ये साध्वी ऋतम्भरा ही थीं, जिन्होंने कहा, "हॉं हम हिंदू हैं, हिंदुस्तान हमारा है।" जिनमें खुलकर यह कहने का साहस था, "महाकाल बनकर दुश्मन से टकराएँगे, जहॉं बनी है मस्जिद, मंदिर वहीं बनाएँगे।"
तीन दशकों में पूरी दुनिया के सोचने, समझने और शिक्षा को बेहतर तरीके से पहुँचाने का तरीका बदल जाता है, लेकिन भारत उसी वामपंथी नीति पर अटका था, जो कि इसकी जड़ों को दीमक की तरह खोखला करता रहा।