इस बार निशाने पर "भारत" शब्द है। इसके पीछे जो कारण दिया गया है वह है 'भारत ' का एक संस्कृत शब्द होना और 'इंडिया' के लिए भारतीय भाषाओं में 'भारत' का उपयोग किया जाना।
प्रवासियों की कठिनाई को देख कर 'मगध-मित्र' का सोशल मीडिया पर जन्म हुआ। इसका उद्देश्य राजनैतिक दलों की सीमाओं से उठ कर, जिस राज्य अथवा शहर में जिस किसी वालंटियर या स्वयंसेवक समूह का कार्यक्षेत्र हो, उससे वहाँ फँसे श्रमिकों तक सहायता पहुँचाना था।
पहले स्तर के प्रयास में 1700-2000 गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को प्रतिदिन मुफ्त भोजन वितरित किया जा रहा है। दूसरे स्तर का प्रयास इससे वृहत है। इसे "सीकर्स एंड गिवर्स" प्लेटफॉर्म के नाम से समझा जा सकता है। यहाँ एक वो हैं, जो सहायता पाना चाहते हैं और दूसरे वो जो सहायता करना चाहते हैं। दोनों को आपस में कनेक्ट कर...
नंदिता दास का यह बयान अपने आप में गलत नहीं है, क्योंकि सच में भारत में एक महान विभाजन मौजूद है। लेकिन यह स्टेटमेंट किसकी तरफ से आया है जब आप यह सोचते हैं तो मुँह दबा कर हँसते हुए यह सोचने को मजबूर हो जाते हैं कि आखिर कोई खुलेआम इतना दोमुँहा बर्ताव कैसे कर लेता है।
एक ओर विधिपूर्वक किए गए सभी धार्मिक अनुष्ठान यानी मजहबी इमाल और दूसरी तरफ रोग पीड़ित प्राणियों के प्राणों की रक्षा का कार्य, ये दोनों कर्म समान रूप से पुण्य देने वाले हैं। यानी इस समय डॉक्टर, सुरक्षाकर्मी, सफाईकर्मी जो कार्य कर रहे हैं वो किसी धार्मिक अनुष्ठान से कम नहीं है। इसलिए धर्म के नाम पर धर्म के कार्य में बाधा डालने का अधार्मिक काम करना बंद करें।
6 प्रमुख उद्देश्यों के साथ तबलीगी जमात की एक सबसे बड़ी शर्त और विशेषता इसकी गोपनीयता है। इसी गोपनीयता ने इसकी हरकतों पर हमेशा आवरण का काम किया है। तबलीगी समय के साथ कट्टर जिहादी समूहों में बढ़ते गए और यह विश्वास करने लगे कि 'अच्छे मुस्लिमों' को इसी जीवन में यातनाएँ भोगनी चाहिए।
राजदीप सरदेसाई इसे 'ब्लडी दिवाली' कहते हैं। अरशद वारसी को देश की जनता 'स्टुपिड' नज़र आती है। सोनम कपूर का कुत्ता डर जाता है। शशि थरूर का पॉवर ग्रिड फेल हो जाता है। आख़िर जमातियों का मजहब न देखने की सलाह देने वालों ने '9 बजे 9 मिनट्स' में धर्म कैसे ढूँढ लिया?
जनसंघ की जड़ें RSS और अन्य धार्मिक, सांस्कृतिक एवं राष्ट्रवादी आन्दोलनों और संगठनों से जुड़ी थीं। इसीलिए, भाजपा का इतिहास समझने के लिए हमें संघ के साथ-साथ आर्य समाज और हिन्दू महासभा के इतिहास को भी देखना पड़ेगा। आज के 'घर वापसी' अभियान को ही लें तो इसकी जड़ें आर्य समाज के शुद्धि आंदोलन में है।
प्राइम टाइम देखना फिर भी जारी रखूँगा, क्योंकि मुझे गर्व है आप पर कि आप लोगों की भलाई सोचते हैं। बीच में किसी दिन थूकने वालों और वार्ड में अभद्र व्यवहार करने वालों पर भी प्राइम टाइम कीजिएगा। और हाँ! इस काम के लिए निधि कुलपति जी या नग़मा जी को मत भेज दीजिएगा। आप आएँगे तो आपका देशप्रेम सामने आएगा, और उसे दिखाने में झिझक क्यूँ?
प्रार्थना पुरुषार्थ का स्थगन नहीं है और यही वजह है कि प्रार्थना में कुछ भी अवैज्ञानिक नहीं है। Covid-19 को रोकने के सभी प्रयास हमारी शुभकामनाओं से बल पाएँगे और हमें निर्धारित निर्देशों का पालन करने की प्रेरणा देंगे। दवा हमारे शरीर की और दुआ हमारे मन की इम्यूनिटी को बढ़ाती है।