भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने खुद अपने ट्विटर हैंडल से ये जानकारी दी है कि नेताओं के बयानों को अनुशासन समिति के पास भेजा गया और उन्हें दस दिन दिनों के भीतर जवाब देना है। इस मामले में उन्होंने शुक्रवार (मई 17, 2019) को तीन ट्वीट किए।
सुप्रीम कोर्ट ने (30 अप्रैल) सीबीआई को कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार को हिरासत में लेकर पूछताछ पर पहले दी गई छूट को हटाने के लिए संतोषजनक सबूत पेश करने का निर्देश दिया था।
इसी बीच जम्मू-कश्मीर के पुलवामा और शोपियाँ से खबरें आ रही हैं कि गुरुवार (मई 16, 2019) को शुरू हुई मुठभेड़ में सुरक्षाबलों ने 6 आतंकियों को ढेर कर दिया है। इस दौरान एक जवान वीरगति को प्राप्त हो गया जबकि दो अन्य के जख्मी होने की खबर हैं।
सोनिया की इस क़वायद का मक़सद 23 मई को आने वाले चुनावी नतीजों से पहले विपक्षी दलों के बीच आपसी समझ विकसित कर लेना है, ताकि वो जनादेश हासिल करने के लिए राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से सरकार बनाने का पहला न्यौता पाने की स्थिति में ख़ुद को सक्षम साबित कर सकें।
हत्या करने के बाद आरोपित आलम सीधा मस्जिद भागता है। उसे यह आत्मविश्वास कहाँ से आया कि मस्जिद में छिपने से वह सज़ा से बच जाएगा? मीडिया से एक सवाल। अगर मारने वाले का कोई मज़हब नहीं तो बीच-बचाव करने वाले का मज़हब हाइलाइट करना ज़रूरी क्यों?
महिलाओं के गुप्तांगों पर लात मारी गई और उनके कपड़े फाड़ डाले गए। महिलाओं की इतनी निर्मम तरीके से पिटाई की गई कि वो काफी चीख-चिल्ला रही थीं। आरोपितों ने पुलिस के पहुँचने के बाद भी पीड़ितों को पीटना नहीं छोड़ा।
मायावती को पिछले 33 वर्षों से क़रीब से जानने की बात करते हुए नसीमुद्दीन ने कहा कि राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं होता। मायावती पर इस तरह का दबाव बनेगा कि वह भाजपा का हिस्सा बन जाएँगी। नसीमुद्दीन ने दावा किया कि जितना वह मायावती को जानते हैं, उतना वह स्वयं को भी नहीं जानतीं।
आज़ाद के इस बयान का सीधा इशारा यही था कि भाजपा को सरकार बनाने से रोकने के लिए कॉन्ग्रेस कोई भी 'त्याग' करने को मंज़ूर है और अगर राहुल गाँधी के अलावा किसी अन्य नेता के नाम पर सहमति नहीं बनती है तो कॉन्ग्रेस के समर्थन से किसी अन्य समर्थक दल के नेता को प्रधानमंत्री उम्मीदवार बनाया जा सकता है।
अगर राज्य स्वयं ही गुंडों को पाले, उनसे पूरा का पूरा बूथ मैनेज करवाए, उनके नेता यह आदेश देते पाए जाएँ कि सुरक्षाबलों को घेर कर मारो, उनके गुंडे इतने बदनाम हों कि वहाँ आनेवाला अधिकारी ईवीएम ही उन्हें सौंप दे, तो फिर इसमें चुनाव सही तरीके से कैसे हो पाएगा?