दिल्ली पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया मेट्रो स्टेशन से 34 वर्षीय आमिर हमजा खान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि आमिर दिल्ली के जाकिर नगर का रहने वाला है। उसे सीआईएसएफ द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया मेट्रो स्टेशन के फ्रिस्किंग पॉइंट पर एक पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया है।
इंटरनेशनल नंबरों से व्हाट्सप्प ग्रुप में घुस कर ABVP के नाम पर बातचीत की गई। छात्र-छात्राओं को कॉल कर के धमकियाँ और गालियाँ दी जा रही हैं। वेलेंटिना ने बताया कि शॉल के अंदर पत्थर छिपा कर आए उपद्रवियों ने डंडों से भी हमला किया। रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए ऐसा किया गया।
सोशल मीडिया पर वामपंथी गिरोह के लोगों द्वारा रिपब्लिक टीवी को केंद्र सरकार का गुणगान करने वाले चैनल के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। ऐसे में इस चैनल के रिपोर्टर को देखकर जेएनयू प्रदर्शनकारी के द्वारा माँ की गाली देना वामपंथियों के विरोध से ज्यादा मोदी व हिंदू घृणा दर्शाती है।
क्या नकाबपोश गुंडी और शाम्भवी, दोनों एक ही हैं? सच जानने के लिए हमें दोनों तस्वीरों को बारीकी से देखना चाहिए। दोनों की शारीरिक बनावट एक-दूसरे से बिल्कुल अलग है। शर्ट का चेक पैटर्न भी अलग। जूते से लेकर कलावा तक में अंतर - लेकिन प्रोपेगेंडा फैलाना ही एकमात्र काम हो तो कोई क्या करे!
"...लेकिन 5 मिनट के अंदर ही ऐसा लगा कि हॉस्टल के शीशे टूट रहे हैं, मैं लॉबी में गया, देखा नकाबपोश लोग हाथों में लोहे का रॉड तथा डंडे लिए पेरियार हॉस्टल के हरेक कमरे में घुसते चले जा रहे हैं, और डंडों से बेतरतीब प्रहार करके दरवाजे और खिड़कियों को तोड़ रहे हैं।"
ABVP को बदनाम करने के लिए जिस ग्रुप चैट का स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर JNU की पूर्व अध्यक्ष गीता द्वारा शेयर किया गया, उसमें कई नंबर साफ नजर आए। जब इन नंबरों की पड़ताल हुई तो एक नंबर उसमें अमन सिन्हा का निकला। अमन सिन्हा कोई और नहीं बल्कि वामपंथी है, कन्हैया से लेकर उमर खालिद और अफजल गुरु तक वो...
"जब कुछ छात्राएँ मैनुअली रजिस्ट्रेशन करवाने जा रहे थीं तो उनके हिप पर, उनके प्राइवेट पार्ट्स पर लाठी-डंडों से हमला किया गया। इतना ही नहीं कई छात्राओं को बाथरूम में ले जाकर उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।"
यूनिवर्सिटी ने मंडल का पक्ष जानने के लिए उनके पास कई स्पीड पोस्ट व ईमेल भेजे लेकिन उनकी तरफ़ से कोई जवाब नहीं आया। मंडल ने एक बार भी जवाब देना ज़रूरी नहीं समझा। इसीलिए, अब निर्णय लिया गया है कि उन्हें भविष्य में लेक्चर के लिए आमंत्रित नहीं किया जाएगा।
एबीवीपी ने दिल्ली पुलिस से गुहार लगाई है कि उसके छात्रों को बचाया जाए। कई छात्राओं ने कुर्सी व टेबल के नीचे छिप कर ख़ुद को मास्क पहने गुंडों के आतंक से बचाया। जबकि वामपंथी छात्र संगठनों ने JNU में हुई हिंसा का आरोप एबीवीपी पर ही लगाया है।
बीकानेर में दिसंबर में 261 जबकि जोधपुर में 146 बच्चों की मौत। पूरे साल का आँकड़ा और भी भयानक - दोनों जिलों में 2433 बच्चों की मौत। राज्य के सरकारी तंत्र ने वजह बताई - कई बच्चों को देरी से अस्पताल लाया गया, कई नवजात कम वजन वाले थे। लेकिन सरकारी बयान के उलट की सच्चाई - एक बेड पर तीन-तीन बच्चों का इलाज, 40 में से 10 वेंटिलेटर ख़राब।