विचार

बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया… और IAF है दुधारू गैया

कहानी इसलिए क्योंकि कभी स्क्वाड्रन लीडर समीर अबरोल मर जाता है, तो कभी स्क्वाड्रन लीडर सिद्धार्थ नेगी को भुला दिया जाएगा। उदाहरण इसलिए क्योंकि आपको मतलब हो या न हो, पार्टी आलाकमानों के बड्डे याद कराना नहीं भूलते नेता'जी' लोग।

CBI की गिरती साख: कब तक होती रहेगी केंद्रीय एजेंसियों की फ़ज़ीहत

आज आवश्यकता है एक ऐसी एजेंसी की जो आंतरिक सुरक्षा, भ्रष्टाचार की जाँच, इंटेलिजेंस एकत्र करना और आतंकवाद इन सभी ज़िम्मेदारियों को पूर्ण स्वायत्ता के साथ संभाल सके।

BJP के संकटमोचक: बड़ी से बड़ी समस्याओं को यूँ काबू में कर लेते हैं मृदुभाषी फडणवीस

भाजपा में एक ऐसे नए संकटमोचक का उदय हुआ है, जो ढोल पीटना नहीं जानता, अपने गुणगानों का बखान करना नहीं जानता, तेज़ आवाज में नहीं बोलता, लेकिन फिर भी जनता उसकी भाषा समझती है और वो जनता की।

सत्ता की वासना में जब नौकरशाही की निष्ठा शीघ्रपतित होती है तो लोग शाह फ़ैसल बन जाते हैं

वो कहते हैं कि उन्हें दुःख है कि कश्मीरियों की हत्या हो रही है और केंद्र सरकार कुछ नहीं कर रही है। देश के विरुद्ध खुली यलगार करने वाले पत्थरबाजों से उन्हें सहानुभूति हो जाती है। अलगाववादी नेताओं में उन्हें लीजेंड नज़र आने लगता है।

मक़बूल शेरवानी: कश्मीर के रखवाले मुस्लिमों की कहानी (भाग 2)

मक़बूल शेरवानी के इस कृत्य को आज भी याद किया जाता है और बारामुला में भारतीय सेना ने उसका स्मारक भी बनवाया है। प्रसिद्ध उपन्यासकार मुल्कराज आनंद मक़बूल शेरवानी से इतने प्रभावित हुए थे कि उन्होंने उसके ऊपर एक उपन्यास लिखा जिसका शीर्षक था: Death of a Hero.

इशरत मुनीर: कश्मीर के रखवाले मुस्लिमों की कहानी (भाग 1)

अपनी मौत से पहले कश्मीर की बेटी इशरत मुनीर मिट्टी का क़र्ज़ अदा कर चुकी थी। कश्मीर को बचाने वालों में इशरत अकेली नहीं थी। सत्तर वर्षों से घाटी के राष्ट्रवादी मुस्लिमों ने कश्मीर में पाकिस्तान प्रायोजित आतंक को परास्त करने में भूमिका निभाई है।

सेकुलर भारत के राष्ट्रपति भवन में ‘मुग़ल गार्डन’: ग़ुलामी के प्रतीकों पर गर्व करने वाली अकेली प्रजाति

गार्डन का नाम 'कलाम गार्डन' कर दो जो कि एक आदर्श नागरिक थे, भारत रत्न थे। आक्रांताओं के नाम पर गार्डन! आतंकियों, लुटेरों, बलात्कारियों, हत्यारों, नरसंहारकों, मूर्तिभंजकों, आतताइयों, धर्मांध अत्याचारियों आदि के नाम से कुछ भी है ही क्यों इस देश में?

क्या पोप और इमाम की चुम्मी से ज़मीनी स्तर पर सुधरेगी हालत?

अगर पोप और शीर्ष इमाम के बीच का चुम्मा-बंधन पूरा हो तो पोप को हिन्दू मंदिरों पर ईसाई कट्टरवादियों द्वारा किए जा हमले और ननों के यौन शोषण पर भी चुप्पी तोड़नी चाहिए।

बजट 2019 की कहानी, राधा मोहन सिंह की जुबानी

बजट 2019 क्यों है 'किसानों का बजट'? समझें केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री राधा मोहन सिंह के शब्दों में। बजट 2019 (कृषि सेक्टर) का केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा विस्तृत विश्लेषण।

शारदा चिट फंड: यह तो बस एक झाँकी है, TMC पर 3 बड़े घोटालों की फाँस बाकी है

सत्ता में बने रहने के लिए ममता बनर्जी राहुल या अन्य विपक्षी पार्टियों का साथ चाह रही हैं जबकि वे सत्ता में आने के लिए। ऐसे में चुनाव बाद समीकरण किसके पक्ष में होगा, कौन किसको आँखें दिखाएगा - कहना मुश्किल है।

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