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संख्या नहीं गिनाएँगे, सैकड़ों प्रदर्शनकारी बताएँगे: AltNews ने किया शाहीन बाग़ के सन्नाटे का फर्जी फैक्ट चेक

सवाल उठता है कि क्या अब सोने को भी विरोध-प्रदर्शन माना जाएगा? बाकी समय 'ऑल्टन्यूज' नासा के सॉफ़टवेयर इस्तेमाल करके फोटो लेने की तारीख, समय और फोटोग्राफर का मूड तक बता दिया करता है, लेकिन इस तस्वीर के बारे में यही बता पाया कि प्रदर्शनकारी सो रहे थे।

राहुल गाँधी ने मोदी के लिए कहा ‘डंडे मारेंगे’, समुदाय विशेष ने धुनिया बन कॉन्ग्रेस को धुना

शीर्ष नेतृत्व की मोदी घृणा ने कॉन्ग्रेस को इतना कुंठित कर दिया है कि वह राजनीति के सामान्य तकाजे से भी दूर जा चुकी है। इस नियति को उसने खुद चुना है। अतीत के अनुभवों से नहीं सीखा। न ही यह याद रख पाई कि दिल्ली की सत्ता में AAP उसे बेदखल कर आई थी न कि BJP को।

AAP की जीत के बाद भी तुम मुझे क्लीन चिट नहीं दे रहे, बंगाल हारने का डर है?: EVM का पत्र नेताओं को

संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक, हर जगह बलि का बकरा मुझे ही बनाया जाता है। एक दिन पहले मुझे गालियाँ दी जाती हैं, अगले ही दिन मनपसंद परिणाम आते ही उन बातों को भुला दिया जाता है। इस बार मेरी लाज बच गई। चलिए, दिल्ली चुनाव को वणक्कम।

दिल्ली में क्यों नहीं खिल पाया कमल, क्या सचमुच विकास ही था मुद्दा?: ऑपइंडिया का वीडियो विश्लेषण

मुफ्त में चीजें देने के बल पर राजनीति हर जगह नहीं चल सकती। ये ट्रेंड दक्षिण भारत से चला लेकिन आज वहीं फेल हो रहा है। ये चुनाव विकास के मुद्दे पर नहीं लड़ा गया, ये स्पष्ट है। फिर मुद्दे क्या थे? जब चुनाव में कोई बड़ा चेहरा आता है, तो दिल्ली उस पर भरोसा जताती है।

फिर उफान मारने लगा केजरीवाल के PM बनने का सपना, फिर मोदी से तुलना करने में जुटा मीडिया

अब फिर से पत्रकार अरविन्द केजरीवाल को पीएम मोदी के टक्कर का चेहरा बना कर पेश करेंगे। उनका महिमामंडन किया जाएगा, बावजूद इसके कि क्षेत्र और जनसंख्या के हिसाब से देखें तो दिल्ली की उनकी जीत का ये अर्थ कतई नहीं निकलता कि यूपी और बिहार जैसे बड़े राज्यों में भी AAP पाँव पसार ही लेगी।

NOTA से 15 गुना पीछे वामपंथ: दिल्ली चुनाव में लेफ्ट का सूपड़ा साफ़, JNU तक सिमटे

वामपंथी अब सिर्फ़ JNU तक ही सीमित रह गए हैं। दिल्ली में उन्हें कोई पूछने वाला भी नहीं बचा। पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में उनका आधार खिसक चुका है। एक केरल में वो किसी तरह टिके हुए हैं।

‘मुस्लिम पूरा पोलराइज हुआ, हिन्दू घंटा हुआ’

दिल्ली के मुस्लिम बहुल इलाक़ों के ट्रेंड्स पर नज़र डालें तो बहुत कुछ साफ हो जाता है। ओखला, सीलमपुर, मटिया महल और बल्लीमरान विधानसभा क्षेत्रों से आम आदमी पार्टी आगे चल रही है। इन चारों ही क्षेत्रों से AAP ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारे थे।

दिल्ली की राजनीति में कॉन्ग्रेस की ‘दमदार’ वापसी, EVM पर दिग्विजय सिंह ने सवाल उठा किया एकमात्र काम

कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने जारी मतगणना के बीच EVM पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि सवा अरब लोगों के जनादेश को चुराने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

8 मुस्लिम बहुल इलाकों का हाल: कौन आगे, कौन पीछे – मुस्तफाबाद में समीकरण गड़बड़ाया

रुझानों में दिल्ली में लगातार तीसरी बार अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी की सरकार बनती दिख रही है। AAP ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा पर एक आरामदायक बढ़त बना ली है।

सरला का गैंगरेप और शरीर को 3 हिस्सों में चीर सरे बाजार घुमाना… शिकारा के ‘शातिरों’ ने सब कुछ छुपाया

जिस शांति का किरदार दिखाया गया, वो सरला भट्ट का है। सरला नर्स थीं और फिल्म में शांति को भी नर्स दिखाया गया है। मगर इसमें ये नहीं दिखाया कि कैसे आतंंकवादियों द्वारा सरला का सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर बढ़ई की आरी से उसके शरीर को तीन हिस्सों में चीर कर सरे बाजार घुमाया गया।

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