सवाल उठता है कि क्या अब सोने को भी विरोध-प्रदर्शन माना जाएगा? बाकी समय 'ऑल्टन्यूज' नासा के सॉफ़टवेयर इस्तेमाल करके फोटो लेने की तारीख, समय और फोटोग्राफर का मूड तक बता दिया करता है, लेकिन इस तस्वीर के बारे में यही बता पाया कि प्रदर्शनकारी सो रहे थे।
शीर्ष नेतृत्व की मोदी घृणा ने कॉन्ग्रेस को इतना कुंठित कर दिया है कि वह राजनीति के सामान्य तकाजे से भी दूर जा चुकी है। इस नियति को उसने खुद चुना है। अतीत के अनुभवों से नहीं सीखा। न ही यह याद रख पाई कि दिल्ली की सत्ता में AAP उसे बेदखल कर आई थी न कि BJP को।
संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, हर जगह बलि का बकरा मुझे ही बनाया जाता है। एक दिन पहले मुझे गालियाँ दी जाती हैं, अगले ही दिन मनपसंद परिणाम आते ही उन बातों को भुला दिया जाता है। इस बार मेरी लाज बच गई। चलिए, दिल्ली चुनाव को वणक्कम।
मुफ्त में चीजें देने के बल पर राजनीति हर जगह नहीं चल सकती। ये ट्रेंड दक्षिण भारत से चला लेकिन आज वहीं फेल हो रहा है। ये चुनाव विकास के मुद्दे पर नहीं लड़ा गया, ये स्पष्ट है। फिर मुद्दे क्या थे? जब चुनाव में कोई बड़ा चेहरा आता है, तो दिल्ली उस पर भरोसा जताती है।
अब फिर से पत्रकार अरविन्द केजरीवाल को पीएम मोदी के टक्कर का चेहरा बना कर पेश करेंगे। उनका महिमामंडन किया जाएगा, बावजूद इसके कि क्षेत्र और जनसंख्या के हिसाब से देखें तो दिल्ली की उनकी जीत का ये अर्थ कतई नहीं निकलता कि यूपी और बिहार जैसे बड़े राज्यों में भी AAP पाँव पसार ही लेगी।
वामपंथी अब सिर्फ़ JNU तक ही सीमित रह गए हैं। दिल्ली में उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं बचा। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में उनका आधार खिसक चुका है। एक केरल में वो किसी तरह टिके हुए हैं।
दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाक़ों के ट्रेंड्स पर नज़र डालें तो बहुत कुछ साफ हो जाता है। ओखला, सीलमपुर, मटिया महल और बल्लीमरान विधानसभा क्षेत्रों से आम आदमी पार्टी आगे चल रही है। इन चारों ही क्षेत्रों से AAP ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे।
रुझानों में दिल्ली में लगातार तीसरी बार अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार बनती दिख रही है। AAP ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा पर एक आरामदायक बढ़त बना ली है।
जिस शांति का किरदार दिखाया गया, वो सरला भट्ट का है। सरला नर्स थीं और फिल्म में शांति को भी नर्स दिखाया गया है। मगर इसमें ये नहीं दिखाया कि कैसे आतंंकवादियों द्वारा सरला का सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर बढ़ई की आरी से उसके शरीर को तीन हिस्सों में चीर कर सरे बाजार घुमाया गया।