सौरभ कालिया और अन्य भारतीय सैनिकों पर किए गए बर्बर अत्याचार को पाकिस्तान के सैनिकों ने कई बार स्वीकार किया है। हालाँकि, धूर्त पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से कभी यह स्वीकार नहीं किया कि कारगिल युद्ध में उसके सैनिक शामिल थे।
20 जून 1999 की सुबह 3:30 बजे विक्रम बत्रा और उनके साथियों ने प्वाइंट 5410 पर फिर से तिरंगा लहरा दिया। इस जीत के बाद विक्रम बत्रा ने कहा था, “यह दिल माँगे मोर।” विक्रम के जज़्बे को देखते हुए यूनिट ने उनको नया नाम दिया ‘शेरशाह’ यानी ‘शेरशाह ऑफ़ कारगिल’।
हंगामे के बीच उनके बचाव में समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी खड़े हुए। उन्होंने आजम खान की टिप्पणी को 'कविता' बताते हुए कहा कि उन्होंने जो कहा उसमें कुछ गलत नहीं था।
मोदी सरकार ने मई में इस बिल का मसौदा पेश किया था। इसके प्रावधानों को लेकर कई विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताई थी। कॉन्ग्रेस ने इस मसले पर यूपीए के सभी सहयोगी दलों के साथ गुरुवार को बैठक की और इस बिल का विरोध करने का फैसला किया।
ग्रामीणों का कहना है कि दूसरे समुदाय के लोग उन्हें न तो पूजा करने देते हैं और न ही मंदिर का निर्माण करने दे रहे हैं। विरोध करने पर समुदाय के लोग लाठी-डंडों और ईंट-पत्थरों से उन पर हमला कर देते हैं।
चंद्रयान 2 के लैंडिंग साइट के नाम का खुलासा हो गया है। सूत्रों का कहना है कि नरेंद्र मोदी जी इस लैंडिंग साइट को 'राजीव गाँधी गड्ढा केंद्र' रखने वाले हैं। हालाँकि, इस नाम पर आखिरी मुहर अभी लगनी बाकी है।
हर कुत्ते को भौंकने के लिए एक भागती हुई कार चाहिए। आरएसएस वही भागती हुई, चमचमाती कार है जिसे देख कर ये भौंकते हैं क्योंकि इनका एक भी संगठन इस तरह का नहीं बन पाया जो कि अपनी राष्ट्रवादी विचारधारा को सत्ता तक पहुँचा दे।
अमित शाह ने स्पष्ट कहा कि उनकी सरकार शहरी नक्सलियों और माओवादियों के प्रति किसी भी मुरौव्वत के मूड में नहीं है। उन्होंने यह भी बयान दिया कि सच में सामाजिक कार्य कर रहे कार्यकर्ताओं को पकड़ने में पुलिस की कोई रुचि नहीं है।
गाने के बोल हैं- ‘जो ना बोले जय श्री राम, भेज दो उसको कब्रिस्तान।’ इस गाने को लेकर सोशल मीडिया में काफी चर्चा हो रही है। इसे लेकर लोग सोशल मीडया पर अपनी-अपनी अलग प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कुछ लोग इसे आपत्तिजनक बता रहे हैं, तो कुछ लोगों को इस गाने में कुछ भी गलत नहीं लग रहा है।