणुओं का आविष्कार करके दुनिया को अभूतपूर्व त्रासदी की स्थिति तक पहुँचा दिया है।
जमातियों की हरकतों को देखें तो आज यही पता चलता है। उन्होंने इस्लाम के नाम पर मेडिकल सलाहों को धता बताया और इस्लामी रीति-रिवाजों का अनुसरण करने के चक्कर में देश से पहले मजहब को रखा, जो आम्बेडकर की बातों को आज भी सत्य सिद्ध करती है।
जब डेरा सच्चा सौदा के मुखिया की गिरफ्तारी को लेकर हिंसा हुई तो किसी ने उसे पूरे हिन्दू समाज से नहीं जोड़ा। पटियाला में कुछ सिरफिरे निहंगों ने पुलिस वालों पर हमला लिया तो किसी ने उसे पूरे सिख समाज से नहीं जोड़ा। तो फिर तबलीगी जमात का नाम लेने पर उसे सारे समुदाय को निशाना बनाना कैसे और क्यों माना जा रहा है?
गली में कई दरवाजों के बाहर 10 रुपए के नोट और कागज के कुछ टुकड़े बिखरे पड़े मिले। जिन पर लिखा था, “मैं कोरोना हूँ, पूरे मोहल्ले में फैलाऊँगा।” ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी। सूचना मिलते ही मौके पर पहुँची पुलिस ने इसे गंभीरता से लेते हुए सभी नोटों और कागज के टुकड़ों को सुरक्षित तरीके से जब्त कर लिया।
वो ऐसा कर के न सिर्फ़ ज़रूरतमंदों का हक़ मार रहे हैं बल्कि संवेदनहीनता का परिचय भी दे रहे हैं। हम बात कर रहे हैं ऐसे लोगों की, जो अपने घर में पर्याप्त राशन होते हुए भी प्रशासन के सामने झूठ बोल कर फायदा उठाना चाहते हैं।
“राजद विधायक फैयाज अहमद का फिलहाल नाम नहीं आया है, लेकिन हम जानते हैं कि ये सब कुछ उसके कहने पर ही हो रहा है, क्योंकि उसका दायाँ हाथ सरपंच फकरे आलम है और पुलिस प्रशासन फकरे आलम से मिली हुई है। हम तो बस प्रधानमंत्री के कहने पर दीया जला रहे थे। क्या प्रधानमंत्री की बात का पालन करना इतना बड़ा गुनाह है कि हमारी माँ की हत्या कर दी जाएगी? और प्रशासन भी हाथ पर हाथ धरे बैठा है।”