Thursday, October 1, 2020
Home रिपोर्ट अंतरराष्ट्रीय श्री लंका ब्लास्ट: बौद्धों को आतंकी साबित करने पर तुले वामपंथी, अब लिट्टे भी...

श्री लंका ब्लास्ट: बौद्धों को आतंकी साबित करने पर तुले वामपंथी, अब लिट्टे भी ‘हिन्दू संगठन’

बोधगया में बौद्ध भिक्षुओं ने श्री लंका ब्लास्ट्स में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएँ आयोजित की। उन्होंने कैंडल लाइट मार्च भी निकाला। महाबोधि मंदिर में पीड़ितों के लिए प्रार्थना की गई। ये बौद्ध ईसाई चर्चों पर हुए हमलों के बाद हा-हा नहीं रिएक्ट जार खुशियाँ मना रहे हैं।

श्री लंका में हुए बम ब्लास्ट दुःखदायी हैं और उससे भी ज़्यादा निंदनीय है उसे लेकर फैलाया जा रहा दुष्प्रचार। अंतरराष्ट्रीय टीवी न्यूज़ चर्चाओं में भी कुछ लिबरल किस्म के लोगों ने इस हमले से हुए नुक़सान पर चर्चा करने की बजाए इतिहास में जाकर श्री लंका में समुदाय विशेष पर हो रहे कथित अत्याचार का ज़िक्र किया। अगर हमला चर्च पर हुआ है तो इसका मुसलमाओं और सिंहलियों के बीच छिटपुट संघर्ष से क्या लेना-देना है? ताज़ा हमले में पीड़ित ईसाई हैं, हमले के पीछे पुलिस उग्र इस्लामिक कट्टरपंथी आतंकियों का हाथ मान रही है, ऐसे में कुछ लोगों को ज़ल्दबाज़ी हो रही है कि इसके पीछे बौद्धों को दोषी साबित किया जाए। ये वामपंथी विचारधारा के लोग हैं। इनकी पहचान यह है कि ये लोग एकपक्षीय मानवाधिकार की बात करते हैं। ये हर तरह से ये साबित करने में लगे हैं कि कोलंबो में हुए सीरियल ब्लास्ट्स में इस्लामिक आतंकवाद का हाथ नहीं है। आइए इनकी पोल खोलते हैं।

पहले तथ्यों की बात कर लें। नवंबर 2016 में जनवरी में श्रीलंका सरकार ने कहा था कि देश के 32 अच्छी तरह से पढ़े-लिखे और अच्छे परिवारों के समुदाय विशेष वालों ने वैश्विक इस्लामी आतंकी संगठन आईएस में शामिल हो गए हैं। क़ानून मंत्री विजयदासा राजपक्षे ने इस बारे में अधिक जानकारी देते हुए कहा था कि आईएस में शामिल होने वाले ये लोग ग़रीब या दबे हुए नहीं थे बल्कि अच्छी तरह शिक्षित और इलीट परिवारों से थे। राजपक्षे ने यह भी बताया था कि कुछ विदेशियों ने श्री लंका पहुँच कर इस्लामिक आतंकवाद का प्रचार-प्रसार किया। किसी भी सभ्य समाज में इस बयान के बाद आईएस और उसमे शामिल होने वाले लोगों की निंदा होनी चाहिए लेकिन आइए आपको बताते हैं कि श्री लंका के इस्लामिक संगठनों ने क्या किया?

श्री लंका के मुस्लिम संगठनों के सबसे बड़े समूह ‘द मुस्लिम काउंसिल ऑफ श्रीलंका’ ने मंत्री के इस बयान की ही निंदा कर डाली और उन्हें सबूत दिखाने को कहा। संगठन ने बौद्ध भिक्षुओं द्वारा कथित तौर पर फैलाए जा रहे Racism का जिक्र किया और कहा कि ये कट्टरवादी बौद्ध भिक्षु मुस्लिमों के ख़िलाफ़ अभियान चला रहे हैं। अगर श्री लंका के मुस्लिम समुदाय ने एकमत से मंत्री के बयान को गंभीरता से लेते हुए अपने समाज में ऐसे लोगों व परिवारों को चिह्नित करने का कार्य किया होता और इस्लामिक आतंकवाद के विरुद्ध अभियान छेड़ा होता तो शायद आज श्री लंका को ये दिन नहीं देखने पड़ते। 2014 में श्री लंकाई मुस्लिम संगठनों ने सरकार को आगाह किया था कि मुस्लिम युवा विदेशी आतंकी संगठनों की तरफ़ आकर्षित हो रहे हैं क्योंकि उन पर बौद्धों द्वारा अत्याचार किया जा रहा है।

