गौतम गंभीर की गुरुग्राम वाली घटना को लेकर दी गई 'सेकुलरिज्म और सहिष्णुता' वाली प्रतिक्रया 'भेंडिया आया' वाली कहानी को चरितार्थ करती है। एक सप्ताह भी नहीं हुआ और गौती पीएम मोदी की 'छपास और दिखास' वाली सलाह को भूल गए। और, जब सच सामने आया तो...
जिस देश को आज़ाद कराने की कोशिश में सावरकर ने अंग्रेजों द्वारा कालापानी की सज़ा पाई, उसी देश के आज़ाद होने के बाद की नेहरू सरकार ने सावरकर का मुँह पर ताला लगा दिया। नेहरू ने सावरकर के साथ सौतेला व्यवहार किया। जानिए कैसे लाल बहादुर शास्त्री ने किया सावरकर के साथ 'न्याय'....
यह एक ऐसे स्वतंत्रता सेनानी और क्रांतिकारी की दास्ताँ है, जिसे उसका वास्तविक हक कभी नहीं मिला। वर्तमान कॉन्ग्रेस को शायद जानकारी नहीं है। साल 1923-24 में कॉन्ग्रेस अधिवेशन की महात्मा गाँधी अध्यक्षता कर रहे थे, तो सावरकर के सम्मान में कविता पाठ किया गया था।
यह महज़ संयोग है या फिर साज़िशन ऐसा किया गया? क्या 'द वायर' की पोलिटिकल रिपोर्टिंग वाक़ई बकवास और अनुभवहीन है, या जान-बूझ कर चुनावों को प्रभावित करने के लिए ऐसे लेख लिखे गए?
चौंकाने वाली बात यह है कि राघव बहल के ख़िलाफ़ लन्दन में लगभग 273 करोड़ रुपए (31 मिलियन पाउंड) की संपत्ति ख़रीदने को लेकर आरोप है, जिस पर सरकारी जाँच एजेंसियों की तलवार लटक रही है।
निखिल ने हंगामा करते हुए कहा कि उन्हें मांड्या में एक महिला के हाथों हार मिली है, जो उनके लिए अपमानजनक बात है। निखिल ने अपने दादा और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा पर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी अध्यक्ष ने उन्हें मांड्या की भूलभुलैया में उलझा दिया और वहाँ आठ अपने विधायक होने की बावजूद उनका सांसद बनने का सपना चूर-चूर हो गया।
अपने शहर की बेरुखी और राज्य में कॉन्ग्रेस के ख़राब प्रदर्शन से नाराज़ बब्बर ने आलाकामन को अपना इस्तीफा भेज दिया। महाराष्ट्र में पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने भी प्रदेश अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है। अब तक 13 बड़े कॉन्ग्रेस नेता इस्तीफे की पेशकश कर चुके हैं।
मारे गए बच्चों की तो मजहबी पहचान बताई जा रही है लेकिन हत्यारोपियों की छिपाई जा रही है। ऐसे में क्षेत्र और प्रदेश में बेवजह का साम्प्रदायिक तनाव फैलने रहा है। सोशल मीडिया पर साम्प्रदायिक दुर्भावना के कारण लोग भोपाल और गुरुग्राम वाले मामले को भी जोड़कर इसमें जहर...
शाहिद अफरीदी ने उनकी जीत पर बधाई देने की जगह उन्हें बेवकूफ़ कह डाला। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शाहिद ने गौतम की जीत पर बोलते हुए कहा कि गौतम को अक्ल नहीं हैं फिर भी लोगों ने उन्हें वोट दे दिया है।