हर यूनिवर्सिटी या सार्वजनिक मंच पर ये विशुद्ध झूठ बोलते हैं, फिर इनका गिरोह सक्रिय हो जाता है और ऐसे दिखाता है कि ब्रो, अरुंधति रॉय ने बोला है ब्रो… ब्रो… समझ रहे हो ब्रो? अरुंधति फ्रीकिंग रॉय ब्रो! ये ब्रो-ब्रो इतना ज्यादा होने लगता है कि वो ब्रोहाहा कॉलेज के 22-25 साल के युवा विद्यार्थियों के लिए तथ्य का रूप ले लेता है।
राहुल गॉंधी की बाल बुद्धि और बाल हठ से देश अरसे से परिचित है। जब से उन्हें मोदी के मुकाबिल खड़ा करने की कोशिश की गई उनका यह गुण बार-बार प्रकट होने लगा और हर बार वे 'गलती हो गई माफ कर दो' वाले भाव में आ जाते हैं। यह और बात है कि यूपीए काल में उनकी यह हरकत 'वाह जहॉंपनाह' के शोर में दब जाया करती थी।
TOI से हमारा सवाल- 'अगर महादलितों की मॉब लिंचिंग हुई है तो SC-ST एक्ट क्यों नहीं लगा?' जवाब यह है कि सभी हत्यारोपित महादलित ही हैं। देखिए किस तरह से ख़बरों को पेश कर फेक नैरेटिव को हवा दी जाती है। मीडिया के नए रूप को आप भी अच्छी तरह समझ लें।
दिल्ली की शराब की तलब पुरानी। राजस्व में भारी इजाफा। पर अपने ही वादों और आँकड़ों से उलझी केजरीवाल सरकार। आप विधायक ने ही पूछा सत्ता में आते ही क्यों दी 133 ठेके खोलने की अनुमति? नई नीति के बाद 37 ठेके बंद करने का दावा तो फिर कैसे बढ़ गई दुकानें?
क्या आपको 2011 में आयोजित भाजपा की एकता यात्रा याद है? अब्दुल्ला-कॉन्ग्रेस सरकार ने न सिर्फ़ अनंत कुमार, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली को J&K में घुसने से रोका बल्कि गिरफ्तार भी करवा लिया था। आज तीनों दिग्गज हमारे बीच नहीं रहे। आइए इतिहास में चलें 8 वर्ष पीछे।
राहुल गॉंधी, हमारा नहीं तो कम से कम उनका तो ख्याल करिए, जो आपसे हर बाद उम्मीद लगा लेते हैं, पहले से भी किसी बड़े चमत्कार की और आप हर बार, बार-बार, पिछली बार से भी ज्यादा वीभत्स तरीके से उस सपने को चीर-फाड़ देते हैं।
हिन्दुओं को इससे फर्क नहीं पड़ता कि वो कौन-सा मांस खा रहे हैं। जिन्हें फर्क पड़ा, तो उन्हें 'बिगट', 'कम्यूनल', 'असहिष्णु' और पता नहीं क्या-क्या कह दिया गया। क्योंकि बहुसंख्यकों का न तो कोई धर्म है, न उनकी भावना आहत होती है।
सांप्रदायिकता की लकीर खींचने के लिए अंग्रेज मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एप्लिकेशन एक्ट लेकर आए। आजादी के बाद कॉन्ग्रेस की तुष्टिकरण नीति की वजह से बाल विवाह के कानून बदले, लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ को छुआ भी नहीं गया।