2 दिन में 10, 1 महीने में 77 बच्चों की मौत। ये आपके लिए भले बच्चे हों। लेकिन, राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार के लिए बस नंबर हैं। जिन्हें गिनकर उसने बता दिया है कि इस बार सबसे कम मरे हैं। यह भी बताया है कि अस्पतालों में रोज दो-चार मरते ही हैं, कोई नई बात नहीं है।
मौलाना अबुल कलाम का राष्ट्रीयता और भारतीयता में गहरा यकीन था। उन्होंने धर्म के आधार पर देश के विभाजन का विरोध किया था। पाकिस्तान परस्मुतों को चेताया था। शायद यही कारण है कि इरफान हबीब जैसे वामपंथी उनका नाम सुनते ही आपा खो बैठते हैं।
मदरसे के मौलवी शमशुद्दीन ने अपने तीन साथियों के साथ मिलकर 10 साल के बच्चे का 100 से अधिक बार बलात्कार किया। पीड़ित बच्चे को बेहद गंभीर हालत में अस्पताल ले जाया गया, जहाँ उसकी सांसे ज़िंदगी और मौत के बीच अभी भी अटकी हुई हैं।
पहले वे जनेऊधारी हिंदू बने। फिर दत्तात्रेय गोत्री। पर जब मौका आया तो कॉन्ग्रेस ने न बहुसंख्यकों की भावना का मान रखा और न देशहित का। तुष्टिकरण के फेर में न वह नेहरू के साथ निभा पाई और न ही उनसे पल्ला छुड़ा पाई।
NDTV ने ट्वीट के पूरे अर्थ को ही अपने मन-मुताबिक बदल दिया। जहाँ All the rioters are shocked (to see police action) होना चाहिए, वहाँ लिखा - 'SHOCKED EVERY PROTESTER' जिसका मतलब है कि ‘हर प्रदर्शनकारी को (पुलिस ने/सरकार ने) हैरान कर दिया।
मार्क्सवादियों ने दिल्ली के राजनीति चश्मे से मुगलों का महिमामंडन और हिन्दू-मुस्लिम एकता के खोखले दावे करते हुए मनगढ़ंत इतिहास गढ़ा। इतिहास लेखन के कार्य में वामपंथियों ने दक्षिणपंथियों को बिल्कुल हाशिए पर रखा। जबकि वो यह अच्छी तरह से जानते थे कि वास्तव में वो भारत का इतिहास था ही नहीं, जिसका प्रचार वामपंथी अपने प्रोपेगेंडा के तहत कर रहे थे।
फैज की "हम देखेंगे... बस नाम रहेगा अल्लाह का" वाले पर इसी मीडिया गिरोह ने संदर्भ की बात करते हुए लेख पर लेख दे मारे। तो क्या दंगे-आगजनी की जगह पुलिस के निर्णय संदर्भ से परे हो जाते हैं? उसकी व्याख्या क्यों नहीं! क्योंकि ये आपके नैरेटिव को सूट नहीं करता।
"आवंटित भूमि गोमला (चारागाह के तौर पर इस्तेमाल होने वाली सामुदायिक ज़मीन) है, न कि एक बंजर भूमि, जिसका दावा शिवकुमार ने किया था। मैंने रामनगर ज़िले के डिप्टी कमिश्नर को भूमि आवंटन पर एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहा है।"
"डिटेंशन कैंप ज़रूरी हैं। जेलों में क़ैद विदेशियों की सज़ा पूरी होने के बाद, उन्हें कहाँ रखा जाएगा? जब तक उन्हें उनके देश में वापस नहीं भेजा जाता है, जहाँ से वे आए थे, तब तक आपको उन्हें एक डिटेंशन कैंप में ही रखना होगा।"
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा केरल के कासरगोड क्षेत्र में निकाले गए रूट मार्च के दौरान DYFI के गुंडों ने पत्थरबाजी की। हिंसा पर क़ाबू पाने के लिए पहुँची पुलिस भी इस हमले में घायल हुई। पूरे मामले में 15 RSS कार्यकर्ताओं सहित 4 पुलिसकर्मी घायल।