यह सबसे बेहूदा कारण होता है किसी भी ग़लत हरकत को ढँकने के लिए। ऐसे लोगों द्वारा कहा जाता है कि कश्मीर में लोगों को प्रताड़ित किया गया तो वे आतंकी बन गए। यही लोग कहते हैं कि श्री लंका में बौद्धों से पीड़ित मुस्लिमों ने आतंकी संगठनों का रुख़ किया। इसी गिरोह विशेष के लोग रोहिंग्या को भारत में बसाने की वकालत करते हुए कहते हैं कि म्यांमार के बौद्धों द्वारा प्रताड़ित किए जाने के कारण कई रोहिंग्या अपराधी बन गए। ऐसा कहते समय ये लोग भूल जाते हैं कि जिस कश्मीरी पंडित समाज को घाटी से मार-मार कर निकाल दिया गया, उनका ख़ून बहाया गया, उनकी सम्पत्तियाँ छीन ली गईं और उन्हें उनके ही देश में शरणार्थियों की तरह जीवन व्यतीत करने को विवश कर दिया गया, उन पंडितों ने तो कभी हथियार नहीं उठाए। 1984 में कॉन्ग्रेस नेताओं व कार्यकर्ताओं द्वारा सिखों का नरसंहार किया गया, वे सिख तो आतंकी नहीं बने? उन्होंने क़ानूनी लड़ाई लड़ी।

जरा इन नैरेटिव पर गौर कीजिए:

  • अगर किसी आतंकी घटना को मुस्लिमों ने अंजाम दिया है तो ज़रूर वे पीड़ित मुस्लिम रहे होंगे।
  • अगर आतंकी पीड़ित नहीं है तो उनका परिवार, समाज ज़रूर पीड़ित रहा होगा।
  • ये भी हो सकता है कि 100 किलोमीटर दूर अपने समाज के किसी व्यक्ति को पीड़ित देखकर वो आतंकी बन गया और लाशें बिछा डाली।
  • प्रताड़ित करने वाला हिन्दू या बौद्ध ही रहा होगा। इनके द्वारा प्रताड़ित किए जाने वाले मुस्लिम आतंकी बनकर लाशें बिछाते हैं तब भी विक्टिम मुस्लिम समाज ही है।
  • अगर घटना के पीछे मुस्लिम आतंकी है तो वो पीड़ित है, वहीं अगर हिन्दू या बौद्ध की तरह ग़लती से कोई अन्य समुदाय का हाथ निकला तब इन वामपंथियों की बल्ले-बल्ले ही है।

श्रीलंका वाली घटना के समय वामपंथियों द्वारा मालेगाँव को याद किया गया। कुछ लोगों ने तो एक क़दम और आगे बढ़कर लिट्टे को एक हिन्दू संगठन बताते हुए उसके द्वारा किए जाने वाली आतंकी वारदातों को हिन्दुओं द्वारा की गई साबित करना चाहा। क्या ये सबका यह सही समय था? लिट्टे ने अपने अजेंडे में ख़ुद को सेक्युलर बताया था। वो ‘तमिल अधिकार’ के लिए लड़ने का दावा करते थे। लिट्टे के आतंकियों ने कभी ख़ुद को हिन्दू धर्म के लिए लड़नेवाला नहीं बताया बल्कि उनकी पूरी लड़ाई तमिल बनाम सिंहला केंद्रित थी। जहाँ लिट्टे ख़ुद को डंके की चोट पर सेक्युलर और धर्मनिरपेक्ष संगठन मानता रहा, ऐसे में उसे हिन्दू ठहराना जायज़ है क्या? संजातीय अल्पसंख्यकों के आतंकी संगठन को जबरन हिन्दू ठहराने की कोशिश की गई।

