विचार

प्राइम टाइम एनालिसिस: रवीश कुमार कल को सड़क पर आपको दाँत काट लें, तो आश्चर्य मत कीजिएगा

रवीश मुहल्ले की गली का वो लौंडा है जो किसी लड़की के नाम से हाथ काट लेता है, और लड़की को पता भी नहीं होता कि उसका नाम क्या है। रवीश के ऐसे प्रोग्रामों को देख कर मैं बस इसी इंतज़ार में हूँ कि वो किस दिन कलाई का नस काट कर कहेंगे कि उन्हें कुछ होगा तो ज़िम्मेदार मोदी ही होगा।

लोकतंत्र का इतिहास, जूलियस सीज़र और केजरीवाल की कम्बल कुटाई

दबी जबान में चर्चा हो रही है कि बंद कमरे में कुछ लोगों ने मफ़लर वाले के साथ वो कर दिया है जो कम्बल उढ़ा कर किया जाता है। कविराज विष-वास सोशल मीडिया पर इसपर कटाक्ष भी करते दिखे। यकीन नहीं होता, इतिहास खुद को दोहराता है, ऐसा सुना था, मगर इतनी समानताएँ?

गुरदासपुर: BJP द्वारा सनी देओल पर भरोसा जताने के पीछे हैं ये 5 कारण, कॉन्ग्रेस खेमे में खलबली

आख़िर भाजपा को गुरदासपुर से सनी देओल को उतारने की ज़रुरत क्यों पड़ गई? सनी ही क्यों? ढाई किलो के हाथ का साथ पाने के पीछे रहे ये 5 सॉलिड कारण जो बताते हैं कि कैप्टन-जाखड़ के संयुक्त प्रभाव को काटने के लिए देओल ही आखिरी विकल्प थे। कार्यकर्ताओं ने भी...

मोदी की माँ की तस्वीरों से जूतों की कहानी तक, लिबरलों के धुआँ क्यों निकल रहा है

मोदी ने तो माताजी का आशीर्वाद लिया और चले गए, लेकिन लिबरल ब्रीड अभी भी पागल हो रहा है। मोदी रैली में व्यस्त है, इंटरव्यू खत्म हो गया, लेकिन लिबरल ब्रीड उसे कंधे पर लेकर घूम रहा है। लिबरलों के पोस्टर ब्वॉय लिंगलहरी कन्हैया की गरीब माँ पर खूब आहें निकलीं, कैमरा तो उसके घर में भी घुसा था, उसके घर का राजनीतिकरण हुआ कि नहीं?

जब सड़क पर गाय काटकर कॉन्ग्रेस ने मनाई थी बीफ पार्टी, हिन्दूओं की आस्था पर किया था सीधा हमला

इस घटना को लगभग एक वर्ष होने वाला है और इस एक वर्ष के भीतर ही कॉन्ग्रेस के युवा अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जनेऊ भी धारण किया, अमरनाथ यात्रा का भी फोटोशॉप किया, समय और परिस्थिति के अनुसार हिन्दू प्रतीकों के साथ खूब तस्वीरें खिंचवाते नजर आते हैं, उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक के मंदिर का भ्रमण और धोती पहनना सीखने तक के उपक्रम राहुल गाँधी को करने पड़े हैं।

पत्रकारिता के (अ)नैतिक प्रतिमान सिद्धार्थ वरदराजन से और उम्मीद भी क्या है

हर खबर में इन्हें ‘एंगल’ ही यह दिखता है कि कैसे मोदी को गरियाने मिल जाए। यही इनका पत्रकारिता का (अ)धर्म है, यही इनकी (अ)नैतिक जिम्मेदारी है।

NDTV वालों के लिए लिए स्त्री का अपमान सिर्फ ‘तंज’ है, सेक्सिज़्म तो चलता है

दिक्कत है मामले की गंभीरता और शब्दों के चुनाव से छिछोरेपन को, सेक्सिस्ट बयान को, नारीविरोधी शब्दों को 'तंज' और 'ज़ुबानी जंग' के नाम पर ऐसे प्रस्तुत करना जैसे इतना तो चलता है।

देश का सबसे ‘बड़ा’ दलित नेता और ‘बयानवीर’ उदित राज का कटा टिकट – ये हैं कारण

महेश गिरी को जब पता चला कि उनकी जगह गंभीर को टिकट दिया गया है, उन्होंने तुरंत ट्वीट कर उन्हें शुभकामनाएँ दी जबकि 'बयानवीर' उदित राज जरा सी देरी क्या हुई, पार्टी को ही धमकाने लगे। जानिए उन्हें टिकट से नदारद रखने के पीछे क्या रहे कारण?

कश्मीरी पंडितों से इतनी नफरत क्यों राहुल गाँधी? आप तो ‘दत्तात्रेय-कौल ब्राह्मण’ हो!

मैं आपकी राजनीतिक विवशता को देख रही हूँ। विडंबना यह कि आप वर्षों से राजनीतिक परिदृश्य में एक मुकाम पाने को कड़ी मेहनत कर रहे हैं, जिसमें सफलता कमोबेश आपके लिए हाथ न आने वाला ही रहा है। ऊपर से नेहरू-गाँधी परिवार में पैदा होने के लाभ को भुनाने में भी सक्षम नहीं रहे आप। अफसोस!

वामपंथी आतंकवाद और आईसिस के मजहबी जिहाद में कोई अंतर नहीं, बिलकुल नहीं

मुझे इससे कोई मतलब नहीं है कि फ़लाँ किताब के फ़लाँ चैप्टर में यह लिखा है कि एक मानव की हत्या पूरे मानवता की हत्या है, क्योंकि ये कहने की बातें हैं, इनका वास्तविकता से कोई नाता नहीं है। ये फर्जी बातें हैं जो आतंकियों के हिमायती उनके बचाव में इस्तेमाल करते हैं।

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