विचार

लालू का MLA, दलित लड़की से रेप… लेकिन ‘बाबू साहब के सामने सीना तानकर चलते थे’ के नाम पर वोट!

जब तक ये फैसला आया तब तक अपराधियों में से एक मर चुका था, लेकिन पच्चीस साल बीतने पर भी एक दूसरा अपराधी फरार ही...

सरकारी बूटों तले रौंदी गई हिन्दुओं की परम्परा, गोलियाँ चलीं, कहारों के कंधों के बजाय ट्रैक्टर, जेसीबी से हुआ विसर्जन

इस बार परम्पराओं और मान्यताओं को सरकारी बूटों तले रौंदने के बाद बिना आरती इत्यादि के ही दूसरी देवियों के बाद बड़ी दुर्गा को विसर्जित किया गया।

कितना आवश्यक है माँ दुर्गा को हर नवरात्र में सैनिटरी पैड पर उकेरना?

वामपंथीऔर उदारवादियों को यदि किसी मजहब में ज्ञान देना ही है तो उन्हें उन मजहब से शुरुआत करनी चाहिए, जहाँ समाज को शिक्षित करने की सजा गला रेतने के रूप में मिलती है।

फ्रांस के राष्ट्रपति ने इस्लाम के बारे में जो कहा, वही बात हर राष्ट्राध्यक्ष को खुल कर बोलनी चाहिए

इमैनुअल मैक्राँ ने वह कहा जो सत्य है। इस्लाम को उसके मूल रूप में जानना और समझना, उससे घृणा करना कैसे हो गया!

कपटी वामपंथियो, इस्लामी कट्टरपंथियो! हिन्दू त्योहार तुम्हारी कैम्पेनिंग का खलिहान नहीं है! बता रहे हैं, सुधर जाओ!

हिन्दुओ! अपनी सहिष्णुता को अपनी कमजोरी मत बनाओ। सहिष्णुता की सीमा होती है, पागल कुत्ते के साथ शयन नहीं किया जा सकता, भले ही तुम कितने ही बड़े पशुप्रेमी क्यों न हो।

जनसंघ: ‘राष्ट्रवाद’ को आवाज देने वाला पहला राजनीतिक दल, जिसके कार्यकर्ता सीमा से सियासत तक डटे रहे

1962 में चीन और 1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध में जनसंघ और आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने सिविक और पुलिस ड्यूटी का किरदार निभाया था।

बिहार में ई बा: कुछ लोगों के निजी स्वार्थ और धंधे पर चोट है मैथिली ठाकुर का गाना

दहेज़ के बारे में सोचा है? एक तो इसमें ‘ज’ के नीचे जो बिंदी होती है, वो देवनागरी लिपी में होती ही नहीं। यानी, ये देशज नहीं, विदेशज शब्द है। दहेज़ जैसा कोई सिद्धांत भारत में नहीं होता था।

हिन्दुओं की हत्या पर मौन रहने वाले हिन्दू ‘फ़्रांस की जनता’ होना कब सीखेंगे?

हमें वे तस्वीरें देखनी चाहिए जो फ्रांस की घटना के पश्चात विभिन्न शहरों में दिखती हैं। सैकड़ों की सँख्या में फ्रांसीसी नागरिक सड़कों पर उतरे यह कहते हुए - "हम भयभीत नहीं हैं।"

ऐसे लोगों के लिए किसी भी सेकुलर देश में जगह नहीं होनी चाहिए, वहीं जाओ जहाँ ऐसी बर्बरता सामान्य है

जिनके लिए शिया भी काफिर हो चुका हो, अहमदिया भी, उनके लिए ईसाई तो सबसे पहला दुश्मन सदियों से रहा है। ये तो वो युद्ध है जो ये बीच में हार गए थे, लेकिन कहा तो यही जाता है कि वो तब तक लड़ते रहेंगे जब तक जीतेंगे नहीं, चाहे सौ साल लगे या हजार।

जिन्ना समर्थक हिन्दू अर्थशास्त्री बृज नारायण: जिन्हें मजहबी भीड़ ने उनके मजहब के लिए मार डाला

जिन्ना समर्थक प्रो बृज नारायण को जिस भीड़ ने अपना शिकार बनाया, उसे सिर्फ हिंदुओं को मारना था। 2 दिन पहले लाहौर में आधा हिन्दू, आधा सिख थे, 2 दिन बाद सिर्फ..

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें