यूपी-बिहार ही नहीं, पूरे देश में कई ऐसे बड़े नेता हैं, जो आज राजनीति के इस मुकाम पर इसीलिए हैं क्योंकि उन पर कभी जयप्रकाश नारायण का हाथ था। लेकिन, इन नेताओं की प्राथमिकता में जनता कभी रही ही नहीं।
'भाजपा तुझसे बैर नहीं पर नीतीश तेरी खैर नहीं' की तर्ज पर चिराग पासवान की एलजेपी मैदान में है। देखना दिलचस्प होगा कि चुनावी ऊंट चिराग की करवट बैठता है या नहीं!
पासवान समाजवादी परिपाटी के नेता थे। उनकी शुरुआती राजनीति संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी से ही आरम्भ हुई थी। परन्तु उनका नाम हाजीपुर के साथ अभिन्न रूप से जुड़ गया। वे आठ बार हाजीपुर से चुनाव जीते।
'ग्वेरावादियों' ने ऐसी किसी भी चीज़ से मुँह मोड़ लिया, जो ग्वेरा की आदर्श छवि के साथ फिट नहीं बैठती। ग्वेरा निश्चित ही एक जल्लाद था। उसकी नजरों में इंसानों की मौत कुछ भी नहीं थी।
योगी वो राजनेता बने हुए हैं, जिनसे मीडिया नफरत करना पसंद करती है। पहले लाल कृष्ण आडवाणी, फिर नरेंद्र मोदी और अब मीडिया ने योगी आदित्यनाथ को अपना पसंदीदा लक्ष्य बना लिया है।
यहाँ कट्टरपंथी और वामी-कामी गिरोह सत्तू-नमक बाँध कर बैठा है कि जब तक दो भी जिंदा रहेगा आपसे में ही लड़ मरेंगे, एक ही बचा तो हाथ में तलवार और पैर के अँगूठे और दूसरी उँगली के बीच में कटार फँसा कर लड़ता रहेगा। उसका जन्म ही अराजकता फैलाने के लिए हुआ है, हिंसा उसकी नियति है, हिन्दूघृणा उसका न बदल सकने वाला पाठ्यक्रम है, आग लगाना उसकी मनोवृत्ति है, दंगा उसके लिए मजहबी आयोजन है…