बसु चाहती हैं कि लोग यह मानें कि भारतीय सशस्त्र बलों ने नरेंद्र मोदी के इशारे पर अपने ही सैनिकों की हत्या कर दी है। और सोचने वाली बात यह है कि बसु ने यह ट्वीट जैश-ए-मुहम्मद द्वारा हमले के लिए जिम्मेदारी का दावा करने के लंबे समय बाद पोस्ट किया है।
भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री लाना, उसे वाहन पर असेम्बल करना, कई दिन पहले से इलाके की रेकी करना और पूरा प्लान बनाने में अच्छा-खासा समय लगता है। यह स्थानीय सहायता के बिना संभव ही नहीं है।
आतंकियों के हमले का निशाना अब 'भारत देश' की जगह 'गोमूत्र पीने वाले हिन्दू' हो चुके हैं। अमरनाथ यात्रा, संकटमोचन मंदिर पर हुए हमले की यादें भी ताजा ही होंगी। इन्हें पढ़कर 'हिन्दूफोबिया' किसी को नज़र नहीं आता।
आतंकियों को पाकिस्तानी सत्ता के संरक्षण का जीता-जागता उदाहरण। 5 साल पीछे। मसूद अज़हर की वो रैली जहाँ से पठानकोट और पुलवामा हमले की पटकथा का लिखा जाना शुरू हो गया था।
लगातार धर्म की आड़ में आतंकियों को पालने वाले पाकिस्तान को अच्छे से यह बात मालूम है कि जो आतंक का बीज़ वो अपनी धरती पर लगाता है, उसकी जड़ें भी बनेंगी और वो फैलेंगी भी।
सेना और हमारे सुरक्षा बलों के जवान बाहरी ख़तरों से तो निपट लेंगे लेकिन ये 'हा-हा' करने वालों से कौन निपटेगा? इन्हें क्यों बर्दाश्त किया जा रहा है इस देश के 'अच्छे मुस्लिमों' द्वारा?
"पड़ोसी देश अगर ये समझता है कि जिस तरह के कृत्य वो कर रहा है, जिस तरह की साजिशें रच रहा है, उससे भारत में अस्थिरता पैदा करने में सफल हो जाएगा, तो वो बहुत बड़ी भूल कर रहा है।"
वीडियो में आतंकी डार कह रहा है कि जब तक यह वीडियो लोगों तक पहुँचेगा वो जन्नत पहुँच चुका होगा। उसने कहा है कि दक्षिण कश्मीर के लोग कश्मीर के लिए भारत से लड़ रहे हैं, अब मध्य कश्मीर और जम्मू को भी इस लड़ाई में उतर जाना चाहिए।