विचार

रवीश जी, साध्वी प्रज्ञा पर प्राइम टाइम में आपकी नग्नता चमकती हुई बाहर आ गई (भाग 4)

रवीश एक घोर साम्प्रदायिक और घृणा में डूबे व्यक्ति हैं जो आज भी स्टूडियो में बैठकर मजहबी उन्माद बेचते रहते हैं। साम्प्रदायिक हैं इसलिए उन्हें मजहबी व्यक्ति की रिहाई पर रुलाई आती है, और हिन्दू साध्वी के चुनाव लड़ने पर यह याद आता है कि भाजपा नफ़रत का संदेश बाँट रही है।

उर्मिला ‘भटकी’ मातोंडकर का राजनीति में आना देश के लिए घातक, न कि PM मोदी पर फिल्म बनना

10 साल की उम्र से अपने अभिनय करियर की शुरुआत करने वाली उर्मिला मातोंडकर को राजनीति में आने के बाद भी तंज कसने का मौका सिर्फ़ मोदी की बायोपिक पर ही मिला। जिस महिला को किसी व्यक्ति के जीवन संघर्षों पर बनी फिल्म कॉमेडी टाइप लगती है, तो संदेह होता है कि उन्होंने अभिनय की दुनिया में इतने वर्ष बिताने के बाद भी क्या सीखा?

मॉडर्न वॉरफेयर का पहला उदाहरण हनुमानजी द्वारा रामायण में दिखाया गया था

आज पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत विरोधी प्रोपगैंडा चलाता है। भगवान राम ने इस युद्धनीति का उपयोग रावण के आतंक को समाप्त करने के लिए किया था लेकिन आज पाकिस्तान उसी तकनीक का प्रयोग भारत के विरुद्ध जिहादी छद्म युद्ध में करता है।

बंगाल जो चुनावी हिंसा का पर्याय है, ममत्व ऐसा कि भाजपाइयों की लटकती लाश आम दृश्य है

भाजपा कार्यालय से लेकर पेड़ तक पर भाजपा कार्यकर्ताओं की लाशें लटकी होने की ख़बर इतनी आम हो गई हैं कि सुन कर पहले ही सोच लेता हूँ कि बंगाल की ही ख़बर होगी।

महबूबा जी, आतंकी की लाश देख उसका छोटा भाई बंदूक उठा ले तो उसकी परवरिश खराब है

आखिर आतंकियों के सम्मान का कोई सोच भी कैसे सकता है? फिर याद आता है कि ये तो नेत्री भी हैं, इनको तो वोट भी वही लोग देते हैं जो आतंकियों के जनाज़े में टोपियाँ पहन कर पाकिस्तान परस्ती और भारत को बाँटने की ख्वाहिश का नारा लगाते शामिल होते हैं।

‘हिन्दू आतंकवाद’: एक शिगूफ़ा, एक थ्योरी एक नैरेटिव, क्यों ढह गई झूठ की यह इमारत

आज भले ही साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के ऊपर से मामला पूरी तरह खतम न हुआ हो लेकिन यह भी सच है कि कॉन्ग्रेस के कार्यकाल में ऐसा कोई भी व्यक्ति दंडित नहीं किया जा सका जिसे हिन्दू आतंकी कहा गया।

जानिए कौन सी संस्था है ISI से भी ज्यादा खतरनाक और कैसे पाकिस्तान लड़ रहा है इन्फॉर्मेशन युद्ध

सोशल मीडिया पर चारों तरफ पाकिस्तानी सेना की बहादुरी की पोस्ट की जा रही थी। आखिर क्यों इस तरह कि खबर डाली गयी और कौन था इस खबर के पीछे? शायद आप यह भी नहीं जानते हैं कि मेजर जनरल आसिफ ग़फूर ‏कौन है और किस पाकिस्तानी संस्था के लिए काम करता है।

मतदान कर्तव्य ही नहीं, अब नैतिक बाध्यता भी: मुट्ठी भर ‘अभिजात्यों’ से माइक और लाउडस्पीकर छीनने का मौका

आजादी के सात दशकों में हिन्दुओं के #मानवाधिकार छीनते रहने वालों का अट्टहास हर ओर तो सुनाई देता है! ऐसे अट्टहास हमें सुनाई इसलिए देते हैं क्योंकि उन्होंने यूनिवर्सिटी, समाचारपत्र, रेडियो, टीवी चैनल जैसे संसाधनों पर कब्ज़ा कर रखा है। मतदान इन मुट्ठी भर अभिजात्यों से...

प्रतिबंध किस पर है? कम्युनिस्टों के खिलाफ बोलने पर या देश के वीरों की गाथाएँ सुनाने पर

दोनों पुस्तकों के पिछले कई महीनों से बाज़ार में उपलब्ध होने का अर्थ यह है कि इनके पाठकों की संख्या उनसे कई गुना अधिक है जो निमंत्रण पाकर या गाहे बगाहे बुक लॉन्च में पहुँचते। बुक लॉन्च जैसे आयोजन लेखकों को अपनी वह बात कहने का मंच देते हैं जो वे पुस्तक में नहीं लिख पाते।

ध्रुव ट्रोल राठी! ब्रो, मीम बनाने पर फोकस करो, कहाँ नागरिक शास्त्र पर ज्ञान दे रहे हो!

राठी जी, राजनीति के विषय जितना प्रैक्टिकल से सीखे जा सकते हैं उतना थ्योरी में नहीं। पहले खुद का फंडा साफ कर लें, और जनता को मूर्ख न बनाएँ!

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