उनका यह दावा मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित था, जिसके लिए IndiaSpend को दोषी करार दिया गया था, जो हिंदू-विरोधी प्रचार फैलाने के लिए गलत आँकड़ों का इस्तेमाल करनेवाली वेबसाइट है।
सुतली बम पर तंज कसने वालों को, पकड़े गए लोगों को बेगुनाह बताने वालों को और NIA की बड़ी कामयाबी को बेबुनियाद बताने वालों को समझने की जरूरत है कि इन लोगों के पास से सिर्फ सुतली बम ही बरामद नहीं हुआ है।
फोटो के बारे में सर्च करते ही इस फोटो की हिस्ट्री हमारे सामने आ गई। इसके बाद हमने देखा कि 'ट्रूथ ऑफ गुजरात' नाम के एक वेबसाइट ने इस तरह के फोटो को कई बार 30 मार्च 2014 और फिर 2016 में भी शेयर करते हुए लोगों के फोटो से जुड़ी गलत जानकारी दी है।
पत्रकार गोयल शर्मा ने हिंदुओं को आक्रामक और मुस्लिमों को पीड़ित पक्ष के रूप में चित्रित करने से संबंधित डेटा में हेरफेर करने के तरीके का बड़े स्तर पर पर्दाफ़ाश किया।
नसीरुद्दीन शाह के ऐसे बयानों में नरेंद्र मोदी का विरोध स्पष्ट रूप से दिखता है। लेकिन, ऐसा भी लगता है कि नसीर अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए भी झूठ का सहारा लेते हैं।
‘द प्रिंट’ की स्थापना के बाद से शेखर गुप्ता को कई झूठ फैलाने के लिए जाना जाने लगा है। इस बार उन्होंने सूचना और प्रसारण मंत्रालय के बारे में फ़र्जी ख़बरें फैलाने का फ़ैसला किया है।