विचार

60 साल तक ‘न्याय’ न देने वालों के मुँह से ‘NYAY’ की बात अच्छी नहीं लगती

60 सालों तक राज करने वाली पार्टी की मजबूरी है कि वो सत्ता से दूर है, और यह दूरी रात-दिन बढ़ती जा रही है। सत्ता पाने की यही लालसा उससे नए-नए हथकंडे आजमाने का दुष्चक्र चलवाती है। लेकिन जब बड़े और नामी चेहरे भी इस धूर्तता का हिस्सा बनने लगते हैं तो अफ़सोस होता है।

कॉन्ग्रेस नहीं है Pak को पसंद, शांति के लिए इमरान को मोदी से है उम्मीद: ये डर, दबाव या कुछ और!

भले ही पाकिस्तान कॉन्ग्रेस के सत्ता में आने को लेकर चिंतित है, लेकिन मोदी सरकार की जीत को लेकर फायदा वाली बात कहने का मतलब मोदी को 'समर्थन' देना या मोदी का 'समर्थन' पाना तो बिलकुल भी नहीं है। लेकिन हाँ, इसे डर जरूर कहा जा सकता है क्योंकि अनेकों शिकायतों और हैरानी होने के बाद भी वो कामना करते हैं कि मोदी की सरकार वापस बने।

तेजस्वी यादव: शेर का बेटा हूँ; सुप्रीम कोर्ट: लालू चोर है; बिहारी: ये लेख पढ़ लो

अगर बिहार में सच में गुंडे बचे होते, और उनमें थोड़ा भी ज़मीर होता तो तुम्हें सड़क पर पटक कर, तुम्हारी बाँह पर वही गोद देते, जो अमिताभ के हाथ पर किसी ने गोदा था, "मेरा बाप चोर है।"

ब्रह्मा, विष्णु और भगवान शिव हैं बलात्कारी: इस्लामिक सेंटर के प्रवक्ता ने हिंदू समुदाय के ख़िलाफ़ उगला ज़हर

कांजी ने अरब आक्रमणकारी मोहम्मद बिन कासिम द्वारा भारत पर इस्लामी हमले का बचाव करता दिखा। वही कासिम, जिसने हिंदू महिलाओं का बलात्कार किया और हज़ारों लोगों को अरब में दास के रूप में बेच दिया। हिन्दू त्रिदेवों को भी बलात्कारी बताया।

नेहरू और भारत एक भैंस: श्वेत-धवल बगुलों के सरगना का सिलसिला बदस्तूर जारी

देश में गरीब हैं, गरीबी है। कैसे निपटा जाए इनसे… नेहरू ने कहा, लोड मत लो - 'गरीबी हटाओ' का नारा लगाओ और मस्त रहो। और आज जबकि 1969 में शुरू की गई इस योजना के 50 साल पूरे हो रहे हैं तब आपको मानना ही पड़ेगा कि नेहरू; राजकपूर से भी बड़े शो मैन और छलिया थे।

काँचा इलैया जी, धूर्तता से सने शब्दों में आपका ब्राह्मण-विरोधी रेसिज़्म निखर कर सामने आता है

काँचा इलैया जैसे NGO-वादी, victimology पर आधारित मुफ़्त की रोटी तोड़ने वाले एक-दो साल के लिए शांत हो जाएँ, जातिवाद प्राकृतिक मौत मर जाएगा।

जो राहुल गाँधी खुद घोटालों और झूठ के भार तले दबे हैं, वो मोदी को ‘चोर’ और ‘डरपोक’ कह रहे हैं

जिस कॉन्ग्रेस के पास खुद के दस सालों में किए घोटालों का जवाब नहीं है, उसके अध्यक्ष चाहते हैं कि मोदी उनसे भ्रष्टाचार पर बात करें।

बाबा साहब आज अगर जिन्दा होते, तो ये देखकर खुद को ही चाबुक मार रहे होते

इस तरह के विवादित चित्र देखकर पता चलता है कि भीमराव अम्बेदकर को हम सबने कितने गलत तरीके से पढ़ा है। हमने उनके नाम पर समाज को सवर्ण और दलित के टकराव में झोंका है। हमने अम्बेदकर की गलत व्याख्या कर के पवित्र मानकों को अपमानित कर एक बड़े हिस्से को ठेस लगाकर हम बाबा साहब अम्बेदकर के दोषी बन चुके हैं।

₹767 करोड़ की हेराफेरी पर मीडिया की चुप्पी घातक, चुनावी मौसम में लोकतंत्र का चौथा खंभा धराशाई

इनकम टैक्स के छापे में अब तक कहाँ से क्या मिला, देखिए पूरी सूची क्योंकि आपको ये कहीं और नहीं मिलेगा। इस पर कोई चर्चा नहीं कर रहा, कोई सवाल नहीं पूछ रहा, कोई प्राइम टाइम नहीं कर रहा। ये नेताओं, व्यापारियों, अधिकारियों, पत्रकारों का एक बहुत बड़ा नेक्सस है।

सेक्स ही सेक्स… भाई साहब आप देखते किधर हैं, दि प्रिंट का सेक्सी आर्टिकल इधर है

बढ़ते कम्पटीशन के दौर में सर्वाइवल और नाम का भार ढोते इन पोर्टलों के पास नग्नता और वैचारिक नकारात्मकता के अलावा फर्जीवाड़ा और सेक्स ही बचता है जिसे हर तरह की जनता पढ़ती है। लल्लनपॉट यूनिवर्सिटी से समाज शास्त्र में पीएचडी करने वाले ही ऐसा लिख सकते हैं।

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