1. लोटन निषाद चाय की दुकान पर जाते हैं। 2. तबलीगी जमातियों और कोरोना संक्रमण को लेकर टिप्पणी करते हैं। 3. पास में ही मोहम्मद सोना बैठा होता है। 4. दोनों के बीच विवाद होता है, मारपीट शुरू होती है। 5. मो. सोना तमंचे से फायर कर लोटन निषाद की जान ले लेता है।
चाकू पर थूक लगाकर तरबूज काटकर बेचने की शिकायत पर बैतूल बाजार पुलिस ने 3 लोगों के खिलाफ FIR कर लिया है। पुलिस ने उनका तरबूज से भरा ऑटो भी जब्त कर लिया गया। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने इस घटना को देखा, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई।
अमेरिका कोरोना वायरस संक्रमण से हो रही मौतों के मामले में दुनिया में तीसरे स्थान पर है। वहॉं अब 3 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। इनमें से 8,452 लोगों की जान भी जा चुकी है।
पीएम मोदी ने लोगों से 5 अप्रैल की रात नौ बजे नौ मिनट के लिए घर की सभी लाइटें बंद कर दीया, मोमबत्ती या टॉर्च जलाने की अपील कर रखी है। टीएमसी से जुड़े प्रसून भौमिक ने अपने फेसबुक पोस्ट में दावा किया है कि जो ऐसा करेंगे उनके घरों के दरवाजे पर निशान लगा कर चिह्नित किया जाएगा।
5 लाख गायों के रहने की व्यवस्था के लिए 5000 शेल्टर बनाए गए हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपनी 'डेली ब्रीफिंग' के दौरान इन गायों के बारे में ज़रूर पूछते हैं। लॉकडाउन के दौरान जानवरों को खिलाने के लिए कई कर्मचारियों व एनजीओ के स्वयंसेवकों को लगाया गया है।
एक महिला ने कहा कि एक तरफ़ कोरोना वायरस से संक्रमण का प्रकोप है, दूसरी तरफ़ कोई मरने के लिए कीड़ों वाला खाना क्यों खाएगा? महिला ने कहा कि खाना अधपका है, जिससे बच्चों के भी बीमार होने का ख़तरा है।
आरफा की मानें तो नर्सें झूठ बोल रही हैं और प्रोपेगेंडा में शामिल हैं। तबलीगी जमात वाले नीच हरकत कर ही नहीं सकते, क्योंकि वे नि:स्वार्थ भाव से मजहब की सेवा कर रहे हैं। इसके लिए दुनियादारी, यहॉं तक कि अपने परिवार से भी दूर रहते हैं।
प्रार्थना पुरुषार्थ का स्थगन नहीं है और यही वजह है कि प्रार्थना में कुछ भी अवैज्ञानिक नहीं है। Covid-19 को रोकने के सभी प्रयास हमारी शुभकामनाओं से बल पाएँगे और हमें निर्धारित निर्देशों का पालन करने की प्रेरणा देंगे। दवा हमारे शरीर की और दुआ हमारे मन की इम्यूनिटी को बढ़ाती है।
कई लोग मीडिया पर आरोप लगा रहे थे कि जब किसी हिन्दू धार्मिक स्थल में श्रद्धालु होते हैं तो उन्हें 'फँसा हुआ' बताया जाता है जबकि मस्जिद के मामले में 'छिपा हुआ' कहा जाता है। इसके बाद फेक न्यूज़ का दौर शुरू हुआ, जिसे अली सोहराब जैसों ने हज़ारों तक फैलाया।