विचार

रोहिंग्या से नेहरू तक, Howdy Modi पर लोगों ने अर्बन नक्सलियों के कुतर्कों को एक-एक कर काटा

अनैतिक मार्केटिंग के तीन “सी” (Convince, Confuse और Corrupt) का इस्तेमाल करने की पुरजोर कोशिश की गई और किसी तरह से Howdy Modi से कुछ अच्छा न निकल जाए, ये प्रयास हुआ। थोड़ी सी फजीहत पर जो मान जाए वो लिबटार्ड कैसा? इसलिए इतनी बेइज्जती पर उनका मन नहीं भरा।

दलित बच्ची का रेप मुस्लिम करें तो ओके है, क्योंकि वो तो अपने लोग हैं न!

क्योंकि चुनाव आने में अभी थोड़ा समय है और बलात्कारी जब अपने ही जात-बिरादरी के हों, तो उनके बारे में लिखने पर क्या पता नरक-वरक जाना पड़ जाए, या कोई पूछ ले कि क्या इसी दिन के लिए अवार्ड दिया था? क्या इसी दिन के लिए तुम्हें भीड़ दे कर खड़ा किया था, तुम्हें नेता बनाया था?

सेक्युलर सरकारों ने हिंदुओं को बनाया दोयम दर्जे का नागरिक, मंदिरों की संपत्ति पर किया कब्जा

मंदिरों की संपत्ति तो पहले ही सरकारी कब्जे में है। सबसे ज्यादा ज़मीनों वाले चर्च और वक्फ बोर्ड को तो सरकारी नियंत्रण से मुक्त रखा गया है, लेकिन सरकार मंदिरों की जमीनें समय-समय पर, किसी न किसी बहाने से बेचती रही है।

कॉन्ग्रेस सरकारों की कर्जमाफी: किसानों को नहीं मिली राहत, यूपी पर गला फाड़ने वाला मीडिया भी चुप

मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और पंजाब में कॉन्ग्रेस की कर्जमाफी योजना फ्लॉप हो गई है। किसान आत्महत्या कर रहे हैं और विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। इन सबके बावजूद मीडिया इन ख़बरों को तवज्जो नहीं दे रहा। जबकि, यूपी में छोटी-मोटी गड़बड़ियों को भी हाइलाइट किया गया।

आतंक का एक मजहब है: एक ने स्वीकारा, आप भी स्वीकारिए

चाहे वो मोदी हों, मर्कल हों, मैक्राँ हों, जॉनसन हो या कोई वैसा राष्ट्र जो यह नहीं चाहता कि उसके किसी एयरपोर्ट पर, चर्च में, सड़क पर, पार्क में, मंदिर पर या बस-ट्रेन में बम फूटे, छुरा चले, ट्रकों से लोगों को रौंदा जाए, तो सबसे पहला काम तो वो यह करें कि एक स्वर में इस मुसीबत को उसके पूरे नाम से स्वीकारें कि हाँ, कट्टरपंथी आतंकवाद ने इन सारे देशों में दहशत फैलाई है, जानें ली है, परिवारों को तोड़ा है।

परमादरणीय रवीश कुमार, भारत का दिल छोटा नहीं, आपकी नीयत में खोट है

समाचारों की दुनिया के रुमानी वाचक रवीश कुमार का कहना है कि भारतीयों का आत्मविश्वास कमज़ोर है। उनका दिल छोटा है। वे दुनिया का केवल खाते हैं, खिलाते नहीं। आँकड़े कहते हैं कि रवीश झूठे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति का बयान बताता है कि उनके शब्द प्रोपगेंडा की चाशनी में सने हैं।

वैश्विक मंदी में भी देश की अर्थव्यवस्था के विकास की गति बनाए रखना मोदी सरकार की सफलता

सरकार के इतने कदमों के बाद भी मंदी को लेकर भ्रम व भयावहता फैलाए जाने का ठोस आधार है भी या नहीं? यह समझने के लिए हमें यह जानना होगा कि 2008-09 की वैश्विक महामंदी के समय की राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय आर्थिक परिस्थितियों में बड़ा अंतर है।

मुंबई मेट्रो: ऐसे बॉलीवुड वालों को जब दो टके का नचनिया कहा जाता है तो बुरा नहीं लगता

ऐसी परियोजनाओं के आने या न आने से इस तरह के अमीरों को फर्क नहीं पड़ता। वो शायद मेट्रो में कभी नहीं चढ़ेंगे, क्योंकि उनके पास ड्राइवर के साथ कार उपलब्ध है। वो बुलेट ट्रेन पर भी नहीं बैठेंगे, क्योंकि वो हवाई जहाज से आते-जाते हैं। वो अगर सेट पर लेट भी पहुँचेंगे तो उनकी सैलरी नहीं कटेगी।

रामायण ‘मर्चेंट ऑफ वेनिस’ नहीं है सोनाक्षी, यह हमारी सांस्कृतिक विरासत है, हमारा इतिहास है

सोनाक्षी सिन्हा के घर का नाम 'रामायण' है। उनके पिता व भाइयों के नाम रामायण के किरदारों के नाम पर हैं। 'युवाओं के रोल मॉडल' का अवॉर्ड लेने वाले इन सेलेब्स को रामायण का बेसिक ज्ञान भी नहीं? क्या रामलीला, रामकथा और सुंदरकांड से युवा दूर हो रहे हैं?

2.48 लाख पेड़ों में से 2185 ही काटे जाएँगे, 6 गुना लगाए जाएँगे: Aarey पर त्राहिमाम मचाने वाले बेनक़ाब

अपने SUV कारों से 'Save Aarey' प्रदर्शन में हिस्सा लेने वाले सेलेब्स क्या मुंबई की करोड़ों लोगों की ज़रूरतों को समझते भी हैं? सरकार 2185 पेड़ काटेगी तो 13,000 से भी अधिक लगाएगी भी। 3000 एकड़ के आरे क्षेत्र के 2.5% की ही मेट्रो को ज़रूरत है।

ताज़ा ख़बरें

प्रचलित ख़बरें