कार्यकर्ताओं को भरोसे में नहीं लिया या संचार व्यवस्था कमजोर रही? भीड़तंत्र वाले 'ठेकेदारों' के हिंसक आंदोलन के बाद क्या करे केंद्र सरकार? आगे इस तरह की बलैकमेलिंग से निपटने का रास्ता क्या हो?
कई लोग मान रहे हैं कि केंद्र सरकार सड़क पर उतर कर भीड़ और हिंसा के सहारे अपनी बात मनवाने की कोशिश करने वालों के सामने झुक गई है। अंदर के लोगों का कहना है कि आंतरिक सुरक्षा के लिए ये अनिवार्य था।
दिलचस्प बात ये है कि देश की आम महिलाओं से लेकर प्रतिष्ठित पदों पर रहने वाली महिलाओं को लेकर भद्दी राय देने वाले वीर दास आज भारत के लिबरल धड़े में मशहूर हैं।