विचार

परमाणु युद्ध का भय दिखाकर वामपंथी बुद्धिजीवियों ने देश को आर्थिक रूप से खोखला किया

विश्व के हर बड़े देश ने परमाणु अस्त्र इसलिए बनाए ताकि उनके ऊपर परमाणु हमला करने से पहले दूसरा देश दस बार सोचे। अब यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की जनता को इस बात की याद दिलाते हैं कि हमारे पास भी परमाणु अस्त्र हैं इसलिए हम दूसरों के बम से सुरक्षित हैं तो इसमें बुरा क्या है?

श्री लंका ब्लास्ट: बौद्धों को आतंकी साबित करने पर तुले वामपंथी, अब लिट्टे भी ‘हिन्दू संगठन’

2016 में ख़बर आई थी कि 32 अच्छी तरह शिक्षित और समृद्ध मुस्लिमों ने ISIS जॉइन किया है। इस वर्ष स्थानीय इस्लामिक आतंकी संगठन तोहिथ जमात के मुस्लिमों से विस्फोटक सामग्रियाँ ज़ब्त की गई। श्रीलंकाई मुस्लिमों ने समाज सुधारने की बजाए सरकार पर ही आरोप लगा दिए।

मोतिहारी: ‘टिकट बेचवा’ उपेंद्र कुशवाहा Vs केंद्रीय मंत्री राधामोहन की लड़ाई में चीनी मिल मुद्दा

एक तरफ़ चीनी मिल वाला मुद्दा है जिस पर केंद्रीय मंत्री चुप हैं वहीं दूसरी तरफ़ है उनकी संगठनात्मक क्षमता एवं अनुभव, जिसके आधार पर वह प्रतिद्वंद्वियों पर भारी पड़ रहे हैं। यहाँ कृषि मंत्रालय में रहे वर्तमान व पूर्व केंद्रीय मंत्रियों के बीच ईगो का टकराव है। सवाल यह भी है, क्या कुशवाहा ने टिकट बेचा? मोतिहारी से ग्राउंड रिपोर्ट

इस्लाम बनाम ईसाई: श्री लंका बम धमाके, चर्च, 200 लाशें, जाहरान हाशिम, अबु मुहम्मद…

हमें पोलिटिकली करेक्ट होकर स्वीकारने में भले ही अनंत काल लग जाए, लेकिन सत्य यही है कि बड़े आतंकी हमलों के केन्द्र में इस्लामी विचारधारा और आईसिस का झंडा है।

‘मैं अपने पापा की लाडली हूँ, लेकिन अब वो मेरा चेहरा तक नहीं देख पाते’

धातु गलाने के लिए सर्राफ़ा व्यापारी क्या करेंगे यह वही लोग जानें। स्कूलों की लैब में अगर एसिड नहीं उपलब्ध रहेगा तो हमें यह परिस्थितियाँ भी स्वीकार्य हैं। लेकिन हम धातु गलाने के एवज में अपनी बच्चियों की देह नहीं गला सकते! नहीं मतलब नहीं।

अगर एक हत्या करने वाला गोडसे आतंकी है तो ‘अल्लाहु अकबर’ बोलकर लाशें बिछाने वाले कौन?

विशाल भारद्वाज के अनुसार वैचारिक मतभेदों के आधार पर किसी की हत्या करना आतंकवाद है। क्या आतंकवाद इतना सामान्य है? इस्लामिक और वामपंथी आतंकवाद को ढँकने के लिए विशाल की ये कोशिश कॉन्ग्रेस के 'हिन्दू आतंकवाद' नैरेटिव का ही हिस्सा है।

जलते जहाज पर 900 टन पानी डालकर आग बुझाने की हुई थी कोशिश: अग्निशमन सप्ताह

जहाज में लदा हुआ कपास, जलता हुआ, आग की बारिश की तरह आस पास की झुग्गी झोपड़ियों पर बरसा। धमाके से दो स्क्वायर किलोमीटर का तटीय इलाका जल उठा।

चुनाव आयोग आख़िर चाहता क्या है?

चुनाव आयोग को कुछ असहज करते प्रश्नों का जवाब देने की जरूरत है। नहीं तो वह जनता का भरोसा खो देगा। यह लोकतंत्र के लिए कतई शुभ नहीं होगा।

नकली भक्त राहुल गाँधी के कॉन्ग्रेस ने किया राम, भगवा ध्वज और त्रिपुण्ड का अपमान

यह वीडियो एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ राजनीतिक प्रचार के रूप में कम और हिंदू आतंकवाद सिद्धांत को फिर से हवा देने की रूपरेखा के रूप में ज़्यादा है। कॉन्ग्रेस पार्टी सत्ता में वापस आने के लिए अब देश ही क्या, यहाँ की संस्कृति और सहिष्णुता का भी घोर अपमान करने पर तुली हुई है। सत्ता और तुष्टिकरण के लिए अब ये कोई भी सीमा लाँघ सकते हैं।

राहुल की ‘न्याय योजना’ कहीं अन्याय का प्रतीक तो नहीं…

कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने लोकसभा चुनाव के मुख्य चुनावी वादे के रूप में न्यूनतम आय गारंटी योजना की घोषणा तो कर दी, लेकिन ये नहीं बताया कि इस भारी भरकम योजना को लागू कैसे किया जाएगा? इसके लिए फंड कहाँ से आएगा?

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