वायरल हुए इस वीडियो के पीछे के प्रोपेगेंडा को समझना है तो इसे किन हस्तियों द्वारा कैसे शेयर किया गया, ये देखें। इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर ने लिखा, "ओह यस- उनके कपड़ों को देखकर आप बता सकते हैं कि वो कौन हैं।"
यह डिटेंशन सेंटर उन लोगों के लिए आवास के रूप में होगा जिन्होंने अवैध रूप से देश में प्रवेश किया और इनमें वे विदेशी भी शामिल हैं जिनके वीज़ा और पासपोर्ट की समय-सीमा समाप्त हो गई थी। विदेशी मूल के अंडर-ट्रायल क़ैदियों और जो लोग यहाँ जेल की अवधि पूरी कर चुके हैं और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे हैं.....
"हिंसा के दौरान हमने पत्थर खाए। हमारे 263 पुलिसकर्मी घायल हैं। कानपुर में हमारे जवान पर पेट्रोल बम फेंका गया, जिसमें उसका सिर फट गया है। जो भी आरोप लग रहे हैं, उसकी जाँच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। स्थानीय प्रशासन को मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लिया जा रहा है। निर्दोष लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होगी। वहीं दोषी बख्शे नहीं जाएँगे।"
डॉक्टर के मुताबिक उन लोगों ने इस बीच उनकी 3 वीडियो बनाई और बाद में उन्हें नारोल ड्रॉप कर दिया। जिसके बाद वे शिकायत करने थाने पहुँचे और आपबीती पुलिस को बताई।
"नैशनल एनआईसीयू रेकॉर्ड के अनुसार, शिशुओं की 20 प्रतिशत मौतें स्वीकार्य हैं, जबकि कोटा में शिशु मृत्यु दर 10 से 15 प्रतिशत है जो खतरनाक नहीं है क्योंकि अधिकतर बच्चों को गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था।"
ईसाई संगठनों की अगुआई कर रहे सोनू जाफ़र ने अपनी शिक़ायत में बताया कि शो की एंकर फ़राह खान ने भारती सिंह और रवीना टंडन को एक अंग्रेज़ी शब्द ‘Hallelujah’ लिखने को कहा। इन दोनों ने ब्लैकबोर्ड पर ‘Hallelujah’ शब्द की स्पेलिंग लिखी। इसी दौरान...
24 साल तक कानूनी लड़ाई के अलावा नाम्बी नारायणन की एक कहानी और भी है। कहानी राजनीति और साजिश वाली। उस कहानी के अनुसार पूर्व रॉ अधिकारी ने भारत के उप-राष्ट्रपति रहे हामिद अंसारी पर कई गंभीर आरोप लगाए। यह तब हुआ जब एक पत्रकार चिरंजीवी भट ने...
शुक्रवार को होने वाली जुमे की नमाज़ के मद्देनज़र पूरे उत्तर प्रदेश में हाई अलर्ट घोषित। शरारती तत्वों पर ड्रोन से भी नज़र रखी जा रही है। 20 ज़िलों में इंटरनेट सेवा बंद। इसके अलावा, राज्य में पहले से ही धारा-144 लगी हुई है।
जिस पैम्पलेट में प्रोफेसरों के हस्ताक्षर के साथ दावा किया गया था कि 51 प्रोफेसर CAA के विरोध में हैं, फ़र्ज़ी है। उस पैम्पलेट में कहा गया था कि ये क़ानून स्वीकार्य नहीं है और ये बँटवारे की भावना फैला रहा है। अब कई प्रोफेसरों ने ऐसी किसी बात का समर्थन करने से इनकार किया है।
सीपीआई सरीखे राजनीतिक दलों ने जनरल रावत के बयान की आलोचना की है। कॉन्ग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कहा कि नेता वो भी नहीं होते हैं, जो अपने लोगों को सांप्रदायिक हिंसा के लिए उकसाते हैं। साथ ही उन्होंने पूछा कि क्या 'जनरल साहब' उनकी बातों से सहमत हैं?