विचार

मार्क्स चचा नहीं जानते थे कि पुलिस की लाठी से नास्तिक वामपंथियों का मजहब बाहर निकल आएगा

जब कोई उमर खालिद UAPA के तहत गिरफ्तार होगा तो उसके पास जमानत के लिए उसका मजहब ही उसकी प्रेग्नेंसी रिपोर्ट हो जाएगा। मार्क्स चचा ये नहीं जानते थे।

क्या है #UPSCjihad? क्या खास समुदाय को बढ़ावा देती है UPSC: अजीत भारती का वीडियो | Ajeet Bharti on Suresh Chavhanke, Sudarshan TV, UPSC

शो में चैनल ने उड़ान योजना का हवाला दिया है, जिसमें समुदाय विशेष को छात्रवृत्ति के रूप में 25000 से 1 लाख रुपए तक की मदद दी जाती है।

चीन के खिलाफ बोलने से बचने के लिए तो नहीं भागे राहुल-सोनिया? मॉनसून सत्र के आधे हिस्से में नहीं रहेंगे दोनों

ये सवाल तो उठेगा ही कि क्या सोनिया गाँधी और राहुल चीन के डर से संसद सत्र के पहले हिस्से में भाग नहीं ले रहे हैं? चीन की आलोचना से बच रहे?

हिन्दी केवल उत्तर भारत की नहीं: हिन्दी दिवस को हिन्दी बोलने वालों तक नहीं करें सीमित, न ही किया जाना चाहिए

हिन्दी का दायरा और महत्व केवल एक दिन तक सीमित नहीं किया जा सकता है और न ही किया जाना चाहिए। और हाँ, हिन्दी केवल उत्तर भारत की भाषा नहीं है।

तेजप्रताप के लिए रघुवंश ‘एक लोटा पानी’… फिर उनके इस्तीफे से लालू इतने बेचैन क्यों?

भले रघुवंश प्रसाद सिंह का प्रभाव सीमित हो। लेकिन लालू जानते हैं कि उनके बिना तेजस्वी की चुनावी राजनीति सुरक्षित नहीं है। सो, मनाने की कोशिशें जारी है।

मोदी किसानी-गाय-बैल-मछली की बात कर रहा है… हम लड़ेंगे साथी, पौव्वा पीकर उससे लड़ेंगे

पिछले डेढ़-दो दशकों में हमने कभी एक राज्य में एक साथ सिर्फ कृषि क्षेत्र के लिए इतनी अलग-अलग परियोजनाओं का नाम सुना हो - याद नहीं!

अब नागाओं का वास्तविक हितधारक और हितैषी नहीं है NSCN (IM): अन्य स्टेकहोल्डर्स को भी शामिल किए जाने की माँग

एनएससीएन (आईएम) को नागा हितों का एकमात्र प्रतिनिधि संगठन मानना और सिर्फ इसके साथ ही शांति-वार्ता और संघर्ष-विराम करना ऐतिहासिक रणनीतिक भूल है।

शिक्षक दिवसः नेहरू के यूरोपियन पाठ का सरकारी पर्व

एक आत्महीन देश ही किसी ‘उन्नत’ देश को धन्यभाव से देखता और पिछलग्गू बन जाता है। नेहरू ने भारत को उसकी मूल संस्कृति से काटकर असल में ऐसा ही देश बना दिया जो अपनी हर गति, हर उन्नति के लिए परमुखापेक्षी हो गया।

बेंगलुरु, माल्मो, ऑस्लो: इस कोढ़ का क्या इलाज है? | Ajeet Bharti speaks on Sweden riots

आपने कई लिबरल्स को इन दंगों को जस्टिफाई करते भी देखा होगा कि उनका कुरान जला दिया गया तो उन्होंने थोड़ा सा ये कर दिया तो क्या हो गया।

…जब RSS के मंच से प्रणब मुखर्जी ने भरी थी ‘राष्ट्रवाद’ की हुँकार

RSS मुख्यालय में प्रणब मुखर्जी ने देश के प्राचीन इतिहास से लेकर उसकी संस्कृति तक जो कुछ कहा था, वह बीते कल में भी प्रासंगिक था और आने वाले कल में भी प्रासंगिक रहेगा।

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