हम्पी में उसी जगह पर हनुमान जी की विश्व की सबसे विशालकाय प्रतिमा का निर्माण करने का फैसला लिया गया है, जहाँ पहली बार भगवान राम की उनसे मुलाकात हुई थी। इसकी ऊँचाई 215 फीट होगी। मतलब अयोध्या के श्रीराम से 10 फीट कम!
चार बच्चों के पिता शरीफ बचपन से बसवन्ना की शिक्षाओं से प्रभावित रहे हैं। तीन साल से वे लिंगायत धर्म के बारे में शिक्षा ले रहे थे। बीते साल नवंबर में दीक्षा ली थी। अब 26 फरवरी को मुख्य पुरोहित की जिम्मेदारी वे सॅंभालेंगे।
जर्मनी में समुदाय विशेष को लेकर विरोध-प्रदर्शन चल रहे हैं। फ्रांस ने विदेशी इमामों को देश में नहीं आने देने का फरमान सुनाया है। ऐसा आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए किया गया है।
इस मंदिर का गुंबद दुनिया में सबसे ऊँचा है। मंदिर के निर्माण में अब तक 2 करोड़ किलो सीमेंट का प्रयोग किया जा चुका है। 10 हज़ार श्रद्धालु एक ही वक्त में पूजा कर सकते हैं। 20,000 लोगों के ठहरने की भी व्यवस्था होगी।
फराह खान ने बताया कि उन्होंने ये सुनिश्चित किया था कि 'मैं हूँ ना' का मुख्य विलेन मुस्लिम न हो। सहायक विलेन का सरनेम ख़ान होता है, जिसे अंत में पता चलता है कि उसे बहकाया जा रहा था। फिर वो देश के प्रति अपने प्यार को प्रदर्शित करते हुए आतंकवाद को अलविदा कह देता है।
भारत में ऐसा पहली बार हो रहा है कि जब कोई एनिमेटेड फ़िल्म संस्कृत भाषा में बनी हो। 'पुण्यकोटि' को रविशंकर वी ने अपने मित्रों और सोशल मीडियो के जरिए क्राउड फंडिंग कर बनाया है। इसे बनाने में 4 से 5 करोड़ रुपए का खर्च आया है। जिसमें संगीत इलैयाराजा ने दिया है।
रंगोली चंदेल ने दो हैरान करने वाले खुलासे किए हैं। इनमें से एक कंगना के करियर के शुरुआती दिनों की है। दूसरी तब की है जब उनका अभिनेता ऋतिक रोशन से झगड़ा चल रहा था।
एक साल में 'वन्दे भारत एक्सप्रेस' ने 3.8 लाख किलोमीटर की यात्रा तय की है और 92.29 करोड़ रुपए की कमाई की है। इसे फरवरी 15, 2019 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्र को समर्पित किया था।
THE के CKO ने बताया कि विभिन्न प्रयासों के कारण भारतीय संस्थानों की रैंकिंग में उछाल आया है और उच्च-शिक्षा व्यवस्था में सुधार हो रहा है। उन्होंने 2017 में स्थापित 'इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एमिनेंस स्कीम' की भी तारीफ की, जिसके तहत भारत में शैक्षिक संस्थानों की रैंकिंग की जाती है।
शिवाजी महाराज की तलवार पर 10 हीरे जड़े हुए थे, जो इस वक्त लंदन में हैं। उनकी तलवार प्रिंस ऑफ वेल्स एडवर्ड सप्तम को नवंबर 1875 में उनकी भारत यात्रा के दौरान कोल्हापुर के महाराज ने उपहार स्वरूप भेंट की थी। लेकिन कभी भी इस तलवार को वापस लाने के कोशिश नहीं की गई।