मोहिनी दत्ता को रतन की वसीयत में 588 करोड़ रुपए मिले। लोगों के मन में सवाल है कि परिवार के बाहर वसीयत में हिस्सा पाने वाले मोहिनी मोहन दत्ता आखिर कौन है।
माधुरी गुप्ता का मामला केवल एक अधिकारी द्वारा विश्वासघात की कहानी नहीं है, बल्कि यह व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा, भावनात्मक भेद्यता और संस्थागत निगरानी की विफलता के खतरनाक संगम का उदाहरण है