विचार

डियर लड़कियो, 16 की उम्र खुद को परिपक्व बनाने की है… सेक्स करने की नहीं

सेक्स बहुत बुरी चीज है, इसके कारण लड़कियों का भविष्य बर्बाद हो रहा है - ऐसी बात नहीं है। लेकिन यह जरूर है कि जिस उम्र में सेक्स को लीगल करने की बात हो रही है, हमारा समाज उसके लिए तैयार नहीं है और न ही उसके लिए 16 के उम्र की लड़कियाँ तैयार हैं।

पकौड़े-चाय आप बेच नहीं पाएँगे सिद्धू साब! आप तो चोरों और घोटालेबाजों की गुलामी कीजिए

एक वक्त ऐसा भी था, जब भाजपा को अपनी 'माँ' बताने वाले सिद्धू का कई साल तक भारतीय जनता पार्टी के साथ 'बेटे' जैसा जुड़ाव रहा था। लेकिन, पार्टी बदलते ही उन्होंने 'माँ' को 'गाली' देनी शुरू कर दी है।

आदिवासी प्रेमी राहुल गाँधी, 1966 में मिज़ोरम पर बम किसने बरसाए थे याद है?

राहुल गाँधी व्यक्तित्व नहीं, एक मानसिक अवस्था है। कभी-कभी व्यक्ति व्यक्तिवाचक संज्ञा से ऊपर उठ कर जातिवाचक संज्ञा हो जाता है, और उनमें से राहुल गाँधी जैसे महज़ चंद लोग ऐसे होते हैं जो व्यक्ति होते हुए भी विशेषण बन जाते हैं।

The Print वालों, सीधे-सीधे बोलो हिन्दू प्रतीकों से सुलग जाती है (सीने में आग)

समुदाय विशेष वाले तब तक ‘बेचैन’ रहेंगे जब तक धर्म और संस्कृति, हिन्दू पंथ और सम्प्रदाय की हर अभिव्यक्ति बंद नहीं हो जाती। केवल सरकारी ही नहीं, निजी भी। यही हिन्दूफोबिया है। The Print वालों ने इस लेख से प्रोपेगेंडा को नई ऊंचाई दी है।

जब तुर्की में कमाल पाशा ने बुर्के पर प्रतिबंध लगाने के लिए अपनाया था नायाब तरीका

अरबी अक्षर इस्तेमाल करने के बदले 1 नवम्बर 1928 को कमाल पाशा ने तुर्की वर्णमाला भी लागू कर दी और इसके साथ ही तुर्की ज़ुबान को अरबी में लिखना बंद करवा दिया।

लिंगलहरी कन्हैया कुमार के गुंडे चुनावी गाड़ियों में डंडे-ईंट-पत्थर लेकर क्यों चलते हैं?

हिंसा और सेक्स तो कामरेडों का प्रमुख हथियार है, यूनिवर्सिटी में तो जबरदस्ती करते ही हैं, बाद में, विद्यार्थी से नक्सली बनने तक, जंगलों में 'नारी देह कम्यून की प्रॉपर्टी है' के नाम पर महिला काडरों को आईसिस की तर्ज़ पर सेक्स स्लेव बना कर रखते हैं।

मीडिया गिरोह केजरीवाल के बाद अब ‘लाल सलाम’ के साथ खेलना चाहता है ‘पुण्डा-पुण्डी’

कन्हैया कुमार के LPG सिलेंडर दिखाकर मीडिया गिरोह की TRP में भी उछाल आने के कारण कामरेड की गरीबी पर निष्पक्ष पत्रकारों को खूब चरमसुख मिलता नजर आ रहा है। लेकिन अचानक ‘वन फाइन डे’ इस LPG सिलेंडर न जुटा पाने वाले कामरेड की तस्वीरों से बेगूसराय के लगभग हर हिंदी और अंग्रेजी समाचार पत्र के पहले पन्ने भर गए।

मोदी इंटरव्यू के दौरान कपड़े फाड़कर ‘पछड़ा-पछड़ी’ करना चाहते हैं रवीश, उन्हें पागल होना है

रवीश कुमार चाहते हैं कि कोई पत्रकार लाइव इंटरव्यू के दौरान पीएम के जवाब के बाद टेबल पर एक करारा मुक्का मारे और अपनी कुर्सी को नीचे पटक डाले। रवीश की इच्छा है कि मोदी का इंटरव्यू लेनेवाला पत्रकार उनके जवाब के दौरान अपने ही मुँह पर माइक दे मारे।

क्या इंदिरा गाँधी इसी तरह मैदान छोड़कर भागतीं जिस तरह ‘इंदिरा 2.0’ भागी है?

इंदिरा गाँधी वर्जन-2 की छवि गढ़ने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर चल ही रही थी कि अचानक एक दिन मुंगेरीलाल ने सपना देखते-देखते अपने एकमात्र दूध के घड़े पर भी लात दे मारी और उसे भी फोड़ दिया। इस तरह से मीडिया गिरोह से लेकर तमाम मोदी विरोधियों के सपने और अरमानों का शीघ्रपतन हो गया।

मोदी शो ने दी हवा, थोड़ा-सा धुआँ उठा, लिबरलों की जल गई!

हिन्दुओं की धरती है, सर्वसमावेशी विचार के लोग हैं, सहिष्णुता के प्रवर्तक और स्नेह में डूबे हुए लोग कि इस्लामी आक्रमणकारियों, इस्लामी बलात्कारियों, इस्लामी और विदेशी हत्यारों को भी बसने की ज़मीन दी। और कितने उदाहरण चाहिए? ऐसे लोग किसी को क्या डराएँगे? हम तो स्वयं ही हर पर्व पर एक खास तरह के आतंक से डर जीते रहे हैं। अब तो तुम हमें, जीने दो, जीने दो!

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