विचार

जो बिहार में सब जानते हैं वह नीतीश कुमार ने खुद क्यों कहा, PM मोदी ने उन्हें ‘जरूरत’ क्यों बताया?

यह महज संयोग नहीं, प्रयोग है। इसका असर हुआ तो एनडीए उस स्थिति में पहुँच सकती है, जिसका अनुमान कोई नहीं लगा रहा।

कुरान और गीता में हिंसा एक नहीं है: ‘अधर्मी से युद्ध’ और ‘विधर्मी को काटने’ में हिंदू-मुसलमान का अंतर है

जब बर्बरता तुम्हारी शिक्षा की आधारशिला है, हत्या तुम्हारे लिए एक सम्मानजनक कर्म है, बलात्कार पुण्य और काफिरों के धार्मिक स्थल तोड़ना जन्नत-उल-फिरदौस में कमरे रिजर्व करवाता है, फिर कोई सामान्य बुद्धि-विवेक वाला तुमसे या तुम्हारे मजहब को स्नेहाशिक्त भाव से कैसे देख सकता है?

आखिर कैसे लिबरल्स के ‘पोस्टर बॉय’ बन गए तेजस्वी यादव? किस आधार पर माँग रहे हैं वोट?

भारतीय 'लिबरलिज़्म' का एक नया उभरता चेहरा हैं बिहार के राजद नेता तेजस्वी यादव। उनके वोट माँगने का आधार है क्या? क्या हैं तेजस्वी के कीर्तिमान?

माँ की गोद में बेटे का सर, फटे सर से निकला दिमाग भूमि पर: हिन्दुओं की गति यही है प्यारे!

हिन्दू 'बीरबल की खिचड़ी' के उस ब्राह्मण की तरह है जो तुम्हारे शाही किले में जलते दीपक की लौ से भी ऊष्मा पाता है। हिन्दू को बस इससे मतलब है कि उसके आराध्य का मंदिर बन रहा है। लेकिन सवाल यह है, हे सत्ताधीश! कि क्या तुम्हें हिन्दुओं से कुछ मतलब है?

लालू का MLA, दलित लड़की से रेप… लेकिन ‘बाबू साहब के सामने सीना तानकर चलते थे’ के नाम पर वोट!

जब तक ये फैसला आया तब तक अपराधियों में से एक मर चुका था, लेकिन पच्चीस साल बीतने पर भी एक दूसरा अपराधी फरार ही...

सरकारी बूटों तले रौंदी गई हिन्दुओं की परम्परा, गोलियाँ चलीं, कहारों के कंधों के बजाय ट्रैक्टर, जेसीबी से हुआ विसर्जन

इस बार परम्पराओं और मान्यताओं को सरकारी बूटों तले रौंदने के बाद बिना आरती इत्यादि के ही दूसरी देवियों के बाद बड़ी दुर्गा को विसर्जित किया गया।

कितना आवश्यक है माँ दुर्गा को हर नवरात्र में सैनिटरी पैड पर उकेरना?

वामपंथीऔर उदारवादियों को यदि किसी मजहब में ज्ञान देना ही है तो उन्हें उन मजहब से शुरुआत करनी चाहिए, जहाँ समाज को शिक्षित करने की सजा गला रेतने के रूप में मिलती है।

फ्रांस के राष्ट्रपति ने इस्लाम के बारे में जो कहा, वही बात हर राष्ट्राध्यक्ष को खुल कर बोलनी चाहिए

इमैनुअल मैक्राँ ने वह कहा जो सत्य है। इस्लाम को उसके मूल रूप में जानना और समझना, उससे घृणा करना कैसे हो गया!

कपटी वामपंथियो, इस्लामी कट्टरपंथियो! हिन्दू त्योहार तुम्हारी कैम्पेनिंग का खलिहान नहीं है! बता रहे हैं, सुधर जाओ!

हिन्दुओ! अपनी सहिष्णुता को अपनी कमजोरी मत बनाओ। सहिष्णुता की सीमा होती है, पागल कुत्ते के साथ शयन नहीं किया जा सकता, भले ही तुम कितने ही बड़े पशुप्रेमी क्यों न हो।

जनसंघ: ‘राष्ट्रवाद’ को आवाज देने वाला पहला राजनीतिक दल, जिसके कार्यकर्ता सीमा से सियासत तक डटे रहे

1962 में चीन और 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में जनसंघ और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने सिविक और पुलिस ड्यूटी का किरदार निभाया था।

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