इन घटनाओं में एक वर्ग तो वह होता है जो सुनियोजित ढंग से शामिल होता है और एक वर्ग वह होता है जो कि जाने-अनजाने में घटनाओं में शामिल तो हो जाता है लेकिन इसके बाद कानूनी कार्यवाई में फँसने के बाद वह अपने आप को निर्दोष बताते हुए पहले तो दर-दर की ठोकरें खाता है और फ़िर अपनी ही आँखों से अपने भविष्य को चौपट होते हुए भी देखता है।
सोचिए उस एसिड अटैक विक्टिम के बारे में अब। सोचिए कि दीपिका के एक गलत कदम (विषय के लिए गलत, फिल्म के लिए मास्टरस्ट्रोक) से उन तमाम लोगों को कैसा लग रहा होगा जिसने इस विषय को ले कर उम्मीद बनाई थी। ये एक राजनैतिक विषय नहीं है। ये घोर सामाजिक विषय है।
कॉन्ग्रेस नेताओं से भरी संसदीय समिति की रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा गया था कि पाकिस्तान या बांग्लादेश से आने वाले बहुसंख्यकों (अर्थात मुस्लिमों) को नागरिकता नहीं दी जानी चाहिए। समिति में प्रणब मुखर्जी, सिब्बल, मोतीलाल वोरा,अंबिका सोनी जैसे कॉन्ग्रेसी थे। लालू जैसे सहयोगी भी।
वो बचपन से ही गायक बनने के सपने देखती थी। लेकिन, एक मनहूस घड़ी उस पर नईम की नजर पड़ी। शादी का प्रस्ताव ठुकराए जाने के बाद नईम ने 10 महीने तक पीछा किया। फिर एक दिन...
2029 में मोदी चौथी बार PM बनेंगे और फिर राष्ट्रपति। भारत हिन्दू राष्ट्र बन जाएगा। दक्षिण भारत विद्रोह कर देगा, नॉर्थ-ईस्ट हाथ से निकल जाएगा और कश्मीर चला जाएगा। राजदीप ने झूठ और कल्पना के सहारे 'डर' तैयार किया है। इस मीठे ज़हर से बच कर रहिए।
पाकिस्तान से सराहना पाने वाली दीपिका के पसंदीदा नेता भी पड़ोसी मुल्क को खूब भाते हैं। एक इंटरव्यू में दीपिका ने राहुल गॉंधी को प्रधानमंत्री के तौर पर देखने की इच्छा जताई थी। कहा था कि राहुल जो देश के लिए कर रहे हैं वह क्लासिक उदाहरण है।
यह खबर ऐसे वक्त में सामने आई जब पिछले हफ्ते ही सीएए का समर्थन करते हुए चार नेताओं ने पार्टी छोड़ दी थी। इनमें से तीन ने भाजपा की सदस्यता ले ली है। इससे पहले पार्टी के दो तिहाई विधायक भाजपा के साथ चले गए थे।
चीनी प्रशासन गर्भपात को मुस्लिमों के ख़िलाफ़ एक हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। उनकी मुस्लिम होने की पहचान को समय से पहले ही मिटाया जा रहा है। उनके बच्चों को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा है।
111 पन्नों की उस रिपोर्ट के 6 पन्ने इतने भयावह दास्तानों से भरे पड़े थे कि पूरा देश उबल पड़ा। यौन शोषण, प्रताड़ना, जानवरों से भी बदतर हालात में रहने की मजबूरी। जिम्मेदार बताए गए 71 अधिकारियों पर गाज गिरेगी या फिर होगी लीपापोती?
प्रथमतया सर्दी का मौसम सड़क पर धरना प्रदर्शन के लिए अनुकूल नहीं होता है। सर्दियों का समय समाजवाद के शीतनिद्रा में जाने के लिए उपयुक्त होता है। समाजवादी सौंदर्यशास्त्र के साथ भी सर्दियाँ ठीक नहीं जाती। एक अच्छा वामपंथी कम नहाया हुआ, दाढ़ी बढ़ाया हुआ, महँगा कुर्ता पहन कर ग़रीबों के लिए व्यथित भाव लिए दिखता है।