बताया जाता है कि बाल सुधार गृह से निकलने के बाद उसे दक्षिण भारत के किसी स्थान पर भेज दिया गया। उसका नाम बदल दिया गया। बदली हुई पहचान के साथ वह एक एनजीओ की निगरानी में एक होटल में बावर्ची का काम करता है।
वैश्विक महामारी से निपटने के लिए लड़ रहे लोगों के प्रति आभार जताने के लिए पीएम मोदी ने जनता से एक अपील की। लेकिन, स्वयंभू महिला पत्रकारों को यह फिजूल की कवायद लग रही। इतना ही नहीं वे इस देश की जनता को भी बेवकूफ बता रही हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने बहुमत साबित करने के लिए आज शाम पॉंच बजे तक का वक्त दिया है। उससे पहले ही कमलनाथ के इस्तीफे की चर्चा जोरों पर है। मौजूदा गणित के हिसाब से बहुमत के लिए 104 विधायकों का समर्थन चाहिए। बीजेपी विधायकों की संख्या 107 है।
16 दिसंबर 2012 को देश की राजधानी दिल्ली में निर्भया के साथ चलती बस में दरिंदगी हुई थी। चारों दरिंदों की फॉंसी टालने के लिए 19 मार्च की रात भी उनके वकीलों ने पूरी कोशिश की। आतंकी याकूब मेनन के मामले की तरह देर रात सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
राजदीप ने जनता कर्फ्यू के आह्वाहन का मजाक बनाते हुए फ़ौरन बयान दिया कि क्या जनता कर्फ्यू के दिन पुलिस उसके घर के आगे मौजूद रहेगी? दरअसल, स्पष्ट सी बात यह है कि राजदीप जैसे लोग सदियों से चली आ रही सत्ता की गुलामी के कारण स्वयं को इतना ज्यादा सुरक्षित महसूस करने लगे हैं कि कोरोना जैसी किसी महामारी का भी ये लोग उपहास बनाते नजर आते हैं।
हम हर ऐसी वारदात के बाद कैंडल मार्च करते हैं। दरिंदों को फाँसी देने की गुहार लगाते हैं। हैशटग चलाते हैं। निंदा करते हैं। न्याय प्रशासन को कोसते हैं। लेकिन एक काम जो हम करना भूल जाते हैं वो होता है ऐसी महिलाओं की सोच को सुधारना.....
मोदी सरकार के बनने के बाद अपने कार्यकाल के आखिरी दिन हामिद अंसारी ने कहा था कि देश के मुस्लिम समुदाय में आज असुरक्षा का माहौल है, अपने आखिरी इंटरव्यू के जरिए हामिद अंसारी ने मोदी सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कहा था कि भारत का समाज सदियों से बहुलतावादी रहा है, लेकिन सबके लिए ये स्वीकार्यता का माहौल अब खतरे में है।
राहुल गाँधी के इस ट्वीट पर काफी लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उनके ट्वीट के जवाब में सबसे ज्यादा निंदनीय कमेन्ट वो था, जिसमें उन्हें किसी भी प्रकार के नशे से दूर रहने की सलाह दी गई थी।
गाँव-देहात के किसी चौपाल पर बैठिए, जहाँ पहले की सरकारों में चर्चा का विषय होता था- कितने करोड़ का घोटाला, कहाँ हत्या, लूटमार या जमीन-मकान पर कब्जा, कहाँ बलात्कार! वहीं योगी सरकार के कार्यकाल में जनता अब इन चौपालों पर चर्चा करती है - गाँव-गाँव बिजली, पानी और सड़क पहुँची, अपराधी प्रदेश छोड़कर भाग रहे और...