यूपी के दंगाइयों से संवेदना जताती प्रियंका गॉंधी। जेएनयू हिंसा के घायल छात्रों पर आँसू बहाती प्रियंका गॉंधी। अब देखिए कॉन्ग्रेस महासचिव का वो चेहरा जिससे पता चलता है कि उनके लिए राजनीति से बढ़कर कुछ भी नहीं है।
ये JNUSU छात्र बिना किसी विरोध के उन मासूम आम छात्रों के साथ ये सब करने में कामयाब रहे, क्योंकि उस दौरान आसपास एक भी AVBP के छात्र नहीं थे। नकाबपोश चेहरे वाले वहाँ कई छात्र खड़े थे। हम में से कई लोग संदेह कर रहे थे कि उनमें से कुछ हमारे छात्र नहीं हो सकते हैं और कुछ जामिया मिलिया के हो सकते हैं।
बालिका गृह से गायब दाे किशोरियॉं आखिर कहॉं गईं? जिन दो बच्चियों की हत्या की बात उनके साथियों ने कही थी, उनके शव ब्रजेश ठाकुर एंड कंपनी ने कहॉं ठिकाने लगाया? दो बड़े सवाल जिनका सीबीआई नहीं दे पाई जवाब।
"यहाँ विचारधारा थोपने का काम होता है, हेल्दी डिबेट की कोई बात ही नहीं बची है। सभी को वामपंथी विचार को ही अपना विचार बनाने के लिए दबाव बनाया जाता है। आप उनसे अलग रहेंगे तो वामपंथी छात्र और यहाँ के कई वामपंथी प्रोफ़ेसर आपका यहाँ रहना मुश्किल कर देंगे।"
बांग्लादेशियों द्वारा BSF के जवानों को निशाना बनाने का ये पहला मामला नहीं है। इससे पहले पश्चिम बंगाल में तो बांग्लादेशियों ने एक जवान के हाथ पर बम फोड़ दिया था, जिससे अनीसुर रहमान नामक बीएसएफ जवान का हाथ कोहनी से फटकर ही नीचे गिर गया था।
'दी लल्लनटॉप' के संपादक हैं सौरभ द्विवेदी। कंडोम से बहुत प्यार करते हैं। खुद के बजाय दूसरों को भी इसका महत्व बताते चलते हैं लेकिन अपमानित करने लिए... उन्होंने कहा कि भाजपा वालों को बच्चा पैदा नहीं करना चाहिए। अगर इनके भाजपाई पिताजी ने स्वयं इनकी सलाह मान ली होती तो... पढ़िए, मम्मी कसम मारक मजा मिलेगा।
रिलीज से पहले विवादों में घिरी छपाक फ़िल्म के निर्देशक मेघना गुलजार को दिल्ली के पटियाला कोर्ट ने निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि फ़िल्म में एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल के वकील अर्पणा भट्ट को क्रेडिट दिया जाए, क्योंकि...
दर्दनाक दास्तानों की फेहरिस्त लंबी है। सिलसिला टूट नहीं रहा। इसलिए छपाक देखना या नहीं देखना आपकी मर्जी है। पर ऐसी घटनाओं से लड़ना समाज के तौर पर हमारे लिए मर्जी का सवाल नहीं। हमें लड़ना ही होगा।