विचार

डियर शेहला सबूत तो जरूरी है, वरना चर्चे तो आपके बैग में कंडोम मिलने के भी थे

हम आपकी आजादी का सम्मान करते हैं। लेकिन, नहीं चाहते कि य​ह आजादी उन टुच्चों को भी मिले जो आपके कंडोम प्रेम की अफवाहें फैलाते रहते हैं। बस यही हमारे और आपके बीच का फर्क है। और यही भक्त और लिबरल होने का भी फर्क है।

खोखले लिबरलो, वामपंथियो! तुमने ढंग से पत्रकारिता की होती, तो हमारी ज़रूरत ही नहीं पड़ती

पहले तो हमें पत्रकार ही नहीं माना, फिर कहा इनकी भाषा ठीक नहीं है, फिर याद दिलाया कि मर्यादा लाँघ रहे हैं... ये सब इसलिए कि इनकी हर नग्नता, हर झूठ को हमने परत दर परत छीला है। अब वामपंथी बिलबिला रहे हैं क्योंकि लोग इन्हें पढ़ते भी हैं तो बस गाली देने के लिए।

भारत, धर्म और कानून: ‘आधुनिक’ भारतीय मानस की औपनिवेशिक दासता

हर भारतीय उद्गम का संस्थान कटघरे में खड़ा हो जीवित रहने, अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए गुहार करता, तर्क-वितर्क करने पर मजबूर दिखता है।

कश्मीरी औरतें जो हवस और जहन्नुम झेलने को मजबूर हैं

दहशतगर्दी के शुरुआती दिनों में आतंकियों को हीरो समझा जाता था। उन्हें मुजाहिद कहकर सम्मान भी दिया जाता था। लोग अपनी बेटियों की शादी इनसे करवाते थे लेकिन जल्दी ही कश्मीरियों को यह एहसास हुआ कि आज़ादी की बंदूक थामे ये लड़ाके असल में जिस्म को नोचने वाले भेड़िये हैं।

नेहरू-शेख की दोस्ती के कसीदों में ही छिपा है कश्मीर का शोकगीत, खुसरो की कविता से नहीं बदलेगा इतिहास

खुसरो की कविताओं से पहले कल्हण की राजतरंगिणी को याद करना जरूरी है, जिसमें कश्मीर को 'कश्यपमेरू' बताया गया है। कहा जाता है कि महर्षि कश्यप श्रीनगर से तीन मील दूर हरि-पर्वत पर रहते थे। जहाँ आजकल कश्मीर की घाटी है, वहाँ अति प्राचीन प्रागैतिहासिक काल में एक बहुत बड़ी झील थी, जिसके पानी को निकाल कर महर्षि कश्यप ने इस स्थान को मनुष्यों के बसने योग्य बनाया था।

ओवैसी जैसे लोग शरीर पर विष्ठा लेप लेंगे अगर मोदी कह दे कि फ्लश करना चाहिए

ओवैसी ब्रीड के तमाम नेता हमेशा भीम-मीम से लेकर तमाम अदरक-लहसुन करते रहते हैं। और सबके केन्द्र में यही बात होती है कि देखो हिन्दू तुमको काटने की तैयारी में है, तुम्हारे बकरीद का बकरा छीन लेगा, तुम्हें अब बच्चे पैदा नहीं करने देगा, तुम्हारे बच्चों को नपुंसक बना देगा।

370 का हटना: देश के स्वाभिमान और विकास का सूरज उगना… लेकिन विरोधियों का मुरझाना

तुष्टीकरण और वोटबैंक की राजनीति करने वाले दलों के लिए 370 के उन्मूलन का विरोध सैद्धांतिक नहीं, अपितु अवसरवादी और पोल खुलने के भय से उपजा है। क्योंकि वे जानते हैं कि जम्मू-कश्मीर से इस कलंक के समाप्त होने के बाद अब वहाँ निजी निवेश के द्वार खुल जाएँगे, जिससे वहाँ विकास की संभावना बढ़ेंगी।

कश्मीर पर The Wire की कवरेज घटिया हिन्दूफ़ोबिक प्रोपेगंडा के अलावा कुछ नहीं है

वायर की पूरी कश्मीर रिपोर्टिंग केवल और केवल झूठ और प्रोपेगंडा पर ही आधारित है। यही नहीं, इसका मकसद भी केवल भारत की बुराई नहीं, बल्कि 'हिन्दू फ़ासीवाद', 'डरा हुआ मुसलमान' के दुष्प्रचार से हिन्दुओं को बदनाम करने के साथ दबाए रखना, और 'इस्लाम खतरे में है' के हौव्वे को भड़काकर जिहाद को बढ़ावा देना है।

कश्मीर में पंडित सुरक्षित है और कट्टरपंथी आतंक में हैं: भारतीय मीडिया की पाक अकुपाइड पत्रकारिता

क्या लद्दाख के बौद्ध लोगों का डर नाजायज है कि जब कश्मीरी आतंकी वहाँ लहसुन-ए-हिन्द चिल्लाकर नारा-ए-अदरक लगाते आएँगे तो उन्हें वहाँ से भाग कर कहीं और नहीं जाना पड़ेगा?

राहुल गॉंधी वो बच्चा हैं जिसे स्कूल नहीं जाना पर क्लासरूम में सीट सबसे आगे चाहिए

लोकतंत्र की दुहाई देकर राहुल गॉंधी के लिए पहली कतार में सीट मॉंगने का कोई मौका जाया नहीं करने वाली कॉन्ग्रेस के निशाने पर अब लोकतांत्रिक मूल्य हैं। स्वतंत्रता दिवस के जश्न के मौके पर लाल किले से सोनिया-राहुल का गायब रहना और प्रणब मुखर्जी को ​भारत रत्न से नवाजे जाने के समारोह से उनकी दूरी बानगी भर।

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