हर्ष मंदर के बारे में जाँच-पड़ताल करने पर हमें एक बेहद अज्ञात संगठन API के बारे में पता चला है। कुछ तथ्य मिले हैं जिससे पता चलता है कि यह संगठन इटली सरकार के एक अंग के रूप में काम करता है।
24 फरवरी को चॉंदबाग में पुलिस पर हमला सोची-समझी साजिश थी। दंगाइयों ने पुलिस को बुलाने से पहले सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए थे ताकि उनकी पहचान न हो। अब फुटेज के आधार उनकी धर-पकड़ की जा रही है।
सर्वेक्षण में पाँच हजार से अधिक पाठकों ने हिस्सा लिया। 38% से ज्यादा मत पाने वाले रणजीत सिंह की सहिष्णु साम्राज्य बनाने के लिए प्रशंसा की गई। दूसरे स्थान पर अफ्रीकी स्वतंत्रता संग्राम के सेनानी अमिलकार काबराल रहे।
बीजेपी विधायक संजय पाठक ने अपनी हत्या किए जाने की आशंका जताई है। उन्होंने कहा है, "मैं सीएम कमलनाथ से नहीं मिला हूँ। बीती रात मुझे अगवा करने की कोशिश की गई थी। मेरे ऊपर बहुत दबाव बनाया जा रहा है।"
एक चैनल की टीम आज प्रदर्शन को कवर करने पहुॅंची। वहॉं करीब 19 औरतें ही थीं। कमजोर होते प्रदर्शन की सच्चाई छिपाने के लिए औरतों ने हूटर बजाया तो कुछ मर्द वहॉं पहुॅंचे। उन्होंने डराने के लिए महिला पत्रकार के साथ बदसलूकी भी की।
यूपी पुलिस ने लखनऊ के प्रमुख चौराहों पर 57 दंगाइयों के पोस्टर लगाए हैं। दंगाइयों को संपत्ति के नुकसान की वसूली का नोटिस भी दिया गया है। हिंसा फैलाने वाले सभी उपद्रवियों के पोस्टर और बैनर लगाए जाएँगे। जुर्माना नहीं देने पर इनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।
प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि हिंसा वाले दिन शाह आलम अपने भाई यानी ताहिर हुसैन की छत पर दंगाइयों के साथ मौजूद था। हिंसा भड़काने में उसका बहुत बड़ा हाथ है। वह फरार बताया जा रहा है।
जस्टिस मुरलीधर के तबादले का आदेश 26 फरवरी को जारी किया गया था। इसको दिल्ली दंगों से जोड़ लिबरल गैंग ने प्रोपेगेंडा फैलाया था। अब खुद जस्टिस मुरलीधर ने बताया है कि दिल्ली दंगों से काफी पहले ही उन्होंने तबादले को लेकर सहमति दे दी थी।
वे 'देवानंद' बनना चाहते थे, लेकिन बन गए कुंठित पत्रकार। सो, खीझ होनी स्वभाविक है। इसलिए ताज्जुब नहीं होना चाहिए कि राजदीप सरदेसाई को अब रवीश कुमार भी दुकानदार बता रहे हैं। कह रहे हैं मैं उनकी तरह बैलेंसवादी नहीं हूॅं।
"बदकिस्मती से हिंदूफोबिया एक सच है। मैंने कॉन्ग्रेस और राष्ट्रपति उम्मीदवारी के अपने अभियान के दौरान हर बार प्रत्यक्ष तौर पर इसे महसूस किया है। इसके बावजूद हमारे नेता और मीडिया इसे न केवल बर्दाश्त करते हैं, बल्कि इसे और भड़काते हैं।"