इसी तरह वामपंथी कविता कृष्णन ने श्रीलंका ब्लास्ट्स को लेकर किए गए ट्वीट में ‘बौद्ध कट्टरवाद’ को हाइलाइट करते हुए कहा कि भले ही इसमें उनका हाथ हो या न हो, ये ब्लास्ट्स मालेगाँव की तरह हैं। अगर स्केल और प्लानिंग की बात करें तो श्री लंका में हुए ब्लास्ट्स मालेगाँव से कहीं ज़्यादा वीभत्स हैं। मालेगाँव की तरफ 2-3 नहीं बल्कि 8 बम फटे और 40-50 नहीं बल्कि लगभग 300 लोगों के मारे जाने की आशंका है। हालाँकि, किसी साधारण हमले में एक व्यक्ति की जान जाती है तो भी यह अपूरणीय क्षति है लेकिन 300 लोगों की जान लेने वाले ब्लास्ट्स को लेकर प्रोपेगेंडा फैला रहे वामपंथियों ने बौद्धों को आतंकी साबित करने का नंगा ठेका रखा है।

इस वर्ष जनवरी में श्री लंका पुलिस ने कई डेटोनेटर और विस्फोटक सामग्रियाँ ज़ब्त की थी। क्या आपको पता है ये सामग्रियाँ किन लोगों से ज़ब्त की गई थी? इस्लामिक आतंकियों से। इतना ही नहीं, पुलिस ने चार मुस्लिमों को गिरफ़्तार भी किया था। स्थानीय इस्लामिक आतंकी संगठन ‘नेशन तोहिथ जमात’ द्वारा चर्चो को निशाना बनाए जाने को लेकर सुरक्षा एजेंसियों को भी कुछ इनपुट्स मिले थे। अगर 2016 में श्री लंकाई मुस्लिमों के आईएस जॉइन करने और इस वर्ष कुछ मुस्लिमों के विस्फोटकों के साथ पकड़े जाने वाली घटनाओं को जोड़कर देखें तो तस्वीर बहुत हद तक साफ़ हो जाती है लेकिन वामपंथियों को किसी भी हमले के बाद हिन्दुओं व बौद्धों को आतंकी साबित करने की जल्दी रहती है। अगर आतंकी मुस्लिम निकल आए तो ये उन्हें हिन्दू या बौद्ध कट्टरवाद से पीड़ित बताकर पल्ला झाड़ लेते हैं। यानी चित भी मेरी और पट भी मेरी।

बोधगया में बौद्ध भिक्षुओं ने श्री लंका ब्लास्ट्स में मारे गए लोगों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थनाएँ आयोजित की। उन्होंने कैंडल लाइट मार्च भी निकाला। महाबोधि मंदिर में पीड़ितों के लिए प्रार्थना की गई। ये बौद्ध ईसाई चर्चों पर हुए हमलों के बाद हा-हा नहीं रिएक्ट जार खुशियाँ मना रहे हैं। ये पीड़ितों के साथ खड़े नज़र आ रहे हैं और अपनी संवेदनाएँ ज़ाहिर कर रहे हैं। ऐसे में, दोनों समुदायों के बीच क्या अंतर है, आप ख़ुद देख लीजिए।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अनुपम कुमार सिंहhttp://anupamkrsin.wordpress.com
चम्पारण से. हमेशा राइट. भारतीय इतिहास, राजनीति और संस्कृति की समझ. बीआईटी मेसरा से कंप्यूटर साइंस में स्नातक.

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

इंडिया टुडे के राहुल कँवल, हिन्दी नहीं आती कि दिमाग में अजेंडा का कीचड़ भरा हुआ है?

हाथरस के जिलाधिकारी और मृतका के पिता के बीच बातचीत के वीडियो को राहुल कँवल ने शब्दों का हेरफेर कर इस तरह पेश किया है, जैसे उन्हें धमकाया जा रहा हो।

कठुआ कांड की तरह ही मीडिया लिंचिंग की साजिश तो नहीं? 31 साल पहले भी 4 नौजवानों ने इसे भोगा था

जब शोषित समाज के वंचित कहे जाने वाले तबकों से हो और आरोपित तथाकथित ऊँची मानी जाने वाली जातियों से, तो मीडिया लिंचिंग के लिए एक बढ़िया मौका तैयार हो जाता है।

‘हर कोई डिम्पलधारी को गिरने से रोकता रहा, लेकिन बाबा ने डिसाइड कर लिया था कि घास में तैरना है तो कूद गया’

हा​थरस केस पर पॉलिटिक्स करने गए राहुल गाँधी का एक वीडियो के सामने आने के बाद ट्विटर पर 'एक्ट लाइक पप्पू' ट्रेंड करने लगा।

दिल्ली दंगों की चार्जशीट में कपिल मिश्रा ‘व्हिसल ब्लोअर’ नहीं: साजिश से ध्यान हटाने के लिए मीडिया ने गढ़ा झूठा नैरेटिव

दंगों पर दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में कपिल मिश्रा को 'व्हिसल ब्लोअर' नहीं बताया गया है। जानिए, मीडिया ने कैसे आपसे सच छिपाया।

‘द वायर’ की परमादरणीया पत्रकार रोहिणी सिंह ने बताया कि रेप पर वैचारिक दोगलापन कैसे दिखाया जाता है

हाथरस में आरोपित की जाति पर जोर देने वाली रोहिणी सिंह जैसी लिबरल, बलरामपुर में दलित से रेप पर चुप हो जाती हैं? क्या जाति की तरह मजहब अहम पहलू नहीं होता?

रात 3 बजे रिया को घर छोड़ने गए थे सुशांत, सुबह फँदे से लटके मिले: डेथ मिस्ट्री में एक और चौंकाने वाला दावा

रिया चकवर्ती का दावा रहा है कि 8 जून के बाद उनका सुशांत से कोई कॉन्टेक्ट नहीं था। लेकिन, अब 13 जून की रात दोनों को साथ देखे जाने की बात कही जा रही है।

प्रचलित ख़बरें

ईशनिंदा में अखिलेश पांडे को 15 साल की सजा, कुरान की ‘झूठी कसम’ खाकर 2 भारतीय मजदूरों ने फँसाया

UAE के कानून के हिसाब से अगर 3 या 3 से अधिक लोग कुरान की कसम खाकर गवाही देते हैं तो आरोप सिद्ध माना जा सकता है। इसी आधार पर...

रात 3 बजे रिया को घर छोड़ने गए थे सुशांत, सुबह फँदे से लटके मिले: डेथ मिस्ट्री में एक और चौंकाने वाला दावा

रिया चकवर्ती का दावा रहा है कि 8 जून के बाद उनका सुशांत से कोई कॉन्टेक्ट नहीं था। लेकिन, अब 13 जून की रात दोनों को साथ देखे जाने की बात कही जा रही है।

व्यंग्य: दीपिका के NCB पूछताछ की वीडियो हुई लीक, ऑपइंडिया ने पूरी ट्रांसक्रिप्ट कर दी पब्लिक

"अरे सर! कुछ ले-दे कर सेटल करो न सर। आपको तो पता ही है कि ये सब तो चलता ही है सर!" - दीपिका के साथ चोली-प्लाज्जो पहन कर आए रणवीर ने...

‘हिन्दू राष्ट्र में आपका स्वागत है, बाबरी मस्जिद खुद ही गिर गया था’: कोर्ट के फैसले के बाद लिबरलों का जलना जारी

अयोध्या बाबरी विध्वंस मामले में कोर्ट का फैसला आने के बाद यहाँ हम आपके समक्ष लिबरल गैंग के क्रंदन भरे शब्द पेश कर रहे हैं, आनंद लीजिए।

शाम तक कोई पोस्ट न आए तो समझना गेम ओवर: सुशांत सिंह पर वीडियो बनाने वाले यूट्यूबर को मुंबई पुलिस ने ‘उठाया’

"साहिल चौधरी को कहीं और ले जाया गया। वह बांद्रा के कुर्ला कॉम्प्लेक्स में अपने पिता के साथ थे। अभी उनकी लोकेशन किसी परिजन को नहीं मालूम। मदद कीजिए।"

लड़कियों को भी चाहिए सेक्स, फिर ‘काटजू’ की जगह हर बार ‘कमला’ का ही क्यों होता है रेप?

बलात्कार आरोपित कटघरे में खड़ा और लोग तरस खा रहे... सबके मन में बस यही चल रहा है कि काश इसके पास नौकरी होती तो यह आराम से सेक्स कर पाता!

प्राइम टाइम में अर्नब का डंका, 77% दर्शक देखते हैं रिपब्लिक; राजदीप और NDTV के शो दर्शकों के लिए तरसे

न्यूज चैनलों के बीच रिपब्लिक की न केवल बादशाहत बनी हुई, बल्कि प्राइम टाइम के स्लॉट में कोई भी एंकर अर्नब के आसपास नजर नहीं आ रहा।

लॉकडाउन, मास्क, एंटीजन टेस्ट… कोरोना को रोकने के लिए भारत ने समय पर लिए फैसले, दुनिया ने किया अनुकरण

ORF के ओसी कुरियन ने बताया है कि किस तरह भारत ने कोरोना का प्रसार रोकने के लिए फैसले समय पर लिए।

UP: भदोही में 14 साल की दलित बच्ची की सिर कुचलकर हत्या, बिना कपड़ों के शव खेत में मिला

भदोही में दलित नाबालिग की सिर कुचलकर हत्या कर दी गई। शव खेत से बरामद किया गया। परिजनों ने बलात्कार की आशंका जताई है।

इंडिया टुडे के राहुल कँवल, हिन्दी नहीं आती कि दिमाग में अजेंडा का कीचड़ भरा हुआ है?

हाथरस के जिलाधिकारी और मृतका के पिता के बीच बातचीत के वीडियो को राहुल कँवल ने शब्दों का हेरफेर कर इस तरह पेश किया है, जैसे उन्हें धमकाया जा रहा हो।

कठुआ कांड की तरह ही मीडिया लिंचिंग की साजिश तो नहीं? 31 साल पहले भी 4 नौजवानों ने इसे भोगा था

जब शोषित समाज के वंचित कहे जाने वाले तबकों से हो और आरोपित तथाकथित ऊँची मानी जाने वाली जातियों से, तो मीडिया लिंचिंग के लिए एक बढ़िया मौका तैयार हो जाता है।

1000 साल लगे, बाबरी मस्जिद वहीं बनेगी: SDPI नेता तस्लीम रहमानी ने कहा- अयोध्या पर गलत था SC का फैसला

SDPI के सचिव तस्लीम रहमानी ने अयोध्या में फिर से बाबरी मस्जिद बनाने की धमकी दी है। उसने कहा कि बाबरी मस्जिद फिर से बनाई जाएगी, भले ही 1000 साल लगें।

मिलिए, छत्तीसगढ़ के 12वीं पास ‘डॉक्टर’ निहार मलिक से; दवाखाना की आड़ में नर्सिंग होम चला करता था इलाज

मामला छत्तीसगढ़ के बलरामपुर का है। दवा दुकान के पीछे चार बेड का नर्सिंग होम और मरीज देख स्वास्थ्य विभाग की टीम अवाक रह गई।

‘हर कोई डिम्पलधारी को गिरने से रोकता रहा, लेकिन बाबा ने डिसाइड कर लिया था कि घास में तैरना है तो कूद गया’

हा​थरस केस पर पॉलिटिक्स करने गए राहुल गाँधी का एक वीडियो के सामने आने के बाद ट्विटर पर 'एक्ट लाइक पप्पू' ट्रेंड करने लगा।

दिल्ली दंगों की चार्जशीट में कपिल मिश्रा ‘व्हिसल ब्लोअर’ नहीं: साजिश से ध्यान हटाने के लिए मीडिया ने गढ़ा झूठा नैरेटिव

दंगों पर दिल्ली पुलिस की चार्जशीट में कपिल मिश्रा को 'व्हिसल ब्लोअर' नहीं बताया गया है। जानिए, मीडिया ने कैसे आपसे सच छिपाया।

फोरेंसिक रिपोर्ट से रेप की पुष्टि नहीं, जान-बूझकर जातीय हिंसा भड़काने की कोशिश हुई: हाथरस मामले में ADG

एडीजी प्रशांत कुमार ने बताया है कि हाथरस केस में फोरेंसिक रिपोर्ट आ गई है। इससे यौन शोषण की पुष्टि नहीं होती है।

हमसे जुड़ें

267,758FansLike
78,095FollowersFollow
326,000SubscribersSubscribe